पटना। बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों को लेकर एक बार फिर सरकार ने सक्रिय रुख अपनाया है। विधानसभा में यह मुद्दा उठने के बाद मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि राज्य की सभी बंद चीनी मिलों को जल्द से जल्द चालू कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। मुख्यमंत्री के इस आदेश को उद्योग और कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चीनी मिलों के बंद रहने से न केवल किसानों को नुकसान होता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी प्रभावित होते हैं। ऐसे में सरकार का प्रयास है कि बंद पड़ी मिलों को पुनर्जीवित कर राज्य के आर्थिक विकास को नई गति दी जाए।

किन-किन जिलों की चीनी मिलें हैं बंद

वर्तमान में राज्य के कई जिलों में चीनी मिलें बंद पड़ी हैं। इनमें प्रमुख रूप से—

  • पश्चिम चम्पारण जिले के चनपटिया
  • पूर्वी चम्पारण जिले के बाराचकिया एवं मोतिहारी
  • गोपालगंज जिले के सासामूसा
  • सारण जिले के मढ़ौरा
  • मुजफ्फरपुर जिले के मोतीपुर
  • समस्तीपुर जिले के समस्तीपुर
  • दरभंगा जिले के सकरी एवं रैयाम

इन मिलों के बंद रहने से गन्ना उत्पादक किसानों को अपनी उपज दूसरे जिलों या राज्यों में भेजनी पड़ती है, जिससे परिवहन लागत बढ़ती है और समय पर भुगतान में भी कठिनाई आती है।

सासामूसा से होगी शुरुआत

सरकार की पहल के तहत गोपालगंज जिले की सासामूसा चीनी मिल को जल्द शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसे एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बाकी मिलों के संचालन की दिशा में भी शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

किसानों और युवाओं को मिलेगा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बंद चीनी मिलें दोबारा चालू होती हैं, तो इससे—

  •  गन्ना किसानों को स्थानीय स्तर पर बाजार उपलब्ध होगा
  •  भुगतान प्रक्रिया में सुधार आएगा
  •  हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा
  • स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी

बिहार कभी चीनी उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में गिना जाता था। यदि सरकार की यह पहल सफल होती है, तो राज्य एक बार फिर चीनी उद्योग में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है।

सरकार की प्राथमिकता में उद्योग पुनर्जीवन

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक बाधाओं की समीक्षा कर शीघ्र समाधान निकाला जाए। सरकार का लक्ष्य है कि बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों को पुनर्जीवित कर राज्य में निवेश और रोजगार का माहौल मजबूत किया जाए।

चीनी मिलों को पुनः चालू करने का यह कदम न केवल कृषि आधारित उद्योग को सशक्त करेगा, बल्कि बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

Rajnish Pandey
A media professional with experience in print and digital journalism, handling news editing and content management with a focus on accuracy and responsible reporting.

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