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पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने भारत के खिलाफ दी परमाणु धमकी दी

वाशिंगटन, 11 अगस्त: पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने अमेरिकी धरती पर दिए गए एक भाषण में भारत को परमाणु युद्ध की धमकी देते हुए चेतावनी दी है कि अस्तित्व का खतरा पैदा होने पर पाकिस्तान “आधी दुनिया को तबाह कर देगा। फ्लोरिडा के टैम्पा में व्यवसायी और मानद वाणिज्य दूत अदनान असद द्वारा आयोजित एक रात्रिभोज में बोलते हुए सेना प्रमुख ने कहा, “हम एक परमाणु संपन्न राष्ट्र हैं। अगर हमें लगता है कि हम बर्बाद हो रहे हैं तो हम आधी दुनिया को बर्बाद कर देंगे।” रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी धरती से किसी तीसरे देश के खिलाफ परमाणु यद्ध के लिये दी गई उनकी यह पहली परमाणु धमकी हैं। फील्ड मार्शल मुनीर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के कमान परिवर्तन समारोह में भाग लेने के लिए टाम्पा में हैं। दो महीने से भी कम समय में यह उनकी अमेरिका की दूसरी यात्रा है जो अमेरिका-पाकिस्तान के बीच नए सैन्य संबंधों का संकेत है। इससे क्षेत्र में अमेरिकी मंशा को लेकर भारत में गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ऐसा अमेरिका और भारत के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच और महत्वपूर्ण हो जाता है। फील्ड मार्शल मुनीर ने सिंधु नदी के चैनलों पर भारत द्वारा बनाए जाने वाले किसी भी बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की भी धमकी भी दी। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी योजनाओं से पाकिस्तान की जल आपूर्ति बाधित हो सकती है। गौरतलब है कि 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने के भारत के फैसले का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि इस कदम से 25 करोड़ पाकिस्तानियों को भुखमरी का खतरा हो सकता है। उन्होंने कथिततौर पर कहा “हम भारत द्वारा बांध बनाने का इंतजार करेंगे और जब वह ऐसा करेगा तो हम उसे 10 मिसाइलों से नष्ट कर देंगे। सिंधु नदी भारतीयों की पारिवारिक संपत्ति नहीं है। हमें मिसाइलों की कमी नहीं है। अल-हम्दुलिल्लाह (हमारे पास मिसाइलों की कोई कमी नहीं है, अल्लाह की स्तुति हो)”। अपनी पिछली यात्रा के दौरान उन्होंने 18 जून को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस में दोपहर भोज में भाग लिया था और विवादास्पद रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार देने का सुझाव दिया था। इसे उन्होंने फ्लोरिडा में भी दोहराया था। टैम्पा में हुए इस कार्यक्रम में लगभग 120 पाकिस्तानी प्रवासी शामिल हुए थे। कार्यक्रम में इज़राइली रक्षा बलों का एक प्रतिनिधि भी मौजूद था। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 भारतीय मारे गए थे जिसके बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और सैन्य संकट बढ़ गया है। भारत ने 07 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया जिसके तहत पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकवादी ठिकानों पर मिसाइल और हवाई हमले किए गए। परमाणु हथियारों से लैस प्रतिद्वंद्वियों के बीच चार दिनों तक चले इस संघर्ष में ड्रोन युद्ध, तोपखाने से गोलाबारी और जवाबी हमलों सहित गंभीर सैन्य कार्रवाई हुईं।

मैंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रोकने में मदद की थी: ट्रंप का फिर दावा

