अहमदाबाद/नई दिल्ली, 26 अगस्त: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात में मारुति सुजुकी ई-विटारा इलेक्ट्रिक एसयूवी और हाइब्रिड बैटरी यूनिट का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने भारत और जापान के मजबूत संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते ‘मेड फॉर ईच अदर’ वाले हैं। भारत-जापान के बीच ‘पीपल टू पीपल’ कनेक्ट बढ़ा है। स्किल और ह्यूमन रिसोर्स से जुड़ी एक-दूसरे की जरूरतों को भी हम पूरा कर पा रहे हैं। आने वाले वर्षों में सभी प्रमुख क्षेत्रों में निरंतर प्रगति की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आज के प्रयास 2047 तक एक विकसित भारत की नींव मजबूत करेंगे। उन्होंने यह विश्वास व्यक्त करते हुए समापन किया कि जापान इस लक्ष्य को प्राप्त करने में एक विश्वसनीय भागीदार बना रहेगा। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि वह अगले हफ्ते जापान जाएंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और जापान के बीच संबंध सिर्फ कूटनीतिक संबंधों से कहीं आगे तक फैले हैं, यह संस्कृति और आपसी विश्वास पर आधारित है। दोनों देश एक-दूसरे के विकास में अपनी प्रगति देखते हैं। मारुति सुजुकी के साथ शुरू हुआ सफर अब बुलेट ट्रेन की गति तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि भारत-जापान साझेदारी की औद्योगिक क्षमता को साकार करने की प्रमुख पहल गुजरात में शुरू हुई थी। अतीत को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 20 साल पहले जब वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन शुरू हुआ था, तब जापान एक प्रमुख साझेदार था। उद्योग से जुड़े नियम और कानून जापानी भाषा में छपवाए गए, ताकि उन्हें समझना आसान हो। उन्होंने गोल्फ के प्रति जापानियों के लगाव की सराहना की और बताया कि उनके हितों को ध्यान में रखते हुए 7-8 नए गोल्फ कोर्स विकसित किए गए हैं। पीएम मोदी ने आगे बताया कि भारत के कॉलेज और विश्वविद्यालय अब जापानी भाषा की शिक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत के निरंतर प्रयास भारत और जापान के लोगों के बीच आपसी संपर्क को मजबूत कर रहे हैं। दोनों देश अब कौशल विकास और मानव संसाधन के क्षेत्र में एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं।” उन्होंने मारुति सुजुकी जैसी कंपनियों से ऐसी पहलों में सक्रिय रूप से भाग लेने और युवा आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का आग्रह किया। ओसामु सुजुकी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत सरकार को उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित करने का गौरव प्राप्त हुआ था। उन्हें मारुति सुजुकी इंडिया के लिए ओसामु सुजुकी के विजन के व्यापक विस्तार को देखकर प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने बताया कि सुजुकी जापान भारत में निर्माण कर रही है और यहां उत्पादित वाहनों का निर्यात जापान को किया जा रहा है। यह न सिर्फ भारत-जापान संबंधों की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक कंपनियों के भारत में बढ़ते विश्वास को भी दर्शाता है। मारुति सुजुकी जैसी कंपनियां प्रभावी रूप से ‘मेक इन इंडिया’ की ब्रांड एंबेसडर बन गई हैं। यह उल्लेख करते हुए कि मारुति सुजुकी लगातार 4 वर्षों से भारत की सबसे बड़ी कार निर्यातक रही है, प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि आज से इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात भी उसी पैमाने पर शुरू होगा। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के दर्जनों देशों में चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर गर्व से ‘मेड इन इंडिया’ का लेबल लगा होगा। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा, “भारत के पास डेमोक्रेसी की मजबूती और डेमोग्राफी का लाभ है। भारत में कुशल कार्यबल का एक विशाल भंडार भी है, जो प्रत्येक भागीदार के लिए जीत की स्थिति पैदा करता है।” भारत की सफलता की कहानी के बीज 12-13 साल पहले बोए गए थे। यह याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2012 में उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान हंसलपुर में मारुति सुजुकी को जमीन आवंटित की गई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि उस समय भी, आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया का विजन था। उन्होंने कहा कि वे शुरुआती प्रयास अब देश के वर्तमान संकल्पों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत के अभियान को सभी मिलकर आगे बढ़ाएं और वोकल फॉर लोकल बनें। उन्होंने कहा कि स्वदेशी चीजें ही जीवन मंत्र बननी चाहिए। गर्व से स्वदेशी चीजों की तरफ चल पड़ो। उन्होंने कहा, “मेरी स्वदेशी की व्याख्या बहुत साधारण है। पैसा किसका लगता है, उससे मुझे कोई लेना-देना नहीं है। चाहे वह डॉलर हो, पाउंड हो या करेंसी काली हो या गोरी, इससे लेना-देना नहीं है, लेकिन जो प्रोडक्शन है, उसमें पसीना मेरे देशवासियों का होगा। जो प्रोडक्शन होगा, उसमें महक मेरे देश की मिट्टी की होगी। इस भाव के साथ मेरे साथ चलें और 2047 में ऐसा हिंदुस्तान बनाएं कि आने वाली पीढ़ियां आपके त्याग का गर्व करेंगी। आपके योगदान का गर्व करेंगी।” प्रधानमंत्री ने सबसे आखिरी में कहा, “आत्मनिर्भर भारत के मंत्र और स्वदेशी के मार्ग के लिए आज देशवासियों को न्योता देता हूं कि आइए, सभी चल पड़ें और 2047 तक विकसित भारत बनाकर रहेंगे। दुनिया की भलाई में भारत का योगदान बढ़ाते रहेंगे।”
