2 लीटर कोल्ड ड्रिंक का RO 1 लीटर 900 ML वेस्ट पानी निकालता है डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्मा भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित ने बताया कि हमारे देश की नई पीढ़ी कोल्ड ड्रिंक और फास्ट फूड पर बहुत डिपेंड हो गई है। इसी के चलते विदेशी रहना सहन अपने की होड लगी हुई है। एक तरफ तो हम हिंदुस्तानी आरो का पानी ही हर जगह पीते हैं दूसरा पानी हजम नहीं होता ऐसा बोला जाता है इसी चक्कर में हजारों लीटर पानी रोज घरों में वेस्ट हो जाता है। आज मैं आपको एक बात बताऊंगी आप इसे घर पर जरूर टेस्ट करें मैंने तो किया है 2 लीटर कोल्ड ड्रिंक की बोतल ले उसमें RO की इनकमिंग पाइप डाल दे दूसरी तरफ वेस्ट पानी वाली पाइप अलग से एक पतीले में डालें अब RO का स्विच ऑन करें थोड़ी देर बाद कोल्ड ड्रिंक की बोतल खाली हो जाएगी और आपका पतीला भी भर जाएगा। और यह लगभग उतना ही वेस्ट पानी होगा जितना कोल्ड ड्रिंक की बोतल में था अब आप RO का साफ पानी वाला बक्सा देखें उसमें सिर्फ 100 ही पानी होगा। तो इसका सीधा सा यह अर्थ हुआ यह कोल्ड ड्रिंक वाली कंपनियां हमें RO का वेस्ट पानी ही पिला रही है। तो फिर आप क्यों हजारों लीटर पानी रोज वेस्ट कर देते हैं। बात बस इतनी सी है यदि आप कोल्ड ड्रिंक पी सकते हैं तो RO का वेस्ट पानी भी पी सकते हैं। और यदि RO का वेस्ट पानी आपको नुकसान करता है तो कोल्ड ड्रिंक भी नुकसान कर सकती है।
सिद्ध पीठों में प्रमुख है हरिद्वार का मनसा देवी मंदिर
प्रसिद्ध मनसा देवी माता का मंदिर देवभूमि हरिद्वार में हरकी पैड़ी के पास गंगा के किनारे स्थित है। नवरात्रि के दिनों में यहां माता के दर्शनों के लिए लंबी लंबी लाइनें तो लगती ही हैं साथ ही सामान्य दिनों में भी यहां श्रद्धालुओं की काफी अच्छी संख्या रहती है। जिसको देखते हुए मंदिर प्रशासन ने माता के दर्शनों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्था की है। मंदिर चूंकि पहाड़ी पर स्थित है इसलिए यहां तक पहुंचने के लिए ट्राली का उपयोग किया जाता है। यदि कोई महंगी ट्राली से सफर नहीं करना चाहे तो उसके लिए पहाड़ी पर ही सड़क मार्ग भी बनाया गया है जहां पैदल यात्रा के साथ ही स्थानीय ऑटो रिक्शा के जरिये पहुंचा जा सकता है। यहां चलने वाली ट्राली श्रद्धालुओं को खूब आकर्षित करती है और इसके चलते यह धार्मिक पर्यटन स्थल का रूप ले चुका है। यहां चलने वाली ट्राली को मनसा देवी उड़नखटोला के नाम से भी जाना जाता है। रोपवे से श्रद्धालुओं को मंदिर लाने ले जाने का काम सुबह आठ बजे से सायं पांच बजे तक चलता है। दिन में यह 12 से 2 बजे तक भोजन के लिए यह सेवा बंद कर दी जाती है। यहां स्थित माता मनसा देवी को सिद्ध पीठों में प्रमुख माना जाता है। यह हरिद्वार स्थित तीन सिद्धपीठों में से एक है। अन्य दो सिद्धपीठ हैं चंडी देवी मंदिर और माया देवी मंदिर। मान्यता है कि जो श्रद्धालु यहां सच्चे मन से मां की पूजा अर्चना कर मुराद मांगते हैं माता उनकी इच्छा जरूर पूरी करती हैं। धार्मिक ग्रंथों और पुराणों के मुताबिक मनसा देवी का जन्म संत कश्यप के मस्तिष्क से हुआ। वह राजा वासुकी की पत्नी हैं। कहा जाता है कि मनसा देवी ने भगवान शंकर की कठोर तपस्या किया और साथ ही वेदों का अध्ययन भी किया जिसके फलस्वरूप उन्हें कृष्ण मंत्र प्राप्त हुआ जिसे कल्पतरू कहा जाता है। देवी ने बाद में पुष्कर में कई युगों तक तप किया जिससे प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि देवी तुम्हारी तीनों लोकों में पूजा होगी। