उत्तर प्रदेश में 42 जनपदों के बिजली के निजीकरण के विरोध में देश के 27 लाख बिजली कर्मी सड़कों पर उतरे

लखनऊ, 29 मई : नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर आज देश के सभी प्रांतों के बिजली कर्मचारियों ,जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओ ने उत्तर प्रदेश में 42 जनपदों के किये जा रहे बिजली के निजीकरण के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। उप्र के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर आज बिजली कर्मचारियों ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन कर अपने आक्रोश को व्यक्त किया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के पदाधिकारियों ने बताया कि यह चर्चा है कि निजीकरण हेतु नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन को झूठा शपथ पत्र देने के बावजूद निदशक वित्त श्री निधि नारंग ने उसे क्लीन चिट दे दी है। उल्लेखनीय है कि इंजीनियर ऑफ कांट्रैक्ट ने झूठा शपथ पत्र देने के मामले में ग्रांट थॉर्टन का नियुक्ति आदेश रद्द करने की सिफारिश की थी। इसे न मान कर अब अवैध ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन को क्लीन चिट देकर निजीकरण की प्रक्रिया तेज की जा रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि इस घटना से ऐसा प्रतीत होता है कि प्रबंधन की निजी घरानों से मिली भगत है। इसीलिए तीसरी बार श्री निधि नारंग को सेवा विस्तार दिया गया है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने विद्युत वितरण निगमों में घाटे के भ्रामक आंकड़ों देकर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय लिया है जिससे उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मी विगत 06 माह से लगातार आंदोलन कर रहे हैं किंतु अत्यंत खेद का विषय है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने आज तक एक बार भी उनसे वार्ता नहीं की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में गलत पावर परचेज एग्रीमेंट के चलते विद्युत वितरण निगमों को निजी बिजली उत्पादन कंपनियों को बिना एक भी यूनिट बिजली खरीदे 6761 करोड रुपए का सालाना भुगतान करना पड़ रहा है । इसके अतिरिक्त निजी घरानों से बहुत महंगी दरों पर बिजली खरीदने के कारण लगभग 10000 करोड रुपए प्रतिवर्ष का अतिरिक्त भार आ रहा है। उत्तर प्रदेश में सरकारी विभागो पर 14400 करोड रुपए का बिजली राजस्व का बकाया है। उत्तर प्रदेश सरकार की नीति के अनुसार किसानों को मुफ्त बिजली दी जाती है, गरीबी रेखा से नीचे के बिजली उपभोक्ताओं को 03 रुपए प्रति यूनिट की दर पर बिजली दी जाती है जबकि बिजली की लागत रुपए 07.85 पैसे प्रति यूनिट है। बुनकरों आदि को भी सब्सिडी दी जाती है। सब्सिडी की धनराशि ही लगभग 22000 करोड रुपए है। उत्तर प्रदेश सरकार इन सबको घाटा बताती है और इसी आधार पर निजीकरण का निर्णय लिया गया है। उत्तर प्रदेश में किए जा रहे बिजली के निजीकरण के विरोध में आज देशभर में 27 लाख बिजली कर्मचारियों ने सभी जनपदों और परियोजनाओं पर भोजन अवकाश के दौरान सड़क पर उतरकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया और उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों के साथ अपनी एकजुटता दिखाई। बिजली कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों का कोई भी उत्पीड़न करने की कोशिश की गई तो देश के तमाम 27 लाख बिजली कर्मी मूक दर्शन नहीं रहेंगे और सड़क पर उतर कर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश सरकार की होगी।  आज मुख्यतः वाराणसी, आगरा ,मेरठ ,प्रयागराज, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, देवी पाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सीतापुर, केस्को, कानपुर, मथुरा, अलीगढ़, बांदा, झांसी, परीक्षा, जवाहरपुर, हरदुआगंज, पनकी, अनपरा ,ओबरा और पिपरी में बड़े विरोध प्रदर्शन किए गए।

