यूपी के 75 जिलों में होगी रामायण कार्यशालाएं, समर कैंप में बच्चे सीखेंगे वेद पाठन

लखनऊ, 13 मई : अयोध्या स्थित अंतरराष्ट्रीय रामायण और वैदिक शोध संस्थान गर्मी की छुट्टियों के दौरान बच्चों को भारतीय संस्कृति से रचनात्मक रूप से जोड़ने के लिए राज्य के सभी 75 जिलों में रामायण कार्यशालाएं आयोजित करेगा। प्रदेश के संस्कृति और पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम ने मंगलवार को न्यूज़ एजेंसी से कहा, “शिविर 15 मई से शुरू होने की संभावना है। रामायण पर शिविर आयोजित करने का उद्देश्य खासकर गर्मी की छुट्टियों के दौरान बच्चों को भारतीय संस्कृति से रचनात्मक रूप से जोड़ना है।” अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के निदेशक संतोष कुमार शर्मा ने सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पांच मई को लिखे पत्र में कहा, “अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान अयोध्या ने प्रस्ताव दिया है कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में रामायण और वेदों के प्रति रुचि पर ग्रीष्मकालीन शिविर आयोजित किया जाए।” पत्र के मुताबिक शिविर में रामलीला, श्रीरामचरित मानस गायन और पाठ, रामायण चित्रकला, मुखौटे, रामायण क्ले मॉडलिंग, ‘रामायण फेस आर्ट’, वेद गायन और वैदिक सामान्य ज्ञान पर कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। शिविर की अवधि पांच से 10 दिन है। पत्र में कहा गया है कि शिविर बच्चों में भारतीय संस्कृति के मूल्यों को विकसित करेगा और कला के प्रति दिलचस्पी जगाएगा।

संघर्ष समिति का पावर कारपोरेशन प्रबन्धन के सामने व्यापक प्रस्ताव, मई को होगी अगली बैठक

