ज्योतिष से जानिए चरित्र और भाग्य

-ब्रह्मर्षि वैद्य पं. नारायण शर्मा कौशिक- ज्योतिष शास्त्रानुसार मानव एवं प्राणी मात्र की सूक्ष्म जानकारी, प्रकृति तथा व्यवहार-चरित्र चिन्तन ज्योतिष फलित सूत्रों से जाना जा सकता है। यह फलित योग जानने हेतु सूक्ष्म अध्ययन की आवश्यकता है तथा अनुभूत योगों के द्वारा घटनाओं की घोषणा तथा कुछ समय पश्चात उस स्थिति से प्रभावित होना पुष्टि होना माना जाता है। प्रस्तुत आलेख में स्त्री के उत्तम चरित्र संबंधी सूत्रों का बोध कराया गया है। सच्चाई का जानना बुरा नहीं, स्त्री की जन्म कुण्डली में सही गणना मिले तो जानकारी होती है। इसी क्रम में ज्योतिष सिद्धांत सूत्र- जातक परिजातानुसार कतिपय योग लिखे जा रहे हैं। सप्तम भाव में गुरु हो तथा उस पर शुक्र व बुध की दृष्टि है तो स्त्री पतिवल्लभा एवं साध्वी होती है। सप्तमेश- शुक्र के साथ हो तथा दोनों पर गुरु की दृष्टि हो तो स्त्री पतिव्रता होती है। सप्तमेश- गुरु के साथ हो तथा दोनों पर शुक्र की दृष्टि हो तो स्त्री पतिव्रता होती है। गुरु लग्न में, एकादश या तृतीय भाव में बैठकर सप्तम भाव को देखे तो स्त्री पतिव्रता होती है। सप्तमेश केन्द्र में शुभ ग्रहों से युक्त अथवा दृष्ट हो तो स्त्री पति परायणा होती है। सप्तमेश सप्तम भाव में हो तथा उस पर पाप ग्रहों का प्रभाव नहीं हो तो स्त्री सुशीला एवं पतिव्रता होती है। गुरु सप्तम भाव में हो, लग्नेश बली हो तथा शुक्र चर राशि (1, 4, 7, 10) में हो तो स्त्री सुन्दर, पतिव्रता तथा पति में आसक्त होती है। सप्तमेश गुरु हो (मिथुन या कन्या लग्न में) तथा शुक्र या बुध की दृष्टि गुरु पर हो तो स्त्री सुन्दर, दयावती तथा सच्चरित्रा होती है। यदि सप्तम भाव की नवांश राशि का स्वामी शुभ ग्रह हो तो ऐसी स्त्री पतिव्रता होती है। यदि चन्द्रमा से सप्तम भाव में शुभ ग्रह हो तो स्त्री सच्चरित्र होती है। यदि लग्नेश या लग्न के नवांश का स्वामी शुभ ग्रह हो तो स्त्री चरित्रवान होती है। चतुर्थ भाव में शुभ ग्रह हो तो स्त्री सच्चरित्रा होती है। यदि गुरु उच्च का स्वराशि (कर्क, धनु, मीन) में त्रिकोण (5, 9) या केन्द्र (1, 4, 7, 10) में हो तो स्त्री शील युक्त साध्वी, सुपुत्रा, धनी एवं गुणी होती है। कर्क लग्न हो, सूर्य सप्तम में मकर राशि में हो, सप्तमस्थ सूर्य पर गुरु की दृष्टि हो (एकादश, लग्न या तृतीय भाव से) तो स्त्री विदुषी व श्रेष्ठ पुत्र युक्त, सुलक्षणा होती है। सूर्य, मंगल की युति के साथ गुरु के साथ हो तो स्त्री उत्तम वक्ता एवं सत्यनिष्ठा होती है। गुरु, शुक्र व शनि की वृत्ति से स्त्री शिष्ट, धनी, समृद्ध तथा प्रसिद्धि प्राप्त करती हैं। चंद्र, बुध व गुरु की युति हो तो स्त्री विख्यात, समृद्ध व सुखी तथा पति का भी भाग्योदय करती है। गुरु और शुक्र की युति से स्त्री प्रतिभाशाली, श्रेष्ठ एवं समृद्ध होती है। गुरु से केंद्र में चन्द्रमा और शुक्र हो तो ऐसी स्त्री निर्धन के घर जन्म लेकर भी रानी तुल्य सुख प्राप्त करती है। गुरु के साथ सूर्य व बुध हो तो स्त्री धनी तथा बुद्धिमान तथा कवियित्री होती है। लग्नस्थ बुध स्त्री को गुणज्ञ बनाता है। स्त्री की लग्न कुण्डली में बुध व शुक्र लग्न में हो तो ऐसी स्त्री आकर्षक, कलाविज्ञ तथा पतिप्रिया होती है।

