नई दिल्ली, 28 मई: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज यहां लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के साथ देश के नये संसद भवन को राष्ट्र को समर्पित किया और नई लोकसभा के सदन में पवित्र सेंगोल (राजदंड) को श्रद्धा के साथ प्रतिष्ठित किया। सुबह करीब साढ़े सात बजे श्री मोदी संसद भवन के परिसर में पहुंचे और श्री बिरला ने उनका स्वागत किया। सिल्क की धोती, कुर्ता एवं गुलाबी जैकेट पहने प्रसन्न मुद्रा में दिख रहे श्री मोदी ने सबसे पहले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित करके प्रणाम किया। इसके बाद वह श्री बिरला के साथ वहां हवन एवं धार्मिक अनुष्ठान में शामिल हुए। श्री मोदी ने इसके बाद तमिलनाडु के विभिन्न आदिनम से पधारे संतों द्वारा लाये गये सेंगोल को साष्टांग प्रणाम किया और फिर पांच आदिनम संतों के हाथों से श्रद्धापूर्वक ग्रहण किया और अपने स्थान पर चारों ओर परिक्रमा की। इसके बाद श्री मोदी ने आदिनम संतों से आशीर्वाद लिया और फिर श्री बिरला एवं आदिनम संतों के साथ वह नई लोकसभा के भीतर गये और लोकसभा अध्यक्ष के आसन के दाहिनी ओर पीछे एक कांच के केस में सेंगोल को स्थापित किया जिसे संप्रभुता, न्याय, शासन एवं शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन किया और पुष्पों से सेंगोल का पूजन किया। इस मौके पर आदिनम संत भी सदन में उपस्थित थे। इसके बाद श्री मोदी एवं श्री बिरला बाहर आये और फिर नये संसद के उद्घाटन पट्ट का अनावरण करके नये संसद भवन को लोकार्पित किया। इसके पश्चात उन्होंने निर्माण कार्य करने वाले श्रमिकों से भेंट की और उन्हें शाल एवं प्रतीक चिह्न प्रदान करके सम्मानित किया। इसके बाद सर्वधर्म प्रार्थना सभा में शिरकत की। बौद्ध, जैन, पारसी, सिख, इस्लाम, वैदिक आदि धर्मों के धर्मगुरुओं ने प्रार्थना की। इसके बाद श्री मोदी ने कार्यक्रम में आये मेहमानों से भेंट की और बातचीत की। कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अमित शाह, अश्विनी वैष्णव, अनुराग ठाकुर, डॉ जितेन्द्र सिंह, भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, शीर्ष अधिकारी आदि उपस्थित थे।
नये संसद भवन की ”कोई जरूरत नहीं”- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
पटना, 27 मई : नये संसद भवन के उद्घाटन का बहिष्कार करने के विपक्ष के आह्वान के बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को कहा कि नये संसद भवन की ”कोई जरूरत नहीं” है। उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा कि नया संसद भवन उन लोगों द्वारा इतिहास लिखने की कोशिश है जिनका स्वतंत्रता संघर्ष में कोई योगदान नहीं था। कुमार ने इस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को आमंत्रित नहीं किए जाने पर भी निराशा जतायी। कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) ने घोषणा की है कि वह रविवार को नये संसद भवन के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करेगी। पार्टी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नये संसद भवन के उद्घाटन के विरोध में उस दिन यहां एक दिन का अनशन करेगी। मुख्यमंत्री ने यहां पत्रकारों से कहा, ”नये संसद भवन की कोई जरूरत नहीं है।…देश के स्वतंत्रता संघर्ष में जिन लोगों का कोई योगदान नहीं था वे इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। यह काफी हैरान करने वाला है कि भारत के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को उद्घाटन समारोह में आमंत्रित नहीं किया गया है।” पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने शनिवार को यहां पत्रकारों से कहा, ”जद(यू) का दृढ़ विश्वास के साथ यह मानना है कि राष्ट्रपति देश की संसदीय प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। राष्ट्रपति के रूप में द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर हैं और नरेन्द्र मोदी सरकार को नये संसद भवन के उद्घाटन के लिए उन्हें आमंत्रित करना चाहिए था।”