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि आशुतोष भगवान की पुत्री मनसा को ऋषि कश्यप ने अपने संरक्षण में पाला और सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने उनका नामकरण किया। ब्रह्मा ने नामकरण के बाद बताया कि कोई भी विष इस देवी के सामने तुच्छ है इसलिए इस देवी का नाम विषहरि होगा। इसी कारण समस्त नागों और भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। मनसा देवी को भगवान शिव की मानसपुत्री के रूप में भी जाना जाता है। मनसा देवी की पूजा ज्येष्ठ मास की दशहरा तिथि यानी गंगा दशहरा के दिन बंगाल में कई जगह की जाती है। मनसा देवी की पूजा के बाद ही नागों की पूजा करने का प्रचलन है। मान्यता है कि जो व्यक्ति देवी के बारह नामों का उच्चारण करता है, उसके वंशजों को भी सर्प भय नहीं रहता। देवी के यह बारह नाम इस प्रकार हैं− जरत्कारू, जगदगौरा या जगतगौरी, मनसा, सियोगिनी, वैष्णवी, नागभगिनी, शैवी, नागेश्वरी, जगतकारुप्रिया, आस्तिकमाता और विषहरी। मनसा देवी के मंदिर आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए यहां लगे वृक्षों में एक धागा बांधते हैं। जब उनकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है तो वह पुनः मंदिर आते हैं और वह धागा खोलकर मनसा देवी की पूजा करते हैं। श्रद्धालुओं की ओर से मनसा देवी की पूजा के दौरान माता को फल, नारियल, फूल और श्रृंगार सामग्री अर्पित की जाती है।
प्रेगनेंसी में महिलाओं को कितनी कैलोरी लेनी चाहिए : डॉ अर्चिता महाजन
याद रहे कैलोरी स्वस्थ्य फूड से पूरी करें ना की मिठाई और जंक फूड से डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्मा भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित ने बताया कि अक्सर महिलाओं को जो उलझन रहती है की प्रेगनेंसी के दौरान आम भूख से डबल खाना चाहिए ऐसा शायद इसलिए कहा गया होगा कि किसी तरह से गर्भवती बहू को ज्यादा खाने के लिए प्रेरित किया जा सके डबल तो किसी हालत में खाया ही नहीं जा सकता। परंतु इसके साथ-साथ कैलोरी का भी ध्यान रखना होगा कि आप कैलोरीज़ कहां से ले रहे हैं कोल्ड ड्रिंक पीने से आपकी कैलोरी की जरूरत पूरी हो जाएगी परंतु वह आपके बच्चे को जरूरत के अनुसार पोषण नहीं दे पाएगी और कई तरह के विकार उत्पन्न होंगे।पहली तिमाही में आपको कोई अतिरिक्त कैलोरी की ज़रूरत नहीं होती. दूसरी तिमाही में, आपको प्रतिदिन 340 अतिरिक्त कैलोरी और तीसरी तिमाही में 450 अतिरिक्त कैलोरी की ज़रूरत हो सकती है. ज़्यादा एक्टिव रहने वाली महिलाओं को 350-450 अतिरिक्त कैलोरी की ज़रूरत पड़ सकती है. वहीं, जो महिलाएं ज़्यादा काम नहीं करतीं, उन्हें 200-300 अतिरिक्त कैलोरी लेनी चाहिए. अतिरिक्त कैलोरी को स्वस्थ खाद्य पदार्थों से लेना चाहिए. मिठाई या जंक फ़ूड से मिलने वाली अतिरिक्त कैलोरी से बच्चे को ज़रूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते. इससे आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है.सुबह खाली पेट दलिया, ओट्स और ब्राउन ब्रेड का सेवन कर सकती हैं। इनमें फाइबर अधिक होता है, इससे आप कब्ज और गैस की समस्या से बच सकती हैंएक चम्मच (16 ग्राम) क्रीमी पीनट बटर से लगभग 100 कैलोरी और 3.5 ग्राम प्रोटीन मिलेगा।
सर्दी-खांसी ने जकड़ लिया है, तो बिना दवाई के इन 5 उपायों से होगा ठीक
