नई दिल्ली, 21 मई : जापान की अपनी सफल यात्रा के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने तीन देशों के दौरे के दूसरे चरण के लिए पापुआ न्यू गिनी के लिए रवाना हो गए। किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पापुआ न्यू गिनी की पहली यात्रा है। यह जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने दी। बागची ने बताया कि हिरोशिमा में प्रमुख भागीदारों के साथ दो दिनों के गहन द्विपक्षीय और बहुपक्षीय जुड़ाव के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने जापान की अपनी यात्रा समाप्त की। प्रधानमंत्री अब अपनी यात्रा के अगले चरण में पोर्ट मोरेस्बी पहुंचेंगे। वहां पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री उनकी अगवानी करेंगे। यहां उनका पूर्ण औपचारिक स्वागत किया जाएगा। आमतौर पर देश सूर्यास्त के बाद आने वाले किसी भी नेता का औपचारिक स्वागत नहीं करता है लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के लिए एक विशेष अपवाद के तौर पर उनका पूर्ण औपचारिक स्वागत किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी पोर्ट मोरेस्बी में 22 मई को पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे के साथ संयुक्त रूप से भारत-प्रशांत द्वीप समूह सहयोग मंच के तीसरे शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। पापुआ न्यू गिनी में प्रधानमंत्री मोदी के द्विपक्षीय कार्यक्रम होंगे। इसमें गवर्नर-जनरल सर बॉब डाडे और प्रधानमंत्री जेम्स मारपे के साथ बैठकें शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि 2014 में लॉन्च किए गए इस मंच में भारत और 14 प्रशांत द्वीप देश शामिल हैं। अर्थात इसमें फिजी, पापुआ न्यू गिनी, टोंगा, तुवालु, किरिबाती, समोआ, वानुअतु, नीयू, माइक्रोनेशिया के संघीय राज्य, मार्शल द्वीप समूह, कुक द्वीप समूह, पलाऊ, नाउरू और सोलोमन द्वीप शामिल हैं।
जी-7 शिखर सम्मेलन: मोदी ने किया हिरोशिमा शांति स्मारक संग्रहालय का दौरा
नई दिल्ली/हिरोशिमा, 21 मई : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिरोशिमा में जी-7 शिखर सम्मेलन में अन्य नेताओं के साथ शांति स्मारक संग्रहालय का दौरा किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने संग्रहालय में आगंतुक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। श्री मोदी सहित सभी नेताओं ने परमाणु बम के पीड़ितों के लिए बने स्मारक पर श्रद्धासुमन भी अर्पित किये। बाद में श्री मोदी ने ट्वीट कर कहा, “आज सुबह हिरोशिमा में शांति स्मारक संग्रहालय और हिरोशिमा शांति स्मारक पार्क गया।” यह स्मारक एवं संग्रहालय द्वितीय विश्व युद्ध में छह अगस्त 1945 में हिरोशिमा पर परमाणु बम हमले में जान गंवाने वाले लोगों की याद में बनाया गया है। यह संग्रहालय फरवरी 1951 में बना है।
कर्नाटक: सरकार के शपथ ग्रहण में एक मंच पर दिखे विपक्ष के बड़े नेता, एकजुटता का संदेश देने की कोशिश
बेंगलुरु, 20 मई: कर्नाटक में सिद्धरमैया और उनकी सरकार के मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह में विपक्ष के कई प्रमुख नेता नजर आए और यहां से विपक्षी एकजुटता का संदेश देने का प्रयास किया गया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धरमैया ने शनिवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वह दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं। सिद्धरमैया के साथ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डी के शिवकुमार ने भी शपथ ली, जो राज्य सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान खचाखच भरे श्री कांतीरवा स्टेडियम में सबकी निगाहें मंच पर इसलिए बार-बार जा रही थीं कि वहां देश के प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता और विपक्ष शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद थे। वे एक दूसरे से बड़ी गर्मजोशी से मिल रहे थे। विपक्षी नेताओं ने एक दूसरे का हाथ पकड़कर विजयी मुद्रा में ऊपर उठाया और एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की। कुछ ऐसा ही दृश्य पांच साल पहले बेंगलुरु में एच