नई दिल्ली, 23 जुलाई : राष्ट्रीय राजधानी में यमुना नदी का जलस्तर रविवार को एक बार फिर खतरे के निशान के पार चला गया। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश के बाद हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण यमुना का जलस्तर बढ़ गया है। अधिकारियों ने कहा कि नदी के जलस्तर में वृद्धि से राष्ट्रीय राजधानी के बाढ़ प्रभावित निचले इलाकों में राहत एवं पुनर्वास के काम पर असर पड़ सकता है। राजस्व मंत्री आतिशी ने शनिवार को कहा था कि हथिनीकुंड बैराज से यमुना नदी में दो लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण बाढ़ के खतरे के मद्देनजर दिल्ली सरकार हाई अलर्ट पर है। उन्होंने आशंका जताई थी कि अगर जलस्तर 206.7 मीटर तक पहुंचता है, तो यमुना खादर के कुछ हिस्से जलमग्न हो सकते हैं। यमुना का जलस्तर पिछले कुछ दिनों से 205.33 मीटर के खतरे के निशान के आसपास है। 13 जुलाई को यह रिकॉर्ड 208.66 मीटर पर पहुंच गया था। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के आंकड़ों के अनुसार, यमुना का जलस्तर शनिवार रात 10 बजे 205.02 मीटर से बढ़कर रविवार सुबह नौ बजे 205.96 मीटर पर पहुंच गया और इसके शाम चार बजे तक 206.7 मीटर तक पहुंचने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 25 जुलाई तक हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान जताया है। सीडब्ल्यूसी के आंकड़ों के मुताबिक, यमुनानगर स्थित हथिनीकुंड बैराज में जल प्रवाह की दर शनिवार सुबह नौ बजे एक लाख के आंकड़े के पार चली गई और सुबह 10 बजे से शाम चार बजे के बीच दो लाख से 2.5 लाख क्यूसेक के बीच रही। इसके बाद से जल प्रवाह की दर 1.5 लाख क्यूसेक से दो लाख क्यूसेक के बीच है। ‘साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपुल’ के सहायक समन्वयक भीम सिंह रावत ने कहा, ”इस मात्रा में पानी होने से राष्ट्रीय राजधानी में मध्यम दर्जे की बाढ़ का जोखिम पैदा होता है, जो जुलाई के दूसरे सप्ताह में आई बाढ़ से अब भी उबर रही है।” उन्होंने कहा, ”दूसरी बार बाढ़ आने से यमुना नदी दिल्ली में अपने ज्यादातर मैदानी हिस्सों तक फैल सकती है।” दिल्ली सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली के ऊपरी हिस्सों में भारी बारिश से निचले इलाकों में प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर असर पड़ेगा और उन्हें लंबे समय तक राहत शिविरों में रहना पड़ सकता है। इससे शहर में जल आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है, जो वजीराबाद पंप हाउस में बाढ़ के कारण चार-पांच दिन तक प्रभावित रही थी और मंगलवार को ही जल आपूर्ति सामान्य हो पाई। पंप हाउस वजीराबाद, चंद्रावल और ओखला शोधन संयंत्र में अशोधित जल की आपूर्ति करता है। ये संयंत्र शहर को करीब 25 फीसदी जल की आपूर्ति करते हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने कुतुब परिसर के अंदर मस्जिद घोषित करने वाली 1914 की अधिसूचना पर एएसआई से मांगा रिकॉर्ड