न्यूयॉर्क/वाशिंगटन, 09 अगस्त : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन तक चले सैन्य संघर्ष के बाद ”स्थिति को संभाल लिया था”, जो एक ”परमाणु युद्ध” में बदल सकता था। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में शुक्रवार को यह भी दावा किया कि इस संघर्ष के दौरान पांच या छह विमान ”मार गिराए गए” थे। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये विमान किस देश के थे-भारत या पाकिस्तान, या फिर वह दोनों देशों के कुल नुकसान की बात कर रहे थे। भारत यह कहता रहा है कि दोनों देशों (भारत-पाकिस्तान) ने अपनी सैन्य कार्रवाई आपसी बातचीत के जरिए रोकी थी और इसमें अमेरिका की कोई मध्यस्थता नहीं थी। ट्रंप ने यह बयान अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव और आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान की मौजूदगी में दिया। ये तीनों नेता एक त्रिपक्षीय हस्ताक्षर समारोह में शामिल हुए, जहां अमेरिका की मध्यस्थता में एक शांति समझौते पर दस्तखत किए गए। ट्रंप ने कहा, ”राष्ट्रपति के तौर पर मेरी सबसे बड़ी आकांक्षा दुनिया में शांति और स्थिरता लाना है। आज का यह समझौता भारत और पाकिस्तान के साथ हमारी सफलता के बाद हुआ है।” अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा, ”वे एक-दूसरे के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ रहे थे, हालात काफी गंभीर हो गए थे। लेकिन जैसा कि आप जानते हैं, एक बड़ा टकराव-शायद परमाणु युद्ध- हो सकता था, लेकिन ठीक पहले दोनों महान नेता एकसाथ आए और हालात को संभाला।” ट्रंप ने कहा कि वह व्यापार के जरिए संघर्ष सुलझा रहे हैं। उन्होंने कहा, ”मैंने भारत और पाकिस्तान के बीच मामला सुलझाया। मुझे लगता है कि इसका बड़ा कारण व्यापार था, बाकी किसी वजह से नहीं।…” उन्होंने इस कार्यक्रम में अपने बयान के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष का दो बार उल्लेख किया।

आतंकवाद पर डबल स्टैंडर्ड नहीं चलेगा… पीएम मोदी ने जिनपिंग, पुतिन के सामने ‘आतंकिस्तान’ को कैसे दी नसीहत

तियानजिन/नई दिल्ली, 01 सितंबर: पीएम मोदी ने सोमवार को चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक को संबोधित किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर दुनिया को भारत के रुख से अवगत कराया। इसके साथ ही पीएम मोदी ने आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों को भी निशाने पर लिया। पीएम मोदी ने कहा कि हमें स्पष्ट और सर्वसम्मति से कहना होगा कि आतंकवाद पर कोई भी दोहरा मापदंड स्वीकार्य नहीं है। मानवता में विश्वास को खुली चुनौती प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान पहलगाम हमले का भी जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत पिछले चार दशकों से आतंकवाद का दंश झेल रहा है। हाल ही में, हमने पहलगाम में आतंकवाद का सबसे बुरा रूप देखा। मैं उस मित्र देश के प्रति आभार व्यक्त करता हूं जो दुःख की इस घड़ी में हमारे साथ खड़ा रहा। उन्होंने कहा कि यह हमला मानवता में विश्वास रखने वाले हर देश और व्यक्ति के लिए एक खुली चुनौती थी। सुरक्षा, शांति और स्थिरता किसी भी राष्ट्र की प्रगति और विकास की नींव होते हैं। हालांकि, इन लक्ष्यों की प्राप्ति अकसर आतंकवाद और अलगाववाद जैसी गंभीर चुनौतियों के कारण बाधित होती है। आतंकवाद, विशेष रूप से, केवल व्यक्तिगत राष्ट्रों की सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि समग्र मानवता के लिए एक गंभीर चुनौती है। पहलगाम हमला मानवता में विश्वास रखने वाले हर देश और व्यक्ति को खुली चुनौती थी। ऐसे में प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या कुछ देशों द्वारा आतंकवाद को खुला समर्थन हमें स्वीकार्य हो सकता है। हमें स्पष्ट रूप से और एक स्वर में कहना होगा कि आतंकवाद पर कोई भी दोहरा मापदंड स्वीकार्य नहीं होंगे। पीएम मोदी, एससीओ समिट में स्पीच के दौरान ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कुछ देशों द्वारा आतंकवाद का खुला समर्थन हमें स्वीकार्य हो सकता है। हमें हर रूप और रंग के आतंकवाद का सर्वसम्मति से विरोध करना होगा। मानवता के प्रति यह हमारा कर्तव्य है। पीएम मोदी ने कहा कि इस वर्ष, भारत ने संयुक्त सूचना अभियानों में अग्रणी भूमिका निभाई है। आतंकवादी संगठनों से निपटने के लिए पहल की है और आतंकवाद के वित्तपोषण के विरुद्ध आवाज उठाई है। इस संबंध में दिए गए समर्थन के लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं। संप्रभुता के साथ कनेक्टिविटी पर जोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग परिषद (एससीओ) के सदस्यों के सत्र में कहा कि संप्रभुता को दरकिनार करने वाली कनेक्टिविटी विश्वास और अर्थ खो देती है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का हमेशा से मानना रहा है कि मजबूत कनेक्टिविटी न केवल व्यापार को बढ़ावा देती है, बल्कि विकास और विश्वास के द्वार भी खोलती है। उन्होंने कहा कि इसी को ध्यान में रखते हुए, हम चाबहार बंदरगाह और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे जैसी पहलों पर काम कर रहे हैं। इससे हमें अफगानिस्तान और मध्य एशिया के साथ कनेक्टिविटी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

