लखनऊ, 21 मई : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिव्यांग युवाओं के लिए संचालित शैक्षिक संस्थानों में प्रशासनिक तंत्र को संवेदनशील, सजग और सतर्क रहने की आवश्यकता पर बल दिया है। बुधवार को दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ अराजक तत्वों द्वारा सुनियोजित ढंग से दिव्यांगजनों के विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में भ्रम फैलाकर उन्हें अवांछित और समाजविरोधी गतिविधियों की ओर प्रवृत्त करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। ऐसी प्रवृत्तियों के प्रति हमें पूर्णतः सतर्क रहते हुए विद्यार्थियों की सुरक्षा और मानसिक-सामाजिक संरक्षण सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि इन संस्थानों में सहायता के नाम पर प्रस्ताव देने वाली बाहरी संस्थाओं की पृष्ठभूमि की गहन जांच-पड़ताल के उपरांत ही उनकी अनुमति दी जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी बचपन डे केयर सेंटरों, मानसिक मंदित आश्रय केंद्रों, समेकित विद्यालयों तथा ‘ममता’, ‘स्पर्श’ और ‘संकेत’ विद्यालयों का व्यापक निरीक्षण किया जाए। यहां अध्ययनरत बच्चों से संवाद स्थापित कर उनकी आवश्यकताओं, आकांक्षाओं और अभिभावकों की अपेक्षाओं को समझते हुए संस्थागत व्यवस्थाएं और अधिक सुदृढ़ की जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए और जब तक नियमित नियुक्ति न हो, तब तक अन्य वैकल्पिक व्यवस्था से योग्य युवाओं की सेवाएं ली जाएं। इन युवाओं को भविष्य की चयन प्रक्रियाओं में वेटेज प्रदान किया जाना चाहिए। बैठक में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की योजनाओं, उपलब्धियों तथा कार्ययोजनाओं की अद्यतन स्थिति से मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया। उन्होंने निर्देशित किया कि समस्त कल्याणकारी योजनाएं पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुसज्जित हों तथा लक्षित लाभार्थियों को समयबद्ध रूप से लाभ प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने बताया कि बीते आठ वर्षों में विभाग के बजट में दस गुना से अधिक वृद्धि की गई है, जो दिव्यांगजनों के प्रति सरकार की संवेदनशील प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि दिव्यांगजन पेंशन योजना के अंतर्गत वर्तमान में 11.04 लाख लाभार्थियों को ₹1300 करोड़ की पेंशन राशि वितरित की गई है, जबकि कुष्ठरोग पीड़ित लगभग 12 हजार व्यक्तियों को ₹3000 प्रतिमाह की दर से सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राज्यस्तरीय अभियान चलाकर यह पता लगाया जाए कि किन पात्र व्यक्तियों को अभी तक पेंशन नहीं मिल रही है, साथ ही जो अपात्र लाभ ले रहे हैं, उन्हें भी चिह्नित कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि बीते वित्तीय वर्ष में 35,136 दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, ब्रेल किट्स जैसे सहायक उपकरणों के लिए ₹28.93 करोड़ की सहायता दी गई है। मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल योजना के अंतर्गत 270 अत्यंत दिव्यांगजन को ₹2 लाख तक की मशीनें उपलब्ध कराई गईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ प्रदेश के लाभार्थियों तक पूरी तत्परता से पहुँचे, यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल योजना में सांसदों और विधायकों से भी अपनी निधि से सहयोग देने का आग्रह किया जाए। दिव्यांगजनों को राज्य परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। बैठक में जानकारी दी गई कि बीते वित्तीय वर्ष में 31 लाख से अधिक दिव्यांगजनों ने इस सुविधा का लाभ उठाया। ‘कोक्लियर इम्प्लांट योजना’ की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना तभी प्रभावी हो सकती है, जब नवजात स्तर से ही उपचार प्रारम्भ हो। उन्होंने निर्देश दिए कि हाल ही में योजना से लाभान्वित 214 बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति का फॉलोअप करते हुए उनके परिवारों से संवाद स्थापित किया जाए। शैक्षिक क्षेत्र की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि 25 जनपदों में स्थापित ‘चाइल्ड डे केयर सेंटरों’ में दृष्टि, श्रवण एवं मानसिक रूप से दिव्यांग 1390 बच्चों को आवश्यक प्रशिक्षण एवं शिक्षा दी जा रही है। वर्तमान में राज्य में संचालित 16 विशेष विद्यालय, 07 समेकित विद्यालय एवं 05 मानसिक पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से 1680 बच्चों को आवासीय शिक्षा प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि लखनऊ स्थित ‘डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय’ तथा चित्रकूट स्थित ‘जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय’ में कौशल विकास आधारित पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाए और इन संस्थानों का प्रचार-प्रसार राष्ट्रीय स्तर पर किया जाए ताकि देशभर के इच्छुक दिव्यांगजन इन संस्थानों से जुड़ सकें। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि अब तक प्रदेश में 15 लाख दिव्यांगजन यूडीआईडी पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें अधिकांश को यूनिक आईडी कार्ड निर्गत किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी 18 मंडल मुख्यालयों पर ‘दिव्यांग पुनर्वास केंद्रों’ की स्थापना प्राथमिकता के आधार पर की जाए ताकि पुनर्वास, शिक्षा और कौशल विकास से संबंधित सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही सुलभ हो सकें।
देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए पुलिस का आधुनिकीकरण जरूरी: योगी
कासगंज, 20 मई: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिये पुलिस बल का आधुनिकीकरण बहुत जरुरी है। कासगंज में 724 करोड़ रुपये की 60 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास के अवसर पर उन्होंने 25.63 हेक्टेयर में फैली नवनिर्मित अत्याधुनिक पुलिस लाइंस का उद्घाटन भी किया, इसे बनाने में 191 करोड़ रुपये खर्च किए गये हैं। योगी ने कहा कि डबल इंजन सरकार कासगंज की पौराणिक और आध्यात्मिक विकास के साथ ही यहां की बुनियादी सुविधाओं को आधुनिक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि 2008 में बना कासगंज जिला विकास के लिए तरस रहा था। 2017 से पहले की सरकारों के एजेंडे में विकास कभी नहीं रहा, अराजकता और भ्रष्टाचार ही उनकी पहचान थी। आज कासगंज विकास के पथ पर तेजी से दौड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कासगंज में नवनिर्मित पुलिस लाइंस उत्तर प्रदेश पुलिस की आधुनिकीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि 191 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह पुलिस लाइंस 1,000 पुलिस कर्मियों के लिए बैरक, अधिकारियों के लिए आवासीय सुविधाएं, ऑडिटोरियम और अन्य आधुनिक सुविधाओं से युक्त है। उन्होंने कहा कि पहले पुलिस कर्मी टूटी-फूटी बैरकों में रहने को मजबूर थे, लेकिन अब हाई-राइज इमारतों में शानदार आवासीय सुविधाएं दी जा रही हैं। यह पुलिस लाइंस देश के लिए एक मॉडल है। योगी ने उत्तर प्रदेश पुलिस आवास निगम की तारीफ करते हुए कहा कि यह पुलिस को सशक्त बनाने और आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सीएम ने कहा कि आज यूपी पुलिस माफियाओं के लिए काल बन चुकी है। कोई माफिया समानांतर सरकार नहीं चला सकता, न ही गरीब की संपत्ति पर कब्जा कर सकता है। बेटी और व्यापारी की सुरक्षा पर सेंध लगाने की कोशिश करने वालों को अब यमराज का इंतजार करना पड़ता है। उन्होने कहा कि जैसे देश की सुरक्षा के लिए पीएम मोदी के सेना का आधुनिकीकरण किया, जिसका परिणाम ऑपरेशन सिंदूर में देखनो को मिला, जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान को घुटने पर ला दिया। उन्होंने कहा कि अगर हमारे पास मजबूत सेना और बहादुर जवान न होते, तो देश की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी। आज भारतीय सेना दुश्मन के घर में घुसकर उसका खात्मा करने की क्षमता रखती है। वैसे ही देश और राज्य की आंतरिक सुरक्षा के लिए पुलिस का आधुनिकीकरण करना जरूरी है। योगी ने 2017 से पहले की समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की सरकारों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उस दौर में उत्तर प्रदेश में अराजकता का माहौल था। शाम होते ही सड़कों पर कर्फ्यू जैसा दृश्य होता था। उपद्रवी सड़कों पर तांडव करते थे। न बेटियां सुरक्षित थीं, न व्यापारी। हर तीसरे दिन दंगे होते थे और पर्व-त्योहारों से पहले लोगों के मन में डर समा जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि 2008 में कासगंज जिले के गठन के बाद भी पूर्ववर्ती सरकारों ने पुलिस लाइंस जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराईं। “2008 से 2017 तक, न जमीन दी गई, न पैसा। 12 जिलों में पुलिस लाइंस नहीं थीं। डीएम और एसपी को ब्लॉक में बैठना पड़ता था। ऐसी स्थिति में 25 करोड़ की आबादी की सुरक्षा कैसे संभव थी। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारें गुंडों के साथ मिलकर अराजकता फैलाती थीं, सज्जनों को प्रताड़ित करती थीं और विकास ठप था। मुख्यमंत्री ने कासगंज की आध्यात्मिक और पौराणिक महत्ता की चर्चा करते हुए कहा कि यह भगवान विष्णु के वराह अवतार और महर्षि कपिल की तपोभूमि है। सीएम योगी ने कहा कि सोरों का महत्व संभल के समान है। संभल भगवान विष्णु के दसवें अवतार की भूमि है, तो सोरों तीसरे अवतार की। यह हमारा सौभाग्य है कि डबल इंजन सरकार ने इस आध्यात्मिक महत्व को समझा और विकास की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया। सीएम योगी ने कहा कि जैसे अयोध्या, मथुरा और वृंदावन का विकास हो रहा है, वैसे ही सोरों का भी विकास होगा। प्रयागराज महाकुंभ ने दिखाया कि आस्था को आर्थिक विकास से जोड़ा जा सकता है। सोरों भी ऐसा ही उदाहरण बनेगा। सीएम योगी ने उन्होंने नरदई पुल के सौंदर्यीकरण, कासगंज की पौराणिक परंपरा को संरक्षित करने के लिए म्यूजियम निर्माण, सुहावन और अमापुर में बाइपास निर्माण, और दरियावगंज में झील के सौंदर्यीकरण जैसे प्रस्तावों को मंजूरी देने की घोषणा की। उन्होने कासगंज में मुख्यमंत्री कम्पोजिट विद्यालय की आधारशिला रखी, जो प्री-प्राइमरी से 12वीं कक्षा तक शिक्षा प्रदान करेगा। उन्होंने करा कि पहले चरण में इस प्रकार के विद्यालय को जिला स्तर पर, फिर तहसील, ब्लॉक और न्याय पंचायत स्तर पर यह विद्यालय स्थापित किए जाएंगे। गरीब का बच्चा भी आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर देश के विकास में योगदान देगा। सीएम योगी ने कहा कि स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, नगरीय विकास और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भी 