नई दिल्ली, 22 जुलाई: दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को कुतुब मीनार परिसर के भीतर स्थित एक मस्जिद को संरक्षित स्मारक घोषित करने वाली 24 जनवरी, 1914 की अधिसूचना से संबंधित रिकॉर्ड प्रदान करने का निर्देश दिया है। अदालत का निर्देश दिल्ली वक्फ बोर्ड द्वारा नियुक्त मस्जिद की प्रबंध समिति की एक याचिका के जवाब में आया, जिसमें दावा किया गया था कि मस्जिद में नमाज़ बंद कर दी गई थी। विचाराधीन मस्जिद, जिसे मुगल मस्जिद के नाम से जाना जाता है, के भीतर स्थित है। कुतुब परिसर लेकिन कुतुब परिक्षेत्र के बाहर स्थित है। उक्त मस्जिद में नमाज़ पढ़ने पर प्रतिबंध पिछले साल मई में लगाया गया था और तब से जारी है। प्रबंध समिति की ओर से पेश हुए, वकील एम. सुफियान सिद्दीकी ने तर्क दिया कि मस्जिद की स्थापना के बाद से पिछले साल 13 मई तक जब अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया था, तब तक इसमें नमाज अदा की जाती रही है। उन्होंने कहा कि मस्जिद संरक्षित स्मारक के अंतर्गत नहीं आती है, एएसआई द्वारा अपनी उपरोक्त अधिसूचना में पदनाम जारी किया गया है। मामले की अध्यक्षता करने वाले न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने कहा कि अदालत को इस बात पर विचार करने की जरूरत है कि क्या मस्जिद 1914 की अधिसूचना में निर्दिष्ट संरक्षित क्षेत्र के अंतर्गत आती है और मस्जिद में पूजा की अनुमति पर इसका क्या प्रभाव पड़ सकता है। अदालत ने सभी पक्षों को तीन सप्ताह के भीतर अपनी लिखित दलीलें और प्रासंगिक निर्णय प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को तय की। दूसरी ओर, बोर्ड की प्रबंध समिति का तर्क है कि भले ही मस्जिद एक संरक्षित स्मारक है, प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 की धारा 16, प्रासंगिक नियमों के साथ, आदेश देती है कि अधिकारियों को मस्जिद की धार्मिक प्रकृति और पवित्रता को बनाए रखना चाहिए और उपासकों के इकट्ठा होने और प्रार्थना करने के अधिकार की रक्षा करनी चाहिए। याचिका के अनुसार, मुसलमानों को मस्जिद में नमाज अदा करने के अवसर से वंचित करना, एक जबरदस्त दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है, जो संविधान में निहित उदार मूल्यों और आम लोगों के दैनिक जीवन में परिलक्षित उदारवाद के विपरीत है। याचिका में कहा गया है कि अधिकारियों की इस तरह की निष्क्रियता भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत अधिकारों को कम और बाधित करती है, इससे नागरिकों को शिकायतों का समय पर निवारण करने में बाधा आती है।
तहलका के तरुण तेजपाल समेत चार पर दो करोड़ का हर्जाना, मानहानि मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का 22 साल बाद आया फैसला
नई दिल्ली, 22 जुलाई: वर्ष 2002 में पूर्व सैन्य अधिकारी एमएस अहलूवालिया द्वारा दायर मानहानी मामले में करीब 22 वर्ष बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्णय सुनाते हुए समाचार पत्रिका तहलका, इसके पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल, अनिरुद्ध बहल, मैथ्यू सैम्युएल और एक कंपनी पर दो करोड़ का हर्जाना लगाया है। पूर्व सैन्य अधिकारी को बड़ी राहत देते हुए न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने कहा कि पीड़ित