डी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में भी देखने को मिला था। शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और कांग्रेस के कई अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार, बिहार के मुख्यमंत्री एवं जनता दल (यूनाइटेड) के शीर्ष नेता नीतीश कुमार, बिहार के उप मुख्यमंत्री एवं राजद नेता तेजस्वी यादव, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एवं द्रमुक नेता एम के स्टालिन, झारखंड के मुख्यमंत्री और झामुमो नेता हेमंत सोरेन, नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के नेता फारूक अब्दुल्ला, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता महबूबा मुफ्ती, राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी, और कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इस समारोह में हिस्सा लिया। वामपंथी दलों के प्रमुख नेता भी इस शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित रहे। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, भाकपा महासचिव डी राजा और भाकपा (माले) के प्रमुख दीपांकर भट्टाचार्य ने भी इस समारोह में भाग लिया। इस शपथ ग्रहण समारोह में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शामिल नहीं हुईं। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने अपने दल की तरफ से लोकसभा में पार्टी की उप नेता काकोली घोष दस्तीदार को भेजा था। कांग्रेस ने इस समारोह में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती को आमंत्रित नहीं किया था। बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को भी आमंत्रित नहीं किया गया था। अगले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पिछले कुछ महीनों से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और जनता दल (यूनाइटेड) के शीर्ष नेता नीतीश कुमार विपक्षी एकजुटता का प्रयास कर रहे हैं। इस प्रयास के तहत खरगे कई विपक्षी नेताओं से बात और मुलाकात कर चुके हैं। दूसरी तरफ नीतीश कुमार भी कई विपक्षी नेताओं से मुलाकात कर एक मंच पर आने की सलाह दे चुके हैं। आने वाले दिनों में बिहार की राजधानी पटना में विपक्ष के प्रमुख नेताओं की एक बैठक हो सकती है। कर्नाटक में 224 सदस्यीय विधानसभा के लिए 10 मई को हुए चुनाव में कांग्रेस ने शानदार जीत हासिल करते हुए 135 सीट अपने नाम कीं, जबकि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा नीत जनता दल (सेक्युलर) ने क्रमश: 66 और 19 सीट जीतीं।
दूसरी बार सिद्धरमैया बने कर्नाटक के मुख्यमंत्री, शिवकुमार उप मुख्यमंत्री
बेंगलुरु, 20 मई: कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की शानदार जीत के एक सप्ताह बाद शनिवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता सिद्धरमैया ने प्रदेश मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वह दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं। सिद्धरमैया के साथ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डी के शिवकुमार ने भी शपथ ग्रहण की, जो राज्य सरकार में उप मुख्यमंत्री बने हैं। वहीं, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष जी परमेश्वर, एम बी पाटिल, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पुत्र प्रियंक खरगे, वरिष्ठ नेता के एच मुनियप्पा, के जे जॉर्ज, सतीश जार्कीहोली, रामालिंगा रेड्डी और बी जेड जमीर अहमद खान ने मंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने लोगों से खचाखच भरे श्री कांतीरवा स्टेडियम में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में सिद्धरमैया, शिवकुमार और अन्य नेताओं को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी में आयोजित हुआ। कांग्रेस ने इस समारोह के माध्यम से विपक्षी एकजुटता का संदेश देने का प्रयास किया। नई सरकार के शपथ के तत्काल बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि कैबिनेट की पहली बैठक में कांग्रेस की पांचों ‘गारंटी’ कानून का रूप ले लेंगी। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान सबकी निगाहें मंच पर इसलिए बार-बार जा रही थीं कि वहां देश के प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता और विपक्ष शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद थे। वे एक दूसरे से बड़ी गर्मजोशी से मिल रहे थे। विपक्षी नेताओं ने एक दूसरे का हाथ पकड़कर विजयी मुद्रा में ऊपर उठाया और एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की। कुछ ऐसा ही दृश्य पांच साल पहले बेंगलुरु में एच डी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में भी देखने को मिला था। शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और कांग्रेस के कई अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार, बिहार के मुख्यमंत्री एवं जनता दल (यूनाइटेड) के शीर्ष नेता नीतीश कुमार, बिहार के उप मुख्यमंत्री एवं राजद नेता तेजस्वी यादव, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एवं द्रमुक नेता एम के स्टालिन, झारखंड के मुख्यमंत्री और झामुमो नेता हेमंत सोरेन, नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के नेता फारूक अब्दुल्ला, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता महबूबा मुफ्ती, राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी, और कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इस समारोह में हिस्सा लिया। वामपंथी दलों के प्रमुख नेता भी इस शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित रहे। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, भाकपा महासचिव डी राजा और भाकपा (माले) के प्रमुख दीपांकर भट्टाचार्य ने भी इस समारोह में भाग लिया। कांग्रेस ने दक्षिण भारत के इस महत्वपूर्ण राज्य में सरकार गठन में सामाजिक समीकरण को साधने का प्रयास किया है। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया कुरुबा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और उप मुख्यमंत्री शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं। वहीं, परमेश्वर, मुनियप्पा और प्रियंक दलित समुदाय से संबंध रखते हैं, जबकि एम बी पाटिल लिंगायत समुदाय से आते हैं। खान मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और जॉर्ज का संबंध ईसाई समुदाय से है। जार्कीहोली अनुसूचित जनजाति समुदाय से आते हैं, जबकि रामालिंगा रेड्डी का संबंध रेड्डी जाति से है। कर्नाटक मंत्रिमंडल में मंत्रियों की स्वीकृत संख्या 34 है। फिलहाल मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री समेत कुल 10 सदस्य हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। शपथ ग्रहण के बाद खरगे ने कहा, ”हमने जो कहा है, उसे पूरा करेंगे, हम सभी पांच ‘गारंटी’ लागू करेंगे।” राहुल गांधी ने भी स्टेडियम में मौजूद लोगों को संबोधित किया। उन्होंने पार्टी की जीत के लिए प्रदेश की जनता का धन्यवाद करते हुए शनिवार को कहा कि दक्षिण भारत के इस राज्य ने ”नफरत के बाजार में मोहब्बत की लाखों दुकानें खोल दी हैं।” राहुल गांधी ने कहा कि कैबिनेट की पहली बैठक में कांग्रेस की ओर से दी गई पांचों ‘गारंटी’ कानून का रूप ले लेंगी। उन्होंने जनता से साफ-सुथरी और भ्रष्टाचार मुक्त सरकार देने का वादा किया। कर्नाटक के कद्दावर ओबीसी नेता 75 वर्षीय सिद्धरमैया इससे पहले मई 2013 से मई 2018 के बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। कभी जनता दल और जनता दल (सेक्युलर) का हिस्सा रहे सिद्धरमैया दो बार राज्य के उपमुख्यमंत्री के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं। पिछली विधानसभा में वह नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे थे। वहीं, कर्नाटक में कांग्रेस के संकटमोचक कहे जाने वाले 61 वर्षीय शिवकुमार पिछले लगभग तीन वर्षों से प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वह प्रदेश में कांग्रेस की पिछली कुछ सरकारों में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। कांग्रेस विधायक दल की बृहस्पतिवार को हुई बैठक में सिद्धरमैया को औपचारिक रूप से नेता चुना गया था, जिसके बाद उन्होंने राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया था। कर्नाटक में 224 सदस्यीय विधानसभा के लिए 10 मई को हुए चुनाव में कांग्रेस ने 135 सीट अपने नाम की थीं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा नीत जनता दल (सेक्युलर) ने क्रमश: 66 और 19 सीट हासिल की थीं।