दिल्ली-एनसीआर में तेज हवा के साथ भारी बारिश, तापमान में आई गिरावट
नई दिल्ली, 27 मई: राष्ट्रीय राजधानी और उसके आसपास के कई क्षेत्रों में शनिवार सुबह तेज हवा के साथ भारी बारिश हुई, जिससे न्यूनतम तापमान गिरकर 19.3 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया जो सामान्य से सात डिग्री नीचे दर्ज किया गया भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के मुताबिक अगले तीन से चार दिनों तक मौसम सुहाना रहने का अनुमान जताया है। घने बादल हरियाणा और आसपास के उत्तरी राजस्थान से दिल्ली की ओर होते हुए पश्चिम उत्तर प्रदेश की तरफ बढ़ रहे हैं और दिल्ली-एनसीआर को पार करने में दाे घंटे और लगेंगे। शनिवार को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की अनुमान है। राजधानी में शुक्रवार को अधिकतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री कम 34.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आगामी 30 मई तक दिल्ली में लू चलने की कोई स्थिति नहीं है। इस बीच राष्ट्रीय राजधानी में आज बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गयी। मौसम में आए अचानक बदलाव से उत्तर भारत में गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद जतायी गयी है। आज सुबह खराब मौसम होने के बाद राजधानी दिल्ली में विमानों की उडान सेवा भी प्रभावित हुई है। नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने एक परिपत्र भी जारी किया है जिसमें सभी यात्रियों को अद्यतन उड़ान जानकारी के लिए अपनी संबंधित एयरलाइनों से संपर्क करने की सूचना दी गई है। दिल्ली हवाई अड्डे के सूत्रों के अनुसार दिल्ली में मौसम खराब होने के कारण राष्ट्रीय राजधानी जाने वाली चार उड़ानों को जयपुर डायवर्ट किया गया है।
नीति आयोग की आठवीं बैठक में आठ मुख्यमंत्रियों का अनुपस्थित होना, दुर्भाग्यपूर्ण : भाजपा
नई दिल्ली, 27 मई: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की शासकीय परिषद की आज यहां हुई आठवीं बैठक में विपक्षी दल शासित आठ राज्यों के मुख्यमंत्रियों की अनुपस्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण, गैरजिम्मेदाराना और जनविरोधी बताते हुए आज कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि विपक्षी दल संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करते हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पार्टी के केन्द्रीय कार्यालय में आज यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आज नीति आयोग की बैठक में आठ मुख्यमंत्री नहीं आए। नीति आयोग देश के विकास और योजनाओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस बैठक के लिए 100 मुद्दे तय किए गए हैं, अब जो मुख्यमंत्री नहीं आए हैं वो अपने प्रदेश की जनता की आवाज यहां तक नहीं ला रहे हैं। उनसे सवाल है कि आखिर वे मोदी विरोध में कहां तक जाएंगे? श्री प्रसाद ने कहा कि भाजपा पर आरोप लगाया जाता है कि वह संस्थाओं का सम्मान नहीं करती है लेकिन इस आचरण से पता चलता है कि विपक्षी दल नीति आयोग जैसे संस्थानों की कितनी इज्ज़त करते हैं। वे उच्चतम न्यायालय पर टिप्पणी करते हैं, चुनाव आयोग पर टिप्पणी करते हैं। यानी उनके मनमाफिक ना हो तो सबकी आलोचना करेंगे। क्या इसी तरह से वे संस्थाओं का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने नई संसद के शिलान्यास का बहिष्कार किया और अब उद्घाटन का बहिष्कार किया। जब वे मोदी सरकार की हर पहल के लिए श्रेय लेने से नहीं चूकते हैं तो नई संसद के बारे में भी ऐसा कर सकते थे। आखिर 2026 तक सांसदों की संख्या बढ़नी है। तब उनके लिए नई संसद की जरूरत तो बहुत पहले से ही जतायी जा रही थी। उन्होंने कहा कि दरअसल यह प्रधानमंत्री श्री मोदी और भाजपा के प्रति उनकी चिढ़ है। उन्होंने कहा कि नीति आयोग राज्यों की सक्रिय भागीदारी