नई दिल्ली, 11 मई: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर यहां प्रगति मैदान में आयोजित एक कार्यक्रम का उद्घाटन किया और 5,800 करोड़ रुपये से अधिक की कई वैज्ञानिक परियोजनाओं की आधारशिला रखी। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के 25वें वर्ष के समारोह के प्रारंभ का प्रतीक है जिसका आयोजन 11 से 14 मई तक किया गया है। प्रधानमंत्री ने जिन परियोजनाओं की आधारशिला रखी, उनमें लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रैविटेशनल वेव ऑब्जर्वेटरी-इंडिया (एलआईजीओ-इंडिया), होमी भाभा कैंसर अस्पताल और अनुसंधान केंद्र, जतनी, ओडिशा और टाटा मेमोरियल अस्पताल के मुंबई का प्लैटिनम जुबली ब्लॉक शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने हाल के दिनों में भारत में की गई वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति को दर्शाने वाले एक्सपो का उद्घाटन भी किया। उन्होंने एक स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया। महाराष्ट्र के हिंगोली में विकसित होने वाला एलआईजीओ-इंडिया विश्व में गिने-चुने लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रैविटेशनल वेव ऑब्जर्वेटरी में से एक होगा। यह चार किलोमीटर लंबी भुजा का एक अत्यंत संवेदनशील इंटरफेरोमीटर है, जो ब्लैक होल तथा न्यूट्रन सितारों जैसे बड़े स्तर पर खगोल भौतिकी वस्तुओं के विलय के दौरान उत्पन्न गुरुत्वाकर्षण तरंगों की सेंसिंग में सक्षम है। एलआईजीओ-इंडिया अमेरिका में संचालित दो ऐसी वेधशालाओं के साथ सिंक्रोनाइजेशन में काम करेगा। इनमें से एक हैनफोर्ड वाशिंगटन में और दूसरी लिविंगस्टन, लूईसियाना में है। प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को समर्पित की गई परियोजनाओं में फिशन मोलिब्डेनम-99 उत्पादन सुविधा, मुंबई, रेयर अर्थ परमानेंट मैगनेट प्लांट, विशाखापत्तनम, नेशनल हैड्रॉन बीम थैरेपी सुविधा, नवी मुंबई, रेडियोलॉजिकल रिसर्च यूनिट, नवी मुंबई, होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, विशाखापत्तनम तथा वूमन एंड चिल्ड्रेन हॉस्पिटल बिल्डिंग, नवी मुंबई शामिल हैं। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के इस वर्ष के समारोह में अटल इनोवेशन मिशन पर विशेष ध्यान दिया गया है। अटल इनोवेशन मिशन पैवेलियन में कई नवीन परियोजनाओं का प्रदर्शन किया जाएगा और आगंतुकों को नवाचार सत्र देखने, अनुसंधान गतिविधियों में शामिल होने, स्टार्टअप्स के उत्कृष्ट नवाचारों और उत्पादों को देखने का अवसर मिलेगा। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1999 में भारत के वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी विकास के लिए काम करने वाले और मई 1998 में पोकरण में परमाणु परीक्षण की सफलता सुनिश्चित करने वाले भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों तथा टेक्नोलॉजिस्टों को सम्मानित करने के लिए प्रारंभ किया था। तब से प्रत्येक वर्ष 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाता है। इसे प्रत्येक वर्ष नए और भिन्न विषय के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष का विषय है, ‘‘स्कूल टू स्टार्टअप्स-इग्नाइट यंग माइंड्स टू इनोवेट’’ है।
ठाकरे-शिंदे मामला: सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट का मामला बड़ी बेंच को सौंपा
नई दिल्ली, 11 मई : सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट का मामला सात जजों की बड़ी बेंच को सौंप दिया है। 2022 के महाराष्ट्र राजनीतिक संकट को लेकर शिवसेना के उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे धड़ों की ओर की याचिकाएं दायर की गई थीं। इसी को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि सदन के स्पीकर द्वारा शिंदे गुट की ओर से प्रस्तावित स्पीकर गोगावले को चीफ व्हिप नियुक्त करना अवैध फैसला था। कोर्ट ने कहा कि स्पीकर को सिर्फ राजनीतिक दल की ओर से नियुक्त व्हिप को ही मान्यता देनी चाहिए थी। राज्यपाल पर कोर्ट ने क्या कहा? इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल की भूमिका पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल के पास विधानसभा में फ्लोर टेस्ट बुलाने के लिए कोई पुख्ता आधार नहीं था। फ्लोर टेस्ट को किसी पार्टी के