जी-7 शिखर सम्मेलन: प्रधानमंत्री मोदी यूक्रेन और फ्रांस के राष्ट्रपति से मिले
हिरोशिमा/नई दिल्ली, 20 मई: प्रधानमंत्री नरेन्द्र माेदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन से इतर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमिर ज़ेलेन्स्की से द्विपक्षीय मुलाकात की और रूस यूक्रेन के बीच संघर्ष को समाप्त करने के लिए बातचीत एवं कूटनीतिक प्रयासों को भारत का समर्थन एवं यूक्रेन के लोगों को मानवीय सहायता देने की बात दोहरायी। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने यहां श्री ज़ेलेन्स्की के मुलाकात के बाद ट्वीट किया, “हिरोशिमा में राष्ट्रपति ज़ेलेन्स्की से मुलाकात की। हमने आगे का रास्ता खोजने के लिए बातचीत और कूटनीति के लिए भारत के स्पष्ट समर्थन से अवगत कराया। हम यूक्रेन के लोगों को मानवीय सहायता देना जारी रखेंगे।” श्री मोदी ने उन्हें 14 जुलाई को बैस्टिल दिवस के लिए सम्मानित अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के लिए राष्ट्रपति श्री मैक्रों को धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री ने भारत की जी-20 अध्यक्षता के लिए फ्रांस के समर्थन के लिए भी राष्ट्रपति श्री मैक्रों का आभार जताया।
उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में ‘द केरल स्टोरी’ पर लगा प्रतिबंध हटाया
नई दिल्ली, 18 मई : उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में ‘द केरल स्टोरी’ के प्रदर्शन पर प्रदेश सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को बृहस्पतिवार को हुई सुनवाई के दौरान हटाने का आदेश दिया। न्यायालय ने तमिलनाडु से फिल्म देखने जाने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। थियेटर मालिकों ने सुरक्षा चिंताओं के कारण फिल्म का प्रदर्शन रोकने का फैसला किया था। प्रधान न्यायाधीश डी.वाई.चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने ‘द केरल स्टोरी’ के निर्माता से 20 मई को शाम पांच बजे तक फिल्म में 32,000 हिंदू एवं ईसाई महिलाओं के इस्लाम में धर्मांतरण के दावों पर ‘डिस्क्लेमर’ देने को कहा। शीर्ष अदालत के अनुसार डिस्क्लेमर में यह कहा जाना चाहिए कि “धर्मांतरण के आंकड़े पर सुझाव का समर्थन करने के लिए कोई प्रमाणित आंकड़ा नहीं है और फिल्म काल्पनिक संस्करण का प्रतिनिधित्व करती है।” न्यायालय ने साथ ही कहा कि फिल्म को मिले प्रमाण-पत्र को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर निर्णय के लिये कार्यवाही से पहले वह ‘द केरल स्टोरी’ देखना चाहेगा। पीठ फिल्म को सीबीएफसी प्रमाणपत्र दिए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जुलाई के दूसरे हफ्ते में सुनवाई करेगी। पीठ में न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला भी शामिल हैं। पीठ ने इन दलीलों का भी संज्ञान लिया कि तमिलनाडु में फिल्म पर कोई प्रतिबंध नहीं है और राज्य सरकार से फिल्म देखने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा। न्यायालय ने कहा कि कानून का इस्तेमाल “सार्वजनिक असहिष्णुता को बढ़ावा देने” के लिए नहीं किया जा सकता है। फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से प्रमाण-पत्र प्राप्त है और कानून-व्यवस्था बरकरार रखना प्रदेश सरकार का दायित्व है। पीठ ने कहा, “खराब फिल्में बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलती हैं।” न्यायालय ने कहा, “कानून का इस्तेमाल सार्वजनिक असहिष्णुता को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जा सकता है, वरना सभी फिल्मों को लेकर ऐसी ही स्थिति पैदा होगी।” फिल्म के निर्माता की तरफ से न्यायालय में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि फिल्म को (सीबीएफसी से) प्रमाण-पत्र दिए जाने को लेकर राज्य अपील नहीं कर सकते। साल्वे ने कहा कि किसी ने भी फिल्म को प्रमाणन दिए जाने के खिलाफ कोई वैधानिक अपील दायर नहीं की है और अपनी