नई दिल्ली, 17 अगस्त: दिल्ली भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता ने गुरुवार को विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन आम आदमी पार्टी (आप) पर कटाक्ष किया। गुप्ता ने आप पर बुजुर्गों को पेंशन न देने का आरोप लगाया है। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि पार्टी के पास दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के लिए 40 करोड़ रुपये का नया बंगला बनाने के लिए फंड है, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन देने के लिए फंड की कमी है। कुछ हंगामे के बावजूद, विजेंद्र गुप्ता ने बुजुर्गों को पेंशन दिए जाने की वकालत करते हुए अपना भाषण खत्म किया। बुधवार को भाजपा विधायकों ने केजरीवाल के आवास को लेकर उन पर निशाना साधा, जिसका जिक्र उन्होंने ‘शीश महल’ के तौर पर किया था।
मणिपुर पर चर्चा का विरोध करने पर भाजपा के चार विधायकों को दिल्ली विधानसभा से बाहर
नई दिल्ली, 17 अगस्त: मणिपुर के मुद्दे पर चर्चा का विरोध करने को लेकर बृहस्पतिवार को दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही के दौरान भारतीय जनता पार्टी के चार विधायकों को मार्शलों ने बाहर कर दिया। आम आदमी पार्टी विधायक दुर्गेश पाठक ने पूर्वोत्तर राज्य में हिंसा पर अल्पकालिक चर्चा शुरू की जिसके बाद भाजपा विधायक विरोध में खड़े हो गए और कहा कि दिल्ली से संबंधित मुद्दों पर सदन में बहस होनी चाहिए। उप सभापति राखी बिधलान ने भाजपा विधायकों के विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा, “क्या उन्हें लगता है कि मणिपुर विधानसभा में चर्चा के लिए कोई मुद्दा नहीं है? उत्तर प्रदेश विधानसभा में भी मणिपुर मुद्दे पर चर्चा हुई।” भाजपा विधायकों ने अपना विरोध जारी रखा जिसके बाद उनमें से चार – अभय वर्मा, जितेंद्र महाजन, अजय महावर और ओपी शर्मा – को मार्शलों की मदद से सदन से बाहर निकाल दिया गया। हंगामा बढ़ने पर पाठक ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा इस मुद्दे पर चर्चा नहीं चाहती है। पाठक के नेतृत्व में आप विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ नारे भी लगाए।
केजरीवाल ने मणिपुर के मामले में मोदी की चुप्पी पर उठाये सवाल
नई दिल्ली, 17 अगस्त : दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मणिपुर के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि कम से कम उन्हें शांति की ही अपील करनी चाहिये थी। श्री केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन मणिपुर पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि मणिपुर में चार हजार घर जलाए गए, 60 हजार लोग बेघर हुए, डेढ़ सौ से ज्यादा लोगों की मौत हुई, तीन सौ से अधिक धार्मिक स्थल जलाए गए, असम राइफल और मणिपुर पुलिस के बीच गोलाबारी हुई लेकिन प्रधानमंत्री चुप रहे। उन्होंने कहा कि भाजपा विधायक कह रहे हैं कि मणिपुर उनके लिए मायने नहीं रखता है और विधानसभा छोड़कर चले गए। उन्होंने कहा कि जब एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें महिलाओं के साथ अत्याचार हुआ तब भी प्रधानमंत्री चुप रहे। वहीं मणिपुर के मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि वहां यह रोज हो रहा है। श्री केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री बेटियों के पिता के समान हैं। अगर बाप मुंह मोड़ ले, तो बेटियां कहां जाएंगी। श्री केजरीवाल ने कहा महिला पहलवानों में मामले के भी प्रधानमंत्री चुप होकर बैठ गए थे। पिछले 9 साल से चीन हमे आंख दिखा रहा है और प्रधानमंत्री चुप हैं, एक शब्द नहीं बोलते हैं। गलवान घाटी में चीन ने हमारे 20 जवान को शहीद कर दिया। दिल्ली से डेढ़ गुना इलाका चीन की सेना ने कब्जा कर लिया और प्रधानमंत्री चुप रहे। उन्होंने कहा कि हिंदनबर्ग रिपोर्ट ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी। लाखों इन्वेस्टर्स का पैसा डूब गया। कम से कम एक ट्वीट करके यह कह देते कि जांच कराऊंगा और दोषियों को नहीं छोडूंगा, लेकिन प्रधानमंत्री चुप रहे। इन्होंने नीरव मोदी, मेहुल चौकसी और विजय माल्या को भगा दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने केजरीवाल को दी जन्मदिन की बधाई, मुख्यमंत्री ने जताया आभार