ठंड का मौसम आने वाला है ऐसे में सर्दी-खांसी और जुकाम होना आम बात है। सर्दियों के दौरान एक बार तो वातावरण में मौजूद ठंडक, हवा में नमी और वायु प्रदूषण के कारण खांसी, सर्दी, जुकाम, कफ और गले में खराश में होने की समस्या आम बात है। आती हुई सर्दी में खांसी-जुकाम जरुर होता है। वैसे तो दवाईयो के खाने से छुटकारा मिल जाता है, लेकिन ज्यादा दवाई के सेवन से शरीर को नुकसान होता है। इसके जगह आप घरेलू उपाय के जरिए सर्दी-खांसी और जुकाम से छटुकारा पा सकते हैं। अगर आप भी सर्दी-खांसी से परेशान हैं तो इन 5 उपायों के करने से निजात पा सकते हैं। अदरक और शहद अदरक में एंटीवायरल और एंटीबायोटिक गुण होते हैं, जो वायरल इंफेक्शन से लड़ने में मदद करती है। इसके साथ ही शहद गले की सूजन को दूर करने के लिए काम करता है। इस उपाय को करने के लिए आप एक कप गुनगुने पानी में आध चम्मच अदरक का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर पिएं। इस उपाय को आप दिन में दो-तीन बार कर सकते हैं। आपको काफी राहत मिलेगी। तुलसी और काली मिर्ची तुलसी में एंटीबायोटिक गुण मौजूद होते हैं। इसके साथ ही काली मिर्च खांसी को कम करने में मदद करता है। एक कप गुनगुने पानी में कुछ तुलसी के पत्ते और 2-3 काली मिर्च डालकर उबालें। अब आप इसे छानकर पिएं। यह जिद्दी से जिद्दी खांसी और गले की खराश में राहत देगा। गर्म पानी से भाप लें यदि आपको सर्दी और खांसी के साथ ही नाक बंद है, तो आप इस समस्या से बचने के लिए भाप लें सकते हैं। इसके लिए आप एक कटोरे में गर्म पानी लें और फिर उसमें सिर को झुका कर तौलिया से ढक लें। भाप को आपको 1 या 2 मिनट तक जरुर लें। ऐसा करने से आपकी नाक खुल सकती है और साथ ही गले की सूजन दूर होती है और खांसी में भी आराम मिलेगा। हल्दी वाला दूध सर्दी-खांसी की समस्या से बचने के लिए हल्दी वाला दूध सबसे फायदेमंद होता है। एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी डालकर अच्छे से मिला लें और सोने से पहले इसे पिएं। इससे आपको काफी राहत मिलेगी और साथ ही इम्यून सिस्टम भी मजबूत होगा। नींबू और गर्म पानी शरीर को इम्यून करने के लिए नींबू सबसे बढ़िया है क्योंकि इसमें विटामिन सी होता है। गर्म पानी में नींबू का रस डालें। इससे आपके गले की खराश दूर होगी। साथ ही सर्दी और खांसी की समस्या दूर होगी।
ऐप को डिलीट करने के बाद भी रह जाती है आपकी पर्सनल इनफार्मेशन
आजकल सभी के स्मार्टफोन में तमाम तरीके के ऐप भरे रहते हैं, कुछ तो उन्होंने अपने काम करने के लिए इंस्टॉल किया होता है लेकिन बहुत सारे ऐसे ऐप होते हैं जो बेवजह ही आपके फोन में रहते हैं और आपको इसका पता भी नहीं रहता है। इसके अलावा बहुत सारे ऐसे ऐप होते हैं जिन्हें आप वन टाइम इस्तेमाल के लिए इंस्टॉल करते हैं और उसको अनइनस्टॉल भी कर दिए होते हैं, लेकिन यहां इस लेख में हम इस बात का जिक्र करने जा रहे हैं कि आपने जिन वन टाइम इस्तेमाल वाले ऐप को अनइनस्टॉल कर दिया है, उनके पास आपकी कुछ जरूरी इंफॉर्मेशन जैसे आपकी लोकेशन, आपका एड्रेस, आपका मोबाइल नंबर, आपका जीमेल, नंबर सोशल मीडिया फाइल एक्सेस की परमिशन आदि इनफॉरमेशन उसे अप में सेफ रहती है। तो अनइनस्टॉल होने के बाद भी उस ऐप में आपके इंफॉर्मेशन सेफ है और किस तरीके से आप इस ऐप से अपने इनफॉरमेशन को लॉगआउट कर पाएंगे यही इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको बताने की कोशिश कर रहे हैं। आईए जानते हैं क्या है वह स्टेप जिससे आप किसी भी अननोन ऐप से अपनी इंफॉर्मेशन को हटा सकते हैं। – सबसे पहले आपको अपने फोन की सेटिंग में जाना है और इसे ओपन करना है। – इसके बाद आपको गूगल सर्विसेज का ऑप्शन दिखाई देगा, वहां पर क्लिक करके आपको मैनेज योर अकाउंट पर