रिलायंस इंडस्ट्रीज का दमदार Q3 प्रदर्शन: मुनाफा 18,645 करोड़ रुपये, कुल आय 2.65 लाख करोड़ रुपये

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस तिमाही में 18,645 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है, जबकि कुल आय 2.65 लाख करोड़ रुपये रही। नतीजों से यह साफ है कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालात के बावजूद रिलायंस के प्रमुख बिज़नेस सेगमेंट्स ने स्थिर और मजबूत प्रदर्शन किया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड EBITDA 6.1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 50,932 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस बढ़ोतरी में डिजिटल सर्विसेज़ और ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) सेगमेंट की अहम भूमिका रही। इन दोनों क्षेत्रों में बेहतर कमाई ने अपस्ट्रीम ऑयल और गैस बिज़नेस की कमजोरी के असर को काफी हद तक संतुलित कर दिया। डिजिटल बिज़नेस की बात करें तो रिलायंस जियो और इससे जुड़ी सेवाओं में लगातार बढ़ती ग्राहक संख्या और डेटा खपत ने आय को मजबूती दी। वहीं, O2C सेगमेंट में परिचालन दक्षता और बेहतर मार्जिन ने EBITDA को सपोर्ट किया। हालांकि, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कंपनी के अपस्ट्रीम बिज़नेस पर देखने को मिला, लेकिन विविध बिज़नेस मॉडल के चलते इसका कुल नतीजों पर सीमित प्रभाव पड़ा। कुल मिलाकर, रिलायंस इंडस्ट्रीज के Q3 नतीजे यह दर्शाते हैं कि कंपनी का फोकस डिजिटल, रिटेल और O2C जैसे मजबूत स्तंभों पर बना हुआ है, जो कठिन बाजार परिस्थितियों में भी उसे स्थिर ग्रोथ की राह पर बनाए हुए हैं।

अलग-अलग डिजाइन वाले सिक्कों पर भ्रम खत्म, RBI का बड़ा स्पष्टीकरण

रिजर्व बैंक ने कहा—डिजाइन बदले हों तो भी सभी सिक्के पूरी तरह वैध, लेन-देन से इनकार गैरकानूनी नई दिल्ली, 13 दिसंबर:  अलग-अलग डिजाइन और आकार वाले सिक्कों को लेकर आम लोगों में फैली उलझन पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने स्थिति साफ कर दी है। RBI ने स्पष्ट किया है कि समय-समय पर जारी किए गए अलग-अलग डिजाइन वाले सभी सिक्के वैध हैं और उन्हें लेने-देने से कोई भी व्यक्ति या संस्था इनकार नहीं कर सकती। RBI के मुताबिक, सिक्कों के डिजाइन, आकार या धातु में बदलाव तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से किए जाते हैं। इसका मतलब यह नहीं होता कि पुराने या अलग डिजाइन वाले सिक्के अमान्य हो गए हैं। जब तक किसी सिक्के को आधिकारिक रूप से वापस (डिमोनेटाइज) करने की घोषणा नहीं की जाती, तब तक वह कानूनी मुद्रा बना रहता है। असली सिक्के की पहचान कैसे करें RBI ने बताया कि असली सिक्कों पर स्पष्ट रूप से जारी वर्ष, मूल्य अंकन और भारत सरकार का चिह्न अंकित होता है। सिक्के की धातु, वजन और उभरी हुई छपाई (एंबॉसिंग) भी उसकी प्रामाणिकता दर्शाती है। किसी भी तरह के संदेह की स्थिति में नजदीकी बैंक शाखा से जानकारी ली जा सकती है। लेन-देन से इनकार करना नियमों का उल्लंघन RBI ने दोहराया कि दुकानदार, परिवहन सेवाएं या कोई भी संस्था वैध सिक्कों को स्वीकार करने से मना नहीं कर सकती। ऐसा करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। केंद्रीय बैंक ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। इस स्पष्टीकरण के बाद उम्मीद है कि बाजार और रोजमर्रा के लेन-देन में सिक्कों को लेकर बनी भ्रम की स्थिति दूर होगी।