मार्ग शीर्ष अमावस्या के दिन पूर्वजों का तर्पण करना शुभ

हिंदू धर्म में हर अमावस्या और पूर्णिमा का बहुत ही अधिक महत्व है। इन्ही में से एक अमावस्या है। मार्ग शीर्ष की अमावस्या। यह अमावस्या मार्गशीर्ष माह में पड़ती है। इस अमावस्या का महत्व कार्तिक अमावस्या से कम नहीं है। जिस प्रकार कार्तिक मास की अमावस्या को लक्ष्मी का पूजन कर दीपावली बनाई जाती है, उसी तरह इस दिन भी देवी लक्ष्मी का पूजन करना शुभ होता है। इसके अलावा अमावस्या होने के कारण इस दिन स्नान, दान और अन्य धार्मिक कार्य आदि भी किए जाते है। मार्ग शीर्ष अमावस्या के दिन को पितरों का दिन भी माना जाता है। इस दिन पूर्वजों से संबंधित काम करना बहुत शुभ माना जाता है। इस महिनें का महत्व हिंदू धर्म के पुराणों में अधिक महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि देवों से पहले पितरों को प्रसन्न करना चाहिए। जिन व्यक्तियों की कुण्डली में पितृ दोष हो, संतान हीन योग बन रहा हो या फिर नवम भाव में राहू नीच के होकर स्थित हो, उन व्यक्तियों को इस दिन ब्रत जरुर रखना चाहिए। इस व्रत को करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। विष्णु पुराण के अनुसार श्रद्धा भाव से अमावस्या का व्रत रखने से पितृगण ही तृप्त नहीं होते, अपितु ब्रह्मा, इंद्र, रुद्र, अश्विनी कुमार, सूर्य, अग्नि, पशु-पक्षी और समस्त भूत प्राणी भी तृप्त होकर प्रसन्न होते हैं। भगवान कृष्ण ने पवित्र गीता में कहा है कि महीनों मे मैं मार्गशीर्ष माह हूं तथा सत युग में देवों ने मार्ग-शीर्ष मास की प्रथम तिथि को ही साल की शुरुआत होगी। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन स्नान करते समय नमो नारायणाय या गायत्री मंत्र का उच्चारण करना फलदायी होता है। मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व:- जिस तरह कार्तिक, माघ, वैशाख आदि महीनों के समय में गंगा स्नान करने से शुभ फल प्राप्त होता है। उसी तरह इस अमावस्या में स्नान करने से विशेष फल मिलता है। मार्गशीर्ष माह की अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व अधिक है। इस दिन व्रत करने और सत्यनारायण भगवान की पूजा और कथा करने से आपको अमोघ फलदायी होता है। इस दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार दान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते बै साथ ही पुण्य की प्राप्ति होती है।

देवताओं के तेज से प्रकट हुई थीं महादुर्गा, जानिए कहां से मिले उन्हें अस्त्र-शस्त्र

