बिहार में प्रमोशन पर सख्ती: अब अफसरों का पूरा रिकॉर्ड खंगालेगी सरकार, साल में दो बार बनेगी निगरानी सूची

भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे अधिकारियों-कर्मचारियों की प्रोन्नति पर ब्रेक, एफआईआर या चार्जशीट वालों के लिए निगरानी स्वच्छता अनिवार्य पटना। बिहार सरकार ने प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रोन्नति (प्रमोशन) केवल वरिष्ठता या पद रिक्त होने के आधार पर नहीं होगी, बल्कि उनके पूरे सेवा रिकॉर्ड और आचरण की गहन जांच के बाद ही फैसला लिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन कर्मियों पर एफआईआर दर्ज है या आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल हो चुका है, उनकी प्रोन्नति से पहले निगरानी स्वच्छता (Vigilance Clearance) लेना अनिवार्य होगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने और ईमानदार अफसरों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लिया गया है। इसके तहत राज्य सरकार साल में दो बार अधिकारियों-कर्मचारियों की विशेष सूची तैयार करेगी, जिसमें उनके खिलाफ लंबित मामलों, जांच की स्थिति और विभागीय कार्रवाई का पूरा ब्यौरा शामिल होगा। नई व्यवस्था के तहत प्रोन्नति पर विचार करते समय अधिकारियों के— सेवा रिकॉर्ड और गोपनीय चरित्र प्रविष्टि (ACR/APAR) किसी भी प्रकार की एफआईआर या चार्जशीट की स्थिति निगरानी, आर्थिक अपराध इकाई या अन्य जांच एजेंसियों में लंबित मामले विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसे बिंदुओं की विस्तार से समीक्षा की जाएगी। निगरानी स्वच्छता होगी अनिवार्य यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी का नाम किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या अनियमितता से जुड़े मामले में आता है, तो उसे निगरानी स्वच्छता प्रमाण पत्र के बिना प्रमोशन नहीं दिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संवेदनशील और उच्च पदों पर केवल स्वच्छ छवि वाले अफसर ही नियुक्त हों। ईमानदार अफसरों को मिलेगा फायदा सरकार का मानना है कि इस फैसले से जहां एक ओर भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों पर दबाव बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों का मनोबल भी मजबूत होगा। प्रशासनिक हलकों में इसे गवर्नेंस सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से प्रोन्नति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और राजनीतिक या बाहरी दबाव में गलत फैसलों पर रोक लगेगी। हालांकि, कुछ संगठनों ने आशंका जताई है कि लंबित मामलों के कारण कई अधिकारियों की प्रोन्नति अटक सकती है, लेकिन सरकार का तर्क है कि न्यायपूर्ण और साफ-सुथरी व्यवस्था के लिए यह जरूरी है।

बिहार की सियासत में सुरक्षा का पुनर्गठन: तेजस्वी यादव की Z से Y+ हुई सुरक्षा, कई नेताओं की कैटेगरी बदली