ओली ने पार्टी नेताओं को दी चेतावनी, कहा – विद्या भंडारी के पक्ष में बोलना बंद करो

काठमांडू, 22 जुलाई : सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने पार्टी नेताओं को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि कोई नेता पूर्व राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी के पक्ष में सामने आता है तो उसे अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना होगा। पार्टी की केंद्रीय समिति की सोमवार को हुई बैठक में ओली ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने पार्टी के ऐसे नेताओं को चेतावनी दी जो लगातार पूर्व राष्ट्रपति के लिए प्रवक्ता के रूप में मीडिया में या पार्टी बैठक के बाहर बयान दे रहे हैं। केंद्रीय समिति के एक सदस्य के अनुसार, ओली ने विशेष रूप से कुछ नेताओं की ओर इशारा किया। उन्होंने कथित तौर पर ऐसे नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी। ओली ने कहा कि उन्होंने रविवार को यूएमएल पार्टी कार्यालय में भंडारी के साथ लगभग दो घंटे की बातचीत की। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति भंडारी को राजनीतिक सुझाव दिए। ओली ने कहा कि उन्होंने अभी तक इस पर कोई जवाब नहीं दिया है। ओली ने कहा कि उन्होंने भंडारी को प्रधानमंत्री आवास पर आमंत्रित किया था, लेकिन उन्होंने इसके बजाय पार्टी कार्यालय में आने पर जोर दिया, जिससे वहीं पर बातचीत हुई। ओली ने विशेष रूप से ईश्वर पोखारेल, सुरेंद्र पांडे और कर्ण बहादुर थापा जैसे वरिष्ठ नेताओं की आलोचना की। उन्होंने सवाल किया, कुछ नेताओं को उनके मुखपत्र के रूप में क्यों काम करना चाहिए? ओली ने दावा किया कि उन्हें पार्टी से अलग करने के वर्तमान प्रयास (जिन्हें ओली-मुक्त यूएमएल कहा जाता है) सफल नहीं होंगे।

