पटना। बिहार सरकार ने राज्य में पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ अभियोजन (मुकदमा चलाने) की प्रक्रिया को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। गृह विभाग द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार अब किसी भी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी पर कानूनी कार्रवाई शुरू करने से पहले राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। यह प्रावधान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 218(2) के तहत लागू किया गया है। इस धारा में पहले “केंद्र सरकार” से अनुमति का प्रावधान था, जिसे राज्य स्तर पर संशोधित करते हुए “राज्य सरकार” को अधिकृत किया गया है। गृह विभाग के मुताबिक, यह बदलाव प्रशासनिक स्पष्टता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है। क्या है अधिसूचना का प्रावधान? नई व्यवस्था के तहत: किसी भी पुलिस अधिकारी या कर्मी के खिलाफ अदालत अभियोजन शुरू करने से पहले राज्य सरकार की अनुमति आवश्यक होगी। संबंधित विभाग प्रस्ताव की जांच-पड़ताल कर अपनी अनुशंसा राज्य सरकार को भेजेगा। अनुमति मिलने के बाद ही विधिक प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। सरकार का कहना है कि यह कदम पुलिस बल को उनके कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान अनावश्यक कानूनी दबाव से बचाने के लिए उठाया गया है, ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में बाधा न आए। पृष्ठभूमि में हालिया घटनाक्रम यह आदेश ऐसे समय में आया है जब आईपीएस अधिकारी सुनील नायक को गिरफ्तार करने की कोशिश से जुड़ी घटनाओं के बाद पुलिस कार्यप्रणाली और सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जा रही थी। सूत्रों के अनुसार, इस घटनाक्रम के बाद राज्य सरकार ने उच्च स्तर पर विचार-विमर्श किया और कानूनी प्रक्रिया में स्पष्टता लाने की आवश्यकता महसूस की। सरकार का तर्क गृह विभाग के अधिकारियों का कहना है कि: पुलिसकर्मी अक्सर संवेदनशील परिस्थितियों में कार्य करते हैं। कई बार ड्यूटी के दौरान लिए गए निर्णयों पर बाद में कानूनी विवाद खड़े हो जाते हैं। पूर्व स्वीकृति की व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि केवल गंभीर और प्रथम दृष्टया प्रमाणित मामलों में ही अभियोजन की प्रक्रिया शुरू हो। सरकार का दावा है कि इस कदम से कानून-व्यवस्था और पुलिस कर्मियों की कार्यस्वतंत्रता के बीच संतुलन स्थापित करने में मदद मिलेगी। संभावित प्रभाव कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से पुलिस अधिकारियों को कार्य निष्पादन में मनोबल मिलेगा, लेकिन साथ ही पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। विपक्षी दलों की ओर से इस निर्णय पर प्रतिक्रिया आना अभी बाकी है, लेकिन इसे प्रशासनिक नियंत्रण और जवाबदेही के संदर्भ में अहम कदम माना जा रहा है। मुख्य बात: अब बिहार में पुलिस अधिकारियों और कर्मियों पर मुकदमा चलाने की प्रक्रिया सीधे तौर पर राज्य सरकार की अनुमति के अधीन होगी, जिससे अभियोजन की शुरुआत से पहले प्रशासनिक स्तर पर जांच और स्वीकृति अनिवार्य हो गई है।
राजेंद्र कॉलेज, छपरा में पूर्ववर्ती छात्र समागम: स्वर्णिम स्मृतियों के संग विकास का संकल्प
छपरा, 26 फरवरी। लोकनायक जय प्रकाश नारायण के नाम पर स्थापित जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा की अभिभूत इकाई एवं देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नाम पर स्थापित राजेंद्र कॉलेज, छपरा में पूर्ववर्ती छात्र सम्मेलन सह सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महाविद्यालय के स्वर्णिम अतीत की स्मृतियों को संजोना, पूर्व छात्रों के बीच आपसी संवाद को सशक्त बनाना तथा संस्थान के विकास में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना रहा। समारोह में विभिन्न दशकों के पूर्व छात्र एक मंच पर एकत्रित हुए। वर्षों बाद अपने शिक्षण संस्थान में लौटे पूर्व छात्र अपने छात्र जीवन की यादों को साझा करते हुए भावुक नजर आए। परिसर में आत्मीय मिलन, स्मृतियों का आदान-प्रदान और भविष्य के लिए ठोस संकल्प का वातावरण देखने को मिला। संस्थान की पहचान उसके पूर्व छात्रों से: प्राचार्य महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. उदय शंकर पाण्डेय ने स्वागत भाषण में कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की वास्तविक पहचान उसके पूर्ववर्ती छात्रों