भारत में चीनी मिलों का राजस्व वित्त वर्ष 2026 में 8 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 16 जुलाई : सामान्य से बेहतर मानसून के कारण महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की खेती का रकबा बढ़ने की उम्मीद है। प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में बेहतर उपज की उम्मीदों के साथ, इस वर्ष चीनी उत्पादन में 15 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। यह जानकारी बुधवार को आई एक रिपोर्ट में दी गई। आईसीआरए का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में इंटीग्रेटेड चीनी मिलों का राजस्व 6-8 प्रतिशत तक बढ़ेगा, जिसे बिक्री की मात्रा में वृद्धि, मजबूत घरेलू चीनी कीमतों और अधिक डिस्टिलरी उत्पादन के साथ-साथ मदद मिलेगी। इसके बावजूद, अगर इथेनॉल की कीमतें स्थिर रहती हैं तो वित्त वर्ष 2026 में चीनी मिलों के परिचालन लाभ मार्जिन में मामूली वृद्धि होगी। चीनी क्षेत्र के राजस्व में अपेक्षित सुधार, स्थिर लाभप्रदता और आरामदायक ऋण कवरेज मानकों के साथ इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (ईबीपी) सहित सरकार के नीतिगत समर्थन की वजह से आईसीआरए का इस क्षेत्र के लिए दृष्टिकोण ‘स्थिर’ बना हुआ है। अपेक्षित घरेलू चीनी उत्पादन और कीमतों पर टिप्पणी करते हुए, आईसीआरए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, गिरीशकुमार कदम ने कहा, “आईसीआरए का अनुमान है कि सामान्य से बेहतर मानसून और प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में गन्ने के रकबे और उपज में अपेक्षित सुधार के बीच, चीनी के लिए सकल चीनी उत्पादन वर्ष 2025 के 29.6 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर वर्ष 2026 में 34.0 मिलियन टन (एमटी) हो जाएगा।” 4 मिलियन मीट्रिक टन इथेनॉल उत्पादन की ओर अनुमानित डायवर्जन के बाद, शुद्ध चीनी उत्पादन 2025 के 26.2 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर 2026 में 30.0 मिलियन मीट्रिक टन हो जाएगा। उन्होंने बताया कि 2026 में इथेनॉल की ओर डायवर्जन में अपेक्षित वृद्धि के बावजूद, क्लोजिंग शुगर स्टॉक कंफर्टेबल रहने की संभावना है। इसके अलावा, घरेलू चीनी की कीमतें, जो वर्तमान में 39-41 रुपये प्रति किलोग्राम के दायरे में हैं, अगले सीजन की शुरुआत तक स्थिर रहने की उम्मीद है, जिससे मिलों की लाभप्रदता को बढ़ावा मिलेगा। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 30 सितंबर, 2025 तक क्लोजिंग शुगर स्टॉक लगभग 52 लाख मीट्रिक टन होगा, जो 30 सितंबर, 2024 तक 80 लाख मीट्रिक टन के चीनी स्टॉक से कम है। यह दो महीने की खपत के बराबर होगा। अनुमान के अनुसार अगर घरेलू खपत और निर्यात कोटा वित्त वर्ष 2025 के समान ही रहता है तो 30 सितंबर, 2026 तक अंतिम स्टॉक बढ़कर 63 लाख मीट्रिक टन (लगभग 2.5 महीने की खपत) हो जाने की उम्मीद है। कदम ने कहा, “हाल के महीनों में भारत सरकार द्वारा निर्धारित 20 प्रतिशत ब्लेंडिंग टारगेट हासिल करने के साथ इथेनॉल ब्लेंडिंग का रुझान उत्साहजनक बना हुआ है। इसके अलावा, सरकार ब्लेंडिंग टारगेट को 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाने के विकल्प पर विचार कर रही है, जिससे डिस्टिलरी को मदद मिलेगी।”
बीते सप्ताह सरसों, सोयाबीन, मूंगफली तेल-तिलहन, बिनौला तेल में सुधार; पाम-पामोलीन के भाव स्थिर
नई दिल्ली, 06 जुलाई : विदेशों में खाद्य तेल कीमतों में मजबूती के बीच घरेलू तेल-तिलहन बाजार में बीते सप्ताह सरसों, सोयाबीन, मूंगफली तेल-तिलहन, बिनौला तेल के दाम में सुधार दर्ज हुआ, जबकि कच्चे पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल के दाम स्थिर बने रहे। बाजार सूत्रों ने कहा कि विदेशी बाजारों में खाद्य तेलों के दाम में मजबूती दिखी पर उसका स्थानीय कारोबार में कीमतों पर उतना कोई विशेष असर नहीं दिखा। सूत्रों ने कहा कि मंडियों में सरसों की आवक कमजोर बनी हुई है। इसके अलावा कच्ची घानी की बड़ी तेल मिलों की मांग भी बढ़ी है। आगामी सरसों फसल के आने में भी अच्छा-खासा समय बचा हुआ है। सरकार या फिर किसानों के पास सरसों का स्टॉक है और आगे सरसों के बाजार का रुख या घट-बढ़ सरकार द्वारा उठाये जाने वाले कदम से ही तय होगा। अभी हाल में वर्ष 2025 की जो सरसों फसल सरकार ने खरीदी थी, उनके बिक्री के लिए सरकार द्वारा निविदा मंगाने की पहल से बाजार पर कुछ दबाव आया है। कुल मिलाकर फिलहाल सरसों का दाम अभी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से लगभग छह-सात प्रतिशत ऊंचा चल रहा है। उन्होंने कहा कि बीते सप्ताह विदेशों में सोयाबीन का दाम पहले के 