मुंबई, 05 अप्रैल : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने यूपीआई (एकीकृत भुगतान इंटरफेस) की बढ़ती लोकप्रियता और स्वीकार्यता को ध्यान में रखते हुए इस पर उपलब्ध सुविधाओं का विस्तार करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत अब ग्राहक यूपीआई के माध्यम से भी बैंक खातों में रुपये जमा करा सकेंगे। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि बैंकों द्वारा लगाई गईं नकदी जमा मशीनें (सीडीएम) बैंक शाखाओं पर नकदी-हैंडलिंग भार को कम करते हुए ग्राहक सुविधाओं को बढ़ाती हैं। नकद जमा की सुविधा वर्तमान में केवल डेबिट कार्ड के उपयोग के माध्यम से उपलब्ध है। यूपीआई की लोकप्रियता और स्वीकार्यता को देखते हुए तथा एटीएम पर कार्ड-रहित नकदी निकासी के लिए यूपीआई की उपलब्धता से देखे गए लाभों को ध्यान में रखते हुए अब यूपीआई के उपयोग के माध्यम से नकद जमा की सुविधा प्रदान करने का प्रस्ताव है। इस संबंध में आवश्यक निर्देश शीघ्र ही जारी किए जाएंगे। श्री दास ने बताया कि वर्तमान में यूपीआई से भुगतान बैंक के यूपीआई ऐप के माध्यम से बैंक खाते को लिंक करके या किसी तीसरे पक्ष के यूपीआई एप्लिकेशन का उपयोग करके किया जा सकता है। हालांकि पीपीआई (प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स) के लिए वही सुविधा उपलब्ध नहीं है। पीपीआई का उपयोग वर्तमान में केवल पीपीआई जारी करने वाले के एप्लिकेशन का उपयोग करके यूपीआई लेनदेन करने के लिए किया जा सकता है। पीपीआई ग्राहकों को और अधिक सुविधा प्रदान करने के लिए अब तीसरे पक्ष के यूपीआई के इस्तेमाल के माध्यम से पीपीआई को जोड़ने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। इससे पीपीआई धारक बैंक खाताधारकों की तरह यूपीआई भुगतान करने में सक्षम होंगे। आरबीआई गवर्नर ने बताया कि अधिक उपयोग के मामलों और अधिक भाग लेने वाले बैंकों के साथ खुदरा और थोक क्षेत्रों में सीबीडीसी पायलट परियोजना चल रही है। इसे आगे भी जारी रखते हुए गैर-बैंक भुगतान प्रणाली ऑपरेटरों को सीबीडीसी वॉलेट की पेशकश करने और सीबीडीसी-खुदरा को उपयोगकर्ताओं के एक बड़े वर्ग के लिए लगातार सुलभ बनाने का प्रस्ताव है। इसे और सुविधाजनक बनाने के लिए तंत्र में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।
रिटेल डायरेक्ट स्कीम के निवेशकों के लिए आरबीआई लाएगा मोबाइल ऐप
मुंबई, 05 अप्रैल : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) रिटेल डायरेक्ट स्कीम के निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदने और बेचने की प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए एक मोबाइल एप्लिकेशन शीघ्र लॉन्च करेगा। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए बताया कि नवंबर 2021 में लॉन्च की गई रिटेल डायरेक्ट स्कीम व्यक्तिगत निवेशकों को आरबीआई के साथ गिल्ट खाते बनाए रखने और सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने की सुविधा देती है। यह योजना निवेशकों को प्राथमिक नीलामी में प्रतिभूतियां खरीदने के साथ-साथ एनडीएस-ओएम प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रतिभूतियां खरीदने और बेचने में सक्षम बनाती है। प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए रिटेल डायरेक्ट पोर्टल का एक मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किया जा रहा है। यह ऐप निवेशकों को उनकी सुविधा के अनुसार चलते-फिरते प्रतिभूति खरीदने और बेचने में सक्षम बनाएगा। ऐप शीघ्र ही उपयोग के लिए उपलब्ध होगा।
