लखनऊ, 26 मई : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में प्रदेश भर से आए फरियादियों की समस्याएं सुनी। इस दौरान यहां प्रदेश भर से लगभग 65 से अधिक पीड़ित पहुंचे। सीएम योगी हर पीड़ित के पास स्वयं पहुंचे, समस्या सुनी, प्रार्थना पत्र लिया और उन्हें अहसास कराया कि हर समस्या में सरकार साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री योगी ने निराकरण के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि हर पीड़ित को न्याय दिलाना और चेहरे पर मुस्कान लाना ही सरकार का उद्देश्य है। जनता दर्शन में पुलिस, राजस्व, चिकित्सा सहायता, पेंशन, फीस माफी, आवास, आंगनबाड़ी आदि से जुड़े अनेक मामले आए, जिस पर प्रार्थना पत्र लेकर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों के साथ पहुंचे बच्चों को पुचकारा-दुलारा और चॉकलेट भी दी। इस दौरान सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्थानीय शिकायतों का समाधान जनपद स्तर पर ही कराया जाए। जो समस्याएं शासन स्तर से निस्तारित होनी हैं, उन्हें ही यहां भेजी जाए। हर पीड़ित को न्याय दिलाकर चेहरे पर मुस्कान लाना ही सरकार का उद्देश्य और समस्याओं का निस्तारण सरकार की विशेष प्राथमिकता है। अफसरों से कहा कि पीड़ितों की समस्याओं को गंभीरता और संवेदनशीलता से लेते हुए उनका समाधान त्वरित और संतुष्टि परक तरीके से कराना सुनिश्चित कराएं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता दर्शन में आए बच्चों को दुलार किया। उन्होंने बच्चों से बातें की, पढ़ाई के बारे में जानकारी ली, फिर चॉकलेट-टॉफी प्रदान कर उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया। जनता दर्शन में आए दिव्यांग की भी शिकायत सुनकर सीएम ने तत्काल निराकरण का निर्देश दिया। सीएम योगी के कार्यालय ने जनता दर्शन की फोटो शेयर करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ”जन-जन की सुरक्षा, समृद्धि व खुशहाली सीएम योगी की शीर्ष प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर ‘जनता दर्शन’ में आए लोगों की समस्याएं सुनी एवं अधिकारियों को जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण हेतु निर्देशित किया।”
पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन बना रहा है हड़ताल का माहौल
लखनऊ, 25 मई: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन पर आरोप लगाया है कि वह दमन और उत्पीड़न का सहारा लेकर इस भीषण गर्मी में प्रदेश पर बिजली हड़ताल थोपना चाहता है जबकि संघर्ष समिति की हड़ताल की कोई नोटिस नहीं है। पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन हड़ताल का हवाला देकर निदेशकों को कार्य विस्तार देने में लगे हैं। निदेशक वित्त, निधि नारंग को हड़ताल के नाम पर तीसरी बार कार्य विस्तार दिया गया है। इसके अतिरिक्त उत्पादन निगम के निदेशक तकनीकी, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के निदेशक वाणिज्य और निदेशक पारेषण को हड़ताल के नाम पर चेयरमैन ने कार्य विस्तार दिलाया है। संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों की आज लखनऊ में हुई बैठक में प्रदेश की आम जनता को आश्वस्त किया गया कि निजीकरण के विरोध में चल रहे शान्तिपूर्ण ध्यानाकर्षण आन्दोलन से आम उपभोक्ताओं को कोई दिक्कत नहीं होने दी जायेगी। संघर्ष समिति ने यह भी निर्णय लिया कि 26 मई से 28 मई तक उपभोक्ताओं को साथ लेकर सभी जनपदों में निजीकरण के विरोध में व्यापक आन्दोलन चलाया जायेगा। संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के विरोध में चल रहे आन्दोलन के दौरान पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन और प्रबन्धन से पूरी तरह असहयोग किया जायेगा किन्तु आम उपभोक्ताओं विशेषतया अस्पताल, रेलवे, पेयजल आपूर्ति आदि आवश्यक सेवाओं को बाधित नहीं होने दिया जायेगा। पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन के निर्देश पर जल निगम के टैंकरों में पेय जल भरे जाने की तैयारी अनावश्यक तौर पर आम जनता में भय का वातावरण बनाने के लिए की जा रही है जिसका निहित उद्देश्य हड़ताल थोप कर निजीकरण करना है। संघर्ष समिति ने कहा कि यह जानकारी मिली है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के टेण्डर में रूचि लेने वाले निजी घरानों के प्रतिनिधियों ने लखनऊ में डेरा डाल रखा है। यह भी चर्चा है कि उनका पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन से लगातार सम्पर्क बना हुआ है। निजी घरानों की मदद करने के लिए ही पॉवर कारपोरेशन हड़ताल थोपने में लगा है। संघर्ष समिति ने सभी जनपदों में बिजली कर्मियों को निर्देश दिया है कि वे इस बात पर कड़ी नजर रखें कि प्रबन्धन की ओर से बिजली व्यवस्था में जान-बूझ कर बड़ी गड़बड़ न की जाये और अनावश्यक तौर पर हड़ताल की स्थिति न आये। संघर्ष समिति ने इस हेतु सभी जनपदों में नजर रखने के लिए अलग टीम बना दी है। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों संजय सिंह चौहान, जितेन्द्र सिंह गुर्जर, गिरीश पांडेय, महेन्द्र राय, पी.के.दीक्षित, सुहैल आबिद, शशिकान्त श्रीवास्तव, चंद्र भूषण उपाध्याय, आर वाई शुक्ला, छोटेलाल दीक्षित, देवेन्द्र पाण्डेय, आर बी सिंह, मो वसीम, मायाशंकर तिवारी, राम निवास त्यागी, मो इलियास, श्रीचन्द, सरजू त्रिवेदी, योगेन्द्र कुमार, ए.के. श्रीवास्तव, के.एस. रावत, रफीक अहमद, पी एस बाजपेई, जी.