वित्त मंत्री के साथ हुए समझौते का पालन कर बिजली कर्मियों को विश्वास में लेकर सुधार कार्यक्रम चलाये जाये  निजीकरण का विफल प्रयोग उप्र पर न थोपा जाये पावर कारपोरेशन प्रबन्धन के सामने पीपीटी प्रेजेन्टेशन के माध्यम से संघर्ष समिति ने सुधार के व्यापक प्रस्ताव रखे  उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त करने हेतु 14 मई को अगली बैठक  उत्तरप्रदेश/लखनऊ, 12 मई: पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल और शीर्ष प्रबन्धन के साथ आज हुई लम्बी वार्ता में संघर्ष समिति ने एक घण्टे से अधिक के पीपीटी प्रेजेन्टेशन द्वारा यह बताया कि निजीकरण का प्रयोग आगरा, ग्रेटर नोएडा और उड़ीसा में पूरी तरफ विफल हो चुका है। अतः निजीकरण के इस विफल प्रयोग को उप्र की गरीब जनता पर न थोपा जाये। संघर्ष समिति ने कहा कि 06 अक्टूबर 2020 को वित्त मंत्री मा. श्री सुरेश खन्ना एवं तत्कालीन ऊर्जा मंत्री मा. श्री श्रीकान्त शर्मा के साथ हुए समझौते का पालन करते हुए बिजली कर्मियों को विश्वास में लेकर विद्युत वितरण निगमों की मौजूदा व्यवस्था में ही सुधार कार्यक्रम चलाये जायें। इस हेतु संघर्ष समिति ने वित्त मंत्री के सामने रखे गये सुधार प्रस्ताव को प्रबन्धन को देते हुए कहा कि निजीकरण का निर्णय वापस लेकर इस प्रस्ताव पर प्रबन्धन को तत्काल आगे वार्ता शुरू करनी चाहिए। संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि वार्ता का समुचित वातावरण बनाने हेतु आन्दोलन के कारण की गयी समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां तत्काल वापस ली जायें। संघर्ष समिति ने कहा कि मा. वित्त मंत्री श्री सुरेश खन्ना जी ने वार्ता के दौरान संघर्ष समिति द्वारा दिये गये सुधार प्रस्ताव की सराहना करते हुए यह निर्देश दिया था कि संघर्ष समिति के साथ प्रस्ताव पर वार्ता कर सुधार हेतु उनका सहयोग लिया जाये। वार्ता में उपस्थित तत्कालीन मुख्य सचिव श्री आर के तिवारी ने भी संघर्ष समिति के प्रस्ताव की प्रशंसा की थी। अत्यन्त दुर्भाग्य का विषय है कि आज तक उसके बाद एक बार भी सुधार प्र्रस्ताव पर वार्ता नहीं की गयी और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का एकतरफा निर्णय थोप दिया गया जो बिजली कर्मियों को कदापि स्वीकार नहीं है। संघर्ष समिति ने कहा कि अब समय आ गया है कि प्रबन्धन सुधार प्र्रस्ताव पर बिजली कर्मियों का सहयोग लेकर सुधार करें और निजीकरण का निर्णय वापस लिया जाये। संघर्ष समिति ने प्रेजेन्टेशन के माध्यम से प्रबन्धन को बताया कि 05 अप्रैल 2018 और 06 अक्टूबर 2020 को मा. मंत्रियों के साथ हुए समझौते में स्पष्ट लिखा है कि ‘‘बिजली कर्मियों को विश्वास में लिये बिना उप्र में ऊर्जा क्षेत्र में कहीं पर भी किसी भी प्रकार का निजीकरण नहीं किया जायेगा’’। अतः मा. मंत्रियों के साथ हुए समझौते का पालन करते हुए निजीकरण का निर्णय तत्काल वापस लिया जाये। संघर्ष समिति ने 19 मार्च 2023 को मा. ऊर्जा मंत्री द्वारा की गयी घोषणा के अनुपालन में आन्दोलन के कारण की गयी समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस लेने की मांग की। पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन ने उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के वापस लेने पर 14 मई को पुनः एक विस्तृत बैठक करने को कहा। प्रबन्धन ने संघर्ष समिति द्वारा दिये गये पीपीटी प्रेजेन्टेशन की सराहना की और कहा कि इसका विस्तृत अध्ययन कर आगे वार्ता की जायेगी। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र द्वारा दिये गये पीपीटी प्रेजेन्टेशन में ऊर्जा निगमों में घाटे के लिए अनेक बिन्दु गिनाये गये। मुख्यतया बहुत मंहगे बिजली खरीद करार और सरकारी विभागों का राजस्व बकाया घाटे के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार ठहराया गया। प्रेजेन्टेशन के अनुसार विद्युत उत्पादन निगम से विद्युत वितरण निगमों को रू 4.17 प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है। सेण्ट्रल सेक्टर से औसतन रू 4.78 प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलती है। निजी घरानों से रू 5.45 प्रति यूनिट की दर से तथा शॉर्ट टर्म पॉवर परचेज के माध्यम से रू 7.31 प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदी जा रही है। अन्य माध्यमों से रू 14.204 प्रति यूनिट की दर तक बिजली खरीदी जा रही है। संघर्ष समिति ने बताया कि उपरोक्त मंहगी बिजली क्रय करारों से विद्युत वितरण निगमों को उत्पादन निगम की तुलना में लगभग रू 9521 करोड़ का अधिक भुगतान करना पड़ रहा है। प्रेजेन्टेशन के जरिये यह भी बताया गया कि ऐसे कई बिजली क्रय करार हैं जिनसे वर्ष 2024-25 में एक यूनिट भी बिजली नहीं खरीदी गयी किन्तु लगभग रू 6761 करोड़ का भुगतान करना पड़ा। इस प्रकार मात्र मंहगे बिजली क्रय करारों के चलते विद्युत वितरण निगमों को कुल लगभग रू 16282 करोड़ रूपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है जो घाटे का एक सबसे बड़ा कारण है, जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबन्धन की है। प्रेजेन्टेशन में यह बताया गया कि वर्तमान में सरकारी विभागों पर लगभग रू 14 हजार करोड़ बिजली राजस्व का बकाया है। यह धनराशि सभी विद्युत वितरण कम्पनियों के पॉवर कारपोरेशन द्वारा दर्शाये गये वार्षिक घाटे से कहीं अधिक है। संघर्ष समिति ने कहा कि यदि बहुत मंहगे बिजली खरीद करार रद्द कर दिये जायें और सरकारी विभागों का बिजली राजस्व का बकाया मिल जाये तो विद्युत वितरण निगम मुनाफे में आ जायेंगे और घाटे के नाम पर किसी निजीकरण की आवश्यकता नहीं होगी। संघर्ष समिति ने राजस्व वसूली में कानून व्यवस्था को सबसे बड़ी बाधा बताया। संघर्ष समिति ने कहा कि राजस्व वसूली के दौरान मार-पीट होने पर पॉवर कारपोरेशन के शीर्ष प्रबन्धन और जिला प्रशासन से अधिकांशतया समय पर मदद नहीं मिलती। संघर्ष समिति ने बिजली के इन्फ्रास्ट्रचर से कई हजार करोड़ रूपये की नॉन टैरिफ आय के कई सुझाव दिये। उदाहरण के तौर पर सब स्टेशनों पर चार्जिंग स्टेशन की स्थापना, खम्भों पर टेण्डर के जरिये नॉन टैरिफ इनकम, अनुपयोगी जमीनों पर लीज के माध्यम से वाणिज्यिक गतिविधियां, बैटरी स्टोरेज की स्थापना तथा अनुपयोगी जमीनों और छतों पर सोलर पैनल की स्थापना आदि कई सुझाव दिये गये। संघर्ष समिति ने उप्र में आगरा और ग्रेटर नोएडा में चल रहे निजीकरण के प्रयोग को आकड़े देकर यह साबित कर दिया कि निजीकरण पॉवर कारपोरेशन के लिए घाटे का सौदा है। आगरा में निजीकरण से पॉवर कारपोरेशन को प्रति वर्ष लगभग एक हजार करोड़ रूपये का नुकसान हो रहा है। वार्ता में प्रबन्धन की ओर से पावॅर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल, प्रबन्ध निदेशक पंकज