सैन्य अधिकारी बीते कई वर्षों से न सिर्फ इस बदनामी के साथ समाज में रहने को मजबूर है, बल्कि पहले ही कोर्ट आफ इंक्वायरी का भी सामना कर चुके हैं। स्टिंग ऑपरेशन में लगाए गए आरोप के कारण उन्हें सेना अधिकारी के लिए अयोग्य भी घोषित किया गया था। ऐसे में इस मामले में माफी न केवल अपर्याप्त हैं बल्कि अर्थहीन भी है। ऐसे में पीड़ित की क्षतिपूर्ति के लिए आरोपितों को दो करोड़ रुपये हर्जाने के तौर पर देने होंगे। अदालत ने कहा कि कहा कि पीड़ित पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों से न सिर्फ उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची थी बल्कि उनके चरित्र पर भी दाग लग गया था। तहलका और उसके पत्रकारों ने खबरें लिखकर अहलूवालिया को बदनाम किया, जबकि उन्होंने कभी किसी पैसे की मांग नहीं की थी। ये था मामला : तहलका की ओर से मार्च 2001 में आपरेशन वेस्ट एंड के नाम से एक स्टिंग आपरेशन कर एक खबर प्रकाशित की गई। इसमें अहलूवालिया पर रक्षा सौदों में रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था। वर्ष 2002 में अहलूवालिया ने मानहानि मुकदमा दायर कर तर्क दिया था कि तहलका के वीडियो टेप के साथ-साथ प्रकाशित खबर ने समाज में यह धारणा बनाने में मदद की कि उन्होंने संबंधित पत्रकार से शराब और 10 लाख रुपये की मांग की थी। इससे उनकी छवि धूमिल हुई है, उनके चरित्र और प्रतिष्ठा पर भी आक्षेप लगाए गए हैं।
दो बड़ी मस्जिदों को हटाने के लिए रेलवे का नोटिस
नई दिल्ली, 22 जुलाई: उत्तर रेलवे ने अपनी जमीन खाली कराने के लिए दिल्ली की दो पुरानी मस्जिदों को नोटिस जारी किए हैं। बीते बुधवार को चस्पा किए गए नोटिसों में चेतावनी दी है कि 15 दिन के भीतर अतिक्रमण हटाया जाए। यदि ऐसा नहीं होता है तो रेलवे खुद अतिक्रमण हटाएगा। उधर, मस्जिद कमेटियां इसके खिलाफ अदालत जाने की तैयारी कर रही हैं। बंगाली मार्केट स्थित मस्जिद और आईटीओ स्थित तकिया बब्बर शाह मस्जिद के बाहर नोटिस चस्पा किए गए हैं। इनमें लिखा है कि जिन्होंने रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण कर रखा है, वह अनधिकृत भवन, मंदिर, मस्जिद और मजार को सूचना मिलने के 15 दिन के भीतर अपनी इच्छा से हटा लें। ऐसा नहीं करने पर रेलवे अधिनियम के प्रावधानों के तहत अवैध निर्माण को उनके द्वारा हटाया जाएगा। इस प्रक्रिया के दौरान होने वाले नुकसान के लिए रेलवे प्रशासन नहीं बल्कि अतिक्रमण करने वाले खुद जिम्मेदार होंगे। मामला अदालत में लंबित : कमेटियां मस्जिद कमेटियों का दावा है कि यह मस्जिदें काफी पुरानी हैं। बंगाली मार्केट स्थित मस्जिद 250 साल और तकिया बब्बर शाह मस्जिद 100 साल से ज्यादा पुरानी बताई गई हैं। वर्ष 1970 के गजट नोटिफिकेशन में भी तकिया बब्बर शाह की मस्जिद का नाम मौजूद है। इसके अलावा दिल्ली में वक्फ बोर्ड की 123 संपत्ति का मामला उच्च न्यायालय में चल रहा है। इसमें यह दोनों मस्जिद भी शामिल हैं। ऐसे में रेलवे द्वारा नोटिस चिपकाना अवैध है। मामला उच्च न्यायालय में लंबित है। इस मामले को लेकर वक्फ बोर्ड की तरफ से रेलवे के डीआरएम को पत्र लिखा गया है। हस्ताक्षर न मुहर दोनों मस्जिदों