महादुर्गा पार्वती का दूसरा नाम है। हिन्दुओं के शाक्त साम्प्रदाय में भगवती दुर्गा को ही दुनिया की पराशक्ति और सर्वोच्च देवता माना जाता है। पुराण में महादुर्गा को आदिशक्ति माना गया है। महादुर्गा असल में शिव की पत्नी पार्वती का एक रूप हैं, जिसकी उत्पत्ति राक्षसों का नाश करने के लिये देवताओं की प्रार्थना पर पार्वती ने लिया था। इस तरह महादुर्गा युद्ध की देवी हैं। देवी दुर्गा के स्वयं कई रूप हैं। मुख्य रूप उनका गौरी है, अर्थात शान्तमय, सुन्दर और गोरा रूप। उनका सबसे भयानक रूप काली है, अर्थात काला रूप। विभिन्न रूपों में महादुर्गा भारत और नेपाल के कई मन्दिरों और तीर्थस्थानों में पूजी जाती हैं। कुछ दुर्गा मन्दिरों में पशुबलि भी चढ़ती है। भगवती दुर्गा की सवारी शेर है। एक बार महिषासुर नामक असुरों के राजा ने अपने बल और पराक्रम से देवताओं से स्वर्ग छिन लिया। जब सारे देवता भगवान शंकर व विष्णु के पास सहायता के लिए गए। पूरी बात जानकर शंकर व विष्णु को क्रोध आया तब उनके तथा अन्य देवताओं से मुख से तेज प्रकट हुआ, जो नारी स्वरूप में परिवर्तित हो गया। शिव के तेज से देवी का मुख, यमराज के तेज से केश, विष्णु के तेज से भुजाएं, चंद्रमा के तेज से वक्षस्थल, सूर्य के तेज से पैरों की अंगुलियां, कुबेर के तेज से नाक, प्रजापति के तेज से दांत, अग्नि के तेज से तीनों नेत्र, संध्या के तेज से भृकुटि और वायु के तेज से कानों की उत्पत्ति हुई। इसके बाद देवी को शस्त्रों से सुशोभित भी देवों ने किया। देवताओं से शक्तियां प्राप्त कर महादुर्गा ने युद्ध में महिषासुर का वध कर देवताओं को पुनः स्वर्ग सौंप दिया। महिषासुर का वध करने के कारण उन्हें ही महादुर्गा को महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता है। देवताओं ने दिए माता दुर्गा को शस्त्र देवी भागवत के अनुसार, शक्ति को प्रसन्न करने के लिए देवताओं ने अपने प्रिय अस्त्र-शस्त्र सहित कई शक्तियां उन्हें प्रदान की। इन सभी शक्तियों को प्राप्त कर देवी मां ने महाशक्ति का रूप ले लिया- 1. भगवान शंकर ने मां शक्ति को त्रिशूल भेंट किया। 2. भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र प्रदान दिया। 3. वरुण देव ने शंख भेंट किया। 4. अग्निदेव ने अपनी शक्ति प्रदान की। 5. पवनदेव ने धनुष और बाण भेंट किए। 6. इंद्रदेव ने वज्र और घंटा अर्पित किया। 7. यमराज ने कालदंड भेंट किया। 8. प्रजापति दक्ष ने स्फटिक माला दी। 9. भगवान ब्रह्मा ने कमंडल भेंट दिया। 10. सूर्य देव ने माता को तेज प्रदान किया। 11. समुद्र ने मां को उज्जवल हार, दो दिव्य वस्त्र, दिव्य चूड़ामणि, दो कुंडल, कड़े, अर्धचंद्र, सुंदर हंसली और अंगुलियों में पहनने के लिए रत्नों की अंगूठियां भेंट कीं। 12. सरोवरों ने उन्हें कभी न मुरझाने वाली कमल की माला अर्पित की। 13. पर्वतराज हिमालय ने मां दुर्गा को सवारी करने के लिए शक्तिशाली सिंह भेंट किया। 14. कुबेर देव ने मधु (शहद) से भरा पात्र मां को दिया।