हर पीड़ित की समस्या का समाधान सरकार की प्राथमिकता: योगी

गोरखपुर, 12 मई : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में रात्रि प्रवास के बाद सोमवार सुबह जनता दर्शन में करीब 150 लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और इन समस्याओंके समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि हर पीड़ित की समस्या का समाधान सरकार की प्राथमिकता है लिहाजा हर समस्या को संवेदनशीलता से देखा जाएगा तथा जरूरी कदम उठाए जाएं। आज सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने आयोजित जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री योगी कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक खुद पहुंचे। एक-एक कर और इत्मीनान से सबकी समस्याएं सुनीं। उन्हें आश्वस्त किया कि वह सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कराएंगे। उन्होंने कहा कि किसी को भी घबराने या परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। प्रार्थना पत्रों को उन्होंने अधिकारियों को हस्तगत करते हुए निर्देश दिया कि हर समस्या का निस्तारण त्वरितए गुणवत्तापूर्ण और संतुष्टिप्रद होना चाहिए। कुछ लोगों द्वारा जमीन कब्जाने की शिकायत पर उन्होंने कठोर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अफसरों को यह निर्देश भी दिए कि यदि किसी प्रकरण में पीड़ित को लगातार परेशानी कासामना करना पड़ा है तो इसकी भी जांच कर जवाबदेही तय की जाए। इस दौरान आवास की गुहार लेकर तथा इलाज में सहायता की मांग को लेकर पहुंचे लोगों को उन्होंने आश्वस्त किया और अधिकारियों से कहा कि आवास से वंचित लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहतआवास उपलब्ध कराया जाए एवं जरूरतमंदों के इलाज में धन की बाधा न आने दी जाए। जनता दर्शन में कुछ लोग इलाज में आर्थिक मदद मांगने पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने उनसे कहा कि इलाज में धन की कमी बाधक नहीं होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इलाज में अस्पताल के इस्टीमेट कीप्रक्रिया को जल्द पूर्ण कराकर शासन में भेजें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए पर्याप्त राशि दी जाएगी। जनता दर्शन में कुछ महिलाओं ने पक्के आवास की समस्या मुख्यमंत्री को बताई। इस पर योगी ने अधिकारियों से कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना में किन्हीं कारणों से जो भी पात्र लोग वंचित रह गए हैं, उन्हें योजना के दायरे में लाकर पक्का आवास उपलब्ध कराया जाए।

निजीकरण के विरोध में पावर कारपोरेशन के चेयरमैन से संघर्ष समिति की वार्ता 12 मई को

उत्तरप्रदेश/लखनऊ, 12 मई: पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति और पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन के मध्य बहुप्रतीक्षित वार्ता 12 मई को होगी। वार्ता के पहले संघर्ष समिति ने कहा है कि वार्ता का समुचित वातावरण बनाने हेतु पॉवर कारपोरश्ेन प्रबन्धन को निजीकरण के विरोध में चल रहे आन्दोलन के कारण की गयी समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस लेनी चाहिए। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के अन्तर्गत आने वाले 42 जनपदों के निजीकरण के एकतरफा फैसले के विरोध में बिजली कर्मचारी, संविदाकर्मी और अभियन्ता विगत 05 माह से अधिक समय से आन्दोलनरत हैं। लोकतांत्रिक ढंग से शांतिपूर्वक आन्दोलन करने वाले बिजली कर्मियों पर पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन ने इस दौरान कई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां की हैं। उन्होंने बताया कि बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों को नौकरी से हटाया गया है। निजीकरण के बाद निजी घरानों की मदद करने हेतु लगभग 45 प्रतिशत संविदा कर्मियों की छंटनी कर दी गयी है। इसी प्रकार 55 वर्ष की आयु के संविदा कर्मी हटा दिये गये हैं जबकि इनमें से अधिकांश संविदा कर्मी लाइन पर काम करते हुए अपंग हो चुके हैं। अत्यन्त अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों को निजी घरानों की मदद के लिए इस प्रकार हटाया जाना नितान्त अमानवीय और घोर उत्पीड़न है। उन्होंने बताया कि फेसियल अटेंडेंस के नाम पर लगभग 2000 बिजली कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया है। संघर्ष समिति की मीटिंग में आने वाले बिजली कर्मचारियों की फोटोग्राफी कर उन्हें चिन्हित करके स्थानान्तरण आदि उत्पीड़न की कार्यवाहियां की जा रही है। संघर्ष समिति ने बताया कि 19 मार्च 2023 को ऊर्जा मंत्री द्वारा की गयी घोषणा के अनुसार मार्च, 2023 के आन्दोलन के दौरान की गयी सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस की जानी थीं जो आज तक वापस नहीं की गयी हैं। मार्च 2023 के आन्दोलन के कारण बिजली कर्मियों पर अनुशासन की कार्यवाही चल रही है, स्टेट विजीलेंस की जांच करायी जा रही है और तरह-तरह का उत्पीड़ना जारी है। ऊर्जा मंत्री की घोषणा के बाद भी उत्पीड़न की कार्यवाहियां वापस न लिये जाने से अविश्वास का वातावरण बना है जिसे समाप्त करने हेतु तत्काल सभी उत्पीडनात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाये।