आरबीआई आईएफएससी में सॉवरेन हरित बॉन्ड में निवेश, कारोबार की देगा अनुमति
मुंबई, 05 अप्रैल : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को गांधीनगर स्थित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) में सॉवरेन हरित बॉन्ड(एसजीआरबी) में निवेश तथा कारोबार की अनुमति देने की घोषणा की। सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 के केंद्रीय बजट में एक घोषणा के आधार पर जनवरी 2023 में सॉवरेन हरित बॉन्ड (एसजीआरबी) जारी किए। इसके बाद, 2023-24 में सरकारी उधारी कार्यक्रम के तहत एसजीआरबी जारी किए गए। वर्तमान में सेबी के साथ पंजीकृत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश के लिए उपलब्ध विभिन्न मार्गों के तहत एसजीआरबी में निवेश करने की अनुमति है। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने नए वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करते हुए कहा, ‘‘एसजीआरबी में व्यापक स्तर पर प्रवासियों की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने की दृष्टि से अंतररराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) में पात्र विदेशी निवेशकों को भी ऐसे बॉन्ड में निवेश करने की अनुमति देने का निर्णय लिया गया है।” उन्होंने कहा कि सरकार तथा आईएफएससी प्राधिकरण के परामर्श से आईएफएससी में पात्र विदेशी निवेशकों द्वारा एसजीआरबी में निवेश व व्यापार के लिए एक योजना अलग से अधिसूचित की जा रही है। सरकार चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में सॉवरेन हरित बॉन्ड (एसजीआरबी) जारी करके 12,000 करोड़ रुपये उधार लेने की योजना बना रही है। इस बीच, एक अन्य घोषणा में आरबीआई ने भुगतान सेवा प्रदाताओं समेत गैर-बैंक भुगतान प्रणाली संचालकों को इसके व्यापक इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने के लिए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) वॉलेट की पेशकश करने की अनुमति दी। वर्तमान में, अधिक इस्तेमाल के मामलों और अधिक भाग लेने वाले बैंकों के साथ खुदरा व थोक क्षेत्रों में सीबीडीसी शुरुआती परियोजना जारी है। दास ने कहा, ‘‘इस दृष्टिकोण को जारी रखते हुए गैर-बैंक भुगतान प्रणाली संचालकों को सीबीडीसी वॉलेट की पेशकश करने में सक्षम बनाकर, सीबीडीसी-रिटेल को उपयोगकर्ताओं के व्यापक वर्ग के लिए निरंतर तरीके से सुलभ बनाने का प्रस्ताव है।” उन्होंने कहा कि इससे कई तरीकों से लेनदेन को संभालने के लिए सीबीडीसी मंच की क्षमता का पता लगाने के अलावा उपयोगकर्ताओं के लिए पहुंच बढ़ाने तथा विकल्पों का विस्तार करने की उम्मीद है। गवर्नर ने कहा कि इसे सुविधाजनक बनाने के लिए तंत्र में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।
वेदांता लिमिटेड का चौथी तिमाही में एल्युमीनियम उत्पादन चार प्रतिशत बढ़ा
