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उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में ‘द केरल स्टोरी’ पर लगा प्रतिबंध हटाया

नई दिल्ली, 18 मई : उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में ‘द केरल स्टोरी’ के प्रदर्शन पर प्रदेश सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को बृहस्पतिवार को हुई सुनवाई के दौरान हटाने का आदेश दिया।

न्यायालय ने तमिलनाडु से फिल्म देखने जाने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। थियेटर मालिकों ने सुरक्षा चिंताओं के कारण फिल्म का प्रदर्शन रोकने का फैसला किया था।

प्रधान न्यायाधीश डी.वाई.चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने ‘द केरल स्टोरी’ के निर्माता से 20 मई को शाम पांच बजे तक फिल्म में 32,000 हिंदू एवं ईसाई महिलाओं के इस्लाम में धर्मांतरण के दावों पर ‘डिस्क्लेमर’ देने को कहा।

शीर्ष अदालत के अनुसार डिस्क्लेमर में यह कहा जाना चाहिए कि “धर्मांतरण के आंकड़े पर सुझाव का समर्थन करने के लिए कोई प्रमाणित आंकड़ा नहीं है और फिल्म काल्पनिक संस्करण का प्रतिनिधित्व करती है।”

न्यायालय ने साथ ही कहा कि फिल्म को मिले प्रमाण-पत्र को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर निर्णय के लिये कार्यवाही से पहले वह ‘द केरल स्टोरी’ देखना चाहेगा।

पीठ फिल्म को सीबीएफसी प्रमाणपत्र दिए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जुलाई के दूसरे हफ्ते में सुनवाई करेगी। पीठ में न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला भी शामिल हैं।

पीठ ने इन दलीलों का भी संज्ञान लिया कि तमिलनाडु में फिल्म पर कोई प्रतिबंध नहीं है और राज्य सरकार से फिल्म देखने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा।

न्यायालय ने कहा कि कानून का इस्तेमाल “सार्वजनिक असहिष्णुता को बढ़ावा देने” के लिए नहीं किया जा सकता है।

फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से प्रमाण-पत्र प्राप्त है और कानून-व्यवस्था बरकरार रखना प्रदेश सरकार का दायित्व है।

पीठ ने कहा, “खराब फिल्में बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलती हैं।”

न्यायालय ने कहा, “कानून का इस्तेमाल सार्वजनिक असहिष्णुता को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जा सकता है, वरना सभी फिल्मों को लेकर ऐसी ही स्थिति पैदा होगी।”

फिल्म के निर्माता की तरफ से न्यायालय में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि फिल्म को (सीबीएफसी से) प्रमाण-पत्र दिए जाने को लेकर राज्य अपील नहीं कर सकते।

साल्वे ने कहा कि किसी ने भी फिल्म को प्रमाणन दिए जाने के खिलाफ कोई वैधानिक अपील दायर नहीं की है और अपनी दलीलों को पुष्ट करने के लिए निर्णयों का हवाला दिया कि यह माना गया था कि सर्वोच्च न्यायालय सीबीएफसी प्रमाणीकरण पर अपील को लेकर सुनवाई नहीं कर सकता है।

शीर्ष अदालत फिल्म को लेकर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। निर्माता ने जहां पश्चिम बंगाल में इसके प्रदर्शन पर प्रतिबंध और तमिलनाडु में थिएटर मालिकों द्वारा राज्य में फिल्म नहीं दिखाने के फैसले को चुनौती दी है वहीं पत्रकार कुर्बान अली ने केरल उच्च न्यायालय के फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार करने के आदेश को चुनौती दी है।

अदा शर्मा की मुख्य भूमिका वाली ‘द केरल स्टोरी’ पांच मई को रिलीज हुई थी। फिल्म का निर्देशन सुदीप्तो सेन ने किया है। फिल्म दावा करती है कि केरल में महिलाओं को इस्लाम अपनाने के लिये बाध्य किया गया और आतंकी समूह इस्लामिक स्टेट (आईएस) द्वारा उनकी भर्ती की गई।

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