लैब से लैंड पर जाकर किसानों से संवाद नई क्रांति की शुरुआत करेगा : सीएम योगी

लखनऊ, 29 मई : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लैब, आईसीआर, कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र और अन्य संस्थानों में कार्यरत वैज्ञानिक पहली बार लैंड पर जाकर किसानों के साथ कृषि की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए कार्य करेंगे। ‘विकसित कृषि संकल्प’ अभियान का उद्देश्य लैब से लैंड तक जाना है। कृषि वैज्ञानिक लैब के साथ ही लैंड पर भी जाएंगे और किसानों से संवाद करेंगे। यह संवाद कृषि क्षेत्र में नई क्रांति की शुरुआत करेगा। लैब में जो भी काम हो रहे हैं, वह धरातल पर दिखना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ का यूपी में शुभारंभ किया। यह अभियान 29 मई से 12 जून तक चलेगा। इस अभियान के लिए सीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए पीएम मोदी ने जो विजन दिया है, कृषि उसकी आधारशिला बनेगी। कृषि के माध्यम से लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में क्या कदम उठाए जा सकते हैं। इस पर कृषि वैज्ञानिक, कृषि विभाग के अधिकारी-कार्मिक, औद्यानिक फसल, खेती, डेयरी, मत्स्य पालन से जुड़े किसानों को खेती के बारे में आधुनिक जानकारी उपलब्ध कराएंगे। इस अभिनव पहल के तहत वैज्ञानिक क्लाइमेटिक जोन (भौगोलिक, सामाजिक स्थिति) को देखेंगे और किसानों को अर्ली बीज व लेट वेरायटी का प्रोडक्शन पर क्या असर पड़ता है, इसकी भी जानकारी देंगे। सीएम योगी ने कहा कि 8 वर्ष के अंदर यूपी में डबल इंजन सरकार ने किसानों के जीवन में परिवर्तन लाने के अभियान को अपने हाथों में लिया। यूपी में कृषि के लिए बहुत स्कोप है। देश की कुल कृषि योग्य भूमि का 10-11 फीसदी हमारे पास है। इसी कृषि योग्य भूमि में यूपी का किसान 22-23 फीसदी खाद्यान्न उत्पादित करता है। उन्होंने पिछली सरकारों पर आरोप लगाया कि किसान उनके सरकार के एजेंडे का हिस्सा नहीं बन पाया था। किसान को बीज, एमएसपी का दाम, समय पर खाद, खेत के लिए पानी, तकनीक, स्वायल हेल्थ की व्यवस्था नहीं थी। लागत कम, उत्पादक अधिक पर जोर नहीं था। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी पीएम मोदी के शीर्ष एजेंडे में है। देश में 11 वर्ष के अंदर खेती-किसानी के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन हुए हैं। उन्होंने स्वायल हेल्थ कार्ड का अभियान चलाया। किसानों को पीएम कृषि बीमा योजना, पीएम कृषि सिंचाई योजना, एमएसपी, पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ मिल रहा है। किसानों को तकनीक से जोड़ने का कार्य हुआ। पिछले 10-11 वर्ष में काफी परिवर्तन हुए हैं। 2014-15 में किसान को एक हजार रुपए भी गेहूं का दाम नहीं मिलता था, आज एमएसपी 2,425 रुपए है। किसानों ने बाजार में 2,800 रुपए में गेहूं बेचा है। यह अन्नदाता किसान के जीवन में आए परिवर्तन का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यूपी में सिंचाई सुविधा में बढ़ोतरी हुई। 15 लाख किसानों के व्यक्तिगत ट्यूबवेल के कनेक्शन फ्री किए गए। राज्य सरकार प्रतिवर्ष ढाई हजार करोड़ रुपए जमा करती है। सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना, बाणसागर परियोजना, अर्जुन सहायक आदि परियोजना के माध्यम से डबल इंजन सरकार ने प्रदेश में 23 लाख हेक्टेयर भूमि को अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए गए। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार यूपी में कृषि विज्ञान केंद्र को लागू नहीं करना चाहती थी, लेकिन जैसे ही सूर्य प्रताप शाही कृषि मंत्री बने, उन्होंने 20 नए कृषि विज्ञान केंद्र को लाने में सफलता प्राप्त की। आज 89 कृषि विज्ञान केंद्र कार्य कर रहे हैं। हम महात्मा बुद्ध के नाम पर कुशीनगर में पांचवां कृषि विश्वविद्यालय स्थापित करने जा रहे हैं। प्रदेश के अंदर कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से नई तकनीक, बीज की जानकारी किसानों को दी जा रही है। कृषि विवि भी इनोवेशन और कृषि के क्षेत्र में रिसर्च एंड डवलपमेंट के नए केंद्र के रूप में उभरे हैं। उनकी नई गति प्रदेश की प्रगति में सहायक हो रही है। सीएम योगी ने आगे कहा कि किसान अपनी आय को बढ़ा रहा है। 2017 के पहले सुनने को मिलता था कि किसान को पर्ची नहीं मिली तो उसने खेत में आग लगा दी। किसान को वर्षों से गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं होता था। वह मजबूर होकर फसल में आग लगा देता था। किसान का आक्रोश सरकार की स्थिति को बयां कर देता था। 1996 से 2017 (22 वर्ष) तक जितना गन्ना मूल्य भुगतान हुआ, उससे 72 हजार करोड़ रुपए अधिक (2 लाख 85 हजार करोड़) हमने आठ वर्ष में किसानों को दिया है। बंद हो रही चीनी मिलों को चलाया गया, नई चीनी मिलों को स्थापित किया गया। 2017 के पहले चीनी मिलें बंद होती थीं। आज चीनी मिल लगाने के प्रस्ताव आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगले चार वर्ष में यूपी की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाएंगे। इसके लिए नया प्रयास प्रारंभ करने जा रहे हैं। यह कृषि क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन होगा। सीएम ने यूपी एग्रीज का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम के किसानों ने खेती समेत प्रत्येक क्षेत्र में प्रगति की, मॉडर्न तकनीक अपनाया, नए बीज उपलब्ध कराए। वे लोग लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में सफल हुए। मध्य और पूर्व के किसान इस दिशा में काफी पीछे थे, इसलिए वर्ल्ड बैंक के माध्यम से चार हजार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट को इस वर्ष बढ़ाया गया है। इससे पूर्वांचल व बुंदेलखंड-विंध्य क्षेत्र के 28 जनपदों को आच्छादित करने जा रहे हैं। सीएम योगी ने कहा कि क्लाइमेट चेंज हमारी चुनौती है। मानसून 15-20 दिन पहले दिखाई दे रहा है, लेकिन आशंका है कि डेढ़-दो महीने बीच में सूखा रहेगा, फिर बारिश आएगी। उस समय की चुनौती की रणनीति अभी तैयार करनी होगी, फिर बारिश आएगी। यह चेंज उत्पादन पर असर डालेगा। अच्छा बीज पड़ा तो अच्छा उत्पादन होगा, बीज एक महीने लेट होगा तो उत्पादन पर 30 फीसदी का अंतर डालेगा। अच्छा बीज मिल सके, इसके लिए किसानों को जागरूक करना पड़ेगा। आठ वर्षों में मिलेट्स, नेचुरल फॉर्मिंग, दलहनी-तिलहनी फसलों का उत्पादन बढ़ा है, लेकिन इसके लिए और भी प्रयास करने चाहिए। इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि आज विकसित कृषि संकल्प अभियान का शुभारंभ हो रहा है। यूपी के सभी 75

उत्तरप्रदेश: निजीकरण के विरोध में 29 मई को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन

लखनऊ, 28 मई: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कल वाराणसी में ऊर्जा मंत्री द्वारा निजीकरण के बाद आगरा और ग्रेटर नोएडा में बहुत सुधार हो जाने के दावे को तथ्यों से परे बताते हुए कहा है कि ग्रेटर नोएडा और आगरा में निजीकरण से पावर कारपोरेशन को प्रति वर्ष अरबों रुपए का घाटा हो रहा है और सुधार की बात पूरी तरह गलत है। उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के विरोध में 29 मई को देश व्यापी विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। 29 मई से बिजली कर्मचारियों का प्रबंधन से पूर्ण असहयोग आंदोलन प्रारंभ हो रहा है। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि आगरा में निजीकरण से प्रतिवर्ष लगभग 1000 करोड रुपए का पावर कारपोरेशन को घाटा उठाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पावर कारपोरेशन ने पिछले वर्ष 05 रुपए 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद कर निजी कंपनी को 04 रुपए 36 पैसे प्रति यूनिट की दर पर दी। टोरेंट पावर कंपनी को 2300 मिलियन यूनिट बिजली आपूर्ति करने में पावर कारपोरेशन को इस तरह 275 करोड रुपए का घाटा हुआ। आगरा लेदर इंडस्ट्री का सबसे बड़ा केंद्र है और आगरा में पर्यटन उद्योग होने के नाते सबसे अधिक पांच सितारा होटल है। इंडस्ट्रियल और कमर्शियल कंज्यूमर्स अधिक होने के कारण आगरा में प्रति यूनिट बिजली विक्रय दर 07 रुपए 98 पैसे हैं। निजीकरण के इस प्रयोग में सस्ती बिजली खरीद कर महंगी दरों पर बेचने में टोरेंट पावर कंपनी को प्रतिवर्ष 800 करोड रुपए का मुनाफा हो रहा है। यदि निजीकरण न होता तो यह मुनाफा पावर कारपोरेशन को मिलता। इसके अतिरिक्त महंगी दर पर बिजली खरीद कर टोरेंट पावर कंपनी को सस्ती दर पर देने में 275 करोड रुपए प्रति वर्ष का घाटा भी न होता। साफ है यदि आगरा का निजीकरण न हुआ होता तो पावर कॉरपोरेशन को कम से कम 1000 करोड रुपए प्रति वर्ष का मुनाफा होता। उन्होंने बताया कि आगरा में निजी कंपनी किसानों को मुक्त बिजली नहीं दे रही है। ग्रेटर नोएडा में भी निजी कंपनी किसानों को मुफ्त बिजली नहीं दे रही है जबकि उत्तर प्रदेश सरकार की किसानों को मुक्त बिजली देने की नीति है। संघर्ष समिति ने कहा कि ग्रेटर नोएडा में यदि बिजली व्यवस्था इतनी अच्छी चल रही है तो उत्तर प्रदेश सरकार ग्रेटर नोएडा की निजी कंपनी का लाइसेंस निरस्त कराने के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमा क्यों लड़ रही है ? उन्होंने कहा कि ऊर्जा मंत्री का आगरा और ग्रेटर नोएडा को लेकर दिया गया बयान तथ्यों से परे है। संघर्ष समिति ने कहा कि माननीय ऊर्जा मंत्री जी निजीकरण के फायदे गिना रहे हैं। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन पर झूठा शपथ पत्र देने और अमेरिका में पेनल्टी के मामले पर ऊर्जा मंत्री कोई बयान क्यों नहीं दे रहे हैं ? माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति है। इसके बावजूद पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति में ही भ्रष्टाचार हो रहा है। अर्थात निजीकरण की सारी प्रक्रिया की बुनियाद में ही भ्रष्टाचार है। ऊर्जा मंत्री को इस पर तत्काल कार्यवाही करनी चाहिए। संघर्ष समिति ने बताया कि निजीकरण के विरोध में उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारियों के समर्थन 29 मई को पूरे देश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर लगभग 27 लाख बिजली कर्मी भोजन अवकाश के दौरान व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे । 29 मई को उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी भी व्यापक विरोध प्रदर्शन कर निजीकरण के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज करेंगे। 29 मई से प्रारंभ हो रहे हैं आंदोलन के दूसरे चरण में बिजली कर्मचारी और अभियंता प्रबंधन के साथ पूर्ण असहयोग करेंगे । इस दौरान वे प्रबंधन के जन विरोधी और कर्मचारी विरोधी आदेशों का पालन नहीं करेंगे। प्रबंधन की किसी बैठक वीं सी को अटेंड नहीं करेंगे । किंतु बिजली कर्मचारी अपने आंदोलन के दौरान उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होने देंगे । उपभोक्ताओं की सभी समस्याएं अटेंड की जाएगी। संघर्ष समिति के आवाहन पर आज वाराणसी, आगरा, मेरठ, गोरखपुर, प्रयागराज ,आजमगढ़, बस्ती, मिर्जापुर, देवीपाटन ,अयोध्या, सुल्तानपुर ,बरेली, मुरादाबाद, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर ,मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, अलीगढ़, एटा, मथुरा, फिरोजाबाद, बांदा, झांसी ,परीक्षा, हरदुआगंज, जवाहरपुर ,ओबरा, पिपरी ,अनपरा और पनकी में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया गया।

मंगोलियाई सेना के प्रतिनिधिमंडल ने भारत में शत्रुजीत ब्रिगेड का दौरा किया

आगरा, 28 मई : मंगोलिया की सेना के 19 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय सेना की शत्रुजीत ब्रिगेड का दौरा कर पेशेवर पहलुओं और क्षमता की प्रत्यक्ष जानकारी हासिल की। मंगोलियाई सेना के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ब्रिगेडियर जनरल ओन्ट्सगोइबयार लखमजी ने किया। यह यात्रा भारत-मंगोलिया रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। यह जानकारी एक्स पोस्ट में सूर्यकमांड आईए ने आज सुबह दी। सूर्यकमांड आईए भारतीय सेना के मध्य कमान का आधिकारिक एक्स अकाउंट है। सूर्यकमांड आईए ने एक्स पर लिखा, ” ब्रिगेडियर जनरल ओन्ट्सगोइबयार लखमजी के नेतृत्व में मंगोलियाई सेना के 19 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने शत्रुजीत ब्रिगेड का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल को एयरबोर्न सैनिकों के पेशेवर पहलुओं के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी दी गई। यह भारत-मंगोलिया द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण कदम है।