आतंकवाद कुत्ते की पूंछ, ब्रह्मोस ने दिया करारा जवाब: योगी आदित्यनाथ

लखनऊ, 11 मई : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नेकहा कि पाकिस्तान और आतंकवाद कुत्ते की पूंछ है जो कभी सीधी नहीं होने वाली। आतंकवाद को कुचलने के लिए हम सभी को मिलकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस अभियान से जुड़ना होगा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल के पराक्रम की एक झलक देखी होगी और अगर नहीं देखी तो पाकिस्तान के लोगों से ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत के बारे में पूछिए। हम आतंकवाद को पूरी तरह से कुचलने के लिए तैयार हैं और उसे उसकी ही भाषा में जवाब देंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां उप्र डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लखनऊ नोड पर दुनिया की सबसे विध्वंसक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की उत्पादन इकाई के शुभारंभ के मौके पर संबोधित कर रहे थे। नई दिल्ली से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वर्चुअली और लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संयुक्त रूप से ब्रह्मोस उत्पादन इकाई का शुभारंभ किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऐलान किया है कि आगे से आतंकवाद की कोई भी कार्रवाई युद्ध की कार्रवाई मानी जाएगी। जब तक हम इसे पूरी तरह से कुचल नहीं देते, आतंकवाद की समस्या का समाधान नहीं हो सकता। अब ऐसा हुआ तो प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पाकिस्तान में पल रहे आतंकवाद के खात्मे के लिए इससे बड़ा प्रहार होगा। योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब नई ऊंचाइयों को छू रहा है और यह रक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। योगी ने तीनों सेनाओं को ऑपरेशन सिंदूर में योगदान के लिए बधाई दी और कहा कि ब्रह्मोस मिसाइल अब लखनऊ में बनेगी। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में रक्षा क्षेत्र में सर्वांगीण विकास हो रहा है और इसमें 50 हजार करोड़ रुपये का निवेश लाने और एक करोड़ युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य है। यूपी को देश की सबसे बड़ी और तेज़ी से विकासशील इकोनॉमी बन रहा है। अब यूपी बीमारू राज्य नहीं रहा। यूपी में सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे और मेट्रो संचालित हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिफेंस कारीडोर के रूप में आज का दिन महत्वपूर्ण है। लखनऊ के अलावा छह डिफेंस कोरीडोर स्थापित हुए हैं। वर्ष 2019 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने घोषणा थी कि ब्रह्मोस मिसाइल के साथ डिफेंस मन्यूफैक्चरिंग में उप्र की भूमिका अहम होगी, आज उनकी बात पूरी हो रही है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस उत्पादन कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर 26 अभ्यर्थियों को यहां नियुक्ति दी गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांच ट्रेनी अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंप कर बधाई दी। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, औद्योगिक मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, सांसद बृजलाल, विधायक राजेश्वर सिंह, मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह के अलावा डीआरडीओ के सचिव व प्रोजेक्ट डायरेक्टर आदि उपस्थित रहे।

कंसल्टेंट द्वारा सभी वितरण निगमों का डाटा मांगने से निजीकरण को लेकर बिजली कर्मियों में गुस्सा बढ़ा, ग्रांट थॉर्टन की नियुक्ति रद्द करने की मांग

