Highlights

समस्या का समाधान होगा, सबको न्याय मिलेगा : सीएम योगी आदित्यनाथ

गोरखपुर, 22 जून : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार सुबह जनता दर्शन में पहुंचे लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और त्वरित व संतुष्टिपरक समाधान का भरोसा दिया। उन्होंने आश्वस्त किया कि सबको न्याय मिलेगा। जनता की समस्या सुनते हुए सीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित की समस्या पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। इसमें हीला-हवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जनता दर्शन का आयोजन गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने किया गया था। यहां कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक वह खुद पहुंचे और एक-एक करके सबकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने करीब 200 लोगों से मुलाकात की। सबके प्रार्थना पत्रों को संबंधित अधिकारियों को संदर्भित करते हुए त्वरित और संतुष्टिपरक निस्तारण के निर्देश के साथ लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार हर पीड़ित की समस्या का समाधान कराने के लिए दृढ़ संकल्पित है। सबको न्याय मिलेगा और सबकी पीड़ा दूर की जाएगी। जनता दर्शन में दूसरे जिलों के भी लोग आए थे। जनता दर्शन में आईं जमीन कब्जा संबंधी शिकायतों पर सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि गरीबों की जमीन कब्जामुक्त कराएं और अवैध कब्जा करने वाले दबंगों को कानूनी सबक सिखाएं। उन्होंने कहा कि किसी की जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले भूमाफिया और कमजोरों को उजाड़ने वाले दबंग किसी भी दशा में बख्शे न जाएं। उनके खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का अनुसरण करते हुए कठोर से कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री योगी के समक्ष जनता दर्शन में कई लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे थे। सीएम योगी ने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार इलाज के लिए भरपूर मदद करेगी। उनके प्रार्थना पत्रों को अधिकारियों को हस्तगत करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इलाज से जुड़ी इस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूर्ण कराकर शासन में उपलब्ध कराया जाए। इस दौरान व्हीलचेयर पर आए एक व्यक्ति को देखकर मुख्यमंत्री भावुक हो गए। उन्होंने आश्वस्त किया कि इलाज में सरकार धन की कमी आड़े नहीं आने देगी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने जनता दर्शन की फोटो शेयर करते हुए लिखा, ”आम जन की सेवा, सुरक्षा एवं सुशासन हेतु प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित ‘जनता दर्शन’ में विभिन्न जनपदों से आए लोगों की समस्याएं सुनीं। महाराज जी ने समस्याओं के शीघ्र निराकरण हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।”

यूपी विधानसभा चुनाव इंडिया गठबंधन के साथ लड़ेंगे : अखिलेश यादव

लखनऊ, 17 जून: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूपी विधानसभा चुनाव 2027 और इंडिया गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि उनकी पार्टी इंडिया गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। अखिलेश यादव ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हमारी पार्टी 2027 का विधानसभा चुनाव इंडिया गठबंधन के साथ मिलकर लड़ेगी। आगामी पंचायत चुनावों के लिए भी पार्टी पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि इनका हर प्रयास सपा के वोट कम करने के लिए होता है, लेकिन जनता अब सच्चाई को समझ रही है। उन्होंने जातीय जनगणना को लेकर भाजपा सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो सरकार अब तक कोई भी काम ढंग से नहीं करवा सकी, उससे जातीय जनगणना की उम्मीद कैसे की जा सकती है? उन्होंने कहा कि कई राजनीतिक दल जो कुछ दिन पहले स्वदेशी नारा देते थे, उन्होंने हमारे बाजार को विदेशियों से कब्जा करा दिया। बुनकर सौहार्द का ताना-बाना भी बुनते रहे हैं। इसलिए हमारा मानना है कि आप अपनी समस्याएं और सुझाव दें, जिसे हम मेनिफेस्टो में शामिल करेंगे। बिजली महंगी होने जा रही है। आने वाले समय में मोबाइल चार्ज करने में भी दिक्कत होगी। हमारे पहले मुख्यमंत्री हैं जो फसल को हेलीकॉप्टर से देखने निकले थे। जिस रूट पर हवाई यात्रा की, वहां कहीं भी खरीद नहीं हो रही। भाजपा की सरकार में गेहूं खरीद नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दूध उत्पादन तो हो ही नहीं रहा, जो मदद सरकार की तरफ से मिलती थी, वह भी बंद कर दी गई। यह सरकार महंगाई और बेरोजगारी लगातार बढ़ा रही है। इनका एजेंडा नौकरी और कारोबार नहीं, लोगों को डराना है। भाजपा के प्रोपेगंडा का मुकाबला कोई नहीं कर सकता। यह लोग फर्जी न्यूज बनाकर बदनाम कर सकते हैं। अहमदाबाद विमान हादसे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इतना बड़ा हादसा हुआ, लेकिन किसी ने इस्तीफा नहीं दिया। पीडीए इमोशनल गठबंधन नहीं है। पी फॉर पसमांदा समाज भी हमारे साथ है। उन्होंने आगे कहा कि जिनके पास स्वास्थ्य विभाग का काम है, वे क्या कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है। भाजपा वाले ग्राम सभा बढ़ाकर बूथ मैनेज करने की कोशिश कर रहे हैं।