पर चिपकाए गए नोटिसों पर भी कमेटियां सवाल कर रही हैं। उनका कहना है कि नोटिस पर न तो किसी अधिकारी के हस्ताक्षर हैं और ना ही किसी की मुहर। यह केवल सादे पेज पर लिखा गया नोटिस है। आरोप है कि चोरी-छिपे इन्हें चिपकाया गया है। कोई भी भवन हो सकता है : मुख्य प्रवक्ता उत्तर रेलवे के मुख्य प्रवक्ता दीपक कुमार का कहना है कि रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण को हटाया जाना है। इसके लिए उत्तर रेलवे की तरफ से नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर जमीन खाली करने को कहा गया है। नोटिस में केवल मस्जिद हटाने की बात नहीं लिखी गई है। इसमें मंदिर, मस्जिद, मजार या कोई अन्य भवन भी अतिक्रमण में शामिल हो सकता है। अप्रैल में भी हुई थी तोड़फोड़ बंगाली मार्केट स्थित मस्जिद में बीती 11 अप्रैल को भी तोड़फोड़ की गई थी। नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) द्वारा यहां पर बनाए गए दो कमरों और कुछ अन्य हिस्सों को तोड़ा गया था। एनडीएमसी ने दावा किया था कि मरम्मत के दौरान अवैध रूप से यह कमरे बनाए गए थे।
दिल्ली में यमुना नदी फिर उफान पर, तीसरी बार खतरे के निशान से ऊपर
नई दिल्ली, 22 जुलाई : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर कल रात फिर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया। बाढ़ प्रभावित लोग अभी अपना बचा खुचा सामान ठीक से सुखा भी नहीं पाए हैं कि उनके सिर पर फिर बाढ़ का खतरा मंड़राने लगा। यमुना के रौद्र रूप से तटीय क्षेत्र में रहने वाले हजारों परिवारों की धड़कनें भी बढ़ने लगी हैं। अधिकारियों के अनुसार शुक्रवार शाम करीब छह बजे तीसरी बार यमुना का जलस्तर 205.38 मीटर के पार पहुंच गया। करीब एक हफ्ते से जलमग्न राजघाट परिसर से शुक्रवार को भी पानी निकाला गया। पानी बढ़ने पर यमुना के करीब स्थित इस गहरी जगह पर फिर जलभराव होने का खतरा है। इससे पहले 10 जुलाई को यमुना नदी ने खतरे के निशान 205.33 मीटर को पार कर लिया था। 13 जुलाई को यमुना ने दिल्ली में 1978 में आई बाढ़ के दौरान के अपने जलस्तर 207.49 मीटर के रिकार्ड नीचे छोड़ दिया था।ओल्ड रेलवे ब्रिज (लोहा पुल) पर तब इसका अधिकतम जलस्तर 208.66 मीटर पहुंच गया। छह दिन बाद 19 जुलाई की सुबह पांच बजे यमुना का जलस्तर फिर से खतरे के निशान के नीचे 205.22 मीटर पर आया। लेकिन छह बजे से इसका जलस्तर फिर बढ़ने लगा।
द्वारका में घरेलू सहायिका से दुर्व्यवहार मामला: इंडिगो ने पायलट को ड्यूटी से हटाया
नई दिल्ली, 19 जुलाई: दिल्ली के द्वारका में एक नाबालिग घरेलू सहायिका के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार करने के मामले को लेकर सोशल मीडिया पर मचे हंगामे के बीच एअरलाइन इंडिगो ने बुधवार को कहा कि उसने एक पायलट को ड्यूटी से हटा दिया है और मामले की जांच की जा रही है। द्वारका में एक महिला पायलट और उसके पति ने बुधवार को 10 वर्षीय एक घरेलू सहायिका को कथित रूप से पीट दिया जिसकी भनक लगने पर आक्रोशित भीड़ ने दंपती की पिटाई कर दी। पुलिस ने यह जानकारी दी। मामले के बारे में विशेष रूप से उल्लेख किए बिना, इंडिगो के एक