वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाजा के लिए गठित अंतरराष्ट्रीय संगठन बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का औपचारिक न्योता दिया है। यह कदम गाजा में जारी संघर्ष को समाप्त कर स्थायी शांति, मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण की दिशा में एक अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि भारत की वैश्विक साख, संतुलित विदेश नीति और मानवीय दृष्टिकोण इस बोर्ड को मजबूती प्रदान करेगा। क्या है ‘बोर्ड ऑफ पीस’? ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की घोषणा 15 जनवरी को राष्ट्रपति ट्रंप की 20 बिंदुओं वाली शांति योजना के दूसरे चरण के तहत की गई थी। इस अंतरराष्ट्रीय बोर्ड का मुख्य उद्देश्य गाजा में हथियारों के खात्मे की निगरानी, आम नागरिकों तक मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति, युद्ध से तबाह बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण और एक नई, स्थिर शासन व्यवस्था की रूपरेखा तैयार करना है। भारत की भूमिका क्यों अहम? भारत लंबे समय से मध्य-पूर्व में शांति और संवाद का पक्षधर रहा है। गाजा संकट के दौरान भी भारत ने मानवीय सहायता भेजी है और संघर्षविराम की अपील की है। ऐसे में पीएम मोदी को बोर्ड में शामिल होने का न्योता भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक भूमिका को दर्शाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत की भागीदारी से बोर्ड को एक संतुलित और विश्वसनीय नेतृत्व मिल सकता है। शांति योजना का दूसरा चरण ट्रंप की 20 बिंदुओं वाली योजना के दूसरे चरण में संघर्षविराम के बाद दीर्घकालिक शांति पर जोर दिया गया है। इसमें हथियारों के पूर्ण निष्क्रियकरण, राहत एजेंसियों के लिए सुरक्षित गलियारे, स्कूल-अस्पतालों का पुनर्निर्माण और स्थानीय प्रशासन को सशक्त करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ इन्हीं लक्ष्यों की निगरानी करेगा। सूत्रों के अनुसार, भारत इस न्योते पर विचार कर रहा है और अंतिम फैसला कूटनीतिक स्तर पर विमर्श के बाद लिया जाएगा। यदि पीएम मोदी इस बोर्ड में शामिल होते हैं, तो यह न केवल गाजा में शांति प्रयासों को नई दिशा देगा, बल्कि भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को भी और मजबूत करेगा। कुल मिलाकर, गाजा संकट के समाधान की दिशा में यह पहल अंतरराष्ट्रीय सहयोग का नया अध्याय खोल सकती है, जिसमें भारत की संभावित भागीदारी वैश्विक शांति प्रयासों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
काजीरंगा से सियासी संदेश: विकास परियोजनाओं के बीच पीएम मोदी का कांग्रेस पर तीखा प्रहार
कालियाबोर (असम) | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को असम के कालियाबोर में करीब 6,957 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर का शिलान्यास किया और साथ ही दो अमृत भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर राज्य को बड़ी विकास सौगात दी। इस अवसर पर उन्होंने जहां बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी के विस्तार पर जोर दिया, वहीं कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए घुसपैठ, सुरक्षा और असम की सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने देश का भरोसा खो दिया है और असम की मिट्टी व संस्कृति के प्रति उसका रवैया उदासीन रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान घुसपैठ लगातार बढ़ी, जिससे राज्य की जनसंख्या संरचना असंतुलित हुई। पीएम मोदी के अनुसार, यह स्थिति न केवल असम बल्कि पूरे देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। पीएम मोदी ने असम सरकार की सराहना करते हुए कहा कि जिस प्रकार राज्य सरकार घुसपैठ से सख्ती से निपट रही है, उसकी देशभर में प्रशंसा हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अतीत में घुसपैठियों को संरक्षण दिया, जिससे तस्करी और अन्य अपराध बढ़े और असम की पहचान पर संकट आया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर सीधा राजनीतिक वार करते हुए कहा, “घुसपैठियों को बचाओ और उनकी मदद से सत्ता पाओ**—कांग्रेस और उसके सहयोगी पूरे देश में यही राजनीति कर रहे हैं।” उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां घुसपैठियों के समर्थन में रैलियां निकाली गईं, लेकिन जनता ने उन्हें करारा जवाब दिया। पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि असम की धरती से भी कांग्रेस को ऐसा ही जवाब मिलेगा। विकास परियोजनाओं की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। वहीं अमृत भारत ट्रेनें आधुनिक सुविधाओं के साथ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करेंगी और आम लोगों की यात्रा को आसान बनाएंगी। समग्र रूप से देखें तो कालियाबोर का यह कार्यक्रम विकास और राजनीति—दोनों का संगम रहा। एक ओर बड़ी परियोजनाओं से असम के भविष्य की रूपरेखा पेश की गई, तो दूसरी ओर घुसपैठ और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा कर राजनीतिक संदेश भी स्पष्ट कर दिया गया।
