ग्रेटर नोएडा: नोएडा इंटरनेशन एयरपोर्ट से उड़ान संचालन शुरू होने का रास्ता अब लगभग पूरी तरह साफ हो गया है। नागरिक उड्डयन नियामक DGCA ने जेवर में बन रहे इस बहुप्रतीक्षित एयरपोर्ट को एयरोड्रम लाइसेंस जारी कर दिया है। इस लाइसेंस के मिलने के बाद एयरपोर्ट से किसी भी समय फ्लाइट ऑपरेशन शुरू किया जा सकता है। एयरोड्रम लाइसेंस मिलने को परियोजना के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से इसके लिए इंतजार किया जा रहा था। माना जा रहा है कि अब एयरपोर्ट प्रशासन अंतिम तैयारियों को तेजी से पूरा करेगा और जल्द ही यहां से घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शुरुआत हो सकती है। विकास की नई उड़ान जेवर में बन रहा यह एयरपोर्ट देश की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं में से एक है। इसके शुरू होने से ग्रेटर नोएडा, नोएडा और पूरे Western Uttar Pradesh के आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। परियोजना के पहले चरण में एयरपोर्ट की क्षमता लाखों यात्रियों को सेवा देने की है। भविष्य में इसे चरणबद्ध तरीके से विस्तार देकर दुनिया के बड़े एयरपोर्ट्स की श्रेणी में शामिल करने की योजना है। सीएम योगी ने किया था निरीक्षण हाल ही में योगी आदित्यनाथ ने एयरपोर्ट का दौरा कर निर्माण कार्य और उड़ान संचालन की तैयारियों की समीक्षा की थी। उन्होंने अधिकारियों को समयसीमा के भीतर सभी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए थे ताकि जल्द से जल्द उड़ानें शुरू की जा सकें। एयरपोर्ट का संचालन Yamuna International Airport Private Limited (YIAPL) द्वारा किया जा रहा है, जबकि परियोजना की निगरानी Noida International Airport Limited (NIAL) कर रही है। क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा लाभ विशेषज्ञों का मानना है कि एयरपोर्ट के शुरू होने से पर्यटन, उद्योग, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही दिल्ली-एनसीआर में हवाई यात्रा के बढ़ते दबाव को भी काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी। जेवर एयरपोर्ट के चालू होने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों को हवाई यात्रा के लिए दिल्ली तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होगी। अब DGCA का एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद उम्मीद की जा रही है कि बहुत जल्द जेवर के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पहली उड़ान आसमान में दिखाई देगी और यह परियोजना क्षेत्र के विकास की नई कहानी लिखेगी।
काशी से लखनऊ तक ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ का शंखनाद, 11 मार्च को लखनऊ में निर्णायक घोषणा की तैयारी
वाराणसी, 1 मार्च 2026। काशी स्थित श्री विद्या मठ में आयोजित प्रेस वार्ता में ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ की औपचारिक घोषणा करते हुए संतों और आयोजकों ने कहा कि 40 दिनों के निर्धारित समय में से 30 दिन पूर्ण हो चुके हैं, किंतु उनकी प्रमुख मांगों पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। प्रेस वार्ता में कहा गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पहले ही 11वें और 21वें दिन सचेत किया जा चुका था, लेकिन पिछले दस दिनों में भी कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि विदेश यात्राएं या अन्य व्यस्तताएं इस विषय में शिथिलता का कारण नहीं बन सकतीं। अब शेष बचे 9-10 दिनों में सरकार के रुख पर सबकी नजरें टिकी हैं। प्रमुख मांगें: ‘राज्यमाता’ का दर्जा और बीफ निर्यात पर प्रतिबंध आंदोलनकारियों ने दो मुख्य कार्यों को अपने अभियान का केंद्र बताया— 1. गोमाता को ‘राज्यमाता’ घोषित किया जाए। 2. उत्तर प्रदेश से बीफ निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। इसके अतिरिक्त गोहत्या निरोध में सहयोगी एक ‘पंचसूत्रीय मांगपत्र’ भी सरकार को सौंपा गया है। प्रेस वार्ता में कहा गया कि सरकार और सत्ताधारी दल की चुप्पी गो-भक्तों की अपेक्षाओं के विपरीत है। “अहिंसक और वैचारिक होगा धर्मयुद्ध” आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूर्णतः अहिंसक और वैचारिक होगा। उनका कहना है कि “हमारा अस्त्र शास्त्र और संवाद है, हिंसा नहीं।” 