आंतरिक विवाद को सुलझाने के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि राज्यपाल के पास ऐसा कोई संचार नहीं था जिससे यह संकेत मिले कि असंतुष्ट विधायक सरकार से समर्थन वापस लेना चाहते हैं। राज्यपाल ने शिवसेना के विधायकों के एक गुट के प्रस्ताव पर भरोसा करके यह निष्कर्ष निकाला कि उद्धव ठाकरे अधिकांश विधायकों का समर्थन खो चुके हैं। गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने 17 फरवरी को महाराष्ट्र राजनीतिक संकट से संबंधित याचिकाओं को सात-सदस्यीय संविधान पीठ के सुपुर्द करने का आग्रह ठुकरा दिया था। क्या है मामला? चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-सदस्यीय संविधान पीठ महाराष्ट्र के उस राजनीतिक संकट से जुड़ी याचिकाओं पर फैसला दिया है, जिसकी वजह से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली तत्कालीन महा विकास आघाड़ी (एमवीए) गठबंधन सरकार गिर गई थी। इस संविधान पीठ में जस्टिस एमआर शाह, जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा भी शामिल हैं। संविधान पीठ ने 16 मार्च, 2023 को संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में अंतिम सुनवाई 21 फरवरी को शुरू हुई थी और नौ दिनों तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था। सुनवाई के आखिरी दिन क्या बोली थी संविधान पीठ? शीर्ष अदालत ने सुनवाई के अंतिम दिन आश्चर्य व्यक्त किया था कि वह उद्धव ठाकरे की सरकार को कैसे बहाल कर सकती है, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सदन में बहुमत परीक्षण का सामना करने से पहले ही इस्तीफा दे दिया था। ठाकरे गुट ने सुनवाई के दौरान न्यायालय से आग्रह किया था कि वह 2016 के अपने उसी फैसले की तरह उनकी सरकार बहाल कर दे, जैसे उसने अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री नबाम तुकी की सरकार बहाल की थी। किस पक्ष से किसने लड़ा केस? ठाकरे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और देवदत्त कामत के साथ वकील अमित आनंद तिवारी ने शीर्ष अदालत के समक्ष पक्ष रखा था। दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे गुट का की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल, हरीश साल्वे, महेश जेठमलानी और अधिवक्ता अभिकल्प प्रताप सिंह ने पक्ष रखा था। वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता राज्य के राज्यपाल कार्यालय की ओर से पेश हुए।
कर्नाटक चुनाव 2023 : एग्जिट पोल में कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर
नई दिल्ली, 10 मई : कर्नाटक की 224 सदस्यीय विधानसभा के लिए बुधवार को हुए मतदान के एग्जिट पोल के प्रारंभिक अनुमानों में सत्तारूढ भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर दिखायी गयी है और ऐसे में जनता दल एस की भूमिका महत्वपूर्ण होती दिख रही है। मतदान के ठीक बाद प्रसारित पांच एजेन्सियों के एग्जिट पोल में किसी भी पार्टी के पक्ष में किसी बड़ी लहर का रूझान नहीं दिखा है और जहां दो एग्जिट पोल में भाजपा को कामचलाऊ बहुमत के करीब दिखाया गया है वहीं एक में कांग्रेस बहुमत का आंकड़ा पार करती दिख रही है। इन सर्वेक्षणों में भाजपा को 79 से 117 के बीच, कांग्रेस को 86 से 118 और जनता दल एस को 14 से 33 के बीच सीटें मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया है। न्यूज नेशन-सीजीएस ने भाजपा को 114, कांग्रेस तथा सहयोगी दलों को 86 और जद एस को 21 तथा अन्य को तीन सीटें दी हैं। रिपब्लिक टी वी- पी मार्क के सर्वे में भाजपा को 85 से 100, कांग्रेस को 94 से 108, जद एस को 24 से 32 तथा अन्य को 2 से 6 सीटें मिलने का अनुमान व्यक्त किया है। सुर्वण न्यूज- जन की बात के पोल में भाजपा को 94 से 117, कांग्रेस को 91 से 106, जद एस को 14 से 24 और अन्य को 0 से 2 सीटों पर सफल होते दिखा गया है। टीवी 9 भारत वर्ष- पोल स्ट्रेट का अनुमान है कि भाजपा को 88 से 98, कांग्रेस को 99 से 109, जद एस 21 से 26 और अन्य 0 से 4 सीट पा सकते हैं। जी न्यूज-मेट्रिज एजेन्सी के सर्वे में भाजपा को 79 से 94, कांग्रेस 103 से 118, जद एस 25 से 35 सीटों पर अन्य 2 से 5 सीटों पर विजयी होते दिख रहे हैं। कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने अलग अलग बयानों में अपनी अपनी पार्टियों की बड़ी जीत का दावा किया है। मतगणना 13 मई को होगी। अंतिम समाचार मिलने तक करीब 66 प्रतिशत मतदाताओं के अपने अधिकार का इस्तेमाल करने की रिपोर्ट है।