नियुक्ति पत्र वितरण: गृहमंत्री अमित शाह पहुंचे लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी ने किया स्वागत

लखनऊ, 15 जून: उत्तर प्रदेश में पुलिस विभाग के नव चयनित 60,244 सिपाहियों को आज नियुक्ति पत्र वितरित करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह राजधानी लखनऊ पहुंच गए। एयरपोर्ट में उनका स्वागत मुख्यमंत्री योगी ने किया। इस दौरान भाजपा के संगठन और सरकार के नेता-मंत्री भी स्वागत के लिए पहुंचे हैं। इसके पहले यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि ‘नए भारत का नया उत्तर प्रदेश’ आज ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने जा रहा है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आज लखनऊ में विश्व के सबसे बड़े पुलिस बल यूपी पुलिस की अब तक की सबसे बड़ी पुलिस भर्ती परीक्षा में चयनित 60,244 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यशस्वी मार्गदर्शन में ‘सुरक्षित उत्तर प्रदेश’ का संकल्प सिद्ध हो रहा है। युवाओं के सपने साकार हो रहे हैं। ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश में इतने बड़े पैमाने पर सिपाहियों की भर्ती परीक्षा पहली बार हुई है। इसमें सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र आज मिल रहा है। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ वह पूरे प्रदेश से आने वाले नवचयनित सिपाहियों को नियुक्ति पत्र देंगे। यूपी में पुलिस विभाग के नवचयनित 60,244 सिपाहियों को आज नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे। परीक्षा को पारदर्शी बनाने के लिए सही अभ्यर्थियों को प्रवेश दिया जाए, इसके लिए तकनीक का प्रयोग किया गया था। इसके लिए परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों की चेकिंग, फ्रिस्किंग एवं पर्यवेक्षण की उचित व्यवस्था की गई थी। केंद्र पर अभ्यर्थियों को प्रवेश फिजिकल फ्रिस्किंग, एचएचएमडी द्वारा फ्रिस्किंग, बायोमेट्रिक फिंगर प्रिंट एवं फेशियल रिकॉग्निशन के बाद ही दिया गया था। वहीं फेशियल रिकॉग्निशन न होने पर एफआरआईएस कैप्चर करने की भी व्यवस्था की गई थी। फेशियल रिकॉग्निशन में संशय होने पर अभ्यर्थी का आधार ऑथेंटिकेशन कराया गया था। इसके अलावा सभी केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जैसे मोबाइल, ब्लूटूथ को निष्क्रिय करने के लिए जैमर लगाए गए थे। परीक्षा कक्ष एवं केंद्र में सीसीटीवी लगाकर निगरानी की गई थी, जिसका लाइव फीड केंद्र के कंट्रोल रूम, जनपद के कंट्रोल रूम एवं भर्ती बोर्ड मुख्यालय के कंट्रोल रूम में प्राप्त किया गया था।

फरार सोनम ने उप्र में किया आत्मसमर्पण, पति राजा की हत्या के लिए भाड़े के गुंडे लिए थे