से होती है। उन्होंने कहा कि राजेंद्र कॉलेज की गौरवशाली परंपरा और शैक्षणिक उत्कृष्टता को आगे बढ़ाने में पूर्व छात्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी पूर्व छात्रों से महाविद्यालय के सर्वांगीण विकास में सक्रिय सहयोग देने का आह्वान किया। “राजेंद्र कॉलेज मेरी जीवन की आधारशिला”: डॉ. महाचंद्र प्रसाद सिंह कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बिहार सरकार के पूर्व मंत्री सह सवर्ण आयोग के अध्यक्ष डॉ. महाचंद्र प्रसाद सिंह ने अपने भावनात्मक संबोधन में महाविद्यालय को अपनी “जीवन की आधारशिला” बताया। उन्होंने कहा, “राजेंद्र कॉलेज मेरी स्मृतियों, मेरे संस्कारों और मेरे व्यक्तित्व निर्माण का केंद्र रहा है। मैं इसे मंदिर मानता हूँ।” उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में शामिल होने से पूर्व उन्होंने पूरे परिसर की परिक्रमा की, क्योंकि यह उनके लिए आस्था और प्रेरणा का पवित्र स्थल है। अपने छात्र जीवन को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि इसी परिसर में उनके सपनों ने आकार लिया और जनसेवा की प्रेरणा मिली। महाविद्यालय भवन की जर्जर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने पटना उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की। न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद 83 करोड़ रुपये की स्वीकृति सुनिश्चित हुई तथा बिहार सरकार की कैबिनेट से 63 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ, जिससे नए भवन निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसे उन्होंने अपनी मातृसंस्था के प्रति कर्तव्य निर्वहन बताया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनके प्रयासों से जय प्रकाश विश्वविद्यालय को 267 एकड़ भूमि प्राप्त हुई, जहां वर्तमान में व्यापक विस्तार कार्य चल रहा है और यह क्षेत्र एक बड़े शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। शिक्षा में गुणवत्ता और नैतिक मूल्यों पर बल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित महाराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने कहा कि राजेंद्र कॉलेज ने समाज को अनेक प्रतिभाएं दी हैं, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने शिक्षा में गुणवत्ता, नैतिक मूल्यों और युवा सशक्तिकरण पर बल देते हुए महाविद्यालय के विकास के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मी और छात्र इस महाविद्यालय की आत्मा हैं और उनके साथ उनका संबंध परिवार जैसा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि महाविद्यालय परिवार की समस्याओं के समाधान और सतत विकास के लिए वे निरंतर प्रयासरत रहेंगे। पुस्तकों और पत्रिका का विमोचन कार्यक्रम के दौरान कॉलेज की पत्रिका ‘राका’, डॉ. संजय कुमार की पुस्तक तथा डॉ. नीलांबरी गुप्ता लिखित पुस्तक का विमोचन भी किया गया। मंच संचालन डॉ. ऋचा मिश्रा ने किया, जबकि मंच व्यवस्था डॉ. ज्योति कुमारी और डॉ. बी. एस. साहू द्वारा संभाली गई। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुनील प्रसाद ने प्रस्तुत किया। समारोह को अन्य विशिष्ट अतिथियों ने भी संबोधित किया। पूर्व छात्रों के इस ऐतिहासिक समागम ने न केवल अतीत की स्मृतियों को जीवंत किया, बल्कि महाविद्यालय के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए सामूहिक संकल्प भी व्यक्त किया।
Ravi Shankar Prasad ने पटना में MSME एक्सपो का किया उद्घाटन
महिला उद्यमिता को बताया आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव, डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई पटना। लोकसभा सांसद Ravi Shankar Prasad ने राजधानी पटना में “WECS एसोसिएशन” द्वारा आयोजित MSME एक्सपो का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने महिला उद्यमिता के विकास, आर्थिक सशक्तिकरण और रोजगार सृजन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से संवाद किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। यह क्षेत्र न केवल लाखों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर उत्पादन, नवाचार और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देता है। उन्होंने विशेष रूप से महिला उद्यमियों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि उनकी सक्रिय और सशक्त भागीदारी विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में निर्णायक सिद्ध