• बिहार के छोटे से गांव का युवा बना अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की आवाज,
  • शिक्षा को बताया सामाजिक परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत

छपरा, 22 जनवरी (विशेष रिपोर्ट): बिहार की मिट्टी में जन्मे और सीमित संसाधनों में पले-बढ़े नीरज कुमार सिंह ने यह साबित कर दिया है कि अगर सोच बड़ी हो, लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो, तो गांव की गलियों से निकलकर भी वैश्विक मंच तक पहुंचा जा सकता है। सारण जिले के पानापुर प्रखंड अंतर्गत गंडक दियारा क्षेत्र के पकड़ी नरोत्तम गांव के सतजोड़ा बाजार निवासी नीरज कुमार सिंह आज न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुके हैं।

एक साधारण ग्रामीण परिवार में जन्मे नीरज, पिता प्रमोद सिंह और माता गीता देवी के सपूत हैं। बचपन से ही उन्होंने शिक्षा को अपने जीवन का सबसे मजबूत आधार माना। उनका दृढ़ विश्वास रहा है कि शिक्षा समाज को बदलने का सबसे सशक्त माध्यम है, और इसी सोच ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

अमेरिका में भारत की दमदार मौजूदगी

हाल ही में नीरज कुमार सिंह ने अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी स्थित मैरियट मार्क्विस होटल में आयोजित SSWR 2026 वार्षिक सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में दुनिया भर से शिक्षा, सामाजिक कार्य, शोध और नीति निर्माण से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए। सम्मेलन के दौरान सामाजिक विकास, नई वैश्विक चुनौतियों और शोध आधारित समाधानों पर गहन चर्चा हुई, जिसमें नीरज के विचारों को विशेष सराहना मिली। उनकी प्रस्तुति ने यह दिखाया कि भारत का युवा वैश्विक विमर्श में कितनी मजबूती से अपनी बात रख सकता है।

12 देशों में सामाजिक और शैक्षणिक नेतृत्व

नीरज कुमार सिंह अब तक 12 देशों में, जिनमें 10 दक्षिण एशियाई देश शामिल हैं, शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़ी परियोजनाओं का नेतृत्व कर चुके हैं। उनका मुख्य फोकस शिक्षा की समान पहुंच, युवाओं का सशक्तिकरण और नीति स्तर पर बदलाव लाना रहा है।

उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, एमआईटी, यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो और CSWE 2025 जैसे विश्व के प्रतिष्ठित मंचों पर अपने शोध, अनुभव और जमीनी कार्यों को साझा किया है।

शैक्षणिक सफर भी उतना ही प्रेरणादायक

नीरज का शैक्षणिक जीवन उनकी संघर्षगाथा का अहम हिस्सा है।

  • बी.एससी. के बाद उन्होंने राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान से सामाजिक कार्य में मास्टर डिग्री प्राप्त की।
  • इसके पश्चात टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई से डिप्लोमा किया।
  • आगे चलकर उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया (Penn GSE), अमेरिका से इंटरनेशनल एजुकेशनल डेवलपमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की, जहां उन्होंने शिक्षा नीति, समानता और वैश्विक शिक्षा पर गहन अध्ययन किया।

संयुक्त राष्ट्र से लेकर जमीनी स्तर तक योगदान

नीरज कुमार सिंह ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क में यूथ डेलीगेट के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश का मान बढ़ाया। वर्तमान में वे ‘द सोशल वर्क नेबरहुड’, यूएसए में मेंटोर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे नई पीढ़ी के सामाजिक कार्यकर्ताओं को दिशा और मार्गदर्शन दे रहे हैं।

अब तक वे 100 से अधिक परियोजनाओं और 50 से ज्यादा NGO, सरकारी विभागों व अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं।

कोविड काल में भी निभाई अहम भूमिका

कोविड-19 महामारी के दौरान नीरज कुमार सिंह ने USAID की MRITE परियोजना के तहत उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके प्रयासों से 25 लाख से अधिक लोगों तक टीकाकरण से जुड़ी सहायता पहुंचाई गई, जो उनके सामाजिक सरोकार और जिम्मेदारी को दर्शाता है।

युवाओं के लिए संदेश

नीरज कुमार सिंह की जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि शिक्षा, मेहनत और समाज के प्रति समर्पण साथ हो, तो सफलता की कोई सीमा नहीं होती। गंडक दियारा के छोटे से गांव से निकलकर वैश्विक मंच तक पहुंचने वाले नीरज आज सचमुच बिहार का लाल और भारत की शान बन चुके हैं।

Rajnish Pandey
A media professional with experience in print and digital journalism, handling news editing and content management with a focus on accuracy and responsible reporting.

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