शिलांग/गाजीपुर, 09 जून : राजा रघुवंशी की हत्या की पत्नी सोनम रघुवंशी ने उत्तर प्रदेश पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि उसने कथित तौर पर अपने पति की हत्या के लिए मेघालय में भाड़े के गुंडों को रखा था। यह जानकारी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने सोमवार को दी। मेघालय पुलिस ने इस मामले में सोनम द्वारा अपने लोगों की हत्या के लिए कथित तौर पर भाड़े के गुंडों में से तीन को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। मेघालय पुलिस के एक अधिकारी ने को बताया कि सोनम ने रविवार रात उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के नंदगंज पुलिस स्टेशन में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। राजा की निर्मम हत्या से संबंधित परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर मेघालय पुलिस के विशेष जांच दल ने हत्या के तीन अन्य संदिग्धों – मध्य प्रदेश के इंदौर से दो और उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले से एक को गिरफ्तार किया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि तीनों आरोपियों को राजा की हत्या के लिए कथित तौर पर सोनम ने किराए पर लिया था। उन्होंने बताया कि एक और आरोपी को पकड़ने के लिए तलाश जारी है। पुलिस अधिकारी ने बताया, “चारों आरोपियों को इस निर्मम हत्या की आगे की जांच के लिए राज्य में ट्रांजिट रिमांड के लिए अदालतों में पेश किया जाएगा।” मामले के बारे में और जानकारी के लिए सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। हत्या का मामला दर्ज किया जा रहा है और विशेष जांच दल जांच कर रहा है। मध्य प्रदेश के इंदौर के इस जोड़े ने 11 मई को शादी की थी और 21 मई को हनीमून पर मेघालय की राजधानी शिलांग पहुंचे। नवविवाहित जोड़ा 22 मई को अपने हनीमून के हिस्से के रूप में मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले में सोहरा तक अपने किराए के दोपहिया वाहन पर सवार होकर गया, जो पृथ्वी पर सबसे अधिक बारिश वाला स्थान है। यह जोड़ा 22 मई को प्रसिद्ध लिविंग डबल डेकर रूट ब्रिज के घर – नोंग्रियाट गांव में शिपारा होमस्टे में चेक इन किया था। राजा और सोनम सुबह-सुबह अपने होमस्टे से चेक आउट कर गए। टूर गाइड अल्बर्ट पीडी ने कहा कि उन्होंने इस जोड़े को ट्रेक के बीच में देखा था, नोंग्रियाट से लौटते हुए, उनके साथ तीन अन्य पुरुष पर्यटक भी थे। पीडी ने कहा, “राजा तीनों पुरुषों के साथ चल रहा था, जबकि सोनम उनके पीछे धीरे-धीरे चल रही थी।” दंपत्ति के लापता होने का मामला तब प्रकाश में आया जब 24 मई को शिलांग और सोहरा रोड के बीच सोहरारिम गांव में एक दोपहिया वाहन लावारिस हालत में मिला, जिसे उन्होंने किराए पर लिया था। दो जून को मेघालय पुलिस ने राजा और उनकी पत्नी सोनम के लापता होने के आठ दिनों बाद, सोहरा के रियात अर्लियांग में वेई सावडोंग पार्किंग स्थल के नीचे एक गहरी खाई से राजा का क्षत-विक्षत शव बरामद किया। चार जून को मेघालय पुलिस ने मावक्मा गांव के एडी व्यू पॉइंट पर एक खड्ड से खून से सना हुआ रेनकोट बरामद किया। मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों ने कहा कि राजा की हत्या निर्मम तरीके से की गई थी। पुलिस ने घटनास्थल से एक चाकू भी बरामद किया, जिसे हत्या का हथियार माना जा रहा है। जांचकर्ताओं ने कहा कि घटनास्थल से बरामद सभी भौतिक साक्ष्यों को आगे के विश्लेषण के लिए हैदराबाद स्थित सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (सीएफएसएल) भेजा जाएगा। इंदौर हनीमून मनाने वाले व्यक्ति के लापता होने का पता तब चला जब 24 मई को शिलांग और सोहरा रोड के बीच सोहरारिम गांव में ग्रामीणों ने एक दोपहिया वाहन को लावारिस हालत में पाया, जिसे उन्होंने मेघालय की राजधानी शिलांग से चार दिनों के लिए किराए पर लिया था।

16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष के दौरे से उत्तर प्रदेश को उम्मीद, केन्द्रीय करों में हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग

लखनऊ, 04 जून : 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने बुधवार को यहां एक बैठक कर केन्द्र और राज्यों के बीच केन्द्रीय करों के बंटवारे पर चर्चा की। पनगढ़िया ने केन्द्र सरकार के राजस्व में से राज्यों काे मिलने वाली हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग की है। 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया आज उत्तर प्रदेश के दौरे पर हैं। केन्द्र और राज्यों के बीच केन्द्रीय करों के बंटवारे पर वित्त आयोग की बैठक में चर्चा हुई। इसके बाद लोकभवन में आयाेजित पत्रकार वार्ता में पनगढ़िया ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा एकत्रित करों में राज्यों की हिस्सेदारी को कुछ हद तक बढ़ाया जा सकता है, लेकिन जितना राज्यों की मांग है, उतना नहीं किया जा सकता। पनगढ़िया ने बताया कि वर्तमान में केन्द्र सरकार अपने कर राजस्व का 59 प्रतिशत अपने पास रखती है। 41 फीसदी राज्यों को देती है। उत्तर प्रदेश के साथ ही कई राज्यों ने इस हिस्सेदारी को 41 से बढ़ाकर 50 फीसदी करने की मांग की है। यह 41 प्रतिशत सभी राज्यों को सीधा बंटवारा होता है। अरविन्द पनगढ़िया ने पत्रकाराें काे बताया कि वित्त आयोग का मुख्य कार्य केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे का प्रस्ताव तैयार करना है। तैयार प्रस्ताव को भारत के राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। उन्होंने कहा कि आयोग के प्रस्तावों को राष्ट्रपति द्वारा स्वीकार किया गया है। इसके अलावा, वित्त आयोग स्थानीय निकायों और पंचायतों के लिए बजट आवंटन का प्रस्ताव भी तैयार करता है, जो 72वें संवैधानिक संशोधन का हिस्सा है। आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों के लिए भी आयोग बजट का प्रस्ताव देता है। पनगढ़िया ने कहा कि आयोग के सदस्य हर राज्य का दौरा कर वहां की आर्थिक और सामाजिक जरूरतों का आकलन करते हैं। उत्तर प्रदेश में विशेष रूप से स्थानीय निकायों और पंचायतों के लिए बजट आवंटन पर चर्चा हुई। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उत्तर प्रदेश जीएसटी संग्रह में देश में पहले स्थान पर है। यह राज्य की आर्थिक ताकत को दर्शाता है। वित्त आयोग के अध्यक्ष पनगढ़िया ने कहा कि करों के बंटवारे में कई मानदंडों को ध्यान में रखा जाता है, जैसे जनसंख्या, क्षेत्रफल, वन और पर्यावरण, आय की दूरी (इनकम डिस्टेंस), और जनसांख्यिकीय प्रदर्शन, उत्तर प्रदेश ने कुछ विशेष प्रस्ताव रखे हैं। राज्य ने क्षेत्र के आधार पर हिस्सेदारी को 15 से घटाकर 10 फीसदी करने और वन व पर्यावरण के लिए हिस्सेदारी को 10 से 5 प्रतिशत करने की मांग की है। साथ ही, कर संग्रह में 10 प्रतिशत और जनसांख्यिकी में 7.5 प्रतिशत हिस्सेदारी का प्रस्ताव दिया है। अरविंद पनगढ़िया ने कहा कि वित्त आयोग इन प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। उनका उद्देश्य केन्द्र और राज्यों के बीच संतुलित और निष्पक्ष कर बंटवारा सुनिश्चित करना है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की मांगों को ध्यान में रखते हुए आयोग अपनी सिफारिशें तैयार करेगा, जो स्थानीय निकायों और आपदा प्रबंधन को भी मजबूत करेंगी।