724 करोड़ की परियोजनाओं से कासगंज में समग्र विकास को गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कासगंज के जनप्रतिनिधियों को विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा, सुशासन और विकास का जो समन्वय डबल इंजन सरकार ने स्थापित किया है, उसे कासगंज की जनता और जनप्रतिनिधियों ने तत्परता से लागू किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्नयाथ ने महिलाओं की सुरक्षा, स्वावलंबन एवं सम्मान के लिए आगरा जोन द्वारा संचालित ऑपरेशन जागृति को स्मार्ट पुसिलिंग अवार्ड वुमेन सेफ्टी 2025 से पुरस्कृत किया गया। इस दौरान सीएम योगी ने जिले में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र व टैबलेट, मुख्यमंत्री आवास योजना व पीएम आवास योजना (शहरी) के तहत आवास की चाबी, सीएम युवा के तहत लाभार्थियों को 5 लाख रुपये का चेक, घरौनी प्रमाण पत्र, आयुष्मान कार्ड व मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के लाभार्थियों को लैपटॉप का वितरित किया। इस दौरान गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, विधायक हरिओम वर्मा, देवेन्द्र सिंह राजपूत, विधान परिषद सदस्य रजनीकान्त माहेश्वरी, डॉ. मानवेन्द्र प्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष रत्नेश कश्यप समेत कई जनप्रतिनिधि व गणमान्य लोग मौजूद रहे।
पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन पर एनर्जी टास्क फोर्स को गुमराह करने का आरोप
एनर्जी टास्क फोर्स द्वारा लिए गए एकतरफा निर्णय से बिजली कर्मियों में फूटा गुस्सा वर्क टू रूल आंदोलन के साथ भोजनावकाश में प्रदेश भर में हुए विरोध प्रदर्शन लखनऊ, 18मई: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पावर कारपोरेशन के चेयरमैन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने एनर्जी टास्क फोर्स को गुमराह किया है । निजीकरण के बारे में बिजली कर्मियों की आपत्तियों से उन्होंने एनर्जी टास्क फोर्स को पूरी तरह अवगत नहीं कराया। एनर्जी टास्क फोर्स द्वारा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बारे में लिए गए एकतरफा फैसले से आज प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों में गुस्सा दिखा। बिजली कर्मचारियों ने वर्क टू रूल आंदोलन के साथ भोजन अवकाश के दौरान समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर विरोध प्रदर्शन किया। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन ने एनर्जी टास्क फोर्स के सामने विद्युत वितरण निगमों के घाटे के गलत आंकड़े रखे हैं। पॉवर कारपोरेशन ने एनर्जी टास्क फोर्स को अगले वित्तीय वर्ष में 65000 करोड़ रुपए के घाटे की बात बताई है जबकि पॉवर कारपोरेशन ने ही विद्युत नियामक आयोग को सौंपे गए ए आर आर में अगले वित्तीय वर्ष में 9206 करोड रुपए के घाटे की बात कही है। संघर्ष समिति ने कहा कि घाटे के संबंध में पावर कॉरपोरेशन द्वारा लगातार बताए जा रहे भ्रामक और झूठे आंकड़ों का खंडन करते हुए संघर्ष समिति ने 12 मई को पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन और प्रबंधन के सामने एक पीपीटी प्रेजेंटेशन किया था। इस पीपीटी प्रेजेंटेशन में बताया गया था कि यदि सरकारी विभागों का बिजली राजस्व का बकाया मिल जाए और समय से सब्सिडी की धनराशि मिल जाए तो पावर कार्पोरेशन किसी प्रकार के घाटे में नहीं है। पीपीटी प्रेजेंटेशन में यह भी बताया गया था कि गलत पावर परचेज एग्रीमेंट के चलते विगत वर्ष विद्युत वितरण निगमों ने बिना एक भी यूनिट बिजली खरीदे 6761 करोड रुपए का भुगतान किया है। इसके अतिरिक्त बहुत महंगे पावर परचेज एग्रीमेंट के चलते विद्युत वितरण निगमों ने कुल 16282 करोड रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया। यदि पावर परचेज एग्रीमेंट को पुनरीक्षित किया जाए तो 16282 करोड रुपए बचाए जा सकते हैं और विद्युत वितरण निगम किसी प्रकार के घाटे में नहीं है। इस पीपीटी प्रेजेंटेशन के बाद पावर कारपोरेशन के चेयरमैन और प्रबंधन ने यह कहा था कि बहुत अच्छा प्रेजेंटेशन है इस पर आगे वार्ता की जाएगी। किंतु आज तक कोई वार्ता नहीं की गई और एनर्जी टास्क फोर्स के सामने गलत आंकड़े रखे गए। कर्मचारियों की सेवा शर्तों के मामले में भी पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन ने एनर्जी टास्क फोर्स के सामने संघर्ष समिति द्वारा उठाए गए किसी भी बिंदु को नहीं रखा। संघर्ष समिति ने कहा कि 05 अप्रैल 2018 को ऊर्जा मंत्री, 06 अक्टूबर 2020 को वित्त मंत्री एवं ऊर्जा मंत्री, 03 दिसंबर 2022 को ऊर्जा मंत्री और 19 मार्च 2013 को ऊर्जा मंत्री के साथ हुए समझौते को मानने से पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन ने मना कर दिया है, ऐसे में निजीकरण के बाद जब पूरा मैनेजमेंट निजी घरानों के पास होगा तब पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन द्वारा सेवा शर्तों को लेकर किए जा रहे वायदे कागज का टुकड़ा मात्र होंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के पहले ही 45 प्रतिशत संविदा कर्मी हटाए जा रहे है। ऐसे में निजीकरण के बाद नौकरी बने रहने के चेयरमैन के वायदे पर कैसे भरोसा किया जा सकता है। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मचारी पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन द्वारा दिए जा रहे झूठे आंकड़े, धमकी और उत्पीड़न की कार्यवाहियों से डरने वाले नहीं हैं। निजीकरण न ही उपभोक्ताओं के हित में है और न ही कर्मचारियों के हित में। संघर्ष समिति निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष के लिए तैयार है। यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया जाता। निजीकरण के विरोध में चल रहे वर्क टू रूल आंदोलन के चौथे दिन आज बिजली कर्मचारियों ने प्रातः 10 बजे से सायं 05 बजे तक ही कार्य किया। बिजली कर्मियों ने 05 बजे के बाद उपभोक्ताओं को कोई दिक्कत नहीं होने दी किन्तु प्रबंधन के साथ पूरी तरह असहयोग किया। एनर्जी टास्क फोर्स द्वारा निजीकरण के बारे में लिए गए एकतरफा निर्णय के विरोध में आज प्रदेश भर में समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर विरोध प्रदर्शन किया गया।