इन पांच लोगों को खिलाएं खाना, रहेगी स्थिर लक्ष्मी

हमारें जीवन में कई उतार चढ़ाव आते है जिससे की लोग बहुत दुखी होते है और कुछ लोग उस समस्या का निजात निकाल कर उससे निकल जाते है। इस दुनिया में बहुत कम लोग है जो अपने जीवन से खुशी है। किसी न किसी को की न कोई समस्या है। अमीर के पास धन होते हुए भी और धन की ललसा और एक गरीब के पास धन न होते हुए सिर्फ पेट की भुख मिटाने तकी ललसा। हम माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए क्या नही करते है। तरह-तरह के उपाय अपनाते है जिससे कि माता लक्ष्मी हमारे घर से कभी न जाएं। हिंदू धर्म के शास्त्रों में कई ऐसे उपाय बताए गें है जिनका आमरण करे तो हम सफलता ही हर ऊचांई को छूते चले जाएगे। शास्त्रों में दी गई बातें हमें कभी निराश नही कर सकती है। इसी प्रकार शास्त्रों में भोजन के बारें में की बातें बताई गई है। इसके अनुसार जब भोजन करते है तो उससे पहले हमें इन लोगों के लिए भोजन जरूर निकालना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से माता लक्ष्मी हमारें घर से कभी नही जाएगा। एक उपाय तो ये है कि हम अपनी मेहनत से और स्वयं की समझदारी से इन समस्याओं को दूर करने का प्रयास करें और दूसरा उपाय यह है कि हम धार्मिक कर्म करें। शास्त्रों में पांच लोग ऐसे बताए गए हैं, जिन्हें खाना खिलाने से हमारे जीवन की सभी समस्याएं दूर हो सकती हैं। जानिए वह कौन पांच लोग है। जिससे आपको अक्षय पुण्य की प्राप्ति होगी। किन लोगों को खिलाना चाहिए खाना… गाय को खिलाएं रोटी हिंदू धर्म में गाय को माता समान माना जाता है। यह पुज्नीय भी है। हमारें शास्त्रों में कहा गया है कि जब भी हम खाना बनाएं उसके बाद सबसे पहले एक रोटी गाय को खिलाएं। माना जाता है कि अगर कोई व्यक्ति किसी गाय को रोटी या हरी घास रोज खिलाता है तो उसे जल्द ही कोई अच्छा फल मिलता है साथ ही कई गुना पुण्य भी मिलता है। साथ ही कुंडली में लगे कई दोष ही शांत हो जाते है। और घर में माता लक्ष्मी का वास हो जाता है। इसलिए एक रोटी जरुर खिलाना चाहिए। कुत्तें को खिलाएं रोटी अगर आपको अपने शत्रु का भय सता रहा हो जिसके कारण आप उससे डर कर रह रहे है। तो रोज एक रोटी कुत्ते को खिलाएं। इससे आपका शत्रु का भय खत्म हो जाएगा। और आप निडर हो कर रह सकेगे। साथ ही अगरा पकी कुंडली में शनि का दोष है तो शिवार के दिन काले रंग के कुत्तें को रोटी खिलाएं। इससे आपको जल्द फायदा मिलेगा। और शनि दोष शांत होगा। माता लक्ष्मी आपके घर हमेशा के लिए आ जाएगी। मछली को खिलाएं आटे की गोली शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि अगर आपकी पुरानी संपत्ति हाथ से निकल गई हो या फिर कोई मुल्यवान चीज खो गई हो तो रोज तालाब या नदी में जाकर मछलियों को आटे की गोलियां बनाकर खिलाएं। ऐसा करने से आपकी पुरानी संपत्ति वापस मिल जाएगी। साथ ही माता लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहेगी। जिसके कारण आपके घर में कभी भी धन की कमी नही होगी। साथ ही आपको अक्षय पुण्य की प्राप्त होगा। चीटियों को डालें आटा अगर आप बहुत ज्यादा परेशान है। आपको हर काम में असफलता मिल रही है जिसके कारण आप कर्ज में डूबते चले जा रहे है। जिसके कारण आप तनाव में चले जाते है। शास्त्रों में माना जाता है कि अगर आप अपने घर में निकलने वाली चीटियों को आटा या चीनी डालेगे। जो इससे आपको अधिक फायदा होगा। इससे हमें सभी कर्ज से मुक्ति मिल जाएगी। साथ ही घर में कभी भी धन की कमी नही होगी। पक्षियों को खिलाएं अनाज शास्त्रों के अनुसार माना गया है कि अगर आपके घर में आर्थिक लाभ न हो रहा हो। हर काम में असफलता प्राप्त हो रही हो तो इस समस्या से निजात आपको पक्षी दिला सकते है। इसके लिए रोज पक्षियों को दाना डालें जिससे महालक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहेगी। और काम में आपको सफलता प्राप्त होगी।