पी. सिंह, राम सहारे वर्मा, प्रेम नाथ राय, विशम्भर सिंह ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में विगत 06 माह से शान्तिपूर्ण आन्दोलन चल रहा है। उन्होंने कहा कि संघर्ष समिति ने बेमियादी हड़ताल की कोई नोटिस नहीं दी है किन्तु अत्यन्त दुर्भाग्य की बात है कि पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन शासन के उच्चाधिकारियों को और जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर लिख रहे हैं कि ऊर्जा निगमों में हड़ताल होने वाले है और इससे निपटने के ब्लू प्रिन्ट जारी किये जा रहे हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि ऐसा लगता है कि पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन की निजी घरानों के साथ मिली-भगत है और वे निजीकरण करने हेतु इतने आतुर हैं कि भीषण गर्मी में बिजली कर्मियों का दमन और उत्पीड़न के जरिये हड़ताल को थोपना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रबन्धन ने हजारों बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियन्ताओं को अनुशासनात्मक कार्यवाही की नोटिस दे दी है। नोटिस में एक ही भाषा का प्रयोग किया गया है। जो कर्मचारी पिछले 06 माह से एक बार भी शक्तिभवन नहीं आये उनपर शक्तिभवन में सभा करके अशान्ति फैलाने का अरोप नोटिस में लगाया जा रहा है। यह सब हड़ताल थोपने की तैयारी है। आज अवकाश के दिन सभी जनपदों और परियोजनाओं पर बिजली कर्मचारियों ने सभा कर निजीकरण के विरोध में चल रहे आन्दोलन को तेज धार देने की रणनीति तय की और उपभोक्ताओं को साथ लेकर आन्दोलन चलाने के लिए उपभोक्ताओं से व्यापक जनसम्पर्क किया।
पाकिस्तान समाप्त होने की कगार पर, आतंकवाद ही बनेगा उसके अंत का कारण : सीएम योगी
अयोध्या, 23 मई : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अपने एक दिवसीय अयोध्या दौरे के क्रम में हनुमानगढ़ी में श्रीहनुमत कथा मंडपम का भव्य लोकार्पण किया। इस दौरान सीएम योगी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता और भारतीय सेनाओं के शौर्य की प्रशंसा करते हुए पाकिस्तान पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ये नया भारत है, भारत छेड़ता नहीं है और कोई छेड़े तो उसे छोड़ता भी नहीं है। आतंकवाद पाकिस्तान को ले डूबेगा और इसमें ज्यादा दिन नहीं बचे हैं। सीएम योगी ने सनातन धर्म को भारत के अस्तित्व और वजूद का आधार बताते हुए कहा कि इसके सम्मान और गरिमा के खिलाफ कुछ भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने हनुमानगढ़ी के नागाओं और संतों से आह्वान किया कि वे अपने योद्धा भाव को बनाए रखें और सनातन धर्म की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहें। उन्होंने पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि भारत छेड़ता नहीं है और कोई छेड़े तो उसे छोड़ता भी नहीं है। सीएम योगी ने हनुमान जी का उदाहरण देते हुए कहा कि बजरंग बली ने रावण के दरबार में यही संदेश दिया था। पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देकर खुद को बर्बाद कर रहा है। भारतीय सेना की कार्रवाई में 124 से अधिक आतंकवादी मारे गए हैं। यह गलती पाकिस्तान की है, जो आतंकियों को प्रश्रय दे रहा है। ये आतंकवाद पाकिस्तान को ले डूबेगा और इसमें ज्यादा दिन नहीं बचे हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का आध्यात्मिक जगत में कोई अस्तित्व नहीं है। जिसका अपना वास्तविक अस्तित्व न हो, उसकी एक निश्चित लाइफ होती है। अब पाकिस्तान का समय पूरा हो गया है। उन्होंने अयोध्या की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विकासात्मक प्रगति की चर्चा करते हुए सनातन धर्म की रक्षा और इसके वैश्विक प्रचार-प्रसार के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। अपने संबोधन में उन्होंने हनुमानगढ़ी को भक्ति, शक्ति, बुद्धि और युक्ति का संगम बताते हुए इसे सनातन धर्म का एक अडिग गढ़ बताया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों में अयोध्या को अव्यवस्थाओं में झोंककर इसे अपमानित करने का कार्य किया गया। वहीं, 2014 और 2017 के बाद डबल इंजन की सरकार में अयोध्या का विकास डबल स्पीड से हुआ है। हमें अपने मित्र और शत्रुओं की पहचान रखना जरूरी है। देश को सनातन धर्म के मार्ग में बाधा डालने वालों को चिह्नित करना होगा। सनातन धर्म भारत के अस्तित्व की पहचान है। इसकी गरिमा और सम्मान के विरुद्ध हमें कुछ भी स्वीकार नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान पर हमला बोलते हुए कहा कि उसके अंत की शुरुआत हो चुकी है और आतंकवाद ही उसके अंत का कारण बनेगा। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत में हनुमानगढ़ी के त्रेतायुगीन टीले को कोटि-कोटि नमन करते हुए कहा कि यहां से हनुमान जी महाराज ने अयोध्या धाम की रक्षा की है। उन्होंने बाबा अभयराम दास जी महाराज को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह श्रीहनुमत कथा मंडपम बाबा अभयराम दास जी की दूरदर्शिता और वैष्णव अखाड़ों की सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक है। उनकी कृपा से आज हम इस भव्य स्वरूप को देख रहे हैं। उन्होंने हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन, पूज्य संतों और नागाओं की प्रशंसा की, जिन्होंने एक-एक पाई बचाकर इस मंडपम का निर्माण किया। सीएम योगी ने कहा कि हनुमानगढ़ी केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए योद्धा भाव का प्रतीक है। यह मंडपम आने वाली पीढ़ियों के लिए हनुमानगढ़ी के वैभव को संरक्षित रखेगा। उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ी का यह मंडपम न केवल आध्यात्मिक केंद्र बनेगा, बल्कि सत्संग और कथाओं के माध्यम से सनातन धर्म के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाएगा। उन्होंने हनुमानगढ़ी के नागाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आपका इतिहास सनातन धर्म के उस कालखंड की सेना के रूप में जाना जाता है, जब देश विधर्मियों और आक्रांताओं से त्रस्त था, तब अखाड़ों ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए स्वयं को समर्पित किया था।
बिजली कर्मियों का विरोध प्रदर्शन जारी, पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर हठवादी रवैया अपनाने और हड़ताल थोपने का आरोप
