नई दिल्ली। देश के पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की बहुप्रतीक्षित और अब तक अप्रकाशित आत्मकथा ‘Four Stars of Destiny’ के ऑनलाइन लीक होने से सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़ा बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दिल्ली पुलिस ने इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, यह आत्मकथा अभी आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई थी और इसके कुछ हिस्से सोशल मीडिया व अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गए। खास बात यह है कि किताब में वर्ष 2020 के गलवान घाटी संघर्ष, भारत-चीन सैन्य टकराव, और पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर बने हालात से जुड़े कई संवेदनशील विवरण शामिल बताए जा रहे हैं। रक्षा मंत्रालय की मंजूरी थी लंबित जानकारी के अनुसार, आत्मकथा के प्रकाशन से पहले इसे रक्षा मंत्रालय की पूर्व स्वीकृति मिलना आवश्यक था, जो अभी लंबित थी। ऐसे में पुस्तक का लीक होना न केवल कॉपीराइट कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी सवाल खड़े करता है। कौन है लीक का जिम्मेदार? दिल्ली पुलिस की साइबर और इंटेलिजेंस यूनिट यह पता लगाने में जुटी है कि यह सामग्री किसने और किस माध्यम से सार्वजनिक की। जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि कहीं यह लीक जानबूझकर तो नहीं किया गया, ताकि भारत-चीन संबंधों या सैन्य रणनीति को लेकर गलत संदेश फैलाया जा सके। सेना और सुरक्षा हलकों में हलचल सेना से जुड़े वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि किसी भी पूर्व सेनाध्यक्ष की आत्मकथा में रणनीतिक निर्णयों और सैन्य अभियानों का उल्लेख बेहद संवेदनशील माना जाता है। बिना मंजूरी ऐसे दस्तावेजों का सार्वजनिक होना सुरक्षा प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है। जनरल नरवणे का कार्यकाल और पुस्तक का महत्व जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक भारतीय थलसेना प्रमुख के रूप में कार्य किया। उनके कार्यकाल के दौरान भारत ने न केवल गलवान जैसी चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना किया, बल्कि चीन के साथ सैन्य व कूटनीतिक स्तर पर कई अहम निर्णय भी लिए। ऐसे में उनकी आत्मकथा को सैन्य इतिहास के एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में देखा जा रहा था। फिलहाल, दिल्ली पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह तय माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस लीक से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।
अब ईपीएफ निकासी होगी झटपट: अप्रैल में लॉन्च होगा EPFO 3.0 मोबाइल ऐप, UPI से सीधे खाते में आएंगे पैसे
डिजिटल डेस्क: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने करोड़ों खाताधारकों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। ऑनलाइन सेवाओं को और सरल, तेज़ व यूज़र-फ्रेंडली बनाने की दिशा में EPFO अब एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। EPFO 3.0 के तहत जल्द ही कर्मचारी अपने ईपीएफ खाते से यूपीआई (UPI) के जरिए तत्काल राशि निकाल सकेंगे। इसके लिए अप्रैल 2026 में EPFO का नया मोबाइल एप लॉन्च किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, इस नए मोबाइल एप के जरिए कर्मचारी भविष्य निधि खाते से सीधे अपने बैंक खाते में यूपीआई के माध्यम से रकम ट्रांसफर कर सकेंगे। यानी अब लंबी प्रक्रिया, इंतजार और बार-बार आवेदन करने की झंझट से मुक्ति मिलने वाली है। ट्रायल सफल, अप्रैल में लॉन्च की तैयारी श्रम मंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि मोबाइल ऐप और यूपीआई आधारित निकासी सुविधा का ट्रायल शुरू हो चुका है। फिलहाल 100 से अधिक डमी ईपीएफ खातों पर इसका परीक्षण किया जा रहा है। ट्रायल के नतीजे सकारात्मक रहे हैं और अप्रैल में इसे देशभर में लॉन्च करने की तैयारी है। कितनी रकम निकलेगी? जानिए नियम हालांकि, यूपीआई के जरिए निकासी पर कुछ सीमाएं तय होंगी। लेबर कोड के नए नियमों के तहत ईपीएफ खाते की न्यूनतम 25 प्रतिशत राशि को फ्रीज किया जाएगा। इसके बाद बची हुई राशि में से खाताधारक अपनी आवश्यकता के अनुसार यूपीआई के माध्यम से तत्काल निकासी कर सकेंगे। सिर्फ निकासी ही नहीं, ये सुविधाएं भी मिलेंगी नए मोबाइल एप के जरिए खाताधारक: ईपीएफ पासबुक बैलेंस देख सकेंगे क्लेम स्टेटस ट्रैक कर सकेंगे प्रोफाइल व केवाईसी अपडेट कर सकेंगे अन्य EPFO सेवाओं का लाभ एक ही प्लेटफॉर्म पर उठा सकेंगे हालांकि, यूएएन पोर्टल और उमंग ऐप की मौजूदा सेवाएं भी पहले की तरह उपलब्ध रहेंगी। नया ऐप केवल एक अतिरिक्त और तेज़ विकल्प होगा। अभी कैसी है निकासी प्रक्रिया? वर्तमान में ईपीएफ खाताधारकों को राशि निकालने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है, जिसमें कई बार लंबा समय लग जाता है। हालांकि ऑटो-सेटलमेंट मोड के तहत दावा दाखिल होने के तीन दिनों के भीतर भुगतान हो जाता है। हाल ही में EPFO ने ऑटो-सेटलमेंट की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी है। हर साल 5 करोड़ से ज्यादा दावे मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, EPFO हर साल 5 करोड़ से अधिक दावों का निपटान और भुगतान करता है। ऐसे में यूपीआई आधारित तत्काल निकासी सुविधा लागू होने से न सिर्फ कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि EPFO की कार्यप्रणाली भी और अधिक डिजिटल व पारदर्शी बनेगी। कुल मिलाकर, EPFO 3.0 के साथ भविष्य निधि से जुड़ी सेवाएं अब पहले से कहीं ज्यादा तेज़, आसान और आधुनिक होने जा रही हैं। कर्मचारियों के लिए यह बदलाव डिजिटल इंडिया की दिशा में एक और मजबूत कदम माना जा रहा है।
लोकसभा में विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन, ‘राहुल गांधी को बोलने दो’ के नारों के बीच कार्यवाही स्थगित
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान सियासी टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को भी लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही जोरदार हंगामा देखने को मिला, जिसके चलते सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। विपक्षी सांसदों की नारेबाजी और लगातार व्यवधान के कारण प्रश्नकाल भी नहीं चल सका। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन में व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि नियमों के तहत बोलने का अधिकार सभी सदस्यों को है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सदन गतिरोध, नारेबाजी और हंगामे के लिए नहीं, बल्कि गंभीर चर्चा और जनहित के मुद्दों पर संवाद के लिए है। स्पीकर की इस टिप्पणी के बावजूद विपक्ष का प्रदर्शन जारी रहा। इस बीच सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहा है। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी दलों के नेताओं ने सदन में बैठक की, जिसमें इस प्रस्ताव को लेकर रणनीति पर मंथन किया गया। विपक्ष का आरोप है कि सदन में उनकी बातों को पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा। कार्यवाही के दौरान विपक्षी सांसदों ने ‘राहुल गांधी को बोलने दो’ के नारे लगाए और सरकार पर लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का आरोप लगाया। कांग्रेस पार्टी ने साफ तौर पर कहा है कि यदि राहुल गांधी को सदन में अपनी बात रखने का अवसर दिया जाता है तो कार्यवाही सुचारू रूप से चल सकती है, अन्यथा संसद में लगातार हंगामे की स्थिति बनी रहेगी। इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ संसद पहुंचे। सदन के कामकाज को लेकर पूछे गए सवाल पर खरगे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “कौन कहता है कि आज सदन नहीं चलेगा?”—उनके इस बयान को विपक्ष की ओर से सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, बजट सत्र के बीच बढ़ता राजनीतिक टकराव न सिर्फ संसद की कार्यवाही को प्रभावित कर रहा है, बल्कि अहम विधायी चर्चाओं पर भी विराम लगा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार और विपक्ष के बीच कोई सहमति बन पाएगी, या आने वाले दिनों में संसद का गतिरोध और गहराएगा।