होगी। कार्यक्रम में विभिन्न सत्रों के माध्यम से वित्तीय समावेशन, डिजिटल सशक्तिकरण, विपणन रणनीति, स्टार्टअप अवसरों और सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा की गई। बड़ी संख्या में महिला उद्यमियों ने अपने अनुभव और चुनौतियों को साझा किया, जिस पर सकारात्मक चर्चा हुई। रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में केंद्र सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी पहलों के माध्यम से MSME क्षेत्र को नई ऊर्जा मिली है। इन योजनाओं का लाभ उठाकर महिलाएं न केवल स्वरोजगार अपना रही हैं, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार उद्योग, निवेश और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों में औद्योगिक विकास और कौशल प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया जा रहा है, जिससे युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है। अंत में उन्होंने महिला उद्यमियों को नवाचार, गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को अपनाने का आह्वान किया और विश्वास व्यक्त किया कि MSME क्षेत्र की मजबूती और महिला सशक्तिकरण के माध्यम से भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेज गति से आगे बढ़ेगा।
कटिहार जंक्शन पर ट्रेन की जनरल बोगी के नीचे छिपाकर लाई जा रही थी शराब, 4 तस्कर गिरफ्तार
कटिहार। बिहार में शराबबंदी कानून के बीच कटिहार जंक्शन पर शराब तस्करी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। तस्करों ने इस बार शराब छुपाने के लिए ऐसी जगह चुनी, जिसके बारे में आमतौर पर कोई सोच भी नहीं सकता। बंगाल से आने वाली एक ट्रेन की जनरल बोगी के नीचे विशेष तरीके से शराब की खेप छिपाकर लाई जा रही थी। उत्पाद विभाग और रेलवे पुलिस की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर कटिहार जंक्शन पर छापेमारी की। जांच के दौरान जब अधिकारियों ने ट्रेन की जनरल बोगी की तलाशी ली, तो बोगी के नीचे लोहे के ढांचे से बंधे पैकेट बरामद हुए। इन पैकेटों को सावधानीपूर्वक निकालने पर उनमें शराब भरी पाई गई। कार्रवाई के दौरान बोगी के नीचे से 95.640 लीटर विदेशी शराब बरामद की गई। इसके अलावा दो अन्य मामलों में कुल मिलाकर 112 लीटर शराब जब्त की गई। इस संयुक्त अभियान में कुल चार तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है ताकि तस्करी के नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की जानकारी मिल सके। अधिकारियों के अनुसार, तस्कर जांच से बचने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ट्रेन की बोगी के नीचे शराब बांधकर लाने की यह तकनीक काफी जोखिम भरी है, लेकिन सख्ती बढ़ने के कारण तस्कर इस तरह के अनोखे हथकंडे अपना रहे हैं। उत्पाद विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बिहार में शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू किया जा रहा है और इस तरह की अवैध गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। रेलवे पुलिस और उत्पाद विभाग की संयुक्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। फिलहाल, गिरफ्तार तस्करों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सोनपुर प्रशासन में सख्ती: जिलाधिकारी का औचक निरीक्षण, लापरवाही पर कार्रवाई के संकेत
सोनपुर। प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ने सोमवार को सोनपुर प्रखंड सह अंचल कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कार्यालय व्यवस्था, अभिलेख संधारण, योजनाओं के क्रियान्वयन और कर्मचारियों की उपस्थिति समेत विभिन्न बिंदुओं की गहन समीक्षा की गई। निरीक्षण के क्रम में जिलाधिकारी ने सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों को अनिवार्य रूप से बॉयोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करने का सख्त निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यालयीन अनुशासन में किसी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एलएसबीए योजना में पारदर्शिता पर जोर जिलाधिकारी ने एलएसबीए (LSBA) योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए स्वच्छता पर्यवेक्षक को कार्यालय में बैठने के बजाय फील्ड में जाकर लाभार्थियों का वेरिफिकेशन कार्य करने तथा जन-जागरूकता फैलाने का निर्देश दिया। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि एलएसबीए योजना के लाभार्थियों को सहायता राशि का भुगतान पंचायत सचिव या अन्य सरकारी कर्मी द्वारा सत्यापन के उपरांत ही किया जाए। उन्होंने रिकॉर्ड के विधिवत संधारण पर विशेष बल दिया। कार्यालय भवन निर्माण को लेकर निर्देश सोनपुर में नये प्रखंड सह अंचल कार्यालय भवन के निर्माण को लेकर जिलाधिकारी ने निर्माण अवधि तक के लिए कार्यालय को उपयुक्त स्थल पर शिफ्ट करने हेतु अनुमंडल पदाधिकारी को तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साफ-सफाई और अभिलेख प्रबंधन पर फोकस निरीक्षण के दौरान कार्यालय परिसर में समुचित साफ-सफाई बनाए रखने का निर्देश दिया गया। जिलाधिकारी ने पुराने अभिलेखों को विधिवत अभिलेखागार में जमा कराने, रद्दी रिकॉर्ड का नियमानुसार निष्पादन करने तथा वर्तमान में आवश्यक अभिलेखों को व्यवस्थित ढंग से संधारित करने का निर्देश दिया। अनाधिकृत अनुपस्थिति पर विभागीय कार्रवाई करीब डेढ़ वर्षों से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित अंचल लिपिक जयप्रकाश श्रीवास्तव के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्देश दिया गया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि सरकारी कार्य में लापरवाही या अनुपस्थिति को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सामाजिक सुरक्षा पेंशन की जांच सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत मृत चिह्नित लाभार्थियों के सत्यापन को लेकर भी जिलाधिकारी ने गंभीरता दिखाई। उन्होंने निर्देश दिया कि वास्तव में मृत लाभार्थियों के मामले में मृत्यु प्रमाण पत्र या पड़ोसियों के बयान जैसे साक्ष्य रिकॉर्ड में अनिवार्य रूप से संलग्न किए जाएं। दाखिल-खारिज मामलों की समीक्षा अंचल कार्यालय में दाखिल-खारिज के सबसे पुराने लंबित मामलों का भी जिलाधिकारी ने अवलोकन किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अनावश्यक रूप से आवेदन लंबित रखने पर संबंधित कर्मियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी सोनपुर, प्रखंड विकास पदाधिकारी सोनपुर, अंचल अधिकारी सोनपुर सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
छपरा में सजी हरियाली की अनूठी दुनिया: 1100 प्रदर्शों के साथ प्रमंडल स्तरीय उद्यान प्रदर्शनी 2026 का भव्य आगाज़
छपरा, 21 फरवरी। बाजार समिति छपरा स्थित कृषि भवन इन दिनों खुशबूदार फूलों, रंग-बिरंगे फलों और पौष्टिक कृषि उत्पादों से महक रहा है। कृषि विभाग एवं उद्यान निदेशालय के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय प्रमंडल स्तरीय उद्यान प्रदर्शनी सह प्रतियोगिता 2026 का शुभारंभ 20 फरवरी से हो चुका है, जो 22 फरवरी तक चलेगा। प्रदर्शनी में छपरा, सीवान और गोपालगंज जिलों से लाए गए लगभग 1100 प्रदर्श आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। प्रदर्शनी का विधिवत उद्घाटन उपविकास आयुक्त श्री लक्ष्मण तिवारी ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेती के साथ यदि किसान नवाचार और उन्नत तकनीक को अपनाएं, तो वे अपनी आय में गुणात्मक वृद्धि ला सकते हैं। उन्होंने किसानों से आधुनिक कृषि पद्धतियों और वैज्ञानिक सलाह को अपनाने की अपील की। प्रदर्शनी को 48 विभिन्न वर्गों में विभाजित किया गया है। हर वर्ग में उत्कृष्ट उत्पादों का प्रदर्शन किया गया है। यहां सब्जियों की अनेक किस्में, उनसे बने खाद्य उत्पाद, मशरूम की विविध प्रजातियां, फलों और उनसे तैयार व्यंजन, पान के पत्ते, घर में तैयार खाद्य सामग्री, विभिन्न प्रकार के शहद, औषधीय एवं सुगंधित पौधे विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। जाड़े के मौसमी फूलों से सजे गमले, कटे हुए पुष्प, कलात्मक पुष्प सज्जा और सजावटी पौधों ने पूरे परिसर को रंगीन और मनमोहक बना दिया है। दूर से ही वातावरण में फूलों की सुगंध और ताजगी का एहसास होता है। यह प्रदर्शनी केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि किसानों और उद्यान प्रेमियों के लिए एक ज्ञानवर्धक मंच भी है। यहां पारंपरिक खेती और आधुनिक तकनीक का सुंदर समन्वय देखने को मिल रहा है। प्रदर्शनी इस बात का सजीव उदाहरण है कि मेहनत, नवाचार और वैज्ञानिक पद्धति से खेतों और घरों में रंगों और खुशहाली की बहार लाई जा सकती है। 20 फरवरी को पूसा कृषि केंद्र और मांझी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने तीनों जिलों से आए प्रदर्शों का अवलोकन किया। प्रत्येक 48 वर्गों में प्रथम, द्वितीय, तृतीय और विशिष्ट पुरस्कार के लिए चयन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। आज से यह प्रदर्शनी आम जनता और किसानों के लिए खुल गई है, जहां वे न केवल विभिन्न उत्पादों को देख सकेंगे बल्कि नई तकनीकों और नवाचारों की जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे। इस अवसर पर कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक, सहायक निदेशक (उद्यान), जिला कृषि पदाधिकारी सहित अन्य विभागीय अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। यह प्रदर्शनी क्षेत्रीय कृषि और बागवानी के विकास की बदलती तस्वीर को प्रस्तुत कर रही है, जो आने वाले समय में किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
