नई दिल्ली। होली के अवसर पर राजधानी की महिलाओं और बेटियों को बड़ा तोहफा देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में दिल्ली सरकार की चार महत्वाकांक्षी योजनाओं का विधिवत शुभारंभ किया। ‘सशक्त नारी, समृद्ध दिल्ली’ नामक कार्यक्रम में मुफ्त बस यात्रा के लिए स्मार्ट पिंक कार्ड, मुफ्त एलपीजी सिलेंडर योजना, दिल्ली लखपति बिटिया योजना और ‘मेरी पूंजी मेरा अधिकार’ योजना को लॉन्च किया गया। कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली की भाजपा सरकार के एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में किया गया। मंच पर उपराज्यपाल वीके सक्सेना, केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, डॉ. पंकज सिंह और मुख्य सचिव राजीव वर्मा उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘नारी वंदन’ के संकल्प को दिल्ली सरकार ने जन-कल्याणकारी योजनाओं के रूप में धरातल पर उतारा है। पिंक मोबिलिटी कार्ड: महिलाओं के लिए सुरक्षित और सशक्त सफर नई व्यवस्था के तहत दिल्ली की महिला निवासी डीटीसी बसों में पिंक कार्ड के माध्यम से मुफ्त यात्रा कर सकेंगी। यह कार्ड केवल बसों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मेट्रो, रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में भुगतान आधारित यात्रा के लिए भी उपयोगी होगा। सरकार तीन प्रकार के मोबिलिटी कार्ड जारी करेगी, जिन्हें मौजूदा ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम से जोड़ा जाएगा। पिंक कार्ड पूरी तरह निःशुल्क होगा और इसकी लागत दिल्ली सरकार वहन करेगी। यह पहल महिलाओं की सुरक्षित, सुलभ और आर्थिक रूप से आसान यात्रा सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। ‘दिल्ली लखपति बिटिया योजना’: बेटियों के भविष्य की मजबूत नींव पूर्व में संचालित योजना को नए स्वरूप में ‘दिल्ली लखपति बिटिया योजना’ के रूप में पुनर्गठित किया गया है। पहले बालिका के जन्म पर अस्पताल में 11,000 रुपये और घर पर जन्म होने पर 10,000 रुपये जमा किए जाते थे। अब नई योजना के तहत विभिन्न चरणों में कुल 56,000 रुपये बालिका के नाम पर जमा किए जाएंगे। ब्याज सहित 21 वर्ष की आयु तक यह राशि एक लाख रुपये से अधिक हो जाने की संभावना है। इस योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि बालिका शिक्षा और सशक्तिकरण को दीर्घकालिक आधार प्रदान करना है। ‘मेरी पूंजी मेरा अधिकार’: लाडली योजना की लंबित राशि का वितरण कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु ने सोनल, सीमा, किरण, ईशा और वंदना सहित लाभार्थियों को ‘मेरी पूंजी मेरा अधिकार’ योजना के तहत लाडली योजना की परिपक्वता राशि के चेक वितरित किए। दिल्ली लाडली योजना के अंतर्गत 40,642 पात्र लाभार्थियों को 100.25 करोड़ रुपये डिजिटल माध्यम से उनके खातों में स्थानांतरित किए जाएंगे। ये वे लाभार्थी हैं जिन्हें लंबे समय से परिपक्वता राशि प्राप्त नहीं हुई थी। वर्ष 2008 में शुरू की गई लाडली योजना का उद्देश्य बालिका जन्म को प्रोत्साहन देना और शिक्षा के महत्वपूर्ण चरणों पर वित्तीय सहायता प्रदान करना है। अब ‘मेरी पूंजी मेरा अधिकार’ के माध्यम से इसे नई गति दी गई है। होली और दीवाली पर दो मुफ्त एलपीजी सिलेंडर दिल्ली सरकार ने राशन कार्ड धारक परिवारों के लिए साल में दो मुफ्त एलपीजी सिलेंडर देने की घोषणा की है। होली और दीवाली पर एक-एक सिलेंडर की राशि परिवार के मुखिया के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में जमा की जाएगी। लगभग 15.5 लाख राशन कार्ड धारक परिवारों को इस योजना से लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे महंगाई के दौर में घरेलू बजट पर पड़ने वाले बोझ को कम करने में मदद मिलेगी।
होर्मुज में तनाव, तेल में तूफान: ब्रेंट 4 साल के शिखर पर, भारत समेत एशिया की सप्लाई पर संकट