जाना है। – यहां से आपको डाटा एंड प्राइवेसी का ऑप्शन दिखाई देगा और इसी के नीचे आपको हिस्ट्री सेटिंग दिखाई देगी। – हिस्ट्री सेटिंग का ऑप्शन क्लिक करते ही आपको वेब एंड एक्टिविटी का ऑप्शन दिखाई देगा। – इस पर क्लिक करते ही आपके सामने उन सभी ऐप्स की पूरी लिस्ट आ जाएगी जिनके पास आपका लोकेशन समेत अन्य इनफॉरमेशन को एक्सेस है। – ऐसे में आप जिन भी वेबसाइट से अपनी इनफॉरमेशन हटाना चाहते हैं आप उस पर क्लिक करें और वहां से अपनी इंफॉर्मेशन को आसानी से डिलीट कर सकते हैं।
थोड़ा बहुत चलने से सांस फूलती है तो कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड जरूर चेक करें:डॉ अर्चिता महाजन
हाथों और पैरों में झुनझुनी करंट जैसा महसूस होता है तो भी उच्च कोलेस्ट्रॉल का संकेत है. डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्मा भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित ने बताया कि जब थोड़ा बहुत चलने से ही सांस फूलने लगे तो तुरंत कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड जरूर चेक करें।जब खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक बढ़ जाती है ,तो शरीर में मौजूद रक्त वाहिकाओं में बाधा उत्पन्न होने लगता है और वे ब्लॉक होने लगते हैं। ऐसे लोगों को अक्सर हाथ और पैरों में झनझनाहट या करंट जैसा महसूस होता है। कुछ लोगों को साथ में दर्द भी महसूस होता है।कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से सांस फूलने की समस्या हो सकती है: कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से हृदय या फेफड़ों में ब्लड सर्कुलेशन कम हो जाता है, जिससे सांस लेने में परेशानी होती है. धमनियों में प्लाक जमा होने से ऑक्सीजन युक्त रक्त की आपूर्ति कई अंगों तक सीमित हो जाती है, जिससे सांस फूलने की समस्या हो सकती है. कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कुछ और लक्षण: थकान और कमज़ोरी, सीने में दर्द या बेचैनी, स्किन पर पीले रंग का जमाव, हाथ-पैरों में झुनझुनी, रात में लेटने पर तलवों का ठंडा होना. कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए, आप ये उपाय कर सकते हैं: स्वस्थ आहार लें, नियमित व्यायाम करें, तंबाकू और अल्कोहल का सेवन न करें, वज़न नियंत्रण करें, डॉक्टर के सलाह पर दवाएं लेंशरीर में बनने वाला खराब कोलेस्ट्रॉल धमनियों को अवरुद्ध कर देता है और हृदय के लिए पर्याप्त रक्त पंप करना कठिन बना देता है. इससे सांस लेने में दिक्कत होती है. थकान-कमजोरी: रात के समय अत्यधिक थकान और कमजोरी भी हाई कोलेस्ट्रॉल का संकेत हो सकता हैऐसे लोगों को अक्सर हाथ और पैरों में झनझनाहट या करंट जैसा महसूस होता है।
थायराइड से PCOS होता है और PCOS से बांझपन होता है डॉ अर्चिता महाजन
स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और वजन को नियंत्रित करके पीसीओएस की रोकथाम की जा सकती हैं डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्मा भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित ने बताया कि PCOS और थायरॉइड की समस्या एक-दूसरे से जुड़ी हुई है. PCOS से पीड़ित महिलाओं में थायरॉइड रोग होने की संभावना ज़्यादा होती है. PCOS से पीड़ित महिलाओं में एंड्रोजन का स्तर ज़्यादा होता है, जिससे हार्मोनल असंतुलन हो सकता है. यह असंतुलन थायरॉयड जैसे शरीर के दूसरे हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है. पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में ग्रेव्स रोग और