उत्तरप्रदेश/ लखनऊ, 10 मई: अवैध ढंग से नियुक्त किए गए कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन द्वारा पॉवर कारपोरेशन से सभी विद्युत वितरण निगमों का पांच साल का डाटा मांगने से बिजली कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा है। ध्यान रहे कि विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने सीमा पर युद्ध की स्थिति को देखते हुए आगामी 14 मई तक कोई आन्दोलन न करने का कल ऐलान किया था और उम्मीद जताई थी कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन भी युद्ध की स्थिति को देखते हुए टकराव टालने हेतु निजीकरण की प्रक्रिया रद्द करेगा। किन्तु कंसल्टेंट द्वारा सभी वितरण निगमों का डाटा मांगने से स्पष्ट हो गया है कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन सभी विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण करने जा रहा है। सभी वितरण निगमों का डाटा मांगने का दस्तावेज सामने आने से बिजली कर्मियों में आक्रोश बढ़ गया है। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि अवैध ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन के एसोसिएट डायरेक्टर चन्दन चटर्जी ने मुख्य अभियन्ता रेवेन्यू अफेयर्स यूनिट को ई मेल भेजकर कहा है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के 31 मार्च तक विगत पांच वर्षों का डाटा उपलब्ध कराए। संघर्ष समिति ने कहा कि पॉवर कारपोरेशन ने ग्रांट थॉर्टन को पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु आर एफ पी डॉक्यूमेंट तैयार करने के लिए अवैध ढंग से ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट नियुक्त किया है। किन्तु नियुक्त किए गए कंसलटेंट द्वारा केवल पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का डाटा मांगने के बजाय सभी विद्युत वितरण निगमों का डाटा मांगा गया है इससे स्पष्ट हो जाता है कि पॉवर कारपोरेशन का निर्णय सभी विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण करने का है। इस बात के उजागर होने से बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है। संघर्ष समिति ने कहा कि सीमा पर युद्ध की स्थिति को देखते हुए संघर्ष समिति ने क्रमिक अनशन के समापन के दिन कहा था कि फिलहाल बिजली कर्मी आगामी 14 मई तक कोई आन्दोलन नहीं करेंगे किन्तु ग्रांट थॉर्टन और पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन की सभी वितरण निगमों के निजीकरण की मिली भगत सामने आने से स्थिति बहुत गम्भीर हो गई है। संघर्ष समिति ने मांग की है कि झूठा शपथ पत्र देने वाले और फर्जीवाड़ा करने वाले कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन की नियुक्ति तत्काल निरस्त कर उसके विरुद्ध एफ आई आर दर्ज की जाय। संघर्ष समिति ने सभी वितरण निगमों के निजीकरण का दस्तावेज सामने आने के बाद अभियंताओं और कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि अवैध ढंग से नियुक्त कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन को कोई भी पत्रावली या डाटा न उपलब्ध कराया जाए। संघर्ष समिति ने कहा कि उम्मीद की जा रही थी कि संघर्ष समिति द्वारा 14 मई तक कोई आन्दोलन न करने के निर्णय के बाद पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन भी निजीकरण की प्रक्रिया रद्द कर कार्य का स्वस्थ वातावरण मनाएगा। किन्तु इसका उल्टा हो रहा है जिसकी तीखी प्रतिक्रिया स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि सीमाओं पर संकट के समय पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन स्थिति को बिगड़ने के लिए जिम्मेदार है।

निजीकरण के विरोध में सात दिवसीय क्रमिक अनशन कार्यक्रम सम्पन्न

युद्ध की स्थिति को देखते हुए 14 मई तक कोई आन्दोलन नहीं प्रबन्धन निजीकरण का निर्णय निरस्त कर कार्य का वातावरण बनाए उत्तरप्रदेश/ लखनऊ, 9 मई: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने सीमाओं पर युद्ध की स्थिति को देखते हुए 14 मई तक कोई आन्दोलन न करने का निर्णय लिया है। संघर्ष समिति ने प्रबन्धन से भी कहा है कि युद्ध की स्थिति को देखते हुए वह भी निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की कार्यवाही करे जिससे कार्य का स्वस्थ वातावरण बन सके। सात दिवसीय क्रमिक अनशन का कार्यक्रम आज प्रातः 10ः00 बजे संपन्न हो गया। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि सीमाओं पर युद्ध की परिस्थितियों को देखते हुए संघर्ष समिति ने क्रमिक अनशन कार्यक्रम संपन्न होने के बाद फिलहाल 14 मई तक कोई आंदोलन न करने का निर्णय लिया है। संघर्ष समिति ने युद्ध के दौरान केंद्र और राज्य सरकार के प्रति पूरा समर्थन व्यक्त करते हुए आशा व्यक्ति की है कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन भी निजीकरण की कार्यवाही निरस्त करेगा और युद्ध के दौरान कार्य का स्वस्थ वातावरण निर्मित करेगा। संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय वापस लिया जाए तो बिजली कर्मचारी और अभियंता पहले की तरह पूरी तरह से सहयोग कर युद्ध के दौरान भीषण गर्मियों में बिजली की व्यवस्था पूरी तरह सामान्य बनाए रखने की चुनौती को स्वीकार करते हैं। 02 मई से चल रहे सात दिवसीय क्रमिक अनशन का कार्यक्रम आज प्रातः 10ः00 बजे संपन्न हो गया। क्रमिक अनशन के दौरान लगभग 1000 से अधिक बिजली कर्मचारी और अभियंता क्रमिक अनशन पर बैठे। इस दौरान अनशनकारियों के समर्थन में लगभग 2000 से अधिक बिजली कर्मी सम्मिलित हुए। सबसे प्रमुख बात यह रही कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारियों के समर्थन में उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उड़ीसा, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु के बिजली कर्मी और अभियंता अनशन में शामिल हुए। क्रमिक अनशन के बावजूद राष्ट्रीय भावना से ओत प्रोत बिजली कर्मियों ने 07 मई को तिरंगा रैली निकाली और आज समापन के समय राष्ट्रीय ध्वज लेकर राष्ट्रगान के साथ क्रमिक अनशन समाप्त किया।