गरीब कल्याण के साथ समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है अच्छी सरकार : योगी

गोरखपुर, 27 मई: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब अच्छी सरकार होती है तो वह विकास और गरीब कल्याण के कार्यक्रमों को तेजी से आगे बढ़ाते हुए समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है। सुरक्षा के बेहतर माहौल में हरेक व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक, विकासपरक और कल्याणकारी परिवर्तन लाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में विगत 11 साल से देश में और आठ साल से प्रदेश में यही परिवर्तन देखने को मिल रहा है। योगी मंगलवार को हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (खाद कारखाना) के परिसर में 1200 जोड़ों के मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह को संबोधित कर रहे थे। सरकार ने सामूहिक विवाह योजना में प्रति जोड़ा खर्च 51 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया है और बढ़ी हुई धनराशि के साथ आज यह पहला आयोजन था। मुख्यमंत्री ने कहा कि वास्तविक सरकार वही है जो जनता के घर जाकर उनकी समस्याओं का समाधान निकाल सके। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोक कल्याणकारी कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का ही एक अभियान है। यह कार्यक्रम बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना की अगली कड़ी है। यह बाल विवाह, बहुविवाह और दहेज प्रथा जैसी सामाजिक रूढ़ियों पर भी प्रहार है। योगी ने कहा कि आज सरकार की मंशा हर एक नागरिक के जीवन में परिवर्तन लाने की है। भारत को दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बनाने के लिए हमें समाज के अंतिम पायदान पर बैठे प्रत्येक व्यक्ति के बारे में सोचना होगा। हमें उसके जीवन में परिवर्तन लाना होगा। इसी परिवर्तन के उद्देश्य से सरकार द्वारा मातृ वंदना योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं योजना, कन्या सुमंगला योजना, आयुष्मान योजना आदि अन्य कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। सामूहिक विवाह योजना भी इसी प्रगतिशील सोच का प्रतीक है। उन्होने कहा कि बेटी को बचाना है तो उसे पढ़ाना होगा, उसको सशक्त बनाना होगा। बेटी को आगे बढ़ाने के लिए हमें सभी व्यवस्थाएं करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में सरकार द्वारा निर्धनों की पीड़ा को समाप्त करने के लिए बेटी के जन्म से लेकर स्नातक तक की पढ़ाई के लिए मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना चलायी गयी। आज यह योजना सफलतापूर्वक चल रही है। इसके तहत प्रदेश के साधनहीन और वंचित परिवारों की लगभग 24 लाख बालिकाओं को जन्म से लेकर स्नातक की शिक्षा के लिए 25 हजार की धनराशि दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बेटी के जन्म के बाद रजिस्ट्रेशन करते ही एक निश्चित धनराशि उसके खाते में डाल दी जाती है। बेटी के 1 वर्ष होने पर एवं सभी टीका से आच्छादित होने पर भी एक निश्चित धनराशि दी जाती है। इसके बाद बेटी को कक्षा 1, कक्षा 6 एवं कक्षा 9 में प्रवेश करने के बाद और उसके आगे आईटीआई, डिप्लोमा या अन्य कोर्स में प्रवेश लेने पर एक निश्चित धनराशि खाते में भेजी जाती है। आज यह धनराशि बेटी की सुरक्षा का संबल बन रहा है। उन्होने कहा कि कन्या सुमंगला योजना में शिक्षा के लिए उचित व्यवस्था के बाद बेटी की शादी के लिए सरकार द्वारा मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना चलायी गयी। आज गरीब अभिभावक को बेटी के विवाह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत सरकार गरीब कन्या का विवाह कराने का भी कार्य कर रही है। इस सामूहिक विवाह में मुख्यमंत्री के साथ विधायकगण एवं अन्य जनप्रतिनिधि भी सम्मिलित होते है। उन्होंने कहा “ मुझे भी इस कार्यक्रम में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। यह हम सभी का सौभाग्य है कि हम इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शामिल हुए हैं, जो बाल विवाह, दहेज प्रथा व बहुविवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों से मुक्ति दिलाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि इस योजना में जाति, मत, मजहब एवं क्षेत्र के बंधन से मुक्त होकर सभी अपनी रीति-रिवाज के अनुसार रजिस्ट्रेशन कर सामूहिक विवाह में शामिल हो सकते है। ” मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले समाज कल्याण विभाग द्वारा अनुसूचित जाति-जनजाति की कन्याओं के लिए केवल 20 हजार रुपये दिये जाते थे। यह धनराशि भेदभाव के साथ दी जाती थी, सभी को नहीं प्राप्त होती थी। 20 हजार की धनराशि भी पर्याप्त नहीं थी। यह धनराशि समय पर भी नहीं मिलती थी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना 2017 में शुरू की गयी थी तब इसकी राशि 35 हजार थी बाद में इसे बढ़ाकर 51 हजार एवं 1 अप्रैल 2025 से इस धनराशि को बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दिया गया है। इसमें 60 हजार रुपये बेटी के खाते में जमा होंगे। शेष धनराशि गृहस्थी के सामान, कन्या के जेवर एवं भोजन व अन्य व्यवस्थाओं में व्यय किया जायेगा। सरकार यह कार्य दहेज प्रथा, बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों को तिलांजलि देकर प्रत्येक गरीब के जीवन में परिवर्तन लाने के लिए कर रही है। उन्होने कहा कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन में आज हर गरीब को शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है। आज देश में 4 करोड़ गरीबों को आवास, 10 करोड़ गरीबों को उज्जवलला योजना के तहत रसोई गैस कनेक्शन, 12 करोड़ को शौचालय, 45 करोड़ को जनधन खाते एवं 50 करोड़ गरीबों को आयुष्मान योजना का लाभ दिया गया है। इसी प्रकार सरकार द्वारा पिछले 5 वर्षो से 80 करोड़ लोगों को निशुल्क राशन दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन की सरकार हर उस कार्यक्रम को, जिससे गरीबों का कल्याण होता है, लगातार आगे बढ़ा रही है। आज इन्हीं प्रयासो का परिणाम है कि भारत में विगत 10 वर्षो में 25 करोड़ लोग बहु आयामी गरीबी से उबरे है। उत्तर प्रदेश में भी छह करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से उपर उठाने में मदद मिली है। योगी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनी विवाद को खत्म करने के लिए सरकार द्वारा प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना लागू की गयी है। इस योजना के माध्यम से सरकार द्वारा गरीबों को उनके घर के मालिकाना अधिकार पत्र दिये जा रहे है। यूपी में 1 करोड़ 6 लाख परिवारों को उनके घर का अधिकार पत्र दिया गया है। उन्होंने कहा कि पहले की सरकार स्ट्रीट वेंडर्स के लिए कोई कार्य नहीं करती थी। ठेला, रेहड़ी, खोमचा लगाने वाले गरीबों का पहले हर जगह शोषण होता था, मगर आज सरकार द्वारा उनको व्यवसाय के लिए लोन

