डिजिटल डेस्क | लाइफस्टाइल : आजकल रिश्तों में एक नया शब्द सुनने को मिल रहा है—‘क्वाइट डिवोर्स’। इसमें न तलाक होता है, न कानूनी लड़ाई, लेकिन पति-पत्नी भावनात्मक रूप से एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं। आसान शब्दों में कहें तो शादी कागज़ों में बनी रहती है, पर रिश्ता दिल से खत्म हो जाता है। क्या होता है क्वाइट डिवोर्स? क्वाइट डिवोर्स में पति-पत्नी कानूनी रूप से साथ रहते हैं, लेकिन उनके बीच पति-पत्नी जैसा रिश्ता नहीं रहता। वे साथ रह सकते हैं या अलग, पर भावनात्मक जुड़ाव खत्म हो जाता है। इसे लोग “चुपचाप अलग होना” भी कहते हैं। लोग इसे क्यों चुन रहे हैं? इसके पीछे कई वजहें हैं— तलाक की झंझट से बचने के लिए बच्चों पर असर न पड़े, इसलिए पैसों और प्रॉपर्टी की परेशानी से बचाव समाज और रिश्तेदारों के सवालों से दूरी * रोज़-रोज़ के झगड़ों से शांति पाने के लिए एक्सपर्ट क्या कहते हैं? रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह तरीका कुछ लोगों के लिए आसान लग सकता है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। अगर बातचीत और समझ खत्म हो जाए, तो यह स्थिति आगे चलकर अकेलापन और तनाव बढ़ा सकती है। इसके फायदे घर में झगड़े कम होते हैं बच्चों की पढ़ाई और दिनचर्या पर कम असर कोर्ट और वकील के खर्च से राहत नुकसान भी हैं रिश्ते में अपनापन खत्म हो जाता है मानसिक तनाव बढ़ सकता है बच्चे रिश्तों को लेकर उलझन में पड़ सकते हैं क्वाइट डिवोर्स उन लोगों का रास्ता बन रहा है, जो खुला तलाक नहीं चाहते। लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि खुलकर बात करना और सही सलाह लेना आज भी रिश्ते को समझने और संभालने का सबसे बेहतर तरीका है।
आत्मविश्वास और सौंदर्य की नई परिभाषा बनी वोगस्टार इंडिया सीज़न-4
जोधपुर की डॉ. भूमिका बैनर्जी ने सेकंड रनर-अप बनकर रचा प्रेरणादायी इतिहास जोधपुर। महिलाओं के आत्मविश्वास, साहस और नई शुरुआत का उत्सव बनकर उभरा मिस एंड मिसेज़ वोगस्टार इंडिया सीज़न-4 इस वर्ष केवल एक फैशन शो या ब्यूटी पेजेंट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मंच महिलाओं की सोच, व्यक्तित्व और आत्मबल को नई पहचान देने का सशक्त माध्यम बना। जयपुर के भव्य द पैलेस बाय पार्क ज्वेल्स में 16 से 18 जनवरी तक आयोजित इस प्रतिष्ठित आयोजन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि सौंदर्य की परिभाषा उम्र या पारंपरिक मानकों से नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, उद्देश्य और व्यक्तित्व से तय होती है। इस राष्ट्रीय स्तर के मंच पर जोधपुर की डॉ. भूमिका बैनर्जी ने बतौर मॉडल अपना शानदार डेब्यू किया और Mrs VogueStar India Season-4 (G2 कैटेगरी) में सेकंड रनर-अप का खिताब जीतकर न केवल शहर, बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया। उनके आत्मविश्वास से भरे रैंप वॉक, सहजता और गरिमामय प्रस्तुति ने निर्णायक मंडल के साथ-साथ दर्शकों को भी गहराई से प्रभावित किया। डॉ. भूमिका बैनर्जी की यह उपलब्धि उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी, जो पारिवारिक, सामाजिक या पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को दोबारा जीने का साहस जुटाती हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि सही मंच और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ हर महिला अपनी नई पहचान बना सकती है। कार्यक्रम की फाउंडर और डायरेक्टर कीर्ति चौधरी के नेतृत्व में आयोजित इस सीज़न में तीन श्रेणियां रखी गई थीं— मिस, मिसेज़ G1 और मिसेज़ G2। देश के विभिन्न राज्यों से आई प्रतिभागियों ने इन श्रेणियों में भाग लेकर मंच को विविधता, ऊर्जा और आत्मविश्वास से भर दिया। हर प्रतिभागी ने अपनी कहानी, संघर्ष और आत्मबल के जरिए मंच को जीवंत बना दिया। वोगस्टार इंडिया एक महिला-नेतृत्व वाला ऐसा मंच है, जो उम्र, पृष्ठभूमि या जीवन की परिस्थितियों की परवाह किए बिना महिलाओं को आगे बढ़ने और खुद को साबित करने का अवसर देता है। यह आयोजन इस बात का सशक्त उदाहरण है कि जब महिलाओं को सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिलता है, तो वे केवल मॉडल ही नहीं बनतीं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा और बदलाव की मिसाल भी बनती हैं। वोगस्टार इंडिया सीज़न-4 ने यह संदेश दिया कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती और आत्मविश्वास ही असली सौंदर्य है।
मेनोपॉज नहीं, पहचान का मोड़ है यह दौर — 40 के बाद महिलाओं में क्यों बदलने लगता है स्वभाव और सोच?
