छपरा। बीती रात गरखा प्रखंड अंतर्गत रघुपुर गांव में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की गई। हालांकि, जिला प्रशासन और पुलिस की त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई से स्थिति को समय रहते पूरी तरह नियंत्रण में ले लिया गया। फिलहाल गांव में शांति व्यवस्था बनी हुई है और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस और वरीय अधिकारी मौके पर पहुंचे। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है तथा एहतियातन पुलिस गांव में कैंप कर रही है, ताकि किसी भी तरह की अफवाह या दोबारा तनाव की स्थिति को रोका जा सके। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में हालात पूरी तरह शांतिपूर्ण और सामान्य हैं। आम जनजीवन पर किसी प्रकार का असर नहीं पड़ा है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की भ्रामक सूचना या अफवाह पर ध्यान न दें और शांति एवं आपसी भाईचारे को बनाए रखें। प्रशासन ने यह भी दोहराया है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले असामाजिक तत्वों की पहचान की जा रही है और दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने जनता से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। गांव और आसपास के इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि शांति भंग करने की किसी भी कोशिश को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सारण में अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई, 76 लाख से अधिक का जुर्माना; 3 ट्रक और 5 ट्रैक्टर जब्त
छपरा (सारण)। सारण जिले में अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। जिला खनन पदाधिकारी सारण श्री सर्वेश कुमार संभव के नेतृत्व में दिनांक 2–3 फरवरी की मध्य रात्रि एवं 3 फरवरी को स्थानीय थाना के सहयोग से जिले के विभिन्न इलाकों में व्यापक छापेमारी अभियान चलाया गया। इस विशेष अभियान के तहत दरिहरा थाना क्षेत्र समेत कई स्थानों पर अवैध रूप से खनिज के खनन और परिवहन में लिप्त वाहनों को पकड़ा गया। जांच के दौरान बिना वैध ई-चालान, बिना खननसॉफ्ट रजिस्ट्रेशन और पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन के कई मामले सामने आए। कार्रवाई का विस्तृत विवरण 1. अवैध परिवहन पर शिकंजा दरिहरा थाना क्षेत्र में बिना वैध परिवहन चालान के बालू ले जा रहे 5 ट्रैक्टरों को जब्त किया गया। सभी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई। अधिरोपित दंड: 5.30 लाख रुपये 2. बिना ई-चालान 10 चक्का वाहन जब्त एक 10 चक्का वाहन बिना ई-चालान के खनिज परिवहन करते हुए पकड़ा गया। वाहन को जब्त कर प्राथमिकी दर्ज की गई। अधिरोपित दंड: 8.25 लाख रुपये 3. दरिहरा बालूघाट पर बड़ी कार्रवाई दरिहरा बालूघाट की जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं— बिना खननसॉफ्ट रजिस्ट्रेशन (KS No.) के चालान निर्गत करते पाए गए 02 वाहन, दंड:2 लाख रुपये बालूघाट पर समुचित प्रकाश व्यवस्था नहीं पाई गई ,दंड:50 हजार रुपये जांच में लगभग 3000 CFT अवैध उजला बालू जब्त किया गया। साथ ही, ईसी (Environmental Clearance) क्षेत्र से बाहर एवं निर्धारित गहराई से अधिक खनन किए जाने की पुष्टि हुई। अधिरोपित दंड: 62.46 लाख रुपये कार्रवाई का सारांश प्राथमिकी दर्ज:01 जब्त वाहन:3 ट्रक, 5 ट्रैक्टर अवैध भंडारण: 3000 CFT उजला बालू कुल अधिरोपित दंड: 76.01 लाख रुपये प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन और खनिज माफियाओं के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। जिला खनन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया है, वहीं आम लोगों ने इस कदम का स्वागत किया है।
फर्जी आईएएस को मिला ‘राष्ट्रीय प्रेरणा दूत अवार्ड’, छपरा में संस्थाओं की साख पर सवाल
छपरा। खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) का अधिकारी बताकर लंबे समय तक सामाजिक और सार्वजनिक मंचों पर सक्रिय रहने वाले रितेश कुमार को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस व्यक्ति पर फर्जी पहचान के सहारे लोगों को गुमराह करने का आरोप है, उसे “राष्ट्रीय प्रेरणा दूत अवार्ड” जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी नवाज़ा गया। इस खुलासे के बाद अब मामला केवल एक व्यक्ति की कथित धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सम्मान देने वाली संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्य अतिथि से ‘प्रेरणा दूत’ तक का सफर सूत्रों के अनुसार रितेश कुमार छपरा स्थित फेस ऑफ फ्यूचर इंडिया संस्था से जुड़े कई कार्यक्रमों में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होता रहा। मंच से उसे आईएएस अधिकारी के रूप में