उत्तरप्रदेश: निजीकरण के विरोध में क्रमिक अनशन तीसरे दिन जारी

निजीकरण में चल रहे भ्रष्टाचार के पीछे कारपोरेट घरानों से मिलीभगत का आरोप सोमवार को अपने घरों की बिजली एक घंटा बन्द कर सांकेतिक विरोध करेंगे बिजली कर्मी  उत्तरप्रदेश, 04 मई: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि 42 जनपदों के निजीकरण में भारी भ्रष्टाचार हो रहा है । झूठा शपथ पत्र देने वाले कंसलटेंट की फाइल जिस प्रकार चेयरमैन ने दबा रखी है उससे लगता है कि भ्रष्टाचार में पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन की कार्पोरेट घरानों से मिली भगत है। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि निजीकरण में भारी भ्रष्टाचार हो रहा है। निजीकरण हेतु नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन का फर्जीवाडा सामने आए हुए एक माह होने जा रहा है किन्तु कंसल्टेंट को ब्लैक लिस्ट करने और उसकी नियुक्ति का आदेश रद्द करने के बजाय पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन फाइल दबाए बैठे हैं और ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी पूरे प्रकरण के सार्वजनिक होने के बाद भी चुप्पी साधे हुए हैं। इससे मिलीभगत का संदेश जा रहा है। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि निजीकरण में चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों का प्रतिदिन पर्दाफाश किया जाएगा। संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में बिजली उपभोक्ताओं का लगभग 66 हजार करोड़ रुपए का बिजली राजस्व का बकाया है। निजी घरानों की इस बड़ी धनराशि पर नजर है। उन्होंने कहा कि 01 अप्रैल, 2010 को आगरा शहर की बिजली व्यवस्था टोरेंट पावर कंपनी को दी गई थी। उस समय आगरा शहर में बिजली उपभोक्ताओं का लगभग 2200 करोड़ का बिजली राजस्व का बकाया था। आज 15 साल व्यतीत हो चुके हैं और टोरेंट पावर कंपनी ने एक पैसा भी पावर कारपोरेशन को वापस नहीं किया है। यह 2200 करोड़ रुपए की पूरी धनराशि टोरेंट पावर कंपनी ने हड़प लिया है और पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन चुप्पी साधे हुए हैं। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बाद 66000 करोड रुपए की धनराशि निजी कंपनी की जेब में चली जाएगी। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह सहमति पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन और कार्पोरेट घरानों के बीच बन चुकी है कि निजीकरण के बाद यह धनराशि उन्हें मुफ्त में मिल जाएगी। संघर्ष समिति ने ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी से मांग की है कि वह आगरा में टोरेंट पावर द्वारा 2200 करोड रुपए की धनराशि हड़पने के मामले में सार्वजनिक वक्तव्य दें । संघर्ष समिति निजीकरण में हो रहे अन्य घोटाले को कल सार्वजनिक करेगी। आज उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने अनशन स्थल पर आकर निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों को प्रदेश के 03 करोड़ 45 लाख उपभोक्ताओं की ओर से खुला समर्थन दिया। आज अनशन के तीसरे दिन अनशन स्थल पर जितेन्द्र सिंह गुर्जर, जय प्रकाश, महेन्द्र राय, के एस रावत, रामचरण सिंह, राम निवास त्यागी, पी के दीक्षित, सरजू त्रिवेदी, आलोक सिन्हा, आर सी पाल आदि सहित 200 से अधिक बिजली कर्मी और अभियन्ता अनशन के समर्थन में उपस्थित हुए। संघर्ष समिति ने प्रदेश भर के बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं से अपील की है कि वे निजीकरण के विरोध में 05 मई को रात्रि 08 बजे से से 0 9 बजे अपने घरों की बिजली बन्द कर आम जनता को यह यह संदेश देंगे कि निजीकरण प्रदेश को लालटेन युग में ले जाने वाला है। निजीकरण के बाद बिजली की दरें तीन गुना बढ़ जाएंगी और आम जनता को बिजली बन्द कर लालटेन युग में जाना होगा।  क्रमिक अनशन के तीसरे दिन आज अभियन्ता संघ के अध्यक्ष संजय सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रभात सिंह, उपाध्यक्ष राहुल बाबू कटियार, राहुल सिंह, प्राविधिक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष चन्द्र भूषण उपाध्याय एवं महासचिव मोहम्मद वसीम, बिजली मजदूर संगठन के अध्यक्ष माया शंकर तिवारी, कार्यालय सहायक संघ के आशीष त्रिपाठी एवं आशीष भारती, प्राविधिक कर्मचारी संघ के पश्चिमांचल के अध्यक्ष कवितेंद्र बच्चन और 200 से अधिक अन्य बिजली कर्मी सम्मिलित हुए। आज संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे भी अनशन पर बैठे। 05 मई को वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, आजमगढ़, बस्ती, मिर्जापुर क्षेत्र के तथा लखनऊ नगर के बिजली कर्मी और अभियन्ता क्रमिक अनशन में सम्मिलित होंगे।

गरीब, अन्नदाता किसान, युवा और महिला उत्थान को समर्पित यूपी का बजट : योगी आदित्यनाथ