प्रदेश के प्रत्येक मण्डल में स्थापित हों आयुष महाविद्यालय: योगी
लखनऊ, 17 मई : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को आयुष विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में निर्देश दिया कि प्रदेश के प्रत्येक मण्डल में एक इंटीग्रेटेड आयुष महाविद्यालय की स्थापना सुनिश्चित की जाए, जिसमें आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी समेत आयुष की सभी पद्धतियों को एक ही परिसर में उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल आयुष चिकित्सा पद्धति को सुदृढ़ करेगा, बल्कि भविष्य की स्वास्थ्य-आधारित शिक्षा प्रणाली को भी सशक्त बनाएगा। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश सरकार आयुष चिकित्सा पद्धति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मिशन मोड में कार्य कर रही है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी आयुष संस्थानों में नेचुरोपैथी और योग सेंटर की स्थापना अनिवार्य रूप से की जाए और सभी स्वीकृत शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय पदों को शत-प्रतिशत भरने की कार्यवाही समयबद्ध ढंग से पूरी की जाए। प्रदेश के हर जनपद में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर प्रारंभ किए जाएं, जो सरकारी या पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड में संचालित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आयुष विश्वविद्यालय का निर्माण गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध ढंग से हो और प्रदेश भर में आयुष विभाग की निर्माणाधीन परियोजनाओं को भी प्राथमिकता से पूरा किया जाए। उन्होंने निजी क्षेत्र को भी इसमें आगे आने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि निजी निवेशकों को आयुष सेक्टर में निवेश के लिए आकर्षित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि निजी क्षेत्र में संचालित आयुष महाविद्यालयों एवं चिकित्सालयों के बुनियादी ढांचे, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, फैकल्टी एवं स्टाफ की गुणवत्ता का गहन परीक्षण कराया जाए ताकि कोई कमी न रह जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुर्वेद में पंचकर्म जैसी विशिष्ट पद्धतियां गंभीर बीमारियों के उपचार में अत्यंत प्रभावी हैं, इसलिए इन पद्धतियों को प्रदेश के सभी आयुष संस्थानों में बढ़ावा दिया जाए। आयुष चिकित्सा की लोकप्रियता को देखते हुए यही समय है, जब भारत की परंपरागत चिकित्सा को वैज्ञानिक रूप से प्रस्तुत कर वैश्विक मंच पर स्थापित किया जाए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के सफल आयोजन के लिए अभी से तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी मंडलों, जनपदों, नगर निकायों, ग्राम पंचायतों और सरकारी विभागों में योग दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इसके लिए प्रत्येक जनपद में प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जो जनसामान्य को योग प्रशिक्षण दे सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि डाबर, बैद्यनाथ और पतंजलि जैसी आयुर्वेदिक उत्पादक संस्थाओं के साथ एमओयू कर सभी आयुष चिकित्सालयों में आवश्यक दवाओं की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी मरीज को चिकित्सकीय उपचार के लिए दवा की कमी न हो। बैठक के दौरान आयुष विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि वर्तमान में प्रदेश में 2,127 आयुर्वेदिक, 259 यूनानी और 1,598 होम्योपैथिक चिकित्सा संस्थान संचालित हैं, जो आयुष सेवाओं को जनसामान्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इन संस्थानों की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर मॉनिटरिंग की जाए और आवश्यकतानुसार संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि आयुष न केवल भारत की चिकित्सकीय परंपरा का प्रतीक है, बल्कि यह समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण को भी परिभाषित करता है। उत्तर प्रदेश को आयुष के क्षेत्र में राष्ट्रीय और वैश्विक नेतृत्व की भूमिका में लाने के लिए सभी प्रयासों को एकजुट, योजनाबद्ध और समयबद्ध रूप से आगे बढ़ाया जाए।
एनर्जी टास्क फोर्स की बैठक में बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 के एजेंडा पर संघर्ष समिति ने की आपत्ति दर्ज
