अक्कारा/नई दिल्ली, 03 जुलाई : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को घाना के सर्वोच्च सम्मान, ‘द ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना’ से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति जॉन महामा ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। श्री मोदी ने बुधवार को इस सम्मान के लिए घाना के राष्ट्रपति को धन्यवाद दिया और इसे ‘अत्यंत गर्व का विषय’ बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने घाना के राष्ट्रपति महामा से द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक साझेदारी तक बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने रक्षा, सुरक्षा, कौशल विकास और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया। प्रधानमंत्री ने 140 करोड़ भारतीयों की ओर से पुरस्कार स्वीकार करते हुए इस सम्मान को भारत के युवाओं की आकांक्षाओं, इसकी सांस्कृतिक परंपराओं और विविधता तथा घाना और भारत के बीच ऐतिहासिक संबंधों को समर्पित किया। श्री मोदी ने इस विशेष सम्मान के लिए घाना के लोगों और सरकार को धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पुरस्कार दोनों देशों के बीच मित्रता को और गहरा करता है तथा द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की उन पर नई जिम्मेदारी डालता है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि घाना की उनकी ऐतिहासिक राजकीय यात्रा दोनों देशों के संबंधों को नई गति प्रदान करेगी। श्री मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “द ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना’ से सम्मानित होने पर गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं।”
पाकिस्तान में बारिश से संबंधित घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 38 हुई
इस्लामाबाद, 29 जून : पाकिस्तान में बारिश से संबंधित घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 38 हो गई, जबकि 63 लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों में मानसून से पहले हो रही बारिश का कहर जारी है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने शनिवार रात को बताया कि बारिश 26 जून को शुरू हुई थी और देश के विभिन्न हिस्सों में रुक-रुक कर जारी है। प्राधिकरण ने बताया कि उत्तर-पश्चिम में खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। खैबर-पख्तूनख्वा के स्वात इलाके में शुक्रवार को अचानक आई बाढ़ में एक ही परिवार के कम से कम 19 लोग मारे गए। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी की प्रांतीय सरकार को बाढ़ के पानी से घिरे परिवार की मदद करने में विफल रहने के लिए कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। प्राधिकरण ने बताया कि परिवार ने बाढ़ के पानी से घिरे होने के कारण एक घंटे तक ऊंची जगहों पर शरण ली, लेकिन अंततः वे बह गए। प्रांतीय सरकार ने परिवार को बचाने में विफल रहने के लिए चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया और स्वात के उपायुक्त शहजाद महबूब को उनके पद से हटा दिया। हालांकि, संघीय सूचना मंत्री अत्ता तरार ने शनिवार को मुख्यमंत्री अली अमीन गंदापुर को मौतों की जिम्मेदारी लेने और इस्तीफा देने की मांग की। बारिश से जुड़ी घटनाओं में पंजाब में 12 और सिंध प्रांत में सात लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि अलग-अलग घटनाओं में पंजाब में 41, सिंध में 16 और खैबर-पख्तूनख्वा में छह लोग घायल हुए। उन्होंने बताया कि अन्य नुकसान के अलावा देश भर में 63 घर क्षतिग्रस्त हो गए और 30 जानवर मारे गए। अधिकारियों के मुताबिक, बारिश व बाढ़ में सड़कें और पुल भी क्षतिग्रस्त हो गए। प्राधिकरण के मुताबिक, प्रभावित लोगों की मदद के लिए बचाव और पुनर्वास प्रयास जारी हैं।