आप भी जान लीजिए भगवान को नैवेद्य चढ़ाने के 12 खास नियम

देवताओं का नैवेद्य यानी देवी-देवताओं के निवेदन के लिए जिस भोज्य द्रव्य का प्रयोग किया जाता है, उसे नैवेद्य कहते है। उसे अन्य नाम जैसे भोग, प्रसाद, प्रसादी आदि भी कहा जाता है। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत है देवताओं को नैवेद्य अर्पित करने के कुछ नियम, जिन्हें अपना कर आप भगवान की कृपा प्राप्त कर सकते है। नैवेद्य चढ़ाने के नियम… -देवता को निवेदित करना ही नैवेद्य है। सभी प्रकार के प्रसाद में निम्न पदार्थ प्रमुख रूप से रखे जाते हैं-दूध-शकर, मिश्री, शकर-नारियल, गुड़-नारियल, फल, खीर, भोजन इत्यादि पदार्थ। -तैयार सभी व्यंजनों से थोड़ा-थोड़ा हिस्सा अग्निदेव को मंत्रोच्चार के साथ स्मरण कर समर्पित करें। अंत में देव आचमन के लिए मंत्रोच्चार से पुन: जल छिड़कें और हाथ जोड़कर नमन करें। -पीतल की थाली या केले के पत्ते पर ही नैवेद्य परोसा जाए। -प्रत्येक पकवान पर तुलसी का एक पत्ता रखा जाता है। -नैवेद्य की थाली तुरंत भगवान के आगे से हटाना नहीं चाहिए। -शिव जी के नैवेद्य में तुलसी की जगह बेल और गणेश जी के नैवेद्य में दूर्वा रखते हैं। -नैवेद्यआप भी जान लीजिए भगवान को नैवेद्य चढ़ाने के 12 खास नियमl देवता के दक्षिण भाग में रखना चाहिए। -कुछ ग्रंथों का मत है कि पक्व नैवेद्य देवता के बाईं तरफ तथा कच्चा दाहिनी तरफ रखना चाहिए। -भोग लगाने के लिए भोजन एवं जल पहले अग्नि के समक्ष रखें। फिर देवों का आह्वान करने के लिए जल छिड़कें। -नमक, मिर्च और तेल का प्रयोग नैवेद्य में नहीं किया जाता है। -नैवेद्य में नमक की जगह मिष्ठान्न रखे जाते हैं। -भोजन के अंत में भोग का यह अंश गाय, कुत्ते और कौए को दिया जाना चाहिए।

बागेश्वर धाम, को लेकर बिहार की राजनीति गर्म, बाबा बोले ‘हिंदू राष्ट्र की शुरुआत बिहार से होगी

पटना, 15 मई : बिहार में बागेश्वर धाम महराज उर्फ पंडित धीरेंद्र शास्त्री के आने से पहले से ही राज्य की राजनीति काफी गर्म है. बीते 13 मई को बागेश्वर धाम पटना के नौबतपुर में पांच दिवसीय ‘हनुमंत कथा’ के लिए पहुंचे, उसके बाद से आरोप-प्रत्यारोप और बढ़ गया है. सत्ताधारी पार्टी जहां इसे राजनीति से प्रेरित कार्यक्रम बता रही है और बागेश्वर धाम को बीजेपी के इशारे पर काम करने आरोप लगा रही है, वहीं विपक्षी पार्टी बीजेपी बागेश्वर धाम का खुलकर समर्थन कर रही है. हालांकि, सत्ताधारी दलों के नेता इस मुद्दे पर अधिक बोलने को तैयार नहीं है. बता दें कि बिहार की राजधानी पटना के नौबतपुर में बागेश्वर धाम का पांच दिवसीय ‘हनुमंत कथा’ का आयोजन किया गया है. राज्य बीजेपी शुरू से ही इसमें विशेष रुचि ले रही है. राज्य बीजेपी के अधिकतर नेताओं ने बागेश्वर धाम के बिहार आगमन का स्वागत किया था. बीजेपी सांसद मनोज तिवारी तो खुद एयरपोर्ट से गाड़ी ड्राइव कर उन्हें कथा स्थल तक ले गए. इसके अलावा सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, सांसद रामकृपाल यादव भी बागेश्वर धाम से मिलने पहुंचे. ‘नीतीश कुमार ने नहीं की कोई व्यवस्था’ बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार सरकार की ओर से बागेश्वर धाम के बिहार आगमन पर कोई व्यवस्था नहीं की गई. उन्होंने कहा, ‘सरकार चाहती है कि बाबा का यात्रा फेल हो जाए, इसलिए कोई सुरक्षा की व्यवस्था सरकार द्वारा नहीं की गई. नीतीश कुमार चाहते हैं कि कोई अप्रिय घटना घट जाए.’ कौन हैं धीरेंद्र शास्त्री? जहां बीजेपी नेता एक तरफ धीरेंद्र शास्त्री के स्वागत में लगे हैं वहीं कांग्रेस नेता अजीत शर्मा ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री कौन हैं वह नहीं जानते. जब उनसे बागेश्वर धाम के ‘हिंदू राष्ट्र’ को लेकर दिए गए बयान के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि क्या यह देश केवल हिंदुओं का है. उन्होंने कहा, ‘मैं भी हिंदू हूं. लेकिन इस देश को आजाद करवाने में सबने कुर्बानी दी है. यह देश सबका है.’ दरअसल अपने कथा के दौरान बागेश्वर धाम उर्फ धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाने की शुरुआत बिहार से की जाएगी. ‘राम पर भरोसा कम हो गया है’ धीरेंद्र शास्त्री को लेकर चल रहे विवाद पर प्रशांत किशोर ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि ‘बीजेपी को अब राम पर भरोसा कम हो गया है तो अब शास्त्री जी पर भरोसा कर के चलेंगे’. उन्होंने कहा, ‘बीजेपी पहले हर जगह राम भगवान की तस्वीर लगाती थी, अब शास्त्री जी की तस्वीर लगा रही है. यह दिखाता है भीतर ही भीतर बदलाव हो रहा है. अब उनका रामजी पर भरोसा कम हो गया है इसलिए अब शास्त्री जी पर भरोसा कर आगे बढ़ेंगे. यह उनकी मानसिकता को दिखाता है. अयोध्या में मंदिर बन रहा है लेकिन उनकी तस्वीर नहीं लगा रहे हैं.’ हुआ था भव्य स्वागत, कथा में पहुंच रहे लाखों लोग बागेश्वर धाम जब बिहार पहुंचे तो हजारों की संख्या में भीड़ ने उनका भव्य स्वागत किया था. मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा था कि ‘बिहार हमारी आत्मा है’. जब उनसे पूछा गया कि बिहार आने पर हिंदू-मुस्लिम होने का खतरा है तो उन्होंने कहा, ‘हम हिंदू-हिंदू करते हैं. मैं तो हिंदुओं को जोड़ने आया हूं’ कल उनकी सभा में भीड़ बढ़ने के बाद अफरा-तफरी का माहौल बन गया था जिसके बाद कथा को जल्दी समाप्त करना पड़ा था. हालात खराब होने के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया था.