प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो की जानकारी है, जिसमें एअरलाइन में कार्यरत एक व्यक्ति कथित तौर पर शामिल है। इंडिगो के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, ”फिलहाल हम मामले की जांच कर रहे हैं। इस बीच, कर्मचारी को आधिकारिक ड्यूटी से हटा दिया गया है।” पुलिस ने बताया कि आरोपियों कौशिक बागची (36) और पूर्णिमा बागची (33) को बच्ची की पिटाई से जुड़ी घटना के संबंध में गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने बताया कि महिला एक निजी एअरलाइन में पायलट के रूप में कार्यरत है, जबकि उसका पति एक अन्य निजी एअरलाइन का कर्मचारी है।
नाबालिग घरेलू सहायिका के उत्पीड़न पर पायलट और उसके पति को भीड़ ने पीटा
नई दिल्ली, 19 जुलाई: दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के द्वारका में एक महिला पायलट और उसके पति ने बुधवार को कथित रूप से 10 वर्षीय घरेलू सहायिका को पीट दिया जिसकी भनक लगने पर आक्रोशित भीड़ ने दंपति की पिटाई कर दी। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि आरोपी कौशिक बागची (36) और पूर्णिमा बागची (33) को बच्ची की पिटाई से जुड़ी घटना के संबंध में गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने बताया कि महिला एक निजी एयरलाइन में पायलट के रूप में कार्यरत है, जबकि उसका पति एक अन्य निजी एयरलाइन का कर्मचारी है। पुलिस के मुताबिक इस घटना का पता चलने के बाद दंपति को पीड़िता के रिश्तेदारों और अन्य लोगों ने घेरे लिया और उनकी पिटाई कर दी। नाबालिग लड़की को उसकी एक रिश्तेदार के माध्यम से दंपति के घर पर काम के लिए रखा गया था। लड़की की रिश्तेदार भी पास के एक घर में काम करती थी। एक वीडियो में भीड़ में शामिल लोगों को आरोपी दंपति के साथ धक्का-मुक्की करते और उनकी पिटाई करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में कुछ महिलाओं को कथित रूप से आरोपी महिला पायलट को थप्पड़ मारते हुए और उसके बाल खींचते हुए देखा जा सकता है, जो अपनी वर्दी में थी। वीडियो में पूर्णिमा को माफी मांगते हुए सुना जा सकता है जबकि कौशिक को भीड़ से उसका बचाव करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में कौशिक भीड़ में शामिल लोगों से कह रहा है, ‘‘वह मर जाएगी…उसे छोड़ दो…।’ इसके बाद एक बुजुर्ग व्यक्ति ने हस्तक्षेप किया, तब जाकर भीड़ तितर-बितर हुई। पुलिस उपायुक्त (द्वारका) एम हर्ष वर्धन ने बताया कि सुबह करीब नौ बजे द्वारका दक्षिण थाने में घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली एक नाबालिग लड़की से दुर्व्यवहार होने की सूचना मिली थी। उन्होने कहा कि पता चला कि 10 साल की बच्ची पिछले दो महीने से दंपति के घर पर काम कर रही है और दोनों ने बुधवार को नाबालिग लड़की की पिटाई कर दी। पुलिस के अनुसार बच्ची की रिश्तेदार महिला ने भी यह देखा। पुलिस उपायुक्त ने कहा कि मामले की खबर फैलने पर दंपति के आवास के बाहर भीड़ एकत्र हो गई और उसने उनसे धक्का-मुक्की की। पुलिस ने बताया कि पीड़ित लड़की की आंखों पर चोट लगी है और उसके शरीर पर भी चोट के निशान हैं। पुलिस उपायुक्त ने कहा, ‘‘हमने भारतीय