हजारों यात्रियों की परेशानी पर DGCA सख्त, IndiGo पर ₹22.20 करोड़ का भारी जुर्माना
नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo को दिसंबर 2025 में बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द करने के मामले में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। नियामक ने यात्रियों को हुई व्यापक असुविधा और संचालन में गंभीर चूक को लेकर IndiGo पर 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। DGCA की ओर से की गई विस्तृत जांच में सामने आया कि दिसंबर 2025 के दौरान IndiGo ने 2500 से अधिक उड़ानें रद्द कीं, जिससे हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हुईं। रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति केवल मौसम या बाहरी कारणों की वजह से नहीं बनी, बल्कि इसके पीछे एयरलाइन की खराब संचालन व्यवस्था, आंतरिक समन्वय की कमी और गंभीर प्रबंधन लापरवाही भी जिम्मेदार रही। नियामक का कहना है कि IndiGo समय रहते न तो पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था कर पाई और न ही यात्रियों को सही व स्पष्ट जानकारी दी गई। इससे यात्रियों को घंटों एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ा, कई लोगों की कनेक्टिंग फ्लाइट छूट गई और अनेक यात्रियों को होटल व अन्य सुविधाओं के लिए अपनी जेब से खर्च करना पड़ा। DGCA ने अपने आदेश में कहा है कि किसी भी एयरलाइन से यह अपेक्षा की जाती है कि वह परिचालन संबंधी जोखिमों का पहले से आकलन करे और आपात स्थिति में यात्रियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करे। IndiGo इस कसौटी पर विफल रही, इसलिए उस पर यह आर्थिक दंड लगाया गया है। सूत्रों के अनुसार, DGCA ने IndiGo को भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए ऑपरेशनल सिस्टम सुधारने, स्टाफ प्लानिंग मजबूत करने और यात्रियों से संवाद बेहतर करने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि आगे किसी भी तरह की लापरवाही सामने आने पर और सख्त कार्रवाई की जा सकती है। यह जुर्माना न सिर्फ IndiGo के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, बल्कि पूरे विमानन क्षेत्र के लिए भी एक कड़ा संदेश है कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
“बीजेपी पेशेवर राजनीति करती है, विपक्ष को भी खुद को मजबूत करना होगा” — ओडिशा दौरे पर अखिलेश यादव का बड़ा बयान
भुवनेश्वर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भाजपा आज की राजनीति में “पेशेवर तरीके” से काम कर रही है, जबकि विपक्षी दलों को अभी बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर भाजपा को हराना है तो अन्य राजनीतिक दलों को भी अपनी रणनीति, संगठन और जनसंपर्क को मजबूत करना होगा। ओडिशा दौरे पर पहुंचे अखिलेश यादव ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भाजपा सिर्फ चुनाव के समय नहीं, बल्कि लगातार जमीन पर काम करती है। उन्होंने कहा, “बीजेपी की राजनीति प्रोफेशनल है। विपक्षी दलों को भी समय के साथ खुद को अपडेट करना होगा, तभी लोकतंत्र मजबूत रहेगा।” पीडीए को मजबूत करने पर जोर अखिलेश यादव ने ओडिशा में पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) गठबंधन को मजबूत करने की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि पीडीए ही सामाजिक न्याय की असली ताकत है और यही वर्ग महंगाई, बेरोजगारी और असमानता से सबसे ज्यादा प्रभावित है। उन्होंने कहा, “अगर हम पीडीए को एकजुट कर पाते हैं, तो भाजपा की राजनीति को चुनौती दी जा सकती है। ओडिशा सहित पूरे देश में सामाजिक न्याय की राजनीति को और धार देने की जरूरत है।” नवीन पटनायक से मुलाकात अपने दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने ओडिशा के मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (BJD) प्रमुख नवीन पटनायक से भी मुलाकात की। इस मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। हालांकि बैठक के बाद किसी संभावित गठबंधन पर कोई औपचारिक बयान नहीं दिया गया, लेकिन दोनों नेताओं के बीच राष्ट्रीय राजनीति और संघीय ढांचे से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की बात कही जा रही है। भाजपा पर परोक्ष हमला अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए भाजपा पर आरोप लगाया कि वह सरकारी संसाधनों और एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीति के लिए कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्षी दलों का मजबूत और संगठित होना जरूरी है। आगामी राजनीति के संकेत राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह बयान सिर्फ ओडिशा तक सीमित नहीं है, बल्कि 2029 के आम चुनावों से पहले विपक्ष को एकजुट करने की रणनीति का हिस्सा है। पीडीए की बात कर उन्होंने साफ संकेत दे दिया है कि समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय की राजनीति को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी में है। कुल मिलाकर, अखिलेश यादव का यह बयान विपक्षी राजनीति को नए सिरे से सोचने और रणनीति बदलने का संदेश देता है, जिसमें भाजपा की “पेशेवर राजनीति” का मुकाबला करने की बात खुलकर कही गई है।