हर पीड़ित को न्याय दिलाना और जरूरतमंदों के चेहरे पर मुस्कान लाना ही सरकार का उद्देश्य : सीएम योगी

लखनऊ, 26 मई : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में प्रदेश भर से आए फरियादियों की समस्याएं सुनी। इस दौरान यहां प्रदेश भर से लगभग 65 से अधिक पीड़ित पहुंचे। सीएम योगी हर पीड़ित के पास स्वयं पहुंचे, समस्या सुनी, प्रार्थना पत्र लिया और उन्हें अहसास कराया कि हर समस्या में सरकार साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री योगी ने निराकरण के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि हर पीड़ित को न्याय दिलाना और चेहरे पर मुस्कान लाना ही सरकार का उद्देश्य है। जनता दर्शन में पुलिस, राजस्व, चिकित्सा सहायता, पेंशन, फीस माफी, आवास, आंगनबाड़ी आदि से जुड़े अनेक मामले आए, जिस पर प्रार्थना पत्र लेकर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों के साथ पहुंचे बच्चों को पुचकारा-दुलारा और चॉकलेट भी दी। इस दौरान सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्थानीय शिकायतों का समाधान जनपद स्तर पर ही कराया जाए। जो समस्याएं शासन स्तर से निस्तारित होनी हैं, उन्हें ही यहां भेजी जाए। हर पीड़ित को न्याय दिलाकर चेहरे पर मुस्कान लाना ही सरकार का उद्देश्य और समस्याओं का निस्तारण सरकार की विशेष प्राथमिकता है। अफसरों से कहा कि पीड़ितों की समस्याओं को गंभीरता और संवेदनशीलता से लेते हुए उनका समाधान त्वरित और संतुष्टि परक तरीके से कराना सुनिश्चित कराएं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता दर्शन में आए बच्चों को दुलार किया। उन्होंने बच्चों से बातें की, पढ़ाई के बारे में जानकारी ली, फिर चॉकलेट-टॉफी प्रदान कर उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया। जनता दर्शन में आए दिव्यांग की भी शिकायत सुनकर सीएम ने तत्काल निराकरण का निर्देश दिया। सीएम योगी के कार्यालय ने जनता दर्शन की फोटो शेयर करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ”जन-जन की सुरक्षा, समृद्धि व खुशहाली सीएम योगी की शीर्ष प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर ‘जनता दर्शन’ में आए लोगों की समस्याएं सुनी एवं अधिकारियों को जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण हेतु निर्देशित किया।”

पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन बना रहा है हड़ताल का माहौल