छपरा में RTE के तहत 48 निजी विद्यालयों को ट्यूशन फीस भुगतान की स्वीकृति, 2 स्कूलों के क्लेम खारिज
छपरा, 19 फरवरी। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की ट्यूशन फीस के भुगतान को लेकर जिला प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में शैक्षणिक सत्र 2019-20 से 2023-24 तक के लंबित ट्यूशन फीस क्लेम के भुगतान को स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में कुल 50 निजी विद्यालयों द्वारा प्रस्तुत क्लेम की समीक्षा की गई। जिला एवं अनुमंडल के वरीय पदाधिकारियों द्वारा की गई विस्तृत जांच के बाद 48 विद्यालयों के दावे अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप सही पाए गए। इन विद्यालयों को ट्यूशन फीस भुगतान की स्वीकृति दे दी गई है। हालांकि जांच के दौरान दो विद्यालयों में अनियमितता पाई गई। इन विद्यालयों द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत नामांकित छात्र-छात्राओं के अभिभावकों से ट्यूशन फीस के साथ-साथ पोषाक और पुस्तक की राशि भी वसूल की गई थी। नियमों के अनुसार अधिनियम के तहत नामांकित बच्चों को निःशुल्क पोषाक एवं पुस्तक उपलब्ध कराना विद्यालय की जिम्मेदारी है। ऐसे में इन दोनों विद्यालयों के क्लेम को अस्वीकृत कर दिया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत संबंधित निजी विद्यालय केवल ट्यूशन फीस का ही क्लेम कर सकते हैं। अन्य मदों में किसी भी प्रकार की राशि वसूलना नियमों के विरुद्ध है। गौरतलब है कि इस अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें कमजोर वर्ग एवं अलाभकारी समूह के बच्चों के लिए आरक्षित हैं। इन सीटों पर नामांकन हेतु अभिभावकों द्वारा ‘ज्ञानदीप’ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जाता है। बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशासन ने सभी विद्यालयों को अधिनियम के प्रावधानों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है।
वार्षिक माध्यमिक परीक्षा 2026: जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने किया औचक निरीक्षण, कदाचारमुक्त परीक्षा के लिए कड़े निर्देश
छपरा, 18 फरवरी 2026: सारण जिले में आयोजित वार्षिक माध्यमिक सैद्धांतिक परीक्षा 2026 के अवसर पर जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने मंगलवार को छपरा नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने परीक्षा व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंध तथा कदाचारमुक्त वातावरण की तैयारियों का जायजा लिया। जिलाधिकारी ने जिला स्कूल छपरा, एस डी एस कॉलेज छपरा तथा आर एन सिंह इवनिंग कॉलेज छपरा सहित अन्य परीक्षा केंद्रों का भ्रमण कर केंद्राधीक्षकों से व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने परीक्षा कक्षों में बैठने की व्यवस्था, प्रश्नपत्र वितरण प्रक्रिया, सुरक्षा इंतजाम एवं निगरानी तंत्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सभी केंद्राधीक्षकों एवं संबंधित पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि परीक्षा अवधि में विद्यालय परिसर के सभी प्रवेश एवं निकासी द्वारों को पूर्ण रूप से बंद रखा जाए, ताकि बाहरी हस्तक्षेप की कोई संभावना न रहे। साथ ही उन्होंने परीक्षा हॉल में समुचित प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा आवश्यकतानुसार अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे अधिष्ठापित करने का निर्देश भी दिया। उन्होंने कहा कि परीक्षा कदाचारमुक्त, पारदर्शी एवं शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित पदाधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने परीक्षा ड्यूटी में तैनात दंडाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों को सतर्क एवं सक्रिय रहने का निर्देश देते हुए कहा कि परीक्षा केंद्रों के आसपास असामाजिक तत्वों पर विशेष नजर रखी जाए। प्रशासन द्वारा परीक्षा को निष्पक्ष एवं व्यवस्थित रूप से सम्पन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। जिला प्रशासन ने अभिभावकों एवं आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है, ताकि परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हो सके।