पटना। बिहार में नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा Z श्रेणी से घटाकर Y+ कर दी गई है। इसके साथ ही राज्य में विभिन्न दलों के कई वरिष्ठ नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में बदलाव हुआ है—कुछ को Z श्रेणी प्रदान की गई है, जबकि कुछ नेताओं की सुरक्षा पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। यह निर्णय राज्य की सुरक्षा समीक्षा समिति की ताज़ा रिपोर्ट और मौजूदा खतरे के आकलन के आधार पर लिया गया बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, नेताओं की सुरक्षा समय-समय पर खतरे के आकलन (Threat Perception) के अनुसार तय की जाती है। हालिया समीक्षा में: राजनीतिक गतिविधियों की प्रकृति  सार्वजनिक कार्यक्रमों की संख्या खुफिया इनपुट बीते समय की घटनाओं जैसे मानकों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा श्रेणियों का पुनर्निर्धारण किया गया। तेजस्वी यादव की सुरक्षा में बदलाव तेजस्वी यादव की सुरक्षा को Z से Y+ किए जाने को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर इसे रूटीन समीक्षा का हिस्सा बताया जा रहा है। Y+ श्रेणी में भी पर्याप्त सुरक्षा प्रावधान होते हैं, जिनमें प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी और आवश्यक एस्कॉर्ट शामिल रहते हैं। इस फेरबदल में: बीजेपी और जेडीयू के कुछ वरिष्ठ नेताओं को Z श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। वहीं, कुछ ऐसे नेताओं की सुरक्षा पूरी तरह हटाई गई है, जिनके लिए खतरे का स्तर न्यूनतम पाया गया। सरकार का कहना है कि सुरक्षा संसाधनों का तर्कसंगत और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सुरक्षा में कटौती और बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी*भी शुरू हो गई है। विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव से जोड़कर देख रहा है, जबकि सरकार इसे निष्पक्ष और पेशेवर प्रक्रिया का परिणाम बता रही है। राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि: सुरक्षा श्रेणी स्थायी नहीं होती।  किसी भी समय नए इनपुट मिलने पर फिर से समीक्षा की जा सकती है। नेताओं की व्यक्तिगत सुरक्षा के साथ-साथ जनहित और संसाधनों का संतुलन जरूरी है।

गंडक दियारा से वाशिंगटन डीसी तक: नीरज कुमार सिंह ने शिक्षा और सामाजिक बदलाव में रचा वैश्विक इतिहास

बिहार के छोटे से गांव का युवा बना अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की आवाज, शिक्षा को बताया सामाजिक परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत छपरा, 22 जनवरी (विशेष रिपोर्ट): बिहार की मिट्टी में जन्मे और सीमित संसाधनों में पले-बढ़े नीरज कुमार सिंह ने यह साबित कर दिया है कि अगर सोच बड़ी हो, लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो, तो गांव की गलियों से निकलकर भी वैश्विक मंच तक पहुंचा जा सकता है। सारण जिले के पानापुर प्रखंड अंतर्गत गंडक दियारा क्षेत्र के पकड़ी नरोत्तम गांव के सतजोड़ा बाजार निवासी नीरज कुमार सिंह आज न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुके हैं। एक साधारण ग्रामीण परिवार में जन्मे नीरज, पिता प्रमोद सिंह और माता गीता देवी के सपूत हैं। बचपन से ही उन्होंने शिक्षा को अपने जीवन का सबसे मजबूत आधार माना। उनका दृढ़ विश्वास रहा है कि शिक्षा समाज को