अक्सर महिलाएं मेनोपॉज को केवल पीरियड्स के बंद हो जाने तक सीमित समझ लेती हैं। लेकिन हकीकत इससे कहीं गहरी और असरदार है। मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का वह चरण है, जहां शरीर ही नहीं, मन, सोच और व्यवहार तक बदलाव के दौर से गुजरते हैं। यही वजह है कि कई महिलाएं खुद से सवाल करने लगती हैं — “क्या मैं बदल रही हूं?” मेनोपॉज क्या सिर्फ शारीरिक बदलाव है? नहीं। मेनोपॉज हार्मोनल बदलावों की एक जटिल प्रक्रिया है। इस दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन तेजी से घटते हैं, जिसका सीधा असर दिमाग, भावनाओं और ऊर्जा स्तर पर पड़ता है। क्यों बदलने लगती है पर्सनैलिटी? मेनोपॉज के समय दिखने वाले कुछ आम लेकिन अनदेखे बदलाव— * मूड स्विंग्स: छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा या अचानक उदासी * थकान और सुस्ती: बिना ज्यादा काम किए भी थक जाना * नींद की समस्या: रात को नींद न आना या बार-बार टूटना * चिंता और चिड़चिड़ापन: हर बात पर बेचैनी महसूस होना * आत्मविश्वास में कमी: खुद को पहले जैसा न महसूस करना ये लक्षण धीरे-धीरे महिला के व्यवहार और फैसलों को प्रभावित करने लगते हैं, जिससे उन्हें लगता है कि उनकी पर्सनैलिटी बदल रही है। वजन बढ़ना और शरीर से नाराज़गी मेनोपॉज के बाद मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है। पेट और कमर के आसपास वजन बढ़ना आम बात है। इससे महिलाएं अपने शरीर को लेकर असहज महसूस करने लगती हैं, जिसका असर आत्मसम्मान पर पड़ता है। रिश्तों पर भी पड़ता है असर भावनात्मक असंतुलन का असर पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों पर भी दिखता है। कई महिलाएं खुद को कम समझी जाने वाली या अकेली महसूस करने लगती हैं। चुप रहना समाधान नहीं सबसे बड़ी गलती यही होती है कि महिलाएं इन बदलावों को “उम्र का असर” मानकर सहती रहती हैं। जबकि मेनोपॉज के लक्षणों पर खुलकर बात करना, डॉक्टर से सलाह लेना और सही जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है। * संतुलित आहार और कैल्शियम युक्त भोजन * नियमित वॉक, योग या हल्की एक्सरसाइज * पर्याप्त नींद और तनाव कम करने की कोशिश * जरूरत हो तो काउंसलिंग या मेडिकल सलाह मेनोपॉज कोई बीमारी नहीं, बल्कि जीवन का नया अध्याय है। यह दौर आपकी कमजोरी नहीं, बल्कि खुद को नए सिरे से समझने और अपनाने का मौका है। जरूरी है कि महिलाएं इसे नजरअंदाज न करें, क्योंकि सही जानकारी और देखभाल से यह सफर आसान और सशक्त बन सकता है।
सिर्फ 7 मिनट का फॉर्मूला: लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन का नया विज्ञान
नई दिल्ली। लंबी उम्र जीना हर किसी की चाह होती है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ ज्यादा साल जीना नहीं, बल्कि उन सालों को स्वस्थ तरीके से जीना असली सफलता है। भारत जैसे देश में, जहां डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग तेजी से बढ़ रहे हैं, औसतन लोग अपने जीवन के करीब 8–10 साल किसी न किसी गंभीर बीमारी से जूझते हुए बिताते हैं। लेकिन अब राहत की खबर है। अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल द लांसेट में प्रकाशित एक हालिया स्टडी के मुताबिक, रोज़मर्रा की जिंदगी में किए गए बहुत छोटे बदलाव भी आपकी सेहत और उम्र दोनों पर बड़ा असर डाल सकते हैं। नींद के सिर्फ 5 मिनट, सेहत के लिए बड़ा बदलाव स्टडी में बताया गया है कि अगर कोई व्यक्ति रोज़ अपनी नींद में सिर्फ 5 मिनट का इज़ाफा करता है, तो इससे शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। पर्याप्त