लखनऊ, 20 फरवरी: उत्तर प्रदेश सरकार का विधान सभा में बजट पेश होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 का यह बजट सनातन संस्कृति की सर्वे भवन्तु सुखिनः की अवधारणा के अनुरूप है। बजट गरीब, अन्नदाता किसान, युवा और महिला उत्थान को समर्पित है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विज़न को साकार करते हुए वंचित को वरीयता इस बजट का केंद्रीय भाव है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बजट का आकार 08 लाख 08 हजार 736 करोड़ रुपये से अधिक (8,08,736.06 करोड़ रुपये) का है। वर्ष 2024-25 के बजट के सापेक्ष इसमें 9.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उत्तर प्रदेश के बजट के आकार में यह बढ़ोत्तरी राज्य के सामर्थ्य के अनुरूप है। यह बजट अर्थव्यवस्था को विस्तार देने की डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कुल व्यय में 02 लाख 25 हजार 561 करोड़ 49 लाख रुपये कैपिटल एक्सपेंडिचर सम्मिलित है। वर्ष 2017-18 में प्रदेश की जीडीपी 12.89 लाख करोड़ रुपये थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 27.51 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। योगी ने कहा कि प्रदेश का राजकोषीय घाटा, सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 2.97 प्रतिशत है, जो भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा एफआरबीएम एक्ट में निर्धारित 3.5 प्रतिशत की सीमा से कम है। नीति आयोग द्वारा राज्यों की राजकोषीय स्थिति के सम्बन्ध में प्रकाशित रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश को फ्रण्ट रनर (अग्रणी) राज्य की श्रेणी में रखा गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018-19 से वर्ष 2022-23 की अवधि में प्रदेश के समेकित फिस्कल हेल्थ इण्डेक्स में 8.9 अंकों का इजाफा हुआ है। व्यय की गुणवत्ता में व्यापक सुधार हुआ है, वर्ष 2018 से 13 की अवधि में पूँजीगत व्यय, कुल व्यय के 14.8 प्रतिशत से 19.3 प्रतिशत के मध्य रहा। इस अवधि में यह अनुपात देश के प्रमुख राज्यों के औसत अनुपात से अधिक रहा। उन्होंने बताया कि विगत 08 वर्षों में बेरोजगारी की दर को नियंत्रित करने में सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रोजगार की सम्भावनाएं बढ़ीं हैं, नये रोजगार सृजित हुए हैं। लगातार प्रयासों के फलस्वरूप पिछले 08 वर्षों में प्रदेश को लगभग 45 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिसमें से 15 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव जमीन पर उतरे जा चुके हैं और 60 लाख नौकरियों के अवसर सृजित हुए हैं। बजट में व्यय की नई मदों हेतु 28 हजार 478 करोड़ 34 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। अवस्थापना विकास के लिये 01 लाख 79 हजार 131 करोड़ 04 लाख रुपये प्रस्तावित है जो कि कुल बजट का 22 प्रतिशत है। इसमें ऊर्जा क्षेत्र के लिये 61,070 करोड़ रुपये से अधिक, सिंचाई के लिये 21,340 करोड़ रुपये से अधिक, भारी एवं मध्यम उद्योग के लिये लगभग 24 हजार करोड़ रुपये, नगर विकास के लिये 25,308 करोड़ रुपये से अधिक, आवास एवं शहरी नियोजन के लिये 7,403 करोड़ रुपये से अधिक तथा नागरिक उड्डयन के लिये 3,152 करोड़ रुपये प्रस्तावित। उ्न्होंने बताया कि शिक्षा क्षेत्र के लिये 1,06,360 करोड़ रुपये से अधिक प्रस्तावित है, जो कि कुल बजट का 13 फीसदी है। शिक्षा पर इतना व्यय करने वाला उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्य है। कृषि क्षेत्र के अन्तर्गत कृषि, उद्यान, पशुधन, दुग्ध, मत्स्य, सहकारिता, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, नमामि गंगे तथा ग्रामीण जलापूर्ति के लिये कुल लगभग 89,353 करोड़ रुपये प्रस्तावित। यह कुल बजट का 11 प्रतिशत है। चिकित्सा क्षेत्र के अन्तर्गत चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, आयुष तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिये 50,550 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया है, जो कि कुल बजट का 6 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी होमगार्डस, पीआरडी जवान, ग्राम चौकीदार, शिक्षामित्र, बेसिक शिक्षा विभाग के अनुदेशक एवं मानदेय के आधार पर कार्य करने हेतु वाले कार्मिकों को मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान के अन्तर्गत 05 लाख रुपये तक की निःशुल्क चिकित्सा का लाभ दिया जाएगा। समाज कल्याण, जिसमें सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, दिव्यांगजन सशक्तिकरण, महिला एवं बाल कल्याण के लिये 35,863 करोड़ रुपये से अधिक की व्यवस्था की गई है। निर्धन व्यक्तियों की पुत्रियों के विवाह के लिये कुल 900 करोड़ रुपये की व्यवस्था है, जबकि सामाजिक पेंशन के लिये कुल 13,648 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा बजट में चार नये एक्सप्रेस-वेज के निर्माण का प्राविधान है। इसमें (1) आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे से गंगा एक्सप्रेस-वे कौसिया, जनपद हरदोई वाया फर्रुखाबाद तक प्रवेश नियंत्रित ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे (2) गंगा एक्सप्रेस-वे को प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी, चन्दौली होते हुए सोनभद्र से जोड़ते हुए विन्ध्य एक्सप्रेस-वे (3) मेरठ को हरिद्वार से जोड़ने हेतु गंगा एक्सप्रेस-वे विस्तारीकरण एक्सप्रेस-वे तथा (4) बुन्देलखण्ड रीवा एक्सप्रेस-वे के लिए बजटीय प्रावधान किया गया है। प्रयागराज में आवागमन को और सुगम बनाने के लिए एक शास्त्री ब्रिज के पैरलल और एक सिग्नेचर ब्रिज के पैरलल नये पुलों के निर्माण हेतु प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बजट मेंप्रदेश को आर्टिफिशियल इण्टेलीजेंस के क्षेत्र में एक हब के रूप में विकसित करने के लिए लखनऊ में आर्टिफिशियल इण्टेलीजेंस सिटी की स्थापना के साथ ही साइबर सिक्योरिटी में टेक्नोलॉजी रिसर्च ट्रांसलेशन पार्क की नई योजना बजट में शामिल किया गया है। सभी मण्डल मुख्यालयों पर विकास प्राधिकरणों, नगर निकायों द्वारा कन्वेंशन सेण्टर का निर्माण कराया जाएगा। ग्राम पंचायतों में वैवाहिक उत्सव एवं अन्य सामाजिक आयोजनों हेतु उत्सव भवन निर्माण की योजना पर कार्य होगा। दस जिलों में संत कबीर वस्त्रोद्योग पार्क स्थापित होंगे और संत रविदास के नाम पर लेदर पार्क भी स्थापित किये जायेंगे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म शताब्दी वर्ष में उनके सम्मान में नगरीय क्षेत्रों में पुस्तकालय की स्थापना के लिए भी प्रावधान हैं। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सरकारी विभागों तथा निगमों आदि में आउटसोर्सिंग के आधार पर कार्यरत कार्मिकों के देय न्यूनतम पारिश्रमिक को 16 हजार रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 18 हजार रुपये होगा। यह पारिश्रमिक सीधे एकाउंट में मिल सके, यह सुनिश्चित किया जाएगा। आउटसोर्सिंग प्रक्रिया को सुनियोजित और पारदर्शी बनाने के उद्देिश्य से सेवा निगम गठित किया जाएगा। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के 5-टी मंत्र ट्रेड, टूरिज्म, टेक्नोलोजी, ट्रेडिशन और टैलेंट को मन्त्र मानकर यह नया उत्तर प्रदेश आज श्रम शक्ति (लेबर फोर्स) से अर्थ शक्ति (इकॉमिक फोर्स) के रूप में पहचाना