बदलने का सबसे सशक्त माध्यम है, और इसी सोच ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। अमेरिका में भारत की दमदार मौजूदगी हाल ही में नीरज कुमार सिंह ने अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी स्थित मैरियट मार्क्विस होटल में आयोजित SSWR 2026 वार्षिक सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में दुनिया भर से शिक्षा, सामाजिक कार्य, शोध और नीति निर्माण से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए। सम्मेलन के दौरान सामाजिक विकास, नई वैश्विक चुनौतियों और शोध आधारित समाधानों पर गहन चर्चा हुई, जिसमें नीरज के विचारों को विशेष सराहना मिली। उनकी प्रस्तुति ने यह दिखाया कि भारत का युवा वैश्विक विमर्श में कितनी मजबूती से अपनी बात रख सकता है। 12 देशों में सामाजिक और शैक्षणिक नेतृत्व नीरज कुमार सिंह अब तक 12 देशों में, जिनमें 10 दक्षिण एशियाई देश शामिल हैं, शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़ी परियोजनाओं का नेतृत्व कर चुके हैं। उनका मुख्य फोकस शिक्षा की समान पहुंच, युवाओं का सशक्तिकरण और नीति स्तर पर बदलाव लाना रहा है। उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, एमआईटी, यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो और CSWE 2025 जैसे विश्व के प्रतिष्ठित मंचों पर अपने शोध, अनुभव और जमीनी कार्यों को साझा किया है। शैक्षणिक सफर भी उतना ही प्रेरणादायक नीरज का शैक्षणिक जीवन उनकी संघर्षगाथा का अहम हिस्सा है। बी.एससी. के बाद उन्होंने राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान से सामाजिक कार्य में मास्टर डिग्री प्राप्त की। इसके पश्चात टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई से डिप्लोमा किया। आगे चलकर उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया (Penn GSE), अमेरिका से इंटरनेशनल एजुकेशनल डेवलपमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की, जहां उन्होंने शिक्षा नीति, समानता और वैश्विक शिक्षा पर गहन अध्ययन किया। संयुक्त राष्ट्र से लेकर जमीनी स्तर तक योगदान नीरज कुमार सिंह ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क में यूथ डेलीगेट के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश का मान बढ़ाया। वर्तमान में वे ‘द सोशल वर्क नेबरहुड’, यूएसए में मेंटोर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे नई पीढ़ी के सामाजिक कार्यकर्ताओं को दिशा और मार्गदर्शन दे रहे हैं। अब तक वे 100 से अधिक परियोजनाओं और 50 से ज्यादा NGO, सरकारी विभागों व अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं। कोविड काल में भी निभाई अहम भूमिका कोविड-19 महामारी के दौरान नीरज कुमार सिंह ने USAID की MRITE परियोजना के तहत उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके प्रयासों से 25 लाख से अधिक लोगों तक टीकाकरण से जुड़ी सहायता पहुंचाई गई, जो उनके सामाजिक सरोकार और जिम्मेदारी को दर्शाता है। युवाओं के लिए संदेश नीरज कुमार सिंह की जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि शिक्षा, मेहनत और समाज के प्रति समर्पण साथ हो, तो सफलता की कोई सीमा नहीं होती। गंडक दियारा के छोटे से गांव से निकलकर वैश्विक मंच तक पहुंचने वाले नीरज आज सचमुच बिहार का लाल और भारत की शान बन चुके हैं।