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में अचानक आई बाढ़, 11 लोगों की मौत
इस्लामाबाद, 28 जून : पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में मूसलाधार बारिश के चलते अचानक आई बाढ़ में कम से कम 11 लोगों की जान चली गई। इनके अलावा छह अन्य लोग घायल हो गए हैं। बाढ़ के कारण स्वात नदी में तेजी से जलस्तर बढ़ गया, जिससे भारी नुकसान पहुंचा है। प्रोविजनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (पीडीएमए) ने हताहतों की पुष्टि की है। इसके अलावा मीडिया ने प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक बचाव और राहत अभियान चलाए जाने की जानकारी दी है। ‘पीडीएमए’ के अनुसार, इस बाढ़ के दौरान जान गंवाने वालों में चार पुरुष, तीन महिलाएं और चार बच्चे शामिल हैं। इस बाढ़ से 56 घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिनमें से 6 घर पूरी तरह नष्ट हो गए। 50 घरों को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, स्वात क्षेत्र में जानमाल का काफी नुकसान हुआ है। यहां 11 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। ‘डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी’ ने बाढ़ के लेवल को ‘बहुत अधिक’ बताया है। अधिकारियों के मुताबिक इस बाढ़ में दर्जनों लोग फंसे हुए हैं। दो दिनों की लगातार बारिश के बाद स्थिति से निपटने के लिए राहत कार्य जारी हैं। पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ के अनुसार, पीडीएमए ने स्वात क्षेत्र से संभावित बाढ़ के जोखिम से निपटने को तैयार रहने के लिए पेशावर, चरसद्दा और नौशेरा में अधिकारियों को अलर्ट भी जारी किया है। स्वात के डिप्टी कमिश्नर शहजाद महबूब ने बताया है कि स्वात नदी में अचानक आई बाढ़ के चलते 73 लोग अलग-अलग स्थानों पर फंस गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी पुष्टि की है कि दो पर्यटक परिवारों में से 18 लोग शुक्रवार को स्वात नदी में आई अचानक बाढ़ की चपेट में आ गए, जिनमें से 17 की मौत हो गई। स्थानीय मीडिया के मुताबिक यह घटना फिजागत क्षेत्र में हुई, जहां दो परिवारों के सदस्य नदी के किनारे नाश्ता कर रहे थे। इसी बीच अचानक नदी का जल स्तर बढ़ गया और इनमें से कई बह गए। अधिकारियों के अनुसार, बचाव अभियान के दौरान तीन व्यक्तियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। एक बचाव अधिकारी ने बताया, “हमें सुबह 8 बजे इन लोगों के डूबने की सूचना मिली।” इस दुखद घटना का एक भयावह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें महिलाएं और बच्चे नदी में फंसे नजर आ रहे हैं।
राजनाथ ने एससीओ के बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया
किंगदाओ/नई दिल्ली, 26 जून : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि आतंकवाद के दोषियों, वित्तपोषकों व प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और इससे निपटने में ”दोहरा” मापदंड नहीं अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान समर्थित सीमापार से जारी आतंकवाद पर भारत की चिंताओं को स्पष्ट रूप से संबोधित नहीं करने के लिए एससीओ के बयान पर हस्ताक्षर नहीं करने का निर्णय लिया। मामले से परिचित लोगों ने बताया कि एससीओ आम सहमति के तहत काम करता है, लिहाजा दस्तावेज का समर्थन करने से सिंह के इनकार के परिणामस्वरूप एससीओ रक्षा मंत्रियों का सम्मेलन संयुक्त वक्तव्य जारी किए बिना ही समाप्त हो गया। उन्होंने कहा कि सीमापार से जारी आतंकवादी गतिविधियों समेत आतंकवाद से निपटने के लिए कोई स्पष्ट दृष्टिकोण नहीं है। सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आतंकवाद से निपटने के मामले में ‘दोहरा मापदंड नहीं’ होना चाहिए एससीओ सदस्य देशों को एकजुटता के साथ इस खतरे की निंदा करनी