आपकी कुंडली में किस ग्रह की क्या स्थिति है, कौन से ग्रह हैं कमजोर ? -जाने

कुछ सामान्य बातें हैं, जिनका ध्यान रखा जाए तो अंदाज लगाया जा सकता है कि आपकी कुंडली में किस ग्रह की क्या स्थिति है। फिर उनके लिए उपाय भी किया जा सकता है। उदाहरण के लिए व्यक्ति की कुंडली में राहु जहां भी होगा, वहां उस भाव से सरोकार रखने वाली चीजें और स्थितियां असुरक्षित होंगी। राहु से सातवें स्थान पर रहने वाला केतु जिस भाव में होता है, उस विशेषताओं से जातक खुद को अलग करना चाहता है। कुंडली में सूर्य की कमजोर स्थिति आत्म-विश्वास को कमजोर करती है। व्यक्तिे छोटी छोटी बातों में घबराता है। कमजोर चंद्रमा निर्णय को लेने में रुकावट खड़ी करता है। छोटी-छोटी मामूली बातें भी जातक को बुरी तरह परेशान कर देती है। निर्णय लेते समय भूल भटक जाने की स्थिति कमजोर मंगल की ओर संकेत करती है। क्रोध में अच्छे बुरे का ख्याल नहीं रहना भी मंगल के प्रतिककूलता का प्रभाव होता है। भाई-बहनों से बिगड़े हुए संबंध, त्वचा की परेशानी का होना, निर्णय लेते वक्त कई तरह के मुसीबतों का आना आपके आदि आपके बुध के बुरे हाल की तरफ इशारा करता है। अच्छे सलाहकार का अभाव, पिता अथवा पिता-तुल्य लोगों से मार्ग-दर्शन का न मिलना कमजोर गुरु की तरफ इशारा करता है। भौतिकदृसुखों में बार-बार बाधा का आना, राग और प्रेम में विफलता शुक्र का पीड़ित बताती है। शनि का नाम भय और आतंक के साथ लिया जाता है। लेकिन यह एक अनुशासित ग्रह है तथा हमारे कर्मों का फल निश्चित और यथाशीघ्र देता भी है। यदि कोई व्यक्ति अपने किए हुए वायदों पर खरा नहीं उतरता है, अपने सेवकों से संबंध ठीक नहीं हैं तो अर्थ है कि शनि कमजोर स्थिति में बैठा है। ग्रहों की स्थिति जानकर अगर हम अपेक्षित दिशा में लगातार सकारात्मक प्रयास करते रहे तो जो भी होगा वह शुभ ही होगा।