बिहार की धरती पर इतिहास रचा गया: पूर्वी चंपारण में स्थापित हुआ दुनिया का सबसे बड़ा अखंड शिवलिंग ‘सहस्त्रलिंगम’

पूर्वी चंपारण (बिहार)। बिहार ने एक बार फिर धार्मिक और सांस्कृतिक मानचित्र पर अपनी वैश्विक पहचान दर्ज कराई है। पूर्वी चंपारण जिले में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर परिसर में 17 जनवरी को दुनिया का सबसे बड़ा 33 फीट ऊंचा अखंड शिवलिंग ‘सहस्त्रलिंगम’ विधि-विधान के साथ स्थापित किया गया। इस ऐतिहासिक स्थापना के साथ ही देश-विदेश के श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इस विशेष रिपोर्ट में पढ़िए—यह शिवलिंग क्या है, इसे कहां और क्यों स्थापित किया गया, इसकी विशेषताएं क्या हैं और इससे जुड़े सभी अहम सवालों के जवाब।  क्या है ‘सहस्त्रलिंगम’? ‘सहस्त्रलिंगम’ का अर्थ है—हजारों शिवलिंगों से युक्त एक विशाल शिवलिंग। इस अखंड शिवलिंग की सतह पर भगवान शिव के हजारों सूक्ष्म स्वरूप अंकित हैं, जो इसे अद्वितीय बनाते हैं। यह शिवलिंग एक ही पत्थर से तराशा गया है, इसलिए इसे ‘अखंड’ कहा जा रहा है। कहां स्थापित हुआ है यह शिवलिंग? यह शिवलिंग बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर में स्थापित किया गया है। यह वही स्थल है, जहां भविष्य में दुनिया का सबसे बड़ा रामायण मंदिर निर्माणाधीन है। शिवलिंग की ऊंचाई और विशेषताएं क्या हैं? * ऊंचाई: 33 फीट * स्वरूप: अखंड (एक ही पत्थर से निर्मित) * डिजाइन: शिवलिंग पर हजारों छोटे शिवलिंगों की नक्काशी * पहचान: दुनिया का सबसे ऊंचा अखंड शिवलिंग धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, 33 फीट की ऊंचाई भगवान शिव के 33 कोटि देवताओं से जुड़े आध्यात्मिक प्रतीक को भी दर्शाती है। स्थापना कब और कैसे हुई? 17 जनवरी को वैदिक मंत्रोच्चार, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के बीच शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में साधु-संत, धार्मिक विद्वान और श्रद्धालु उपस्थित रहे। इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व क्या है? यह शिवलिंग न केवल आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि— * बिहार को वैश्विक धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर मजबूत स्थान दिलाएगा * विराट रामायण मंदिर परियोजना को नई पहचान देगा * रोजगार और स्थानीय विकास को बढ़ावा देगा धार्मिक मान्यता है कि सहस्त्रलिंगम के दर्शन से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। क्या यह आम श्रद्धालुओं के लिए खुला है? जी हां, शिवलिंग स्थापना के बाद अब श्रद्धालु नियमित रूप से दर्शन कर सकते हैं। आने वाले समय में यहां विशेष पर्वों पर भव्य आयोजन और शिवरात्रि जैसे महापर्वों पर विशाल धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बिहार के लिए क्यों है यह ऐतिहासिक? अब तक बिहार को बौद्ध और जैन तीर्थों के लिए जाना जाता था, लेकिन सहस्त्रलिंगम की स्थापना के बाद यह राज्य शैव परंपरा के प्रमुख केंद्र के रूप में भी उभर रहा है। यह उपलब्धि न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक गर्व का विषय भी है। पूर्वी चंपारण में स्थापित ‘सहस्त्रलिंगम’ न सिर्फ एक धार्मिक संरचना है, बल्कि यह बिहार की आध्यात्मिक विरासत, शिल्पकला और आस्था का भव्य प्रतीक बनकर उभरा है। आने वाले वर्षों में यह स्थल देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के शिवभक्तों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनने की पूरी संभावना रखता है।

दही-चूड़ा भोज में सियासी तंज: तेजस्वी की गैरमौजूदगी पर तेज प्रताप बोले—‘जयचंदों से घिरे हैं’

पटना। मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित पारंपरिक दही-चूड़ा भोज एक बार फिर राजनीतिक बयानबाज़ी का मंच बन गया। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेज प्रताप यादव के भोज में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई। इस मौके पर तेज प्रताप यादव ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि तेजस्वी “जयचंदों से घिरे हुए हैं”, इसलिए कार्यक्रम में नहीं पहुंच पाए। तेज प्रताप यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने तेजस्वी यादव का रात 9 बजे तक इंतजार किया, लेकिन वह नहीं आए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ लोग हैं जो उन्हें घेरकर गलत सलाह दे रहे हैं और वही उनकी अनुपस्थिति का कारण हो सकते हैं। तेज प्रताप के इस बयान को पार्टी के अंदरूनी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। भोज के दौरान तेज प्रताप यादव ने अपने पिता और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि “हमारी पार्टी असली है, तभी मेरे पिताजी खुद मुझे आशीर्वाद देने आए।” लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी को उन्होंने अपने पक्ष में एक मजबूत संकेत बताया और कहा कि परिवार और पार्टी के मूल सिद्धांत उनके साथ हैं। तेज प्रताप ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष पार्टी और विचारधारा के लिए है, किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं। हालांकि, तेजस्वी यादव की गैरहाजिरी और उस पर आया यह बयान राजद की अंदरूनी राजनीति को एक बार फिर सुर्खियों में ले आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मकर संक्रांति जैसे सामाजिक अवसर पर दिए गए इस तरह के बयान केवल पारिवारिक नहीं, बल्कि सियासी संदेश भी देते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि तेज प्रताप और तेजस्वी के बीच यह दूरी केवल बयानबाज़ी तक सीमित रहती है या पार्टी की राजनीति पर इसका असर और गहराता है।

दही-चूड़ा भोज से सियासी संदेश! विजय सिन्हा के घर पहुंचे तेज प्रताप यादव, एनडीए से मिला खुला ऑफर