चाहिए। भारत और चीन के अलावा एससीओ में पाकिस्तान, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। पाकिस्तान का परोक्ष उल्लेख करते हुए सिंह ने कहा कि कुछ देश आतंकवादियों को पनाह देने के लिए सीमापार आतंकवाद को ‘नीतिगत साधन’ के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने आतंकवाद से बचाव और सीमा पार से होने वाले हमलों को रोकने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। उन्होंने कहा, ‘पहलगाम आतंकी हमले के दौरान, पीड़ितों को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर गोली मार दी गई थी। संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से जुड़े द रेजिस्टेंस फ्रंट ने हमले की जिम्मेदारी ली।’ उन्होंने कहा, ‘पहलगाम हमले का तरीका भारत में लश्कर-ए-तैयबा के पिछले आतंकवादी हमलों के जैसा था। भारत की आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति उसके कार्यों से प्रदर्शित होती है।’ उन्होंने कहा, ‘इस नीति में आतंकवाद से खुद का बचाव करने का हमारा अधिकार भी शामिल है। हमने दिखा दिया है कि आतंकवाद के केंद्र अब सुरक्षित नहीं हैं और हम उन्हें निशाना बनाने में संकोच नहीं करेंगे।’ सिंह ने कहा कि एससीओ सदस्यों को आतंकवाद की स्पष्ट रूप से निंदा करनी चाहिए। उन्होंने इस खतरे से सभी रूपों में लड़ने के भारत के संकल्प की पुष्टि की। रक्षा मंत्री ने युवाओं में कट्टरपंथ को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाने का भी आह्वान किया। सिंह ने कहा कि दुनिया कई चुनौतियों का सामना कर रही है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और साइबर हमलों से लेकर हाइब्रिड युद्ध तक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये खतरे सभी देशों के सामने हैं और इनसे निपटने के लिए पारदर्शिता, आपसी विश्वास और सहयोग पर आधारित एकीकृत प्रयासों की जरूरत है। रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि भारत, अफगानिस्तान में शांति, सुरक्षा व स्थिरता से संबंधित अपनी नीति पर अडिग रहा है। रक्षा मंत्री एससीओ रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन में भाग लेने के लिए बुधवार को चीन के बंदरगाह शहर किंगदाओ पहुंचे थे।
राजनाथ सिंह ने किंगदाओ में रूस के रक्षा मंत्री से मुलाकात की
किंगदाओ/नई दिल्ली, 26 जून : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को अपने रूसी समकक्ष आंद्रे बेलौसोव के साथ बातचीत की, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य और द्विपक्षीय रक्षा तथा रणनीतिक संबंधों पर ध्यान केंद्रित किया गया। यह बैठक शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन से इतर हुई। सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में इस बातचीत को ज्ञानवर्धक बताया। उन्होंने कहा, ”किंगदाओ में एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक से इतर रूस के रक्षा मंत्री आंद्रे बेलौसोव से मिलकर खुशी हुई। हमने भारत-रूस रक्षा संबंधों को बढ़ावा देने पर ज्ञानवर्धक विचार-विमर्श किया।” ऐसा समझा जा रहा है कि सिंह ने पाकिस्तान से उत्पन्न सीमा पार आतंकवाद से भारत को चुनौती पर बात की। माना जा रहा है कि दोनों मंत्रियों ने एक जुलाई को रूस के तटीय शहर कलिनिनग्राद में भारतीय नौसेना की रूस निर्मित गाइडेड मिसाइल पनडुब्बी ‘आईएनएस तमाल’ के आगामी जलावतरण पर भी चर्चा की। जलावतरण समारोह की अध्यक्षता पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय जे सिंह करेंगे। सिंह एससीओ सम्मेलन में भाग लेने के लिए बुधवार शाम को किंगदाओ पहुंचे। भारत और चीन के अलावा एससीओ में पाकिस्तान, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं।
ईरान की मिसाइलों से इजराइल में बिजली स्टेशन तबाह, कई शहरों में बिजली गुल