लखनऊ, 23 मई: निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का तीन घंटे का व्यापक विरोध प्रदर्शन आज दूसरे दिन भी जारी रहा। संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि प्रबंधन निजीकरण की जिद पर अड़ा हुआ है, हठवादी रवैया अपना रहा है और शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे बिजली कर्मियों पर हड़ताल थोपना चाहता है। संघर्ष समिति ने जोर देकर कहा है कि निजीकरण की आड़ में अरबो रुपए के घोटाले की तैयारी है। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि संघर्ष समिति की हड़ताल करने की अभी कोई नोटिस नहीं है किन्तु पावर कारपोरेशन के चेयरमैन,मुख्य सचिव को और शासन के बड़े अधिकारियों को पत्र भेज कर गुमराह कर रहे हैं, कि बिजली कर्मी हड़ताल पर जाने वाले हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि चेयरमैन के पत्र के आधार पर जनपदों में जिला अधिकारियों द्वारा हड़ताल से निपटने की तैयारी के आदेश जारी किए जा रहे हैं जिससे अनावश्यक तौर पर ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति का वातावरण बन रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि झूठा शपथ पत्र देने वाले ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन, जिस पर अमेरिका में पेनाल्टी लगाई गई है, पर कार्यवाही करने के बजाय पावर कॉरपोरेशन संविदा कर्मियों की बड़े पैमाने पर छँटनी रहा है और टकराव का वातावरण बना रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि टेंडर मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष के रूप में निदेशक वित्त निधि नारंग का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। नए निदेशक वित्त पुरुषोत्तम अग्रवाल ने निजीकरण में हो रहे बड़े घोटाले को देखते हुए कार्यभार ग्रहण करने से मना कर दिया है। अब निधि नारंग को दूसरी बार कार्य विस्तार दिया जा रहा है क्योंकि निधि नारंग अवैध ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन को क्लीन चिट देने के लिए तैयार हो गए हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, जो शासन के सबसे बड़े अधिकारी हैं और एनर्जी टास्क फोर्स के अध्यक्ष हैं, को तत्काल कार्यवाही कर अवैध ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति को रद्द करना चाहिए। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे हैं। ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति रद्द कर दी जाए और निजीकरण का निर्णय वापस ले लिया जाए तो बिजली कर्मी कोई आंदोलन नहीं करेंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि बिना मूल्यांकन किए एक लाख करोड रुपए से अधिक की पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों को कुछ हजार करोड़ रुपए में निजी घरानों को बेचने की तैयारी है। 42 जनपदों की सारी जमीन निजी घरानों को मात्र एक रुपए की लीज पर दिए जाने का निर्णय लिया गया है। संघर्ष समिति इसी लूट का विरोध कर रही है। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार दूसरे दिन बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों और अभियंताओं ने प्रदेश के समस्त जनपदों, परियोजनाओं और राजधानी लखनऊ में अपराह्न 2ः00 से शाम 5ः00 बजे तक 3 घंटे का व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा। संघर्ष समिति ने कहा है कि निजीकरण के विरोध में आंदोलन उपभोक्ताओं को साथ में लेकर लड़ा जा रहा है। अतः विरोध प्रदर्शन के कारण से उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो। संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन को चेतावनी दी है कि वे उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को न करें अन्यथा इस भीषण गर्मी में ऊर्जा निगमों में अशांति की पूरी जिम्मेदारी प्रबन्धन की होगी। आज वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, आजमगढ़, मिर्जापुर, बस्ती, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, एटा, कानपुर, केस्को, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सीतापुर, रायबरेली, ओबरा, अनपरा, पिपरी, परीक्षा, हरदुआगंज, जवाहरपुर और पनकी में विरोध प्रदर्शन किया गया।
पर्यावरण संरक्षण में समाज भी निभाए भूमिका: योगी
लखनऊ, 22 मई: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी और सहभागिता पर जोर देते हुये कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी- 2025 का उद्घाटन करते हुए उन्होंने भारत के वैदिक दर्शन और सनातन परंपराओं का उल्लेख किया और प्रकृति के साथ सामंजस्य की आवश्यकता को लेकर लोगों से अपील भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपराएं प्रकृति के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाती हैं। उन्होंने वैदिक शांति पाठ का उदाहरण देते हुए बताया कि सनातन धर्म में हर मांगलिक अनुष्ठान की शुरुआत पृथ्वी, जल, अंतरिक्ष और समस्त चराचर जगत के कल्याण की कामना से होती है। उन्होंने कहा कि हमारी परंपराएं हमें सिखाती हैं कि मनुष्य का अस्तित्व प्रकृति और जैव विविधता के संरक्षण पर निर्भर है। अथर्ववेद में कहा गया है कि धरती हमारी माता है और हम इसके पुत्र हैं। एक पुत्र के नाते, हमें अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा। योगी आदित्यनाथ ने 1992 में शुरू हुई वैश्विक स्तर पर जैव विविधता संरक्षण की चर्चा का उल्लेख करते हुए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2070 तक भारत को नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करने का संकल्प लिया है, लेकिन इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समाज के हर व्यक्ति का योगदान आवश्यक है। यह केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। जब तक हम सभी मिलकर प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए काम नहीं करेंगे, तब तक सतत विकास का लक्ष्य अधूरा रहेगा। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण भारत की स्वावलंबी परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले हर गांव में खलिहान, गोचर भूमि, तालाब और खाद के गड्ढे होते थे, जो पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। गांवों में सॉलिड वेस्ट को खाद के गड्ढों में डालकर कंपोस्ट बनाया जाता था, तालाब स्वच्छता के प्रतीक थे और गोचर भूमि पशुओं के लिए आरक्षित थी, लेकिन आधुनिकता की दौड़ में हमने इन परंपराओं को नजरअंदाज कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप पर्यावरणीय असंतुलन और बीमारियां बढ़ रही हैं। उन्होंने गांवों में तालाबों को ड्रेनेज का माध्यम बनाने और गोचर भूमि पर अतिक्रमण जैसे कदमों को आत्मघाती बताया। योगी ने उत्तर प्रदेश के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य का जैव विविधता बोर्ड ‘प्रकृति के साथ सामंजस्य और सतत विकास’ के विजन को साकार करने के लिए नए अभियान चला रहा है। पिछले आठ वर्षों में वन विभाग ने 210 करोड़ से अधिक वृक्षारोपण कर राज्य के वन क्षेत्र को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके साथ ही, नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा नदी को कानपुर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निर्मल और अविरल बनाने में सफलता प्राप्त हुई है। कानपुर, जो कभी नमामि गंगे का सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र था, आज वहां गंगा स्वच्छ और जीवंत है। उन्होने जैव विविधता के संरक्षण में स्थानीय परंपराओं और ज्ञान के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने सनातन धर्म की उस परंपरा का उल्लेख किया, जिसमें पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं को देवताओं के साथ जोड़ा जाता है। उन्होंने कहा कि हमारी परंपराएं हमें सिखाती हैं कि पीपल, बरगद और जामुन जैसे वृक्षों का संरक्षण करना हमारा कर्तव्य है। पहले लोग चींटियों को मारने के बजाय आटा और चीनी देकर उन्हें प्राकृतिक रूप से हटाते थे। यह प्रकृति के साथ सामंजस्य का उदाहरण है। योगी ने आधुनिक विकास के मॉडल पर भी सवाल उठाए, जो पर्यावरण के लिए हानिकारक सिद्ध हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम हर कार्य को मशीनीकरण की ओर ले जा रहे हैं, चाहे वह ड्रेनेज हो या औद्योगिक कचरा। हमें प्राकृतिक उपायों को अपनाना होगा, जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में जल शोधन की देसी पद्धतियां थीं। उन्होंने कहा कि जटायु जैसे पक्षियों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों और दवाओं के दुष्प्रभावों ने इन प्रजातियों को विलुप्ति के कगार पर पहुंचा दिया है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि जटायु, जो प्रकृति के शोधन का कार्य करता था, आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। हमें अपनी परंपराओं के प्रति कृतज्ञता दिखानी होगी। सीएम योगी ने लोगों से आह्वान किया कि जैव विविधता संरक्षण को जन आंदोलन बनाना होगा। यह सृष्टि केवल मनुष्य के लिए नहीं है। अगर हमें अपने अस्तित्व को बचाना है, तो हमें जीव-जंतुओं, जल स्रोतों और पर्यावरण के संरक्षण के लिए सामूहिक रूप से कार्य करना होगा। उत्तर प्रदेश का जैव विविधता बोर्ड इस दिशा में प्रयासरत है, और हमें इन प्रयासों को और गति देनी होगी। संगोष्ठी के दौरान, मुख्यमंत्री ने जैव विविधता पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और प्रत्येक स्टॉल पर जाकर उत्पादों की जानकारी ली। उन्होंने ग्रीन बजट और जैव विविधता पुस्तिका का विमोचन किया, साथ ही चित्रकला, निबंध लेखन और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया। सीएम योगी ने कार्बन क्रेडिट के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को 10,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान किया और एनजीओ फार्मर्स को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, राज्यमंत्री केपी मलिक, मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव अनिल कुमार समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।
दिव्यांग शिक्षण संस्थानों में संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करें: योगी
लखनऊ, 21 मई : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिव्यांग युवाओं के लिए संचालित शैक्षिक संस्थानों में प्रशासनिक तंत्र को संवेदनशील, सजग और सतर्क रहने की आवश्यकता पर बल दिया है। बुधवार को दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ अराजक तत्वों द्वारा सुनियोजित ढंग से दिव्यांगजनों के विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में भ्रम फैलाकर उन्हें अवांछित और समाजविरोधी गतिविधियों की ओर प्रवृत्त करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। ऐसी प्रवृत्तियों के प्रति हमें पूर्णतः सतर्क रहते हुए विद्यार्थियों की सुरक्षा और मानसिक-सामाजिक संरक्षण सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि इन संस्थानों में सहायता के नाम पर प्रस्ताव देने वाली बाहरी संस्थाओं की पृष्ठभूमि की गहन जांच-पड़ताल के उपरांत ही उनकी अनुमति दी जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी बचपन डे केयर सेंटरों, मानसिक मंदित आश्रय केंद्रों, समेकित विद्यालयों तथा ‘ममता’, ‘स्पर्श’ और ‘संकेत’ विद्यालयों का व्यापक निरीक्षण किया जाए। यहां अध्ययनरत बच्चों से संवाद स्थापित कर उनकी आवश्यकताओं, आकांक्षाओं और अभिभावकों की अपेक्षाओं को समझते हुए संस्थागत व्यवस्थाएं और अधिक सुदृढ़ की जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए और जब तक नियमित नियुक्ति न हो, तब तक अन्य वैकल्पिक व्यवस्था से योग्य युवाओं की सेवाएं ली जाएं। इन युवाओं को भविष्य की चयन प्रक्रियाओं में वेटेज प्रदान किया जाना चाहिए। बैठक में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की योजनाओं, उपलब्धियों तथा कार्ययोजनाओं की अद्यतन स्थिति से मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया। उन्होंने निर्देशित किया कि समस्त कल्याणकारी योजनाएं पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुसज्जित हों तथा लक्षित लाभार्थियों को समयबद्ध रूप से लाभ प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने बताया कि बीते आठ वर्षों में विभाग के बजट में दस गुना से अधिक वृद्धि की गई है, जो दिव्यांगजनों के प्रति सरकार की संवेदनशील प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि दिव्यांगजन पेंशन योजना के अंतर्गत वर्तमान में 11.04 लाख लाभार्थियों को ₹1300 करोड़ की पेंशन राशि वितरित की गई है, जबकि कुष्ठरोग पीड़ित लगभग 12 हजार व्यक्तियों को ₹3000 प्रतिमाह की दर से सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राज्यस्तरीय अभियान चलाकर यह पता लगाया जाए कि किन पात्र व्यक्तियों को अभी तक पेंशन नहीं मिल रही है, साथ ही जो अपात्र लाभ ले रहे हैं, उन्हें भी चिह्नित कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि बीते वित्तीय वर्ष में 35,136 दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, ब्रेल किट्स जैसे सहायक उपकरणों के लिए ₹28.93 करोड़ की सहायता दी गई है। मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल योजना के अंतर्गत 270 अत्यंत दिव्यांगजन को ₹2 लाख तक की मशीनें उपलब्ध कराई गईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ प्रदेश के लाभार्थियों तक पूरी तत्परता से पहुँचे, यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल योजना में सांसदों और विधायकों से भी अपनी निधि से सहयोग देने का आग्रह किया जाए। दिव्यांगजनों को राज्य परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। बैठक में जानकारी दी गई कि बीते वित्तीय वर्ष में 31 लाख से अधिक दिव्यांगजनों ने इस सुविधा का लाभ उठाया। ‘कोक्लियर इम्प्लांट योजना’ की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना तभी प्रभावी हो सकती है, जब नवजात स्तर से ही उपचार प्रारम्भ हो। उन्होंने निर्देश दिए कि हाल ही में योजना से लाभान्वित 214 बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति का फॉलोअप करते हुए उनके परिवारों से संवाद स्थापित किया जाए। शैक्षिक क्षेत्र की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि 25 जनपदों में स्थापित ‘चाइल्ड डे केयर सेंटरों’ में दृष्टि, श्रवण एवं मानसिक रूप से दिव्यांग 1390 बच्चों को आवश्यक प्रशिक्षण एवं शिक्षा दी जा रही है। वर्तमान में राज्य में संचालित 16 विशेष विद्यालय, 07 समेकित विद्यालय एवं 05 मानसिक पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से 1680 बच्चों को आवासीय शिक्षा प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि लखनऊ स्थित ‘डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय’ तथा चित्रकूट स्थित ‘जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय’ में कौशल विकास आधारित पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाए और इन संस्थानों का प्रचार-प्रसार राष्ट्रीय स्तर पर किया जाए ताकि देशभर के इच्छुक दिव्यांगजन इन संस्थानों से जुड़ सकें। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि अब तक प्रदेश में 15 लाख दिव्यांगजन यूडीआईडी पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें अधिकांश को यूनिक आईडी कार्ड निर्गत किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी 18 मंडल मुख्यालयों पर ‘दिव्यांग पुनर्वास केंद्रों’ की स्थापना प्राथमिकता के आधार पर की जाए ताकि पुनर्वास, शिक्षा और कौशल विकास से संबंधित सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही सुलभ हो सकें।
देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए पुलिस का आधुनिकीकरण जरूरी: योगी
कासगंज, 20 मई: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिये पुलिस बल का आधुनिकीकरण बहुत जरुरी है। कासगंज में 724 करोड़ रुपये की 60 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास के अवसर पर उन्होंने 25.63 हेक्टेयर में फैली नवनिर्मित अत्याधुनिक पुलिस लाइंस का उद्घाटन भी किया, इसे बनाने में 191 करोड़ रुपये खर्च किए गये हैं। योगी ने कहा कि डबल इंजन सरकार कासगंज की पौराणिक और आध्यात्मिक विकास के साथ ही यहां की बुनियादी सुविधाओं को आधुनिक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि 2008 में बना कासगंज जिला विकास के लिए तरस रहा था। 2017 से पहले की सरकारों के एजेंडे में विकास कभी नहीं रहा, अराजकता और भ्रष्टाचार ही उनकी पहचान थी। आज कासगंज विकास के पथ पर तेजी से दौड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कासगंज में नवनिर्मित पुलिस लाइंस उत्तर प्रदेश पुलिस की आधुनिकीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि 191 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह पुलिस लाइंस 1,000 पुलिस कर्मियों के लिए बैरक, अधिकारियों के लिए आवासीय सुविधाएं, ऑडिटोरियम और अन्य आधुनिक सुविधाओं से युक्त है। उन्होंने कहा कि पहले पुलिस कर्मी टूटी-फूटी बैरकों में रहने को मजबूर थे, लेकिन अब हाई-राइज इमारतों में शानदार आवासीय सुविधाएं दी जा रही हैं। यह पुलिस लाइंस देश के लिए एक मॉडल है। योगी ने उत्तर प्रदेश पुलिस आवास निगम की तारीफ करते हुए कहा कि यह पुलिस को सशक्त बनाने और आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सीएम ने कहा कि आज यूपी पुलिस माफियाओं के लिए काल बन चुकी है। कोई माफिया समानांतर सरकार नहीं चला सकता, न ही गरीब की संपत्ति पर कब्जा कर सकता है। बेटी और व्यापारी की सुरक्षा पर सेंध लगाने की कोशिश करने वालों को अब यमराज का इंतजार करना पड़ता है। उन्होने कहा कि जैसे देश की सुरक्षा के लिए पीएम मोदी के सेना का आधुनिकीकरण किया, जिसका परिणाम ऑपरेशन सिंदूर में देखनो को मिला, जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान को घुटने पर ला दिया। उन्होंने कहा कि अगर हमारे पास मजबूत सेना और बहादुर जवान न होते, तो देश की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी। आज भारतीय सेना दुश्मन के घर में घुसकर उसका खात्मा करने की क्षमता रखती है। वैसे ही देश और राज्य की आंतरिक सुरक्षा के लिए पुलिस का आधुनिकीकरण करना जरूरी है। योगी ने 2017 से पहले की समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की सरकारों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उस दौर में उत्तर प्रदेश में अराजकता का माहौल था। शाम होते ही सड़कों पर कर्फ्यू जैसा दृश्य होता था। उपद्रवी सड़कों पर तांडव करते थे। न बेटियां सुरक्षित थीं, न व्यापारी। हर तीसरे दिन दंगे होते थे और पर्व-त्योहारों से पहले लोगों के मन में डर समा जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि 2008 में कासगंज जिले के गठन के बाद भी पूर्ववर्ती सरकारों ने पुलिस लाइंस जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराईं। “2008 से 2017 तक, न जमीन दी गई, न पैसा। 