1,130-1,135 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 1,155-1,160 डॉलर प्रति टन हो गया। इस वजह से सोयाबीन तेल-तिलहन कीमतों में भी सुधार प्रतीत हो रहा है। वास्तव में कहें तो सोयाबीन के किसान और आयातक की हालत काफी बुरी है क्योंकि इसके हाजिर दाम एमएसपी से काफी नीचे (लगभग 15 प्रतिशत नीचे) हैं और इस वजह से किसानों की ओर से मंडियों में आवक भी कम हो रही है। दूसरी ओर खराब आर्थिक हालत वाले आयातकों को बैंकों में ‘लेटर ऑफ क्रेडिट’ को चलाते रहने के लिए लागत से कम दाम पर सोयाबीन डीगम तेल को बेचना पड़ रहा है। अपने पिछले सप्ताहांत के मुकाबले कीमतों में मामूली सुधार तो है लेकिन इसे सही मायने में सुधार बताना सही नहीं होगा। सूत्रों ने कहा कि मूंगफली का हाजिर दाम एमएसपी से लगभग 15 प्रतिशत नीचे है। इस कमजोर दाम के कारण किसानों की ओर से मंडियों में मूंगफली की आवक कम हो रही है। मूंगफली का कमजोर थोक दाम होने की वजह से थोड़ी बहुत मांग भी निकली है। इन वजहों से मूंगफली तेल-तिलहन के दाम में भी समीक्षाधीन सप्ताह में सुधार है। सूत्रों ने कहा कि समीक्षाधीन सप्ताह में पाम-पामोलीन तेल के दाम अपने पहले के सप्ताहांत के बंद भाव पर ही स्थिर रहे। यहां वस्तुस्थिति यह है कि जब सोयाबीन जैसा नरम तेल बाजार में ठीक से खप नहीं रहा तो दाम के मामले में लगभग उसकी बराबरी कर रहे हैं, तो पाम-पामोलीन कौन खरीदना चाहेगा। पाम-पामोलीन के दाम स्थिर बने रहने का यह प्रमुख कारण है। सूत्रों ने कहा कि बिनौले की उपलब्धता काफी कम रहने से बीते सप्ताह बिनौला तेल के दाम में सुधार आया। वैसे गुजरात में बिनौला के रिफाइंड तेल का दाम पामोलीन से 16-17 रुपये लीटर अधिक हो गया है। सूत्रों ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए देशी तेल-तिलहनों का बाजार बनाने, आयात पर निर्भरता कम करने, किसानों को अच्छे दाम दिलाने की व्यवस्था करने की जरूरत नजर आती है। सरकार को तेल-तिलहन उद्योग के विभिन्न अंशधारकों के साथ मिल-बैठ कर इसपर विचार करना होगा कि आयातक क्यों लागत से कम दाम पर सोयाबीन डीगम तेल बेच रहे हैं? थोक दाम टूटा होने के बाद भी खुदरा में मूंगफली तेल का दाम क्यों ऊंचा बना हुआ है? ऐसे में ड्यूटी घटाने या बढ़ाने की क्या अहमियत रह जाती है? क्या ऊंचे खुदरा दाम का लाभ किसानों को मिल रहा है? थोक दाम टूटने का लाभ क्या उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है? क्या वायदा कारोबार के पहले के अनुभव और प्रयोग देश को तेल-तिलहन उत्पादन मामले में आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने में कामयाब रहे हैं या इसने आयात पर निर्भरता को और बढ़ाया ही है। इन प्रश्नों के आगे पाम-पामोलीन की बहस कहीं ज्यादा अहमियत नहीं रखती, जिसपर सारी बहस का रुख मोड़ दिया जाता है। बीते सप्ताह सरसों दाने का थोक भाव 100 रुपये के सुधार के साथ 6,925-6,975 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। जबकि, सरसों दादरी तेल का थोक भाव 175 रुपये के सुधार के साथ 14,875 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल का भाव क्रमश: 25-25 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 2,560-2,660 रुपये और 2,560-2,695 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुआ। समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाने और सोयाबीन लूज के थोक भाव क्रमश: 25-25 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 4,375-4,425 रुपये और 4,075-4,175 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए। इसी प्रकार, सोयाबीन दिल्ली का दाम 50 रुपये के सुधार के साथ 12,650 रुपये, सोयाबीन इंदौर तेल का दाम 50 रुपये सुधार के साथ 12,450 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल का दाम 100 रुपये के सुधार के साथ 9,700 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। समीक्षाधीन सप्ताह में कमजोर दाम पर मांग निकलने और बिकवाली के लिए आवक घटने से मूंगफली तेल-तिलहन के दाम लाभ दर्शाते बंद हुए। मूंगफली तिलहन का दाम 100 रुपये सुधरकर 5,700-6,075 रुपये क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल का भाव क्रमश: 150 और 35 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 13,700 रुपये क्विंटल और 2,230-2,530 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ। समीक्षाधीन सप्ताह में हल्के नरम तेल सोयाबीन के दाम से लगभग बराबरी कर रहे पाम-पामोलीन की मांग प्रभावित होने के बीच सीपीओ तेल का दाम 10,650 रुपये प्रति क्विंटल, पामोलीन दिल्ली का भाव 12,400 रुपये प्रति क्विंटल तथा पामोलीन एक्स कांडला तेल का भाव 11,350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बना रहा। तेजी के आम रुख के अनुरूप, समीक्षाधीन सप्ताह में बिनौला तेल भी 150 रुपये बढ़कर 12,500 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
रिलायंस के कार्यकारी निदेशक अनंत अंबानी को मिलेगा 10-20 करोड़ रुपये वेतन, लाभ कमीशन