तेल अवीव, 23 जून: इस समय उत्तरी इजराइल में हमले के सायरन बज रहे हैं। कुछ समय पहले ईरान ने इजराइल के कई स्थानों पर मिसाइलें दागी हैं। इस हमले में एक बिजली स्टेशन तबाह हो गया है। इसके बाद आसपास के कई शहरों में बिजली गुल हो गई। द टाइम्स ऑफ इजराइल अखबार की खबर के अनुसार इस समय लगातार उत्तरी इजराइल में सायरन बज रहे हैं। नागरिकों को अगले आदेश तक सुरक्षित आश्रयों में रहने का निर्देश दिया गया है। इजराइल डिफेंस फोर्सेज ( आईडीएफ) के ताजा आकलन के अनुसार कुछ देर पहले ईरान ने 40 मिनट के अंदर छह या सात मिसाइलें दागीं। इन हमलों में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। इजराइल इलेक्ट्रिक कॉरपोरेशन के अनुसार दक्षिणी इजराइल में एक बिजली स्टेशन के बगल में बैलेस्टिक मिसाइल गिरने से आस-पास के शहरों में बिजली गुल हो गई। टीमें बिजली आपूर्ति बहाल करने के प्रयास कर रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने बुलाई आपात बैठक
वियना/नयी दिल्ली, 22 जून : अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले के मद्देनजर सोमवार को आपात बैठक बुलायी है। आईएईए महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी ने एक्स पर अपने पोस्ट में कहा,“ईरान में गंभीर स्थिति के मद्देनजर कल गवर्नर्स की आपात बैठक बुलायी गयी है।” श्री ग्रॉसी ने आगे कहा कि तीन परमाणु स्थलों पर हमले किये गये हैं हालांकि इस समय तक ऑफ-साइट विकिरण के स्तर में कोई वृद्धि नहीं हुई है। ईरान में स्थिति पर आगे का आकलन तब किया जाएगा जब और अधिक जानकारी उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि पिछले नौ दिनों में ईरान पर इजरायल के हमलों के दौरान इस्फ़हान में एक बड़े परमाणु परिसर को दूसरी बार निशाना बनाया गया है, जिसमें कई और इमारतें भी शामिल हैं। इससे पहले आईएईए महानिदेशक ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को पेश रिपोर्ट में कहा था कि ईरान में परमाणु स्थलों पर हमले वहां परमाणु सुरक्षा और संरक्षा में भारी गिरावट का कारण बना है, हालांकि अब तक कोई रेडियोलॉजिकल रिलीज नहीं हुआ है लेकिन ऐसा होने का खतरा है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की है कि उनके देश ने तीन परमाणु सुविधाओं – फ़ोर्डो, इस्फ़हान और नतांज़ पर हमले किए हैं। उन्होंने कहा , “हमारा उद्देश्य ईरान की परमाणु संवर्धन क्षमता को नष्ट करना और दुनिया के नंबर एक आतंक प्रायोजक देश से उत्पन्न परमाणु खतरे को रोकना था। मैं दुनिया को बता सकता हूँ कि हमले शानदार, सैन्य सफलता थे। परमाणु संवर्धन सुविधाएँ पूरी तरह से नष्ट कर दी गई हैं।” इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा,“अमेरिका की जबरदस्त और न्यायपूर्ण ताकत के साथ आज रात ईरान के परमाणु ठिकानों पर की गई कार्रवाई में अमेरिका बेजोड़ साबित हुआ है। उसने वह किया है जो दुनिया का कोई भी देश नहीं कर सकता। इतिहास दर्ज करेगा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनिया के सबसे खतरनाक शासन को दुनिया के सबसे खतरनाक हथियार से वंचित करने का काम किया। श्री ट्रंप और मैंने ताकत के जरिए शांति की पेशकश की। पहले ताकत आती है और फिर शांति आती है।”
अमेरिकी हमलों का जवाब देने के लिए सभी विकल्प खुले हैं :ईरान