नेपाल से भारत लाए जा रहे 133 किलो गांजा से भरी कार को खाई में गिराकर तस्कर फरार

काठमांडू, 22 जुलाई: नेपाल से तस्करी के लिए भारत ले जाए जा रहे 133 किलो गांजा से भरी कार को उसमें सवार कार चालक समेत तीन लोग उसे खाई में गिरा कर फरार हो गए। रौतहट जिले के पुलिस उपाधीक्षक राजन कार्की ने मंगलवार को मीडियाकर्मियों को बताया कि नियमित जांच के लिए एक कार को रोकने का संकेत दिया गया, लेकिन चालक ने कार नहीं रोकी और पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ते हुए कार लेकर वह फरार हो गया। पुलिस टीम ने कार का पीछा किया, लेकिन कार को खाई में गिराने की कोशिश कर वे फरार हो गये। कार में चालक समेत तीन लोग सवार थे। पुलिस उपाधीक्षक कार्की के मुताबिक कार सड़क किनारे करीब 25 मीटर नीचे झांझ खोला किनारे अटक गयी थी जिसे क्रेन के सहारे निकाला गया। इस गाड़ी से 133 किलो गांजा बरामद किया गया। फरार तीनों लोगों की पहचान तो नहीं हो सकी है, लेकिन चालक का लाइसेंस और गाड़ी के कागजात बरामद कर लिए गए हैं। उन्होने बताया कि बरामद गांजा को भारत में तस्करी के लिए ले जाया जा रहा था।

जयशंकर ने चीन से संबंधों को ‘सामान्य’ बनाये रखने का आग्रह किया

बीजिंग/नई दिल्ली, 14 जुलाई: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग के साथ मुलाकात में कहा कि भारत-चीन संबंधों का स्थिर और सामान्य रहना दोनों देशों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है। उन्होंने जटिल वैश्विक परिस्थितियों के मद्देनजर दोनों पड़ोसी देशों के बीच खुले विचार-विमर्श की आवश्यकता पर बल दिया। जयशंकर अपनी दो देशों की यात्रा के अंतिम चरण में सोमवार सुबह सिंगापुर से बीजिंग पहुंचे। वह शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में हिस्सा लेने के लिए चीन के तियानजिन शहर में हैं। यह उनकी पहली चीन यात्रा है, जो 2020 में पूर्वी लद्दाख की वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैन्य तनाव और उसके बाद दोनों देशों के बीच बिगड़े संबंधों के बाद हो रही है। बैठक की शुरुआत में जयशंकर ने कहा, “पिछले साल अक्टूबर में कजान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद से हमारे द्विपक्षीय संबंधों में सतत सुधार देखा गया है। मुझे उम्मीद है कि इस यात्रा के दौरान होने वाली चर्चाएं इस सकारात्मक दिशा को और मजबूती देंगी।” उन्होंने भारत-चीन राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ का भी उल्लेख किया। जयशंकर ने कहा, “कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली को भारत में व्यापक रूप से सराहा गया है। हमारे संबंधों का सामान्यीकरण दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हो सकता है।” उन्होंने आगे कहा, “वर्तमान वैश्विक परिदृश्य अत्यंत जटिल है। पड़ोसी देशों और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के रूप में, भारत और चीन के बीच खुलकर विचारों और दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।” उन्होंने यह भी कहा, “मैं इस यात्रा के दौरान ऐसी सार्थक चर्चाओं की अपेक्षा करता हूं।” गौरतलब है कि तीन सप्ताह पहले ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एससीओ के रक्षा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए चीन के किंगदाओ शहर का दौरा किया था। वर्तमान में चीन एससीओ का अध्यक्ष है और इस भूमिका में संगठन की बैठकों की मेजबानी कर रहा है।

भारत-ब्राजील हर क्षेत्र में सहयोग सुदृढ़ कर द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर पहुंचायेंगे: मोदी