नई दिल्ली, 04 अप्रैल : विविधीकृत प्राकृतिक संसाधन कंपनी वेदांता लिमिटेड का वित्त वर्ष 2023-24 की चौथी तिमाही में कुल एल्युमीनियम उत्पादन सालाना आधार पर चार प्रतिशत बढ़कर 5,98,000 टन रहा। वेदांता ने बीएसई को दी जानकारी में बताया कि वित्त वर्ष 2022-23 की इसी तिमाही में कंपनी का एल्युमीनियम उत्पादन 5,74,000 टन था। कंपनी के अनुसार, बेहतर परिचालन प्रदर्शन के दम पर ओडिशा में लांजीगढ़ रिफाइनरी इकाई में एल्यूमिना उत्पादन 18 प्रतिशत बढ़कर 4,48,000 टन रहा। जिंक इंडिया में चौथी तिमाही में खनन धातु का उत्पादन घटर 2,99,000 टन हो गया। वित्त वर्ष 2022-23 की इसी तिमाही में यह 3,01,000 टन से अधिक था। समीक्षाधीन तिमाही में रिफाइंड जिंक उत्पादन दो प्रतिशत बढ़कर 2,20,000 टन हो गया, जबकि रिफाइंड सीसा का उत्पादन घटकर 53,000 टन रहा। वेदांता, वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड की अनुषंगी कंपनी है। यह दुनिया की अग्रणी प्राकृतिक संसाधन कंपनियों में से एक है।
इंडोसोल सोलर का मॉड्यूल परियोजना के पहले चरण को 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य
नई दिल्ली, 04 अप्रैल : इंडोसोल सोलर का लक्ष्य आंध्र प्रदेश में अपनी एकीकृत सौर मॉड्यूल परियोजना के पहले चरण को 2025 तक पूरा करना है। इंडोसोल सोलर की प्रमुख कंपनी एसएसईएल समूह के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) शरत चंद्रा ने कहा कि पहले चरण के तहत, इंडोसोल सोलर आंध्र में रामायपट्टनम बंदरगाह के पास नेल्लोर में आगामी संयंत्र में पांच गीगावाट (जीडब्ल्यू) मॉड्यूल, पांच गीगावॉट वेफर्स, पांच गीगावॉट इंगोट और पांच गीगावॉट ग्लास क्षमता स्थापित करने के लिए 15,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। चंद्रा ने पहले चरण की समयसीमा पर कहा कि यह 2025 तक पूरा हो जाएगा। यह परियोजना सौर क्षेत्र के वास्ते भारत सरकार की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का हिस्सा है। उन्होंने कहा, ‘‘हमने पहले ही 31 मार्च से मॉड्यूल का उत्पादन शुरू कर दिया है। हम इसे चरण ‘1ए’ कहते हैं, जो पहले चरण का हिस्सा है। शुरुआत में हमने 1,300 करोड़ रुपये का निवेश करके 500 मेगावाट मॉड्यूल का निर्माण शुरू किया।’’ चंद्रा ने कहा कि पूरी परियोजना के 2028 तक पूरी होने की उम्मीद है। इसका लक्ष्य रोजगार के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष 32,000 अवसर उत्पन्न करना है।
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया का लक्ष्य चालू वित्त वर्ष में ग्राहक आधार व राजस्व बढ़ाना: एमडी सिंह
नई दिल्ली, 03 अप्रैल : सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एन.पी. सिंह ने कहा कि मंच प्रभावशाली सामग्री के जरिए अपने ग्राहक आधार और राजस्व को बढ़ावा देना चाहता है। उन्होंने कहा कि रणनीतिक साझेदारी पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सिंह ने कंपनी के एक आंतरिक समाचार पत्र में कर्मचारियों को लिखा कि कंपनी वित्त वर्ष 2023-24 के अनुभव से सबक लेगी और आगे बढ़ने के लिए कदम उठाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘वित्त वर्ष 2024-25 में प्रवेश के साथ हम एक चुनौतीपूर्ण वर्ष में रचनात्मक भावना और मजबूत संकल्प के साथ आगे बढ़ने को तैयार हैं।’’ सिंह ने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य प्रभावशाली सामग्री के जरिए दर्शकों को आकर्षित करना और हमारा ग्राहक आधार तथा राजस्व बढ़ाना है।’’ उन्होंने कहा कि कंपनी नए धारावाहिकों में निवेश कर रही है। इसमें ओटीटी मंच ‘सोनी लिव’ में किया गया निवेश भी शामिल है। सिंह ने कहा, ‘‘हमारी रणनीति अपनी सेवाओं के दम पर वृद्धि को बढ़ावा देने और रणनीतिक साझेदारी के जरिए बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने पर जोर देती है।’’ गौरतलब है कि सोनी ने ‘‘समापन शर्तों’’ को लेकर कथित विवाद के बाद जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड के साथ प्रस्तावित 10 अरब अमेरिकी डॉलर के विलय समझौते से इस साल जनवरी में हाथ खींच लिए थे। इस कदम के बाद से दोनों पक्षों के बीच कानूनी लड़ाई जारी है।
नई सरकार पहले 100 दिन में ई-वाणिज्य नियमों को आसान करने, निर्यात को बढ़ावा देने पर दे ध्यान : जीटीआरआई
नई दिल्ली, 03 अप्रैल : ई-वाणिज्य नियमों को आसान करने, शुल्क वापसी योजना का नकद वितरण, एक राष्ट्रीय व्यापार तंत्र की स्थापना और भारत के व्यापार समझौतों की प्रभावशीलता पर एक रिपोर्ट प्रकाशित करना नई सरकार के 100 दिन का एजेंडा होना चाहिए। आर्थिक शोध संस्थान ‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव’ (जीटीआरआई) ने बुधवार को एक रिपोर्ट में कहा कि प्रमुख फलों और सब्जियों के उत्पादों के लिए तंत्र का पता लगाने के वास्ते ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल का सुझाव दिया गया है। ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी एक उन्नत डेटाबेस तंत्र है जो एक व्यावसायिक नेटवर्क के भीतर पारदर्शी जानकारी साझा करने की अनुमति देता है। रिपोर्ट में विशेष आर्थिक क्षेत्रों को छूट के आधार पर घरेलू बाजार में सामान बेचने की अनुमति देना और दवा सामग्री, सौर सेल, ईवी बैटरी और मोबाइल फोन घटकों जैसे महत्वपूर्ण आयात के लिए चीन पर निर्भरता को कम करने आदि का भी सुझाव दिया गया। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘पहले 100 दिन (एक नई सरकार के लिए) शासन और नीति की दिशा निर्धारित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं…।’’ भारत में लोकसभा चुनाव 19 अप्रैल को शुरू होगा और मतों की गिनती चार जून को की जाएगी। चुनाव सात चरण में होने हैं। शोध संस्थान ने यूरोपीय जलवायु विनियमन के प्रतिकूल प्रभावों का मुकाबला करने के लिए एक कार्य योजना तैयार करने; गठबंधन बनाने, डब्ल्यूटीओ (विश्व व्यापार संगठन) में बेहतर परिणामों के लिए साझेदारी को मजबूत करने; डब्ल्यूटीओ कानून कितने भेदभावपूर्ण हैं और उनमें बदलाव की जरूरत है इस बात पर प्रकाश डालने और विनिर्माण योजनाओं में प्रोत्साहनों का मानकीकरण करने आदि के सुझाव दिए। इसके साथ ही रिपोर्ट में कहा गया कि राष्ट्रीय व्यापार तंत्र (एनटीएन) सभी आवश्यक दस्तावेजों तथा सूचनाओं को ऑनलाइन जमा करने को केंद्रीकृत करने के अलावा, सीमा शुल्क, विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी), शिपिंग कंपनियों, बंदरगाह और बैंक के साथ अलग-अलग बातचीत की आवश्यकता को समाप्त करने के अलावा सभी निर्यात-आयात संबंधी अनुपालन को ऑनलाइन सक्षम करने में मदद करेगा। श्रीवास्तव ने एनटीएन की वकालत करते हुए कहा कि विशिष्ट विभागों पर केंद्रित मौजूदा प्रणालियां तेजी से विकसित नहीं होती और व्यापक प्रक्रियाओं को भी कुशलतापूर्वक नहीं संभाल पाती। उन्होंने कहा, ‘‘नई व्यावसायिक प्रक्रिया के तहत तैयार एनटीएन भारत के लिए आवश्यक है।’’