नई दिल्ली, 16 अगस्त : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बुधवार को उनके जन्मदिन पर बधाई दी और उनके उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु होने की कामना की। केजरीवाल ने शुभकामनाओं के लिए प्रधानमंत्री का आभार जताया। केजरीवाल बुधवार को 55 वर्ष के हो गए। मोदी ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर किए एक पोस्ट में कहा, ”दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जन्मदिन की बधाई। मैं उनके लंबे जीवन और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं।” प्रधानमंत्री के जवाब में केजरीवाल ने लिखा, ”शुभकामनाओं के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सर।” हरियाणा के भिवानी में 16 अगस्त 1968 को जन्मे केजरीवाल आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक हैं।
दिल्ली सर्विस बिल: एलजी के पास ही रहेगी अंतिम निर्णय की शक्ति, पढ़िये क्या कहती हैं पार्टियां…
नई दिल्ली, 12 अगस्त : संसद के दोनों सदनों से पास दिल्ली सर्विस बिल पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर करते ही ब्यूरोक्रेसी एलजी के अधीन हो गई है। दिल्ली का राजकाज चलाने के लिए नया कानून बन गया है। इसका दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने स्वागत किया है। आम आदमी पार्टी या कांग्रेस की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। दिल्ली सरकार के पूर्व मुख्य सचिव ओमेश सहलग बताते हैं कि इस कानून के बनने के बाद दिल्ली सरकार में प्रशासनिक फैसलों को लेकर बड़ा बदलाव नजर आएगा। दिल्ली की चुनी हुई सरकार को फैसला लेने का अधिकार तो होगा, लेकिन उस पर अंतिम मंजूरी उपराज्यपाल की होगी। अधिकारियों के तबादले से लेकर उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई पर नए कानून के मुताबिक सिविल सर्विसेज प्राधिकरण फैसला करेगा। वहीं, अब विधानसभा सत्र बुलाने के लिए भी सरकार को उपराज्यपाल की मंजूरी लेनी होगी। नए कानून के अनुसार दिल्ली सरकार में अधिकारियों की तैनाती से लेकर तबादले और उन पर किसी भी तरह की सतर्कता जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई का फैसला इस कानून के तहत राष्ट्रीय राजधानी सिविल सर्विसेज प्राधिकरण करेगा। तीन सदस्यों वाली इस समिति के चेयरमैन मुख्यमंत्री होंगे। दो अन्य सदस्य मुख्य सचिव और प्रधान सचिव (गृह विभाग) होंगे। फैसला वोटिंग के आधार पर होगा। मुख्यमंत्री का मत अगर अधिकारियों से अलग होता है तो बहुमत के आधार पर अधिकारियों का फैसला ही मान्य होगा। इस पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अपनी आपत्ति पहले ही दर्ज कर चुके हैं। इस कानून के बन जाने से अब सरकार के मंत्री का कोई फैसला अगर सेक्रेटरी को नियमानुसार नहीं लगता है तो वह आपत्ति जताकर उसे बारे में मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल को अपनी रिपोर्ट भेज सकते हैं और फाइल को रोक सकते हैं। इस तरह नए कानून बन जाने के बाद दिल्ली विधानसभा सत्र बुलाने के लिए भी अब उपराज्यपाल की मंजूरी लेनी होगी। सरकार को अपने सभी फैसलों के लिए उपराज्यपाल से मंजूरी लेना अब अनिवार्य होगा। संविधान विशेषज्ञ एस के शर्मा का कहना है कि दिल्ली में हमेशा से पुलिस, कानून व्यवस्था, जमीन और सेवा विभाग उपराज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में रहा है। मुख्यमंत्री यहां सिर्फ जनता के मुद्दे उठाने और उनकी बात कहने के लिए हैं। प्रशासन हमेशा राष्ट्रपति के तहत काम करता है। 19 मई को केंद्र सरकार द्वारा जारी अध्यादेश अब कानून बन गया है। पहले सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार ने अध्यादेश को चुनौती दी थी, अब अगर दिल्ली सरकार इस कानून को चुनौती देगी तो उसे संशोधित कानून को चुनौती देना होगा। वहीं भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने ट्वीट कर लिखा कि बधाई दिल्ली ! केजरीवाल के लूट और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने वाला दिल्ली सेवा बिल को राष्ट्रपति जी की मंजूरी मिल गई है। अब बंद कमरों में नहीं पीटे जाएंगे आईएस अधिकारी, अब नहीं छिपायी जायेंगी घोटालों की फाइलें, अब नहीं सताये जाएंगे ईमानदार अफसर।