दंड संहिता की धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 324 (खतरनाक हथियारों या साधनों से स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना), 370 (किसी व्यक्ति को गुलाम के रूप में खरीदना), बाल श्रम अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के तहत मामला दर्ज किया गया है।” पुलिस ने कहा कि लड़की ने यौन उत्पीड़न का कोई आरोप नहीं लगाया है। क्या दंपति के साथ मारपीट करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी? इसके जवाब में अधिकारी ने कहा कि शिकायत के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।
वजीराबाद जल शोधन संयंत्र का संचालन फिर से शुरू, जल्द ही पूरी क्षमता से काम करेगा : केजरीवाल
नई दिल्ली, 17 जुलाई: मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा कि दिल्ली में बाढ़ जैसी स्थिति के बीच बंद हुए वजीराबाद जल शोधन संयंत्र ने 54 एमजीडी शोधित जल का उत्पादन शुरू कर दिया है और वह जल्द की अपनी पूर्ण क्षमता से काम शुरू करेगा। इस संयंत्र की 134 एमजीडी (10 लाख गैलन प्रतिदिन) शोधित जल उत्पादित करने की क्षमता है। केजरीवाल ने ट्वीट किया कि राष्ट्रीय राजधानी में बाढ़ जैसी स्थिति के कारण वजीराबाद संयंत्र के उपकरण को ”सबसे ज्यादा नुकसान” हुआ है। उन्होंने लिखा, ”वजीराबाद जल शोधन संयंत्र की क्षमता 134 एमजीडी है। इसने 54 एमजीडी शोधित जल का उत्पादन शुरू कर दिया है। इस संयंत्र के उपकरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। उम्मीद है कि यह जल्द ही पूरी क्षमता से काम करना शुरू कर देगा। इंजीनियर चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं।” यमुना के बढ़ते जलस्तर के कारण पिछले बृहस्पतिवार को तीन जल शोधन संयंत्र-वजीराबाद, चंद्रावल और ओखला-बंद कर दिए गए थे। ओखला जल शोधन संयंत्र का संचालन शुक्रवार को बहाल हुआ था।
सीएम केजरीवाल ने मोरीगेट राहत शिविर का लिया जायजा
नई दिल्ली, 17 जुलाई: केजरीवाल सरकार बाढ़ से प्रभावित दिल्लीवासियों को हर संभव मदद पहुंचा रही है। रविवार दोपहर सीएम अरविंद केजरीवाल ने मोरीगेट स्थित एक स्कूल में बने राहत शिविर का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान सीएम ने कहा कि बाढ़ प्रभावित दिल्ली के छह जिलों लोगों के लिए सरकार ने स्कूलों या धर्मशालाओं में राहत शिविर लगाए हैं, जहां खाना-पानी और टॉयलेट्स का समुचित इंतज़ाम किया गया है। उन्होंने आश्वासन देते हुए कहा कि सरकार बाढ़ प्रभावितों की हर संभव मदद करेगी। जिन लोगों का ज्यादा नुकसान हुआ है, उनकी सहायता के लिए सरकार जल्द घोषणा करेगी। जिन लोगों के जरूरी कागजात पानी में बह गए हैं। कैम्प लगाकर उनके कागजात बनाए जाएंगे और जिन बच्चों की किताबें-ड्रेस बह गए हैं, उनके लिए दोबारा किताब व ड्रेस का इंतजाम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में यमुना का जलस्तर घटने के साथ-साथ आम जनजीवन भी समान्य होता जा रहा है। इस दौरान राजस्व मंत्री आतिशी, सेंट्रल दिल्ली के प्रभारी मंत्री इमरान हुसैन, स्थानीय विधायक प्रहलाद सिंह साहनी और पार्षद पुनरदीप सिंह साहनी भी मौजूद रहे। अरविंद