यूपी में प्रदूषण नियंत्रण पर बड़ा कदम: विश्व बैंक देगा 2700 करोड़ रुपये की मदद

लखनऊ, 12 दिसंबर: उत्तर प्रदेश में प्रदूषित हवा को साफ करने के लिए राज्य सरकार को विश्व बैंक से बड़ी राहत मिली है। विश्व बैंक ने लगभग 30 करोड़ डॉलर (करीब 2700 करोड़ रुपये) की आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है। यह धनराशि वर्ष 2030 तक विभिन्न चरणों में खर्च की जाएगी। राज्य सरकार इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से परिवहन, कृषि और उद्योग क्षेत्रों में प्रदूषण कम करने वाली योजनाओं पर करेगी। इसमें साफ ईंधन को बढ़ावा देना, पराली प्रबंधन में सुधार, औद्योगिक क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक लागू करना और शहरों में स्वच्छ परिवहन सुविधाएं विकसित करना शामिल होगा। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस सहायता से प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को नई गति मिलेगी और आने वाले वर्षों में प्रदेश में वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।

12 दिसंबर: रिटेल एम्पलॉयीज़ डे—क्यों मनाया जाता है और इसकी शुरुआत कैसे हुई?

नई दिल्ली , 11 दिसंबर: हर साल 12 दिसंबर को रिटेल एम्पलॉयीज़ डे मनाया जाता है। यह दिन उन सभी कर्मचारियों को समर्पित है जो दुकानों, सुपरमार्केट, मॉल, शोरूम और रिटेल चेन में काम करते हैं। इनकी मेहनत से ही हमें अपनी ज़रूरत की चीजें आसानी से मिल जाती हैं—कपड़ों से लेकर किराने तक और इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर दवाई तक। कैसे शुरू हुआ यह दिन? रिटेल एम्पलॉयीज़ डे की शुरुआत साल 2011 में नेशनल रिटेल फेडरेशन और विभिन्न रिटेल संगठनों ने मिलकर की थी। इसका उद्देश्य था—रिटेल कामगारों के योगदान को सामने लाना और उन्हें वह सम्मान देना, जिसका वे रोज़ हक़दार हैं। रिटेल सेक्टर में काम करने वालों का काम सिर्फ ग्राहक को सामान देना नहीं होता, बल्कि— स्टोर को खोलना–बंद करना स्टॉक संभालना ग्राहकों के सवालों और शिकायतों का समाधान कैश काउंटर की जिम्मेदारी त्योहारों और सेल सीजन में अतिरिक्त समय देना इन सभी जिम्मेदारियों को निभाने में ये कर्मचारी अक्सर अपनी छुट्टियाँ और त्यौहार भी त्याग देते हैं। 12 दिसंबर को ही क्यों चुना गया? इस तारीख के पीछे एक विशेष सोच है। दिसंबर का महीना रिटेल सेक्टर का सबसे व्यस्त महीना होता है—क्रिसमस, न्यू ईयर और विंटर सेल के कारण। ऐसे में 12 दिसंबर का दिन उन कर्मचारियों को धन्यवाद कहने का एक सुनहरा अवसर माना गया, क्योंकि वही इस पीक सीजन की असली रीढ़ होते हैं। इस दिन क्या होता है? कई कंपनियाँ 12 दिसंबर को अपने कर्मचारियों के लिए खास आयोजन करती हैं— धन्यवाद समारोह अवॉर्ड वितरण टीम इवेंट्स छोटे गिफ्ट या बोनस सोशल मीडिया कैंपेन कुछ ग्राहक भी इस दिन कर्मचारियों को “थैंक यू” कहकर या मुस्कुराकर उनका दिन खास बनाते हैं। रिटेल कर्मचारियों की असली भूमिका रिटेल कर्मचारी वह चेहरा हैं जिनसे ग्राहक सीधे जुड़ता है। वे किसी भी ब्रांड की पहली छवि बनाते हैं। उनकी वजह से— ग्राहक का अनुभव बेहतर होता है बिक्री बढ़ती है कंपनी की प्रतिष्ठा मजबूत होती है रिटेल सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है और इसमें करोड़ों लोग काम करते हैं। इसलिए यह दिन सिर्फ एक औपचारिकता नहीं बल्कि उनके बड़े योगदान का सम्मान है। क्यों है यह दिन महत्वपूर्ण? क्योंकि— रिटेल कर्मचारी रोज़ लंबे घंटे काम करते हैं कई बार तनावपूर्ण हालात में ग्राहकों को संभालते हैं त्योहारों और छुट्टियों में भी ड्यूटी पर रहते हैं ग्राहकों के लिए खरीदारी को आसान बनाते हैं इसलिए 12 दिसंबर हमें याद दिलाता है कि हर प्रोडक्ट, हर बिल और हर मुस्कान के पीछे किसी रिटेल कर्मचारी की मेहनत जुड़ी होती है।