उत्तर प्रदेश में 42 जनपदों के बिजली के निजीकरण के विरोध में देश के 27 लाख बिजली कर्मी सड़कों पर उतरे

लखनऊ, 29 मई : नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर आज देश के सभी प्रांतों के बिजली कर्मचारियों ,जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओ ने उत्तर प्रदेश में 42 जनपदों के किये जा रहे बिजली के निजीकरण के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। उप्र के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर आज बिजली कर्मचारियों ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन कर अपने आक्रोश को व्यक्त किया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के पदाधिकारियों ने बताया कि यह चर्चा है कि निजीकरण हेतु नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन को झूठा शपथ पत्र देने के बावजूद निदशक वित्त श्री निधि नारंग ने उसे क्लीन चिट दे दी है। उल्लेखनीय है कि इंजीनियर ऑफ कांट्रैक्ट ने झूठा शपथ पत्र देने के मामले में ग्रांट थॉर्टन का नियुक्ति आदेश रद्द करने की सिफारिश की थी। इसे न मान कर अब अवैध ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन को क्लीन चिट देकर निजीकरण की प्रक्रिया तेज की जा रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि इस घटना से ऐसा प्रतीत होता है कि प्रबंधन की निजी घरानों से मिली भगत है। इसीलिए तीसरी बार श्री निधि नारंग को सेवा विस्तार दिया गया है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने विद्युत वितरण निगमों में घाटे के भ्रामक आंकड़ों देकर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय लिया है जिससे उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मी विगत 06 माह से लगातार आंदोलन कर रहे हैं किंतु अत्यंत खेद का विषय है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने आज तक एक बार भी उनसे वार्ता नहीं की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में गलत पावर परचेज एग्रीमेंट के चलते विद्युत वितरण निगमों को निजी बिजली उत्पादन कंपनियों को बिना एक भी यूनिट बिजली खरीदे 6761 करोड रुपए का सालाना भुगतान करना पड़ रहा है । इसके अतिरिक्त निजी घरानों से बहुत महंगी दरों पर बिजली खरीदने के कारण लगभग 10000 करोड रुपए प्रतिवर्ष का अतिरिक्त भार आ रहा है। उत्तर प्रदेश में सरकारी विभागो पर 14400 करोड रुपए का बिजली राजस्व का बकाया है। उत्तर प्रदेश सरकार की नीति के अनुसार किसानों को मुफ्त बिजली दी जाती है, गरीबी रेखा से नीचे के बिजली उपभोक्ताओं को 03 रुपए प्रति यूनिट की दर पर बिजली दी जाती है जबकि बिजली की लागत रुपए 07.85 पैसे प्रति यूनिट है। बुनकरों आदि को भी सब्सिडी दी जाती है। सब्सिडी की धनराशि ही लगभग 22000 करोड रुपए है। उत्तर प्रदेश सरकार इन सबको घाटा बताती है और इसी आधार पर निजीकरण का निर्णय लिया गया है। उत्तर प्रदेश में किए जा रहे बिजली के निजीकरण के विरोध में आज देशभर में 27 लाख बिजली कर्मचारियों ने सभी जनपदों और परियोजनाओं पर भोजन अवकाश के दौरान सड़क पर उतरकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया और उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों के साथ अपनी एकजुटता दिखाई। बिजली कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों का कोई भी उत्पीड़न करने की कोशिश की गई तो देश के तमाम 27 लाख बिजली कर्मी मूक दर्शन नहीं रहेंगे और सड़क पर उतर कर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश सरकार की होगी।  आज मुख्यतः वाराणसी, आगरा ,मेरठ ,प्रयागराज, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, देवी पाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सीतापुर, केस्को, कानपुर, मथुरा, अलीगढ़, बांदा, झांसी, परीक्षा, जवाहरपुर, हरदुआगंज, पनकी, अनपरा ,ओबरा और पिपरी में बड़े विरोध प्रदर्शन किए गए।