सरकारी स्कूलों में 75 फीसदी से कम हाजिरी वाले स्टूडेंट्स नहीं दे पाएंगे परीक्षा
नई दिल्ली, 11 अगस्त : दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को परीक्षा में बैठने के लिए स्कूल में 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है. इस संबंध में दिल्ली के शिक्षा निदेशक हिमांशु गुप्ता ने आदेश जारी किया है. इसमें कहा गया है कि परीक्षा में शामिल होने के लिए ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य है. शिक्षा निदेशक ने आदेश में कक्षाओं में छात्रों की उपस्थिति पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा है कि यह महत्वपूर्ण है कि छात्र स्कूल में मौजूद रहें और सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से लगे रहे हैं. यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि अनुपस्थिति बच्चे की क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती है. यदि छात्र अनुपस्थित रहता है तो छात्र के परिवार को व्यक्तिगत कॉल करके घर-स्कूल में सकारात्मक संबंध स्थापित करें. इसके लिए एसएमएस, व्हाट्सएप, मेल का इस्तेमाल किया जाए. शिक्षा निदेशक ने स्कूल में व्यापक उपस्थिति अभियान शुरू करने और उत्कृष्ट उपस्थिति वाले छात्रों को सम्मानित करने को भी कहा है. प्रत्येक शनिवार को पैरेंटस टीचर मीटिंग बुलाई जाए और बच्चे की उपस्थिति का विश्लेषण करते हुए उसके बारे में जानकारी अभिभावकों को दी जाए. खासकर ऐसे बच्चों की जो एक सप्ताह में तीन दिन से ज्यादा अनुपस्थित रहे हों.ऐसे छात्र जिनकी उम्र 14 वर्ष से अधिक है और नौवीं से बारहवीं कक्षा में पढ़ते हैं बिना सूचना दिए छह दिन तक लगातार अनुपस्थित रहते हैं तो उनका नाम काटा जा सकता है. नाम काटे जाने से पहले छात्र के अभिभावकों को इस संबंध में एक नोटिस भेजा जाएगा. वहीं, शिक्षकों को कहा गया है कि उन्हें टैब या स्कूल कंप्यूटर सिस्टम में ऑनलाइन उपस्थिति बच्चे का नाम पुकारते हुए लेनी है.
दिल्ली : मायापुरी औद्योगिक इलाके में सोफा कारखाने में लगी आग, सात घायल
नई दिल्ली, 09 अगस्त : पश्चिमी दिल्ली के मायापुरी इलाके में बुधवार को सुबह एक कारखाने में आग लगने से दो पुलिसकर्मी और सात नागरिक घायल हो गये। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, रात दो बज कर पांच मिनट पर फोन आया कि कबाड़के कारोबार के लिए मशहूर मार्केट में दो मंजिला सोफा कारखाने में आग लग गई है। उन्होंने बताया कि मौके पर पहुंची अग्निशमन की पांच गाड़ियों ने आग पर काबू पा लिया। एक अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि आग सोफा स्प्रिंग के पैकिंग बॉक्स में लगी थी और आग से भूतल पर रखा एक गोंद का ड्रम भी फट गया। आग से सात लोग मामूली रूप से झुलस गए और उन्हें दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल (डीडीयू) अस्पताल ले जाया गया। अग्निशमन अधिकारियों ने बताया कि घायल लोगों की पहचान राकेश (35), राम निवास (60), संतोष (27), हरिचंद (35), विक्रांत (25), किशन (23) और इंद्रजीत (33) के रूप में हुई है। हेड कांस्टेबल रणधीर सिंह और विक्रांत भी इस घटना में झुलस गए। पुलिस के अनुसार, मायापुरी फेज-2 में कारखाने में लोहे के स्प्रिंग (सोफे बनाने में इस्तेमाल होने वाले) का कारोबार होता था। अपराध जांच दल को भी मौके पर बुलाया गया । उन्होंने बताया कि मायापुरी पुलिस थाने में मामला दर्ज कर जांच की जा रही है।
दिल्ली सेवा विधेयक पारित होने से ‘आप’ और उपराज्यपाल के बीच बढ़ सकता है टकराव