बीएमसी चुनाव में महायुति की बड़ी जीत, भाजपा बनी सबसे बड़ी पार्टी; एमएनएस का प्रदर्शन निराशाजनक
मुंबई।मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के 227 वार्डों के चुनाव परिणाम पूरी तरह घोषित हो चुके हैं। देश की सबसे अमीर नगर निकाय के इस चुनाव में भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के गठबंधन महायुति ने स्पष्ट बहुमत हासिल करते हुए सत्ता की ओर मजबूत कदम बढ़ा दिया है। गठबंधन ने कुल 118 वार्डों में जीत दर्ज की, जो बहुमत के आंकड़े 114 से कहीं अधिक है। चुनाव नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। यह बीएमसी चुनावों के इतिहास में भाजपा के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पार्टी ने शहरी मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ और संगठनात्मक मजबूती का स्पष्ट प्रदर्शन किया है। वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भी गठबंधन सहयोगी के रूप में अहम योगदान दिया। विपक्ष को करारा झटका इन चुनावों में विपक्षी दलों को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई। लंबे समय से बीएमसी पर वर्चस्व रखने वाली उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना का प्रदर्शन कमजोर रहा, जबकि कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) भी प्रभावी चुनौती पेश करने में नाकाम रहीं। सबसे चौंकाने वाला परिणाम राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) को लेकर सामने आया। एमएनएस न सिर्फ सीमित सीटों पर सिमट गई, बल्कि उसका प्रदर्शन एआईएमआईएम (असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी) से भी पीछे रहा। यह नतीजा मुंबई की राजनीति में बदलते समीकरणों और मतदाताओं की प्राथमिकताओं में आए बदलाव को दर्शाता है। शहरी विकास बना प्रमुख मुद्दा विश्लेषकों के अनुसार इस चुनाव में बुनियादी सुविधाएं, सड़कें, जल निकासी, साफ-सफाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे मतदाताओं के लिए निर्णायक रहे। महायुति ने अपने प्रचार में विकास, स्थिर प्रशासन और “डबल इंजन सरकार” के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, जिसका सीधा लाभ गठबंधन को मिला। स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद अब बीएमसी में महायुति का महापौर बनना लगभग तय माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मुंबई के प्रशासन और विकास कार्यों को लेकर नई नीतियों और तेज फैसलों की शुरुआत होगी। कुल मिलाकर, बीएमसी चुनाव परिणामों ने न सिर्फ मुंबई बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी नए संकेत दे दिए हैं, जहां सत्ताधारी गठबंधन मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है और विपक्ष को आत्ममंथन की जरूरत महसूस हो रही है।
“राम मंदिर को लेकर संत-महंतों की सियासत तेज, राहुल गांधी की अयोध्या यात्रा पर शंकराचार्य का तीखा बयान”
अयोध्या। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संभावित अयोध्या दौरे को लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर साधु-संतों तक बहस तेज हो गई है। इसी बीच ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के एक बयान ने विवाद को और हवा दे दी है। शंकराचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर राहुल गांधी अयोध्या पहुंचते भी हैं, तो उन्हें राम मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाना चाहिए, क्योंकि वे हिंदू नहीं हैं। दरअसल, हाल के दिनों में यह चर्चा जोरों पर है कि राहुल गांधी राम मंदिर दर्शन के लिए अयोध्या जा सकते हैं। जैसे ही यह खबर सामने आई, वैसे ही धार्मिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ संतों ने इसे व्यक्तिगत आस्था का विषय बताया, तो वहीं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे धार्मिक पहचान से जोड़ते हुए कड़ा रुख अपनाया। शंकराचार्य का बयान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि राम मंदिर हिंदू आस्था का केंद्र है और इसमें प्रवेश के लिए व्यक्ति का हिंदू होना आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी स्वयं को हिंदू मानने की स्पष्ट घोषणा नहीं करते, ऐसे में उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए। शंकराचार्य का कहना है कि यह मुद्दा राजनीति का नहीं, बल्कि धार्मिक मर्यादा और परंपरा का है। राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया शंकराचार्य के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि राहुल गांधी का मंदिर जाना उनकी निजी आस्था का विषय है और किसी को भी उनकी धार्मिक पहचान पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है। वहीं, विरोधी दल इसे कांग्रेस की “सॉफ्ट हिंदुत्व” राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं। अयोध्या की पवित्रता और सियासत अयोध्या लंबे समय से धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजनीतिक बहसों का केंद्र रही है। राम मंदिर निर्माण के बाद यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया है। ऐसे में किसी बड़े राजनीतिक नेता की यात्रा और उस पर दिए गए बयान स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाते हैं। फिलहाल राहुल गांधी की अयोध्या यात्रा को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन उससे पहले ही शंकराचार्य का यह बयान देशभर में नई बहस छेड़ चुका है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति और धर्म के बीच खींचतान किस दिशा में जाती है।
देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मकर संक्रांति का पर्व, गोरखपुर में सीएम योगी ने चढ़ाई खिचड़ी, संगम-घाटों पर श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
न्यूज डेस्क: देशभर में आज मकर संक्रांति का पावन पर्व पूरे श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही इस महापर्व की शुरुआत हुई, जिसे लेकर उत्तर भारत सहित कई राज्यों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और स्नान का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर पहुंचकर महायोगी गुरु गोरखनाथ को परंपरागत रूप से खिचड़ी अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने लोकमंगल और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व सामाजिक समरसता, सेवा और सनातन परंपराओं का प्रतीक है। वहीं प्रयागराज के पावन संगम तट पर तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। घना कोहरा और कड़ाके की ठंड के बावजूद लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में आस्था की डुबकी लगाते नजर आए। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। काशी नगरी वाराणसी के गंगा घाटों पर भी मकर संक्रांति का विशेष उल्लास देखने को मिला। दशाश्वमेध, अस्सी और अन्य प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं ने स्नान कर दान-पुण्य किया। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना हुई और हर-हर महादेव के जयकारों से घाट गूंज उठे। उल्लेखनीय है कि मकर संक्रांति को दान, स्नान और सूर्य उपासना का महापर्व माना जाता है। इस दिन खिचड़ी, तिल, गुड़ और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में यह पर्व विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जा रहा है, लेकिन आस्था और संस्कृति का भाव हर जगह समान रूप से दिखाई दे रहा है।
ईरान में हालात बेहद तनावपूर्ण, भारतीय नागरिकों को तुरंत सतर्क रहने की चेतावनी
विदेश मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी, गैर-जरूरी यात्रा से बचने की अपील नई दिल्ली/तेहरान: ईरान में लगातार बिगड़ते सुरक्षा हालात को देखते हुए भारत सरकार ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों (PIO) के लिए अहम एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील हैं, ऐसे में सभी भारतीय नागरिक अत्यधिक सतर्कता बरतें और अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। एडवाइजरी में क्या कहा गया है? विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार, “ईरान में रह रहे सभी भारतीय नागरिक और PIO अत्यधिक सावधानी बरतें। किसी भी प्रकार के विरोध-प्रदर्शन, रैलियों या भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहें। स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें।” इसके साथ ही गैर-जरूरी यात्रा से बचने और जहां संभव हो सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि भारतीय दूतावास के संपर्क में लगातार बने रहें। ईरान में कैसे हैं हालात? ईरान में हालात तेजी से गंभीर होते जा रहे हैं। विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में हिंसा और अस्थिरता के चलते अब तक हजारों लोगों की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं। बताया जा रहा है कि हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाले इस देश में आम नागरिकों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अमेरिकी हमले की आशंका से बढ़ी चिंता इस बीच ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और सैन्य गतिविधियों की खबरों ने हालात को और ज्यादा विस्फोटक बना दिया है। ऐसे में विदेशी नागरिकों, खासकर भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारतीय दूतावास की अपील ईरान में मौजूद भारतीय दूतावास ने भी भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत दूतावास से संपर्क करें, अपनी जानकारी अपडेट रखें और अफवाहों से दूर रहें। ईरान में मौजूदा हालात को देखते हुए भारत सरकार पूरी तरह सतर्क है। विदेश मंत्रालय की यह एडवाइजरी साफ संकेत देती है कि स्थिति गंभीर बनी हुई है और किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है। भारतीय नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे संयम, सतर्कता और सरकारी निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।