पटना। मकर संक्रांति के अवसर पर बिहार की राजनीति में उस समय नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया, जब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के आवास पर आयोजित पारंपरिक दही-चूड़ा भोज में शामिल हुए। इस मुलाकात को केवल सामाजिक शिष्टाचार तक सीमित मानने के बजाय राजनीतिक गलियारों में इसे संभावित सियासी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के यहां आयोजित इस भोज में एनडीए के कई दिग्गज नेता मौजूद थे। केंद्रीय मंत्री संतोष सुमन और भाजपा के वरिष्ठ नेता रामकृपाल यादव ने तेज प्रताप यादव का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने सार्वजनिक मंच से तेज प्रताप यादव को एनडीए में शामिल होने का खुला निमंत्रण भी दे दिया, जिससे सियासी हलचल और तेज हो गई। भोज के दौरान माहौल पूरी तरह सौहार्दपूर्ण नजर आया। नेताओं के बीच अनौपचारिक बातचीत हुई और पारंपरिक व्यंजनों के साथ राजनीतिक संकेत भी दिए गए। संतोष सुमन ने कहा कि “राजनीति में दरवाजे कभी बंद नहीं होते, जो विकास और बिहार के हित में सोचता है, उसका स्वागत है।” वहीं रामकृपाल यादव ने भी तेज प्रताप की मौजूदगी को “सकारात्मक संकेत” करार दिया। तेज प्रताप यादव ने हालांकि एनडीए में शामिल होने को लेकर कोई सीधा बयान नहीं दिया, लेकिन उन्होंने इतना जरूर कहा कि मकर संक्रांति जैसे पर्व पर सामाजिक सौहार्द और आपसी संवाद राजनीति से ऊपर होते हैं। उनके इस बयान को राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात केवल संयोग नहीं हो सकती। हाल के दिनों में राजद के भीतर चल रही अंदरूनी चर्चाओं और नेतृत्व को लेकर उठते सवालों के बीच तेज प्रताप यादव की यह मौजूदगी कई अटकलों को जन्म दे रही है। हालांकि, फिलहाल किसी बड़े राजनीतिक फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुल मिलाकर, दही-चूड़ा की इस थाली ने बिहार की राजनीति में नए संकेत जरूर दे दिए हैं। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकेगा कि यह मुलाकात केवल त्योहार की सौहार्दपूर्ण परंपरा थी या किसी बड़े सियासी बदलाव की भूमिका।

नीतीश सरकार का बड़ा फैसला: पहली कैबिनेट बैठक में 43 प्रस्ताव पास, रोजगार–निवेश को रफ्तार, मुंबई में बनेगा बिहार भवन

पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में गठित नई बिहार सरकार की पहली मंत्रिपरिषद बैठक में कुल 43 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया कि आने वाले समय में रोजगार सृजन, निवेश को बढ़ावा और समग्र विकास उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। कैबिनेट के फैसलों को राज्य के आर्थिक और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। रोजगार पर खास जोर कैबिनेट बैठक में सरकारी विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को शीघ्र भरने पर सहमति बनी। इससे एक ओर युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक कामकाज में भी तेजी आएगी। सरकार ने विभिन्न विभागों में नियुक्ति प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाने के निर्देश दिए हैं। निवेश आकर्षित करने की रणनीति राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा देने पर भी विशेष फोकस किया गया है। उद्योग, आईटी, स्टार्टअप और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी देकर सरकार ने यह साफ कर दिया है कि बिहार को निवेश के अनुकूल राज्य बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। मुंबई में बनेगा बिहार भवन कैबिनेट की बैठक में एक अहम फैसला लेते हुए मुंबई में ‘बिहार भवन’ के निर्माण को भी मंजूरी दी गई। इससे महाराष्ट्र में रहने वाले बिहारवासियों को सुविधा मिलेगी और राज्य सरकार के प्रशासनिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में भी मदद मिलेगी। विकास को दी गई सर्वोच्च प्राथमिकता बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, आवास और सामाजिक कल्याण से जुड़े कई प्रस्तावों को भी हरी झंडी दी गई। सरकार का उद्देश्य है कि विकास योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचे और बिहार की विकास दर को नई ऊंचाई पर ले जाया जाए। सरकार का संदेश कैबिनेट के फैसलों के जरिए नीतीश सरकार ने यह संदेश दिया है कि सुशासन, रोजगार और निवेश ही उसकी कार्ययोजना के केंद्र में रहेंगे। पहली ही बैठक में 43 प्रस्तावों की मंजूरी को नई सरकार की सक्रियता और तेज फैसलों का संकेत माना जा रहा है।