परिचय कराया गया और युवाओं के लिए “प्रेरणास्रोत” बताया गया। यही नहीं, संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में उसकी मौजूदगी को विशेष उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया। किस आधार पर मिला राष्ट्रीय सम्मान? सबसे बड़ा सवाल यही है कि— “राष्ट्रीय प्रेरणा दूत अवार्ड” देने के लिए कौन-से मापदंड तय किए गए थे? रितेश कुमार ने ऐसा कौन-सा उल्लेखनीय सामाजिक या राष्ट्रीय योगदान दिया, जिसके चलते उसे यह सम्मान दिया गया? क्या अवार्ड से पहले उसके दस्तावेज़, प्रशासनिक सेवा से जुड़े दावे और पहचान की किसी स्तर पर जांच की गई? यदि बिना सत्यापन के किसी व्यक्ति को राष्ट्रीय स्तर का सम्मान दे दिया गया, तो यह न केवल लापरवाही है, बल्कि समाज के साथ विश्वासघात भी माना जाएगा। संस्थाओं की भूमिका भी कटघरे में विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में दोष केवल फर्जी पहचान रखने वाले व्यक्ति का नहीं होता। सम्मान देने वाली संस्थाओं की जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होती है। जब जांच-पड़ताल के बजाय प्रभाव, पहचान या प्रचार के आधार पर अवार्ड दिए जाते हैं, तो सम्मान की गरिमा और उद्देश्य दोनों पर प्रश्नचिह्न लग जाता है। फेस ऑफ फ्यूचर इंडिया से जवाब की अपेक्षा मामले के सामने आने के बाद अब फेस ऑफ फ्यूचर इंडिया संस्था से पारदर्शिता की उम्मीद की जा रही है। संस्था को यह स्पष्ट करना चाहिए कि— अवार्ड चयन की पूरी प्रक्रिया क्या थी किन प्रमाणों और मानकों के आधार पर रितेश कुमार को चुना गया भविष्य में इस तरह की चूक न हो, इसके लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे मुद्दा सिर्फ फर्जी आईएएस का नहीं यह प्रकरण सिर्फ एक व्यक्ति के फर्जी होने का मामला नहीं है। यह सवाल है सम्मान की विश्वसनीयता, सामाजिक संस्थाओं की जिम्मेदारी और जनता को गुमराह किए जाने की उस व्यवस्था का, जिस पर अब गंभीर मंथन ज़रूरी हो गया है। जब तक इन सवालों के ठोस और पारदर्शी जवाब नहीं मिलते, तब तक यह मामला केवल एक खबर नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी बना रहेगा।
3.47 लाख करोड़ का महाबजट: बिहार को ‘विकसित राज्य’ बनाने की नीतीश सरकार की बड़ी तैयारी
पटना। बिहार विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट ने साफ कर दिया है कि नीतीश सरकार विकास की रफ्तार को और तेज करने के मूड में है। राज्य के वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने सदन में कुल 3 लाख 47 हजार 589 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया, जो चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के 3.17 लाख करोड़ रुपये के बजट से कहीं अधिक है। बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार का लक्ष्य बिहार को देश के विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल करना है और इसके लिए बुनियादी ढांचे, आवास, सड़क और रोजगार को प्राथमिकता दी जा रही है। लाल बैग के साथ विधानसभा पहुंचे वित्त मंत्री बजट सत्र के दूसरे दिन सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित रहने के बाद दोबारा शुरू हुई। इसके बाद वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव लाल रंग का बजट बैग लेकर विधानसभा पहुंचे और सदन में बजट भाषण पढ़ना शुरू किया। उन्होंने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि पिछले वर्षों में बिहार ने विकास की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है और अब राज्य एक नए आर्थिक दौर में प्रवेश कर रहा है। किफायती आवास पर सरकार का बड़ा फोकस इस बजट में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सस्ते आवास की योजनाओं को विशेष महत्व दिया गया है। सरकार का मानना है कि किफायती मकान उपलब्ध होने से निम्न और मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी। आवास योजनाओं से न केवल लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा, बल्कि निर्माण क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी और इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। 5 नए एक्सप्रेस-वे से बदलेगा बिहार का रोड मैप बजट का एक बड़ा आकर्षण राज्य में 5 नए एक्सप्रेस-वे के निर्माण की घोषणा रही। सरकार ने बेहतर सड़क नेटवर्क को आर्थिक विकास की रीढ़ बताया है। वित्त मंत्री ने कहा कि इन एक्सप्रेस-वे के बनने से यातायात व्यवस्था सुगम होगी, यात्रा का समय कम होगा और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इससे बिहार की आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और राज्य निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनेगा। विकास और विश्वास का बजट कुल मिलाकर 2026-27 का यह बजट विकास, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का दावा है कि यह बजट बिहार को आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ-साथ आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा।