नींद: * हार्मोन बैलेंस सुधारती है * इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती है * तनाव और डिप्रेशन को कम करती है * डायबिटीज और हाई बीपी के खतरे को घटाती है विशेषज्ञों का कहना है कि नींद को “समय की बर्बादी” समझने की सोच बदलनी होगी, क्योंकि यही शरीर की असली मरम्मत का समय होता है। इतना ही नहीं, स्टडी में यह भी सामने आया कि दिन में सिर्फ 2 मिनट की अतिरिक्त वॉक करने से भी स्वास्थ्य पर चौंकाने वाला असर पड़ता है। यह छोटी सी आदत: * ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करती है * दिल की बीमारियों का जोखिम घटाती है * मोटापे को कंट्रोल में रखती है * मानसिक थकान कम करती है विशेषज्ञ बताते हैं कि यह जरूरी नहीं कि आप रोज़ घंटों जिम जाएं। निरंतरता और छोटी आदतें ज्यादा असरदार होती हैं। क्यों खास है यह स्टडी भारतीयों के लिए? भारत में तेजी से बदलती जीवनशैली, बैठकर काम करने की आदत और अनियमित दिनचर्या के कारण लोग कम उम्र में ही बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में यह रिसर्च खास इसलिए है क्योंकि इसमें महंगे इलाज या कठिन नियमों की नहीं, बल्कि व्यावहारिक और आसान बदलावों की बात की गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर कोई व्यक्ति: * रोज़ 5 मिनट ज्यादा सोए * 2 मिनट ज्यादा चले * मोबाइल और स्क्रीन टाइम थोड़ा कम करे * नियमित दिनचर्या अपनाए तो वह न सिर्फ लंबी उम्र जी सकता है, बल्कि बीमारियों से दूर रहकर एक बेहतर जीवन भी जी सकता है। लंबी और स्वस्थ जिंदगी का राज किसी चमत्कारी दवा में नहीं, बल्कि रोज़ के छोटे फैसलों*में छिपा है। आज लिया गया एक छोटा सा कदम, आने वाले सालों को दर्द और दवाइयों से मुक्त कर सकता है। क्यों न आज से ही शुरुआत की जाए — सिर्फ 7 मिनट से।
प्रदूषण से जल रही हैं आंखें? ये 8 आम गलतियां बना सकती हैं इन्फेक्शन की वजह
बढ़ता वायु प्रदूषण अब आंखों के लिए भी एक गंभीर खतरा बन चुका है। धूल, धुआं और जहरीले कण सीधे आंखों की नाजुक सतह को प्रभावित करते हैं, जिससे जलन, लालिमा, खुजली, सूखापन और पानी आने जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। कई बार लोग राहत पाने के चक्कर में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो हालात को और बिगाड़ देती हैं। अगर प्रदूषण के कारण आपकी आंखें भी परेशान हैं, तो इन 8 बड़ी गलतियों से हर हाल में बचना जरूरी है 1. आंखों को बार-बार रगड़ना जलन या खुजली होते ही आंखों को रगड़ना सबसे आम गलती है। ऐसा करने से आंखों की बाहरी परत को नुकसान पहुंचता है और हाथों पर मौजूद कीटाणु सीधे आंखों में चले जाते हैं, जिससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। 2. खुद से आई ड्रॉप डालना हर आंख की समस्या का इलाज एक जैसा नहीं होता। बिना डॉक्टर की सलाह के आई ड्रॉप का इस्तेमाल एलर्जी, सूजन या आंखों की ड्राइनेस को और बढ़ा सकता है। 3. गंदे हाथों से आंखों को छूना प्रदूषण के कण पहले से ही आंखों को परेशान करते हैं, ऐसे में गंदे हाथों से आंखों को छूना बैक्टीरिया और वायरस को न्योता देना है। 4. कॉन्टैक्ट लेंस का लापरवाही से इस्तेमाल प्रदूषित वातावरण में लंबे समय तक कॉन्टैक्ट लेंस पहनने से आंखों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे जलन और इन्फेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। 5. बिना चश्मे बाहर निकलना धूल और धुएं से आंखों को बचाने के लिए सनग्लास या प्रोटेक्टिव चश्मा बेहद जरूरी है। बिना सुरक्षा के बाहर निकलने से आंखों पर सीधा असर पड़ता है। 