हाशिमोटो थायरायडिटिस जैसे ऑटोइम्यून थायरॉइड विकार होने का खतरा ज़्यादा होता है. थायरॉइड और PCOS दोनों ही लाइफ़स्टाइल से जुड़ी समस्याएं हैं. इन दोनों को कंट्रोल में रखना महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़रूरी है. PCOS और थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं को कंट्रोल करने के लिए स्वस्थ आहार लेना, पर्याप्त नींद लेना, और व्यायाम करना फ़ायदेमंद होता है. ज्यादा तनाव लेने से थायराइड का स्तर बढ़ जाता है और थायराइड बढ़ने से हार्मोन्स पर असर पड़ता है जिसके चलते पीरियड्स में गड़बड़ी जैसे हैवी ब्लीडिंग या अनियमित पीरियड्स की समस्या शुरू हो जाती है।पीसीओएस का मुख्य कारण एण्ड्रोजन नामक पुरुष हार्मोन का उच्च स्तर है एण्ड्रोजन का उच्च स्तर आपके अंडाशय को अंडे जारी करने से रोकता है, जिससे अनियमित मासिक धर्म चक्र होता है।पीसीओएस एक आम हार्मोनल विकार है जो प्रजनन प्रणाली और चयापचय पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। पीसीओएस की सामान्य विशेषताएं अनियमित मासिक धर्म या मासिक धर्म के दौरान भारी रक्तस्राव, चेहरे और शरीर पर अत्यधिक बाल, और कभी-कभी गंभीर मुँहासे और पुरुषों में गंजापन, मोटापा और बांझपन हो सकती हैं। अंडाशय में कई तरल पदार्थ से भरी थैलियाँ या सिस्टिक रोम होते हैं जो महिला शरीर में अनुचित या कोई डिंब/अंडा उत्पादन और एंड्रोजन नामक पुरुष हार्मोन के अधिक उत्पादन का कारण बनते हैं। यह डिंब की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, जो मासिक धर्म चक्र को प्रभावित करेगा और बांझपन या गर्भवती होने में असमर्थता का कारण बनेगा। प्रभावित महिलाओं को एंडोमेट्रियल कैंसर, मधुमेह और हृदय रोग का खतरा भी बढ़ जाता है।हाइपोथायरायडिज्म और पीसीओएस के सामान्य लक्षणों में अनियमित मासिक धर्म, मुंहासे, वजन बढ़ना, अत्यधिक बाल उगना और गर्भवती होने में कठिनाई शामिल है। प्रभावी उपचार प्रबंधन के लिए उचित निदान अपि कई बार, उचित कारण की पहचान किए बिना उप स्थिति और बिगड़ सकती है।
हड़बड़ी या जल्दबाजी में खाना खाना बीमारियों को दावत देता है डॉ अर्चिता महाजन
रात को जल्दी सोए और सुबह जल्दी उठे समय से पहले तैयार होकर आराम से नाश्ता करें। डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्मा भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित ने बताया कि आजकल भाव दौड़ भरी जिंदगी में बच्चे हो जा बड़े किसी के पास भी खाना खाने का समय नहीं है। सुबह सुबह जल्दी से नाश्ता को घुसेड़ने की कोशिश की जाती है। ऐसा ही कुछ लंच टाइम में होता है। बस यही से गड़बड़ शुरू हो जाती है।अगर आप हड़बड़ी या जल्दबाजी में खाना खाते हैं, तो इससे आपके पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ सकता है। जल्दी-जल्दी खाने से पाचन तंत्र पर दबाव पड़ सकता है, जिससे अपच, सूजन और असुविधा हो सकती है। दरअसल, तेजी से खाने की वजह से खाने के साथ ज्यादा हवा निगलने की संभावना बढ़ जाती है, जिसके कारण सूजन हो जाती है।भोजन को 32 बार या उससे ज़्यादा बार चबाने से भोजन से ज़्यादा पोषक तत्व बाहर निकलते हैं। जैसे-जैसे भोजन के कण छोटे होते जाते हैं, आपका शरीर भोजन में मौजूद ज़्यादा विटामिन, खनिज और दूसरे ज़रूरी पोषक तत्वों को अवशोषित कर सकता है। जल्दी-जल्दी खाने से पाचन तंत्र पर दबाव पड़ता है, जिससे अपच, सूजन, और असुविधा हो सकती है. जल्दी-जल्दी खाने से दिमाग को ‘पेट भर गया’ का संकेत मिलने में समय लगता है, जिससे ज़्यादा खाना खा लिया जाता है. ज़्यादा खाने से आपके शरीर को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है और रक्त प्रवाह दूसरे अंगों से हटकर आपके व्यस्त पाचन तंत्र की ओर चला जाता है। इससे आपको थकान या सुस्ती महसूस हो सकती है।