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिख रहा है। United States और Israel द्वारा Iran पर हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। सोमवार को बाजार खुलते ही अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 13% उछलकर 82 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो जनवरी 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। वहीं अमेरिकी सूचकांक WTI भी 72 डॉलर के करीब कारोबार करता दिखा। होर्मुज स्ट्रेट: दुनिया की एनर्जी लाइफलाइन पर ब्रेक तनाव की जड़ है Strait of Hormuz — एक संकीर्ण समुद्री मार्ग, जहां से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। इस मार्ग के आसपास बढ़े खतरे के कारण कई शिपिंग कंपनियों ने अपने टैंकरों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोक दी है। आशंका है कि अगर यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहा, तो रोजाना 80 से 100 लाख बैरल तक की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी कमी की भरपाई अल्पावधि में संभव नहीं है। इस समुद्री रास्ते से केवल कच्चा तेल ही नहीं, बल्कि बड़ी मात्रा में एलएनजी (LNG) की सप्लाई भी होती है, जिससे एशियाई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ सकता है। 90-100 डॉलर की ओर बढ़ता तेल? बाजार विश्लेषकों के अनुसार, यदि तनाव और गहराता है तो ब्रेंट क्रूड 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच सकता है। इसका सीधा असर वैश्विक महंगाई पर पड़ेगा। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि के साथ परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिससे रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी ऊपर जा सकते हैं। भारत पर क्या असर? India अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल से देश का आयात बिल बढ़ना तय है। हालांकि सरकार के पास फिलहाल पर्याप्त रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves) मौजूद हैं, जिससे तत्काल संकट की संभावना कम है। OPEC+ देशों ने उत्पादन बढ़ाने का संकेत दिया है, लेकिन यदि समुद्री मार्ग ही बाधित रहा तो अतिरिक्त उत्पादन भी बाजार तक नहीं पहुंच पाएगा। इससे भारत, चीन और जापान जैसे बड़े आयातकों के सामने सप्लाई अनिश्चितता बनी रह सकती है।
मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ी कार्रवाई: अनिल अंबानी का 3716.83 करोड़ का ‘Abode’ ED ने किया अटैच
मुंबई। देश के प्रमुख उद्योगपतियों में शुमार अनिल अंबानी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिखाई दे रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मुंबई स्थित उनके आलीशान आवास ‘Abode’ को अटैच कर लिया है। अधिकारियों के अनुसार, इस संपत्ति की अनुमानित कीमत 3716.83 करोड़ रुपये आंकी गई है। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है। ED को संदेह है कि संबंधित वित्तीय लेनदेन में अनियमितताएं हुई हैं, जिनकी जांच लंबे समय से चल रही थी। जांच एजेंसी का मानना है कि कथित तौर पर अवैध रूप से अर्जित धन का निवेश इस प्रॉपर्टी समेत अन्य संपत्तियों में किया गया। मुंबई के पॉश इलाके में स्थित ‘Abode’ एक बहुमंजिला लग्जरी रेजिडेंस है, जो अपनी आधुनिक वास्तुकला और अत्याधुनिक सुविधाओं के लिए जाना जाता है। इस संपत्ति को अंबानी परिवार की प्रतिष्ठित संपत्तियों में गिना जाता रहा है। अधिकारियों का कहना है कि संपत्ति को अटैच करने का मतलब यह है कि फिलहाल इसे बेचा, ट्रांसफर या किसी भी प्रकार से हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा। जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही इस पर अंतिम फैसला होगा। सूत्रों के अनुसार, ED आगे भी संबंधित कंपनियों और वित्तीय लेनदेन की गहन पड़ताल कर सकती है। आवश्यकता पड़ने पर अन्य संपत्तियों पर भी कार्रवाई संभव है। अनिल अंबानी या उनके प्रतिनिधियों की ओर से फिलहाल इस कार्रवाई पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अब यह मामला न्यायालय में चुनौती के रूप में जा सकता है, जहां अटैचमेंट को लेकर दलीलें पेश की जाएंगी।