6. आंखों की सही सफाई न करना दिनभर प्रदूषण में रहने के बाद आंखों की सफाई न करना एक बड़ी चूक है। हल्के गुनगुने पानी से आंखें धोने से जलन और थकान में राहत मिलती है। 7. जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम मोबाइल, लैपटॉप और टीवी की स्क्रीन आंखों को और ज्यादा ड्राई बना देती है। प्रदूषण के साथ ज्यादा स्क्रीन टाइम आंखों की समस्या को दोगुना कर देता है। 8. लक्षणों को नजरअंदाज करना अगर आंखों में लगातार दर्द, लालिमा, सूजन या धुंधलापन बना रहे, तो इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। समय पर इलाज न मिलने से गंभीर इन्फेक्शन हो सकता है। आंखों की सुरक्षा के लिए क्या करें? * बाहर निकलते समय आंखों को ढककर रखें * आंखों को बार-बार छूने से बचें * पर्याप्त पानी पिएं * स्क्रीन से नियमित ब्रेक लें * समस्या बढ़ने पर तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लें याद रखें, बदलते मौसम और बढ़ते प्रदूषण में थोड़ी सी सावधानी आपकी आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकती है।
सर्दी में ‘गर्मी’ का एहसास: भारत की 5 जगहें जहां विंटर में भी मिलती है गुनगुनी धूप
उत्तर भारत की हड्डी कंपा देने वाली सर्दी, कोहरे की मोटी चादर और सुबह की सुस्ती—अगर आप इन सब से थक चुके हैं, तो अब वक्त है उन भारतीय डेस्टिनेशंस की तरफ रुख करने का, जहां दिसंबर–जनवरी में भी धूप खुलकर मुस्कुराती है। जहां हवा में ठंडक जरूर होती है, लेकिन मौसम इतना सुहावना कि बिना भारी जैकेट और रजाई के भी दिन आराम से कट जाए। यहां सर्दियां ‘सीजन’ नहीं, बल्कि सन-किस्ड हॉलिडे का सही समय बन जाती हैं। चलिए, जानते हैं ऐसी 5 जगहें, जहां आपके विंटर वेकेशन में ठिठुरन नहीं, बल्कि गुनगुनी गर्माहट आपका स्वागत करेगी— 1. गोवा – बीच की धूप, हवा में छुट्टियों का संगीत दिसंबर-जनवरी में गोवा अपने सबसे खूबसूरत रूप में होता है। तापमान बिल्कुल परफेक्ट, सूरज चमकदार और समुद्री हवा में बेला की खुशबू। न भीषण गर्मी, न कड़कती ठंड—बस बीच पर रिलैक्स करने का परफेक्ट मौसम। 2. पुरी (ओडिशा) – सुनहरी रेत और हल्की धूप का संगम पुरी में विंटर सीजन धूप से सराबोर होता है। सुबह की हल्की ठंडक और दिन में गर्माहट भरी हवा इसे फैमिली ट्रिप के लिए बेस्ट बनाती है। समुद्र किनारे टहलते हुए ऐसा लगता है जैसे प्रकृति सर्दियों में भी मुस्कुरा रही हो। 3. पुदुचेरी – फ्रेंच गलियों में सर्दियों की सौम्य धूप पुदुचेरी में दिसंबर–जनवरी के महीने न तो गर्म होते हैं और न ही सर्द। यहां की कोबलस्टोन सड़कों पर टहलते हुए गुनगुनी धूप आपको किसी यूरोपीय समंदर किनारे शहर का एहसास दिलाती है। कैफे कल्चर को इंजॉय करने का इससे बेहतर मौसम नहीं मिलता। 4. अंडमान-निकोबार – क्रिस्टल क्लियर पानी और ट्रॉपिकल विंटर यहां की सर्दियाँ बाकी भारत जैसी नहीं होतीं। दिन में धूप इतनी परफेक्ट कि वॉटर स्पोर्ट्स हो या बीच फोटोग्राफी—हर चीज़ बेहद आराम से हो सकती है। यहां विंटर असल में समर-फीलिंग वेकेशन बन जाता है। 5. कच्छ (गुजरात) – सफेद रेगिस्तान में सुनहरी धूप रण उत्सव के दौरान कच्छ अपनी खूबसूरती के चरम पर होता है। सुबह और शाम हल्की ठंडक, लेकिन दिन में खुली धूप—यानी घूमने, फोटो खिंचवाने और लोक-संस्कृति को जीने का सही मौका। तो इस बार सर्दियों में ठिठुरने के बजाय, धूप की इस प्राकृतिक थेरेपी का मजा लीजिए। इस विंटर वेकेशन, अपने बैग में भारी जैकेट नहीं—बल्कि हल्के कपड़े, सनस्क्रीन और छुट्टियों की मुस्कुराहट पैक करिए… क्योंकि भारत के ये धूप वाले ठिकाने आपका इंतजार कर रहे हैं!