जल्दी-जल्दी खाने से ब्लड शुगर लेवल में अचानक वृद्धि होती है, जो मधुमेह का कारण बन सकता है. जल्दी-जल्दी खाने से शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल की कमी हो सकती है और बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है. जल्दी-जल्दी खाने से भोजन गले में अटक जाता है, जिससे चोकिंग हो सकती है.सलाइवा में कई ऐसे एंजाइम होते हैं, जो खाने के साथ कार्बोहाइड्रेट को पचाना शुरू कर देते हैं। चबाकर खाने से देर तक पेट भरे रहने का एहसास होता है और व्यक्ति ओवर ईटिंग की आदत से बचा रहता है। इससे वजन भी नियंत्रित रहता है।’भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाने से ज्यादा से ज्यादा न्यूट्रिशन और ऊर्जा को अवशोषित होने में मदद मिलती है। चबाकर भोजन करना दांतों की हेल्थ के लिए भी अच्छा होता है। इससे दांतों और मुंह की अच्छी एक्सरसाइज होती है। खाना चबाकर खाने से आंतों में बैक्टीरिया पनपने की संभावना बहुत कम होती है। रात को जल्दी सोए और सुबह जल्दी उठे समय से पहले तैयार होकर आराम से नाश्ता करें।
ठंड और प्रदूषण के कारण ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है डॉ अर्चिता महाजन
स्ट्रोक तब होता है जब आपके मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन और महत्वपूर्ण पोषक तत्व नहीं मिल पाते डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्मा भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित ने बताया कि क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, स्ट्रोक का रिस्क बढ़ाने के कई कारण होते हैं जैसे परिवार में किसी और को स्ट्रोक आने की हिस्ट्री, बुढ़ापा, हाई ब्लड प्रेशर लेवल, सुस्त रहने और कसरत ना करने जैसी आदतों के कारण बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल, स्मोकिंग और हार्ट डिजिजेज आदि। इन सब कारणों की वजह से लोगों में स्ट्रोक और मिनी स्ट्रोक जैसी स्थितियों का जोखिम बढ़ सकता है। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक शोध में पाया कि धूम्रपान की तरह बढ़ते वायु प्रदूषण और तापमान में बढ़ोतरी से मस्तिष्क आघात का खतरा हो सकता है. शोध में पहली बार वायु प्रदूषण और तापमान को ब्रेन हेमरेज के लिए जोखिम भरा पाया गया. ब्रेन हेमरेज की स्थिति तब बनती है जब दिमाग और इसे ढकने वाले टिशूज के बीच की नसों में खिंचाव पैदा होता है और वह उसे खिंचाव के कारण फट जातीं हैं. इस खिंचाव के होने के कई कारण होते हैंयूनिवर्सिटी ऑफ़ वाशिंगटन में किए गए शोध में पता चला कि वायु प्रदूषण के साथ-साथ बढ़ते तापमान की वजह से भी ब्रेन हेमरेज हो सकता है. द लैंसेट न्यूरोलॉजी जनरल में छपे लेख के अनुसार दुनिया में ब्रेन स्ट्रोक से मौतों के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैंठंड के कारण ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. ठंड के मौसम में ब्रेन स्ट्रोक के मामले बढ़ने की वजहें ये हैं: ठंड में खून गाढ़ा हो जाता है, धमनियां सिकुड़ जाती हैं, ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है,ब्लड फ़्लो धीमा हो जाता है,खून के थक्के जमने की संभावना बढ़ जाती है,दिमाग की नसें फटने या उसमें ब्लॉकेज होने का खतरा बढ़ जाता है.