अडाणी ग्रीन एनर्जी 10,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वाली भारत की पहली कंपनी बनी
नई दिल्ली, 03 अप्रैल : अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) ने गुजरात के विशाल खावड़ा सोलर पार्क में 2,000 मेगावाट की सौर क्षमता स्थापित की है, जिसके साथ ही वह 10,000 मेगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वाली भारत की पहली कंपनी बन गई है। कंपनी बयान के अनुसार, उसके पास अब 10,934 मेगावाट का परिचालन खंड है, जो भारत में सबसे अधिक है। वित्त वर्ष 2023-24 में 2,848 मेगावाट नवीकरणीय क्षमता को स्थापित किया गया। एजीईएल के परिचालन खंड में 7,393 मेगावाट सौर, 1,401 मेगावाट पवन और 2,140 मेगावाट पवन-सौर हाइब्रिड क्षमता शामिल है। कंपनी का 2030 तक 45 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित करने का लक्ष्य है। बयान में कहा गया, एजीईएल का 10,934 मेगावाट का परिचालन खंड 58 लाख से अधिक मकानों को बिजली देगा। सालाना करीब 2.1 करोड़ टन सीओ2 (कार्बन डाइऑक्साइड) के उत्सर्जन से बचाएगा। अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी ने कहा, ‘‘हमें नवीकरणीय क्षेत्र में भारत का पहला दस हजारी होने पर गर्व है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘एक दशक से भी कम समय में अडाणी ग्रीन एनर्जी ने न केवल एक हरित भविष्य की कल्पना की, बल्कि इसे साकार भी किया। स्वच्छ ऊर्जा का पता लगाने के एक विचार मात्र से बढ़कर स्थापित क्षमता में 10,000 मेगावाट की अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है…’’ अडाणी ने कहा, ‘‘2030 तक 45,000 मेगावाट (45 गीगावॉट) के लक्ष्य के तहत हम खावड़ा में दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र बना रहे हैं। खावड़ा 30,000 मेगावाट की एक परियोजना है जिसका वैश्विक स्तर पर कोई मुकाबला नहीं है। एजीईएल न केवल दुनिया के लिए मानक स्थापित कर रहा है बल्कि उन्हें नई सिरे से परिभाषित भी कर रहा है।’’
मारुति सुज़ुकी ने बनाये तीन करोड़ वाहन
नई दिल्ली, 03 अप्रैल : यात्री वाहन बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने 3 करोड़ से अधिक वाहनों का संचयी उत्पादन करने की घोषणा की है। इस उपलब्धि में कंपनी के गुरुग्राम, मानेसर (हरियाणा में) और हंसलपुर (गुजरात में) विनिर्माण संयंत्रों में किया गया उत्पादन शामिल है। दिसंबर 1983 में उत्पादन शुरू होने के बाद से रिकॉर्ड 40 वर्ष और 4 महीने में सभी सुज़ुकी उत्पादन बेस के बीच, भारतीय परिचालन यह उपलब्धि सबसे तेज गति से हासिल करने में सफल रहा। जहां कंपनी के हरियाणा स्थित संयंत्रों में 2.68 करोड़ से अधिक वाहनों का निर्माण किया गया है, वहीं एमएसआईएल की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी सुज़ुकी मोटर गुजरात में 32 लाख से अधिक वाहनों का उत्पादन किया गया है। देश में मोबिलिटी क्रांति की शुरुआत करने वाले प्रतिष्ठित एम800 ने 29 लाख से अधिक इकाइयों के साथ इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अन्य शीर्ष योगदानकर्ताओं में ऑल्टो 800, ऑल्टो