लैब से लैंड पर जाकर किसानों से संवाद नई क्रांति की शुरुआत करेगा : सीएम योगी

लखनऊ, 29 मई : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लैब, आईसीआर, कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र और अन्य संस्थानों में कार्यरत वैज्ञानिक पहली बार लैंड पर जाकर किसानों के साथ कृषि की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए कार्य करेंगे। ‘विकसित कृषि संकल्प’ अभियान का उद्देश्य लैब से लैंड तक जाना है। कृषि वैज्ञानिक लैब के साथ ही लैंड पर भी जाएंगे और किसानों से संवाद करेंगे। यह संवाद कृषि क्षेत्र में नई क्रांति की शुरुआत करेगा। लैब में जो भी काम हो रहे हैं, वह धरातल पर दिखना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ का यूपी में शुभारंभ किया। यह अभियान 29 मई से 12 जून तक चलेगा। इस अभियान के लिए सीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए पीएम मोदी ने जो विजन दिया है, कृषि उसकी आधारशिला बनेगी। कृषि के माध्यम से लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में क्या कदम उठाए जा सकते हैं। इस पर कृषि वैज्ञानिक, कृषि विभाग के अधिकारी-कार्मिक, औद्यानिक फसल, खेती, डेयरी, मत्स्य पालन से जुड़े किसानों को खेती के बारे में आधुनिक जानकारी उपलब्ध कराएंगे। इस अभिनव पहल के तहत वैज्ञानिक क्लाइमेटिक जोन (भौगोलिक, सामाजिक स्थिति) को देखेंगे और किसानों को अर्ली बीज व लेट वेरायटी का प्रोडक्शन पर क्या असर पड़ता है, इसकी भी जानकारी देंगे। सीएम योगी ने कहा कि 8 वर्ष के अंदर यूपी में डबल इंजन सरकार ने किसानों के जीवन में परिवर्तन लाने के अभियान को अपने हाथों में लिया। यूपी में कृषि के लिए बहुत स्कोप है। देश की कुल कृषि योग्य भूमि का 10-11 फीसदी हमारे पास है। इसी कृषि योग्य भूमि में यूपी का किसान 22-23 फीसदी खाद्यान्न उत्पादित करता है। उन्होंने पिछली सरकारों पर आरोप लगाया कि किसान उनके सरकार के एजेंडे का हिस्सा नहीं बन पाया था। किसान को बीज, एमएसपी का दाम, समय पर खाद, खेत के लिए पानी, तकनीक, स्वायल हेल्थ की व्यवस्था नहीं थी। लागत कम, उत्पादक अधिक पर जोर नहीं था। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी पीएम मोदी के शीर्ष एजेंडे में है। देश में 11 वर्ष के अंदर खेती-किसानी के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन हुए हैं। उन्होंने स्वायल हेल्थ कार्ड का अभियान चलाया। किसानों को पीएम कृषि बीमा योजना, पीएम कृषि सिंचाई योजना, एमएसपी, पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ मिल रहा है। किसानों को तकनीक से जोड़ने का कार्य हुआ। पिछले 10-11 वर्ष में काफी परिवर्तन हुए हैं। 2014-15 में किसान को एक हजार रुपए भी गेहूं का दाम नहीं मिलता था, आज एमएसपी 2,425 रुपए है। किसानों ने बाजार में 2,800 रुपए में गेहूं बेचा है। यह अन्नदाता किसान के जीवन में आए परिवर्तन का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यूपी में सिंचाई सुविधा में बढ़ोतरी हुई। 15 लाख किसानों के व्यक्तिगत ट्यूबवेल के कनेक्शन फ्री किए गए। राज्य सरकार प्रतिवर्ष ढाई हजार करोड़ रुपए जमा करती है। सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना, बाणसागर परियोजना, अर्जुन सहायक आदि परियोजना के माध्यम से डबल इंजन सरकार ने प्रदेश में 23 लाख हेक्टेयर भूमि को अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए गए। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार यूपी में कृषि विज्ञान केंद्र को लागू नहीं करना चाहती थी, लेकिन जैसे ही सूर्य प्रताप शाही कृषि मंत्री बने, उन्होंने 20 नए कृषि विज्ञान केंद्र को लाने में सफलता प्राप्त की। आज 89 कृषि विज्ञान केंद्र कार्य कर रहे हैं। हम महात्मा बुद्ध के नाम पर कुशीनगर में पांचवां कृषि विश्वविद्यालय स्थापित करने जा रहे हैं। प्रदेश के अंदर कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से नई तकनीक, बीज की जानकारी किसानों को दी जा रही है। कृषि विवि भी इनोवेशन और कृषि के क्षेत्र में रिसर्च एंड डवलपमेंट के नए केंद्र के रूप में उभरे हैं। उनकी नई गति प्रदेश की प्रगति में सहायक हो रही है। सीएम योगी ने आगे कहा कि किसान अपनी आय को बढ़ा रहा है। 2017 के पहले सुनने को मिलता था कि किसान को पर्ची नहीं मिली तो उसने खेत में आग लगा दी। किसान को वर्षों से गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं होता था। वह मजबूर होकर फसल में आग लगा देता था। किसान का आक्रोश सरकार की स्थिति को बयां कर देता था। 1996 से 2017 (22 वर्ष) तक जितना गन्ना मूल्य भुगतान हुआ, उससे 72 हजार करोड़ रुपए अधिक (2 लाख 85 हजार करोड़) हमने आठ वर्ष में किसानों को दिया है। बंद हो रही चीनी मिलों को चलाया गया, नई चीनी मिलों को स्थापित किया गया। 2017 के पहले चीनी मिलें बंद होती थीं। आज चीनी मिल लगाने के प्रस्ताव आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगले चार वर्ष में यूपी की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाएंगे। इसके लिए नया प्रयास प्रारंभ करने जा रहे हैं। यह कृषि क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन होगा। सीएम ने यूपी एग्रीज का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम के किसानों ने खेती समेत प्रत्येक क्षेत्र में प्रगति की, मॉडर्न तकनीक अपनाया, नए बीज उपलब्ध कराए। वे लोग लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में सफल हुए। मध्य और पूर्व के किसान इस दिशा में काफी पीछे थे, इसलिए वर्ल्ड बैंक के माध्यम से चार हजार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट को इस वर्ष बढ़ाया गया है। इससे पूर्वांचल व बुंदेलखंड-विंध्य क्षेत्र के 28 जनपदों को आच्छादित करने जा रहे हैं। सीएम योगी ने कहा कि क्लाइमेट चेंज हमारी चुनौती है। मानसून 15-20 दिन पहले दिखाई दे रहा है, लेकिन आशंका है कि डेढ़-दो महीने बीच में सूखा रहेगा, फिर बारिश आएगी। उस समय की चुनौती की रणनीति अभी तैयार करनी होगी, फिर बारिश आएगी। यह चेंज उत्पादन पर असर डालेगा। अच्छा बीज पड़ा तो अच्छा उत्पादन होगा, बीज एक महीने लेट होगा तो उत्पादन पर 30 फीसदी का अंतर डालेगा। अच्छा बीज मिल सके, इसके लिए किसानों को जागरूक करना पड़ेगा। आठ वर्षों में मिलेट्स, नेचुरल फॉर्मिंग, दलहनी-तिलहनी फसलों का उत्पादन बढ़ा है, लेकिन इसके लिए और भी प्रयास करने चाहिए। इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि आज विकसित कृषि संकल्प अभियान का शुभारंभ हो रहा है। यूपी के सभी 75