लखनऊ, 25 मई: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन पर आरोप लगाया है कि वह दमन और उत्पीड़न का सहारा लेकर इस भीषण गर्मी में प्रदेश पर बिजली हड़ताल थोपना चाहता है जबकि संघर्ष समिति की हड़ताल की कोई नोटिस नहीं है। पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन हड़ताल का हवाला देकर निदेशकों को कार्य विस्तार देने में लगे हैं। निदेशक वित्त, निधि नारंग को हड़ताल के नाम पर तीसरी बार कार्य विस्तार दिया गया है। इसके अतिरिक्त उत्पादन निगम के निदेशक तकनीकी, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के निदेशक वाणिज्य और निदेशक पारेषण को हड़ताल के नाम पर चेयरमैन ने कार्य विस्तार दिलाया है। संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों की आज लखनऊ में हुई बैठक में प्रदेश की आम जनता को आश्वस्त किया गया कि निजीकरण के विरोध में चल रहे शान्तिपूर्ण ध्यानाकर्षण आन्दोलन से आम उपभोक्ताओं को कोई दिक्कत नहीं होने दी जायेगी। संघर्ष समिति ने यह भी निर्णय लिया कि 26 मई से 28 मई तक उपभोक्ताओं को साथ लेकर सभी जनपदों में निजीकरण के विरोध में व्यापक आन्दोलन चलाया जायेगा। संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के विरोध में चल रहे आन्दोलन के दौरान पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन और प्रबन्धन से पूरी तरह असहयोग किया जायेगा किन्तु आम उपभोक्ताओं विशेषतया अस्पताल, रेलवे, पेयजल आपूर्ति आदि आवश्यक सेवाओं को बाधित नहीं होने दिया जायेगा। पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन के निर्देश पर जल निगम के टैंकरों में पेय जल भरे जाने की तैयारी अनावश्यक तौर पर आम जनता में भय का वातावरण बनाने के लिए की जा रही है जिसका निहित उद्देश्य हड़ताल थोप कर निजीकरण करना है। संघर्ष समिति ने कहा कि यह जानकारी मिली है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के टेण्डर में रूचि लेने वाले निजी घरानों के प्रतिनिधियों ने लखनऊ में डेरा डाल रखा है। यह भी चर्चा है कि उनका पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन से लगातार सम्पर्क बना हुआ है। निजी घरानों की मदद करने के लिए ही पॉवर कारपोरेशन हड़ताल थोपने में लगा है। संघर्ष समिति ने सभी जनपदों में बिजली कर्मियों को निर्देश दिया है कि वे इस बात पर कड़ी नजर रखें कि प्रबन्धन की ओर से बिजली व्यवस्था में जान-बूझ कर बड़ी गड़बड़ न की जाये और अनावश्यक तौर पर हड़ताल की स्थिति न आये। संघर्ष समिति ने इस हेतु सभी जनपदों में नजर रखने के लिए अलग टीम बना दी है। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों संजय सिंह चौहान, जितेन्द्र सिंह गुर्जर, गिरीश पांडेय, महेन्द्र राय, पी.के.दीक्षित, सुहैल आबिद, शशिकान्त श्रीवास्तव, चंद्र भूषण उपाध्याय, आर वाई शुक्ला, छोटेलाल दीक्षित, देवेन्द्र पाण्डेय, आर बी सिंह, मो वसीम, मायाशंकर तिवारी, राम निवास त्यागी, मो इलियास, श्रीचन्द, सरजू त्रिवेदी, योगेन्द्र कुमार, ए.के. श्रीवास्तव, के.एस. रावत, रफीक अहमद, पी एस बाजपेई, जी.पी. सिंह, राम सहारे वर्मा, प्रेम नाथ राय, विशम्भर सिंह ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में विगत 06 माह से शान्तिपूर्ण आन्दोलन चल रहा है। उन्होंने कहा कि संघर्ष समिति ने बेमियादी हड़ताल की कोई नोटिस नहीं दी है किन्तु अत्यन्त दुर्भाग्य की बात है कि पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन शासन के उच्चाधिकारियों को और जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर लिख रहे हैं कि ऊर्जा निगमों में हड़ताल होने वाले है और इससे निपटने के ब्लू प्रिन्ट जारी किये जा रहे हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि ऐसा लगता है कि पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन की निजी घरानों के साथ मिली-भगत है और वे निजीकरण करने हेतु इतने आतुर हैं कि भीषण गर्मी में बिजली कर्मियों का दमन और उत्पीड़न के जरिये हड़ताल को थोपना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रबन्धन ने हजारों बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियन्ताओं को अनुशासनात्मक कार्यवाही की नोटिस दे दी है। नोटिस में एक ही भाषा का प्रयोग किया गया है। जो कर्मचारी पिछले 06 माह से एक बार भी शक्तिभवन नहीं आये उनपर शक्तिभवन में सभा करके अशान्ति फैलाने का अरोप नोटिस में लगाया जा रहा है। यह सब हड़ताल थोपने की तैयारी है। आज अवकाश के दिन सभी जनपदों और परियोजनाओं पर बिजली कर्मचारियों ने सभा कर निजीकरण के विरोध में चल रहे आन्दोलन को तेज धार देने की रणनीति तय की और उपभोक्ताओं को साथ लेकर आन्दोलन चलाने के लिए उपभोक्ताओं से व्यापक जनसम्पर्क किया।