7 मार्च से ‘गोप्रतिष्ठार्थ धर्मयुद्ध शंखनाद यात्रा’ का शुभारंभ किया जाएगा, जो चरणबद्ध तरीके से लखनऊ पहुंचेगी। यदि निर्धारित अवधि में निर्णय नहीं हुआ तो इसकी जिम्मेदारी सरकार और संबंधित राजनीतिक नेतृत्व की होगी। यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम 1. संकल्प दिवस – 6 मार्च चैत्र कृष्ण तृतीया के दिन काशी के शंकराचार्य घाट पर ‘गो-ब्राह्मण प्रतिपालक’ छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर गंगा पूजन के साथ धर्मयुद्ध का संकल्प लिया जाएगा। 2. प्रस्थान – 7 मार्च प्रातः 8:30 बजे श्री विद्या मठ से यात्रा प्रारंभ होगी। काशी के प्रसिद्ध संकटमोचन मंदिर में हनुमानाष्टक, हनुमान चालीसा और बजरंग बाण के पाठ के साथ विघ्न विनाश की प्रार्थना कर यात्रा आगे बढ़ेगी। चरणबद्ध यात्रा और जनसभाएँ 7 मार्च:जौनपुर और सुल्तानपुर में सभाएँ, रात्रि विश्राम रायबरेली में। 8 मार्च: रायबरेली से मोहनलालगंज, लालगंज, अचलगंज होते हुए उन्नाव में सभा व विश्राम। 9 मार्च: उन्नाव, बांगरमऊ, बघौली से होते हुए नैमिषारण्य में सभा व रात्रि विश्राम। 10 मार्च: नैमिषारण्य से सिधौली, इटौंजा होते हुए लखनऊ की सीमा में प्रवेश और रात्रि विश्राम। 11 मार्च: लखनऊ में निर्णायक शंखनाद तिथि: 11 मार्च 2026 (शीतला अष्टमी) समय: दोपहर 2:15 बजे से सायं 5:00 बजे तक स्थान: कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल, पासी किला चौराहा, आशियाना, लखनऊ कार्यक्रम में मंगलाचरण, गोमय गणेश पूजन, गो-ध्वज प्रतिष्ठा तथा ‘धर्मयुद्ध शंखनाद’ होगा। विद्वानों, संतों और गोभक्तों के उद्बोधन के साथ आंदोलन की आगामी दिशा पर घोषणा की जाएगी। “अंतिम चेतावनी” का स्वर आयोजकों ने कहा कि 11 मार्च का लखनऊ आगमन शासन के लिए अंतिम चेतावनी सिद्ध होगा। उनका आरोप है कि सत्ता की उदासीनता गौ-भक्तों के धैर्य की परीक्षा ले रही है। अब सबकी निगाहें 11 मार्च पर टिकी हैं—क्या सरकार कोई निर्णायक कदम उठाएगी या ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ एक व्यापक जनांदोलन का रूप लेगा? काशी से उठी यह धार्मिक-वैचारिक पहल आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और सामाजिक विमर्श को किस दिशा में ले जाएगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
जापान के यामानाशी हाइड्रोजन फैसिलिटी पहुंचे सीएम योगी, ग्रीन एनर्जी मॉडल से लिया सतत विकास का मंत्र
लखनऊ/यामानाशी (जापान)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने अपने जापान दौरे के दौरान Yamanashi Hydrogen Facility का दौरा किया और वहां संचालित अत्याधुनिक पावर-टू-गैस (Power-to-Gas) प्रणाली को करीब से देखा। इस अवसर पर उन्होंने ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के क्षेत्र में किए जा रहे अभिनव कार्यों की सराहना की। यामानाशी प्रांत में स्थापित यह हाइड्रोजन सुविधा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से उत्पादित बिजली को हाइड्रोजन गैस में परिवर्तित करने की उन्नत तकनीक पर आधारित है। यह मॉडल न केवल ऊर्जा भंडारण की समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यामानाशी का यह नवाचार सतत ऊर्जा परिवर्तन (Sustainable Energy Transition) की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि भारत जैसे तेजी से विकास कर रहे देश के लिए ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। उत्तर प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन पर विशेष फोकस सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और हरित औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन, ई-मोबिलिटी और स्वच्छ ऊर्जा अवसंरचना को बढ़ावा देने के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आत्मनिर्भरता, तकनीकी नवाचार और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को केंद्र में रखकर प्रदेश में नई ऊर्जा परियोजनाओं को गति दी जा रही है। जापान की उन्नत तकनीकों और अनुभव से सीख लेकर उत्तर प्रदेश में भी हरित ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जाएगा। भारत-जापान सहयोग को नई दिशा मुख्यमंत्री का यह दौरा भारत और जापान के बीच प्रौद्योगिकी एवं ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, ऊर्जा भंडारण और स्वच्छ परिवहन के क्षेत्र में साझेदारी भविष्य में औद्योगिक विकास और जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यामानाशी का मॉडल यह दर्शाता है कि किस प्रकार नवीकरणीय ऊर्जा को प्रभावी ढंग से संग्रहित कर उसे स्वच्छ ईंधन के रूप में उपयोग किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार अब इसी दिशा में ठोस रणनीति बनाकर राज्य को हरित ऊर्जा क्रांति का अग्रदूत बनाने की ओर अग्रसर है। साफ है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि भविष्य की ऊर्जा नीति के लिए एक ठोस विजन का संकेत है—जहां विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ें।