डिजिटल डेस्क : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बांग्लादेश में रहने वाले हिंदू समाज से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा है कि आज भी वहां करीब 1.25 करोड़ हिंदू मौजूद हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि यह समुदाय संगठित होकर लोकतांत्रिक और राजनीतिक व्यवस्था का सही ढंग से उपयोग करे, तो वह अपने अधिकारों, सुरक्षा और भविष्य को मजबूत बना सकता है। मोहन भागवत ने कहा कि किसी भी समाज की शक्ति उसकी संख्या से अधिक उसकी एकता में होती है। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय ऐतिहासिक रूप से समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का वाहक रहा है, लेकिन समय-समय पर उसे असुरक्षा और भेदभाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में संगठन और सामूहिक प्रयास ही स्थायी समाधान का रास्ता खोलते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक सहभागिता बेहद महत्वपूर्ण है। वोट, संवाद और संवैधानिक अधिकारों के माध्यम से समाज अपनी बात मजबूती से रख सकता है। भागवत ने कहा कि एकजुट हिंदू समाज न केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है, बल्कि सामाजिक सम्मान और विकास की दिशा में भी निर्णायक भूमिका निभा सकता है। आरएसएस प्रमुख ने अपील की कि समाज के भीतर आपसी मतभेद भुलाकर सांस्कृतिक पहचान, शिक्षा और सामाजिक सहयोग को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि जागरूकता और संगठन के बल पर बांग्लादेशी हिंदू समुदाय अपने लिए बेहतर भविष्य गढ़ सकता है। मोहन भागवत का यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब दक्षिण एशिया में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज है। उनकी यह अपील बांग्लादेशी हिंदुओं के बीच आत्मविश्वास और सामूहिक शक्ति का संचार करने वाली मानी जा रही है।
अग्निवीर भर्ती 2026: नियमों में बड़ा बदलाव, अब सिर्फ अविवाहित युवाओं को मिलेगा मौका
नई दिल्ली। भारतीय सेना में अग्निवीर बनने का सपना देख रहे लाखों युवाओं के लिए साल 2026 की भर्ती प्रक्रिया कई अहम बदलावों के साथ सामने आई है। सेना ने भर्ती नियमों को और अधिक अनुशासित एवं सेवा-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से कुछ सख्त शर्तें लागू की हैं, जिनका सीधा असर उम्मीदवारों की पात्रता पर पड़ेगा। केवल अविवाहित उम्मीदवार ही होंगे पात्र ई व्यवस्था के तहत अब केवल अविवाहित पुरुष उम्मीदवारों को ही अग्निवीर भर्ती में आवेदन करने की अनुमति दी जाएगी। यदि कोई अभ्यर्थी विवाहित पाया जाता है या भर्ती प्रक्रिया के दौरान विवाह करता है, तो उसकी उम्मीदवारी तत्काल रद्द की जा सकती है। चार साल की सेवा अवधि में शादी पर पूरी तरह रोक सेना ने यह भी स्पष्ट किया है कि अग्निवीर के रूप में चयनित होने के बाद चार साल की सेवा अवधि के दौरान विवाह की अनुमति नहीं होगी। इस अवधि में यदि कोई अग्निवीर नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें सेवा से निष्कासन भी शामिल हो सकता है। क्यों किए गए ये बदलाव सेना सूत्रों के मुताबिक, इन बदलावों का मकसद अग्निवीरों का पूरा ध्यान प्रशिक्षण, अनुशासन और राष्ट्रीय सेवा पर केंद्रित रखना है। कम उम्र में पारिवारिक जिम्मेदारियों से दूर रहकर जवान अपनी शारीरिक, मानसिक और पेशेवर क्षमताओं को बेहतर ढंग से विकसित कर सकें, यही इस नीति का मूल उद्देश्य है। भर्ती प्रक्रिया में अनुशासन को मिलेगी मजबूती अधिकारियों का मानना है कि सख्त नियमों से सेना में अनुशासन और कार्यक्षमता दोनों में सुधार होगा। अग्निवीर योजना को दीर्घकालिक रूप से सफल बनाने के लिए यह कदम जरूरी बताया जा रहा है। युवाओं को क्या रखना होगा ध्यान में आवेदन से पहले वैवाहिक स्थिति की सही जानकारी देना अनिवार्य सेवा अवधि के दौरान विवाह न करने का शपथ पत्र नियमों के उल्लंघन पर सेवा समाप्ति का जोखिम देश सेवा का मौका, लेकिन शर्तों के साथ अग्निवीर योजना युवाओं को कम उम्र में भारतीय सेना से जुड़ने और देश सेवा का सुनहरा अवसर देती है। हालांकि, 2026 की भर्ती में लागू किए गए नए नियम यह साफ संकेत देते हैं कि यह अवसर कड़े अनुशासन और प्रतिबद्धता के साथ ही मिलेगा।
मलेशिया में गूंजेगा भारत का डिजिटल दम: पीएम मोदी का ऐलान—जल्द मलेशिया पहुंचेगा UPI