माघ मेला में अफरा-तफरी: सेक्टर-5 के शिविर में भीषण आग, मची भगदड़; दमकल ने पाया काबू
प्रयागराज। माघ मेला क्षेत्र में मंगलवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सेक्टर-5 स्थित एक शिविर में अचानक भीषण आग लग गई। आग की तेज लपटें और धुएं का गुबार दूर से ही दिखाई देने लगा, जिससे मेले में मौजूद श्रद्धालुओं और कल्पवासियों में दहशत फैल गई। हालात बिगड़ते देख लोग अपने-अपने तंबू छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे, जिससे कुछ देर के लिए भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, मेला प्रशासन और अग्निशमन विभाग की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने कई दमकल गाड़ियों की मदद से आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद आग को फैलने से रोक लिया गया, जिससे आसपास के अन्य शिविरों को बड़ा नुकसान होने से बचा लिया गया। प्रशासन के अनुसार, प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट या किसी ज्वलनशील सामग्री का संपर्क माना जा रहा है, हालांकि वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन शिविर में रखा सामान और तंबू पूरी तरह जलकर खाक हो गए। मेला प्रशासन ने मौके पर मौजूद लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और सुरक्षा के मद्देनजर पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए अग्नि सुरक्षा मानकों को और सख्ती से लागू किया जाएगा तथा शिविरों में बिजली और गैस के उपयोग की नियमित जांच की जाएगी। घटना के बाद माघ मेला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और चौकसी और मजबूत कर दी गई है, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित रूप से अपने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कर सकें।
‘ग्रीन फाइल’ से सत्ता की सियासत तक: बंगाल में ममता बनर्जी बनाम ईडी आमने-सामने, 2026 चुनाव से क्या है कनेक्शन?
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कथित ‘ग्रीन फाइल’ और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई ने राज्य की सियासत को गरमा दिया है। ईडी द्वारा राजनीतिक रणनीतिकार संस्था आई-पैक (I-PAC) पर की गई छापेमारी और इस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हस्तक्षेप ने इस पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह कार्रवाई केवल जांच तक सीमित है या फिर इसके तार 2026 के विधानसभा चुनाव से जुड़े हुए हैं। क्या है ‘ग्रीन फाइल’ विवाद सूत्रों के मुताबिक, ‘ग्रीन फाइल’ उन दस्तावेजों और डिजिटल जानकारियों को कहा जा रहा है, जिनमें कथित तौर पर चुनावी रणनीति, फंडिंग और राजनीतिक अभियानों से जुड़ी अहम जानकारियां दर्ज हैं। ईडी का आरोप है कि कोयला तस्करी से जुड़े अवैध धन का एक हिस्सा आई-पैक तक पहुंचा और उसका इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों में किया गया। आई-पैक पर ईडी की कार्रवाई ईडी ने कोयला तस्करी मामले की जांच के सिलसिले में आई-पैक से जुड़े ठिकानों पर छापा मारा। जांच एजेंसी का दावा है कि उनके पास ऐसे सबूत हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि अवैध फंड को राजनीतिक सलाह और चुनावी प्रबंधन में लगाया गया। इसी कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं मौके पर पहुंचीं और ईडी की टीम से सवाल-जवाब किए। ममता बनर्जी का पलटवार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईडी की कार्रवाई को “राजनीतिक बदले की भावना” से प्रेरित बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस को कमजोर करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। ममता ने कहा कि बंगाल में लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर हमला किया जा रहा है। भाजपा का आरोप वहीं भाजपा ने ममता बनर्जी के हस्तक्षेप पर कड़ा एतराज जताया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जांच एजेंसी को अपना काम करने से रोका गया और इससे साफ होता है कि सरकार कुछ छिपाना चाहती है। भाजपा ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सजा मिले, चाहे वे कितने भी बड़े पद पर क्यों न हों। 2026 चुनाव से कनेक्शन? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरा विवाद 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल को प्रभावित कर सकता है। एक तरफ ममता बनर्जी इसे केंद्र बनाम राज्य की लड़ाई के रूप में पेश कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा इसे भ्रष्टाचार और अवैध फंडिंग का मामला बता रही है। ऐसे में ‘ग्रीन फाइल’ बंगाल की राजनीति में एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकती है। फिलहाल ईडी अपनी जांच पर कायम है और आने वाले दिनों में और पूछताछ व कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। वहीं तृणमूल कांग्रेस इसे जनसमर्थन जुटाने के अवसर के रूप में देख रही है। साफ है कि ‘ग्रीन फाइल’ विवाद ने बंगाल की राजनीति को एक बार फिर तीखे टकराव के रास्ते पर ला खड़ा किया है, जिसका असर 2026 के चुनावी रण में साफ नजर आ सकता है।