वृंदावन से नई राजनीतिक पारी की शुरुआत: निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने बनाई ‘राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा (RAM)’
वृंदावन । निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा कर सक्रिय राजनीति में प्रवेश का संकेत दिया। वृंदावन स्थित श्री हरिदास धाम आश्रम में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी का नाम राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा (RAM) रखा गया है। अग्निहोत्री ने कहा कि उनकी पार्टी की विचारधारा भगवान राम और भगवान कृष्ण के आदर्शों पर आधारित होगी। उन्होंने कहा, “हमारी राजनीति सेवा, मर्यादा और धर्म के मूल्यों पर आधारित होगी। हम भगवान राम की मर्यादा और भगवान कृष्ण की नीति को साथ लेकर जनता के बीच जाएंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि वृंदावन की पावन भूमि से अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत करना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। ठाकुर बांके बिहारी मंदिर की नगरी से संकल्प लेना उनके लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी आम जनता के अधिकारों की रक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता को प्राथमिकता देगी। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 26 जनवरी को अनुशासनहीनता के आरोप में अलंकार अग्निहोत्री को निलंबित कर दिया था। उसी दिन उन्होंने अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया था। बाद में उन्हें शामली जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया। मंडलायुक्त ने उन्हें 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश भी दिया है। प्रशासनिक कार्रवाई के बीच उनका राजनीति में उतरना कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रहा है। प्रेस वार्ता के दौरान उनके समर्थकों में उत्साह देखा गया। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई पार्टी के लिए संगठनात्मक ढांचा तैयार करना और जनाधार बनाना बड़ी चुनौती होगी। अब देखना होगा कि ‘राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा (RAM)’ आगामी चुनावों में किस तरह की रणनीति अपनाती है और प्रदेश की राजनीति में अपनी जगह बनाने में कितनी सफल होती है।
सिंगापुर में योगी आदित्यनाथ का कूटनीतिक मिशन: निवेश, डिजिटल इकॉनमी और स्किल डेवलपमेंट पर नई साझेदारी
लखनऊ/सिंगापुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने आधिकारिक सिंगापुर दौरे पर हैं, जहां पहले ही दिन उन्होंने सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग से महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस बैठक को भारत-सिंगापुर संबंधों के व्यापक परिप्रेक्ष्य में एक अहम कदम माना जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच “कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप” के तहत उत्तर प्रदेश और सिंगापुर के बीच सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर विस्तृत चर्चा हुई। निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष फोकस बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश में विदेशी निवेश बढ़ाने, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और औद्योगिक परियोजनाओं को गति देने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिंगापुर के निवेशकों को राज्य में उपलब्ध बेहतर कनेक्टिविटी, एक्सप्रेस-वे नेटवर्क, डिफेंस कॉरिडोर और उभरते औद्योगिक क्लस्टर्स की जानकारी दी। सिंगापुर, जो शहरी नियोजन, लॉजिस्टिक्स और स्मार्ट सिटी मॉडल के लिए वैश्विक स्तर पर जाना जाता है, उसके अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता को उत्तर प्रदेश के विकास मॉडल से जोड़ने पर भी चर्चा हुई। उम्मीद जताई जा रही है कि इस साझेदारी से राज्य में नई परियोजनाओं और रोजगार के अवसरों का मार्ग प्रशस्त होगा। स्किल डेवलपमेंट और डिजिटल इकॉनमी में सहयोग वार्ता में युवाओं के कौशल विकास को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी। सिंगापुर के तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण मॉडल को उत्तर प्रदेश में लागू करने की संभावनाओं पर विचार किया गया, ताकि स्थानीय युवाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण मिल सके। डिजिटल इकॉनमी के क्षेत्र में भी सहयोग को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक, स्टार्टअप इकोसिस्टम और ई-गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में संयुक्त पहल की संभावनाओं पर चर्चा हुई। यह पहल उत्तर प्रदेश को डिजिटल नवाचार के केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक हो सकती है। भारत-सिंगापुर संबंधों को नई गति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत-सिंगापुर संबंध लगातार मजबूत हुए हैं और उत्तर प्रदेश इस रणनीतिक साझेदारी का सक्रिय भागीदार बनने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह दौरा राज्य और सिंगापुर के बीच आर्थिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को और सुदृढ़ करेगा।
‘यादव जी की लव स्टोरी’ पर बवाल: यूपी में रिलीज से पहले तेज हुआ विरोध, कई जिलों में प्रदर्शन
लखनऊ/संभल/फिरोजाबाद: उत्तर प्रदेश में एक बार फिर एक फिल्म ने सियासी और सामाजिक हलचल तेज कर दी है। 27 फरवरी को रिलीज होने जा रही फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ को लेकर प्रदेश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। खासकर संभल और फिरोजाबाद जिलों में यादव समाज के संगठनों ने फिल्म पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे सिनेमाघरों में न चलाने की चेतावनी दी है। विरोध कर रहे संगठनों का आरोप है कि फिल्म की कहानी को ‘लव जिहाद’ से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है। उनका कहना है कि फिल्म में लड़की को यादव समाज से और लड़के को मुस्लिम समुदाय से दिखाया गया है, जिससे एक विशेष जाति की छवि को प्रभावित करने की कोशिश की गई है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि इस तरह की प्रस्तुति से सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है। संभल और फिरोजाबाद में विरोध सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। यहां सामाजिक संगठनों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की है। कुछ स्थानों पर थानों में औपचारिक शिकायतें भी दर्ज कराई गई हैं। प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय सिनेमा हॉल और मल्टीप्लेक्स संचालकों को भी चेतावनी दी है कि यदि फिल्म का प्रदर्शन किया गया तो व्यापक विरोध किया जाएगा। सुरक्षा के मद्देनज़र स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। विरोध करने वालों का एक बड़ा तर्क यह भी है कि फिल्म के निर्माता, निर्देशक और मुख्य कलाकारों में कोई भी यादव समाज से नहीं है। फिल्म के निर्माता संदीप तोमर, निर्देशक अंकित भड़ाना हैं, जबकि मुख्य भूमिकाओं में प्रगति तिवारी और विशाल मोहन नजर आएंगे। यादव संगठनों का कहना है कि बिना समाज के प्रतिनिधित्व के इस तरह की कहानी बनाना आपत्तिजनक है। उनका आरोप है कि फिल्म एक खास जाति को निशाना बनाती है। फिल्म की मुख्य अभिनेत्री प्रगति तिवारी ने बयान जारी कर कहा है कि फिल्म का उद्देश्य किसी समाज की भावनाओं को आहत करना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक काल्पनिक प्रेम कहानी है और इसे किसी जाति या समुदाय के खिलाफ नहीं देखा जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि विरोध अब उनके नियंत्रण से बाहर होता जा रहा है। इस विवाद से प्रदेश की सियासत भी गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के लिए यह मुद्दा असहज स्थिति पैदा कर रहा है, क्योंकि यादव समाज को उसका पारंपरिक समर्थन आधार माना जाता है। फिलहाल पार्टी की ओर से इस विषय पर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर चर्चाएं तेज हैं। प्रशासन ने फिलहाल कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि फिल्म को सेंसर बोर्ड से अनुमति मिली है या नहीं, इस पर भी तथ्य जुटाए जा रहे हैं। स्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जा सकती है। रिलीज की तारीख नजदीक आने के साथ ही यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म निर्धारित समय पर सिनेमाघरों में पहुंच पाती है या विरोध के चलते इसकी रिलीज टलती है। फिलहाल, ‘यादव जी की लव स्टोरी’ ने पर्दे पर आने से पहले ही प्रदेश की राजनीति और समाज में हलचल मचा दी है।