कुआलालंपुर | विशेष रिपोर्ट: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर मलेशिया पहुंचे, जहां उन्होंने भारत–मलेशिया संबंधों को नई डिजिटल ऊंचाइयों पर ले जाने का बड़ा संकेत दिया। कुआलालंपुर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने ऐलान किया कि भारत का विश्वप्रसिद्ध डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) जल्द ही मलेशिया में भी शुरू किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करेगा। उन्होंने इसे “डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि” करार दिया। डिजिटल सहयोग को मिलेगा नया आयाम पीएम मोदी ने अपने संबोधन में बताया कि भारत और मलेशिया के बीच डिजिटल साझेदारी तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “मलेशिया–भारत डिजिटल काउंसिल हमारे डिजिटल सहयोग के लिए नए मार्ग खोल रही है। मुझे यह साझा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत की यूपीआई जल्द ही मलेशिया में भी आ जाएगी।” UPI के मलेशिया पहुंचने से वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों को भी तेज, सुरक्षित और आसान डिजिटल भुगतान की सुविधा मिलेगी। इससे व्यापार, पर्यटन और रोजमर्रा के लेनदेन में उल्लेखनीय तेजी आने की उम्मीद है। भारतीय आईटी कंपनियों की मजबूत मौजूदगी प्रधानमंत्री मोदी ने मलेशिया में भारतीय आईटी कंपनियों की अहम भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 100 से अधिक भारतीय आईटी कंपनियां मलेशिया में सक्रिय हैं, जिनके जरिए हजारों लोगों को रोजगार मिला है। यह भारत की तकनीकी क्षमता और वैश्विक विश्वास का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियां न केवल तकनीक ला रही हैं, बल्कि कौशल विकास, नवाचार और रोजगार सृजन में भी अहम योगदान दे रही हैं। भारतीय समुदाय को बताया ‘सेतु’ अपने संबोधन में पीएम मोदी ने मलेशिया में बसे भारतीय समुदाय की सराहना करते हुए उन्हें भारत और मलेशिया के बीच “सांस्कृतिक और आर्थिक सेतु” बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय समुदाय ने मलेशिया की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और भारत को उन पर गर्व है। भविष्य की ओर मजबूत कदम विशेषज्ञों के अनुसार, UPI का मलेशिया में विस्तार भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की वैश्विक स्वीकार्यता को और मजबूत करेगा। यह कदम भारत को डिजिटल नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक और निर्णायक पहल माना जा रहा है। प्रधानमंत्री की यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा देगी, बल्कि डिजिटल युग में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को भी रेखांकित करेगी।
सूरजकुंड मेले में बड़ा हादसा: झूला टूटने से अफरातफरी, इंस्पेक्टर की मौत, एक दर्जन से ज्यादा घायल
फरीदाबाद। अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में शुक्रवार शाम उस वक्त हड़कंप मच गया, जब मेले के भीतर लगा एक झूला अचानक टूटकर गिर पड़ा। यह दर्दनाक हादसा शाम करीब 6:15 बजे हुआ, जिसमें एक दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। झूला गिरते ही मेला ग्राउंड में अफरातफरी मच गई और चीख-पुकार का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, झूले पर सवार लोग अचानक जमीन पर गिर पड़े। मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासन की टीम ने तुरंत राहत-बचाव कार्य शुरू किया। सभी घायलों को तत्काल फरीदाबाद के निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। हादसे के दौरान लोगों को बचाने के प्रयास में इंस्पेक्टर रैंक के एक अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें भी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना से पुलिस विभाग और प्रशासन में शोक की लहर दौड़ गई है। हादसे की सूचना मिलते ही जिला उपायुक्त और पुलिस कमिश्नर सहित तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। एहतियातन पुलिस ने पूरे घटनास्थल को बैरिकेट कर दिया है और मेले में सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा समीक्षा की जा रही है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने इस दर्दनाक हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृतक अधिकारी के परिजनों के प्रति संवेदना जताते हुए घायलों के समुचित इलाज के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हादसे की जांच के लिए एक विशेष कमेटी का गठन कर दिया है। झूले की तकनीकी स्थिति, सुरक्षा मानकों और लापरवाही के पहलुओं की जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया है। इस हादसे ने सूरजकुंड मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल मेले में लगे अन्य झूलों और मनोरंजन साधनों की भी जांच शुरू कर दी गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।