कंपनी देसी, CEO विदेशी: भारत की उन एयरलाइंस पर एक नजर जिनकी कमान विदेशियों के हाथ में है – लिस्ट में टाटा का भी नाम

नई दिल्ली, 10 दिसंबर: भारत की एविएशन इंडस्ट्री आज तेजी से बदल रही है। एयर ट्रैवल बढ़ रहा है, नई टेक्नोलॉजी शामिल हो रही है और एयरलाइंस अपने संचालन को ग्लोबल स्टैंडर्ड पर ले जाने के लिए इंटरनेशनल टैलेंट पर दांव लगा रही हैं। खास बात यह है कि कई भारतीय एयरलाइंस की कमान अब विदेशी CEOs के हाथ में है—और इस सूची में टाटा समूह की बड़े ब्रांड भी शामिल है। 1. एयर इंडिया – कैंपबेल विल्सन (सिंगापुर) टाटा समूह के अधिग्रहण के बाद एयर इंडिया तेज़ी से ट्रांसफॉर्मेशन के दौर से गुजर रही है। कंपनी की बागडोर कैंपबेल विल्सन के हाथ में है, जो इससे पहले सिंगापुर एयरलाइंस और Scoot के साथ काम कर चुके हैं। उनका अनुभव एयर इंडिया के revival प्लान का अहम हिस्सा माना जा रहा है। 2. विस्तारा – विनोद कन्नन (सिंगापुर में जन्मे, अंतरराष्ट्रीय अनुभव वाले) टाटा और सिंगापुर एयरलाइंस के जॉइंट वेंचर विस्तारा की कमान भी एक ग्लोबल-एक्स्पोज़्ड CEO संभाल रहे हैं। विनोद कन्नन पहले Singapore Airlines के महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं और अब भारतीय मार्केट में प्रीमियम उड़ानों का मॉडल मजबूती से स्थापित कर रहे हैं। 3. इंडिगो – पीटर एल्बर्स (नीदरलैंड) भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो का संचालन पीटर एल्बर्स देख रहे हैं, जो KLM Royal Dutch Airlines के शीर्ष पदों पर लम्बे समय तक रहे। उनके नेतृत्व में इंडिगो अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर तेजी से विस्तार कर रही है। 4. आकासा एयर – विनय दुबे (अमेरिका में लंबे समय तक aviation अनुभव) हालांकि आकासा एयर पूरी तरह भारतीय कंपनी है, लेकिन इसके CEO विनय दुबे का अधिकतर अनुभव अमेरिकी एविएशन सिस्टम में रहा है। वे Delta और Jet Airways के साथ भी जुड़े रहे।