यूपी चुनाव से पहले बड़ा ऐलान: मायावती बोलीं—बसपा अकेले लड़ेगी, गठबंधन से दूरी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी इस बार किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी। बसपा प्रदेश में अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी और पूर्ण बहुमत हासिल करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ेगी। लखनऊ से जारी आधिकारिक प्रेस बयान में मायावती ने कहा कि पिछले चुनावी अनुभवों से यह स्पष्ट हुआ है कि गठबंधन से पार्टी को अपेक्षित लाभ नहीं मिला, बल्कि कई बार संगठनात्मक नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा, “बसपा का जनाधार मजबूत है और पार्टी अपने दम पर सत्ता में आने की क्षमता रखती है। इसलिए इस बार किसी भी तरह के गठबंधन से दूर रहकर अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय लिया गया है।” बसपा सुप्रीमो ने कहा कि गठबंधन की राजनीति में पार्टी की विचारधारा और संगठनात्मक ताकत प्रभावित होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सक्रिय होकर बहुजन समाज की आवाज को मजबूती दें, ताकि पार्टी पूर्ण बहुमत के लक्ष्य को हासिल कर सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बसपा का यह फैसला प्रदेश की चुनावी रणनीति को नया मोड़ दे सकता है। अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा से अन्य दलों की रणनीतियों पर भी असर पड़ने की संभावना है। मायावती ने अपने बयान में यह भी कहा कि पिछले कुछ समय से उनके और पार्टी को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक एवं फर्जी दावे फैलाए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के मैसेज और पोस्ट पूरी तरह गलत हैं और पार्टी का उनसे कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अफवाहों और फर्जी खबरों से सतर्क रहें तथा केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें। मायावती ने विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के माध्यम से तैयार की गई फर्जी बयानबाजी को पार्टी गंभीरता से ले रही है और ऐसे मामलों की निगरानी की जा रही है। बसपा प्रमुख ने कहा कि पार्टी अनुशासन और संगठनात्मक एकता पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे गांव-गांव और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करें तथा पार्टी की नीतियों और उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाएं। आगामी चुनावों के मद्देनजर बसपा का यह ऐलान प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा करने वाला माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति बसपा को कितना राजनीतिक लाभ पहुंचाती है।
वृंदावन में आध्यात्मिक सवेरा: विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ने प्रेमानंद महाराज से की एकांत वार्ता
वृंदावन (मथुरा)। भक्ति और आध्यात्मिकता की नगरी वृंदावन में उस समय विशेष हलचल देखने को मिली, जब भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली और बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा सोमवार तड़के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन और एकांतिक वार्ता के लिए पहुंचे। सुबह लगभग 5:30 बजे दोनों दंपति मथुरा के वृंदावन स्थित केली कुंज आश्रम पहुंचे। आश्रम में उनका आगमन अत्यंत सादगीपूर्ण रहा। सूत्रों के अनुसार, विराट और अनुष्का ने करीब एक घंटे तक आश्रम में समय बिताया, जहां उन्होंने प्रेमानंद महाराज जी से आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा की और आशीर्वाद प्राप्त किया। बताया जाता है कि यह मुलाकात पूर्णतः निजी और आध्यात्मिक उद्देश्य से थी। दोनों ही लंबे समय से आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि रखते हैं और समय-समय पर विभिन्न धार्मिक स्थलों पर दर्शन करते रहे हैं। वृंदावन की शांत व पावन वातावरण में उन्होंने भक्ति और ध्यान के क्षण बिताए। हालांकि यात्रा को गोपनीय रखने का प्रयास किया गया था, लेकिन जैसे ही उनके आगमन की सूचना फैली, आश्रम के बाहर प्रशंसकों की भीड़ उमड़ पड़ी। दर्शन के उपरांत जब वे आश्रम से बाहर निकले, तो उनकी गाड़ी केली कुंज आश्रम के बाहर लगे जाम में कुछ देर के लिए फंस गई। इस दौरान बड़ी संख्या में प्रशंसक अपने चहेते क्रिकेटर और अभिनेत्री की एक झलक पाने के लिए उत्साहित दिखाई दिए। सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोनों ने हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन किया। स्थानीय पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति को संभालते हुए यातायात को सुचारू कराया।