40 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों और महिलाओं के लिए राष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिता, नई दिल्ली में शानदार सफलता के साथ हुई संपन्न
नई दिल्ली, 24 सितंबर: राजधानी में 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों और महिलाओं के लिए विशिष्ट एवं असाधारण राष्ट्रीय स्तर की सौंदर्य प्रतियोगिता, जो 40, 50 और 60 वर्ष की आयु के बीच है, 19 से 21 सितंबर 2025 तक आयोजित की गई, जिसमें 21वें संस्करण का 8वाँ संस्करण शामिल था… भारत भर से प्रतिभागी जीवन के विविध क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हुए आए थे – जिनमें वरिष्ठ पेशेवर, आईपीएस अधिकारी, डॉक्टर, उद्यमी, सेवानिवृत्त कर्नल, कलाकार और प्रसिद्ध हस्तियाँ शामिल थीं – प्रत्येक ने अपनी अनूठी कहानियाँ, अनुभव और सपने मंच पर प्रस्तुत किए। पारंपरिक सौंदर्य प्रतियोगिताओं के विपरीत, विशिष्ट एवं असाधारण एक ऐसा मंच है जिसे 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को सम्मानित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो यह साबित करता है कि उम्र कोई बाधा नहीं बल्कि एक संपत्ति है। प्रतिभागियों ने न केवल भव्यता के साथ, बल्कि अपनी जीवन यात्रा, उपलब्धियों और आकांक्षाओं के बारे में दिल से बयान करते हुए अपना परिचय दिया। इससे प्रेरणा, सशक्तिकरण और प्रामाणिकता से भरा एक ऐसा माहौल बना, जहाँ व्यक्तिगत परिचय लचीलेपन और व्यक्तित्व की सशक्त याद दिलाते हैं। टैलेंट राउंड एक विशेष आकर्षण था, जिसने लंबे समय से भूले-बिसरे जुनून को पुनर्जीवित किया और साथ ही उन छिपे हुए कौशलों को उजागर किया जो करियर और पारिवारिक ज़िम्मेदारियों के व्यस्त गलियारों में पीछे छूट गए थे। संगीत, नृत्य, कविता, फिटनेस कार्यक्रम, नाट्य प्रदर्शन और रचनात्मक प्रदर्शनों ने मंच को भर दिया – कई प्रतिभागियों ने पहली बार एक विशाल दर्शक वर्ग के सामने खुद को अभिव्यक्त किया। कई प्रतिभाएँ प्रतिभागियों के लिए जीवन के इस नए अध्याय में आत्म-अभिव्यक्ति, सहयोग और सामुदायिक प्रभाव की नई यात्रा शुरू करने के लिए आधारशिला बन गईं। इस प्रतियोगिता ने समान विचारधारा वाले व्यक्तियों को एक साथ लाया, जिससे सौहार्द, नेटवर्किंग और सशक्तिकरण का एक समावेशी वातावरण बना। इस मंच ने न केवल व्यक्तित्व का जश्न मनाया, बल्कि इस संदेश को भी रेखांकित किया कि 40 के बाद का जीवन पुनर्खोज, पुनर्निर्माण और नए उद्देश्य का समय है।
प्यार जीतेगा मुसीबत हारेगी
चुनौतियां हर जगह है, रिश्ते में भी। पति-पत्नी के रिश्ते में कई ऐसे मौके आते हैं, जब चुनौतियों को पछाड़कर रिश्ते को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बनाने की दिशा में काम करना पड़ता है। कैसे परेशानियों के बीच रिश्ते की डोर मजबूत करें, बता रही हैं हम… कविता और शुभम की शादी को दो साल हो चुके हैं। शुरुआत में लगभग एक साल तक तो सबकुछ बहुत अच्छा था। फिर अचानक शुभम को ऑफिस के काम से पांच माह के लिए विदेश जाना पड़ा। धीरे-धीरे यह दूरी उन दोनों के रिश्ते पर भारी पडने लगी। ठीक ऐसे ही सौम्या और सौरभ को अपने रिश्ते में चुनौती का सामना तब करना पड़ा, जब बार-बार की कोशिशों के बाद भी सौम्या गर्भधारण नहीं कर पाई। पेरेंट्स बनने की नाकामी का असर सौम्या और सौरभ के रिश्ते पर पडने लगा। आपसी बातचीत कम हो गई। तकरार बढने लगी। प्यार धीरे-धीरे कमजोर पडने लगा। पर, समय रहते ये दोनों जोड़े सचेत हो गए। वे इस बात को समझ गए कि उन्हें अपने रिश्ते की इस परेशानी का हल जल्द तलाशना होगा। उसके सामने घुटने टेकने से बात नहीं बनेगी। बस, इसके साथ ही