के साथ राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं, क्षेत्रों और रणनीतियों की साझा दृष्टि विकसित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। यह संपूर्ण नीति-ढांचे और पूरे देश के विकास के रोड मैप के निर्धारण के लिए एक महत्वपूर्ण निकाय है। विशेष रूप से, प्रशासकीय परिषद की 8वीं बैठक में 100 मुद्दों पर बहस का प्रस्ताव है, और विपक्षी मुख्यमंत्रियों द्वारा इसका बहिष्कार करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके द्वारा इस आयोजन का बहिष्कार करने का नतीजा यह हो रहा है कि वे अपने राज्यों के लोगों की आवाज यहां नहीं ला पा रहे हैं। श्री प्रसाद ने कहा, “गवर्निंग काउन्सिल में महत्वपूर्ण चर्चा होती है, महत्वपूर्ण फैसले होते हैं और उसके बाद ये फैसले जमीन पर लागू होते हैं। लेकिन बावजूद इसके भी ये मुख्यमंत्री क्यों नहीं आ रहे? ये मुख्यमंत्री अपने प्रदेश की जनता का अहित क्यों कर रहे हैं? यह सब बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है, गैर जिम्मेदाराना है, जनविरोधी है।”
राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू रांची से दिल्ली रवाना, राज्यपाल समेत कई गणमान्य लोगों ने हवाई अड्डा से किया विदा
रांची, 26 मई: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रांची एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए रवाना हो गईं। राष्ट्रपति आज दिन के 11 बज कर 47 मिनट पर वायुसेना के विशेष विमान से रांची से दिल्ली के लिए उड़ान भरी। झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित कई गणमान्य लोगों ने राष्ट्रपति को रांची हवाई अड्डे से विदा किया। राष्ट्रपति ने हाथ हिलाकर सभी को जोहार बोलते हुए दिल्ली के लिए रवाना हुई। इससे पहले राष्ट्रपति से मिलने पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, विधायक अंबा प्रसाद, पूर्व मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, सांसद गीता कोड़ा, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, झामुमो के मुख्य प्रवक्ता सचिव सुप्रियो भट्टाचार्य, राजसभा सांसद समीर उरांव समेत कई नेता राजभवन पहुंचे थे। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति 24 मई को रांची आई थी। इस दौरान उन्होंने 24 मई को रांची में हाईकोर्ट का उद्घाटन किया। खूंटी में 25 मई को आयोजित महिला स्वयं सहायता सम्मेलन में 25 हजार महिलाओं के साथ संवाद की तथा रांची में ट्रिपल आईटी के दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं थी।
झारखंड के आदिवासी बाकी राज्यों के मुकाबले सशक्त है : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
रांची, 25 मई: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने खूंटी में आयोजित स्वयं सहायता महिला सम्मेलन में जोहार से अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि आदिवासी समाज में पैदा होना कोई बुराई नहीं है और मैं इसका उदाहरण हूं। राष्ट्रपति ने आज कहा कि मैं ओडिशा की हूं लेकिन खून झारखंड का है। मेरी दादी मंत्री जोबा मांझी के गांव की थी। जब छोटी थी तो मेरी दादी मुझे 5 किमी दूर महुआ चुनने ले जाती थी। जब खाना नहीं मिलता तो हमलोग महुआ उबालकर खाते थे। तब उसका और इस्तेमाल पता नहीं था लेकिन उसी महुआ से केक सहित कई उत्पाद बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब महिलाएं केवल धान की खेती पर निर्भर नहीं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद मैं कई राज्यों में घूमी हूं। महिलाओं से मिलती हूं। उन्होंने कहा कि झारखंड के आदिवासी बाकी राज्यों के मुकाबले सशक्त है। उन्होंने कहा कि आदिवासी अब प्रगति पथ पर हैं और मैं इस बात से काफी खुश हूं। मुख्यमंत्री के संबोधन का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि आदिवासी समाज को जितनी प्रगति करनी चाहिए थी शायद उतना नहीं हुआ इसलिए सीएम हेमंत सोरेन दुखी थे लेकिन मैं खुश हूं। झारखंड में एक बार को छोड़कर हर बार कोई आदिवासी ही मुख्यमंत्री बना। झारखंड 28 विधायक आदिवासी हैं। केंद्रीय मंत्री भी आदिवासी हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि झारखंड की महिला एवं बाल विकास मंत्री यहीं खूंटी की हैं। उन्होंने कहा कि महिला समूह ने जो उत्पाद बनाए हैं मैंने वह देखा। स्टॉल का निरीक्षण करने के दौरान मैंने महिलाओं में आत्मविश्वास देखा। मैंने उनमें अपनी झलक देखी। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं का स्वयं सहायता समूह के आर्थिक विकास और आदिवासियों की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समजा में जन्म लेना बुरी बात नहीं है। मेरी कहानी सबको पता है। मैं भी आदिवासी समाज से हूं। राष्ट्रपति ने कहा कि स्वयं सहायता समूह के जरिए महिलाएं सशक्त बन रही हैं। उन्होंने कहा कि मैं पहले स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के बीच जाती थी। एक बार एक महिला कंम्प्यूटर लेकर आई और मुझे सारी योजनाओं के बारे में बताया। मैंने उसकी शिक्षा के बारे में पूछा तो पता चला कि वह केवल 9वीं पास हैं। सोचिए, वह महिला तकनीकी योग्यता में कितनी आगे है। उन्होंने कहा कि मैं आदिवासी महिलाओं को देखकर खुश हो जाती हूं। उन्होंने कहा कि देश में 700 आदिवासी समुदाय हैं लेकिन उनमें 100 समुदाय काफी पिछड़े हैं। आदिवासियों को आगे आकर केंद्र सरकार की योजनाओं अगला का फायदा उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार 100 कदम बढ़ाती है तो समाज को भी 10 कदम आगे चलना होगा। राष्ट्रपति ने कहा कि आज पद्म पुरस्कार पाने वालों में आदिवासी महिलाओं की संख्या बढ़ी है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु आज बिरसा मुंडा स्टेडियम, खूंटी में आयोजित महिला स्वयं सहायता समूह सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं थी। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने स्वयं सहायता समूह की दीदियों द्वारा लगाए गए स्टॉल्स का भ्रमण किया और उनके साथ सीधा संवाद किया। सम्मेलन में राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन, मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, जनजातीय कार्य मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, जनजातीय कार्य मंत्रालय के माननीया केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह सरूता, झारखंड सरकार में मंत्री जोबा मांझी, विधायक कोचे मुंडा, विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा एवं विधायक विकास सिंह मुंडा एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री माननीय कड़िया मुंडा समेत कई गणमान्य उपस्थित रहे।
स्वयं सहायता समूह की महिलाएं गांवों को बनाएं रोजगार का केंद्र : अर्जुन मुंडा
खूंटी (झारखंड), 25 मई : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के झारखंड दौरे के दूसरे दिन गुरुवार को खूंटी में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की धरती पर राष्ट्रपति को पाकर हम सभी अत्यंत आह्लादित हैं। भारत सरकार के जनजातीय मंत्रालय के मंत्री के रूप में राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए अत्यंत प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है। आपके आगमन से हम सभी गौरवान्वित हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं सशक्त हों, यह मोदी सरकार की मंशा है। बेटी पढ़ाओ-बेटी बढ़ाओ के मूल मंत्र के साथ काम हो रहा है। मुंडा ने अपील किया कि महिलाएं गांवों को रोजगार का केंद्र बनायें। उन्होंने कहा कि सुदूर गांवों में रहने वाली महिलाओं को रोजगारोन्मुखी कार्यक्रमों से जोड़ने का काम चल रहा है। स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और जीवनयापन में कैसे वृद्धि हो यह मंत्रालय कर रहा है। हम इस अभियान को आंदोलन का रूप देंगे। भगवान बिरसा मुंडा आंदोलन के