पीपीपी परियोजनाओं की ओर निजी क्षेत्र का आकर्षण बढ़ रहा है: निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली, 03 अक्टूबर: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि पिछले पांच वर्षों से सरकार विकास परियोजनाओं के लिए पूंजीगत व्यय में लगातार बढोतरी कर रही है और अब निजी-सरकारी भागीदारी (पीपीपी) परियोजनाओं में निजी क्षेत्र का आकर्षण भी दिख रहा है। श्रीमती सीतारमण यहां चौथे कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन (केईसी) का उद्घाटन भाषण देने के बाद एक सवाल का जवाब दे रही थीं। वित्त मंत्रालय के सहयोग से इंस्टिट्यूट ऑफ इकोनामिक ग्रोथ (आईईजी) द्वारा आयोजित ‘गहन वैश्विक अनिश्चिताओं के दौर में समृद्धि’ विषय पर तीन दिवसीय इस सम्मेलन में देश विदेश के अर्थशास्त्री, विशेषज्ञ, नीति निर्माता और वैश्विक संगठनों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। श्रीमती सीतारमण ने कहा कि इस समय पुरानी विश्व व्यवस्था के पैर की जमीन इतनी तेजी से खिसक रही है कि आगे क्या होगा, इसका सही अुमान लगाना कठिन है। पर उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अपने बूते खड़ी है इसलिए इस दौर में भी इसका प्रदर्शन मजबूत है। उन्होंने सम्मेलन से ऐसे सुझाओं ओर सिफारिशों की उम्मीद की जिसमें ऐसी बहु ध्रुवीय व्यवस्था को मजबूत किया जा सके जो गलाकाट होड़ की जगह सहयोग को बढ़ाने वाली हो तथा भारत जैसा विकासशील देश नई विश्व व्यवस्था के आयाम तय करने में अपनी भूमिका भी निभा सकें। उन्होंने अपने संबोधन के बाद एक सवाल के जबाब में कहा कि भारत सकल घरेलू उत्पाद ( जीडीपी) का कितना प्रतिशत पूंजी निवेश पर खर्च करने का लक्ष्य रखता, इसके लिए वह कोई अंक प्रस्तुत करना ठीक नहीं मातनी पर पिछले पांच साल से सरकारी पूंजीगत निवेश में लगातार वृद्धि हो रही है। सरकारी पूंजीगत निवेश में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। वित्त मंत्री ने कहा कि अब दिख रहा है कि निजी क्षेत्र भी पूंजी निवेश बढ़ाने में रूचि ले रहा है। पीपीपी परियोजनाओं के प्रति उसका आकर्षण दिखायी दे रहा है। श्रीमती सीतारमण ने यह भी कहा कि सरकार राज्यों को भी अपने-अपने क्षेत्र में अपनी जरूरत के हिसाब से विकास की परियोजाओं के विकास के लिए पूंजीगत व्यय के लिए मदद कर रही है। प्रयास है कि देश के हर क्षेत्र में निवेश बढे़। अपने संबोधन में वित्त मंत्री ने कहा, “…भू-राजनीतिक संघर्ष तेज़ हो रहे हैं। प्रतिबंध, प्रशुल्क और अलगाव की रणनीतियाँ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बदल रही हैं। इनसे जहां भारत की कुछ कमजोरियां उजागर हुई हैं वहीं देश की मजबूती भी उजागर हुई है। यह दिखा है कि झटकों को झेलने की हमारी क्षमता मज़बूत है।” उन्होंने कहा कि इन अनिश्चितताओं के बीच हमें चुनाव यह तय करना है कि हमारी यह मजबूती और जुझारूपन हमें विकसित हो रही नई बहुध्रुवीय व्यवस्था में हमारे नेतृत्व का आधार बनेगा या यह केवल अनिश्चितताओं के समक्ष सुरक्षा कवच की भूमिका में रहेगा। इसलिए निष्कर्षतः, इतिहास हमें सिखाता है कि संकट अक्सर नवीनीकरण से पहले आते हैं। श्रीमती सीतारमण ने कहा, “इस समय हम जो विखराव देख रहे हैं, वह सहयोग के अधिक स्थायी और अप्रत्याशित रूपों को जन्म दे सकता है। चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि समावेशी सिद्धांत के आधार पर सहयोग की नई व्यवस्थाओं को ढाला जा सके। विकासशील देशों के लिए, यह केवल एक रोमांटिक आकांक्षा नहीं बल्कि आवश्यकता है। वित्त मंत्री ने कहा, “हम अभूतपूर्व परिवर्तनों और अनिश्चितताओं के इस दौर में हाथ-पर हाथ धर कर बैठने का जोखिम नहीं उठा सकते। ऐसी दुनिया में घटना कहीं भी हो, फैसले कहीं भी हों वे हमारी नियति निर्धारित करते हैं, इस लिए हमें उनमें सक्रिय भागीदार बनना होगा, जहाँ संभव हो परिणामों को आकार देना होगा और जहाँ आवश्यक हो, अपनी स्वायत्तता की हिफाजत करनी होगी।”

सिंगापुर के पीएम से मिले पीयूष गोयल, एआई से लेकर इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने पर हुई बातचीत