वाशिंगटन/तेहरान, 22 जून : ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि ईरानी परमाणु संयंत्रों पर अमेरिकी हमले “घृणित” है और “इसके दीर्घकालिक गंभीर परिणाम होंगे।”उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा हैै कि ईरान के पास जवाबी कार्रवाई करने के लिए “सभी विकल्प” हैं। इस बीच इजरायल रक्षा बलों (आईडीएफ) ने कहा कि उसने ईरानी परमाणु संयंत्रों पर अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की तरफ से दागी गयी मिसाइलों का पता लगाया है। आईडीएफ ने टेलीग्राम पर कहा, “कुछ समय पहले ईरान की ओर से इजरायल पर दागी गई मिसाइलों के बाद इजरायल के कई इलाकों में सायरन बजने लगे।” इजरायली सेना ने कहा कि इजरायल के कुछ क्षेत्रों में हवाई हमले की चेतावनी घोषित की गई है और निवासियों को सुरक्षित क्षेत्रों में शरण लेने का आदेश दिया गया है। इज़रायल एयरपोर्ट अथॉरिटी ने पहले एक बयान में कहा था कि ईरान के परमाणु संंयंत्रों पर अमेरिकी हमले के बाद इज़रायल ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है। इस बीच ईरानी सरकारी मीडिया ने देश के राष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा प्रणाली केंद्र के एक बयान का हवाला देते हुए बताया कि अमेरिकी हवाई हमलों के बाद इस्फ़हान, फ़ोर्डो और नतांज़ में परमाणु स्थलों पर “रेडियधर्मिता का कोई संकेत नहीं”मिला और आसपास रहने वाले निवासियों के लिए कोई खतरा नहीं है।” ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘इरना’ ने परमाणु संयंत्रों पर हमलों को स्वीकार किया है। ईरान के सरकारी टेलीविजन के निदेशक हसन अबेदिनी ने कहा कि ईरान ने इन तीन परमाणु स्थलों को “कुछ समय पहले ही” खाली कर दिया था, ईरान को “कोई बड़ा झटका नहीं लगा क्योंकि सामग्री वहां से पहले ही निकाल ली गई थी।” अमेरिकी हमलों के बाद जारी एक बयान में इरना ने कहा कि ईरान का परमाणु ऊर्जा संगठन महान ईरानी राष्ट्र को आश्वस्त करता है कि अपने दुश्मनों की साजिशों के बावजूद अपने परमाणु विकास कार्यक्रम को नहीं रुकने देगा। ईरानी परमाणु संयंत्रों पर हमलों में अमेरिका ने जीबीयू-57ए/बी मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर बम का इस्तेमाल किया, जिसे “बंकर बस्टर” के रूप में जाना जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बी-2 बमवर्षक ही एकमात्र विमान है जो बम ले जाने में सक्षम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये हमले मध्य पूर्व में तनाव में ऐतिहासिक वृद्धि को दर्शाते हैं। इससे ईरान की ओर से पूरे क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों और सैन्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई भड़क सकती है। उधर यमन के हूती समूह के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार सुबह सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वह ईरानी परमाणु संयंत्रों पर हमलों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड को जिम्मेदार ठहराएगा। हूती राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य हिजाम अल-असद ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “ट्रम्प को इसके परिणाम भुगतने होंगे।”अमेरिकी हमलों से पहले हूती समूह ने एक बयान में कहा था कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो वह अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाएगा। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरिया ने हूती द्वारा संचालित अल-मसीरा टीवी द्वारा प्रसारित बयान में कहा, “अगर अमेरिका ईरान के खिलाफ हमले और आक्रामकता में शामिल है …तो सशस्त्र बल (हूती बल) लाल सागर में उसके जहाजों और युद्धपोतों को निशाना बनाएंगे।” वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी हमलों के बाद रविवार को श्री ट्रंप को बधाई दी और इसे “ईरान के परमाणु संयंत्रों को निशाना बनाने का साहसिक फैसला” बताया।
ईरान ने इजरायल के हवाई क्षेत्र पर नियंत्रण करने का किया दावा
तेहरान, 18 जून: ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बुधवार को कहा कि उसके सशस्त्र बलों ने इजरायली हवाई क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने आईआरजीसी के हवाले से रिपोर्ट में कहा, “आज के मिसाइल हमले से पता चला है कि हमने कब्जे वाले क्षेत्रों के आसमान पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया है और उनके (इजरायल) निवासी ईरानी मिसाइल हमलों के खिलाफ पूरी तरह से निस्सहाय दिखे हैं।”