ट्रंप टैरिफ विवाद: वैश्विक व्यापार में उथल-पुथल, भारत पर असर को लेकर सरकार सतर्क
नई दिल्ली। अमेरिका में टैरिफ को लेकर फिर से बड़ा राजनीतिक और आर्थिक विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में Supreme Court of the United States द्वारा पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के प्रस्तावित टैरिफ को गैरकानूनी करार दिए जाने के बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। इसके बावजूद ट्रंप की ओर से दुनिया के सभी देशों पर पहले 10% और फिर बढ़ाकर 15% तक टैरिफ लगाए जाने की घोषणा ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है। इस पूरे घटनाक्रम पर भारत की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने सोमवार को कहा कि अमेरिका में चल रहे इस टैरिफ घमासान का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इस बारे में अभी कोई भी ठोस टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। अमेरिका में टैरिफ नीति लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही है। हालिया फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के कुछ टैरिफ प्रावधानों को कानूनी दायरे से बाहर बताया। हालांकि इसके बाद वैश्विक स्तर पर 10% से बढ़ाकर 15% तक टैरिफ लागू करने की घोषणा ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संबंधों में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के व्यापक टैरिफ से वैश्विक सप्लाई चेन, निर्यात-आयात संतुलन और बहुपक्षीय व्यापार समझौतों पर असर पड़ सकता है।
एक रात में इतिहास रच गया: कैसे एलन मस्क फिर बने दुनिया के सबसे अमीर इंसान
विशेष रिपोर्ट : दुनिया के कारोबारी इतिहास में कुछ रातें ऐसी होती हैं जो सब कुछ बदल देती हैं। ऐसी ही एक रात ने एलन मस्क को एक बार फिर दुनिया का सबसे अमीर आदमी बना दिया। एक बड़े कॉर्पोरेट विलय (Merger) ने न सिर्फ टेक इंडस्ट्री को हिला दिया, बल्कि मस्क की निजी संपत्ति में 84 अरब डॉलर का ज़बरदस्त उछाल ला दिया। 1.25 ट्रिलियन डॉलर की कंपनी, और बढ़ती दौलत इस ऐतिहासिक विलय के बाद संबंधित कंपनी की कुल वैल्यू 1.25 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई। जैसे ही बाज़ार खुला, शेयरों में तेज़ उछाल देखने को मिला और उसका सीधा फायदा एलन मस्क को हुआ, जिनकी बड़ी हिस्सेदारी इस कंपनी में पहले से मौजूद थी। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बढ़त सामान्य नहीं थी—बल्कि यह अब तक के सबसे बड़े एक-दिवसीय वेल्थ जंप्स में से एक मानी जा रही है। एक रात में 84 अरब डॉलर कैसे जुड़े? एलन मस्क की संपत्ति का बड़ा हिस्सा नकद नहीं, बल्कि शेयरों और इक्विटी में है। जैसे ही विलय की खबर पब्लिक हुई— शेयर कीमतों में रिकॉर्ड उछाल आया निवेशकों का भरोसा कई गुना बढ़ा मार्केट कैप में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज हुई नतीजा? मस्क की नेटवर्थ में एक ही रात में 84 अरब डॉलर का इज़ाफा। अरबपतियों की रेस में फिर नंबर वन इस उछाल के साथ ही एलन मस्क ने दुनिया के अन्य दिग्गज अरबपतियों को पीछे छोड़ दिया। कुछ समय से टॉप पोज़िशन पर बदलाव देखा जा रहा था, लेकिन इस डील ने मस्क को फिर से पहले पायदान पर पहुंचा दिया। टेक इंडस्ट्री में मस्क का दबदबा एलन मस्क सिर्फ एक बिज़नेसमैन नहीं, बल्कि टेक और इनोवेशन की दुनिया में ट्रेंडसेटर माने जाते हैं। इलेक्ट्रिक कार, स्पेस टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया—हर क्षेत्र में उनकी मौजूदगी निवेशकों को