प्रधानमंत्री मोदी कल करेंगे, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर कार्यक्रम का उद्घाटन
नई दिल्ली, 10 मई : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुरुवार को प्रगति मैदान में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2023 को चिह्नित करने वाले एक कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बुधवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री 11 मई को सुबह 10:30 बजे प्रगति मैदान में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2023 के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के 25वें वर्ष के उत्सव की शुरुआत को भी चिन्हित करेगा, जो 11 से 14 मई तक आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी 5,800 करोड़ रुपये से अधिक की वैज्ञानिक और तकनीकी उन्नति से संबंधित कई परियोजनाओं का शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पित करेंगे। वह लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल वेव ऑब्जर्वेटरी -इंडिया (एलआईजीओ-इंडिया) की आधारशिला भी रखेंगे। यह दुनिया में मुट्ठी भर लेजर इंटरफेरोमीटर गुरुत्वाकर्षण तरंग वेधशालाओं में से एक होगी। प्रधानमंत्री मोदी वर्चुअल माध्यम से ‘दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबक संयंत्र, विशाखापत्तनम’ राष्ट्र को समर्पित करेंगे। भारत रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट बनाने की क्षमता वाले चुनिंदा देशों के समूह में शामिल होगा। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ‘नेशनल हैड्रॉन बीम थेरेपी फैसिलिटी’ और ‘फिशन मोलिब्डेनम-99 प्रोडक्शन फैसिलिटी’ को भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इन सुविधाओं से देश में कैंसर के उपचार और उन्नत मेडिकल इमेजिंग की क्षमता बढ़ेगी।
अदालत ने कुश्ती महासंघ अध्यक्ष के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों पर मांगी रिपोर्ट
नई दिल्ली, 10 मई : दिल्ली की एक अदालत ने भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों में दर्ज प्राथमिकियों पर बुधवार को दिल्ली पुलिस से स्थिति रिपोर्ट मांगी। अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट हरजीत सिंह जसपाल ने प्रदर्शनकारी पहलवानों की याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। याचिका में मांग की गयी है कि जांच की निगरानी की जाए और कथित पीड़ितों के बयान अदालत के समक्ष दर्ज कराये जाएं। इसमें दावा किया गया है कि 28 अप्रैल को प्राथमिकियों के दर्ज होने के बाद से पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है। अदालत ने पुलिस को 12 मई तक रिपोर्ट दाखिल करने को कहा, जब वह मामले में आगे सुनवाई करेगी। याचिका में दावा किया गया, ‘‘पुलिस कोई जांच करने को तैयार नहीं है। पुलिस ने अदालत के समक्ष पीड़ितों के बयान तक दर्ज नहीं किये हैं।’’ बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दोनों प्राथमिकियों की प्रतियां भी सीलबंद लिफाफे में अदालत में पेश की गयीं। एक प्राथमिकी एक नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में ‘यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण’ (पॉक्सो) कानून के तहत दर्ज की गयी है, वहीं दूसरी अन्य शिकायतकर्ताओं के यौन उत्पीड़न के आरोपों में दर्ज की गयी है। महिला पहलवानों ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था जिसके बाद 28 अप्रैल को इस मामले में दो प्राथमिकी दर्ज की गयी थीं। याचिकाकर्ताओं के वकील ने दावा किया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के मद्देनजर प्राथमिकी दर्ज होने के 24 घंटे के भीतर पीड़ितों के बयान अदालत में दर्ज होने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि प्राथमिकियों के दर्ज होने के तीन दिन बाद बयान दर्ज किये गये। वकील ने दावा किया कि आरोप है कि खेल मंत्रालय में एक अधिकारी ने एक पीड़ित पहलवान के पति को बुलाया था और मामले को निपटाने के लिए कहा था। वकील का यह भी आरोप है कि एक राज्य कुश्ती संघ के अधिकारी ने एक पीड़िता के कोच और परिवार से संपर्क साधकर मामले के निस्तारण का प्रयास किया था। वकील ने दावा किया, ‘‘उस व्यक्ति ने कहा कि लड़कियों ने गलती की है। उन्होंने कहा कि नेताजी से मिल लीजिए, वह मामले को हल करा देंगे।’’ भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग को लेकर देश के कुछ नामचीन पहलवान 23 अप्रैल से यहां जंतर मंतर पर धरना दे रहे हैं। इनमें बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट शामिल हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने श्रीनाथजी मंदिर में दर्शन के बाद जनसभा को किया संबोधित