भारत-कनाडा संबंध ‘अत्यंत महत्वपूर्ण’: प्रधानमंत्री मोदी
कैनानास्की (कनाडा), 18 जून : भारत और कनाडा ने मंगलवार को एक दूसरे की चिंताओं, संवेदनशीलता, लोगों के बीच मजबूत संबंधों तथा आपसी सम्मान पर आधारित एक रचनात्मक और संतुलित साझीदारी की बहाली की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए द्विपक्षीय संबंधों को फिर से पटरी पर लाने का मार्ग प्रशस्त किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच अल्बर्टा के कैनानास्की में जी-7 शिखर सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय बैठक में यह महत्वपूर्ण सहमति बनी और नई दिल्ली तथा ओटावा में उच्चायुक्तों की नियुक्ति की घोषणा की गयी। गौरतलब है कि कनाडा के हाल के आम चुनावों के बाद प्रधानमंत्री कार्नी के पदभार संभालने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली व्यक्तिगत बातचीत थी। इस बैठक में दोनों पक्षों को भारत-कनाडा संबंधों की स्थिति और आगे के रास्ते पर स्पष्ट और दूरदर्शी चर्चा करने का अवसर मिला। विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों नेताओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन के प्रति सम्मान और संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सिद्धांतों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता के आधार पर भारत-कनाडा संबंधों के महत्व की पुष्टि की। उन्होंने चिंताओं और संवेदनशीलता, लोगों के बीच मजबूत संबंधों और बढ़ती आर्थिक पूरकताओं के प्रति आपसी सम्मान पर आधारित एक रचनात्मक और संतुलित साझीदारी को आगे बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित किया। इस संबंध में दोनों पक्ष संबंधों में स्थिरता बहाल करने के लिए कैलिब्रेटेड और रचनात्मक कदम उठाने पर सहमत हुए, जिसकी शुरुआत उच्चायुक्तों की एक-दूसरे की राजधानियों में जल्दी वापसी के निर्णय से हुयी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने आपसी विश्वास को फिर से स्थापित करने और संबंधों को गति देने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में वरिष्ठ मंत्रिस्तरीय और कार्य स्तर की बैठकों को फिर से शुरू करने के महत्व को रेखांकित किया। दोनों नेताओं ने स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी), खाद्य सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, उच्च शिक्षा, गतिशीलता और आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन जैसे क्षेत्रों में भविष्य में सहयोग के अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने में साझा रुचि की पुष्टि की। दोनों नेताओं ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) का मार्ग प्रशस्त करने के उद्देश्य से प्रारंभिक प्रगति व्यापार समझौते (ईपीटीए) पर रुकी हुयी वार्ताओं को फिर से शुरू करने के महत्व पर भी चर्चा की। वे इस संबंध में आगे अपने संबंधित अधिकारियों को काम सौंपने के लिए सहमत हुए। दोनों दोनों नेताओं ने जी-7 शिखर सम्मेलन में हुई महत्वपूर्ण प्रगति और जलवायु कार्रवाई, समावेशी विकास और सतत विकास जैसी वैश्विक प्राथमिकताओं पर रचनात्मक रूप से एक साथ काम करने की साझा इच्छा को स्वीकार किया। उन्होंने दोनों देशों के बीच लोगों के बीच गहरे संबंधों को रेखांकित किया और दोनों देशों के लाभ के लिए इस जीवंत सेतु का लाभ उठाने पर सहमति व्यक्त की। दोनों नेता संपर्क में रहने के लिए सहमत हुए और जल्द से जल्द एक-दूसरे से मिलने के लिए उत्सुक थे। श्री मोदी ने इस बैठक के साथ ही कनाडा की यात्रा पूरी कर कालगरी हवाई अड्डे से अपनी यात्रा के अंतिम चरण में क्रोएशिया की राजधानी जगरेब के लिए उड़ान भरी।