ब्रासीलिया/नई दिल्ली, 09 जुलाई: भारत और ब्राजील ने हर क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करने तथा अगले पाँच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। ब्राजील की आधिकारिक यात्रा पर गये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार देर रात यहां ब्राजील के राष्ट्रपति लूला द सिल्वा के साथ मुलाकात के बाद संयुक्त वक्तव्य में यह बात कही। राष्ट्रपति लूला को भारत और ब्राजील सामरिक साझेदारी का पक्षधर बताते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों को प्रगाढ़ करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा, ‘‘आज की चर्चाओं में हमने हर क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करने पर बात की। हमने आने वाले पाँच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। ” उन्होंंने कहा कि दोनों देश मिलकर भारत-मर्कोसुर वरीय व्यापार समझौते के विस्तार पर भी काम करेंगे। श्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई पर भी दोनों देशों की सोच समान है। दोनों देश आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने तथा दोहरे मानदंडों का विरोध करने की नीति पर एकमत हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा स्पष्ट मत है कि आतंकवाद पर दोहरे मापदंडों का कोई स्थान नहीं है। हम आतंकवाद और आतंकवाद के समर्थकों का कठोर विरोध करते हैं।” प्रधानमंत्री ने ब्राजील द्वारा उन्हें सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित किये जाने पर आभार प्रकट किया और कहा कि वह इस सम्मान को भारत के प्रति ब्राजील की गहरी प्रतिबद्धता और अटूट मित्रता को समर्पित करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘आज, राष्ट्रपति द्वारा मुझे ब्राजील के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान से विभूषित किया जाना मेरे लिए ही नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतवासियों के लिए भी अत्यंत गर्व और भावुकता का पल है। मैं इसके लिए उनका, ब्राजील सरकार और ब्राजील के लोगों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।” उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग निरंतर बढ़ रहा है। पर्यावरण और स्वच्छ ऊर्जा दोनों देशों की मुख्य प्राथमिकता है। उन्होंंने कहा, “इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए आज जो समझौता किया गया है उससे हरित लक्ष्यों को को नई दिशा और गति मिलेगी। इस वर्ष ब्राजील में होने जा रही कॉप-30 बैठक के लिए मैं राष्ट्रपति लूला को शुभकामनाएं देता हूँ। ” प्रधानमंत्री ने रक्षा के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास का प्रतीक बताया और कहा कि दोनों देश अपने रक्षा उद्योगों को आपस में जोड़ने के प्रयास जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘ए आई और सुपरकंप्यूटर में हमारा सहयोग बढ़ रहा है। यह समावेशी विकास और ह्यूमन-सेंट्रिक इनोवेशन की हमारी एक जैसी सोच का प्रमाण है।” श्री मोदी ने कहा कि ब्राजील में यूपीआई को अपनाने पर भी दोनों पक्ष मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा,“ हमें डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्पेस जैसे क्षेत्रों में भारत का सफल अनुभव ब्राजील के साथ साझा करने में खुशी होगी। ” उन्होंने कहा कि कृषि और पशु-पालन क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग दशकों पुराने समय से चला आ रहा है और अब वे कृषि अनुसंधान और खाद्य प्रसंस्करण पर भी मिलकर काम करेंगे। लोगों के बीच परस्पर संपर्क को दोनों देशों के बीच संबधों का महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए उन्होंने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि बिना वीज़ा काउंटर की लम्बी लाइन के, भारत और ब्राज़ील के संबंध कार्निवल जितने रंगीन हों, फुटबाल जितने जोशीले, और सांबा की तरह दिलों को जोड़ते जाएं! इसी भावना से, हम दोनों देशों के लोगों, विशेष रूप से पर्यटकोंं, छात्रों, खिलाड़ियो और व्यवसायियों के बीच संपर्क सुगम बनाने के लिए प्रयास करेंगे।” श्री मोदी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत और ब्राज़ील ने सदैव करीबी समन्वय के साथ काम किया है। दो बड़े लोकतांत्रिक देशों के रूप में हमारा सहयोग न केवल ग्लोबल साउथ, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रासंगिक है। दोनों का मानना है कि ग्लोबल साउथ की चिंताओं और प्राथमिकताओं को वैश्विक मंचों पर रखना हमारा नैतिक दायित्व है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जब विश्व तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है तो भारत-ब्राज़ील की यह साझेदारी स्थिरता और संतुलन का एक अहम स्तंभ है। उन्होंने कहा, ‘‘हम एकमत हैं कि सभी विवादों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए।” श्री मोदी ने राष्ट्रपति लूला को भारत आने का निमंत्रण देते हुए कहा, ‘‘एक बार फिर इस सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान के लिए, और आपकी मित्रता के लिए, मैं 140 करोड़ भारतवासियों की ओर से, आपका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूँ। मैं आपको भारत यात्रा करने का निमंत्रण भी देता हूँ। ”