काशी में गूंजा जनजातीय संस्कृति का स्वर: 17वाँ जनजातीय युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम का तृतीय दिवस प्रेरणा और एकता का बना प्रतीक
वाराणसी। मेरा युवा भारत के तत्वावधान में युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय एवं गृह मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सहयोग से आयोजित सात दिवसीय 17वें जनजातीय युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम का तृतीय दिवस शनिवार को गरिमामय, प्रेरणादायी और ऐतिहासिक वातावरण में संपन्न हुआ। काशी की पावन धरती पर आयोजित इस कार्यक्रम ने राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समरसता और युवा सशक्तिकरण का सशक्त संदेश दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार ने शिरकत की। उन्होंने विधिवत दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है, और इसी विविधता में हमारी एकता निहित है। कार्यक्रम के दौरान नारायणपुर, छत्तीसगढ़ से आए प्रतिभागियों ने पारंपरिक जनजातीय सामूहिक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। रंग-बिरंगी वेशभूषा, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की लय और ऊर्जा से भरपूर अभिव्यक्ति ने सभागार को तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान कर दिया। उपस्थित दर्शक इस जीवंत सांस्कृतिक प्रस्तुति से अभिभूत हो उठे। जिलाधिकारी ने काशी की आध्यात्मिक महिमा और ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए युवाओं को उच्च लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हैं और उन्हें नई दृष्टि, नई दिशा एवं नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से अपने अनुभवों को साझा करने, नई सीख ग्रहण करने तथा समाज के उत्थान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। जिला युवा अधिकारी यतेन्द्र सिंह ने मुख्य अतिथि को अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। अपने स्वागत भाषण में उन्होंने कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह आयोजन केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान का मंच नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम है। कार्यक्रम का संचालन राज्य प्रशिक्षक प्रयागराज के मनोज शर्मा ने प्रभावी ढंग से किया, जबकि संत रविदास नगर के जिला युवा अधिकारी रामगोपाल सिंह चौहान ने भावपूर्ण धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत कर सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर लेखा एवं कार्यक्रम सहायक ललितपुर विकास चौरसिया, भूतपूर्व स्वयंसेवक नन्दकिशोर जी, पूर्व स्वयंसेवक राकेश यादव, सुरेश भावद्वाज जी सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा को और भी बढ़ा दिया। काशी की पावन धरती पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल सांस्कृतिक उत्सव भर नहीं, बल्कि युवाओं के बीच संवाद, समझ और राष्ट्रीय एकात्मता की भावना को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
वाराणसी में महाशिवरात्रि पर हाई अलर्ट: शिवबारात, घाट सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को लेकर पुलिस-प्रशासन की व्यापक तैयारी
वाराणसी, 13 फरवरी 2026। महाशिवरात्रि पर्व के मद्देनज़र कमिश्नरेट वाराणसी ने सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था एवं मुख्यालय) श्री शिवहरी मीणा की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें संभावित भीड़, शिवबारात आयोजन, घाटों एवं जल क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में पुलिस उपायुक्त काशी श्री गौरव बंसवाल, सहायक पुलिस आयुक्त दशाश्वमेध श्री अतुल अंजान त्रिपाठी, प्रभारी जल पुलिस सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। साथ ही नाविकों, मल्लाह/मांझी समाज के प्रतिनिधियों, विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों तथा शिवबारात आयोजकों ने भी सहभागिता की। जल क्षेत्र में कड़ी निगरानी, अवैध नावों पर सख्ती पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि केवल वैध पंजीकृत एवं लाइसेंसधारी नाविकों को ही नाव संचालन की अनुमति होगी। अवैध