नई दिल्ली, 03 अक्टूबर : केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच साझेदारी को बढ़ने के लिए एआई से लेकर इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने पर बातचीत की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि इस बैठक में हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने, साथ ही भविष्य में विकास की गति को बढ़ाने पर चर्चा की गई है। वोंग ने जवाब देते हुए कहा कि इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने से लेकर एआई जैसी उभरती तकनीक तक हमारी आर्थिक साझेदारी को गहरा करने पर अच्छी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री गोयल ने सिंगापुर एयरलाइंस इंजीनियरिंग कंपनी (एसआईएईसी) के सीईओ चिन याउ सेंग से भी मुलाकात की और विमानन रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ) क्षेत्र में भारत-सिंगापुर सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की। केंद्रीय मंत्री ने एक अलग पोस्ट में सोशल मीडिया पर बताया कि इस बैठक में भारत के बढ़ते एयरोस्पेस इकोसिस्टम को बढ़ावा देने और वैश्विक संपर्क बढ़ाने के लिए इनोवेशन, स्किल डेवलपमेंट और इन्वेस्टमेंट में साझेदारी के नए रास्ते तलाशे गए। केंद्रीय मंत्री ने कैपिटलैंड इन्वेस्टमेंट के ग्रुप सीईओ ली ची कून और वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक मनोहर खियातानी से भी मुलाकात की। चर्चा भारत में सतत शहरी विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार (विशेष रूप से लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और डेटा सेंटरों के क्षेत्र में) को आगे बढ़ाने पर केंद्रित थी। उन्होंने पोस्ट किया, “रणनीतिक सहयोग के माध्यम से भारत की विकास गाथा को आगे बढ़ाने के नए अवसरों की भी खोज की गई।” पिछले महीने, वोंग ने नई दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की थी और हाल ही में आयोजित तीसरे भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन के परिणामों और सीमा पार डेटा प्रवाह और पूंजी बाजारों में सहयोग करने में दोनों देशों की रुचि पर चर्चा की थी। प्रधानमंत्री वोंग ने एक्स पर पोस्ट किया था, “भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ फिर से जुड़कर खुशी हुई। हमने हाल ही में आयोजित तीसरे भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन के परिणामों और सीमा पार डेटा प्रवाह और पूंजी बाजारों पर सहयोग करने में हमारी रुचि पर चर्चा की।” उन्होंने आगे कहा, “सिंगापुर और भारत के लिए अपने वित्तीय और डिजिटल संबंधों को और मजबूत करने की अपार संभावनाएं हैं।”

भारत अपनी मजबूत आर्थिक बुनियाद से अनिश्चितता में भी जुझारू बना रहाः सीतारमण

पुणे, 25 सितंबर : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत अपने मजबूत वृहद-आर्थिक बुनियादी पहलुओं के दम पर जुझारूपन दिखाने में सफल रहा है। सीतारमण ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र के 91वें स्थापना दिवस समारोह में कहा कि पिछले एक वर्ष में वैश्विक माहौल में अनिश्चितता बढ़ी है और उसका असर विभिन्न देशों पर महसूस किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इन सबके बीच भारत की मजबूती अलग नजर आती है। मजबूत वृहद-आर्थिक बुनियाद, युवा जनसंख्या और घरेलू मांग पर अधिक निर्भरता भारतीय अर्थव्यवस्था की मुख्य ताकत है।’’ वित्त मंत्री ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में भी यह मजबूती बनी रही और इस अवधि में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। उन्होंने कहा, ‘‘यह महज संयोग नहीं है। यह सक्रिय राजकोषीय एवं मौद्रिक नीतियों, साहसिक संरचनात्मक सुधारों, बड़े पैमाने पर भौतिक एवं डिजिटल बुनियादी ढांचे के निर्माण, बेहतर शासन और प्रतिस्पर्धा में वृद्धि का परिणाम है।’’ इस मौके पर वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को अधिक ऋण देने पर जोर दिया। उन्होंने बैंकों से शिक्षा ऋण को भी प्राथमिकता देने का आग्रह करते हुए कहा कि शिक्षा ऋण का कोई भी आवेदन अस्वीकार नहीं होना चाहिए। नागराजू ने बैंकों से कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों में ऋण प्रवाह बढ़ाने का आग्रह किया। हालांकि इसके साथ उन्होंने कर्ज की गुणवत्ता को लेकर सतर्क रहने के लिए भी कहा।