लखनऊ, 16 मई: पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु 16 मई को प्रातः 11ः00 बजे एनर्जी टास्क फोर्स की हो रही बैठक के एजेंडा पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने गहरी आपत्ति दर्ज करते हुए मांग की है कि एनर्जी टास्क फोर्स कंसल्टेंट के बिडिंग डॉक्यूमेंट को स्वीकार न करे और निजीकरण की चल रही प्रक्रिया निरस्त की जाये। संघर्ष समिति के आह्वान पर कल से शुरू हुआ वर्क टू रूल आंदोलन आज भी जारी रहा। वर्क टू रूल आंदोलन के दौरान बिजली कर्मी प्रातः 10 बजे से शाम 05 बजे तक निर्धारित ड्यूटी अवधि में ही कार्य कर रहे हैं। विद्युत अभियंताओं ने पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन द्वारा आज की गई वीडियो कान्फ्रेसिंग का ठीक 05 बजे सामूहिक रूप से बहिष्कार किया। संघर्ष समिति ने कहा है कि वर्क टू रूल के दौरान ड्यूटी आवर्स के बाद प्रबन्धन का बहिष्कार किया जाएगा। आम उपभोक्ताओं को कोई दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। एनर्जी टास्क फोर्स की कल हो रही बैठक के एजेंडा पर संघर्ष समिति ने दो बिंदुओं पर आपत्तियां दर्ज की हैं। संघर्ष समिति की पहली आपत्ति है कि एनर्जी टास्क फोर्स की मीटिंग में अवैध ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन द्वारा स्ट्रेटजी पेपर/ बिडिंग डॉक्यूमेंट का प्रस्तुतीकरण किया जाना है। संघर्ष समिति ने कहा की ग्रांट थॉर्टन द्वारा दिया गया झूठा शपथ पत्र प्रकाश में आने के बाद उसने स्वीकार कर लिया है कि उसने झूठा शपथ पत्र दिया था। इसके साथ ही उसने यह भी स्वीकार कर लिया है कि उस पर अमेरिका में पेनल्टी लगाई गई थी। इन दोनों आरोपों के स्वीकार कर लेने के बाद पत्रावली पर इंजीनियर ऑफ द कॉन्ट्रैक्ट ने यह अनुशंसा की है कि ग्रांट थॉर्टन का कंसल्टेंट के रूप में नियुक्ति का आदेश निरस्त कर दिया जाए। इस फाइल को विगत एक माह से पावर कारपोरेशन के चेयरमैन दबाए बैठे हैं और कोई निर्णय नहीं ले रहे हैं। ऐसी स्थिति में अवैध ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट द्वारा एनर्जी टास्क फोर्स के सामने स्ट्रेटजी पेपर/ बिडिंग डॉक्यूमेंट का प्रस्तुतीकरण किया जाना पूरी तरह से अवैधानिक है। संघर्ष समिति की दूसरी आपत्ति 09 अप्रैल 2025 को भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट को लेकर है। संघर्ष समिति ने बताया की 09 अप्रैल 2025 का कथित ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय की वेबसाइट पर नहीं है और पब्लिक डोमेन में भी नहीं है। इसके पूर्व भारत सरकार ने सितंबर 2020 में एक स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट का ड्राफ्ट जारी किया था जिसे अभी तक फाइनल नहीं किया गया है। यदि भारत सरकार ने 09 अप्रैल 2025 को कोई नया स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट का ड्राफ्ट जारी किया है तो उसे सर्कुलेट किया जाना चाहिए और सभी स्टेक होल्डर्स की उस पर आपत्ति मांगी जानी चाहिए। इसके पूर्व इस आधार पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के बिडिंग डॉक्यूमेंट को फाइनल किया जाना पूरी तरह से गलत होगा। संघर्ष समिति ने कहा कि कंसल्टेंट की नियुक्ति के समय जारी किए गए आर एफ पी डॉक्यूमेंट में वर्ष 2020 के ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट का हवाला दिया गया है। ऐसी स्थिति में एनर्जी टास्क फोर्स की बैठक में 09 अप्रैल 2025 के कथित ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट पर प्रस्तुतीकरण किया जाना पूरी तरह गलत होगा। संघर्ष समिति ने टाटा पावर के प्रबंध निदेशक प्रवीर सिन्हा के आज मुंबई से जारी किए गए वक्तव्य पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की है। टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित समाचार के अनुसार टाटा पॉवर के एम डी ने कहा है कि हमारे डिस्कसन के आधार पर बिडिंग डॉक्यूमेंट तैयार किया गया है और टाटा पॉवर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम की बिडिंग में भाग लेने के लिए तैयार है। संघर्ष समिति ने कहा कि टाटा पावर के प्रबंध निदेशक का यह बयान पावर कारपोरेशन के चेयरमैन और कार्पोरेट घरानों की मिलीभगत को पूरी तरीके से उजागर कर देता है। संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के पीछे भारी भ्रष्टाचार हो रहा है और आश्चर्य की बात यह है कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की नीति को धता बताते हुए चेयरमैन निजीकरण करने पर आमादा हैं। संघर्ष समिति के आह्वान पर वर्क टू रूल आंदोलन आज दूसरे दिन जारी रहा। आज प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर विरोध सभा हुई।
यूपी के 75 जिलों में होगी रामायण कार्यशालाएं, समर कैंप में बच्चे सीखेंगे वेद पाठन
लखनऊ, 13 मई : अयोध्या स्थित अंतरराष्ट्रीय रामायण और वैदिक शोध संस्थान गर्मी की छुट्टियों के दौरान बच्चों को भारतीय संस्कृति से रचनात्मक रूप से जोड़ने के लिए राज्य के सभी 75 जिलों में रामायण कार्यशालाएं आयोजित करेगा। प्रदेश के संस्कृति और पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम ने मंगलवार को न्यूज़ एजेंसी से कहा, “शिविर 15 मई से शुरू होने की संभावना है। रामायण पर शिविर आयोजित करने का उद्देश्य खासकर गर्मी की छुट्टियों के दौरान बच्चों को भारतीय संस्कृति से रचनात्मक रूप से जोड़ना है।” अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के निदेशक संतोष कुमार शर्मा ने सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पांच मई को लिखे पत्र में कहा, “अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान अयोध्या ने प्रस्ताव दिया है कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में रामायण और वेदों के प्रति रुचि पर ग्रीष्मकालीन शिविर आयोजित किया जाए।” पत्र के मुताबिक शिविर में रामलीला, श्रीरामचरित मानस गायन और पाठ, रामायण चित्रकला, मुखौटे, रामायण क्ले मॉडलिंग, ‘रामायण फेस आर्ट’, वेद गायन और वैदिक सामान्य ज्ञान पर कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। शिविर की अवधि पांच से 10 दिन है। पत्र में कहा गया है कि शिविर बच्चों में भारतीय संस्कृति के मूल्यों को विकसित करेगा और कला के प्रति दिलचस्पी जगाएगा।