आकर्षित करती है। यही वजह है कि किसी भी बड़े फैसले या विलय का असर सीधे उनके नेटवर्थ पर पड़ता है। क्या यह दौलत टिकेगी? बाज़ार विशेषज्ञ मानते हैं कि इतनी बड़ी वेल्थ का बने रहना बाज़ार की स्थिरता, कंपनी के प्रदर्शन और भविष्य की रणनीति पर निर्भर करेगा। हालांकि, एलन मस्क का ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि वह जोखिम लेते हैं—और अक्सर इतिहास रचते हैं। एक विलय, एक रात, और 84 अरब डॉलर की छलांग—एलन मस्क ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आधुनिक दौर में दौलत सिर्फ पैसे से नहीं, बल्कि विजन, टेक्नोलॉजी और बाज़ार के भरोसे से बनती है।
आर्थिक अनुशासन से लेकर सामाजिक सशक्तिकरण तक, निर्मला सीतारमण का 9वां बजट विकास का रोडमैप
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया। यह उनका लगातार नौवां बजट रहा, जिसमें सरकार की आर्थिक स्थिरता, समावेशी विकास और दीर्घकालिक सुधारों की स्पष्ट झलक देखने को मिली। बजट भाषण में उन्होंने आर्थिक अनुशासन, सामाजिक सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और कर सुधारों पर विशेष जोर दिया। बजट पेश करते समय वित्त मंत्री तमिलनाडु की पारंपरिक पर्पल रंग की ‘कट्टम कांजीवरम सिल्क साड़ी’ में नजर आईं। यह साड़ी भारतीय हैंडलूम और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानी जाती है। राजनीतिक गलियारों में इसे तमिलनाडु में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र एक सांकेतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। राजकोषीय अनुशासन पर सरकार का फोकस वित्त मंत्री ने बताया कि FY 2027 में राजकोषीय घाटा GDP का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि कर्ज-से-GDP अनुपात 55.6 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है। उन्होंने दोहराया कि सरकार राजकोषीय घाटे को 4.5 प्रतिशत से नीचे लाने के लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ रही है। यह संकेत देता है कि सरकार विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखना चाहती है। कर सुधार: छोटे करदाताओं को राहत बजट में करदाताओं के लिए बड़ी राहत की घोषणा की गई। वित्त मंत्री ने कहा कि नया आयकर कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा, जिससे टैक्स सिस्टम और प्रक्रियाएं सरल, पारदर्शी और करदाता-अनुकूल बनेंगी। इसके साथ ही आईटी सेवाओं के लिए समान सेफ हार्बर मार्जिन लागू करने और इसकी सीमा 2000 करोड़ रुपये तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया, जिससे स्टार्टअप्स और आईटी कंपनियों को अनुपालन में आसानी मिलेगी। विदेशी शिक्षा और इलाज हुआ सस्ता विदेश में पढ़ाई और मेडिकल ट्रीटमेंट कराने वालों के लिए सरकार ने बड़ी राहत दी है। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत शिक्षा और मेडिकल खर्च पर लगने वाला TCS 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है। इससे मध्यम वर्ग और छात्रों पर वित्तीय बोझ कम होगा। रियल एस्टेट को नई रफ्तार रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बजट में REITs (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स) के जरिए एसेट रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने की घोषणा की गई। इससे डेवलपर्स और सरकारी संस्थाएं अपनी निष्क्रिय संपत्तियों को मॉनेटाइज कर नई परियोजनाओं में निवेश कर सकेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे नकदी प्रवाह सुधरेगा और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए बजट में ₹10,000 करोड़ की ‘बायोफार्मा शक्ति योजना’ की घोषणा की गई। इस योजना के तहत कैंसर, डायबिटीज और ऑटो-इम्यून बीमारियों से जुड़ी दवाओं के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य भारत को फार्मा सेक्टर में आत्मनिर्भर