अमेरिका ने PoK को भारत का हिस्सा माना, पाकिस्तान को बड़ा झटका — अंतरिम ट्रेड डील के बीच नई राजनीति
नई दिल्ली : भारत–अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते के ऐलान के बाद एक बेहद संवेदनशील राजनीतिक मोड़ सामने आया है, जिसने दक्षिण एशिया की कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है। संयुक्त राज्य अमेरिका के Office of the U.S. Trade Representative (USTR) द्वारा जारी एक मानचित्र में पूरा जम्मू-कश्मीर, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) भी शामिल है, भारतीय सीमा के अंदर दिखाया गया है। इस कदम को विशेषज्ञों ने पाकिस्तान के लिए “कूटनीतिक झटका” बताया है और यह अमेरिका के कश्मीर पर रुख में संभावित बदलाव का संकेत माना जा रहा है। क्या कहा अमेरिका ने? अमेरिका के ट्रेड प्रतिनिधि कार्यालय ने जो मानचित्र X (पूर्व ट्विटर) पर साझा किया है, उसमें जम्मू-कश्मीर और PoK को स्पष्ट रूप से भारत का हिस्सा दिखाया गया है — जो कि अब तक चल रहे विवादित दावों के विपरीत एक स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। यह मानचित्र भारत–अमेरिका के अंतरिम व्यापार समझौते के घोषणा के साथ प्रकाशित किया गया, जिससे यह कूटनीतिक एवं आर्थिक संदेश दोनों के रूप में पढ़ा जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, यह एक सामरिक राजनीतिक संकेत है जो दिखाता है कि अमेरिका भारत की “क्षेत्रीय अखंडता” के पक्ष में मजबूत समर्थन दिखाना चाहता है — एक ऐसा रुख जो पाकिस्तान के longstanding दावे को चुनौती देता प्रतीत होता है। अंतरिम ट्रेड समझौता: क्या है और क्यों अहम? आज दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा (framework) पर सहमति व्यक्त की है, जिसमें प्रमुख बिंदु शामिल हैं: अमेरिका भारतीय निर्यात पर 18% टैक्स लागू करेगा, जो पहले काफी अधिक था। भारत अमेरिका से आयात पर कुछ टैक्स हटाने या घटाने के लिए सहमत हुआ है। समझौता भविष्य में एक विस्तृत द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट की दिशा में कदम है। यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक, कूटनीतिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है — खासकर चीन के बढ़ते प्रभाव और वैश्विक आपूर्ति-शृंखला के पुनर्गठन के बीच। पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और राजनीतिक माहौल इस कदम को देखने के बाद पाकिस्तान में खासा प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया है। PoK मुद्दे पर पाकिस्तान के नेताओं की पुरानी बयानबाज़ी को देखते हुए यह कदम उन्हें खासा राजनीतिक चुनौती देता है। PoK हमेशा से एक संवेदनशील विषय रहा है, जिस पर भारत ने हमेशा इसे भारतीय अखंडता का हिस्सा बताया है और पाकिस्तान ने इसका विरोध किया है। विशेष रूप से, पाक अधिकृत कश्मीर में हाल ही में प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ द्वारा दिया गया भाषण भी इसी असमंजस का उदाहरण है, जिसमें उन्होंने कश्मीर को अंततः पाकिस्तान का हिस्सा बनने की बात कही थी। ♦अमेरिका का मानचित्र साझा करना सिर्फ एक वाणिज्यिक बयान नहीं है — यह राजनीतिक संदेश भी है। ♦अमेरिका ने कूटनीतिक तौर पर PoK को भारत का हिस्सा दिखाकर अपने रुख में स्पष्टता या बदल को संकेत दिया है। ♦यह कदम भारत-अमेरिका रिश्तों में नयी मजबूती का प्रतीक माना जा रहा है, जबकि पाकिस्तान को यह एक बड़ा सियासी झटका माना जा रहा है। अंतरिम ट्रेड समझौता दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने की दिशा में पहला कदम है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील: जीरो टैरिफ से खुलेगा कारोबार का नया अध्याय, किसानों और MSMEs को बड़ी राहत