केजरीवाल ने मोरीगेट स्थित एक स्कूल में लगाए गए राहत शिविर का जायजा लेने के उपरांत कहा कि यमुना के नीचले इलाकों में जलभराव होने की वजह से कई लोगों के घरों में पानी घुस गया है। उन लोगों के लिए दिल्ली सरकार ने अलग-अलग जगहों पर बहुत सारे राहत शिवर लगाए हैं। यमुना का जलस्तर बढ़ने से दिल्ली के छह जिले जलभराव से प्रभावित हैं। इन सभी छह जिलों में अलग-अलग जगहों पर राहत शिविर लगाए गए हैं। दिल्ली सरकार की ओर से यह कोशिश की गई है कि अगर प्रभावित इलाकों के पास कोई स्कूल या धर्मशाला है तो वहां पर राहत शिविर लगाए, ताकि लोगों को टॉयलेट और पानी का अंदर ही इंतजाम किया जा सके। सीएम केजरीवाल ने बताया कि मोरीगेट में बने राहत शिविर में यमुना बाजार के लोग आकर रह रहे हैं। यमुना बजार में अचानक पानी आया था और घरों में घुस गया। पानी में लोगों का सामान भी बह गया है। कई लोगों के आधार कार्ड समेत अन्य कागज बह गए हैं। इसके लिए स्थिति समान्य होने पर कैंप लगवाएंगे, जहां लोग अपना कार्ड बनवा सकेंगे। कुछ बच्चों की किताबें और स्कूल ड्रेस भी पानी के साथ बह गया है। दिल्ली सरकार ऐसे बच्चों को दोबारा किताबें और स्कूल ड्रेस देगी। कुछ इलाकों में यमुना का पानी भरने से बहुत ज्यादा कीचड़ हो गया है। ऐसी जगहों पर मिट्टी डाल कर ठीक किया जाएगा। बाढ़ प्रभावित जिन लोगों का सारा सामान बह गया है, उन लोगों को किसी तरह की राहत देने के लिए भी दिल्ली सरकार तरीका तलाश रही है, ताकि वे लोग अपने नुकसान की भरपाई कर सकें। इसका तरीका निकाल कर हम ऐलान करेंगे। अरविंद केजरीवाल ने हरियाणा के उस आरोप का खंड़न किया है, जिसमें कहा जा रहा है कि दिल्ली सरकार ने यमुना पुल के रखरखाव का पांच से पैसा नहीं दिया है। इस संबंध में सीएम अरविंद केजरीवाल का कहना है कि मैंने इस बारे में पता किया है। यमुना के पुल के रखरखाव का पैसा दिल्ली सरकार नहीं देती है, बल्कि एनटीपीसी देती है। एनटीपीसी भी केंद्र सरकार के अधीन आती है। इसलिए इस बारे में एनटीपीसी ही सही बता सकती है। यमुना पुल के रखरखाव में दिल्ली सरकार की कोई भूमिका नहीं है। हरियाणा सरकार गलत बोल रही है कि दिल्ली सरकार ने पैसा नहीं है। जब से आईटीओ बैराज के पांच गेट नहीं खुलने का मुद्दा उठा है और मीडिया की सुर्खियों में आया है, तब से वे लोग कोई न कोई बहाना ढूंढ रहे हैं। लेकिन यह समय आपस में दोषारोपण का नहीं है। श्री केजरीवाल ने जलभराव के चलते बंद सड़कों को चालू करने को लेकर कहा कि हम सड़क पर जमा पानी को पंप से निकालने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ जगहों पर जमा पानी को जल्द निकाल दिया जा रहा है, जबकि कुछ जगहों पर थोड़ा समय लग रहा है। सीएम ने कहा कि यमुना का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है और अब जलस्तर 205.9 मीटर पर आ गया है। जबकि यह 208.6 मीटर तक पहुंच गया था। जैसे-जैसे यमुना का जलस्तर नीचे जा रहा है, वैसे-वैसे आम जनजीवन समान्य होता जा रहा है। कई इलाकों से पानी निकल गया है, जबकि कुछ इलाकों में अभी बचा है। इसे भी जल्द निकालने का प्रयास जारी है। भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने जा रहे प्रभारी मंत्रियों का विरोध करने पर सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि भाजपा को इस तरह की राजनीति नहीं करनी चाहिए। सबको मिलकर काम करना चाहिए। इस संकट के समय में भी अगर पार्टीबाजी करेंगे, तो यह ठीक नहीं है। सीएम केजरीवाल ने प्रभावितों से बात कर मदद का दिया आश्वासन मोरी गेट स्थित राहत शिविर का जायजा ले वीने पहुंचे सीएम अरविंद केजरीवाल ने वहां मौजूद बाढ़ प्रभावित लोगों से बात भी की। मुख्यमंत्री ने लोगों से यमुना का पानी घर में घुसने से हुए नुकसान की जानकारी ली। कई लोगों ने बताया कि यमुना के पानी में उनके महत्वपूर्ण कागजात, दैनिक उपयोग की वस्तुएं और अन्य सामान भी बह गए हैं। इससे उनका काफी नुकसान हुआ है। इस पर सीएम अरविंद केजरीवाल ने सभी को आश्वासन दिया कि दिल्ली सरकार कुछ ऐसा उपाय तलाश रही है, जिससे कि इस नुकसान की भरपाई हो सके। सीएम अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि दिल्ली के जो इलाक़े बाढ़ से प्रभावित हैं, वहां रहने वाले लोगों के लिए हमने स्कूलों में राहत शिविर लगाए हैं। मोरी गेट स्थित एक स्कूल में लगे राहत शिविर में व्यवस्थाओं को देखने मैं खुद गया। यहां प्रभावित लोगों के लिए रहने के साथ-साथ खाना-पानी और टॉयलेट्स का इंतज़ाम किया गया है। इस बाढ़ में जिन लोगों के ज़रूरी काग़ज़ और बच्चों की किताबें बह गई हैं, उनके लिए बाद में विशेष कैम्प लगाए जाएंगे और बच्चों के लिए किताबें और ड्रेस का फिर से इंतज़ाम किया जाएगा। जिनका ज्यादा नुकसान हुआ है, उनकी सहायता के लिए भी सरकार जल्द घोषणा करेगी। बाढ़ प्रभावितों के लिए हम हर संभव मदद पहुंचा रहे हैं।
यमुना में बाढ़: भाजपा ने आप पर लापरवाही का आरोप लगाया
नई दिल्ली, 16 जुलाई: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दिल्ली इकाई ने रविवार को इस बारे में न्यायिक जांच कराने की मांग की कि शहर की आप सरकार ने यमुना से गाद और नालों की सफाई कराई है या नहीं, और अगर कराई है तो इस पर कितना धन खर्च हुआ है। भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि केजरीवाल सरकार ने यमुना और नालों से गाद की सफाई नहीं कराई और इसी कारण से दिल्ली में बाढ़ आई है। सचदेवा ने कहा, ”हम इसकी न्यायिक जांच कराने की मांग करते हैं कि केजरीवाल सरकार ने यमुना और नालों से गाद निकलवाई है या नहीं और अगर ऐसा हुआ है तो इस पर कितना खर्च हुआ है।” बाढ़ के लिए आप सरकार के ”भ्रष्टाचार और लापरवाही” को जिम्मेदार बताते हुए सचदेवा ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नीत बाढ़ नियंत्रण संबंधी सर्वोच्च समिति की पिछले दो साल में कोई बैठक नहीं हुई है। भाजपा के विधि प्रकोष्ठ की सह-समन्वयक बांसुरी स्वराज ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर आरोप लगाया कि वह बाढ़ से निपटने में अपनी असफलताओं पर झूठ का पर्दा डालने की कोशिश कर रही है। इससे पहले आप नेताओं ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया था कि उसने हरियाणा के हथिनीकुंज बैराज से यमुना में बहुत ज्यादा पानी छोड़ा है और दिल्ली में बाढ़ लाने का षड्यंत्र रचा है।