बिहार में सामाजिक न्याय की बड़ी पहल: SC-ST छात्रों की प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति दोगुनी, 33 लाख बच्चों को मिलेगा सीधा लाभ
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की अहम बैठक में कुल 31 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी। इन फैसलों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहा अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) कल्याण विभाग का वह निर्णय, जिसके तहत प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति की दरों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है। यह संशोधित दरें वित्तीय वर्ष 2025-26 से लागू होंगी और इसका सीधा लाभ राज्य के लाखों वंचित छात्र-छात्राओं को मिलेगा। 2011 की दरों से राहत, अब महंगाई के अनुरूप सहायता सरकार ने 2011 से चली आ रही पुरानी छात्रवृत्ति दरों को मौजूदा महंगाई और शैक्षणिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लगभग दोगुना कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत: कक्षा 1 से 5: ₹1200 वार्षिक कक्षा 6 से 8: ₹2400 वार्षिक कक्षा 9 से 10: ₹3600 वार्षिक छात्रावास में रहने वाले कक्षा 1 से 10 तक के छात्र: ₹6000 वार्षिक इस योजना का लाभ सरकारी स्कूलों और मान्यता प्राप्त/स्वीकृत संस्थानों में पढ़ने वाले SC-ST छात्र-छात्राओं को मिलेगा। 519.64 करोड़ रुपये का सालाना निवेश राज्य सरकार ने इस योजना के लिए 519.64 करोड़ रुपये के वार्षिक व्यय को स्वीकृति दी है। अनुमान है कि इससे करीब 27 से 33 लाख छात्र-छात्राएं सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। यह राशि बच्चों को किताबें, यूनिफॉर्म, स्टेशनरी जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले का मुख्य उद्देश्य ड्रॉपआउट दर को कम करना और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखना है। पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग छात्रावास अनुदान भी दोगुना कैबिनेट बैठक में पिछड़ा वर्ग और अत्यंत पिछड़ा वर्ग छात्रावास अनुदान योजना में भी बड़ी राहत दी गई। अब तक मिलने वाले ₹1000 मासिक अनुदान को बढ़ाकर ₹2000 प्रति माह कर दिया गया है। लाभार्थी: करीब 8150 छात्र-छात्राएं वार्षिक वित्तीय भार: 19.56 करोड़ रुपये लागू होने की तिथि: 1 जनवरी 2026 शिक्षा के जरिए सामाजिक न्याय की मजबूत नींव कैबिनेट ने छात्रवृत्ति संशोधन को तत्काल प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। जानकारों का मानना है कि यह फैसला न केवल शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करेगा, बल्कि सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में बिहार सरकार का एक मजबूत संदेश भी है। बैठक में इसके अलावा विकास योजनाओं, प्रशासनिक सुधारों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों से जुड़े अन्य प्रस्तावों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
पानापुर के सतजोड़ा बाजार में धूमधाम से फहराया तिरंगा, गणतंत्र दिवस पर दिखा देशभक्ति का उत्साह
सारण/पानापुर। 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर पानापुर प्रखंड के सतजोड़ा बाजार में देशभक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला। 26 जनवरी 2026 को पानापुर उत्तरी मंडल अध्यक्ष कन्हैया पंडित के द्वारा विधिवत रूप से झंडोत्तोलन किया गया। तिरंगा फहराते ही भारत माता के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। इस अवसर पर कार्यक्रम में मुख्य रूप से युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष नीरज कुमार सिंह उपस्थित रहे। उनके साथ मंडल उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह, मनोज गिरी, गुड्डू सिंह, युगल सिंह, सोनू कुमार सिंह सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति और स्थानीय कार्यकर्ता मौजूद थे। झंडोत्तोलन के बाद उपस्थित लोगों ने राष्ट्रगान गाया और देश की एकता, अखंडता व संविधान के प्रति निष्ठा बनाए रखने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि गणतंत्र दिवस हमें संविधान के मूल्यों को आत्मसात करने और देश के विकास में योगदान देने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम शांतिपूर्ण और अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ। स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को और भी गरिमामय बना दिया। गणतंत्र दिवस के इस आयोजन ने क्षेत्र में राष्ट्रप्रेम और सामाजिक एकता का संदेश दिया।