नावों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर सीज की कार्रवाई की जाएगी। प्रत्येक नाव पर पंजीकरण संख्या स्पष्ट अंकित होना अनिवार्य होगा तथा निरीक्षण के दौरान अभिलेख प्रस्तुत करने होंगे। निर्धारित क्षमता से अधिक सवारी बैठाना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। प्रत्येक यात्री के लिए लाइफ जैकेट उपलब्ध कराना और उसे पहनाना अनिवार्य किया गया है। नाव में प्राथमिक उपचार किट, रस्सी और टॉर्च रखना भी जरूरी होगा। नशे की हालत में नाव संचालन पाए जाने पर तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घाटों पर भीड़ नियंत्रण के विशेष इंतजाम प्रमुख घाटों पर प्रवेश एवं निकास मार्ग अलग-अलग निर्धारित किए जाएंगे, ताकि भीड़ का दबाव न बने। सुरक्षित और असुरक्षित स्नान क्षेत्रों का स्पष्ट चिन्हांकन किया जाएगा तथा गहरे जल क्षेत्र में मजबूत बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे। अत्यधिक भीड़ की स्थिति में नियंत्रित प्रवेश प्रणाली लागू की जाएगी। घाटों पर पर्याप्त पुलिस बल, जल पुलिस एवं गोताखोरों की तैनाती रहेगी। रेस्क्यू बोट लगातार सक्रिय रहेंगी। वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं एवं दिव्यांगजनों के लिए विशेष सहायता व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। शिवबारात के लिए तय मार्ग और समय अनिवार्य शिवबारात केवल प्रशासन द्वारा स्वीकृत मार्ग और निर्धारित समयावधि में ही निकाली जाएगी। बिना अनुमति मार्ग परिवर्तन या कार्यक्रम आयोजन दंडनीय होगा। आयोजकों को पूर्व में शोभायात्रा का पूरा विवरण देना होगा। जुलूस में वाहनों की संख्या नियंत्रित रखी जाएगी तथा भड़काऊ, साम्प्रदायिक या उत्तेजक नारे-गीतों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। आतिशबाजी केवल अनुमति प्राप्त स्थल पर और सुरक्षा मानकों के अनुरूप ही की जा सकेगी। आपातकालीन मार्गों को पूरी तरह अवरोध मुक्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। लाउडस्पीकर और डीजे का प्रयोग केवल सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से ही किया जाएगा। निर्धारित ध्वनि मानकों और समय सीमा का पालन अनिवार्य होगा। नियमों के उल्लंघन पर उपकरण जब्त किए जाएंगे। अस्पतालों, विद्यालयों और संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास विशेष सावधानी बरती जाएगी। पार्किंग और यातायात के लिए विस्तृत प्लान केवल चिन्हित पार्किंग स्थलों का ही उपयोग किया जाएगा। मुख्य मार्गों और घाट मार्गों पर वाहन खड़ा करना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। अवैध पार्किंग पर तत्काल चालान और कार्रवाई की जाएगी। आपातकालीन वाहनों के लिए हर हाल में ग्रीन कॉरिडोर उपलब्ध रहेगा। VIP, मीडिया और आम श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग पार्किंग स्थल चिन्हित किए जाएंगे। यातायात पुलिस और आयोजकों के बीच समन्वय के लिए ट्रैफिक कंट्रोल डेस्क स्थापित की जाएगी। आयोजन स्थल, मंच और भंडारा स्थलों पर पर्याप्त अग्निशमन यंत्र लगाए जाएंगे। जेनरेटर सेट सुरक्षित दूरी पर स्थापित होंगे। अस्थायी विद्युत कनेक्शन केवल प्रमाणित तकनीशियन द्वारा लगाए जाएंगे। अग्निरोधक सामग्री का उपयोग अनिवार्य किया गया है। आपातकालीन निकास मार्ग स्पष्ट रूप से चिन्हित और अवरोध मुक्त रखे जाएंगे। फायर विभाग से समन्वय स्थापित कर आवश्यकतानुसार फायर टेंडर स्टैंडबाय रहेंगे। स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की अपील पूजा सामग्री एवं धार्मिक अवशेषों के लिए अलग संग्रहण पात्र लगाए जाएंगे। घाटों और शिवबारात मार्ग पर नियमित सफाई सुनिश्चित की जाएगी। पर्याप्त डस्टबिन और अस्थायी शौचालयों की व्यवस्था रहेगी। “स्वच्छ घाट- सुरक्षित पर्व” अभियान भी संचालित किया जाएगा। प्रशासन ने सभी आयोजकों को एक उत्तरदायी संपर्क अधिकारी (नोडल पर्सन) नामित करने का निर्देश दिया है, जो पुलिस एवं प्रशासन के साथ सतत समन्वय बनाए रखे। पुलिस प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा, अनुशासन और सामाजिक सद्भाव के साथ मनाएं। निर्धारित मार्गों और पार्किंग स्थलों का ही उपयोग करें, नाव यात्रा के दौरान लाइफ जैकेट अवश्य पहनें, अफवाहों से बचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें। प्रशासन का लक्ष्य है कि सभी के सहयोग से महाशिवरात्रि का पावन पर्व शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण में संपन्न हो।