इनका रिश्ता फिर से धीरे-धीरे मुस्कुराने लगा। हर रिश्ते की अपनी खुशियां होती हैं, अपनी चुनौतियां होती हैं। आपका रिश्ता कितना मजबूत है, यह उस वक्त पता चलता है, जब पति-पत्नी के रूप में साथ मिलकर आप मुसीबत से लड़ते हैं, जीतते हैं और अपने हिस्से की खुशियों को फिर से अपनी मुऋी में बंद कर लेते हैं। आज दुनिया के कई देशों में आधी से ज्यादा शादियां सिर्फ इसलिए टूट रही हैं क्योंकि शादीशुदा जोड़े जिंदगी की चुनौतियों के सामने हार मान जाते हैं। खुशनुमा शादीशुदा जिंदगी के लिए यह जरूरी है कि आप पहले से ही इस बात को लेकर मानसिक रूप से तैयार रहें कि जिंदगी हमेशा यूं ही खुशनुमा नहीं रहेगी। कुछ परेशानियां, कुछ लोग, कुछ परिस्थितियां आपकी खुशियों पर घात लगाने आ सकते हैं। कैसे इन परेशानियों से पार पाएं और रिश्ते को मजबूत बनाएं, आइए जानें… जानिए, परेशानी कहां है? किसी भी सवाल का हल हम तभी तलाश पाते हैं, जब हम सवाल को अच्छी तरह से समझ पाते हैं। ठीक ऐसे ही, पहले आपको यह जानना होगा कि आपके रिश्ते में परेशानी कहां है और फिर उस परेशानी का हल तलाशना होगा। अगर आप पार्टनर से नाराज हैं, तो गुस्से में कुढने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। ऐसा करने से आपका मूड ही खराब होगा। वरिष्ठ मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉं उन्नति कुमार की मानें, तो गुस्से में बहस करने के बजाए शांति से अपने पार्टनर को अपनी परेशानी बताना बेहतर विकल्प है। यह न सोचें कि एक बार बातचीत से आपकी समस्या का हल मिल जाएगा। हो सकता है इस बातचीत के बाद आप दोनों के बीच की दीवार थोड़ी-सी छोटी हो जाए, पर उसे पूरी तरह से टूटने में थोड़ा वक्त लग सकता है। उसके बाद भी समस्या का हल न निकले तो किसी ऐसे शख्स को तलाशें जो आप दोनों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा सके। ध्यान रहे, वह शख्स ऐसा हो जो आप दोनों को बखूबी जानता और समझता हो। समस्या का हल जरूर निकलेगा। विश्वास को रखें कायम स्थितियां चाहें कितनी भी बुरी क्यों न हो, अपने जीवनसाथी पर अपना विश्वास बनाए रखें। उनकी क्षमताओं पर संदेह न जताएं। आपका साथ मिलेगा तो साथी भी उस मुसीबत से इस रिश्ते को बचाने के लिए जी-जान लगा देगा। अगर आप अपने साथी की क्षमताओं पर संदेह जताएंगी तो उसकी आंच आपके रिश्ते पर भी पड़ेगी। एक मजबूत जोड़ा, कभी भी एक-दूसरे की क्षमताओं पर शक नहीं करता। चुनौतियां उनके रिश्ते को और मजबूत बना जाती हैं। अहंकार को न लाएं रिश्ते के बीच अक्सर किसी रिश्ते में परेशानी तब आती है, जब प्यार अहंकार की भेंट चढने लगता है। नतीजा, धीरे-धीरे प्यार कड़वाहट में बदलने लगता है। ऐसा न हो, इस बात का ख्याल रखना किसी भी रिश्ते के लिए बेहद जरूरी है। इस विषय में रिलेशनशिप मैनेजर डॉं. रूबी चावला कहती हैं, जब दो लोगों में से किसी एक के दिमाग में मैं और सिर्फ मैं का भाव आने लगता है, वहीं से रिश्ते में खटास आने की शुरुआत हो जाती है। नतीजा तकरार, मतभेद। ऐसा न हो इसके लिए जरूरत है, तो बस सोच में थोड़ा-सा बदलाव करने की। किसी भी परिस्थिति में अगर आप खुद को अपने साथी की जगह पर रखकर सोचना शुरू कर देंगी, तो तकरार को काफी हद तक टाला जा सकता है। सीखें परेशानियों को नजरअंदाज करना कभी-कभी नजरअंदाज करने का छोटा-सा नुस्खा दो लोगों के बीच की कड़वाहट को घटाने में बहुत कारगर साबित हो जाता है। अगर आपको मालूम है कि कोई खास बात आपके रिश्ते के लिए परेशानी का कारण बन रही है तो उसे नजरअंदाज करना शुरू कर दें। गलती पर भी दूसरी ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने पर दोबारा उस गलती के होने की आशंका काफी