तेजस्वी यादव की ताजपोशी पर चिराग पासवान का हमला, राजद को बताया “एक परिवार की पार्टी”
पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। विपक्षी दलों ने इस फैसले को लेकर न सिर्फ सवाल उठाए हैं, बल्कि राजद की आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भी निशाना साधा है। इस सियासी घमासान में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान का बयान सबसे ज्यादा चर्चा में है। चिराग पासवान का सीधा सवाल—काबिलियत या विरासत? चिराग पासवान ने तेजस्वी यादव की राजनीतिक क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजद आज भी एक परिवार के इर्द-गिर्द सिमटी हुई पार्टी है। उनके मुताबिक, “राजद में पद और जिम्मेदारी योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि पारिवारिक पहचान के आधार पर तय होती है।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर किसी दल में एक ही परिवार के सदस्य बार-बार शीर्ष पदों पर आसीन हों, तो यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि वंशवाद का उदाहरण है। जदयू ने उठाया आपराधिक मामलों का मुद्दा वहीं, जनता दल (यूनाइटेड) ने भी तेजस्वी यादव की नियुक्ति पर सवाल खड़े किए हैं। जदयू नेताओं ने तेजस्वी यादव पर दर्ज आपराधिक मामलों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति को राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी देना गलत संदेश देता है। पार्टी नेताओं का कहना है कि नैतिकता और राजनीतिक शुचिता की बात करने वाली पार्टियों को पहले अपने घर में झांकना चाहिए। राजद का पलटवार—युवाओं की आवाज हैं तेजस्वी राजद की ओर से इन आरोपों को सिरे से खारिज किया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि तेजस्वी यादव को उनकी संगठनात्मक क्षमता, युवाओं के बीच लोकप्रियता और राजनीतिक अनुभव के आधार पर यह जिम्मेदारी दी गई है। राजद प्रवक्ताओं ने कहा कि “तेजस्वी यादव आज बिहार की सबसे मजबूत विपक्षी आवाज हैं और जनता ने उन्हें बार-बार अपना समर्थन दिया है।” बिहार की राजनीति में फिर गर्माया वंशवाद का मुद्दा तेजस्वी यादव की नई भूमिका ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में वंशवाद बनाम नेतृत्व क्षमता की बहस को केंद्र में ला दिया है। जहां विपक्ष इसे परिवारवाद का प्रतीक बता रहा है, वहीं राजद इसे राजनीतिक उत्तराधिकार के साथ-साथ जनादेश का सम्मान करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित रहता है या बिहार की सियासत में नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म देता है।
आरजेडी में नेतृत्व का नया अध्याय: तेजस्वी यादव बने कार्यकारी अध्यक्ष
पटना बैठक में सर्वसम्मति से फैसला, लालू यादव बने रहेंगे राष्ट्रीय अध्यक्ष पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के बाद राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को आरजेडी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह निर्णय रविवार को पटना के प्रतिष्ठित होटल मौर्या में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता स्वयं आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने की। बैठक से पहले ही राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे थे कि तेजस्वी यादव को पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, और अंततः वही हुआ जिसकी अटकलें लगाई जा रही थीं। लालू यादव का अनुभव, तेजस्वी की कमान बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि लालू प्रसाद यादव अपने कार्यकाल की समाप्ति तक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहेंगे, जबकि तेजस्वी यादव को संगठन की रोज़मर्रा की गतिविधियों और राजनीतिक रणनीति की अहम जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इस फैसले को आरजेडी में पीढ़ीगत नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। तेजस्वी यादव के कंधों पर बढ़ी जिम्मेदारी कार्यकारी अध्यक्ष बनने के साथ ही तेजस्वी यादव के सामने पार्टी को नए सिरे से संगठित करने, ज़मीनी स्तर पर मजबूती लाने और आगामी चुनावों के लिए स्पष्ट राजनीतिक दिशा तय करने की चुनौती होगी। विधानसभा चुनाव में विपक्ष के नेता के रूप में उनकी सक्रिय भूमिका पहले ही उन्हें पार्टी का सबसे प्रमुख चेहरा बना चुकी है। पार्टी में उत्साह, समर्थकों में भरोसा आरजेडी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि तेजस्वी यादव युवा नेतृत्व का प्रतीक हैं और उनके नेतृत्व में पार्टी नए सिरे से जनाधार को मजबूत करेगी। बैठक में मौजूद नेताओं ने भरोसा जताया कि लालू यादव के अनुभव और तेजस्वी यादव की ऊर्जा का मेल आरजेडी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला न सिर्फ पार्टी के अंदरूनी ढांचे को मज़बूत करेगा, बल्कि बिहार की राजनीति में आरजेडी की भविष्य की रणनीति का भी संकेत देता है।