नई दिल्ली, 29 जून : अरबपति उद्योगपति मुकेश अंबानी के सबसे छोटे पुत्र और तीन भाई-बहनों में सबसे पहले प्रमुख कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज में कार्यकारी निदेशक नियुक्त किए गए अनंत अंबानी को सालाना 10-20 करोड़ रुपये का वेतन और कंपनी के मुनाफे पर कमीशन सहित कई भत्ते दिए जाएंगे। शेयरधारकों को भेजी गई सूचना में यह जानकारी दी गई है। जहां सबसे अमीर एशियाई के तीनों बच्चे – जुड़वां आकाश और ईशा, और अनंत को 2023 में गैर-कार्यकारी निदेशकों के रूप में तेल-से-दूरसंचार-और-खुदरा समूह के निदेशक मंडल में शामिल किया गया था, वहीं सबसे छोटे अनंत को इस साल अप्रैल में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड का कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया था। गैर-कार्यकारी निदेशकों के रूप में, तीनों को कोई वेतन नहीं मिल रहा था और प्रत्येक को वित्त वर्ष 2023-24 में चार लाख रुपये का शुल्क और 97 लाख रुपये का लाभ पर कमीशन दिया गया था। हालांकि, कार्यकारी निदेशक के तौर पर 30 वर्षीय अनंत वेतन और अन्य आवश्यक शर्तों के हकदार होंगे। रविवार को शेयर बाजार को दिए गए नोटिस में रिलायंस ने कहा कि नियुक्ति के लिए शेयरधारकों की मंजूरी पोस्टल बैलेट के जरिये मांगी गई है। साल 2023 में नियुक्तियां भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी में उत्तराधिकार योजना का हिस्सा थीं, जिसे कई लोगों ने 2002 में उनके पिता की मृत्यु के बाद भाई-बहन के झगड़े से बचने के लिए अंबानी के प्रयास के रूप में देखा। ईशा रिलायंस रिटेल के निदेशक मंडल में हैं और हाल ही में बनी जियो फाइनेंशियल सर्विसेज में शामिल हुई हैं, आकाश दूरसंचार कारोबार के प्रमुख हैं। अनंत मैटेरियल्स और नवीकरणीय ऊर्जा खंड से जुड़े हैं। वहह पेशेवर प्रबंधकों के साथ मिलकर काम करते हैं। पोस्टल बैलेट में, रिलायंस ने कहा कि अनंत का “वेतन और भत्ते 10 करोड़ रुपये से 20 करोड़ रुपये प्रति वर्ष की सीमा में होंगे।” इसमें कहा गया, “सुविधाओं और भत्तों में आवास (सुसज्जित या अन्यथा) या उसके बदले में मकान किराया भत्ता; व्यय की प्रतिपूर्ति के साथ मकान रखरखाव भत्ता और/या गैस, बिजली, पानी, साज-सज्जा और मरम्मत के उपयोग के लिए भत्ते तथा स्वयं और आश्रितों सहित परिवार के लिए छुट्टी यात्रा रियायत शामिल होगी।” अनंत को अपने या पत्नी तथा व्यावसायिक यात्राओं के दौरान सहायकों के लिए यात्रा, भोजन तथा आवास पर किए गए व्यय की पैसा भी मिलेगा। साथ कंपनी के व्यवसाय के लिए कार की व्यवस्था तथा निवास पर संचार व्यय का खर्च भी मिलेगा। वह चिकित्सा के साथ-साथ अपने और अपने परिवार के सदस्यों के लिए कंपनी द्वारा व्यवस्थित सुरक्षा के भी हकदार होंगे। अधिसूचना में कहा गया, “वेतन, भत्ते और सुविधाओं के अलावा, अनंत एम. अंबानी शुद्ध लाभ के आधार पर पारिश्रमिक पाने के हकदार होंगे।” मुकेश अंबानी ने अगस्त, 2023 में तेल से लेकर दूरसंचार क्षेत्र में कारोबार करने वाली कंपनी के बोर्ड में अपने तीनों बच्चों को गैर-कार्यकारी निदेशकों के रूप में शामिल करने की घोषणा की थी, ताकि अंतिम उत्तराधिकार योजना तैयार की जा सके। इसके बाद उन्होंने कहा कि उनके बच्चे भारत की सबसे मूल्यवान और लाभदायक कंपनी रिलायंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मुकेश अंबानी के विपरीत, जिन्हें अपने पिता के व्यवसाय की देखभाल के लिए स्टैनफोर्ड से पढ़ाई छोड़नी पड़ी, जुड़वां बच्चों ईशा और आकाश ने क्रमशः येल और ब्राउन से स्नातक किया। सबसे बड़े पुत्र आकाश कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद 2014 में समूह की दूरसंचार इकाई जियो की नेतृत्व टीम में शामिल हुए। उन्हें जून, 2022 में दूरसंचार इकाई जियो इन्फोकॉम का चेयरमैन बनाया गया। वह इंडियन प्रीमियर लीग में मुंबई इंडियंस क्रिकेट टीम का प्रबंधन भी करते हैं। ईशा कंपनी के खुदरा, ई-कॉमर्स और लक्जरी कारोबार को संभालती हैं। कहा जाता है कि कंपनी के ई-कॉमर्स ऐप के ज़रिए फैशन के क्षेत्र में कंपनी की मौजूदगी बढ़ाने और शीर्ष अंतरराष्ट्रीय लक्जरी ब्रैंड के साथ बढ़ती साझेदारी के पीछे भी उनका ही हाथ है। अनंत रिलायंस के ऊर्जा कारोबार से जुड़े हैं, जिसमें जीवाश्म ईंधन से लेकर सौर पैनल निर्माण का विकास शामिल है। ब्राउन यूनिवर्सिटी से स्नातक अनंत, अपनी मां के साथ रिलायंस फाउंडेशन के बोर्ड में भी हैं, जो समूह की परमार्थ इकाई है। तीनों बच्चे जियो प्लेटफॉर्म्स के बोर्ड में हैं, जो रिलायंस की दूरसंचार और डिजिटल संपत्तियों और रिलायंस रिटेल का स्वामित्व रखने वाली इकाई है।
अमेरिका और ईयू के साथ मुक्त व्यापार समझौतों पर तेजी से बढ़ रही है वार्ता : सीतारमण