दलीलों को पुष्ट करने के लिए निर्णयों का हवाला दिया कि यह माना गया था कि सर्वोच्च न्यायालय सीबीएफसी प्रमाणीकरण पर अपील को लेकर सुनवाई नहीं कर सकता है। शीर्ष अदालत फिल्म को लेकर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। निर्माता ने जहां पश्चिम बंगाल में इसके प्रदर्शन पर प्रतिबंध और तमिलनाडु में थिएटर मालिकों द्वारा राज्य में फिल्म नहीं दिखाने के फैसले को चुनौती दी है वहीं पत्रकार कुर्बान अली ने केरल उच्च न्यायालय के फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार करने के आदेश को चुनौती दी है। अदा शर्मा की मुख्य भूमिका वाली ‘द केरल स्टोरी’ पांच मई को रिलीज हुई थी। फिल्म का निर्देशन सुदीप्तो सेन ने किया है। फिल्म दावा करती है कि केरल में महिलाओं को इस्लाम अपनाने के लिये बाध्य किया गया और आतंकी समूह इस्लामिक स्टेट (आईएस) द्वारा उनकी भर्ती की गई।
जमीन के बदले नौकरी मामला : राबड़ी देवी पूछताछ के लिए ईडी के सामने पेश हुईं
नई दिल्ली, 18 मई: बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी जमीन के बदले नौकरी के कथित घोटाले से जुड़े धनशोधन के एक मामले में पूछताछ के लिए बृहस्पतिवार को यहां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष पेश हुईं। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद की पत्नी 68 वर्षीय राबड़ी देवी इस मामले में धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत अपना बयान दर्ज करा रही हैं। लालू के पुत्र, बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और सांसद बेटी मीसा भारती से हाल के दिनों में संघीय एजेंसी ने इस मामले में पूछताछ की है। धन शोधन का मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी से निकला है। ईडी ने कुछ समय पहले इस मामले में छापेमारी की थी और एक करोड़ रुपये की ”बेहिसाब नकदी” जब्त की थी तथा अपराध से अर्जित 600 करोड़ रुपये की आय का पता लगाया था। कथित घोटाला उस वक्त हुआ था जब लालू प्रसाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के पहले कार्यकाल में रेल मंत्री थे। एजेंसियों का आरोप है कि 2004-09 की अवधि के दौरान भारतीय रेलवे के विभिन्न जोन में समूह ‘डी’ के पदों पर विभिन्न व्यक्तियों को नियुक्त किया गया और इसके बदले संबंधित व्यक्तियों ने अपनी जमीन लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों को हस्तांतरित की थी।
जातीय जनगणना : न्यायमूर्ति करोल ने बिहार सरकार की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया
नई दिल्ली, 17 मई: उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश संजय करोल ने बुधवार को बिहार सरकार की ओर से दाखिल उस याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसमें राज्य में उसके (बिहार सरकार) द्वारा की जा रही जातीय जनगणना पर रोक लगाने के पटना उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई है। न्यायमूर्ति करोल को छह फरवरी 2023 को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था। उससे पहले, वह पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने कहा कि वह कुछ संबंधित मुकदमों में पक्षकार थे, जिन पर पहले उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई थी। शीर्ष अदालत की संबंधित पीठ ने इसके बाद याचिका को भारत के प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया, ताकि सुनवाई के लिए एक उपयुक्त पीठ का गठन किया जा सके। इस पीठ में न्यायमूर्ति बी आर गवई भी शामिल थे। पटना उच्च न्यायालय के चार मई के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में दायर याचिका में बिहार सरकार ने कहा है कि जातीय जनगणना पर रोक से पूरी कवायद पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। राज्य सरकार ने कहा है कि जाति आधारित डेटा का संग्रह अनुच्छेद 15 और 16 के तहत एक संवैधानिक जनादेश है। संविधान का अनुच्छेद 15 कहता कि राज्य धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के भी आधार पर किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव नहीं करेगा। वहीं, अनुच्छेद 16 कहता है कि राज्य