पटना NEET छात्रा मौत मामला: FSL रिपोर्ट ने खोले सनसनीखेज़ राज़, अंतःवस्त्र पर मिले मानव शुक्राणु के अवशेष
पटना। राजधानी पटना में नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच को एक अहम और चौंकाने वाला मोड़ मिला है। विशेष जांच दल (SIT) को फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की बायोलॉजिकल रिपोर्ट प्राप्त हो गई है, जिसमें छात्रा के अंतःवस्त्र (अंडर गारमेंट्स) पर मानव शुक्राणु के अवशेष पाए जाने की पुष्टि की गई है। इस खुलासे के बाद मामला आत्महत्या या सामान्य मृत्यु से आगे बढ़कर गंभीर आपराधिक साजिश की ओर इशारा कर रहा है। FSL रिपोर्ट से बढ़ी जांच की गंभीरता सूत्रों के मुताबिक, FSL की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि बरामद अंतःवस्त्र पर पाए गए जैविक सैंपल मानव शुक्राणु के हैं। यह रिपोर्ट SIT के लिए निर्णायक सबूत मानी जा रही है। अब इन सैंपलों की डीएनए प्रोफाइलिंग कराई जाएगी, ताकि उनकी तुलना अब तक गिरफ्तार अभियुक्त और अन्य संदिग्धों से की जा सके। डीएनए मिलान से खुल सकते हैं कई चेहरे जांच एजेंसियों का मानना है कि डीएनए मिलान के बाद यह साफ हो सकेगा कि घटना के समय छात्रा के संपर्क में कौन-कौन लोग थे। यदि डीएनए किसी आरोपी या संदिग्ध से मेल खाता है, तो यह मामला यौन शोषण और हत्या की दिशा में निर्णायक मोड़ ले सकता है। परिवार के आरोप और सवाल छात्रा के परिजनों ने शुरू से ही मौत को संदिग्ध बताते हुए गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि उनकी बेटी मानसिक रूप से मजबूत थी और आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकती। FSL रिपोर्ट आने के बाद परिजनों के आरोपों को बल मिला है और उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। SIT की जांच तेज SIT अब मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुट गई है। कॉल डिटेल्स, सीसीटीवी फुटेज, छात्रा की गतिविधियों और संदिग्धों के बयान की दोबारा समीक्षा की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है और जल्द ही मामले में बड़ा खुलासा हो सकता है। इस सनसनीखेज़ खुलासे के बाद राज्यभर में आक्रोश का माहौल है। छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निष्पक्ष और तेज़ जांच की मांग करते हुए प्रदर्शन भी किए हैं। सभी की निगाहें अब डीएनए रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस रहस्यमयी मौत की असली कहानी सामने ला सकती है। (जांच जारी है…)
“बिहार में बहन-बेटियां असुरक्षित क्यों?” रोहिणी आचार्य का नीतीश सरकार पर सीधा सवाल
पटना: बिहार में महिलाओं और खासकर बेटियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता रोहिणी आचार्य ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब बिहार में लगभग हर दिन बहन-बेटियों के साथ अत्याचार और यौन उत्पीड़न की खबरें सामने आ रही हैं, तब सरकार आखिर कब जागेगी? रोहिणी आचार्य ने कहा कि अपराध के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है, लेकिन सरकार की ओर से ठोस और प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आती। उन्होंने आरोप लगाया कि बेटियों की सुरक्षा को लेकर किए गए तमाम दावे केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं। “जब घर से बाहर निकलते ही डर का माहौल हो, तब विकास और सुशासन की बातें खोखली लगती हैं,” उन्होंने कहा। उन्होंने आगे कहा कि बिहार में महिला सुरक्षा को लेकर सख्त कानून और तेज़ न्याय प्रक्रिया की जरूरत है। दोषियों को तुरंत सजा मिले, तभी अपराधियों में डर पैदा होगा। रोहिणी आचार्य ने यह भी कहा कि पुलिस प्रशासन पर राजनीतिक दबाव और लापरवाही के चलते अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। राजद नेता ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सीधे सवाल किया कि आखिर कब तक बिहार की बेटियां असुरक्षा के साए में जीने को मजबूर रहेंगी? उन्होंने मांग की कि सरकार महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे, संवेदनशील इलाकों में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए और पीड़ितों को त्वरित न्याय व सहायता सुनिश्चित की जाए। रोहिणी आचार्य के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष जहां सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है, वहीं आने वाले दिनों में महिला सुरक्षा का मुद्दा बिहार की राजनीति में और भी प्रमुखता से उभरता दिख रहा है।