बनाना और इलाज को सस्ता करना है। सामाजिक योजनाएं और ग्रामीण विकास बजट में कई नई और मौजूदा योजनाओं को विस्तार दिया गया, जिनमें शामिल हैं: नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड लखपति दीदी योजना दिव्यांगजन कौशल एवं सहारा योजना पशुधन उद्यमों का आधुनिकीकरण तटीय क्षेत्रों में काजू, नारियल और चंदन उत्पादन को बढ़ावा इन योजनाओं का मकसद ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन को मजबूती देना है। वाराणसी को मिली हाई-स्पीड रेल की सौगात बजट में वाराणसी के लिए एक बड़ी सौगात का ऐलान किया गया। शहर को हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से जोड़ने की घोषणा की गई है। देश में प्रस्तावित **सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में से दो वाराणसी से जुड़े होंगे, जिससे पूर्वांचल और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक और औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, बजट 2026-27 को आर्थिक स्थिरता, सामाजिक न्याय और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया बजट माना जा रहा है, जो भारत की विकास यात्रा को अगले चरण में ले जाने का रोडमैप पेश करता है।
अदाणी ग्रुप की तीन कंपनियों को ग्लोबल रेटिंग, भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ी साख
नई दिल्ली/टोक्यो: जापान की दिग्गज क्रेडिट रेटिंग एजेंसी JCR (Japan Credit Rating Agency) ने अदाणी ग्रुप की तीन प्रमुख कंपनियों—अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ), अदाणी ग्रीन एनर्जी (AGEL) और अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस (AESL)—को जो रेटिंग दी है, वह न सिर्फ समूह के लिए बल्कि भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए भी एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है। वैश्विक निवेशकों के बीच भारत की परियोजनाओं की विश्वसनीयता और फाइनेंशियल स्ट्रेंथ को यह कदम नई पहचान देता है। अदाणी पोर्ट्स का कमाल: सॉवरेन रेटिंग से भी ऊपर इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी उपलब्धि Adani Ports & SEZ Ltd (APSEZ) के नाम रही। JCR ने कंपनी को ‘A-’ (स्टेबल आउटलुक) की रेटिंग दी है। आमतौर पर किसी भी देश की कंपनियों की रेटिंग, उस देश की सॉवरेन रेटिंग से ऊपर नहीं जाती—लेकिन अदाणी पोर्ट्स ने इस परंपरा को तोड़ते हुए भारत की सॉवरेन रेटिंग से एक पायदान ऊपर की रेटिंग हासिल की है। रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, इसके पीछे कंपनी का मजबूत और स्थिर कैश-फ्लो, विशाल एसेट बेस और ग्लोबल पोर्टफोलियो प्रमुख वजहें हैं। अदाणी पोर्ट्स के पास कुल 19 पोर्ट्स का नेटवर्क है—15 भारत में और 4 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर। कंपनी भारत के लगभग 30% कार्गो और 50% कंटेनर वॉल्यूम को संभालती है, जो इसकी ऑपरेशनल मजबूती और बाजार में पकड़ को दर्शाता है। ग्रीन एनर्जी और पावर ट्रांसमिशन में भी भरोसा अदाणी ग्रुप की अन्य दो कंपनियों—अदाणी ग्रीन एनर्जी (AGEL) और अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस (AESL)—को भी JCR ने ‘BBB+’ (स्टेबल) रेटिंग दी है, जो भारत की सॉवरेन रेटिंग के बराबर मानी जाती है। रेटिंग एजेंसी ने दोनों कंपनियों के मजबूत EBITDA, दीर्घकालिक पावर परचेज एग्रीमेंट्स, और तेज़ी से हो रहे विस्तार को रेटिंग का आधार बताया है। रिन्यूएबल एनर्जी और पावर ट्रांसमिशन जैसे भविष्य के सेक्टर्स में इन कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी, भारत के ऊर्जा परिवर्तन लक्ष्यों को भी मजबूती देती है। निवेशकों के लिए क्या मायने? JCR की यह रेटिंग्स अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत हैं। इससे न केवल अदाणी ग्रुप की फंड जुटाने की क्षमता मजबूत होगी, बल्कि भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में वैश्विक पूंजी का भरोसा भी बढ़ेगा। कुल मिलाकर, जापान की प्रतिष्ठित एजेंसी की यह मुहर बताती है कि भारतीय कंपनियां अब ग्लोबल बेंचमार्क पर खड़ी होकर प्रतिस्पर्धा कर रही हैं—और अदाणी ग्रुप इस बदलाव की अग्रिम पंक्ति में है।