ब्राजील में प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की प्रस्तुति रही खास

रियो डी जेनेरियो/नई दिल्ली, 06 जुलाई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार दिवसीय यात्रा पर ब्राजील पहुंचे। इस दौरान वे 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और एक राजकीय यात्रा भी करेंगे। ब्राजील के रियो डी जेनेरियो पहुंचने पर भारतीय प्रवासी ने पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया। ब्राजील में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे पीएम मोदी का पारंपरिक नृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और देशभक्ति से भरे चित्रों से स्वागत किया गया। लोगों ने हाथों में तिरंगा लिए प्रधानमंत्री का स्वागत किया। इस स्वागत में सबसे खास बात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की प्रस्तुति रही। यह भारत की ओर से पाकिस्तान स्थित आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे एक निर्णायक अभियान पर आधारित प्रस्तुति थी, जिसे नृत्य और चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया। प्रवासी भारतीयों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत पेंटिंग और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर आधारित नृत्य के साथ किया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने स्वागत समारोह में प्रस्तुति देने वाली भारतीय महिला नर्तकियों से मुलाकात की। नर्तकियों में से एक ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी हमारे लिए बड़े भाई जैसे हैं। हमारे लिए यह बहुत गर्व की बात है कि वे यहां आए। हमारी प्रस्तुति को उन्होंने बहुत धैर्यपूर्वक देखा, हमसे बातचीत की और इसकी बहुत सराहना की। हमने अपने बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि देने और भारत माता का सम्मान करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अपनी थीम के रूप में चुना था।” बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी चार दिवसीय यात्रा पर ब्राजील पहुंचे हैं। अपनी यात्रा के दौरान, 6 और 7 जुलाई को वह रियो डी जेनेरियो में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे, उसके बाद एक राजकीय यात्रा करेंगे। यह लगभग छह दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा देश की पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। राजकीय यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ब्रासीलिया जाएंगे, जहां वे राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के साथ व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी, कृषि, स्वास्थ्य और लोगों के बीच संपर्क सहित आपसी हित के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को व्यापक बनाने पर द्विपक्षीय चर्चा करेंगे।

त्रिनिदाद एंड टोबैगो: पीएम मोदी ने राम मंदिर की प्रतिकृति और सरयू का जल प्रधानमंत्री कमला को किया भेंट