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चली आ रही व्यापार वार्ताओं के बाद आखिरकार एक अहम अंतरिम ट्रेड डील (Interim Trade Deal) पर सहमति बन गई है। इस समझौते को दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। डील के तहत अमेरिका कई भारतीय उत्पादों पर लगाए गए भारी टैरिफ में बड़ी कटौती करेगा, वहीं कुछ चुनिंदा सेक्टरों में जीरो टैरिफ की व्यवस्था भी की जाएगी। 50% से घटकर 18% होगा अमेरिकी टैरिफ इस समझौते के अनुसार अमेरिका भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को औसतन 50% से घटाकर 18% करेगा। इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी और अमेरिका के विशाल बाजार में भारतीय उत्पाद पहले से सस्ते और आकर्षक बनेंगे। किन सेक्टरों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा इस ट्रेड डील का सीधा लाभ भारत के MSMEs, किसानों और मछुआरों को मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर निम्न क्षेत्रों में राहत मिलेगी— कृषि उत्पाद: चावल, मसाले, दालें और ऑर्गेनिक उत्पाद मत्स्य उद्योग: झींगा, मछली और सी-फूड एक्सपोर्ट MSME सेक्टर: टेक्सटाइल, लेदर, हैंडीक्राफ्ट और इंजीनियरिंग गुड्स फूड प्रोसेसिंग और एग्री-बेस्ड प्रोडक्ट्स इन क्षेत्रों में कुछ उत्पादों पर जीरो टैरिफ लागू होने की संभावना है, जिससे निर्यात लागत में भारी कमी आएगी। रोजगार और विदेशी मुद्रा पर पड़ेगा सकारात्मक असर विशेषज्ञों का मानना है कि इस डील से भारत में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे निर्यात में बढ़ोतरी होगी विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा खासतौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और तटीय क्षेत्रों में इसका असर साफ दिख सकता है। भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी मजबूती यह ट्रेड डील केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत करेगी। वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका बढ़ेगी और अमेरिका के लिए भारत एक भरोसेमंद ट्रेड पार्टनर के रूप में उभरेगा। अंतिम समझौते की ओर बढ़ते कदम फिलहाल यह एक अंतरिम समझौता है, लेकिन दोनों देशों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले महीनों में इसे पूर्ण व्यापार समझौते (Comprehensive Trade Agreement) में बदला जा सकता है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील को भारत की अर्थव्यवस्था, खासकर छोटे उद्यमियों और किसानों के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है।
“आईना देख लिया तो सच से भाग नहीं पाओगे” — कांग्रेस पर पीएम मोदी का अब तक का सबसे कड़ा प्रहार
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश अब पीछे मुड़कर देखने के बजाय तेज़ रफ्तार से आगे बढ़ रहा है, लेकिन कांग्रेस आज भी भ्रम और झूठ की राजनीति में उलझी हुई है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “तुम कितना दुनिया को धोखा दोगे, आईना देख लिया तो सच्चाई कहां छिपाओगे।” यह बयान हाल के वर्षों में कांग्रेस के खिलाफ उनका सबसे सख्त हमला माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आज “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पर सवार है और विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों तक कांग्रेस के शासन में देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। “कांग्रेस के लंबे शासनकाल में एक भी बड़ी ट्रेड डील नहीं हो सकी, जबकि आज भारत वैश्विक मंच पर मज़बूती से अपनी बात रख रहा है,” पीएम मोदी ने कहा। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस की नीतियों और निर्णयों की कमी का खामियाजा देश को वर्षों तक भुगतना पड़ा। “कांग्रेस की वजह से देश की अर्थव्यवस्था पीछे रह गई। अवसर थे, लेकिन नीयत और नेतृत्व की कमी के कारण उनका सही इस्तेमाल नहीं हुआ,” प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया। पीएम मोदी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का ज़िक्र करते हुए कहा कि आज भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और वैश्विक ट्रेड समझौतों के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि अब देश पुराने ढर्रे की राजनीति नहीं, बल्कि परिणाम देने वाली राजनीति चाहता है। प्रधानमंत्री के इस बयान को आगामी राजनीतिक घटनाक्रम और चुनावी माहौल के संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोदी का यह हमला कांग्रेस की आर्थिक नीतियों और विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार है, जिससे सियासी बयानबाज़ी और तेज़ हो सकती है।