भारत का UPI: अब सिर्फ एक ऐप नहीं, बल्कि ग्लोबल डिजिटल पावर
जिस डिजिटल क्रांति ने भारत की गलियों, ठेलों और छोटे दुकानों को कैशलेस बना दिया, वही यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की तकनीकी ताकत का प्रतीक बनता जा रहा है। हाल ही में जापान में UPI के ट्रायल की शुरुआत ने यह साफ कर दिया है कि भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम अब केवल घरेलू जरूरत नहीं, बल्कि वैश्विक समाधान के रूप में देखा जा रहा है। दुकान से दुनिया तक का सफ़र कुछ साल पहले तक भारत में डिजिटल पेमेंट को लेकर संदेह था—इंटरनेट, स्मार्टफोन और सुरक्षा को लेकर सवाल उठते थे। लेकिन UPI ने इन तमाम आशंकाओं को पीछे छोड़ दिया। आज सब्ज़ी वाले से लेकर बड़े मॉल, टैक्सी ड्राइवर से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग तक—एक QR कोड और मोबाइल फोन ने लेन-देन की पूरी तस्वीर बदल दी है। UPI की सबसे बड़ी ताकत उसकी सरलता, रफ्तार और भरोसा है। बिना कार्ड, बिना वॉलेट और बिना लंबी प्रक्रिया—सीधे बैंक से बैंक ट्रांजैक्शन। यही मॉडल अब दुनिया को आकर्षित कर रहा है। जापान में ट्रायल: भारत की टेक्नोलॉजी को वैश्विक मान्यता जापान जैसे तकनीकी रूप से उन्नत देश में UPI का ट्रायल शुरू होना अपने आप में बड़ी बात है। यह संकेत है कि भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर अब केवल “यूज़र बेस” के कारण नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजिकल क्वालिटी और स्केलेबिलिटी के कारण अपनाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह ट्रायल सफल रहता है, तो भविष्य में भारतीय पर्यटक जापान में भी उसी तरह UPI से भुगतान कर सकेंगे, जैसे वे भारत में करते हैं—बिना करेंसी एक्सचेंज की झंझट के। डिजिटल डिप्लोमेसी का नया चेहरा UPI अब सिर्फ एक पेमेंट सिस्टम नहीं रहा। यह भारत की डिजिटल डिप्लोमेसी का अहम हिस्सा बन चुका है। पहले जहां भारत सॉफ्टवेयर सर्विसेज के लिए जाना जाता था, अब वह डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के लिए पहचाना जा रहा है। आज कई देश भारत के UPI मॉडल को अपनाने या उससे सीखने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह भारत के लिए आर्थिक ही नहीं, रणनीतिक बढ़त भी है।
भारत-यूरोप के बीच ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ पर मुहर: 90% टैरिफ खत्म
सस्ती होगी वाइन-बीयर से लेकर खुलेगा भारतीय निर्यात का महाद्वार नई दिल्ली/गोवा: करीब दो दशकों के इंतज़ार, लंबी कूटनीतिक बातचीत और कई दौर की अड़चनों के बाद आखिरकार भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर मुहर लग गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच यह बहुप्रतीक्षित समझौता साइन हुआ है, जिसे आर्थिक जानकार ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बता रहे हैं। इस डील के तहत यूरोपीय यूनियन से आने वाले करीब 90 फीसदी उत्पादों पर टैरिफ या तो पूरी तरह खत्म कर दिया गया है या फिर चरणबद्ध तरीके से काफी कम किया जाएगा। इसका सीधा असर आम उपभोक्ता से लेकर उद्योग जगत तक देखने को मिलेगा। क्या है इस ऐतिहासिक डील की सबसे बड़ी खासियत? भारत-EU ट्रेड डील दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक समझौतों में से एक मानी जा रही है। पीएम मोदी के मुताबिक, यह समझौता ग्लोबल GDP के करीब 25 फीसदी और वैश्विक व्यापार के लगभग एक-तिहाई हिस्से को कवर करता है। यानी भारत और यूरोप के बीच कारोबार न सिर्फ तेज़ होगा, बल्कि दोनों अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे के लिए और ज्यादा अहम बन जाएंगी। आम आदमी को क्या मिलेगा फायदा? इस डील का असर सीधे आपकी जेब पर भी पड़ेगा— यूरोप से आने वाली बीयर और वाइन सस्ती होंगी, क्योंकि इन पर लगने वाला भारी-भरकम टैरिफ घटा दिया गया है। लग्ज़री प्रोडक्ट्स, हाई-एंड मशीनरी और टेक्नोलॉजी से जुड़े कई सामान अब पहले से कम कीमत पर उपलब्ध हो सकते हैं। प्रतिस्पर्धा बढ़ने से घरेलू बाजार में क्वालिटी बेहतर होने की उम्मीद है। भारतीय उद्योग के लिए खुले नए दरवाज़े इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारत के कई प्रमुख सेक्टरों को बड़ा बूस्ट मिलने वाला है— टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स जेम्स और ज्वेलरी लेदर और फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर इन सेक्टरों को यूरोपीय बाजार में आसान पहुंच मिलेगी, जहां अब तक सख्त नियम और ऊंचे टैरिफ बड़ी चुनौती थे। India Energy Week से पीएम मोदी का संदेश गोवा में आयोजित India Energy Week के दौरान पीएम मोदी ने वर्चुअल संबोधन में इस डील को भारत की वैश्विक आर्थिक ताकत का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा— भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन रहा है। भारत पेट्रोलियम उत्पादों के टॉप-5 एक्सपोर्टर्स में शामिल है। आज भारत 150 से ज्यादा देशों को पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात कर रहा है। पीएम मोदी के मुताबिक, यह डील भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ रणनीति को ग्लोबल प्लेटफॉर्म देगी। यह समझौता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। भारत और यूरोप के बीच रणनीतिक साझेदारी, सप्लाई चेन की मजबूती और जियो-पॉलिटिकल संतुलन में भी इसकी अहम भूमिका होगी। खासकर ऐसे समय में जब दुनिया आर्थिक अनिश्चितताओं और वैश्विक तनावों से गुजर रही है भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट न सिर्फ एक आर्थिक समझौता है, बल्कि यह भारत की वैश्विक पहचान को और मजबूत करने वाला कदम है। सस्ती विदेशी चीज़ें, मज़बूत निर्यात, नए रोज़गार और उद्योगों को रफ्तार—इस डील से फायदा हर स्तर पर दिखेगा। यही वजह है कि इसे सही मायनों में ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है।
74वें इंडिया इंटरनेशनल गारमेंट फेयर का भव्य शुभारंभ, 2030 तक 40 अरब डॉलर निर्यात का लक्ष्य
नई दिल्ली/गुरुग्राम : केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने 23 जनवरी 2026 को यशोभूमि, द्वारका (नई दिल्ली) में इंडिया इंटरनेशनल गारमेंट फेयर (IIGF) के 74वें संस्करण का भव्य उद्घाटन किया। इस अवसर पर देश-विदेश से आए सैकड़ों प्रदर्शक, अंतरराष्ट्रीय खरीदार और उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित रहे। उद्घाटन समारोह में दीप प्रज्वलन, फेयर गाइड का विमोचन तथा मंत्री का संबोधन शामिल रहा। उद्घाटन के बाद मंत्री ने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण भी किया। अपने संबोधन में केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि इंडिया इंटरनेशनल गारमेंट फेयर आज अंतरराष्ट्रीय परिधान खरीदारों के लिए एक भरोसेमंद और सशक्त वैश्विक मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात है कि वे लगातार दूसरे वर्ष इस प्रतिष्ठित आयोजन का हिस्सा बने हैं। मंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में भारतीय वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र ने अभूतपूर्व प्रगति की है। वर्ष 2013-14 में जहां इस क्षेत्र का बाजार आकार 8.4 लाख करोड़ रुपये था, वहीं आज यह बढ़कर लगभग 16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। घरेलू बाजार भी 6 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025 में 13 