के10, स्विफ्ट, वैगनआर, डिज़ायर, ओमनी, बलेनो, ईको, ब्रेज़ा और अर्टिगा जैसे सफल मॉडल शामिल हैं। कंपनी ने 1987 में निर्यात शुरू किया और आज भारत से कुल वाहन निर्यात में लगभग 40 प्रतिशत का योगदान करती है। इस उपलब्धि को ग्राहकों के प्यार और स्नेह को समर्पित करते हुए, मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ हिसाशी ताकेउचि ने कहा, “हम अपने ग्राहकों का धन्यवाद करते हैं जिन्होंने 1983 में विनिर्माण शुरू करने के बाद से साल दर साल हमारे उत्पादों के प्रति अपना विश्वास बनाए रखा है। इन वर्षों में, हम अपने कार्यबल और मूल्य श्रृंखला भागीदारों के निरंतर सहयोग के साथ उत्पादन को अधिकतम बनाने में सक्षम हुए हैं, जिन्होंने हमें ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप उत्पाद बनाने में मदद की है। हम ‘मेक इन इंडिया’ के प्रति प्रतिबद्ध हैं और घरेलू और वैश्विक बाजारों की जरूरतों को पूरा करते हुए देश में अपने संचालनों को सशक्त बना रहे हैं। हम भारत से कुल वाहन निर्यात में लगभग 40 प्रतिशत का योगदान करते हैं। श्री ताकेउचि ने कहा, “आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा यात्री वाहन बाजार है और आने वाले वर्षों में और मजबूत होने के लिए तैयार है। ग्राहकों की मांग और अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए, हम आगे निवेश करने और वित्त वर्ष 2030-31 तक अपनी वार्षिक उत्पादन क्षमता में 40 लाख वाहन तक की वृद्धि करने की योजना बना रहे हैं। इस दिशा में कार्य करते हुए, हम खरखौदा-हरियाणा और गुजरात में दो नए ग्रीन फील्ड विनिर्माण संयंत्र स्थापित करेंगे जिनमें प्रत्येक की उत्पादन क्षमता 10 लाख होगी। हम वित्त वर्ष 2030-31 तक अपने मॉडलों की श्रृंखला को मौजूदा 18 से बढ़ाकर 28 तक कर देंगे।
एयर इंडिया ने ‘फ्लाइंग रिटर्न्स’ कार्यक्रम में किए बदलाव, ग्राहकों को मिलेगा फायदा
नई दिल्ली, 03 अप्रैल : टाटा की अगुवाई वाली निजी क्षेत्र की विमानन कंपनी एयर इंडिया ने सरल संरचना के साथ अपने ‘फ्लाइंग रिटर्न्स’ लॉयल्टी कार्यक्रम को लॉन्च किया है। यह प्रोग्राम भारत का पहला फ्रिक्वेंट फ्लायर कार्यक्रम है, जिससे एयर इंडिया के ग्राहकों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा। एयर इंडिया ने बुधवार को ‘एक्स’ पोस्ट पर जारी एक बयान में यह जानकारी दी है। कंपनी ने कहा कि एक दशक से भी अधिक समय में ‘फ्लाइंग रिटर्न्स’ लॉयल्टी कार्यक्रम में पहली बार बदलाव किया गया है। हालांकि, एयर इंडिया ने मौजूदा सदस्यों की संख्या का खुलासा किए बिना कहा कि कार्यक्रम के सदस्य अब आज से शुरू होने वाली नई संरचना के आधार पर लाभ उठा सकेंगे और अंक एकत्र कर सकेंगे। एयर इंडिया के संशोधित कार्यक्रम में अब किसी ग्राहक द्वारा अर्जित अंकों की कोई समय-सीमा नहीं होगी। एयर इंडिया के परिवर्तित फ्लाइंग रिटर्न्स लॉयल्टी प्रोग्राम का हिस्सा बनकर आप कई तरह के रिवॉर्ड का लाभ उठा सकते हैं। फ्लाइंग रिटर्न एयर इंडिया का लॉयल्टी प्रोग्राम है, जिसमें यात्री मील अथवा प्वाइंट कमा सकते हैं। एयर इंडिया की फ्लाइट में यात्रा करने के दौरान यात्री इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इन प्वाइंट के जरिए आप एयर इंडिया एयरलाइन के भागीदार होटल-रेस्टोरेंट पर छूट प्राप्त कर सकते हैं।