नई दिल्ली, 24 जून: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने निर्यात को बढ़ावा दिये जाने का उल्लेख करते हुये मंगलवार को यहां कहा कि अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौतों पर बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है और जल्द ही पूरी हो जाएगी। श्रीमती सीतारमण ने यहां इंडिया एक्जिम बैंक द्वारा आयोजित ट्रेड कॉन्क्लेव 2025 को संबोधित करते हुये विकसित भारत योजना के तहत सरकार के व्यापार और विनिर्माण दृष्टिकोण को सामने रखा। उन्होंने कहा कि भारत की निर्यात-आधारित गति अधिक व्यापक और लचीली होती जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत ने पहले ही संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया और 4 देशों के ईएफटीए (यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ) ब्लॉक के साथ मुक्त व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं और ब्रिटेन के साथ बातचीत पूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ बातचीत वास्तव में बहुत तेजी से चल रही है और जल्द ही निष्कर्ष पर पहुंचनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की व्यापार वृद्धि आकस्मिक या बिखरी हुई नहीं है। इसके बजाय, यह लक्षित नीतिगत कदमों के साथ संरेखित है। यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और ईएफटीए ब्लॉक के साथ हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) ने नए बाजार खोले हैं। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025 में भारत का कुल निर्यात 825 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है और पिछले वर्ष की तुलना में 6 प्रतिशत अधिक है। वित्त मंत्री ने कहा कि यह वृद्धि वैश्विक निर्यात में मात्र 4 प्रतिशत की वृद्धि के बीच हुई है, जो विश्व बाजारों में भारत की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मकता को रेखांकित करता है। श्रीमती सीतारमण ने संयुक्त राष्ट्र व्यापार रिपोर्टों का हवाला दिया, जो भारत को शीर्ष एफडीआई गंतव्यों में से एक बताती हैं। पिछले एक दशक में, भारत को 668 अरब डॉलर का एफडीआई प्राप्त हुआ है, जो पिछले 24 वर्षों में कुल प्रवाह का 67 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भी आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि एप्पल के आईफोन का हवाला दिया, जहां विनिर्माण तेजी से भारत में स्थानांतरित हो रहा है, जिसमें मूल्य संवर्धन हो रहा है, न कि केवल असेंबली। उन्होंने कहा कि आईफोन के सभी मॉडलों में स्थानीयकरण 20 प्रतिशत पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने व्यापार घर्षण को कम करने और अनुपालन को सरल बनाने के लिए भी कदम उठाए हैं। मूल सीमा शुल्क दरों को कम किया है जिसमें शून्य दर भी शामिल है। केंद्रीय बजट 2025-26 ने प्रणाली को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाने के उद्देश्य से सात और टैरिफ स्लैब को समाप्त कर दिया। विनिर्माण से जुड़े निर्यात में सुधार के वास्ते सरकार ने शुल्क मुक्त आयात के लिए अंतिम उपयोग अवधि को पांच महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दिया है। सीमा शुल्क अधिनियम में संशोधन अब कार्गो निकासी में तेजी लाने के लिए अनंतिम मूल्यांकन पर समय सीमा लगाता है। उन्होंने कहा कि अब अधिक मुक्त व्यापार समझौते करने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निर्यातक वैश्विक रूख के विपरीत चल रहे हैं। उन्होंने निर्यातकों को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया और उनसे नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने तथा अपने उत्पादों के लिए नए बाजार खोजने का आग्रह किया। इस कार्यक्रम में वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू ने कहा कि भारत की विकास संभावनाएं उज्ज्वल बनी हुई हैं, भले ही विश्व अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और इससे उत्पन्न महत्वपूर्ण चुनौतियों से परेशान है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भी भारत आशा की किरण बना हुआ है। भारत का निर्यात, जिसे वाणिज्य मंत्रालय वैश्विक मूल्य श्रृंखला में एकीकृत करने के लिए बहुत प्रयास कर रहा है, चुनौतियों के बावजूद अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।
हमारी सबसे परिवर्तनकारी परियोजना धारावी में जल्द पेश की जा रही है : गौतम अदाणी
अहमदाबाद, 24 जून: अदाणी समूह धारावी में रहने वाले लोगों के लिए एक विश्व स्तरीय जिला बनाने की कल्पना करने का प्रयास कर रहा है।इस बीच, समूह के अध्यक्ष गौतम अदाणी ने मंगलवार को कहा कि उनकी सबसे परिवर्तनकारी परियोजना धारावी में जल्द पेश की जा रही है। धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट (डीआरपी) धारावी में रहने वालों के जीवन और ‘रहने-काम करने’ की स्थितियों को बदलने का एक अनूठा अवसर है, जिसका लक्ष्य बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर और सार्वजनिक सुविधाओं के साथ जीवन की उच्च गुणवत्ता प्रदान करना है। गौतम अदाणी ने अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) की 33वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) को संबोधित करते हुए कहा, “एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती को अब भारत की सबसे महत्वाकांक्षी शहरी पुनर्वास परियोजना के रूप में फिर से तैयार किया जा रहा है।” उन्होंने जोर देते हुए कहा, “हमारा धारावी सोशल मिशन कौशल, स्वास्थ्य सेवा और रोजगार कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं का उत्थान कर रहा है। दस लाख से अधिक लोग संकरी गलियों से निकलकर एक ऐसे टाउनशिप में चले जाएंगे, जिसमें विशाल लेआउट, डुअल टॉयलेट्स, खुली जगहें, स्कूल, अस्पताल, ट्रांजिट हब और पार्क होंगे।” धारावी मास्टर प्लान, पुनर्विकास के माध्यम से आर्थिक परिवर्तन को आगे बढ़ाना, मजबूत इकोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करना और एक न्यायसंगत धारावी को बढ़ावा देना, तीन मार्गदर्शक सिद्धांतों की नींव पर बनाया गया है। धारावी के केंद्र में एक बड़ी सक्रिय सार्वजनिक खुली जगह की योजना बनाई गई है, जो न केवल निवासियों की मनोरंजन आवश्यकताओं को पूरा करेगी बल्कि पूरे मुंबई शहर की भी आवश्यकताओं को पूरा करेगी, जहां धारावी और मुंबई के निवासी उत्सवों और त्योहारों के लिए साथ आ सकते हैं। धारावी को निर्बाध मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के साथ एक उच्च ट्रांजिट-ऑरिएंटेड डेवलपमेंट में बदल दिया जाएगा। बस फीडर सिस्टम, गैर-मोटर चालित परिवहन के लिए डेडिकेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर और एक बढ़िया स्ट्रीट नेटवर्क लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा। धारावी के केंद्र में, एक मल्टी-मॉडल ट्रांजिट हब (एमएमटीएच) की योजना बनाई गई है। इस योजना का उद्देश्य पहली बार ऐसी सुविधा को लाना है, जहां सिटी बस और दूसरे सिटी ट्रांसपोर्ट के अलावा, इंटर-सिटी, इंट्रा-सिटी, सबअर्बन, मेट्रो, हाई-स्पीड और एयरपोर्ट एक्सप्रेस ट्रेन तक पहुंचा जा सके।
ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले से बाजार ढेर
-बाजार की गिरावट के बावजूद निवेशकों को 8 हजार करोड़ का मुनाफा नई दिल्ली, 23 जून: घरेलू शेयर बाजार में आज सप्ताह के पहले कारोबारी दिन ही जोरदार उतार चढ़ाव होता हुआ नजर आया। शुरुआती कारोबार में बाजार 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट का शिकार हो गया। हालांकि सुबह 10 बजे के बाद खरीदारी शुरू हो जाने के कारण शेयर बाजार निचले स्तर से काफी हद तक रिकवर होने में भी सफल रहा। दोपहर 2 बजे के बाद बाजार में एक बार फिर बिकवाली का दबाव बन जाने के कारण सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सूचकांकों में दोबारा गिरावट आ गई। पूरे दिन के कारोबार के बाद सेंसेक्स 0.62 प्रतिशत और निफ्टी 0.56 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुए। आज दिन भर के कारोबार के दौरान मेटल, मीडिया और कैपिटल गुड्स सेक्टर के शेयरों में लगातार खरीदारी होती रही। इसी तरह कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑयल एंड गैस और पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइज इंडेक्स भी बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर एफएमसीजी, ऑटोमोबाइल, आईटी और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। इसी तरह हेल्थकेयर और टेक इंडेक्स भी गिरावट के साथ बंद हुए। ब्रॉडर मार्केट में आज आमतौर पर खरीदारी होती रही, जिसके कारण बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 0.20 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ। इसी तरह स्मॉलकैप इंडेक्स ने 0.57 प्रतिशत की तेजी के साथ आज के कारोबार का अंत किया। आज शेयर बाजार में आई कमजोरी के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में हुई खरीदारी के कारण स्टॉक मार्केट के निवेशकों की संपत्ति में करीब 8 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हो गई। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन आज के कारोबार के बाद बढ़ कर 447.78 लाख करोड़ रुपये (अस्थाई) हो गया। जबकि पिछले सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को इनका मार्केट कैपिटलाइजेशन 447.70 लाख करोड़ रुपये था। इस तरह निवेशकों को आज के कारोबार से करीब 8 हजार करोड़ रुपये का फायदा हो गया। आज दिन भर के कारोबार में बीएसई में 4,240 शेयरों में एक्टिव ट्रेडिंग हुई। इनमें 1,862 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 2,198 शेयरों में गिरावट का रुख रहा, वहीं 180 शेयर बिना किसी उतार चढ़ाव के बंद हुए। एनएसई में आज 2,624 शेयरों में एक्टिव ट्रेडिंग हुई। इनमें से 1,216 शेयर मुनाफा कमा कर हरे निशान में और 1,408 शेयर नुकसान उठा कर लाल निशान में बंद हुए। इसी तरह सेंसेक्स में शामिल 30 शेयरों में से 9 शेयर बढ़त के साथ और 21 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। जबकि निफ्टी में शामिल 50 शेयरों में से 15 शेयर हरे निशान में और 35 शेयर लाल निशान में बंद हुए। बीएसई का सेंसेक्स आज 704.10 अंक टूट कर 81,704.07 अंक के स्तर पर खुला। शुरुआती कारोबार में ही बिकवाली का दबाव बन जाने के कारण सुबह 10 बजे तक ये सूचकांक 931.41 अंक की कमजोरी के साथ 81,476.76 अंक के स्तर तक गिर गया। इसके बाद खरीदारों ने लिवाली शुरू कर दी, जिसकी वजह से सेंसेक्स की स्थिति में सुधार होने लगा। लगातार हो रही खरीदारी के सपोर्ट से दोपहर 2 बजे के करीब ये सूचकांक निचले स्तर से करीब 700 