ट्रूऑल्ट बायोएनर्जी का 839 करोड़ का आईपीओ लॉन्च, 29 सितंबर तक कर सकते हैं आवेदन

नई दिल्ली, 25 सितंबर: एथेनॉल जैसे बायोफ्यूल का उत्पादन करने वाली कंपनी ट्रूऑल्ट बायोएनर्जी का 839.28 करोड़ रुपये का आईपीओ आज सब्सक्रिप्शन के लिए लॉन्च कर दिया गया। इस आईपीओ में 29 सितंबर तक बोली लगाई जा सकती है। आईपीओ के तहत 750 करोड़ रुपये के 1.51 करोड़ नए शेयर जारी हो रहे हैं। इसके साथ ही 89.88 करोड़ रुपये के 18 लाख शेयरों को ऑफर फॉर सेल विंडो के जरिये भी बेचा जा रहा है। इश्यू की क्लोजिंग के बाद 30 सितंबर को शेयरों का अलॉटमेंट किया जाएगा। कंपनी के शेयर 3 अक्टूबर को बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होंगे। आईपीओ में बोली लगाने के लिए 472 रुपये से लेकर 496 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है। ट्रूऑल्ट बायोएनर्जी के इस आईपीओ में रिटेल इनवेस्टर्स कम से कम 30 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं, जिसके लिए उन्हें 14,880 रुपये का निवेश करना होगा। आईपीओ खुलने से एक दिन पहले बुधवार को ट्रूऑल्ट बायोएनर्जी ने एंकर इनवेस्टर्स से 252 करोड़ रुपये जुटाए। इन एंकर इनवेस्टर्स में टाटा म्यूचुअल फंड, एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, बंधन म्यूचुअल फंड, एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी, सोसाइटी जनरल और सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट मॉरीशिस के नाम शामिल हैं। इस आईपीओ में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए 50 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व किया गया है। इसके अलावा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 35 प्रतिशत हिस्सा और नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (एनआईआई) के लिए 15 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व है। इस इश्यू के लिए डीएएम कैपिटल एडवाइजर्स और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स को बुक रनिंग लीड मैनेजर बनाया गया है। बिगशेयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को रजिस्ट्रार बनया गया है। कंपनी की वित्तीय स्थिति की बात करें, तो प्रॉस्पेक्टस में किए गए दावे के मुताबिक की वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी की आय 2023-24 की आय 1,280.19 करोड़ रुपये की तुलना में 54 प्रतिशत बढ़ कर 1,968.53 करोड़ रुपये हो गई। इसी तरह कंपनी का शुद्ध मुनाफा वित्त वर्ष 2024-25 में 361 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 146.64 करोड़ रुपये हो गया, जो वित्त वर्ष 2023-24 में 31.81 करोड़ रुपये था। इसी तरह वित्त वर्ष 2024-25 में ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 309.14 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो वित्त वर्ष 2023-24 में 188.09 करोड़ रुपये था। कंपनी पर कुल कर्ज की बात करें तो इसमें कमी आई है। वित्त वर्ष 2023-24 के आखिर में कंपनी पर 1,684.68 करोड़ रुपये का कर्ज था, जो 2024-25 में घट कर 1,549.68 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