लैंड फॉर जॉब मामले में लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ीं, तेजस्वी–तेज प्रताप समेत 46 पर आरोप तय

नई दिल्ली/पटना। लैंड फॉर जॉब घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने इस बहुचर्चित मामले में बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव समेत कुल 46 आरोपियों पर आरोप तय कर दिए हैं। वहीं, सबूतों के अभाव में 52 आरोपियों को बरी कर दिया गया है। अदालत के इस फैसले से मामला एक बार फिर सियासी और कानूनी सुर्खियों में आ गया है। क्या है लैंड फॉर जॉब मामला? यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि ये जमीनें बेहद कम कीमत पर या नाममात्र के सौदों में लालू परिवार से जुड़े लोगों के नाम कराई गईं। जांच के दौरान कई रजिस्ट्री दस्तावेज, बैंक लेन-देन और बयान अदालत के समक्ष पेश किए गए, जिनके आधार पर आरोप तय किए गए हैं। अदालत का फैसला अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त हैं। * 46 आरोपियों पर आरोप तय: इनमें तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव सहित परिवार से जुड़े अन्य लोग और कथित लाभार्थी शामिल हैं। * 52 आरोपियों को बरी: अदालत ने माना कि इनके खिलाफ आरोप साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य नहीं हैं, इसलिए उन्हें मुकदमे से मुक्त किया जाता है। राजनीतिक हलचल तेज फैसले के बाद बिहार की राजनीति में हलचल मच गई है। विपक्ष ने इसे “भ्रष्टाचार के खिलाफ न्याय की जीत” बताया, जबकि राजद नेताओं ने कहा कि वे अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे और सच सामने आएगा। तेजस्वी यादव के करीबी सूत्रों का कहना है कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और अंतिम फैसले में उन्हें न्याय मिलेगा। आगे की प्रक्रिया अब आरोप तय होने के बाद मामले में नियमित सुनवाई शुरू होगी। अभियोजन पक्ष गवाहों और दस्तावेजों के जरिए अपने आरोप साबित करने की कोशिश करेगा, जबकि बचाव पक्ष आरोपों को निराधार बताकर चुनौती देगा। कानूनी जानकारों के अनुसार, यह मुकदमा लंबा चल सकता है और इसके राजनीतिक असर बिहार की आने वाली सियासी रणनीतियों पर भी दिख सकते हैं। नज़र आगे की सुनवाई पर लैंड फॉर जॉब केस अब निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुका है। अदालत में पेश होने वाली गवाही और सबूत यह तय करेंगे कि यह मामला लालू परिवार के लिए कितना भारी पड़ता है या फिर उन्हें राहत मिलती है। फिलहाल, आरोप तय होने से उनकी कानूनी चुनौतियां और बढ़ गई हैं।

मनरेगा पर कांग्रेस का बड़ा आंदोलन: बिहार में 47 दिन तक ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’, विधानसभा घेराव से केंद्र को घेरने की तैयारी