राजस्थान/नाथद्वारा, 10 मई : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि केन्द्र सरकार ने आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करते हुए देश में अर्थव्यवस्था को एक नई गति दी है लेकिन कुछ लोग विकृत विचारधारा के शिकार हो चुके है और इतनी नकारात्मकता से भरे हुए है कि देश में कुछ भी अच्छा होता हुआ वे देखना ही नहीं चाहते। श्री मोदी आज यहां श्रीनाथजी मंदिर में दर्शन के बाद जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि अब उन्हें सिर्फ विवाद खड़ा करना ही अच्छा लगता है। कुछ लोग उपदेश देते है कि आटा पहले कि डाटा पहले, सड़क पहले कि सेटेलाइट पहले लेकिन इतिहास गवाह है कि स्थाई एवं तेज विकास के लिए मूल व्यवस्थाओं के साथ ही आधुनिक इन्फ्रा बनाना भी जरुरी होता है। उन्होंने कहा कि जो लोग कदम कदम पर हर चीज वोट के तराजू से तोलते है, वह देश के भविष्य को ध्यान में रखकर योजना नहीं बनाते। कई बार देखते है गांव में पानी टंकी चार- पांच साल में ही छोटी पहड़ जाती है। सड़के एवं फ्लाई ओवर चार-पांच साल में ही अपर्याप्त होने लगते है। हमारे देश में इसी सोच ने इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण को प्राथ्मिकता नहीं दी है इसका बहुत बड़ा नुकसान देश ने उठाया है। अगर पहले ही मेडिकल कालेज बन गये होते तो आज चिकित्सकों की की कमी नही होती। उन्होंने कहा कि रेलवे लाइनों का बिजलीकरण हो गया तो आज इसके लिए हजारो करोड़ रुपए खर्च कर काम करने की जरुरत नही होती। उन्होंने कहा कि अगर पहले ही हर घर तक नल से जल आता तो आज साढ़े तीन लाख करोड़ का जलजीवन मिशन शुरु नहीं करना पड़ता। प्रधानमंत्री ने कहा कि नकारात्मकता से भरे हुए लोग राजनीति से ऊपर उठकर कुछ नहीं सोच सकते हैं। उन्होंने कहा कि नाथद्वारा के नंद समंद बांध एवं टांटोड़ बांध नहीं बने होते तो क्या होता। उन्होंने लाखा बंजारा का जिक करते हुए कहा कि लाखा बंजारा का नाम बार बार आता है, पानी के लिए लाखा बंजारा ने अपना जीवन खपा दिया। हालात यह है कि इतना काम करने वाले और पानी की समस्या का समाधान करने वाले लाखा बंजारा अगर आज चुनाव में खड़ा हो जाये तो नकारात्मक सोच वाले उसे भी हराने के लिए मैदान में आ जायेंगे। उसके लिए भी पार्टियों को इक्कट्ठा करेंगे।
पश्चिम बंगाल में ‘द केरला स्टोरी’ रोक के खिलाफ याचिका पर 12 मई को सुनवाई
नई दिल्ली, 10 मई : उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को फिल्म ‘‘द केरला स्टोरी’’ के निर्माताओं की उस याचिका पर 12 मई को सुनवाई के लिए सहमति जताई, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा फिल्म के प्रदर्शन पर रोक के फैसले को चुनौती दी गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की पीठ के समक्ष तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए मामले का उल्लेख किया। साल्वे ने कहा कि याचिका पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा फिल्म के प्रदर्शन पर पाबंदी और तमिलनाडु में फिल्म के प्रदर्शन पर रोक को चुनौती देती है। पहले पीठ ने कहा कि उसने मंगलवार को फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार करने वाले केरल उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ एक अलग याचिका पर 15 मई को सुनवाई करना तय किया है और उस दिन इस याचिका पर भी सुनवाई की जाएगी। साल्वे ने कहा, ‘‘हमारा रोजाना आर्थिक नुकसान हो रहा है।’’ इस पर पीठ ने याचिका पर 12 मई को सुनवाई के लिए सहमति जताई। गत शुक्रवार को रिलीज हुई ‘द केरला स्टोरी’ में अभिनेत्री अदा शर्मा मुख्य भूमिका में हैं।
कर्नाटक विधानसभा की 224 सीटों पर शांतिपूर्ण मतदान शुरू
