अहमदाबाद/नई दिल्ली, 26 अगस्त: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात में मारुति सुजुकी ई-विटारा इलेक्ट्रिक एसयूवी और हाइब्रिड बैटरी यूनिट का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने भारत और जापान के मजबूत संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते ‘मेड फॉर ईच अदर’ वाले हैं। भारत-जापान के बीच ‘पीपल टू पीपल’ कनेक्ट बढ़ा है। स्किल और ह्यूमन रिसोर्स से जुड़ी एक-दूसरे की जरूरतों को भी हम पूरा कर पा रहे हैं। आने वाले वर्षों में सभी प्रमुख क्षेत्रों में निरंतर प्रगति की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आज के प्रयास 2047 तक एक विकसित भारत की नींव मजबूत करेंगे। उन्होंने यह विश्वास व्यक्त करते हुए समापन किया कि जापान इस लक्ष्य को प्राप्त करने में एक विश्वसनीय भागीदार बना रहेगा। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि वह अगले हफ्ते जापान जाएंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और जापान के बीच संबंध सिर्फ कूटनीतिक संबंधों से कहीं आगे तक फैले हैं, यह संस्कृति और आपसी विश्वास पर आधारित है। दोनों देश एक-दूसरे के विकास में अपनी प्रगति देखते हैं। मारुति सुजुकी के साथ शुरू हुआ सफर अब बुलेट ट्रेन की गति तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि भारत-जापान साझेदारी की औद्योगिक क्षमता को साकार करने की प्रमुख पहल गुजरात में शुरू हुई थी। अतीत को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 20 साल पहले जब वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन शुरू हुआ था, तब जापान एक प्रमुख साझेदार था। उद्योग से जुड़े नियम और कानून जापानी भाषा में छपवाए गए, ताकि उन्हें समझना आसान हो। उन्होंने गोल्फ के प्रति जापानियों के लगाव की सराहना की और बताया कि उनके हितों को ध्यान में रखते हुए 7-8 नए गोल्फ कोर्स विकसित किए गए हैं। पीएम मोदी ने आगे बताया कि भारत के कॉलेज और विश्वविद्यालय अब जापानी भाषा की शिक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत के निरंतर प्रयास भारत और जापान के लोगों के बीच आपसी संपर्क को मजबूत कर रहे हैं। दोनों देश अब कौशल विकास और मानव संसाधन के क्षेत्र में एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं।” उन्होंने मारुति सुजुकी जैसी कंपनियों से ऐसी पहलों में सक्रिय रूप से भाग लेने और युवा आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का आग्रह किया। ओसामु सुजुकी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत सरकार को उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित करने का गौरव प्राप्त हुआ था। उन्हें मारुति सुजुकी इंडिया के लिए ओसामु सुजुकी के विजन के व्यापक विस्तार को देखकर प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने बताया कि सुजुकी जापान भारत में निर्माण कर रही है और यहां उत्पादित वाहनों का निर्यात जापान को किया जा रहा है। यह न सिर्फ भारत-जापान संबंधों की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक कंपनियों के भारत में बढ़ते विश्वास को भी दर्शाता है। मारुति सुजुकी जैसी कंपनियां प्रभावी रूप से ‘मेक इन इंडिया’ की ब्रांड एंबेसडर बन गई हैं। यह उल्लेख करते हुए कि मारुति सुजुकी लगातार 4 वर्षों से भारत की सबसे बड़ी कार निर्यातक रही है, प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि आज से इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात भी उसी पैमाने पर शुरू होगा। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के दर्जनों देशों में चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर गर्व से ‘मेड इन इंडिया’ का लेबल लगा होगा। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा, “भारत के पास डेमोक्रेसी की मजबूती और डेमोग्राफी का लाभ है। भारत में कुशल कार्यबल का एक विशाल भंडार भी है, जो प्रत्येक भागीदार के लिए जीत की स्थिति पैदा करता है।” भारत की सफलता की कहानी के बीज 12-13 साल पहले बोए गए थे। यह याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2012 में उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान हंसलपुर में मारुति सुजुकी को जमीन आवंटित की गई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि उस समय भी, आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया का विजन था। उन्होंने कहा कि वे शुरुआती प्रयास अब देश के वर्तमान संकल्पों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत के अभियान को सभी मिलकर आगे बढ़ाएं और वोकल फॉर लोकल बनें। उन्होंने कहा कि स्वदेशी चीजें ही जीवन मंत्र बननी चाहिए। गर्व से स्वदेशी चीजों की तरफ चल पड़ो। उन्होंने कहा, “मेरी स्वदेशी की व्याख्या बहुत साधारण है। पैसा किसका लगता है, उससे मुझे कोई लेना-देना नहीं है। चाहे वह डॉलर हो, पाउंड हो या करेंसी काली हो या गोरी, इससे लेना-देना नहीं है, लेकिन जो प्रोडक्शन है, उसमें पसीना मेरे देशवासियों का होगा। जो प्रोडक्शन होगा, उसमें महक मेरे देश की मिट्टी की होगी। इस भाव के साथ मेरे साथ चलें और 2047 में ऐसा हिंदुस्तान बनाएं कि आने वाली पीढ़ियां आपके त्याग का गर्व करेंगी। आपके योगदान का गर्व करेंगी।” प्रधानमंत्री ने सबसे आखिरी में कहा, “आत्मनिर्भर भारत के मंत्र और स्वदेशी के मार्ग के लिए आज देशवासियों को न्योता देता हूं कि आइए, सभी चल पड़ें और 2047 तक विकसित भारत बनाकर रहेंगे। दुनिया की भलाई में भारत का योगदान बढ़ाते रहेंगे।”
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आधारित फिल्म की रिलीज़ को दी मंज़ूरी
मुंबई, 26 अगस्त: बाॅम्बे उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर कथित रूप से आधारित एक फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज करने की मंज़ूरी दे दी है। साथ ही न्यायालय ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को निर्देश दिया है कि वह फिल्म ‘अजेय’ को बिना किसी कट या संशोधन के प्रमाणन प्रदान करे। एक अधिवक्ता ने मंगलवार को यह जानकारी दी। न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति नीला के. गोखले की खंडपीठ ने फिल्म देखने के बाद कल दिए अपने आदेश में कहा, “हमने फिल्म को उसके संदर्भ में देखा है और हमें नहीं लगता कि इसमें किसी भी चीज़ को दोबारा संपादित करने की ज़रूरत है। हमने आपके द्वारा बताए गए हर बिंदु पर गौर किया है। हमने हर चीज़ पर ध्यान दिया है। हमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं लगा।” पीठ ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा पारित उन आदेशों को भी रद्द कर दिया, जिनमें फिल्म में कट और संपादन की सिफ़ारिश की गई थी। सीबीएफसी ने शुरुआत में फिल्म पर 29 आपत्तियाँ उठाई थीं। अपील पर सीबीएफसी की पुनरीक्षण समिति ने 17 अगस्त को उन आपत्तियों में से आठ को खारिज कर दिया लेकिन फिर भी फिल्म को प्रमाणन देने से इनकार कर दिया। इसके बाद अदालत ने 22 अगस्त को फिल्म देखने का फैसला किया। फिल्म देखने के बाद, अदालत की राय थी कि फिल्म में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसमें बदलाव की ज़रूरत हो। ‘द मॉन्क हू बिकेम चीफ मिनिस्टर’ किताब से प्रेरित यह फिल्म उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित बतायी जा रही है।
प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री क्या जेल से देश चला सकते हैं : अमित शाह