उत्तरप्रदेश: निजीकरण के विरोध में 29 मई को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन

लखनऊ, 28 मई: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कल वाराणसी में ऊर्जा मंत्री द्वारा निजीकरण के बाद आगरा और ग्रेटर नोएडा में बहुत सुधार हो जाने के दावे को तथ्यों से परे बताते हुए कहा है कि ग्रेटर नोएडा और आगरा में निजीकरण से पावर कारपोरेशन को प्रति वर्ष अरबों रुपए का घाटा हो रहा है और सुधार की बात पूरी तरह गलत है। उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के विरोध में 29 मई को देश व्यापी विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। 29 मई से बिजली कर्मचारियों का प्रबंधन से पूर्ण असहयोग आंदोलन प्रारंभ हो रहा है। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि आगरा में निजीकरण से प्रतिवर्ष लगभग 1000 करोड रुपए का पावर कारपोरेशन को घाटा उठाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पावर कारपोरेशन ने पिछले वर्ष 05 रुपए 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद कर निजी कंपनी को 04 रुपए 36 पैसे प्रति यूनिट की दर पर दी। टोरेंट पावर कंपनी को 2300 मिलियन यूनिट बिजली आपूर्ति करने में पावर कारपोरेशन को इस तरह 275 करोड रुपए का घाटा हुआ। आगरा लेदर इंडस्ट्री का सबसे बड़ा केंद्र है और आगरा में पर्यटन उद्योग होने के नाते सबसे अधिक पांच सितारा होटल है। इंडस्ट्रियल और कमर्शियल कंज्यूमर्स अधिक होने के कारण आगरा में प्रति यूनिट बिजली विक्रय दर 07 रुपए 98 पैसे हैं। निजीकरण के इस प्रयोग में सस्ती बिजली खरीद कर महंगी दरों पर बेचने में टोरेंट पावर कंपनी को प्रतिवर्ष 800 करोड रुपए का मुनाफा हो रहा है। यदि निजीकरण न होता तो यह मुनाफा पावर कारपोरेशन को मिलता। इसके अतिरिक्त महंगी दर पर बिजली खरीद कर टोरेंट पावर कंपनी को सस्ती दर पर देने में 275 करोड रुपए प्रति वर्ष का घाटा भी न होता। साफ है यदि आगरा का निजीकरण न हुआ होता तो पावर कॉरपोरेशन को कम से कम 1000 करोड रुपए प्रति वर्ष का मुनाफा होता। उन्होंने बताया कि आगरा में निजी कंपनी किसानों को मुक्त बिजली नहीं दे रही है। ग्रेटर नोएडा में भी निजी कंपनी किसानों को मुफ्त बिजली नहीं दे रही है जबकि उत्तर प्रदेश सरकार की किसानों को मुक्त बिजली देने की नीति है। संघर्ष समिति ने कहा कि ग्रेटर नोएडा में यदि बिजली व्यवस्था इतनी अच्छी चल रही है तो उत्तर प्रदेश सरकार ग्रेटर नोएडा की निजी कंपनी का लाइसेंस निरस्त कराने के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमा क्यों लड़ रही है ? उन्होंने कहा कि ऊर्जा मंत्री का आगरा और ग्रेटर नोएडा को लेकर दिया गया बयान तथ्यों से परे है। संघर्ष समिति ने कहा कि माननीय ऊर्जा मंत्री जी निजीकरण के फायदे गिना रहे हैं। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन पर झूठा शपथ पत्र देने और अमेरिका में पेनल्टी के मामले पर ऊर्जा मंत्री कोई बयान क्यों नहीं दे रहे हैं ? माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति है। इसके बावजूद पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति में ही भ्रष्टाचार हो रहा है। अर्थात निजीकरण की सारी प्रक्रिया की बुनियाद में ही भ्रष्टाचार है। ऊर्जा मंत्री को इस पर तत्काल कार्यवाही करनी चाहिए। संघर्ष समिति ने बताया कि निजीकरण के विरोध में उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारियों के समर्थन 29 मई को पूरे देश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर लगभग 27 लाख बिजली कर्मी भोजन अवकाश के दौरान व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे । 29 मई को उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी भी व्यापक विरोध प्रदर्शन कर निजीकरण के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज करेंगे। 29 मई से प्रारंभ हो रहे हैं आंदोलन के दूसरे चरण में बिजली कर्मचारी और अभियंता प्रबंधन के साथ पूर्ण असहयोग करेंगे । इस दौरान वे प्रबंधन के जन विरोधी और कर्मचारी विरोधी आदेशों का पालन नहीं करेंगे। प्रबंधन की किसी बैठक वीं सी को अटेंड नहीं करेंगे । किंतु बिजली कर्मचारी अपने आंदोलन के दौरान उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होने देंगे । उपभोक्ताओं की सभी समस्याएं अटेंड की जाएगी। संघर्ष समिति के आवाहन पर आज वाराणसी, आगरा, मेरठ, गोरखपुर, प्रयागराज ,आजमगढ़, बस्ती, मिर्जापुर, देवीपाटन ,अयोध्या, सुल्तानपुर ,बरेली, मुरादाबाद, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर ,मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, अलीगढ़, एटा, मथुरा, फिरोजाबाद, बांदा, झांसी ,परीक्षा, हरदुआगंज, जवाहरपुर ,ओबरा, पिपरी ,अनपरा और पनकी में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया गया।