समय अंग्रेजों ने यहां के लोगों के हिसाब से कानून बनाने के लिए बाध्य किया, उन्हीं के आंदोलन के फलस्वरूप सीएनटी एक्ट बना। अर्जुन मुंडा ने कहा कि खूंटी के 254 गांव को आदर्श ग्राम बनाने का निर्णय लिया गया है। केंद्र सरकार ने समस्त गांवों को वन क्षेत्र के प्रबंधन और संरक्षण की जिम्मेवारी दी है। इसी में फॉरेस्ट राइट एक्ट भी है और इसे पुनः संरक्षित करने का काम भारत सरकार कर रही है। हाई कोर्ट ने भी कहा था कि जंगल के प्रबंधन का अधिकार वहां रहने वाले लोगों का है और भारत सरकार इसपर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि रोजगार के साथ सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की जरूरत है। राष्ट्रपति को महिलाओं ने वनोपज दिया। यह इसलिए भी है कि इन आदिवासी महिलाओं के बच्चे को भी न्याय मिले। ट्रिपल आईटी में उनके भी बच्चे पढ़ें। नई शिक्षा नीति में क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिकता दी गयी है। 71 एकलव्य मॉडल स्कूल दिया गया। यह जल्द से जल्द शुरू हो, यह राज्य सरकार तय करे। हमारी पहचान जल, जंगल और जमीन है। बिरसा मुंडा का बलिदान भी जल, जंगल, जमीन के लिए हुआ।
बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री को मिला Y श्रेणी की सुरक्षा
भोपाल, 25 मई: मध्यप्रदेश के गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने आज कहा कि बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री की सुरक्षा की सरकार की जिम्मेदारी है और इसी के मद्देनजर उन्हें प्रदेश सरकार ने Y श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है। डॉ मिश्रा ने संवाददाताओं से चर्चा के दौरान कहा कि पूरे देश में पंडित शास्त्री के लाखों भक्त हैं। बहुत से लोग उनके प्रवचन में आते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा करने का सरकार का दायित्व है। गृह मंत्री ने कहा कि पिछले दिनों सभी ने पंडित शास्त्री के बिहार प्रवास के दौरान वहां का वातावरण देखा। ऐसे में मध्यप्रदेश सरकार के गृह मंत्रालय ने उन्हें वाय श्रेणी की सुरक्षा दी है। पंडित शास्त्री की इन दिनों प्रदेश के आदिवासीबहुल क्षेत्र बालाघाट में कथा आयोजित हो रही है। महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की सीमा से सटा ये इलाका नक्सलप्रभावित भी है।
उत्तराखंड के लिए भव्य उपहार है वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन : प्रधानमंत्री मोदी
देहरादून, 25 मई: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तराखंड की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का गुरुवार को शुभारंभ किया और कहा कि यह ट्रेन इस देवभूमि के लिए भव्य उपहार है जिससे राज्य की चहुंमुखी प्रगति को रफ़्तार मिलेगी। श्री मोदी ने यहां देहरादून रेलवे स्टेशन पर आयोजित एक कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंसिंग से शिरकत की। प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में रेलवे के शत प्रतिशत विद्युतीकरण का भी लोकार्पण किया। इस मौके पर कार्यक्रम में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, राज्य सरकार के मंत्री, स्थानीय सांसद, विधायक और महापौर उपस्थित थे। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “उत्तराखण्ड के सभी लोगों को वंदेभारत एक्सप्रेस ट्रेन की बहुत-बहुत बधाई। दिल्ली और देहरादून के बीच चलने वाली ये ट्रेन देश की राजधानी को देवभूमि से और तेज़ गति से जोड़ेगी। वंदे भारत से दिल्ली-देहरादून के बीच रेल सफर में अब समय भी काफी कम हो जाएगा।” श्री मोदी ने कहा कि वह अभी कुछ देर पहले ही तीन देशों की यात्रा करके लौटे हैं। आज पूरा विश्व भारत को बहुत उम्मीदों से देख रहा है। हम भारत के लोगों ने जिस तरह अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है, उसने पूरी दुनिया का विश्वास जगा दिया है। विश्व के लोग भारत को समझने के लिए, देखने के लिए