नई दिल्ली, 25 अगस्त: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को 130वें संविधान संशोधन विधेयक पर विपक्ष के विरोध को गलत बताया। उन्होंने कहा, क्या कोई मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री या मंत्री जेल से सरकार चला सकता है। एक सीएम जेल में रहे और सचिव, डीजीपी, चीफ सेक्रेटरी आदेश लेने जेल जाए, यह हमारे लोकतंत्र को शोभा नहीं देता। एक समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में अमित शाह ने संविधान संशोधन विधेयक पर राहुल गांधी के नैतिक रुख पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, राहुल गांधी जिस लालू यादव की संसद सदस्यता बचाने वाला अध्यादेश फाड़ते हैं, आज उन्हीं लालू यादव को सत्ता के लिए गले लगाते हैं। दरअसल, केंद्र सरकार ने 20 अगस्त को संविधान (130वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश किया। इसमें प्रावधान है कि कोई प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री या किसी भी मंत्री को गिरफ्तारी या 30 दिन तक हिरासत में रहने पर पद छोड़ना होगा। शर्त यह है कि जिस अपराध के लिए हिरासत या गिरफ्तारी हुई है, उसमें पांच साल या ज्यादा की सजा का प्रावधान हो। विपक्ष इसी का विरोध कर रहा है। हमारे मुख्यमंत्रियों पर भी सवाल उठेंगे: शाह ने कहा, आज देश में एनडीए गठबंधन के मुख्यमंत्री ज्यादा हैं। प्रधानमंत्री भी एनडीए से हैं। ऐसे में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक से सिर्फ विपक्ष पर ही सवाल खड़े नहीं होते बल्कि हमारे मुख्यमंत्रियों पर भी सवाल उठेंगे। अगर फर्जी मामला है तो देश के हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट आंखें बंद करके नहीं बैठे हुए हैं, वे जमानत दे सकते हैं। कांग्रेस सरकार में भी ऐसा प्रावधान था कि अगर सत्र अदालत ने किसी को दो साल जेल की सजा सुनाई है तो उस सदस्य की सदस्यता अपने आप चली जाती थी। जेल जाने के बाद भी दिल्ली के सीएम ने इस्तीफा नहीं दिया: आज नई परंपरा आ गई है। आरोप लगने के बाद नेता इस्तीफा देते थे। रिहाई के बाद ही राजनीति में शामिल होते थे लेकिन तमिलनाडु के कुछ मंत्रियों ने जेल में रहने के बाद भी पद से इस्तीफा नहीं दिया था। दिल्ली के सीएम और गृहमंत्री ने भी इस्तीफा नहीं दिया था। राजनीति को बदनाम करने और सामाजिक नैतिकता को इस स्तर तक गिराने के लिए हम इससे सहमत नहीं हैं। लालू को बचाने वाला अध्यादेश राहुल गांधी ने क्यों फाड़ा: लालू यादव को बचाने के लिए मनमोहन सिंह सरकार अध्यादेश लाई थी। उसे राहुल गांधी ने क्यों फाड़ा, क्या औचित्य था? अगर उस दिन नैतिकता थी तो क्या आज नहीं है, क्योंकि आप लगातार तीन चुनाव हार चुके हैं। धनखड़ ने व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्या के कारण इस्तीफा दिया: जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर शाह ने कहा, बात का बतंगड़ नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्या के कारण इस्तीफा दिया है। किसी को इस मुद्दे को ज्यादा खींचने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने पीएम राबुका के साथ की वार्ता, भारत और फिजी ने 7 समझौतों पर किए हस्ताक्षर
नई दिल्ली, 25 अगस्त : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को फिजी के प्रधानमंत्री सितवेनी लिगामामादा राबुका के साथ व्यापक वार्ता की, जिसमें व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। दोनों नेताओं की बातचीत के बाद भारत और फिजी ने सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन फिजी के लिए खतरा है, हम आपदा से निपटने में उसकी मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत और फिजी भले ही दूर हों, लेकिन दोनों देशों की आकांक्षाएं समान हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और फिजी ने रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को मजबूत करने का निर्णय लिया है साथ ही रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए कार्य योजना को अंतिम रूप दिया है। राबुका रविवार को तीन दिवसीय यात्रा पर दिल्ली पहुंचे। दक्षिण प्रशांत क्षेत्र के प्रधानमंत्री के रूप में यह उनकी पहली भारत यात्रा है। फ़िजी के नेता के साथ एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है जिसमें स्वास्थ्य मंत्री रातू अटोनियो लालबालावु और कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