पोर्ट ऑफ स्पेन/नई दिल्ली, 04 जुलाई : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्रिनिदाद एंड टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला पर्साद-बिसेसर द्वारा आयोजित रात्रिभोज के दौरान अयोध्या के राम मंदिर की प्रतिकृति, सरयू और प्रयागराज के महाकुंभ का पवित्र जल भेंट किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत और कैरिबियाई राष्ट्र के बीच गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रिश्तों को उजागर किया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “प्रधानमंत्री कमला पर्साद-बिसेसर द्वारा आयोजित रात्रिभोज में मैंने राम मंदिर की प्रतिकृति, सरयू नदी का पवित्र जल और महाकुंभ का जल भेंट किया। ये भारत और त्रिनिदाद एंड टोबैगो के बीच गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक हैं।” उन्होंने एक अन्य पोस्ट में बताया, “रात्रिभोज में भोजन सोहारी के पत्ते पर परोसा गया, जो त्रिनिदाद एंड टोबैगो, खासकर भारतीय मूल के लोगों के लिए बहुत सांस्कृतिक महत्व रखता है। यहां त्योहारों और विशेष अवसरों पर इस पत्ते पर भोजन परोसने की परंपरा है।” पोर्ट ऑफ स्पेन में रात्रिभोज के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राणा मोहिप से मुलाकात की, जिन्होंने कुछ साल पहले महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर भारत में ‘वैष्णव जन तो’ गाया था। उन्होंने भारतीय संगीत और संस्कृति के प्रति उनके जुनून की सराहना की। इससे पहले, गुरुवार को अपनी दो दिवसीय ऐतिहासिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिनिदाद एंड टोबैगो तथा भारत के बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को साझा किया। उन्होंने एक्स पर एक अन्य पोस्ट में लिखा, “पोर्ट ऑफ स्पेन में भोजपुरी चौताल प्रदर्शन देखकर बहुत खुशी हुई। त्रिनिदाद एंड टोबैगो और भारत, खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों के बीच का संबंध अद्भुत है।” प्रधानमंत्री मोदी के आगमन पर लोगों में उत्साह दिखाई दिया और वे ढोल की थाप पर थिरकते नजर आए। इस दौरान पारंपरिक संगीत व प्रदर्शन के साथ स्थानीय और भारतीय संस्कृति का मिश्रण देखने को मिला। यह प्रधानमंत्री मोदी की 8 महीनों में कैरिबियाई क्षेत्र की दूसरी यात्रा है। इससे पहले नवंबर 2024 में उन्होंने गुयाना का दौरा किया था। यह दर्शाता है कि भारत कैरिबियाई देशों को कितना महत्व देता है और कैरिबियाई समुदाय के साथ भारत की बढ़ती साझेदारी को दर्शाता है।