मंगोलियाई सेना के प्रतिनिधिमंडल ने भारत में शत्रुजीत ब्रिगेड का दौरा किया

आगरा, 28 मई : मंगोलिया की सेना के 19 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय सेना की शत्रुजीत ब्रिगेड का दौरा कर पेशेवर पहलुओं और क्षमता की प्रत्यक्ष जानकारी हासिल की। मंगोलियाई सेना के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ब्रिगेडियर जनरल ओन्ट्सगोइबयार लखमजी ने किया। यह यात्रा भारत-मंगोलिया रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। यह जानकारी एक्स पोस्ट में सूर्यकमांड आईए ने आज सुबह दी। सूर्यकमांड आईए भारतीय सेना के मध्य कमान का आधिकारिक एक्स अकाउंट है। सूर्यकमांड आईए ने एक्स पर लिखा, ” ब्रिगेडियर जनरल ओन्ट्सगोइबयार लखमजी के नेतृत्व में मंगोलियाई सेना के 19 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने शत्रुजीत ब्रिगेड का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल को एयरबोर्न सैनिकों के पेशेवर पहलुओं के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी दी गई। यह भारत-मंगोलिया द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण कदम है।

गरीब कल्याण के साथ समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है अच्छी सरकार : योगी

गोरखपुर, 27 मई: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब अच्छी सरकार होती है तो वह विकास और गरीब कल्याण के कार्यक्रमों को तेजी से आगे बढ़ाते हुए समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है। सुरक्षा के बेहतर माहौल में हरेक व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक, विकासपरक और कल्याणकारी परिवर्तन लाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में विगत 11 साल से देश में और आठ साल से प्रदेश में यही परिवर्तन देखने को मिल रहा है। योगी मंगलवार को हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (खाद कारखाना) के परिसर में 1200 जोड़ों के मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह को संबोधित कर रहे थे। सरकार ने सामूहिक विवाह योजना में प्रति जोड़ा खर्च 51 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया है और बढ़ी हुई धनराशि के साथ आज यह पहला आयोजन था। मुख्यमंत्री ने कहा कि वास्तविक सरकार वही है जो जनता के घर जाकर उनकी समस्याओं का समाधान निकाल सके। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोक कल्याणकारी कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का ही एक अभियान है। यह कार्यक्रम बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना की अगली कड़ी है। यह बाल विवाह, बहुविवाह और दहेज प्रथा जैसी सामाजिक रूढ़ियों पर भी प्रहार है। योगी ने कहा कि आज सरकार की मंशा हर एक नागरिक के जीवन में परिवर्तन लाने की है। भारत को दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बनाने के लिए हमें समाज के अंतिम पायदान पर बैठे प्रत्येक व्यक्ति के बारे में सोचना होगा। हमें उसके जीवन में परिवर्तन लाना होगा। इसी परिवर्तन के उद्देश्य से सरकार द्वारा मातृ वंदना योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं योजना, कन्या सुमंगला योजना, आयुष्मान योजना आदि अन्य कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। सामूहिक विवाह योजना भी इसी प्रगतिशील सोच का प्रतीक है। उन्होने कहा कि बेटी को बचाना है तो उसे पढ़ाना होगा, उसको सशक्त बनाना होगा। बेटी को आगे बढ़ाने के लिए हमें सभी व्यवस्थाएं करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में सरकार द्वारा निर्धनों की पीड़ा को समाप्त करने के लिए बेटी के जन्म से लेकर स्नातक तक की पढ़ाई के लिए मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना चलायी गयी। आज यह योजना सफलतापूर्वक चल रही है। इसके तहत प्रदेश के साधनहीन और वंचित परिवारों की लगभग 24 लाख बालिकाओं को जन्म से लेकर स्नातक की शिक्षा के लिए 25 हजार की धनराशि दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बेटी