गगनयान मिशन : इसरो ने श्रीहरिकोटा के निकट आईएडीटी-01 का सफल परीक्षण किया
बेंगलुरु, 25 अगस्त : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने श्रीहरिकोटा के निकट रविवार को इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (आईएडीटी-01) का सफल परीक्षण किया जो गगनयान कार्यक्रम के लिए पैराशूट-आधारित मंदन प्रणाली की प्रणाली-स्तरीय योग्यता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसरो ने कहा कि श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) में किए गए इस परीक्षण में ‘‘एक विशिष्ट मिशन परिदृश्य में गगनयान मिशन के लिए क्रू मॉड्यूल की महत्वपूर्ण पैराशूट-आधारित मंदन प्रणाली को सफलतापूर्वक दर्शाया गया।’’ इसरो ने इस परीक्षण को ‘‘पैराशूट-आधारित मंदन प्रणाली का प्रणाली-स्तरीय मूल्यांकन’’ का हिस्सा बताया, जिसमें मंदन प्रणाली को शामिल करते हुए एक कृत्रिम क्रू मॉड्यूल (सीएम) को एक हेलीकॉप्टर का उपयोग करके उतारा जाता है। इसके उद्देश्य की व्याख्या करते हुए इसरो ने रविवार देर रात जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘‘गगनयान मिशनों में क्रू मॉड्यूल के उतरने के क्रम में अंतिम चरण के दौरान पैराशूट-आधारित मंदन प्रणाली का उपयोग किया जाता है ताकि समुद्र में सुरक्षित रूप से उतरने के लिए ‘टचडाउन’ वेग को स्वीकार्य सीमा तक कम किया जा सके।’’ जिस पैराशूट प्रणाली का परीक्षण किया गया वह ‘‘गगनयान मिशनों के समान’’ थी और इसमें 10 पैराशूट शामिल थे-दो एपेक्स कवर सेपरेशन (एसीएस), दो ड्रोग, तीन पायलट और तीन मुख्य कैनोपी। इसरो ने कहा कि इसरो केंद्रों के अलावा, ‘‘रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), भारतीय वायु सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल सहित अन्य सरकारी एजेंसियों ने भी इस बड़े परीक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने में योगदान दिया।’’ आने वाले दिनों में इसी तरह के अन्य परीक्षण करने की योजना है।
जिला स्तर कांग्रेस की मजबूती के लिये करें काम : खरगे
नई दिल्ली, 24 अगस्त: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की असली ताकत ज़मीनी स्तर का संगठन है और यही सत्ता तक पहुंचने का रास्ता भी बनाता है। उन्होंने जिला अध्यक्षों को कांग्रेस की रीढ़ बताते हुए कहा कि संगठन को मजबूत करने के लिए सभी को पूरी ईमानदारी और निष्ठा से काम करना होगा। रविवार को पार्टी के नए मुख्यालय इंदिरा भवन में हरियाणा और मध्यप्रदेश के नव नियुक्त जिलाध्यक्षों को संबोधित करते हुए श्री खरगे ने कहा कि जिला संगठन चुनावी सफलता का आधार है। राज्य की विधानसभाओं से लेकर लोकसभा चुनाव तक जीत सुनिश्चित करने में जिलाध्यक्षों की भूमिका अहम रहती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने लंबे समय तक शासन अपनी मजबूत जमीनी पकड़ के कारण ही किया, लेकिन बाद में संगठन को नज़रअंदाज़ करने से कमजोरियां पैदा हुईं। कांग्रेस अध्यक्ष ने साफ कहा कि “हम बिना संगठन को मज़बूत किए सत्ता में वापसी नहीं कर सकते।” उन्होंने गुटबाजी को पार्टी की सबसे बड़ी कमजोरी बताया और कहा कि जब कांग्रेस संगठित रहती है तभी चुनाव जीतती है। उन्होंने जिलाध्यक्षों को नसीहत दी कि जब वे ब्लॉक, मंडल और बूथ कमेटियां बनाएं तो उसमें मेहनती और पार्टी की विचारधारा से जुड़े कार्यकर्ताओं को ही शामिल करें। ऐसे लोग चाहिए, जिन्हें कोई प्रलोभन या लालच भी उनकी निष्ठा को डिगा न सके। श्री खरगे ने बताया कि वर्ष 2025 को कांग्रेस ने “संगठन सृजन वर्ष” घोषित किया है। उन्होंने कहा कि जिलाध्यक्षों को चाहिए कि वे लगातार जनता के बीच रहें, कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाएं और उनके सुख-दुख में साथ खड़े हों। यही कांग्रेस को जमीनी स्तर पर ताक़त देगा। बैठक में हरियाणा और मध्यप्रदेश दोनों राज्यों के जिलाध्यक्ष मौजूद थे। खास बात यह रही कि एमपी के 71 जिलाध्यक्षों को संगठन प्रबंधन के टिप्स देने के लिए राहुल गांधी ने भी आमंत्रित किया। बैठक में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी भी मौजूद रहे। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस केवल आठ सीटों से चूकी थी। यदि हमें 22,779 वोट और मिलते तो आज हरियाणा में कांग्रेस की सरकार होती। वहीं, मध्यप्रदेश में भी वोट चोरी का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि 2023 में लगभग 27 सीटों पर धांधली हुई। “सिर्फ दो महीने में 16 लाख वोट कैसे बढ़ गए, यह चुनाव आयोग को बताना चाहिए,” उन्होंने सवाल उठाया। उन्होंने जिलाध्यक्षों को चेतावनी दी कि बीजेपी अब वोट चोरी के साथ सत्ता चोरी में भी लगी है। इसलिए हर स्तर पर सतर्क रहना ज़रूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि वोटर लिस्ट की गहन जांच लगातार होती रहनी चाहिए ताकि यदि बीजेपी या बीएलओ कार्यकर्ताओं के नाम काटें तो समय रहते उसका विरोध किया जा सके। खरगे ने कहा कि हमें जनता को बताना होगा कि सर्वजन मताधिकार कांग्रेस की ही देन है और युवाओं को 18 साल की उम्र में मतदान का अधिकार राजीव गांधी ने ही दिया था। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी भी वर्तमान में “वोटर अधिकार यात्रा” निकाल रहे हैं और लाखों लोग उनसे जुड़ रहे हैं। अंत में उन्होंने कहा, “हमें किसी भी तरह की गुटबाजी को पनपने नहीं देना है। जब कांग्रेस संगठित रहती है, तब चुनावी जीत सुनिश्चित होती है।”
बिहार में एसआईआर प्रक्रिया अंतिम चरण में, अब तक 98.2 प्रतिशत मतदाताओं ने जमा किए दस्तावेज
नई दिल्ली, 24 अगस्त : बिहार में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया अंतिम चरण में है। दावे, आपत्तियां और दस्तावेज जमा करने की अवधि 1 अगस्त से 1 सितंबर तक चल रही है, जिसकी समाप्ति में अभी 8 दिन शेष हैं। रविवार को आयोग ने जानकारी दी कि बिहार की एसआईआर निर्धारित समय पर है। प्राप्त सभी दावों और आपत्तियों का निपटारा 25 सितंबर तक किया जाएगा। जांच के बाद अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित की जाएगी। चुनाव आयोग ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि अब तक 98.2 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने दस्तावेज जमा किए हैं। आयोग ने बिहार में एसआईआर प्रक्रिया में जुटे तमाम अधिकारियों और बीएलओ से लेकर लाखों स्वयंसेवकों की सराहना की है। आयोग के अनुसार, बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अलावा इस प्रक्रिया में 38 जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारी, 243 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, 2,976 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, 90,712 बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ), लाखों स्वयंसेवकों और सभी 12 प्रमुख राजनीतिक दलों के क्षेत्रीय प्रतिनिधियों, जिनमें उनके जिला अध्यक्ष और 1.60 लाख बीएलए की भागीदारी रही। चुनाव आयोग का कहना है कि दावे और आपत्तियों की अवधि मतदाताओं को यह अवसर प्रदान करती है कि वे प्रारूप निर्वाचक नामावली में त्रुटि सुधार सकें और वे जरूरी दस्तावेज जमा करें, जो नामांकन फॉर्म भरते समय नहीं दिए गए थे। बिहार के सीईओ कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब तक 98.2 प्रतिशत मतदाताओं के दस्तावेज प्राप्त हो चुके हैं। आयोग ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि 24 जून से 24 अगस्त के बीच महज 60 दिनों में औसतन प्रति दिन 1.64 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने दस्तावेज जमा किए। अभी भी 8 दिन शेष हैं और सिर्फ 1.8 प्रतिशत मतदाताओं के दस्तावेज जमा होने बाकी हैं। आयोग ने उम्मीद जताई कि बीएलओ और स्वयंसेवकों की मदद से बाकी मतदाताओं के दस्तावेज संबंधी कार्य भी निर्धारित समय से पहले पूरे हो जाएंगे। 