भारत-घाना ने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया: मोदी

अक्कारा/नई दिल्ली, 03 जुलाई: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज अक्कारा में राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा से बातचीत के बाद कहा कि भारत और घाना ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि भारत घाना के राष्ट्र निर्माण की यात्रा में सिर्फ भागीदार ही नहीं बल्कि सह-यात्री भी है। प्रधानमंत्री मोदी ने द्विपक्षीय वार्ता के बाद अक्कारा में जुबली हाउस में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि तीन दशकों के अंतराल के बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री घाना का दौरा कर रहा है और यह उनके लिए बेहद गर्व की बात है कि उन्हें घाना आने का यह अवसर दिया गया है। उन्होंने राष्ट्रपति महामा को दिसंबर 2024 के आम चुनावों में जीत के लिए बधाई दी, जो दूसरे कार्यकाल के लिए चुने गए हैं। उन्होंने कहा कि यह जीत घाना के लोगों के उनके नेतृत्व और विजन में गहरे भरोसे को दर्शाती है। श्री मोदी ने कहा, “राष्ट्रपति महामा और मैंने अपनी द्विपक्षीय साझेदारी को ‘व्यापक साझेदारी’ के स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया है। घाना के राष्ट्र निर्माण की यात्रा में भारत न केवल भागीदार है, बल्कि सह-यात्री भी है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि भव्य जुबली हाउस, विदेश सेवा संस्थान, कोमेंडा शुगर फैक्ट्री, भारत-घाना कोफी अन्नान आईसीटी सेंटर और टेमा-पकाडन रेलवे लाइन द्विपक्षीय साझेदारी के प्रतीक हैं। द्विपक्षीय व्यापार तीन अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर गया है। भारतीय कंपनियों ने लगभग 900 परियोजनाओं में लगभग दो अरब डॉलर का निवेश किया है। श्री मोदी ने कहा, “आज, हमने अगले पांच वर्षों में अपने आपसी व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।” उन्होंने कहा कि फिनटेक के क्षेत्र में भारत घाना के साथ अपने यूपीआई डिजिटल भुगतान अनुभव को साझा करने के लिए तैयार है। इस बात पर जोर देते हुए कि विकास साझेदारी द्विपक्षीय संबंधों का एक आधारभूत स्तंभ है, उन्होंने आर्थिक पुनर्गठन की दिशा में राष्ट्रपति महामा के प्रयासों के लिए भारत के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया। भारत ने घाना के लिए आईटीईसी और आईसीसीआर छात्रवृत्ति को दोगुना करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री ने कहा, “युवाओं के लिए व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए, हम एक कौशल विकास केंद्र स्थापित करने के लिए काम करेंगे। हम राष्ट्रपति महामा के ‘फीड घाना’ कृषि कार्यक्रम में सहयोग करके खुशी महसूस कर रहे हैं। जन औषधि केंद्रों के माध्यम से, भारत-घाना के नागरिकों को सस्ती और विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने का प्रस्ताव करता है,” श्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों ने वैक्सीन उत्पादन में सहयोग पर भी चर्चा की। उन्होंने कि हम रक्षा और सुरक्षा में ‘एकजुटता के माध्यम से सुरक्षा’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ेंगे। सैन्य प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा, रक्षा आपूर्ति और साइबर सुरक्षा में सहयोग को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियां महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और खनन में सहयोग करेंगी। भारत और घाना पहले से ही अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन जैसे प्लेटफार्मों में सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि घाना के नवीकरणीय ऊर्जा प्रयासों, विशेष रूप से स्वच्छ रसोई गैस में समर्थन करने के लिए, हमने उन्हें वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। प्रधानमंत्री ने कहा, “हम दोनों ही ग्लोबल साउथ के सदस्य हैं और इसकी प्राथमिकताओं के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। हम ‘वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट’ में घाना की सकारात्मक भागीदारी के लिए उसे धन्यवाद देते हैं।” श्री मोदी ने कहा कि भारत को गर्व है कि हमारे जी-20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को जी-20 में स्थायी सदस्यता प्रदान की गई। दोनों पक्षों ने साहेल क्षेत्र सहित क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों पर भी चर्चा की। प्रधानमंत्री ने कहा, “हम इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि आतंकवाद मानवता के लिए खतरा है। हम आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई में सहयोग के लिए घाना को धन्यवाद देते हैं। हमने आतंकवाद के खिलाफ अपने सहयोग को मजबूत करने का फैसला किया है।” उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुधारों पर हमारे विचार एक जैसे हैं। हमने पश्चिम एशिया और यूरोप में चल रहे संघर्षों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। हमारा मानना है कि यह युद्ध का युग नहीं है। समस्याओं का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए किया जाना चाहिए। जीवंत भारतीय समुदाय के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि वे हमारे लोगों के बीच संबंधों में एक विशेष कड़ी हैं। भारतीय शिक्षक, डॉक्टर और इंजीनियर लंबे समय से घाना में सेवा कर रहे हैं और उन्होंने इसकी सामाजिक और आर्थिक प्रगति में सकारात्मक योगदान दिया है। श्री मोदी ने कहा, “मैं कल भारतीय समुदाय से मिलने के लिए उत्सुक हूँ।” प्रधानमंत्री ने कहा, “आप भारत के प्रिय मित्र हैं और हमारे देश से अच्छी तरह परिचित हैं। मैं आपको भारत आने का निमंत्रण देता हूँ, और मुझे आशा है कि आप हमें वहाँ आपका स्वागत करने का अवसर देंगे।” इससे पहले अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत-घाना मैत्री के मूल में हमारे साझा मूल्य, संघर्ष और समावेशी भविष्य के सपने निहित हैं। हमारे देशों के स्वतंत्रता संग्राम ने कई अन्य लोगों को प्रेरित किया है। आज भी, घाना पश्चिम अफ्रीका में एक जीवंत लोकतंत्र और अन्य देशों के लिए ‘आशा की किरण’ के रूप में खड़ा है।” प्रधानमंत्री ने गर्मजोशी से स्वागत के लिए घाना के राष्ट्रपति को धन्यवाद दिया। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति महामा प्रधानमंत्री मोदी के आगमन पर उनका स्वागत करने के लिए कोटोका अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आए थे। श्री मोदी का हवाई अड्डे पर औपचारिक स्वागत किया गया और 21 तोपों की सलामी दी गई।