अंक की रिकवरी करके 238.50 अंक की कमजोरी के साथ 82,169.67 अंक तक पहुंचने में सफल रहा। हालांकि इसके बाद एक बार फिर बिकवाली शुरू हो गई, जिसकी वजह से सेंसेक्स 511.38 अंक लुढ़क कर 81,896.79 अंक के स्तर पर बंद हुआ। सेंसेक्स की तरह ही एनएसई के निफ्टी ने 172.65 अंक की कमजोरी के साथ 24,939.75 अंक के स्तर से आज के कारोबार की शुरुआत की। बाजार खुलने के बाद सुबह 10 बजे तक ये सूचकांक 287.55 अंक लुढ़क कर 24,824.85 अंक के स्तर तक आ गया। इसके बाद बाजार में खरीदारों ने लिवाली का जोर बना दिया, जिससे इस सूचकांक की स्थिति में सुधार होने लगा। लगातार हो रही खरीदारी के सपोर्ट से दोपहर 2 बजे के करीब ये सूचकांक निचले स्तर से 230 अंक से अधिक की रिकवरी करके 25,057 अंक के स्तर तक पहुंचने में सफल रहा, लेकिन इसके बाद एक बार फिर बिकवाली का दबाव बन जाने के कारण इस सूचकांक की चाल में दोबारा गिरावट आ गई। दिन भर के कारोबार के बाद निफ्टी 140.50 अंक की कमजोरी के साथ 24,971.90 अंक के स्तर पर बंद हुआ। पूरे दिन हुई खरीद बिक्री के बाद स्टॉक मार्केट के दिग्गज शेयरों में से ट्रेंट लिमिटेड 3.77 प्रतिशत, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स 3.10 प्रतिशत, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज 1.89 प्रतिशत, बजाज फाइनेंस 1.16 प्रतिशत और अदानी इंटरप्राइजेज 0.96 प्रतिशत की मजबूती के साथ आज के टॉप 5 गेनर्स की सूची में शामिल हुए। दूसरी ओर इंफोसिस 2.40 प्रतिशत, लार्सन एंड टूब्रो 2.14 प्रतिशत, एचसीएल टेक्नोलॉजी 2.11 प्रतिशत, हीरो मोटोकॉर्प 1.97 प्रतिशत और महिंद्रा एंड महिंद्रा 1.55 प्रतिशत की कमजोरी के साथ आज के टॉप 5 लूजर्स की सूची में शामिल हुए।
हेलीकॉप्टर हादसे के बाद चार धाम यात्रा के लिए आर्यन एविएशन का परिचालन निलंबित
मुंबई, 15 जून : केदारनाथ क्षेत्र में रविवार सुबह आर्यन एविएशन के एक हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद सरकार ने तत्काल प्रभाव से चार धाम यात्रा के लिए इसके संचालन को निलंबित कर दिया है। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है। नागर विमानन मंत्रालय ने कहा कि हेलीकॉप्टर ने तड़के 05:10 बजे गुप्तकाशी से उड़ान भरी और 05:18 बजे श्री केदारनाथ जी हेलीपैड पर उतरा। यह सुबह 05:19 बजे गुप्तकाशी के लिए फिर से रवाना हुआ और 05:30 से 05:45 बजे के बीच गौरीकुंड के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में पांच यात्री, एक शिशु और एक चालक दल का सदस्य सवार था। इससे पहले उत्तराखंड सरकार ने सुरक्षा एहतियात के तौर पर 15 और 16 जून को क्षेत्र में चार्टर और शटल हेलीकॉप्टर परिचालन को निलंबित करने की घोषणा की थी। मंत्रालय ने कहा कि प्रारंभिक संकेत बताते हैं कि इसका संभावित कारण ‘नियंत्रित उड़ान क्षेत्र’ (सीएफआईटी) हो सकता है, क्योंकि घाटी के प्रवेश क्षेत्र में खराब दृश्यता और व्यापक बादल होने के बावजूद हेलीकॉप्टर कथित तौर पर हवा में था। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) द्वारा विस्तृत जांच के बाद ही दुर्घटना के सही कारणों का पता लगाया जा सकेगा। इसमें कहा गया है कि नागर विमानन मंत्रालय ने डीजीसीए (नागर विमानन महानिदेशालय) को तत्काल उड़ान योग्यता, सुरक्षा और संचालन से संबंधित अधिकारियों को तैनात करने का निर्देश दिया है, ताकि केदारनाथ घाटी में हेलीकॉप्टर की सभी गतिविधियों पर सक्रिय रूप से निगरानी रखी जा सके और यूसीएडीए नियंत्रण कक्ष के कामकाज की गहन समीक्षा की जा सके। ट्रांसभारत एविएशन के दो हेलीकॉप्टर – वीटी-टीबीसी, जिसके पायलट योगेश ग्रेवाल कमांड में थे और वीटी-टीबीएफ, जिसके पायलट जितेन्द्र हरजाई पीआईसी थे, समान अनुपयुक्त मौसम स्थितियों में उड़ान भरते पाए गए। मंत्रालय ने कहा कि तदनुसार, दोनों पायलटों के लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित कर दिए गए हैं। उत्तराखंड में केदारनाथ मंदिर से लोगों को लेकर जा रहा एक हेलीकॉप्टर रविवार सुबह खराब दृश्यता के कारण गौरीकुंड के जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे सात लोगों की मौत हो गई। निजी कंपनी आर्यन एविएशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित बेल 407 हेलीकॉप्टर केदारघाटी में गौरीकुंड और त्रिजुगीनारायण के बीच दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उसमें आग लग गई। इससे उसमें सवार सभी लोग मारे गए।
दुनिया का सबसे बड़ा कंटेनर जहाज ‘एमएससी इरिना’ अदाणी ग्रुप के विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह पर पहुंचा