24 जून के एसआईआर के आदेशों के अनुरूप, संबंधित 243 ईआरओ और 2,976 एईआरओ की ओर से दस्तावेजों का सत्यापन भी एक साथ किया जा रहा है। विज्ञप्ति के अनुसार, आयोग को मसौदा सूची में शामिल 7.24 करोड़ मतदाताओं में से अब तक 0.16 प्रतिशत दावे और आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। बिहार के 12 मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बीएलए से 10 दावे और आपत्तियां, जबकि अपने विधानसभा क्षेत्र से जुड़े मतदाताओं की 1,21,143 दावे और आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। निर्वाचन क्षेत्र के बाहर के किसी व्यक्ति की ओर से कोई दावा नहीं पेश नहीं किया गया है। 3,28,847 नए मतदाता, जिन्होंने 1 जुलाई को 18 वर्ष या उससे अधिक आयु प्राप्त कर ली है या 1 अक्टूबर को 18 वर्ष या उससे अधिक आयु प्राप्त कर लेंगे, उन्होंने भी अपना फॉर्म 6 और घोषणा पत्र जमा कर दिया है। बता दें कि बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने एसआईआर के जरिए मतदाता सूची को ठीक करने की दिशा में कदम उठाए। 24 जून से 25 जुलाई तक गहन नामांकन प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद चुनाव आयोग ने 1 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने किया शुभांशु शुक्ला और अन्य गगन यात्रियों को सम्मानित
नई दिल्ली, 24 अगस्त: भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अपनी स्पेस यात्रा के दौरान अंतरिक्ष में खेती की थी। शुभांशु शुक्ला ने स्पेस में मेथी और मूंग की खेती की थी। रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुभांशु शुक्ला एवं अन्य गगन यात्रियों को सम्मानित किया। रविवार को नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने शुभांशु शुक्ला से कहा कि आपके अंदर का किसान अंतरिक्ष में जाकर भी बाहर नहीं निकला। भारत एक कृषि प्रधान देश रहा है, पर भारत का कोई किसान अंतरिक्ष में जाकर मेथी और मूंग की खेती करेगा, ऐसा तो कभी सोचा भी न था। निश्चित रूप से आपका अनुभव हमारे आगामी मिशन में बड़ा मददगार सिद्ध होगा। रक्षा मंत्री ने कहा कि शुभांशु शुक्ला की यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगी। यह बताएगी कि चाहे राह कितनी भी कठिन क्यों न हो, यदि हृदय में श्रद्धा हो और कर्म में शक्ति हो, तो आकाश भी हमारी सीमा नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि शुभांशु भले ही वायु सेना की वर्दी पहनते हों, लेकिन जब वे अंतरिक्ष में गए, तो वह केवल सैन्य बल के ही नहीं, भारत के ही नहीं बल्कि पूरी मानवता के प्रतिनिधि बने। आपका यह योगदान इतिहास में दर्ज किया जाएगा। राजनाथ सिंह ने कहा, “आज हम एक ऐसे युग में प्रवेश कर चुके हैं, जहां अंतरिक्ष केवल सैन्य शक्ति या तकनीकी कौशल का प्रतीक नहीं रह गया है। यह मानव सभ्यता की सामूहिक यात्रा का नया पड़ाव है। आज भारत चन्द्रमा से लेकर मंगल ग्रह तक अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है। आज भारत गगनयान जैसे मिशन के लिए भी पूरी तरह तैयार है। साथियों, मैं इसे केवल तकनीकी उपलब्धि के रूप में नहीं देखता, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत का वह नया अध्याय है, जहां हम विश्व की बड़ी स्पेस पावर्स के बीच पूरे गर्व के साथ खड़े हो रहे हैं।” रक्षा मंत्री ने बताया कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम केवल प्रयोगशालाओं और लॉन्च व्हीकल्स तक सीमित नहीं है। यह हमारी राष्ट्रीय आकांक्षाओं और वैश्विक दृष्टि का प्रतीक है। चंद्रयान से लेकर मंगलयान तक, हमने यह सिद्ध किया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि इच्छाशक्ति असीमित हो, तो कोई भी लक्ष्य हमारे सामने छोटा पड़ जाता है। भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट है। भारत, अंतरिक्ष को केवल रिसर्च के क्षेत्र के रूप में नहीं देखता है बल्कि हम इसे आने वाले कल की अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, ऊर्जा और मानवता के भविष्य के रूप में देखते हैं। रक्षा मंत्री का कहना है कि इसलिए इस यात्रा में भारत पीछे नहीं रह सकता। हमें आगे बढ़ना है, हमें नेतृत्व करना है। यही कारण है कि आज हम अपने उन नायकों का अभिनंदन कर रहे हैं जो केवल अंतरिक्ष यात्री ही नहीं बल्कि इस राष्ट्रीय स्वप्न के अग्रदूत भी हैं। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष से प्राप्त तकनीकें, चाहे वे संचार उपग्रह हों, मौसम की निगरानी हो, या प्राकृतिक आपदाओं से निपटना हो, आज भारत के गांव-गांव और खेत-खेत तक सेवा पहुंचा रही हैं। आने वाले समय में, अंतरिक्ष खनन और डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन मानव सभ्यता की दिशा बदल देंगे। रक्षा मंत्री ने कहा कि वह कुछ समय पहले इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन में गए थे। वहां उनके उपकरण और वहां की ट्रेनिंग का माहौल रक्षा मंत्री को बड़ा प्रभावित करने वाला लगा। उन्होंने कहा कि अभी हमारे सामने, उसी इंस्टीट्यूट की सफल प्रतिमूर्ति के रूप में शुभांशु दिखाई दे रहे हैं। राजनाथ ने कहा कि उन्हें यह देखकर गर्व हो रहा है कि शुभांशु ने वह जिजीविषा, वह साहस दिखाया है, जो भारत की मिट्टी का प्रतिनिधित्व करता है। रक्षा मंत्री का कहना है कि शुभांशु शुक्ला जैसे व्यक्तित्व हम सबके लिए गर्व का विषय हैं। सामान्यतया एस्ट्रोनॉट्स की ट्रेनिंग प्रक्रिया 2 से ढाई वर्षों तक चलती है, लेकिन शुभांशु शुक्ला ने अपनी लगन और समर्पण से इसे मात्र ढाई महीनों में पूरा कर दिखाया। यह उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत क्षमता का प्रमाण है, बल्कि हम भारतवासियों के परिश्रमी मन का भी प्रतीक है। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह केवल विज्ञान की विजय नहीं है, यह विश्वास की गूंज भी है। यह केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं है, यह साधना का संदेश भी है। यह केवल भारत का गौरव नहीं है, यह सम्पूर्ण मानवता की प्रगति का प्रमाण है। जैसा कि प्रधानमंत्री ने भी कहा था कि यह अंतरिक्ष यात्रा का अंत नहीं, बल्कि एक शुरुआत है। अभी भारत को अंतरिक्ष सेक्टर में बहुत लंबी यात्रा तय करनी है।
पिछले 10 वर्षों में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत की प्रगति अभूतपूर्व: जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली, 23 अगस्त : देश में आज दूसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया जा रहा है, जो चंद्रयान-3 मिशन की ऐतिहासिक सफलता को समर्पित है। इस अवसर पर नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने हिस्सा लिया। उनके साथ केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और इसरो चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन भी मौजूद थे। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “दो साल पहले हिंदुस्तान दुनिया का पहला देश बना, जो चंद्रमा के साउथ पोल पर पहुंचा था। हाल ही में शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर जाने वाले पहले भारतीय बनने की उपलब्धि हासिल की है। मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि एक्सिओम-4 मिशन में शामिल होने का निमंत्रण उनकी ओर से आया था। भारतीय टैलेंट को अब पहचाना जा रहा है।” केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए कहा, “पिछले 10 वर्षों में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत ने अभूतपूर्व प्रगति की है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने हमें इस तकनीक को पाकिस्तान की धरती पर परखने का मौका दिया और विश्व को यह दिखाया कि पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में क्या हासिल किया है।” ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने कहा, “हम जो कुछ कर रहे हैं या जिसकी योजना बना रहे हैं इसे देख मैं काफी उत्साहित हूं। दो साल पहले हमारे पास जश्न का मौका नहीं था। एक साल के भीतर, यह मुमकिन है। हमारे पास आगे बढ़ने के लिए- गगनयान, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और चंद्रमा पर उतरने को लेकर कई मिशन हैं। बस जरूरत है जोश की। यहां बैठे हरेक बच्चे से यही उम्मीद है कि वो इस दिशा में आगे बढ़ेगा। देश को आपकी जरूरत है।” इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस की बधाई दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, “राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर हम चंद्रयान-3 के माध्यम से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि का उत्सव मना रहे हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत अंतरिक्ष अन्वेषण में नई ऊंचाइयों को छू रहा है, जो अनंत संभावनाओं के द्वार खोल रहा है। मैं हमारे देश के प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों को हार्दिक बधाई देता हूं, जिनकी समर्पण और प्रतिभा हमें गौरवान्वित करती है।”
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात, कहा- उत्कृष्ट उपराष्ट्रपति साबित होंगे
नई दिल्ली, 23 अगस्त: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राधाकृष्णन को उनकी उम्मीदवारी के लिए बधाई दी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सीपी राधाकृष्णन के साथ मुलाकात की तस्वीरें भी शेयर कीं। उन्होंने लिखा, “थिरु सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की। एनडीए की ओर से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनने पर उन्हें शुभकामनाएं दीं। मुझे विश्वास है कि थिरु राधाकृष्णन एक उत्कृष्ट उपराष्ट्रपति साबित होंगे और भारत के लोगों की एक सशक्त आवाज बनेंगे।” एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात की थी। उन्होंने आडवाणी से भेंट की और उनका आशीर्वाद लिया। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीपी राधाकृष्णन की जीत की उम्मीद जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वे राधाकृष्णन की प्रशंसा करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राधाकृष्णन एक उत्कृष्ट उपराष्ट्रपति होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने एनडीए के उम्मीदवार राधाकृष्णन की तारीफ करते हुए कहा, “मेरे एक बहुत पुराने मित्र हैं और आज मैं उनका परिचय करवा रहा हूं। कितने साल हो गए इस संबंध को, मेरे भी सारे बाल काले थे और राधाकृष्णन के भी। सर्वोच्च स्थान पर लोकसभा में ‘सेंगोल’ विराजमान है और वो ‘सेंगोल’ तमिलनाडु से आया है। अब राज्यसभा में भी सर्वोच्च स्थान पर तमिलनाडु का ही एक बेटा बैठने वाला है।” उपराष्ट्रपति पद का चुनाव रोमांचक हो गया है। एनडीए ने सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया है, तो वहीं ‘इंडिया अलायंस’ ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी पर दांव खेला है। उल्लेखनीय है कि जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे के बाद यह चुनाव हो रहा है। जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए दो पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर दी है। निर्वाचन आयोग द्वारा 7 अगस्त 2025 को जारी अधिसूचना के अनुसार, उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 के लिए मतदान और मतगणना 9 सितंबर को होगी। पर्यवेक्षकों के रूप में पंचायती राज मंत्रालय में अपर सचिव आईएएस सुशील कुमार लोहानी (ओडिशा कैडर: 1995) और वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग में तैनात अपर सचिव आईएएस डी. आनंदन (सिक्किम कैडर: 2000) की नियुक्ति की गई है।