बिहार: केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) में किए जा रहे कथित बदलावों के खिलाफ कांग्रेस ने बिहार में व्यापक आंदोलन का ऐलान किया है। पार्टी ने इसे ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और किसानों के अधिकारों पर सीधा हमला बताते हुए 10 जनवरी से 25 फरवरी तक 47 दिनों के ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ की घोषणा की है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार मनरेगा की मूल भावना को कमजोर कर रही है। बजट में कटौती, काम के दिनों में कमी, भुगतान में देरी और नियमों को जटिल बनाकर गरीबों को रोजगार से वंचित किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि इससे गांवों में बेरोजगारी और पलायन की समस्या और गंभीर होगी। आंदोलन की रूपरेखा कांग्रेस द्वारा घोषित कार्यक्रम के तहत आंदोलन को चरणबद्ध और व्यापक बनाया जाएगा। इसमें राज्य से लेकर पंचायत स्तर तक गतिविधियां होंगी। * जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार की नीतियों को उजागर किया जाएगा। * उपवास और धरना-प्रदर्शन के जरिए विरोध दर्ज कराया जाएगा। * पंचायत स्तर पर जनसंपर्क अभियान, चौपालें और नुक्कड़ सभाएं आयोजित होंगी। * ग्रामीण इलाकों में कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर संपर्क कर मनरेगा के महत्व और सरकार की नीतियों से होने वाले नुकसान की जानकारी दी जाएगी। * आंदोलन के अंतिम चरण में विधानसभा घेराव और अखिल भारतीय रैलियों का आयोजन किया जाएगा। कांग्रेस का आरोप कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मनरेगा करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए जीवनरेखा है। यह न सिर्फ रोजगार देता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करता है। पार्टी का दावा है कि केंद्र सरकार निजीकरण और खर्च में कटौती की नीति के चलते इस योजना को धीरे-धीरे खत्म करने की दिशा में बढ़ रही है। राजनीतिक संदेश इस आंदोलन के जरिए कांग्रेस बिहार में ग्रामीण मुद्दों को केंद्र में लाकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी का मानना है कि मनरेगा जैसे मुद्दे पर जनआंदोलन खड़ा कर वह ग्रामीण मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर सकती है। कुल मिलाकर, ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के जरिए कांग्रेस ने केंद्र सरकार को सीधे चुनौती दी है। आने वाले 47 दिन बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ाने वाले माने जा रहे हैं।

बिहार के बुजुर्गों को बड़ी राहत: अब घर बैठे मिलेगी इलाज की सुविधा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की नई योजना की घोषणा

पटना। बिहार सरकार ने राज्य के बुजुर्ग नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए उनके लिए घर पर ही स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की नई योजना की घोषणा की है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान करते हुए कहा कि अब बुजुर्गों को इलाज के लिए बार-बार अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यह योजना सरकार के ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम का अहम हिस्सा होगी। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया है कि इस योजना को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द लागू किया जाए। योजना के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को उनके घर पर ही बुनियादी और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि समय पर इलाज संभव हो सके और उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार आए। घर पर मिलेंगी ये स्वास्थ्य सेवाएं सरकार की इस योजना के तहत बुजुर्गों को निम्नलिखित सुविधाएं घर पर ही प्रदान की जाएंगी— * प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की सेवा * पैथोलॉजी जांच (खून, शुगर, अन्य जरूरी टेस्ट) * ब्लड प्रेशर (BP) और ईसीजी जांच * फिजियोथेरेपी की सुविधा * अचानक तबीयत बिगड़ने की स्थिति में आपातकालीन सहायता * ग्रामीण इलाकों पर विशेष फोकस सरकार का विशेष जोर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों पर रहेगा, जहां बुजुर्गों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में सबसे ज्यादा परेशानी होती है। इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को इस योजना से जोड़ा जाएगा, ताकि सेवाएं समय पर और प्रभावी ढंग से मिल सकें। मुख्यमंत्री का बयान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा,“बुजुर्ग हमारे समाज की धरोहर हैं। उनकी देखभाल सरकार की जिम्मेदारी है। यह योजना बुजुर्गों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।” स्वास्थ्य विभाग करेगा निगरानी स्वास्थ्य विभाग को योजना की निगरानी और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित समीक्षा भी की जाएगी। सरकार की इस पहल से बिहार के लाखों बुजुर्गों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है और यह योजना राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।