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि महामारी के बाद भारत के वस्त्र निर्यात में 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है और यह क्षेत्र रोजगार सृजन का एक प्रमुख माध्यम बन गया है। श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने वस्त्र उद्योग से जुड़े सभी प्रमुख अवरोधों को दूर किया है। QCO सुधार, RoDTEP और RoSCTL में वृद्धि, आयात शुल्क में अस्थायी कटौती, इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर का समाधान जैसे कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने इन योजनाओं के माध्यम से उद्योग को अब तक 50,000 करोड़ रुपये से अधिक का समर्थन दिया है। मंत्री ने यह भी कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का वस्त्र उद्योग मजबूती से आगे बढ़ रहा है। निर्यात विविधीकरण के तहत भारत ने 40 नए देशों में अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाई है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अर्जेंटीना में 77%, मिस्र में 30%, पोलैंड और जापान में 20%, जबकि स्वीडन और फ्रांस में 10% की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत–यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौता शीघ्र ही संपन्न होने वाला है, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलेगा। मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत अब विदेशी मानकों पर निर्भर रहने के बजाय VisionNxt और IndiaSize जैसी स्वदेशी पहलों के माध्यम से अपने स्वयं के डिजाइन और साइज मानक विकसित कर रहा है। उन्होंने उद्योग से भारतीय मानकों को अपनाने की अपील की। इस अवसर पर AEPC (अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल) के चेयरमैन डॉ. ए. शक्तिवेल ने कहा कि IIGF का 74वां संस्करण भारत के प्रति वैश्विक विश्वास का प्रमाण है। इस संस्करण में 233 प्रदर्शक, 5,073 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में फैले हुए हैं और 1,120 से अधिक पंजीकृत अंतरराष्ट्रीय खरीदार भाग ले रहे हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रदर्शक भारत की मजबूत विनिर्माण क्षमता को दर्शाते हैं। डॉ. शक्तिवेल ने बताया कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय रेडीमेड गारमेंट (RMG) उद्योग ने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है। अप्रैल से दिसंबर 2025-26 के दौरान भारत का परिधान निर्यात **11.58 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.4 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने सरकार के समक्ष उद्योग की कुछ प्रमुख मांगें भी रखीं, जिनमें अमेरिका के लिए फोकस मार्केट स्कीम, ब्याज समानीकरण योजना की सीमा बढ़ाना, 5% ब्याज सबवेंशन जैसी मांगें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इससे विशेष रूप से MSME निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी। डॉ. शक्तिवेल ने यह भी बताया कि इस संस्करण में यूएई, जापान, फ्रांस, इटली, रूस, दक्षिण अफ्रीका, सऊदी अरब, कोरिया, स्पेन, मॉरीशस और इजराइल सहित कई देशों के प्रमुख ब्रांड और रिटेल चेन के खरीदार शामिल हुए हैं, जो भारत की डिजाइन, गुणवत्ता, अनुपालन और समयबद्ध डिलीवरी पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। भविष्य को लेकर आशावाद जताते हुए उन्होंने कहा कि भारत–EU FTA और प्रतिस्पर्धी देशों को मिलने वाली वरीयताओं में कमी से भारत को बड़ा लाभ मिलेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि 2030 तक 40 अरब डॉलर के परिधान निर्यात लक्ष्य को भारत अवश्य हासिल करेगा। कार्यक्रम के अंत में IGFA के उपाध्यक्ष श्री राकेश वैद ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और इस सफल आयोजन के लिए सभी सहभागियों की सराहना की।