संघर्ष समिति का पावर कारपोरेशन प्रबन्धन के सामने व्यापक प्रस्ताव, मई को होगी अगली बैठक
वित्त मंत्री के साथ हुए समझौते का पालन कर बिजली कर्मियों को विश्वास में लेकर सुधार कार्यक्रम चलाये जाये निजीकरण का विफल प्रयोग उप्र पर न थोपा जाये पावर कारपोरेशन प्रबन्धन के सामने पीपीटी प्रेजेन्टेशन के माध्यम से संघर्ष समिति ने सुधार के व्यापक प्रस्ताव रखे उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त करने हेतु 14 मई को अगली बैठक उत्तरप्रदेश/लखनऊ, 12 मई: पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल और शीर्ष प्रबन्धन के साथ आज हुई लम्बी वार्ता में संघर्ष समिति ने एक घण्टे से अधिक के पीपीटी प्रेजेन्टेशन द्वारा यह बताया कि निजीकरण का प्रयोग आगरा, ग्रेटर नोएडा और उड़ीसा में पूरी तरफ विफल हो चुका है। अतः निजीकरण के इस विफल प्रयोग को उप्र की गरीब जनता पर न थोपा जाये। संघर्ष समिति ने कहा कि 06 अक्टूबर 2020 को वित्त मंत्री मा. श्री सुरेश खन्ना एवं तत्कालीन ऊर्जा मंत्री मा. श्री श्रीकान्त शर्मा के साथ हुए समझौते का पालन करते हुए बिजली कर्मियों को विश्वास में लेकर विद्युत वितरण निगमों की मौजूदा व्यवस्था में ही सुधार कार्यक्रम चलाये जायें। इस हेतु संघर्ष समिति ने वित्त मंत्री के सामने रखे गये सुधार प्रस्ताव को प्रबन्धन को देते हुए कहा कि निजीकरण का निर्णय वापस लेकर इस प्रस्ताव पर प्रबन्धन को तत्काल आगे वार्ता शुरू करनी चाहिए। संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि वार्ता का समुचित वातावरण बनाने हेतु आन्दोलन के कारण की गयी समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां तत्काल वापस ली जायें। संघर्ष समिति ने कहा कि मा. वित्त मंत्री श्री सुरेश खन्ना जी ने वार्ता के दौरान संघर्ष समिति द्वारा दिये गये सुधार प्रस्ताव की सराहना करते हुए यह निर्देश दिया था कि संघर्ष समिति के साथ प्रस्ताव पर वार्ता कर सुधार हेतु उनका सहयोग लिया जाये। वार्ता में उपस्थित तत्कालीन मुख्य सचिव श्री आर के तिवारी ने भी संघर्ष समिति के प्रस्ताव की प्रशंसा की थी। अत्यन्त दुर्भाग्य का विषय है कि आज तक उसके बाद एक बार भी सुधार प्र्रस्ताव पर वार्ता नहीं की गयी और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का एकतरफा निर्णय थोप दिया गया जो बिजली कर्मियों को कदापि स्वीकार नहीं है। संघर्ष समिति ने कहा कि अब समय आ गया है कि प्रबन्धन सुधार प्र्रस्ताव पर बिजली कर्मियों का सहयोग लेकर सुधार करें और निजीकरण का निर्णय वापस लिया जाये। संघर्ष समिति ने प्रेजेन्टेशन के माध्यम से प्रबन्धन को बताया कि 05 अप्रैल 2018 और 06 अक्टूबर 2020 को मा. मंत्रियों के साथ हुए समझौते में स्पष्ट लिखा है कि ‘‘बिजली कर्मियों को विश्वास में लिये बिना उप्र में ऊर्जा क्षेत्र में कहीं पर भी किसी भी प्रकार का निजीकरण नहीं किया जायेगा’’। अतः मा. मंत्रियों के साथ हुए समझौते का पालन करते हुए निजीकरण का निर्णय तत्काल वापस लिया जाये। संघर्ष समिति ने 19 मार्च 2023 को मा. ऊर्जा मंत्री द्वारा की गयी घोषणा के अनुपालन में आन्दोलन के कारण की गयी समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस लेने की मांग की। पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन ने उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के वापस लेने पर 14 मई को पुनः एक विस्तृत बैठक करने को कहा। प्रबन्धन ने संघर्ष समिति द्वारा दिये गये पीपीटी प्रेजेन्टेशन की सराहना की और कहा कि इसका विस्तृत अध्ययन कर आगे वार्ता की जायेगी। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र द्वारा दिये गये पीपीटी प्रेजेन्टेशन में ऊर्जा निगमों में घाटे के लिए अनेक बिन्दु गिनाये गये। मुख्यतया बहुत मंहगे बिजली खरीद करार और सरकारी विभागों का राजस्व बकाया घाटे के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार ठहराया गया। प्रेजेन्टेशन के अनुसार विद्युत उत्पादन निगम से विद्युत वितरण निगमों को रू 4.17 प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है। सेण्ट्रल सेक्टर से औसतन रू 4.78 प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलती है। निजी घरानों से रू 5.45 प्रति यूनिट की दर से तथा शॉर्ट टर्म पॉवर परचेज के माध्यम से रू 7.31 प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदी जा रही है। अन्य माध्यमों से रू 14.204 प्रति यूनिट की दर तक बिजली खरीदी जा रही है। संघर्ष समिति ने बताया कि उपरोक्त मंहगी बिजली क्रय करारों से विद्युत वितरण निगमों को उत्पादन निगम की तुलना में लगभग रू 9521 करोड़ का अधिक भुगतान करना पड़ रहा है। प्रेजेन्टेशन के जरिये यह भी बताया गया कि ऐसे कई