नई दिल्ली, 08 अगस्त : संसद में दिल्ली सेवा विधेयक सोमवार को पारित हो गया और इसी के साथ दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार और उपराज्यपाल के बीच नए सिरे से टकराव का मंच तैयार हो गया है। राज्यसभा ने 102 के मुकाबले 131 मतों से ‘दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन संशोधन विधेयक 2023’ को मंजूरी दे दी है। लोकसभा में यह गत बृहस्पतिवार को पारित हो चुका है। गृह मंत्री अमित शाह ने यह विवादास्पद विधेयक संसद में पेश किया और कहा कि इस विधेयक का मकसद राष्ट्रीय राजधानी के लोगों के हितों की रक्षा करना है। यह विधेयक दिल्ली में समूह-ए के अधिकारियों के स्थानांतरण एवं पदस्थापना के लिए एक प्राधिकार के गठन के लिहाज से लागू अध्यादेश का स्थान लेगा। बहरहाल, इस मामले पर अब भी तलवार लटकी है क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली में शासन पर संसद की शक्तियों का अध्ययन करने के लिए पिछले महीने एक संविधान पीठ गठित की थी जिसने अभी तक अपना फैसला नहीं दिया है। राज्यसभा में यह विधेयक पारित होने के तुरंत बाद, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह भारत के लोकतंत्र के लिए ‘काला दिन’ है और उन्होंने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर पिछले दरवाजे से सत्ता ‘हथियाने’ की कोशिश करने का आरोप लगाया। एक ओर केंद्र तथा उपराज्यपाल तथा दूसरी ओर दिल्ली में निर्वाचित ‘आप’ सरकार के बीच सत्ता संघर्ष की जड़ 21 मई 2015 को गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना है जिसमें उपराज्यपाल को नौकरशाहों के तबादले तथा तैनातियों से जुड़े दिल्ली सरकार के ”सेवा” मामलों पर निर्णय लेने का अधिकार दिया गया था। यह अधिसूचना केजरीवाल के 14 फरवरी 2015 को दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के करीब दो महीने बाद जारी की गयी थी जिसे ‘आप’ सरकार ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी। तब से पिछले आठ साल से उपराज्यपाल कार्यालय तथा ‘आप’ सरकार के बीच शिक्षकों के प्रशिक्षण, निशुल्क योग कक्षाएं देने, डीईआरसी चेयरमैन की नियुक्ति, मुख्यमंत्री तथा मंत्रियों की विदेश यात्राओं, सरकार द्वारा भर्ती किए गए 400 से अधिक विशेषज्ञों को हटाने तथा मोहल्ला क्लिनिक के वित्त पोषण समेत कई मुद्दों पर टकराव जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि गृह मंत्रालय की अधिसूचना से पहले दिल्ली के ”सेवा” विभाग पर नियंत्रण ”अस्पष्ट” था। दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव पी.के त्रिपाठी ने कहा, ”अधिकारियों के तबादलों तथा तैनाती पर उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच एक तरह की समझ बनी हुई थी। आयुक्त तथा शीर्ष स्तर के अधिकारियों के तबादले तथा तैनाती उपराज्यपाल ही करते थे जबकि मुख्यमंत्री अन्य अधिकारियों के मामलों में अपनी राय रखते थे। अगर कोई मतभेद होता था तो उसे दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए सुलझा लिया जाता था।” दिल्ली सरकार में अधिकारियों के एक वर्ग को लगता है कि नए कानून से प्रदेश में निर्वाचित सरकार तथा केंद्र के बीच चल रहा झगड़ा खत्म हो जाएगा जिससे संवैधानिक प्राधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में स्पष्टता आएगी। ‘आप’ के एक नेता ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि इस विधेयक से दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच मतभेदों को हल करने में कोई मदद नहीं मिलेगी।
दिल्ली के एम्स में लगी आग, खोज अभियान जारी
नई दिल्ली, 07 अगस्त : राष्ट्रीय राजधानी के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में सोमवार को आग लगने के बाद अस्पताल के कर्मचारियों और मरीज़ों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। दिल्ली अग्निशमन विभाग (डीएफएस) के अनुसार आग राजकुमारी अमृत कौर ओपीडी इमारत की दूसरी मंज़िल पर लगी थी। अस्पताल के आपातकालीन वार्ड से आग लगने की सूचना मिली। डीएफएस ने कहा कि आठ अग्निशमन गाड़ियां मौके पर पहुंची और आग पर काबू पा लिया गया। घटनास्थल पर मौजूद कई लोगों को बाहर निकाल लिया गया है। शीतलन प्रक्रिया और खोज अभियान जारी है।