बेंगलुरु, 10 मई: कर्नाटक विधानसभा की 224 सीटों के लिए बुधवार सुबह सात बजे मतदान शुरू हो गया। शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान के लिए सभी तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गयी हैं। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में पांच करोड़ 31 लाख 33 हजार 54 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। राज्य में कुल 58,545 मतदान केन्द्र बनाए गए हैं और जहां मतदाता 2615 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर बटन दबाकर करेंगे। कुल 2615 उम्मीदवारों में से 2430 पुरुष और 184 महिला तथा एक उभयलिंगी प्रत्याशी है। इस बार के मतदान में 11 लाख 71 हजार 558 युवा मतदाता पहली बार अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। कुल मतदाताओं में से पांच लाख 71 हजार 281 दिव्यांगजन हैं और 12 लाख 15 हजार 920 ऐसे मतदाता हैं, जिनकी उम्र 80 वर्ष से अधिक है। मतदान के दौरान 76,202 वोटर वेरीफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) का इस्तेमाल किया जाना है। राज्य में विधानसभा चुनाव को शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए भारी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बलों की व्यवस्था की गयी है। चुनाव आयोग ने मतदान में फर्जी वोटिंग पर अंकुश लगाने और लंबी कतार से बचने के लिए खास तैयारी की है। आयोग कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के एक मतदान केंद्र में चेहरे की पहचान के लिए तकनीक का इस्तेमाल करेगा। किसी भी चुनाव में इस तरह की तकनीक को पहली बार उपयोग में लाया जाएगा। इस बार राज्य विधान सभा चुनाव में भाजपा, कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। मतदान शाम छह बजे तक चलेगा।
जंतर मंतर पहलवानों को धरने का 17वां दिन, पूरा इलाका छावनी में तब्दील
नई दिल्ली, 09 मई : राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर पहलवानों को धरना देते हुए 16 दिन हो चुके हैं। पहलवानों के धरना प्रदर्शन का आज 17वां दिन है। पुलिस ने आज पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिस प्रकार से कल कुछ किसान प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग को तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश की थी। उसी को ध्यान में रखते हुए आज सुरक्षा बढ़ाई गई है। दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों की संख्या बढ़ाई गई है। बैरिकेट्स को वेल्डिंग मशीन से सील कर दिया गया है। जिससे वह अपनी जगह से हील न सकें। उल्लेखनीय है कि जंतर मंतर पर पहलवानों का धरना प्रदर्शन 23 अप्रैल को शुरू हुआ था। पहलवानों का कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, तब तक वो ऐसे ही धरने पर बैठे रहेंगे। इसके अलावा अब किसान भी पहलवानों के समर्थन में उतर आए हैं। वहीं किसानों का कहना है कि 11 मई को देशभर में कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह का पूतला फूंकेंगे। पहलवान लगातार बृजभूषण के खिलाफ कार्रवाई की बात कर रहे हैं।
जातीय गणना पर जल्द सुनवाई करने की अर्जी पटना उच्च न्यायालय ने की खारिज, बिहार सरकार को बड़ा झटका
पटना, 09 मई: पटना उच्च न्यायालय ने मंगलवार को जाति आधारित गणना के मामले की जल्द सुनवाई करने की बिहार सरकार की अर्जी खारिज कर दी। इसे नीतीश सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। पटना उच्च न्यायालय ने 4 मई को जाति आधारित गणना मामले पर सुनवाई करते हुए इस पर अंतरिम रोक लगाते हुए मामले को अगली सुनवाई 3 जुलाई को निर्धारित की है। इस मामले में बिहार सरकार ने शीघ्र सुनवाई की मांग करते हुए पटना उच्च न्यायालय के समक्ष एक आवेदन दिया था, जिसमें कहा गया था कि इसकी अहमियत को देखते हुए इस पर जल्द सुनवाई की अपील की थी। पटना उच्च न्यायालय ने मंगलवार को सरकार के आवेदन को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि इस मामले में कोई जल्दबाजी नहीं है और याचिकाओं पर केवल 3 जुलाई को सुनवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि 4 मई को राज्य में जाति आधारित गणना कराने के बिहार सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पटना उच्च न्यायालय ने अंतरिम आदेश में जाति आधारित गणना पर रोक लगा दी थी।