तिरुवनंतपुरम, 09 जून : दुनिया का सबसे बड़ा कंटेनर जहाज ‘एमएससी इरिना’ एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में सोमवार को अदाणी ग्रुप के विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह पर पहुंच गया है। इस बंदरगाह पर यह जहाज मंगलवार तक रहेगा। ‘एमएससी इरिना’ का इस बंदरगाह पर पहुंचना अल्ट्रा-लार्ज कंटेनर वेसल्स (यूएलसीवी) को संभालने में विझिंजम की क्षमताओं को उजागर करता है। ‘एमएससी इरिना’ टीईयू (20-फुट इक्विवेलेंट यूनिट) क्षमता के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा कंटेनर जहाज है, जो 24,346 टीईयू की क्षमता का दावा करता है। इस क्षमता के साथ ‘एमएससी इरिना’ ग्लोबल शिपिंग में एक बड़ा प्लेयर बनता है। यह जहाज 399.9 मीटर की लंबाई और 61.3 मीटर की चौड़ाई के साथ एक स्टैंडर्ड फीफा-डिज़ाइन किए गए फुटबॉल मैदान से लगभग चार गुना लंबा है। एशिया और यूरोप के बीच बड़ी मात्रा में कंटेनरों के परिवहन की सुविधा के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया ‘एमएससी इरिना’ व्यापार मार्गों और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण है। इस जहाज का आगमन बंदरगाह के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस बंदरगाह को 2 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किया था। अदाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड लिमिटेड द्वारा विकसित और संचालित इस बंदरगाह ने हाल ही में एमएससी तुर्किये और एमएससी मिशेल कैपेलिनी सहित अन्य प्रतिष्ठित श्रेणी के जहाजों का स्वागत किया है, जिससे समुद्री व्यापार में एक प्रमुख केंद्र के रूप में इसकी प्रतिष्ठा मजबूत हुई है। ‘एमएससी इरिना’ को मार्च 2023 में लॉन्च किया गया था और उसी वर्ष अप्रैल में इसकी पहली यात्रा शुरू हुई थी। यह लाइबेरिया के झंडे के नीचे चलता है और इसमें कंटेनरों को 26 टियर्स ऊंचाई तक रखा जा सकता है, जिससे यह बहुत बड़ी मात्रा में कंटेनर ढो सकता है। विशेष रूप से, ‘एमएससी इरिना’ अपने पूर्ववर्ती, ओओसीएल स्पेन से 150 टीईयू के अंतर से आगे निकल गया है। पर्यावरण के आधुनिक मानकों के अनुरूप, इस जहाज में ऊर्जा बचाने वाली सुविधाएं हैं जो कार्बन उत्सर्जन को 4 प्रतिशत तक कम करने में मदद करती हैं। विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह पर ‘एमएससी इरिना’ का डॉकिंग न केवल ग्लोबल शिपिंग में बंदरगाह के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि स्थायी समुद्री प्रथाओं में भी एक बड़ी छलांग है, जो उद्योग में भविष्य के विकास के लिए एक मानक स्थापित करता है।
मैन्युफैक्चरिंग से लेकर डिफेंस में आत्मनिर्भर बना रहा देश : हरदीप सिंह पुरी
नई दिल्ली, 08 जून: केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि मोदी सरकार के नेतृत्व में देश तेजी से मैन्युफैक्चरिंग से लेकर डिफेंस के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। इकोनॉमिक्स टाइम्स में लिखे लेख में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 2014 के बाद भारत के डिफेंस सेक्टर का तेजी से आधुनिकीकरण हुआ है और डिफेंस निर्यात में तेजी आई है। यह बदलाव अचानक नहीं हुआ है, बल्कि पीएम मोदी के द्वारा शुरू किए गए आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत सुधारों के कारण हुआ है। इनमें रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया, रक्षा उत्पादन एवं निर्यात प्रोत्साहन नीति और कुछ क्षेत्रों में 100 प्रतिशत एफडीआई जैसे बदलाव शामिल हैं, जिसने घरेलू कंपनियों को फलने-फूलने में मदद की है। पुरी ने बताया कि मोदी सरकार के विजन में मैन्युफैक्चरिंग हमेशा केंद्र में रही है और देश में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत सरकार ने देशों में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करने के लिए इंसेंटिव्स दे रही है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स असम में 27,000 करोड़ रुपए की लागत से सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग प्लांट बना रही है, जिसके 2025 के मध्य तक चालू होने और लगभग 27,000 नौकरियां सृजित होने की उम्मीद है। वहीं, एचसीएल और फॉक्सकॉन के बीच ज्वाइंट वेंचर से 3,706 करोड़ रुपए की लागत से उत्तर प्रदेश के जेवर में एक सेमीकंडक्टर इकाई स्थापित की जा रही है, जो डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स पर केंद्रित होगी और इसका उत्पादन 2027 में शुरू होगा। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘अंत्योदय के माध्यम से सर्वोदय’ के विजन के तहत जनकल्याणकारी योजनाएं चला रही हैं, जिसकी मदद से 25 करोड़ लोगों को गरीबी से निकालने में सफलता मिली है। पुरी ने आगे सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) के तहत करीब 11 करोड़ किसानों को 3.68 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा वितरित किए जा चुके हैं। वहीं, ‘लखपति दीदी’ पहल ने एक करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाओं को एक लाख रुपए से अधिक की वार्षिक आय प्राप्त करने में सक्षम बनाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लगभग 3 करोड़ घरों को मंजूरी दी गई है। वहीं, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) का विस्तार किया गया है, जिससे 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों को चाहे उनकी आय कुछ भी हो प्रति वर्ष 5 लाख रुपए का निःशुल्क हेल्थ कवरेज प्रदान किया जा सके। इससे लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को लाभ मिलने की उम्मीद है।