12 जिलों में पुलिस लाइंस नहीं थीं। डीएम और एसपी को ब्लॉक में बैठना पड़ता था। ऐसी स्थिति में 25 करोड़ की आबादी की सुरक्षा कैसे संभव थी। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारें गुंडों के साथ मिलकर अराजकता फैलाती थीं, सज्जनों को प्रताड़ित करती थीं और विकास ठप था। मुख्यमंत्री ने कासगंज की आध्यात्मिक और पौराणिक महत्ता की चर्चा करते हुए कहा कि यह भगवान विष्णु के वराह अवतार और महर्षि कपिल की तपोभूमि है। सीएम योगी ने कहा कि सोरों का महत्व संभल के समान है। संभल भगवान विष्णु के दसवें अवतार की भूमि है, तो सोरों तीसरे अवतार की। यह हमारा सौभाग्य है कि डबल इंजन सरकार ने इस आध्यात्मिक महत्व को समझा और विकास की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया। सीएम योगी ने कहा कि जैसे अयोध्या, मथुरा और वृंदावन का विकास हो रहा है, वैसे ही सोरों का भी विकास होगा। प्रयागराज महाकुंभ ने दिखाया कि आस्था को आर्थिक विकास से जोड़ा जा सकता है। सोरों भी ऐसा ही उदाहरण बनेगा। सीएम योगी ने उन्होंने नरदई पुल के सौंदर्यीकरण, कासगंज की पौराणिक परंपरा को संरक्षित करने के लिए म्यूजियम निर्माण, सुहावन और अमापुर में बाइपास निर्माण, और दरियावगंज में झील के सौंदर्यीकरण जैसे प्रस्तावों को मंजूरी देने की घोषणा की। उन्होने कासगंज में मुख्यमंत्री कम्पोजिट विद्यालय की आधारशिला रखी, जो प्री-प्राइमरी से 12वीं कक्षा तक शिक्षा प्रदान करेगा। उन्होंने करा कि पहले चरण में इस प्रकार के विद्यालय को जिला स्तर पर, फिर तहसील, ब्लॉक और न्याय पंचायत स्तर पर यह विद्यालय स्थापित किए जाएंगे। गरीब का बच्चा भी आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर देश के विकास में योगदान देगा। सीएम योगी ने कहा कि स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, नगरीय विकास और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भी 724 करोड़ की परियोजनाओं से कासगंज में समग्र विकास को गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कासगंज के जनप्रतिनिधियों को विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा, सुशासन और विकास का जो समन्वय डबल इंजन सरकार ने स्थापित किया है, उसे कासगंज की जनता और जनप्रतिनिधियों ने तत्परता से लागू किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्नयाथ ने महिलाओं की सुरक्षा, स्वावलंबन एवं सम्मान के लिए आगरा जोन द्वारा संचालित ऑपरेशन जागृति को स्मार्ट पुसिलिंग अवार्ड वुमेन सेफ्टी 2025 से पुरस्कृत किया गया। इस दौरान सीएम योगी ने जिले में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र व टैबलेट, मुख्यमंत्री आवास योजना व पीएम आवास योजना (शहरी) के तहत आवास की चाबी, सीएम युवा के तहत लाभार्थियों को 5 लाख रुपये का चेक, घरौनी प्रमाण पत्र, आयुष्मान कार्ड व मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के लाभार्थियों को लैपटॉप का वितरित किया। इस दौरान गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, विधायक हरिओम वर्मा, देवेन्द्र सिंह राजपूत, विधान परिषद सदस्य रजनीकान्त माहेश्वरी, डॉ. मानवेन्द्र प्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष रत्नेश कश्यप समेत कई जनप्रतिनिधि व गणमान्य लोग मौजूद रहे।
पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन पर एनर्जी टास्क फोर्स को गुमराह करने का आरोप
एनर्जी टास्क फोर्स द्वारा लिए गए एकतरफा निर्णय से बिजली कर्मियों में फूटा गुस्सा वर्क टू रूल आंदोलन के साथ भोजनावकाश में प्रदेश भर में हुए विरोध प्रदर्शन लखनऊ, 18मई: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पावर कारपोरेशन के चेयरमैन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने एनर्जी टास्क फोर्स को गुमराह किया है । निजीकरण के बारे में बिजली कर्मियों की आपत्तियों से उन्होंने एनर्जी टास्क फोर्स को पूरी तरह अवगत नहीं कराया। एनर्जी टास्क फोर्स द्वारा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बारे में लिए गए एकतरफा फैसले से आज प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों में गुस्सा दिखा। बिजली कर्मचारियों ने वर्क टू रूल आंदोलन के साथ भोजन अवकाश के दौरान समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर विरोध प्रदर्शन किया। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन ने एनर्जी टास्क फोर्स के सामने विद्युत वितरण निगमों के घाटे के गलत आंकड़े रखे हैं। पॉवर कारपोरेशन ने एनर्जी टास्क फोर्स को अगले वित्तीय वर्ष में 65000 करोड़ रुपए के घाटे की बात बताई है जबकि पॉवर कारपोरेशन ने ही विद्युत नियामक आयोग को सौंपे गए ए आर आर में अगले वित्तीय वर्ष में 9206 करोड रुपए के घाटे की बात कही है। संघर्ष समिति ने कहा कि घाटे के संबंध में पावर कॉरपोरेशन द्वारा लगातार बताए जा रहे भ्रामक और झूठे आंकड़ों का खंडन करते हुए संघर्ष समिति ने 12 मई को पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन और प्रबंधन के सामने एक पीपीटी प्रेजेंटेशन किया था। इस पीपीटी प्रेजेंटेशन में बताया गया था कि यदि सरकारी विभागों का बिजली राजस्व का बकाया मिल जाए और समय से सब्सिडी की धनराशि मिल जाए तो पावर कार्पोरेशन किसी प्रकार के घाटे में नहीं है। पीपीटी प्रेजेंटेशन में यह भी बताया गया था कि गलत पावर परचेज एग्रीमेंट के चलते विगत वर्ष विद्युत वितरण निगमों ने बिना एक भी यूनिट बिजली खरीदे 6761 करोड रुपए का भुगतान किया है। इसके अतिरिक्त बहुत महंगे पावर परचेज एग्रीमेंट के चलते विद्युत वितरण निगमों ने कुल 16282 करोड रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया। यदि पावर परचेज एग्रीमेंट को पुनरीक्षित किया जाए तो 16282 करोड रुपए बचाए जा सकते हैं और विद्युत वितरण निगम किसी प्रकार के घाटे में नहीं है। इस पीपीटी प्रेजेंटेशन के बाद पावर कारपोरेशन के चेयरमैन और प्रबंधन ने यह कहा था कि बहुत अच्छा प्रेजेंटेशन है इस पर आगे वार्ता की जाएगी। किंतु आज तक कोई वार्ता नहीं की गई और एनर्जी टास्क फोर्स के सामने गलत आंकड़े रखे गए। कर्मचारियों की सेवा शर्तों के मामले में भी पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन ने एनर्जी टास्क फोर्स के सामने संघर्ष समिति द्वारा उठाए गए किसी भी बिंदु को नहीं रखा। संघर्ष समिति ने कहा कि 05 अप्रैल 2018 को ऊर्जा मंत्री, 06 अक्टूबर 2020 को वित्त मंत्री एवं ऊर्जा मंत्री, 03 दिसंबर 2022 को ऊर्जा मंत्री और 19 मार्च 2013 को ऊर्जा मंत्री के साथ हुए समझौते को मानने से पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन ने मना कर दिया है, ऐसे में निजीकरण के बाद जब पूरा मैनेजमेंट निजी घरानों के पास होगा तब पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन द्वारा सेवा शर्तों को लेकर किए जा रहे वायदे कागज का टुकड़ा मात्र होंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के पहले ही 45 प्रतिशत संविदा कर्मी हटाए जा रहे है। ऐसे में निजीकरण के बाद नौकरी बने रहने के चेयरमैन के वायदे पर कैसे भरोसा किया जा सकता है। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मचारी पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन द्वारा दिए जा रहे झूठे आंकड़े, धमकी और उत्पीड़न की कार्यवाहियों से डरने वाले नहीं हैं। निजीकरण न ही उपभोक्ताओं के हित में है और न ही कर्मचारियों के हित में। संघर्ष समिति निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष के लिए तैयार है। यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया जाता। निजीकरण के विरोध में चल रहे वर्क टू रूल आंदोलन के चौथे दिन आज बिजली कर्मचारियों ने प्रातः 10 बजे से सायं 05 बजे तक ही कार्य किया। बिजली कर्मियों ने 05 बजे के बाद उपभोक्ताओं को कोई दिक्कत नहीं होने दी किन्तु प्रबंधन के साथ पूरी तरह असहयोग किया। एनर्जी टास्क फोर्स द्वारा निजीकरण के बारे में लिए गए एकतरफा निर्णय के विरोध में आज प्रदेश भर में समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर विरोध प्रदर्शन किया गया।
प्रदेश के प्रत्येक मण्डल में स्थापित हों आयुष महाविद्यालय: योगी
लखनऊ, 17 मई : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को आयुष विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में निर्देश दिया कि प्रदेश के प्रत्येक मण्डल में एक इंटीग्रेटेड आयुष महाविद्यालय की स्थापना सुनिश्चित की जाए, जिसमें आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी समेत आयुष की सभी पद्धतियों को एक ही परिसर में उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल आयुष चिकित्सा पद्धति को सुदृढ़ करेगा, बल्कि भविष्य की स्वास्थ्य-आधारित शिक्षा प्रणाली को भी सशक्त बनाएगा। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश सरकार आयुष चिकित्सा पद्धति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मिशन मोड में कार्य कर रही है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी आयुष संस्थानों में नेचुरोपैथी और योग सेंटर की स्थापना अनिवार्य रूप से की जाए और सभी स्वीकृत शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय पदों को शत-प्रतिशत भरने की कार्यवाही समयबद्ध ढंग से पूरी की जाए। प्रदेश के हर जनपद में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर प्रारंभ किए जाएं, जो सरकारी या पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड में संचालित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आयुष विश्वविद्यालय का निर्माण गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध ढंग से हो और प्रदेश भर में आयुष विभाग की निर्माणाधीन परियोजनाओं को भी प्राथमिकता से पूरा किया जाए। उन्होंने निजी क्षेत्र को भी इसमें आगे आने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि निजी निवेशकों को आयुष सेक्टर में निवेश के लिए आकर्षित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि निजी क्षेत्र में संचालित आयुष महाविद्यालयों एवं चिकित्सालयों के बुनियादी ढांचे, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, फैकल्टी एवं स्टाफ की गुणवत्ता का गहन परीक्षण कराया जाए ताकि कोई कमी न रह जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुर्वेद में पंचकर्म जैसी विशिष्ट पद्धतियां गंभीर बीमारियों के उपचार में अत्यंत प्रभावी हैं, इसलिए इन पद्धतियों को प्रदेश के सभी आयुष संस्थानों में बढ़ावा दिया जाए। आयुष चिकित्सा की लोकप्रियता को देखते हुए यही समय है, जब भारत की परंपरागत चिकित्सा को वैज्ञानिक रूप से प्रस्तुत कर वैश्विक मंच पर स्थापित किया जाए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के सफल आयोजन के लिए अभी से तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी मंडलों, जनपदों, नगर निकायों, ग्राम पंचायतों और सरकारी विभागों में योग दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इसके लिए प्रत्येक जनपद में प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जो जनसामान्य को योग प्रशिक्षण दे सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि डाबर, बैद्यनाथ और पतंजलि जैसी आयुर्वेदिक उत्पादक संस्थाओं के साथ एमओयू कर सभी आयुष चिकित्सालयों में आवश्यक दवाओं की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी मरीज को चिकित्सकीय उपचार के लिए दवा की कमी न हो। बैठक के दौरान आयुष विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि वर्तमान में प्रदेश में 2,127 आयुर्वेदिक, 259 यूनानी और 1,598 होम्योपैथिक चिकित्सा संस्थान संचालित हैं, जो आयुष सेवाओं को जनसामान्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इन संस्थानों की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर मॉनिटरिंग की जाए और आवश्यकतानुसार संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि आयुष न केवल भारत की चिकित्सकीय परंपरा का प्रतीक है, बल्कि यह समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण को भी परिभाषित करता है। उत्तर प्रदेश को आयुष के क्षेत्र में राष्ट्रीय और वैश्विक नेतृत्व की भूमिका में लाने के लिए सभी प्रयासों को एकजुट, योजनाबद्ध और समयबद्ध रूप से आगे बढ़ाया जाए।
एनर्जी टास्क फोर्स की बैठक में बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 के एजेंडा पर संघर्ष समिति ने की आपत्ति दर्ज
लखनऊ, 16 मई: पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु 16 मई को प्रातः 11ः00 बजे एनर्जी टास्क फोर्स की हो रही बैठक के एजेंडा पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने गहरी आपत्ति दर्ज करते हुए मांग की है कि एनर्जी टास्क फोर्स कंसल्टेंट के बिडिंग डॉक्यूमेंट को स्वीकार न करे और निजीकरण की चल रही प्रक्रिया निरस्त की जाये। संघर्ष समिति के आह्वान पर कल से शुरू हुआ वर्क टू रूल आंदोलन आज भी जारी रहा। वर्क टू रूल आंदोलन के दौरान बिजली कर्मी प्रातः 10 बजे से शाम 05 बजे तक निर्धारित ड्यूटी अवधि में ही कार्य कर रहे हैं। विद्युत अभियंताओं ने पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन द्वारा आज की गई वीडियो कान्फ्रेसिंग का ठीक 05 बजे सामूहिक रूप से बहिष्कार किया। संघर्ष समिति ने कहा है कि वर्क टू रूल के दौरान ड्यूटी आवर्स के बाद प्रबन्धन का बहिष्कार किया जाएगा। आम उपभोक्ताओं को कोई दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। एनर्जी टास्क फोर्स की कल हो रही बैठक के एजेंडा पर संघर्ष समिति ने दो बिंदुओं पर आपत्तियां दर्ज की हैं। संघर्ष समिति की पहली आपत्ति है कि एनर्जी टास्क फोर्स की मीटिंग में अवैध ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन द्वारा स्ट्रेटजी पेपर/ बिडिंग डॉक्यूमेंट का प्रस्तुतीकरण किया जाना है। संघर्ष समिति ने कहा की ग्रांट थॉर्टन द्वारा दिया गया झूठा शपथ पत्र प्रकाश में आने के बाद उसने स्वीकार कर लिया है कि उसने झूठा शपथ पत्र दिया था। इसके साथ ही उसने यह भी स्वीकार कर लिया है कि उस पर अमेरिका में पेनल्टी लगाई गई थी। इन दोनों आरोपों के स्वीकार कर लेने के बाद पत्रावली पर इंजीनियर ऑफ द कॉन्ट्रैक्ट ने यह अनुशंसा की है कि ग्रांट थॉर्टन का कंसल्टेंट के रूप में नियुक्ति का आदेश निरस्त कर दिया जाए। इस फाइल को विगत एक माह से पावर कारपोरेशन के चेयरमैन दबाए बैठे हैं और कोई निर्णय नहीं ले रहे हैं। ऐसी स्थिति में अवैध ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट द्वारा एनर्जी टास्क फोर्स के सामने स्ट्रेटजी पेपर/ बिडिंग डॉक्यूमेंट का प्रस्तुतीकरण किया जाना पूरी तरह से अवैधानिक है। संघर्ष समिति की दूसरी आपत्ति 09 अप्रैल 2025 को भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट को लेकर है। संघर्ष समिति ने बताया की 09 अप्रैल 2025 का कथित ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय की वेबसाइट पर नहीं है और पब्लिक डोमेन में भी नहीं है। इसके पूर्व भारत सरकार ने सितंबर 2020 में एक स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट का ड्राफ्ट जारी किया था जिसे अभी तक फाइनल नहीं किया गया है। यदि भारत सरकार ने 09 अप्रैल 2025 को कोई नया स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट का ड्राफ्ट जारी किया है तो उसे सर्कुलेट किया जाना चाहिए और सभी स्टेक होल्डर्स की उस पर आपत्ति मांगी जानी चाहिए। इसके पूर्व इस आधार पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के बिडिंग डॉक्यूमेंट को फाइनल किया जाना पूरी तरह से गलत होगा। संघर्ष समिति ने कहा कि कंसल्टेंट की नियुक्ति के समय जारी किए गए आर एफ पी डॉक्यूमेंट में वर्ष 2020 के ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट का हवाला दिया गया है। ऐसी स्थिति में एनर्जी टास्क फोर्स की बैठक में 09 अप्रैल 2025 के कथित ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट पर प्रस्तुतीकरण किया जाना पूरी तरह गलत होगा। संघर्ष समिति ने टाटा पावर के प्रबंध निदेशक प्रवीर सिन्हा के आज मुंबई से जारी किए गए वक्तव्य पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की है। टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित समाचार के अनुसार टाटा पॉवर के एम डी ने कहा है कि हमारे डिस्कसन के आधार पर बिडिंग डॉक्यूमेंट तैयार किया गया है और टाटा पॉवर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम की बिडिंग में भाग लेने के लिए तैयार है। संघर्ष समिति ने कहा कि टाटा पावर के प्रबंध निदेशक का यह बयान पावर कारपोरेशन के चेयरमैन और कार्पोरेट घरानों की मिलीभगत को पूरी तरीके से उजागर कर देता है। संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के पीछे भारी भ्रष्टाचार हो रहा है और आश्चर्य की बात यह है कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की नीति को धता बताते हुए चेयरमैन निजीकरण करने पर आमादा हैं। संघर्ष समिति के आह्वान पर वर्क टू रूल आंदोलन आज दूसरे दिन जारी रहा। आज प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर विरोध सभा हुई।