सीएम नीतीश के उत्तर प्रदेश से लोकसभा चुनाव लड़ने की अटकलों को लेकर बिहार में राजनीतिक बयानबाजी शुरू
पटना, 04 अगस्त : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित उत्तर प्रदेश से लोकसभा चुनाव लड़ने की ताजा अटकलों को लेकर राज्य में सत्तारूढ़ महागठबंधन और यहां के विपक्षी दल के बीच राजनीतिक तकरार शुरू हो गई है। बिहार के मंत्री और उत्तर प्रदेश के लिए जनता दल (यूनाइटेड) (जद-यू) के प्रभारी श्रवण कुमार के हाल में कहा था कि ऐसी ‘‘मांगें’’ उठ रही हैं कि पार्टी प्रमुख पड़ोसी राज्य से चुनाव मैदान में उतरें। इसके बाद कुमार के उत्तर प्रदेश से लोकसभा चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हो गईं। श्रवण कुमार का कहना है कि ‘‘मैं हाल में जौनपुर में था और वहां बहुत मांग थी कि माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से लोकसभा चुनाव लड़ने पर विचार करें।’’ कैबिनेट के सबसे वरिष्ठ सदस्य और पूर्व राज्य जदयू अध्यक्ष बिजेंद्र यादव ने पार्टी कार्यालय में संवाददाताओं से कहा, ‘‘न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि कई अन्य राज्यों में हमारी इकाइयां चाहती हैं कि मुख्यमंत्री वहां से चुनाव लड़ें। बेशक, इस बारे में पार्टी नेता को निर्णय लेना है।’’ नीतीश ने पिछले साल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से नाता तोड़ लिया था और 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को हराने की मुहिम में लगे हुए हैं। उनके बारे में अटकलें जोरों पर हैं कि वह पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सीट के रूप में प्रसिद्ध फूलपुर से चुनाव लड़ सकते हैं। यह संसदीय सीट के तहत प्रयागराज शहर का एक बड़ा हिस्सा आता है और वहां कुर्मी जाति की एक बड़ी आबादी है, जिससे कुमार संबंधित हैं और यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी से लगभग 100 किलोमीटर दूर है। श्रवण कुमार ने कहा, ‘‘यह सिर्फ फूलपुर नहीं है। हाल में उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान मुझे एहसास हुआ कि फतेहपुर और प्रतापगढ़ समेत कई अन्य सीटें हैं, जहां हमारी पार्टी चाहती है कि मुख्यमंत्री लड़ें। उन्हें लगता है कि इससे माहौल बनेगा।’’ बिहार में जदयू की सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रवक्ता शक्ति यादव से जब यह पूछा गया कि वह नीतीश के उत्तर प्रदेश से चुनाव लड़ने के बारे में क्या सोचते हैं, तो उन्होंने कहा, ‘‘अगर उस राज्य के लोग चाहते हैं, तो उन्हें ऐसा करना चाहिए। यह बिहार के लिए गर्व की बात है कि हमारे नेता की लोकप्रियता बिहार की सीमाओं से परे है।’’ इस सीट का नेहरू से जुड़ाव रहा है और उनकी मृत्यु के बाद विजय लक्ष्मी पंडित ने यहां से जीत दर्ज की थी लेकिन अब फूलपुर कांग्रेस की पकड़ से निकल चुकी है और आखिरी बार 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या से उत्पन्न लहर के समय पार्टी ने इस सीट से जीत हासिल की थी। बिहार में जदयू की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी कांग्रेस के बिहार विधानसभा में विधायक दल के नेता शकील अहमद खान से नीतीश के फूलपुर से चुनाव लड़ने की अटकलों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘क्यों नहीं? जब गुजरात का कोई व्यक्ति वाराणसी से चुनाव लड़ सकता है और जीत सकता है, तो हम उत्तर प्रदेश के बहुत करीब हैं।’’ नीतीश के उत्तर प्रदेश से चुनाव लड़ने की चर्चा से नाराज दिख रही भाजपा के नेताओं ने इसे लेकर जदयू के शीर्ष नेता पर निशाना साधा। बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता विजय कुमार सिन्हा और भाजपा की बिहार इकाई के प्रमुख सम्राट चौधरी ने अलग-अलग कड़े शब्दों में बयान दिए और आरोप लगाया कि नीतीश अपने घरेलू क्षेत्र में अपनी लोकप्रियता खो चुके हैं और अगर वह पड़ोसी राज्य में जाते हैं तो उन्हें अपमान का सामना करना पड़ेगा। भाजपा के दोनों नेताओं ने नीतीश की पार्टी जदयू पर फूलपुर के ‘‘जातीय अंकगणित’’ के दृष्टिकोण से सोचने का भी आरोप लगाया।