बिजली क्रय करार हैं जिनसे वर्ष 2024-25 में एक यूनिट भी बिजली नहीं खरीदी गयी किन्तु लगभग रू 6761 करोड़ का भुगतान करना पड़ा। इस प्रकार मात्र मंहगे बिजली क्रय करारों के चलते विद्युत वितरण निगमों को कुल लगभग रू 16282 करोड़ रूपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है जो घाटे का एक सबसे बड़ा कारण है, जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबन्धन की है। प्रेजेन्टेशन में यह बताया गया कि वर्तमान में सरकारी विभागों पर लगभग रू 14 हजार करोड़ बिजली राजस्व का बकाया है। यह धनराशि सभी विद्युत वितरण कम्पनियों के पॉवर कारपोरेशन द्वारा दर्शाये गये वार्षिक घाटे से कहीं अधिक है। संघर्ष समिति ने कहा कि यदि बहुत मंहगे बिजली खरीद करार रद्द कर दिये जायें और सरकारी विभागों का बिजली राजस्व का बकाया मिल जाये तो विद्युत वितरण निगम मुनाफे में आ जायेंगे और घाटे के नाम पर किसी निजीकरण की आवश्यकता नहीं होगी। संघर्ष समिति ने राजस्व वसूली में कानून व्यवस्था को सबसे बड़ी बाधा बताया। संघर्ष समिति ने कहा कि राजस्व वसूली के दौरान मार-पीट होने पर पॉवर कारपोरेशन के शीर्ष प्रबन्धन और जिला प्रशासन से अधिकांशतया समय पर मदद नहीं मिलती। संघर्ष समिति ने बिजली के इन्फ्रास्ट्रचर से कई हजार करोड़ रूपये की नॉन टैरिफ आय के कई सुझाव दिये। उदाहरण के तौर पर सब स्टेशनों पर चार्जिंग स्टेशन की स्थापना, खम्भों पर टेण्डर के जरिये नॉन टैरिफ इनकम, अनुपयोगी जमीनों पर लीज के माध्यम से वाणिज्यिक गतिविधियां, बैटरी स्टोरेज की स्थापना तथा अनुपयोगी जमीनों और छतों पर सोलर पैनल की स्थापना आदि कई सुझाव दिये गये। संघर्ष समिति ने उप्र में आगरा और ग्रेटर नोएडा में चल रहे निजीकरण के प्रयोग को आकड़े देकर यह साबित कर दिया कि निजीकरण पॉवर कारपोरेशन के लिए घाटे का सौदा है। आगरा में निजीकरण से पॉवर कारपोरेशन को प्रति वर्ष लगभग एक हजार करोड़ रूपये का नुकसान हो रहा है। वार्ता में प्रबन्धन की ओर से पावॅर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल, प्रबन्ध निदेशक पंकज
हर पीड़ित की समस्या का समाधान सरकार की प्राथमिकता: योगी
गोरखपुर, 12 मई : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में रात्रि प्रवास के बाद सोमवार सुबह जनता दर्शन में करीब 150 लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और इन समस्याओंके समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि हर पीड़ित की समस्या का समाधान सरकार की प्राथमिकता है लिहाजा हर समस्या को संवेदनशीलता से देखा जाएगा तथा जरूरी कदम उठाए जाएं। आज सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने आयोजित जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री योगी कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक खुद पहुंचे। एक-एक कर और इत्मीनान से सबकी समस्याएं सुनीं। उन्हें आश्वस्त किया कि वह सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कराएंगे। उन्होंने कहा कि किसी को भी घबराने या परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। प्रार्थना पत्रों को उन्होंने अधिकारियों को हस्तगत करते हुए निर्देश दिया कि हर समस्या का निस्तारण त्वरितए गुणवत्तापूर्ण और संतुष्टिप्रद होना चाहिए। कुछ लोगों द्वारा जमीन कब्जाने की शिकायत पर उन्होंने कठोर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अफसरों को यह निर्देश भी दिए कि यदि किसी प्रकरण में पीड़ित को लगातार परेशानी कासामना करना पड़ा है तो इसकी भी जांच कर जवाबदेही तय की जाए। इस दौरान आवास की गुहार लेकर तथा इलाज में सहायता की मांग को लेकर पहुंचे लोगों को उन्होंने आश्वस्त किया और अधिकारियों से कहा कि आवास से वंचित लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहतआवास उपलब्ध कराया जाए एवं जरूरतमंदों के इलाज में धन की बाधा न आने दी जाए। जनता दर्शन में कुछ लोग इलाज में आर्थिक मदद मांगने पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने उनसे कहा कि इलाज में धन की कमी बाधक नहीं होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इलाज में अस्पताल के इस्टीमेट कीप्रक्रिया को जल्द पूर्ण कराकर शासन में भेजें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए पर्याप्त राशि दी जाएगी। जनता दर्शन में कुछ महिलाओं ने पक्के आवास की समस्या मुख्यमंत्री को बताई। इस पर योगी ने अधिकारियों से कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना में किन्हीं कारणों से जो भी पात्र लोग वंचित रह गए हैं, उन्हें योजना के दायरे में लाकर पक्का आवास उपलब्ध कराया जाए।
निजीकरण के विरोध में पावर कारपोरेशन के चेयरमैन से संघर्ष समिति की वार्ता 12 मई को