के जन्म के बाद रजिस्ट्रेशन करते ही एक निश्चित धनराशि उसके खाते में डाल दी जाती है। बेटी के 1 वर्ष होने पर एवं सभी टीका से आच्छादित होने पर भी एक निश्चित धनराशि दी जाती है। इसके बाद बेटी को कक्षा 1, कक्षा 6 एवं कक्षा 9 में प्रवेश करने के बाद और उसके आगे आईटीआई, डिप्लोमा या अन्य कोर्स में प्रवेश लेने पर एक निश्चित धनराशि खाते में भेजी जाती है। आज यह धनराशि बेटी की सुरक्षा का संबल बन रहा है। उन्होने कहा कि कन्या सुमंगला योजना में शिक्षा के लिए उचित व्यवस्था के बाद बेटी की शादी के लिए सरकार द्वारा मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना चलायी गयी। आज गरीब अभिभावक को बेटी के विवाह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत सरकार गरीब कन्या का विवाह कराने का भी कार्य कर रही है। इस सामूहिक विवाह में मुख्यमंत्री के साथ विधायकगण एवं अन्य जनप्रतिनिधि भी सम्मिलित होते है। उन्होंने कहा “ मुझे भी इस कार्यक्रम में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। यह हम सभी का सौभाग्य है कि हम इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शामिल हुए हैं, जो बाल विवाह, दहेज प्रथा व बहुविवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों से मुक्ति दिलाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि इस योजना में जाति, मत, मजहब एवं क्षेत्र के बंधन से मुक्त होकर सभी अपनी रीति-रिवाज के अनुसार रजिस्ट्रेशन कर सामूहिक विवाह में शामिल हो सकते है। ” मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले समाज कल्याण विभाग द्वारा अनुसूचित जाति-जनजाति की कन्याओं के लिए केवल 20 हजार रुपये दिये जाते थे। यह धनराशि भेदभाव के साथ दी जाती थी, सभी को नहीं प्राप्त होती थी। 20 हजार की धनराशि भी पर्याप्त नहीं थी। यह धनराशि समय पर भी नहीं मिलती थी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना 2017 में शुरू की गयी थी तब इसकी राशि 35 हजार थी बाद में इसे बढ़ाकर 51 हजार एवं 1 अप्रैल 2025 से इस धनराशि को बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दिया गया है। इसमें 60 हजार रुपये बेटी के खाते में जमा होंगे। शेष धनराशि गृहस्थी के सामान, कन्या के जेवर एवं भोजन व अन्य व्यवस्थाओं में व्यय किया जायेगा। सरकार यह कार्य दहेज प्रथा, बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों को तिलांजलि देकर प्रत्येक गरीब के जीवन में परिवर्तन लाने के लिए कर रही है। उन्होने कहा कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन में आज हर गरीब को शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है। आज देश में 4 करोड़ गरीबों को आवास, 10 करोड़ गरीबों को उज्जवलला योजना के तहत रसोई गैस कनेक्शन, 12 करोड़ को शौचालय, 45 करोड़ को जनधन खाते एवं 50 करोड़ गरीबों को आयुष्मान योजना का लाभ दिया गया है। इसी प्रकार सरकार द्वारा पिछले 5 वर्षो से 80 करोड़ लोगों को निशुल्क राशन दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन की सरकार हर उस कार्यक्रम को, जिससे गरीबों का कल्याण होता है, लगातार आगे बढ़ा रही है। आज इन्हीं प्रयासो का परिणाम है कि भारत में विगत 10 वर्षो में 25 करोड़ लोग बहु आयामी गरीबी से उबरे है। उत्तर प्रदेश में भी छह करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से उपर उठाने में मदद मिली है। योगी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनी विवाद को खत्म करने के लिए सरकार द्वारा प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना लागू की गयी है। इस योजना के माध्यम से सरकार द्वारा गरीबों को उनके घर के मालिकाना अधिकार पत्र दिये जा रहे है। यूपी में 1 करोड़ 6 लाख परिवारों को उनके घर का अधिकार पत्र दिया गया है। उन्होंने कहा कि पहले की सरकार स्ट्रीट वेंडर्स के लिए कोई कार्य नहीं करती थी। ठेला, रेहड़ी, खोमचा लगाने वाले गरीबों का पहले हर जगह शोषण होता था, मगर आज सरकार द्वारा उनको व्यवसाय के लिए लोन