महाकुम्भ से साकार हुई एक भारत श्रेष्ठ भारत की अवधारणा : आनंदीबेन

लखनऊ, 18 फरवरी: राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने मंगलवार को कहा कि प्रयागराज महाकुंभ से एक भारत,श्रेष्ठ भारत की अवधारणा साकार हुयी है। उत्तर प्रदेश राज्य विधान मण्डल के वर्ष 2025 के बजट सत्र के पहले दिन दोनों सदनों के समवेत अधिवेशन को संबोधित करते हुये उन्होने कहा कि योगी सरकार को इस वर्ष दिव्य एवं भव्य महाकुम्भ आयोजन का सौभाग्य प्राप्त हुआ है जिसमें स्वच्छता, सुरक्षा तथा सुव्यवस्था के नए मानक गढ़े गए हैं। महाकुम्भ में आस्था एवं आधुनिकता का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। राज्यपाल ने कहा कि यह आयोजन जहां एक ओर अनेकता में एकता को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर समता व समरसता का संदेश भी दे रहा है, जिससे ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा साकार हो रही है। अब तक लगभग 50 करोड़ से अधिक श्रद्धालुजन पावन त्रिवेणी में आस्था की पवित्र डुबकी लगा चुके हैं। उन्होने मौनी अमावस्या पर घटी दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर शोक प्रकट करते हुए कहा कि इससे हम सभी अत्यन्त दुःखी हैं। इसमें कुछ श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसमें से कुछ श्रद्धालुओं की दुःखद मृत्यु भी हो गई। असमय काल-कवलित हुए लोगों के प्रति उन्होंने विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की तथा शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। राज्यपाल ने इस बात का विशेष उल्लेख किया कि महाकुम्भ प्रयागराज 2025 के शुभ अवसर पर पावन त्रिवेणी तट पर 22 जनवरी को मंत्रिपरिषद् की ऐतिहासिक बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।