उत्तरप्रदेश/लखनऊ, 12 मई: पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति और पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन के मध्य बहुप्रतीक्षित वार्ता 12 मई को होगी। वार्ता के पहले संघर्ष समिति ने कहा है कि वार्ता का समुचित वातावरण बनाने हेतु पॉवर कारपोरश्ेन प्रबन्धन को निजीकरण के विरोध में चल रहे आन्दोलन के कारण की गयी समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस लेनी चाहिए। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के अन्तर्गत आने वाले 42 जनपदों के निजीकरण के एकतरफा फैसले के विरोध में बिजली कर्मचारी, संविदाकर्मी और अभियन्ता विगत 05 माह से अधिक समय से आन्दोलनरत हैं। लोकतांत्रिक ढंग से शांतिपूर्वक आन्दोलन करने वाले बिजली कर्मियों पर पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन ने इस दौरान कई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां की हैं। उन्होंने बताया कि बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों को नौकरी से हटाया गया है। निजीकरण के बाद निजी घरानों की मदद करने हेतु लगभग 45 प्रतिशत संविदा कर्मियों की छंटनी कर दी गयी है। इसी प्रकार 55 वर्ष की आयु के संविदा कर्मी हटा दिये गये हैं जबकि इनमें से अधिकांश संविदा कर्मी लाइन पर काम करते हुए अपंग हो चुके हैं। अत्यन्त अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों को निजी घरानों की मदद के लिए इस प्रकार हटाया जाना नितान्त अमानवीय और घोर उत्पीड़न है। उन्होंने बताया कि फेसियल अटेंडेंस के नाम पर लगभग 2000 बिजली कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया है। संघर्ष समिति की मीटिंग में आने वाले बिजली कर्मचारियों की फोटोग्राफी कर उन्हें चिन्हित करके स्थानान्तरण आदि उत्पीड़न की कार्यवाहियां की जा रही है। संघर्ष समिति ने बताया कि 19 मार्च 2023 को ऊर्जा मंत्री द्वारा की गयी घोषणा के अनुसार मार्च, 2023 के आन्दोलन के दौरान की गयी सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस की जानी थीं जो आज तक वापस नहीं की गयी हैं। मार्च 2023 के आन्दोलन के कारण बिजली कर्मियों पर अनुशासन की कार्यवाही चल रही है, स्टेट विजीलेंस की जांच करायी जा रही है और तरह-तरह का उत्पीड़ना जारी है। ऊर्जा मंत्री की घोषणा के बाद भी उत्पीड़न की कार्यवाहियां वापस न लिये जाने से अविश्वास का वातावरण बना है जिसे समाप्त करने हेतु तत्काल सभी उत्पीडनात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाये।
आतंकवाद कुत्ते की पूंछ, ब्रह्मोस ने दिया करारा जवाब: योगी आदित्यनाथ
लखनऊ, 11 मई : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नेकहा कि पाकिस्तान और आतंकवाद कुत्ते की पूंछ है जो कभी सीधी नहीं होने वाली। आतंकवाद को कुचलने के लिए हम सभी को मिलकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस अभियान से जुड़ना होगा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल के पराक्रम की एक झलक देखी होगी और अगर नहीं देखी तो पाकिस्तान के लोगों से ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत के बारे में पूछिए। हम आतंकवाद को पूरी तरह से कुचलने के लिए तैयार हैं और उसे उसकी ही भाषा में जवाब देंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां उप्र डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लखनऊ नोड पर दुनिया की सबसे विध्वंसक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की उत्पादन इकाई के शुभारंभ के मौके पर संबोधित कर रहे थे। नई दिल्ली से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वर्चुअली और लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संयुक्त रूप से ब्रह्मोस उत्पादन इकाई का शुभारंभ किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऐलान किया है कि आगे से आतंकवाद की कोई भी कार्रवाई युद्ध की कार्रवाई मानी जाएगी। जब तक हम इसे पूरी तरह से कुचल नहीं देते, आतंकवाद की समस्या का समाधान नहीं हो सकता। अब ऐसा हुआ तो प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पाकिस्तान में पल रहे आतंकवाद के खात्मे के लिए इससे बड़ा प्रहार होगा। योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब नई ऊंचाइयों को छू रहा है और यह रक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। योगी ने तीनों सेनाओं को ऑपरेशन सिंदूर में योगदान के लिए बधाई दी और कहा कि ब्रह्मोस मिसाइल अब लखनऊ में बनेगी। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में रक्षा क्षेत्र में सर्वांगीण विकास हो रहा है और इसमें 50 हजार करोड़ रुपये का निवेश लाने और एक करोड़ युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य है। यूपी को देश की सबसे बड़ी और तेज़ी से विकासशील इकोनॉमी बन रहा है। अब यूपी बीमारू राज्य नहीं रहा। यूपी में सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे और मेट्रो संचालित हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिफेंस कारीडोर के रूप में आज का दिन महत्वपूर्ण है। लखनऊ के अलावा छह डिफेंस कोरीडोर स्थापित हुए हैं। वर्ष 2019 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने घोषणा थी कि ब्रह्मोस मिसाइल के साथ डिफेंस मन्यूफैक्चरिंग में उप्र की भूमिका अहम होगी, आज उनकी बात पूरी हो रही है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस उत्पादन कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर 26 अभ्यर्थियों को यहां नियुक्ति दी गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांच ट्रेनी अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंप कर बधाई दी। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, औद्योगिक मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, सांसद बृजलाल, विधायक राजेश्वर सिंह, मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह के अलावा डीआरडीओ के सचिव व प्रोजेक्ट डायरेक्टर आदि उपस्थित रहे।