समय की पाबंदी या सुरक्षा से समझौता? गोपालगंज के व्हीएम इंटर कॉलेज में दीवार फांदकर परीक्षा देने पहुंचीं छात्राएं
गोपालगंज (बिहार)। मैट्रिक परीक्षा के पहले दिन गोपालगंज से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने परीक्षा व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के व्हीएम इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय के बाद पहुंचीं कुछ छात्राओं को गेट से प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद छात्राओं ने जान जोखिम में डालते हुए केंद्र की दीवार फांदकर अंदर जाने का प्रयास किया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। जानकारी के अनुसार, परीक्षा शुरू होने से पूर्व बोर्ड के दिशा-निर्देशों के तहत केंद्र का मुख्य द्वार निर्धारित समय पर बंद कर दिया गया। इसी दौरान कुछ परीक्षार्थी देरी से केंद्र पहुंचे। नियमों का हवाला देते हुए केंद्र प्रशासन ने उन्हें प्रवेश देने से इनकार कर दिया। गेट बंद देख कुछ छात्राएं व्याकुल हो उठीं और पास की दीवार पर चढ़कर अंदर जाने की कोशिश करने लगीं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दीवार काफी ऊंची थी और उसे पार करते समय गिरने का जोखिम था। छात्राओं द्वारा इस तरह दीवार फांदना न केवल नियमों की मजबूरी को दर्शाता है, बल्कि सुरक्षा इंतजामों की गंभीर कमी की ओर भी इशारा करता है। मौके पर मौजूद अभिभावकों ने चिंता जताते हुए कहा कि यदि कोई दुर्घटना हो जाती तो जिम्मेदारी किसकी होती? कुछ परीक्षार्थियों और उनके परिजनों का कहना है कि वे दूर-दराज के क्षेत्रों से आए थे और रास्ते में ट्रैफिक जाम के कारण देरी हो गई। उनका आरोप है कि कुछ मिनट की देरी के कारण भविष्य दांव पर लग गया। वहीं, परीक्षा केंद्र प्रशासन का कहना है कि बिहार बोर्ड के सख्त निर्देशों के तहत निर्धारित समय के बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती।
सारण की बेटियों को सशक्तिकरण की सौगात: 83,103 महिलाओं के खातों में पहुँची 10-10 हजार की पहली किस्त
छपरा, 16 फरवरी 2026: मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत आज बिहार की महिलाओं के लिए ऐतिहासिक दिन रहा। माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कर-कमलों से राज्य की 25 लाख महिलाओं के खातों में स्वरोजगार के लिए 10,000 रुपये की प्रथम किस्त का डायरेक्ट अंतरण किया गया। इस पहल ने आत्मनिर्भर बिहार के संकल्प को और मजबूती दी है। सारण की 83,103 महिलाओं को मिला सीधा लाभ इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत सारण जिले की 83,103 महिलाएं भी लाभान्वित हुईं। अब तक जिले की कुल 5,62,562 महिलाएं इस योजना के माध्यम से आर्थिक संबल प्राप्त कर चुकी हैं। यह आँकड़ा दर्शाता है कि जिले में महिला सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर और प्रभावी कार्य हो रहा है। जिला मुख्यालय में लाइव प्रसारण, महिलाओं की उत्साही भागीदारी मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम का बेबकास्टिंग (वेबकास्टिंग) के माध्यम से जिला मुख्यालय में सीधा प्रसारण किया गया। सैकड़ों महिलाएं इस ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनीं और कार्यक्रम से सीधे जुड़ीं। महिलाओं में विशेष उत्साह और आत्मविश्वास देखने को मिला। समाहरणालय सभागार, छपरा में जिला स्तरीय कार्यक्रम छपरा के समाहरणालय सभागार में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जीविका दीदियों ने भाग लिया और योजना की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की। जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। स्वरोजगार के लिए दी गई यह राशि महिलाओं को छोटे व्यवसाय, हस्तशिल्प, कृषि आधारित कार्य एवं अन्य उद्यम शुरू करने में सहायक होगी। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से राशि सीधे खातों में भेजे जाने से पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है और लाभार्थियों को बिना किसी बिचौलिये के सीधा लाभ मिला है।