भारत आना चाहते हैं। ऐसे में उत्तराखंड जैसे इतने सुंदर राज्यों के लिए यह बहुत बेहतरीन अवसर है। इस अवसर का पूरा लाभ उठाने में ये ‘वंदे भारत ट्रेन’ भी उत्तराखंड की मदद करने वाली है। उन्होंने कहा, “उत्तराखंड देवभूमि है, मुझे याद है…जब मैं बाबा केदारनाथ का दर्शन करने गया था तो दर्शन के बाद अनायास ही मेरे मुख से कुछ पंक्तियां निकली थीं। ये पंक्तियां थीं- ये दशक उत्तराखंड का दशक होगा।” उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड आज जिस प्रकार से कानून व्यवस्था को सर्वोपरि रखते हुए विकास के अभियान को आगे बढ़ा रहा है, वह बहुत सराहनीय है। यह देवभूमि की पहचान को संरक्षित करने के लिए भी अहम है। श्री मोदी ने कहा, “मुझे विश्वास है कि ये देवभूमि आने वाले समय में पूरे विश्व की आध्यात्मिक चेतना के आकर्षण का केंद्र बनेगी। हमें इस सामर्थ्य के अनुरूप ही उत्तराखंड का विकास करना होगा।” उन्होंने कहा कि भारत में हाई-स्पीड ट्रेनों को लेकर भी पहले की सरकारों ने बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन कई-कई साल बीत गए, हाई-स्पीड ट्रेन तो दूर की बात है, रेल नेटवर्क से मानवरहित फाटक तक हटा नहीं पाए थे। बिजलीकरण की स्थिति तो और बदतर थी। उन्होंने कहा कि सफर के लिए वंदे भारत ट्रेन लोगों की पहली पसंद बनती जा रही है। श्री मोदी ने कहा कि बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के माध्यम से देश में तेजी से विकास सुनिश्चित किया जा सकता है, लेकिन पहले लंबे समय तक जिन दलों की सरकारें रहीं, उन्होंने देश की इस जरूरत को कभी समझा ही नहीं। उन दलों का ध्यान घोटालों पर था, भ्रष्टाचार पर था, परिवारवाद के अंदर ही वो सिमटे हुए थे। उन्होंने कहा, “वर्ष 2014 के बाद ही देश में बदलाव दिखने लगा है, हमने रेलवे को बदलने के लिए समग्र प्रयास किए। यह सब आज संभव हुआ है, देश के विकास के लिए सही नीयत, सही नीति और पूरी निष्ठा रही है।” उन्होंने कहा कि भारत आज अपनी तेज गति पकड़ चुका है और वंदे भारत की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा पर आने वाले तीर्थ यात्रियों की संख्या हर वर्ष पुराने सभी रिकार्डों को ध्वस्त करते हुए नया रिकॉर्ड बना रही है। आज उत्तराखण्ड के नए-नए स्थल देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। इन सभी को वंदे भारत ट्रेन से बहुत मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पर्यटन, उद्योग, व्यापार और रोजगार के अवसर खुलेंगे। यह राज्य के लोगों के लिए एक भव्य उपहार साबित होगी। इस मौके पर मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा, “आज का दिन देवभूमि उत्तराखण्ड के लिए ऐतिहासिक दिन है, यह हम सब का सौभाग्य है कि हम इस दिन के साक्षी बन रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी का उत्तराखण्ड के प्रति विशेष लगाव का ही प्रतिफल है कि प्रदेश की राजधानी देहरादून से देश की राजधानी का सफर कुछ ही घंटों में तय किया जा सकेगा।” श्री धामी ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि भविष्य में यह सेमी हाई स्पीड ट्रेन देवभूमि के दुर्गम पहाड़ों में दौड़कर एक नया कीर्तिमान स्थापित करेगी। मैं प्रधानमंत्री जी का धन्यवाद करना चाहता हूं जिनकी दूरदर्शिता के कारण आज ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।” उत्तराखंड की यह पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पौने पांच घंटे में 301 किलोमीटर की यह दूरी तय करेगी। मार्ग में यह गाड़ी हरिद्वार, रुड़की, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और मेरठ ठहरेगी। गाड़ी की औसत गति 63.36 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी और यह अब तक चलने वाली सभी वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की तुलना में सबसे कम होगी। यह आठ कोच वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन विश्व स्तरीय सुविधाओं से