भारत में आईफोन 17 की बिक्री शुरू: एपल स्टोर के बाहर उमड़ी खरीदारों की भीड़

मुंबई/नई दिल्ली, 19 सितंबर: बहुप्रतीक्षित आईफोन 17 शृंखला की बिक्री आज, 19 सितंबर 2025 से भारत में शुरू हो गई है। वैश्विक तकनीकी दिग्गज कंपनी एपल के इस नए फोन को लेकर ग्राहकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। दिल्ली और मुंबई के प्रमुख एपल स्टोरों के बाहर तड़के से ही लंबी कतारें लग गईं, जहां प्रशंसक अपने पसंदीदा डिवाइस को सबसे पहले खरीदने के लिए घंटों से प्रतीक्षा कर रहे थे। महानगरों में आईफोन का क्रेज मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) स्थित एपल स्टोर पर सैकड़ों लोग फोन खरीदने के लिए कतार में खड़े नजर आए। कई खरीदारों ने बताया कि वे सुबह-सुबह से ही अपनी जगह सुनिश्चित करने के लिए पहुंच गए थे, जबकि कुछ ने पहले ही ऑनलाइन बुकिंग कर रखी थी। अहमदाबाद से आए एक ग्राहक रमेश ने बताया, “मैं हर वर्ष नए आईफोन के लिए आता हूँ। आज सुबह 4 बजे से ही पंक्ति में खड़ा हूँ।” एक अन्य ग्राहक ने कहा कि उन्होंने ऑनलाइन समीक्षाओं में आईफोन 17 की खूब सराहना देखी है और उन्हें उम्मीद है कि उन्हें फोन मिल जाएगा। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी स्थिति कुछ अलग नहीं थी। साकेत के सेलेक्ट सिटी वॉक मॉल में स्थित एपल स्टोर पर ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ी। कई लोग मध्यरात्रि से ही कतार में लग गए थे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्टोर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था को और भी चाक-चौबंद किया गया था। आईफोन 17 शृंखला की मुख्य विशेषताएँ 9 सितंबर को लॉन्च हुई आईफोन 17 शृंखला में चार मॉडल शामिल हैं: आईफोन 17, आईफोन 17 प्रो, आईफोन 17 प्रो मैक्स और आईफोन 17 एयर। इनमें से प्रो और प्रो मैक्स मॉडल विशेष रूप से चर्चा में हैं। दोनों फोन ए19 प्रो चिप पर आधारित हैं, जो 3एनएम तकनीक से निर्मित है। इस चिप में 6-कोर सीपीयू, 6-कोर जीपीयू और 16-कोर न्यूरल इंजन है। प्रो मॉडल में 6.3 इंच और प्रो मैक्स में 6.9 इंच का सुपर रेटिना एक्सडीआर ओएलईडी डिस्प्ले है, जिसकी अधिकतम चमक 3000 निट्स तक जाती है। आईफोन 17 प्रो मैक्स को अब तक का सबसे शक्तिशाली बैटरी बैकअप वाला आईफोन माना जा रहा है। दोनों प्रो मॉडल 40 वॉट की तीव्र चार्जिंग को समर्थन देते हैं, जिससे यह मात्र 20 मिनट में 50% तक चार्ज हो जाते हैं। कैमरे की बात करें तो, इसमें तीन 48 मेगापिक्सल के सेंसर दिए गए हैं, जबकि प्रो मैक्स में 8x ऑप्टिकल और 40x डिजिटल ज़ूम की सुविधा है। इसका फ्रंट कैमरा 18 मेगापिक्सल का है, जो दोहरी रिकॉर्डिंग और पोर्ट्रेट मोड का समर्थन करता है। मानक आईफोन 17 में ए19 चिप और 6.3 इंच का डिस्प्ले है, जो 120 हर्ट्ज़ रिफ्रेश दर को समर्थन देता है। इसमें दोहरे 48 मेगापिक्सल के पिछले कैमरे और 18 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा है। यह फोन आईपी68 जल और धूल प्रतिरोधी है और इसकी भंडारण क्षमता 256 जीबी से शुरू होती है। आईफोन 17 एयर को अब तक का सबसे पतला आईफोन बताया जा रहा है, जिसकी मोटाई मात्र 5.6 मिलीमीटर है। इसमें 6.5 इंच का 120 हर्ट्ज़ डिस्प्ले, ए19 प्रो चिप और एक नया सी1एक्स मोडेम है। फोन में 48 मेगापिक्सल का पिछला और 18 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा है। इसकी बैटरी 27 घंटे तक वीडियो प्लेबैक देती है और 30 मिनट में 50% चार्ज हो जाती है। आईफोन 17 शृंखला की कीमत आईफोन 17 मानक: 82,900 रुपये से शुरू आईफोन 17 प्रो: 1,34,900 रुपये से शुरू आईफोन 17 प्रो मैक्स: 1,49,900 रुपये से शुरू आईफोन 17 एयर: 1,19,900 रुपये से शुरू नए और उन्नत विशेषताओं के साथ, आईफोन 17 शृंखला ने भारतीय बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है, और ग्राहकों का उत्साह इसकी लोकप्रियता को और भी बढ़ा रहा है।