Miss & Mister Exclusive सीज़न 7 के विजेताों का ऐलान
नई दिल्ली, 7 अप्रैल, 2024 रविवार 7 अप्रैल को परिवार, दोस्तों और शुभचिंतकों ने एक्सक्लूसिव & एक्स्ट्राऑर्डिनरी मिस्टर इंडिया 2024 के विजेता कारन राजपूत का स्वागत किया। इस अवसर पर करन ने सब लोगों के प्रति भी अपना आभार व्यक्त किया करन सिंह राजपूत ने 5 अप्रैल से ७ अप्रैल 2024 को दिल्ली के आपुलेंट रिसोर्ट में एक्सक्लूसिव & एक्स्ट्राऑर्डिनरी मिस्टर इंडिया 2024 का खिताब जीता। कारन राजपूत ने गर्व से हरयाणा का प्रतिनिधित्व किया और एक्सक्लूसिव & एक्स्ट्राऑर्डिनरी मिस्टर इंडिया का खिताब जीता। ऊनि जीत रनवे पर उनके उल्लेखनीय संतुलन और करिश्मा का प्रमाण है। कारन ने बताया की मुझे इस प्रतियोगिता मै भाग लेने के लिऐ मेरे रेसलिंग के कोच प्रिंस आडवंशी जी और एफएफडब्ल्यू के चेयरमैन सचिन आडवंशी जी ने प्रेरीत किया था और मुझे सच मैं बहुत अच्छा लगा ये सफलता प्राप्त कर के लाइफ का ये एक बहुत अच्छा अनुभव था जब हमारे E&E के कोच या टीचर हम को इस प्रियोग्ता के लिऐ तैयार कर रहते थे तो उन हों ने बहुत फ्रेंडली और प्यार से हम को सारी चीज़े समझाई / सिखाई थी और हम को अच्छे से समझ भी आया और सच मैं हम ने सीखते सीखते बहुत इंजॉय भी किया मै दिल से धन्यवाद करता हू अपने E&E के टीचर को और टॉप मैनेजमेंट को मुझे इस प्रतियोगिता मै भाग लेने से व्यक्ति गत बहुत ही मदत मिलेगी क्यों इस मंच से मै ने अपने आप को निहारा हैं और मेरे अंदर एक कॉन्फिडेंस आया है और सीखा है के अगर हमारे अंदर कॉन्फिडेंस है तो हम कुछ भी कर सकते हैं मैं ये बोलना चाहूगा के कमी हर इंसान मैं होती हैं परंतु उस कमी को भूलकर अगर एक बार कॉन्फिडेंस के साथ आगे बढ़ेंगे तो एक दीन हम जरूर जीतेगे महन्त करते रहना चाहिए हारने पर भी कॉन्फिडेंस खतम नही होना के चाहिए और अपने आप में हर बार एक नया जोश जगाना चहिए तो एक दिन सफलता जरूर मिलेगी बस हार नहीं मानना है जिस प्रकार मै ने इस प्रतियोगिता को जिता है उसी प्रकार मै और भी महन्त करुंगा और आपने गांव के सात अपने स्टेट और और अपने देश का भी नाम रोशन करुगा मैं दिल से जब तक महन्त करुंगा जब तक मै अपने सपनो को पूरा करने मै कामयाब नही हों जाता और मैं एक अच्छे रैसलर के साथ हाथ एक अच्छा मॉडल भी बनूगा और एक दीन Mr World बन कर रहूंगा और मुझे E&E के मंच से जो कामयाबी मिली है मैं उस के लिए मै तह दिल से E&E फैमिली का धन्यवाद करता हूं