लैस है। यह ट्रेन यात्रियों, विशेष रूप से राज्य की यात्रा करने वाले पर्यटकों के लिए आरामदायक यात्रा अनुभव के एक नए युग की शुरुआत करेगी। ट्रेन पूरी तरह स्वदेश में निर्मित है और कवच तकनीक समेत सभी उन्नत सुरक्षा सुविधाओं से लैस है। प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में नव विद्युतीकृत रेल लाइन खंडों पीलीभीत-टनकपुर (62.17 रूट किलोमीटर), लालकुँआ-भोजीपुरा (65.07 रूट किलोमीटर), रामपुर-लालकुँआ (66.01 रूट किलोमीटर), लालकुँआ-काठगोदाम (21.48 रूट किलोमीटर), लालकुँआ-काशीपुर (57.35 रूट किलोमीटर) तथा मुरादाबाद-काशीपुर- रामनगर (72.701 रूट किलोमीटर) का लोकार्पण किया। इससे राज्य का पूरा रेल मार्ग शत प्रतिशत विद्युतीकृत हो गया है। विद्युतीकृत खंडों पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन द्वारा चलाई जाने वाली ट्रेनों से न सिर्फ ट्रेनों की गति में वृद्धि होगी, बल्कि ढुलाई क्षमता भी बढेगी।
मुख्यमंत्री केजरीवाल और भगवंत मान ने उद्धव ठाकरे से की मुलाकात
मुंबई, 24 मई : शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी के अध्यक्ष और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से बुधवार को मुंबई में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद इन तीनों नेताओं ने साझा पत्रकार वार्ता आयोजित कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उद्धव ठाकरे ने पत्रकारों को बताया कि अगला साल चुनाव का है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दो निर्णय दिए हैं। एक दिल्ली सरकार के बारे में है और दूसरा शिवसेना के बारे में है। देश देख रहा है कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अनादर कर रही है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि इस समय लोकतंत्र खतरे में है, इसलिए सभी को साथ आना आवश्यक है। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में उनकी सरकार आते ही मोदी सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर दिल्ली सरकार की शक्तियां छीन ली थीं । इसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट गए और सुप्रीम कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दिया। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट का फैसला केंद्र सरकार नहीं मान रही है। जजों और वकीलों को गालियां दी जा रही हैं। उनके खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार की ज्यादती का सबसे अधिक सामना शिवसेना को करना पड़ा है। उन्होंने सीबीआई, ईडी का इस्तेमाल करके बहुमत से बनी, जनता की सरकार को उखाड़ फेंका। अगर उनकी सरकार नहीं बनी तो विधायकों को तोड़ा जा रहा है। अगर उससे भी बात नहीं बनी तो अध्यादेश पारित करने की कोशिश की जा रही है। केजरीवाल ने कहा कि शिवसेना ने हमसे वादा किया है कि जब यह मुद्दा संसद में आएगा तो वे हमारा समर्थन करेंगे। भगवंत मान ने कहा कि केंद्र सरकार इलेक्टेड की जगह सेलेक्टेड को वरीयता दे रही है। ईडी, सीबीआई का प्रयोग कर गैर भाजपा सरकारों को अस्थिर किया जा रहा है। जनतंत्र की बजाय सिर्फ सत्ता ही उनका मुख्य मकसद बन गया है। भगवंत मान ने कहा कि देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना खून देकर देश को आजादी दिलाई है और ये लोग देश के सारे संस्थानों को बेचने में लगे हैं, इसलिए देश बचाना जरूरी हो गया है और देश बचाने के लिए लोकतंत्र बचाना जरूरी है। इस मौके पर राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी मौजूद थे। राष्ट्रपति ने हाथ हिलाकर वहां मौजूद लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। इसके बाद उन्होंने अल्बर्ट एक्का चौक स्थित परमवीर चक्र विजेता लांस नायक अल्बर्ट एक्का की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। वहां से राष्ट्रपति के राजभवन पहुंचने पर राज्यपाल और अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।