हद तक कम हो जाती है। बिना बोले ही बात बन जाती है। मानें अपनी गलती हमेशा आप सही हों, यह जरूरी नहीं। गलती होने पर भी तर्क- कुतर्क से खुद को सही साबित करना समझदारी नहीं है। अपनी गलती मानें और उससे आगे की जिंदगी के लिए सबक लें। गलती तो हो चुकी है, ऐसे में समझदारी इसी में है कि आप दोनों साथ बैठकर शांत दिमाग से उस समस्या के बारे में सोचें और उससे बाहर निकलने का रास्ता साथ तलाशें। बिठाएं आपसी सामंजस्य सामंजस्य आजकल नकारात्मक शब्द बन गया है। पर, अपने पार्टनर की खुशी के लिए अपनी इच्छा से किया गया त्याग, त्याग की श्रेणी में नहीं आता, बल्कि उससे खुशी का अहसास होता है। यह त्याग तब बोझिल और नकारात्मक हो जाता है, जब हम कुछ करने के बदले में कुछ पाने की इच्छा रखते हैं। ऐसा भाव न होने पर ही रिश्ते में मधुरता आती है। साथ ही यह भी हो सकता है कि आपके इस बर्ताव को देखकर आपका पार्टनर भी अपनी ओर से कुछ सामंजस्य करने लगे। बदलने का न करें प्रयास जैसी आप हैं और आपकी पसंद है, जरूरी नहीं है कि आपका पार्टनर भी वैसा ही हो। किसी चुनौती
गुनगुने गर्म तेल से मसाज करने के फायदे जानकर दंग रह जाएगे आप
सभी को अपने शरीर और बाल बहुत प्यारे होते है फिर चाहे वो महिला हो या फिर पुरुष। सुन्दर काले व चमकदार बाल महिलाओं की सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं। पुराने समय में बालों के रखरखाव व निखार के लिए महिलाएं अनेक तरीके इस्तेमाल में लाती थीं, जिनसे बाल वास्तव में ही काले, घने, मजबूत और चमकदार बनते थे लेकिन आज के समय में बाजार में कई तरह के साबुन और अन्य चीजें मिलती है। जिसका इस्तेमाल करके हम अपने बालों को रुखें, बेजान बना लेते है। आज के दौर में हम इतना ज्यादा व्यस्त है कि हम फैशन के चलते बालों में तेल लगाना सही नही समझते साथ ही इतना समय नही मिलता कि हम ज्यादा समय अपने बालों की केयर के लिए दे पां। जिसके कारण हमारें बाल बेकार, बेजान हो जाते है। अगर आप भी चाहते है कि आपके बाल सुंदर, घने, लंबे बनें तो सप्ताह में एक बार बालों में तेल की मसाज जरूर करें। इससे बालों को पोषक तत्व मिलने के साथ-साथ कई ऐसी तत्व मिल जाते है जिससे आपके बाल अच्छे हो जाते है। जानिए गुनगुनें तेल से मसाज से क्या फायदे है। सर्दियों का मौसम एक ऐसा मौसम है। इन दिनों पर आपके बालों में ड्रैंडफ जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है। जिसके कारण बालों में खुजली होने लगती है। इसके लिए गुनगुने तेल की मसाज काफी फायदेमंद है। इसके लिए बालों के स्कैल्प में हल्कें हाथों से गुनगुनें तेल से मसाज करें। इससे आपको काफी फायदा मिलेगा। -अगर आप चाहती है किआपके बाल लंबे, घने बने तो इसमें आपकी सहायता हल्के गर्म तेल कर सकता है। इसके लिए अपने बालों में गुनगुनें गर्म तेल से मसाज करें जिससे कि ब्लड फ्लो बना रहें और आपके बाल तेजी से बढ़ते जाए साथ ही घने भी रहें। -अगर आपके स्कैल्प बहुत ड्राई हो गए हैं तो भी हल्के गर्म तेल से मसाज करना फयदेमंद रहेगा। जो लोग ज्यादातर वक्त घर से बाहर रहते हैं और धूप, गर्मी में काम करते हैं उनके लिए हल्के गर्म तेल से मसाज करना बहुत फायदेमंद होता है। -अगर आपके बाल अधिक मात्रा में गिरते है। जिसके कारण आप गंजे होते जा रहे है। तो गुनगुनें तेल से मसाजद करें। इससे आपके बालों में पोषण मिलेगा। जिससे आपके बालों की जड़े मजहबूत होगी। -अगर आपके बाल सफेद हो रहे हो तो बालों में सरसों के गुनगुनें तेल से मसाज करें। इससे सफेद बाल नहीं उगेंगे और बालों का टेक्सफचर भी सुधरता है। -अगर आपके सिर में दर्द हो रहा ह ोतो मसाज आपके लइए काफी फायदेमंद हो सकती है। इसके लिए गुनगुनें गर्म तेल से बालों में धीरें-धीरें मसाज करें। आपको काफी अच्छी लगेगा।