पाकिस्तान समाप्त होने की कगार पर, आतंकवाद ही बनेगा उसके अंत का कारण : सीएम योगी

अयोध्या, 23 मई : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अपने एक दिवसीय अयोध्या दौरे के क्रम में हनुमानगढ़ी में श्रीहनुमत कथा मंडपम का भव्य लोकार्पण किया। इस दौरान सीएम योगी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता और भारतीय सेनाओं के शौर्य की प्रशंसा करते हुए पाकिस्तान पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ये नया भारत है, भारत छेड़ता नहीं है और कोई छेड़े तो उसे छोड़ता भी नहीं है। आतंकवाद पाकिस्तान को ले डूबेगा और इसमें ज्यादा दिन नहीं बचे हैं। सीएम योगी ने सनातन धर्म को भारत के अस्तित्व और वजूद का आधार बताते हुए कहा कि इसके सम्मान और गरिमा के खिलाफ कुछ भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने हनुमानगढ़ी के नागाओं और संतों से आह्वान किया कि वे अपने योद्धा भाव को बनाए रखें और सनातन धर्म की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहें। उन्होंने पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि भारत छेड़ता नहीं है और कोई छेड़े तो उसे छोड़ता भी नहीं है। सीएम योगी ने हनुमान जी का उदाहरण देते हुए कहा कि बजरंग बली ने रावण के दरबार में यही संदेश दिया था। पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देकर खुद को बर्बाद कर रहा है। भारतीय सेना की कार्रवाई में 124 से अधिक आतंकवादी मारे गए हैं। यह गलती पाकिस्तान की है, जो आतंकियों को प्रश्रय दे रहा है। ये आतंकवाद पाकिस्तान को ले डूबेगा और इसमें ज्यादा दिन नहीं बचे हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का आध्यात्मिक जगत में कोई अस्तित्व नहीं है। जिसका अपना वास्तविक अस्तित्व न हो, उसकी एक निश्चित लाइफ होती है। अब पाकिस्तान का समय पूरा हो गया है। उन्होंने अयोध्या की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विकासात्मक प्रगति की चर्चा करते हुए सनातन धर्म की रक्षा और इसके वैश्विक प्रचार-प्रसार के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। अपने संबोधन में उन्होंने हनुमानगढ़ी को भक्ति, शक्ति, बुद्धि और युक्ति का संगम बताते हुए इसे सनातन धर्म का एक अडिग गढ़ बताया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों में अयोध्या को अव्यवस्थाओं में झोंककर इसे अपमानित करने का कार्य किया गया। वहीं, 2014 और 2017 के बाद डबल इंजन की सरकार में अयोध्या का विकास डबल स्पीड से हुआ है। हमें अपने मित्र और शत्रुओं की पहचान रखना जरूरी है। देश को सनातन धर्म के मार्ग में बाधा डालने वालों को चिह्नित करना होगा। सनातन धर्म भारत के अस्तित्व की पहचान है। इसकी गरिमा और सम्मान के विरुद्ध हमें कुछ भी स्वीकार नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान पर हमला बोलते हुए कहा कि उसके अंत की शुरुआत हो चुकी है और आतंकवाद ही उसके अंत का कारण बनेगा। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत में हनुमानगढ़ी के त्रेतायुगीन टीले को कोटि-कोटि नमन करते हुए कहा कि यहां से हनुमान जी महाराज ने अयोध्या धाम की रक्षा की है। उन्होंने बाबा अभयराम दास जी महाराज को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह श्रीहनुमत कथा मंडपम बाबा अभयराम दास जी की दूरदर्शिता और वैष्णव अखाड़ों की सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक है। उनकी कृपा से आज हम इस भव्य स्वरूप को देख रहे हैं। उन्होंने हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन, पूज्य संतों और नागाओं की प्रशंसा की, जिन्होंने एक-एक पाई बचाकर इस मंडपम का निर्माण किया। सीएम योगी ने कहा कि हनुमानगढ़ी केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए योद्धा भाव का प्रतीक है। यह मंडपम आने वाली पीढ़ियों के लिए हनुमानगढ़ी के वैभव को संरक्षित रखेगा। उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ी का यह मंडपम न केवल आध्यात्मिक केंद्र बनेगा, बल्कि सत्संग और कथाओं के माध्यम से सनातन धर्म के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाएगा। उन्होंने हनुमानगढ़ी के नागाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आपका इतिहास सनातन धर्म के उस कालखंड की सेना के रूप में जाना जाता है, जब देश विधर्मियों और आक्रांताओं से त्रस्त था, तब अखाड़ों ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए स्वयं को समर्पित किया था।

बिजली कर्मियों का विरोध प्रदर्शन जारी, पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर हठवादी रवैया अपनाने और हड़ताल थोपने का आरोप

लखनऊ, 23 मई: निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का तीन घंटे का व्यापक विरोध प्रदर्शन आज दूसरे दिन भी जारी रहा। संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि प्रबंधन निजीकरण की जिद पर अड़ा हुआ है, हठवादी रवैया अपना रहा है और शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे बिजली कर्मियों पर हड़ताल थोपना चाहता है। संघर्ष समिति ने जोर देकर कहा है कि निजीकरण की आड़ में अरबो रुपए के घोटाले की तैयारी है।  संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि संघर्ष समिति की हड़ताल करने की अभी कोई नोटिस नहीं है किन्तु पावर कारपोरेशन के चेयरमैन,मुख्य सचिव को और शासन के बड़े अधिकारियों को पत्र भेज कर गुमराह कर रहे हैं, कि बिजली कर्मी हड़ताल पर जाने वाले हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि चेयरमैन के पत्र के आधार पर जनपदों में जिला अधिकारियों द्वारा हड़ताल से निपटने की तैयारी के आदेश जारी किए जा रहे हैं जिससे अनावश्यक तौर पर ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति का वातावरण बन रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि झूठा शपथ पत्र देने वाले ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन, जिस पर अमेरिका में पेनाल्टी लगाई गई है, पर कार्यवाही करने के बजाय पावर कॉरपोरेशन संविदा कर्मियों की बड़े पैमाने पर छँटनी रहा है और टकराव का वातावरण बना रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि टेंडर मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष के रूप में निदेशक वित्त निधि नारंग का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। नए निदेशक वित्त पुरुषोत्तम अग्रवाल ने निजीकरण में हो रहे बड़े घोटाले को देखते हुए कार्यभार ग्रहण करने से मना कर दिया है। अब निधि नारंग को दूसरी बार कार्य विस्तार दिया जा रहा है क्योंकि निधि नारंग अवैध ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन को क्लीन चिट देने के लिए तैयार हो गए हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, जो शासन के सबसे बड़े अधिकारी हैं और एनर्जी टास्क फोर्स के अध्यक्ष हैं, को तत्काल कार्यवाही कर अवैध ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति को रद्द करना चाहिए। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे हैं। ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति रद्द कर दी जाए और निजीकरण का निर्णय वापस ले लिया जाए तो बिजली कर्मी कोई आंदोलन नहीं करेंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि बिना मूल्यांकन किए एक लाख करोड रुपए से अधिक की पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों को कुछ हजार करोड़ रुपए में निजी घरानों को बेचने की तैयारी है। 42 जनपदों की सारी जमीन निजी घरानों को मात्र एक रुपए की लीज पर दिए जाने का निर्णय लिया गया है। संघर्ष समिति इसी लूट का विरोध कर रही है।  संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार दूसरे दिन बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों और अभियंताओं ने प्रदेश के समस्त जनपदों, परियोजनाओं और राजधानी लखनऊ में अपराह्न 2ः00 से शाम 5ः00 बजे तक 3 घंटे का व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा। संघर्ष समिति ने कहा है कि निजीकरण के विरोध में आंदोलन उपभोक्ताओं को साथ में लेकर लड़ा जा रहा है। अतः विरोध प्रदर्शन के कारण से उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो। संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन को चेतावनी दी है कि वे उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को न करें अन्यथा इस भीषण गर्मी में ऊर्जा निगमों में अशांति की पूरी जिम्मेदारी प्रबन्धन की होगी। आज वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, आजमगढ़, मिर्जापुर, बस्ती, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, एटा, कानपुर, केस्को, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सीतापुर, रायबरेली, ओबरा, अनपरा, पिपरी, परीक्षा, हरदुआगंज, जवाहरपुर और पनकी में विरोध प्रदर्शन किया गया।