सरकार के अधीन किसी भी कार्यालय में नियोजन या नियुक्ति के संबंध में सभी नागरिकों के लिए समान अवसर उपलब्ध होंगे। याचिका में बिहार सरकार ने दलील दी है, “राज्य ने कुछ जिलों में जातिगत जनगणना का 80 फीसदी से अधिक सर्वे कार्य पूरा कर लिया है और 10 फीसदी से भी कम काम बचा हुआ है। पूरा तंत्र जमीनी स्तर पर काम कर रहा है। विवाद में अंतिम निर्णय आने तक इस अभ्यास को पूरा करने से कोई नुकसान नहीं होगा।” उच्च न्यायालय ने विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह जाति-आधारित गणना को तुरंत रोक दे और यह सुनिश्चित करे कि पहले से ही एकत्र किए गए डेटा को सुरक्षित रखा जाए और अंतिम आदेश पारित होने तक किसी के साथ साझा न किया जाए। उच्च न्यायालय ने मामले में अगली सुनवाई के लिए तीन जुलाई की तारीख निर्धारित की है।
हिंडनबर्ग-अडानी समूह: सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए सेबी को दिया 14 अगस्त तक का समय दिया
नई दिल्ली, 17 मई : उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को अडानी समूह की कंपनियों की जांच पूरी करने के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) सेबी को 14 अगस्त तक का और समय दिया। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की पीठ ने जांच पूरी करने के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय देने की सेबी की गुहार ठुकरा दिया और उसे 14 अगस्त को एक अद्यतन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। पीठ ने सेबी की गुहार खारिज करते हुए कहा कि वह जांच को अनिश्चित समय तक नहीं बढ़ा सकती है। शीर्ष अदालत ने अपने द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे समिति द्वारा दायर रिपोर्ट की एक प्रति साझा करने का भी सेबी को निर्देश दिया। अमेरिकी रिसर्च कंपनी हिंडनबर्ग की 25 जनवरी की रिपोर्ट जारी होने के बाद बाजार नियामक सेबी द्वारा जांच शुरू हुई, जिसमें “लेखांकन धोखाधड़ी” और “स्टॉक हेरफेर” का आरोप लगाया गया था। अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने एक याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए कहा कि सेबी कई वर्षों से अडानी की जांच कर रही है। उन्होंने 2016 और फिर 2021 की जांच के निष्कर्षों को रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश देने की मांग की। श्री भूषण ने कहा, “संसद में कहा गया है कि वे अडानी की जांच कर रहे थे। उन्हें हमें बताना होगा कि उन जांचों में क्या हुआ है।” इस मामले के पक्षकार के रूप में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए अधिवक्ता विशाल तिवारी ने कहा कि सेबी ने उस अदालत को भी अवगत नहीं कराया है, जिसे जांच करने के लिए नियुक्त किया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 2016 की जांच का मुद्दा पूरी तरह से अलग है। सेबी ने सोमवार को अदालत के समक्ष कहा था कि यह आरोप कि वह 2016 से अडानी समूह की कंपनियों की जांच वह कर रहा है, “तथ्यात्मक रूप से निराधार” है।
झारखंड में पतरातू जल शोधन संयंत्र निर्माण कार्य का प्रधानमंत्री ने की सराहना
नई दिल्ली, 17 मई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड में पतरातू प्रखंड में जल शोधन संयंत्र का निर्माण कार्य पूरा होने की बुधवार को सराहना की और कहा है कि इससे उस इलाके में महिलाओं का जीवन आसान होगा। श्री मोदी ने इस संयंत्र के बारे में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद जयंत सिन्हा के ट्वीट को टैग करते हुए लिखा, “बहुत ही सराहनीय प्रयास! स्वच्छ पानी की यह सुविधा झारखंड में पतरातू की हमारी माताओं और बहनों के जीवन को बहुत आसान बनाने वाली है।” श्री सिन्हा ने इस संयंत्र के चित्रों के साथ ट्वीट किया, “रामगढ़ के पतरातु प्रखंड की पंचायतों में जलापूर्ति हेतु 50 करोड़ रुपये से वाटर फिल्टर प्लांट व जलमीनार के निर्माण का कार्य पूरा कर लिया गया है।” उन्होंने इसी ट्वीट में कहा है कि इससे उस क्षेत्र में अब जलापूर्ति में अत्यंत सुविधा होगी। उन्होंने लिखा है, ‘‘क्षेत्र में जलापूर्ति सुनिश्चित करने हेतु जलमीनर बनाने का काम युद्धस्तर पर जारी है।”