स्वास्थ्य के लिए वरदान है प्याज
भारतीय रसोई में प्याज का बड़ा ही महत्व है। बिना प्याज के हमारे यहां रसोई को अधूरा माना जाता है। ऐसी कम ही डिशेज होगी जो प्याज के बनती हैं। प्याज खाने में स्वाद तो बढ़ाता है ही, वही हमारे स्वास्थ्य के लिए भी एक वरदान है। प्याज एक अत्यंत गुणकारी पौधा है जिसमें औषधीय गुण भी पाएं जाते हैं। लाल प्यामज में ढेर सारे पोषक तत्वन होते हैं, जो बड़ी से बड़ी बीमारियों को खत्म करने की शक्तिा रखते हैं। इसके अलावा इसमें ग्लूकोस भी प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। हरा प्याज चेहरे की झुर्रियों को दूर करता है। इसे खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। इसके इलावा मसूड़ो में सूजन और दांत में दर्द होने पर प्याज के रस और नमक का मिश्रण लगाने से दर्द में राहत मिलती है। सर्दी-जुखाम इसमें एंटी-फंगल और एंटीऑक्सीाडेंट गुण पाए जाते हैं। इसे नियमित रूप से खाने से सर्दी-जुखाम और बुखार से राहत मिलेगी। प्याज के रस में मिश्री मिलाकर चाटने से कफ की समस्या से जल्द ही निजात मिलती है। ब्लतड प्रेशर और दिल के लिए लाल प्यागज शरीर के खराब कोलेस्ट्रॉणल को निकाल कर हृदय को रोगों से बचाता है। इसे नियमित खाने से हाई ब्लतड प्रेशर मेंटेन रहता है। कैंसर का इलाज प्याज कैंसर सेल को बढ़ने से रोकता है। यह प्रोस्टेलट और पेट के कैंसर होने के खतरे को भी कम करता है। खाली पेट रोज सुबह प्याज खाने से पाचन से जुड़ी समस्याएं नहीं होती हैं। गठिया का दर्द और सूजन में आराम कई बीमारियों की वजह से होने वाले शारीरिक दर्द और सूजन से भी यह राहत दिलाता है। अगर आपको अस्थ मा, एलर्जी या गठिया रोग है तो अभी से ही लाल रंग की प्याभज खाना शुरु कर दें। गठिया में सरसों का तेल व प्याज का रस मिलाकर मालिश करें। एंटी फंगल प्याज में एंटी फंगल गुण पाए जाते हैं। यदि प्याज के बीजों को सिरका में पीसा कर दाद-खाज और खुजली में लगाए तो जल्दी ही आराम मिलता है। बालों के लिए फायदेमंद बालों में प्याज का रस लगाने से बाल झड़ना बंद हो जाते हैं और साथ ही बालें की चमक भी बढ़ती है। अगर रूसी की समस्याय है तो आप इसके रस को भी सिर पर लगा सकते हैं। यूरिन प्रॉब्लम्स अगर किसी को यूरिन प्रॉब्लम हो और रुक-रुक कर पेशाब आता है तो पेट पर प्याज के रस की हल्की मालिश करनी चाहिए। इसके इलावा दो चम्मच प्याज का रस और गेहूं का आटा लेकर हलुवा बना लीजिए। इसको गर्म करके पेट पर इसका लेप लगाने से पेशाब आना शुरू हो जाता है। पानी में उबालकर पीने से भी पेशाब संबंधित समस्या खत्म हो जाती है। पथरी की समस्या में लाभ अगर आपको पथरी की शिकायत है तो प्याज आपके लिए बहुत उपयोगी है। प्याज के रस को चीनी में मिलाकर शरबत बनाकर पीने से पथरी की समस्या से निजात मिलता है। प्याज का रस सुबह खाली पेट पीने से पथरी अपने-आप कटकर बाहर निकल जाती है। इम्यूनिटी पावर बढ़ाए यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को इतना अधिक बढ़ा देता है कि बीमारियों जल्दी होती ही नहीं। यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम बनाए रखता है। हरे प्याज में क्रोमियम होता है। इसीलिए यह डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद होता है। यह ब्लडप्रेशर पर नियंत्रण करता है। लंबी उम्र के लिए प्याज खाने से कई शारीरिक बीमारियां नहीं होती हैं। इसके आलावा प्याज कई बीमारियों को दूर भगाता है। इसलिए यह कहा जाता है कि प्याज खाने से उम्र बढती है, क्योंकि इसके सेवन से कोई बीमारी नहीं होती और शरीर स्वस्थ्य रहता है।