पर्यावरण संरक्षण में समाज भी निभाए भूमिका: योगी

लखनऊ, 22 मई: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी और सहभागिता पर जोर देते हुये कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी- 2025 का उद्घाटन करते हुए उन्होंने भारत के वैदिक दर्शन और सनातन परंपराओं का उल्लेख किया और प्रकृति के साथ सामंजस्य की आवश्यकता को लेकर लोगों से अपील भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपराएं प्रकृति के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाती हैं। उन्होंने वैदिक शांति पाठ का उदाहरण देते हुए बताया कि सनातन धर्म में हर मांगलिक अनुष्ठान की शुरुआत पृथ्वी, जल, अंतरिक्ष और समस्त चराचर जगत के कल्याण की कामना से होती है। उन्होंने कहा कि हमारी परंपराएं हमें सिखाती हैं कि मनुष्य का अस्तित्व प्रकृति और जैव विविधता के संरक्षण पर निर्भर है। अथर्ववेद में कहा गया है कि धरती हमारी माता है और हम इसके पुत्र हैं। एक पुत्र के नाते, हमें अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा। योगी आदित्यनाथ ने 1992 में शुरू हुई वैश्विक स्तर पर जैव विविधता संरक्षण की चर्चा का उल्लेख करते हुए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2070 तक भारत को नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करने का संकल्प लिया है, लेकिन इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समाज के हर व्यक्ति का योगदान आवश्यक है। यह केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। जब तक हम सभी मिलकर प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए काम नहीं करेंगे, तब तक सतत विकास का लक्ष्य अधूरा रहेगा। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण भारत की स्वावलंबी परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले हर गांव में खलिहान, गोचर भूमि, तालाब और खाद के गड्ढे होते थे, जो पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। गांवों में सॉलिड वेस्ट को खाद के गड्ढों में डालकर कंपोस्ट बनाया जाता था, तालाब स्वच्छता के प्रतीक थे और गोचर भूमि पशुओं के लिए आरक्षित थी, लेकिन आधुनिकता की दौड़ में हमने इन परंपराओं को नजरअंदाज कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप पर्यावरणीय असंतुलन और बीमारियां बढ़ रही हैं। उन्होंने गांवों में तालाबों को ड्रेनेज का माध्यम बनाने और गोचर भूमि पर अतिक्रमण जैसे कदमों को आत्मघाती बताया। योगी ने उत्तर प्रदेश के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य का जैव विविधता बोर्ड ‘प्रकृति के साथ सामंजस्य और सतत विकास’ के विजन को साकार करने के लिए नए अभियान चला रहा है। पिछले आठ वर्षों में वन विभाग ने 210 करोड़ से अधिक वृक्षारोपण कर राज्य के वन क्षेत्र को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके साथ ही, नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा नदी को कानपुर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निर्मल और अविरल बनाने में सफलता प्राप्त हुई है। कानपुर, जो कभी नमामि गंगे का सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र था, आज वहां गंगा स्वच्छ और जीवंत है। उन्होने जैव विविधता के संरक्षण में स्थानीय परंपराओं और ज्ञान के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने सनातन धर्म की उस परंपरा का उल्लेख किया, जिसमें पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं को देवताओं के साथ जोड़ा जाता है। उन्होंने कहा कि हमारी परंपराएं हमें सिखाती हैं कि पीपल, बरगद और जामुन जैसे वृक्षों का संरक्षण करना हमारा कर्तव्य है। पहले लोग चींटियों को मारने के बजाय आटा और चीनी देकर उन्हें प्राकृतिक रूप से हटाते थे। यह प्रकृति के साथ सामंजस्य का उदाहरण है। योगी ने आधुनिक विकास के मॉडल पर भी सवाल उठाए, जो पर्यावरण के लिए हानिकारक सिद्ध हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम हर कार्य को मशीनीकरण की ओर ले जा रहे हैं, चाहे वह ड्रेनेज हो या औद्योगिक कचरा। हमें प्राकृतिक उपायों को अपनाना होगा, जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में जल शोधन की देसी पद्धतियां थीं। उन्होंने कहा कि जटायु जैसे पक्षियों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों और दवाओं के दुष्प्रभावों ने इन प्रजातियों को विलुप्ति के कगार पर पहुंचा दिया है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि जटायु, जो प्रकृति के शोधन का कार्य करता था, आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। हमें अपनी परंपराओं के प्रति कृतज्ञता दिखानी होगी। सीएम योगी ने लोगों से आह्वान किया कि जैव विविधता संरक्षण को जन आंदोलन बनाना होगा। यह सृष्टि केवल मनुष्य के लिए नहीं है। अगर हमें अपने अस्तित्व को बचाना है, तो हमें जीव-जंतुओं, जल स्रोतों और पर्यावरण के संरक्षण के लिए सामूहिक रूप से कार्य करना होगा। उत्तर प्रदेश का जैव विविधता बोर्ड इस दिशा में प्रयासरत है, और हमें इन प्रयासों को और गति देनी होगी। संगोष्ठी के दौरान, मुख्यमंत्री ने जैव विविधता पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और प्रत्येक स्टॉल पर जाकर उत्पादों की जानकारी ली। उन्होंने ग्रीन बजट और जैव विविधता पुस्तिका का विमोचन किया, साथ ही चित्रकला, निबंध लेखन और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया। सीएम योगी ने कार्बन क्रेडिट के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को 10,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान किया और एनजीओ फार्मर्स को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, राज्यमंत्री केपी मलिक, मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव अनिल कुमार समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।