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अफ़ग़ानिस्तान में भूकंप से मरने वालों की संख्या बढ़कर 500 पहुंची

काबुल, 01 सितंबर : अफगानिस्तान के पूर्वी प्रांतों में रविवार रात आए भीषण भूकंप ने तबाही मचा दी है. रिपोर्ट्स के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 500 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 1000 से अधिक लोग घायल हुए हैं. आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी बयान में बताया गया कि भूकंप का केंद्र कुनर प्रांत के हिंदू कुश क्षेत्र में था, जिसने नूरगल, सूकी, वतपुर, मानोगी और चपे-दरे जैसे दूरदराज के इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया है. स्थानीय अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि कई गांवों तक राहत और बचाव कार्यों की पहुंच अभी तक नहीं हो पाई है. रिक्टर स्कैल पर भूकंप की तीव्रता 6.0 मापी गई और इसका केंद्र जमीन से केवल 8 किलोमीटर की गहराई पर था. इसके कारण भारी तबाही की आशंका जताई जा रही है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में मलबे में दबे घरों और घायलों को बाहर निकालने की कोशिश करते लोगों की तस्वीरें देखी जा सकती हैं. एक तस्वीर में एक व्यक्ति मलबे के बीच रोते हुए नजर आ रहा है, जो इस दुखद घटना की गंभीरता को दर्शाता है. तमाम घर तबाह स्थानीय निवासियों का कहना है कि भूकंप के बाद कई झोपड़ियों और पक्के मकानों में दरारें आ गईं, जबकि कुछ पूरी तरह ढह गए. तालिबान प्रशासन के प्रवक्ता ने बताया कि राहत और बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और टूटी सड़कों के कारण टीमों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हेलिकॉप्टर और चिकित्सा सहायता मुहैया कराने की अपील की है, क्योंकि कई प्रभावित क्षेत्रों तक सड़क मार्ग से पहुंचना असंभव हो गया है. तालिबान सरकार के पास सीमित संसाधन हैं और वे संयुक्त राष्ट्र और अन्य मानवीय संगठनों से तत्काल मदद की उम्मीद कर रहे हैं. इस भूकंप ने अफगानिस्तान की पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य ढांचे को और चुनौती दी है. पिछले कुछ वर्षों में आए भूकंपों ने पहले भी इस देश को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन 2023 का 6.3 मैग्निट्यूड का भूकंप सबसे घातक माना जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि हिंदू कुश क्षेत्र का भूकृतिकीय रूप से सक्रिय होना इस तरह की आपदाओं का कारण है जहां यूरेशियन और भारतीय टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में टकराती हैं. मौजूदा स्थिति में चिकित्सा शिविरों की स्थापना और भोजन-पानी की आपूर्ति की मांग बढ़ गई है, क्योंकि कई परिवार बेघर हो गए हैं. अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस संकट पर चिंता जताई है और राहत सामग्री भेजने की तैयारी शुरू कर दी है. संयुक्त राष्ट्र के आपदा प्रबंधन विभाग ने कहा कि वे प्रभावित क्षेत्रों का आकलन करने के लिए जल्द ही अपनी टीम भेजेंगे.

पीएम मोदी से मिलने के बाद जिनपिंग ने कहा, ‘ड्रैगन और हाथी अब आ जाएं साथ’

तियानजिन, 31 अगस्त : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद एक मंच पर मिले। दोनों के बीच करीब 50 मिनट तक बातचीत हुई। द्विपक्षीय वार्ता में कैलाश मानसरोवर यात्रा, सीमा समझौते और दोनों देशों के बेहतर होते रिश्ते पर बातचीत हुई। दोनों देशों के व्यावसायिक संबंधों को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया। इस दौरान जिनपिंग ने कहा कि पीएम मोदी से मिलकर खुशी हुई। जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों के लिए यह सही है कि ऐसे साझेदार बनें जो एक-दूसरे की सफलता में सहायक हों। ड्रैगन और हाथी एक साथ आएं। चीन और भारत दो प्राचीन सभ्यताएं हैं। हम विश्व के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं। हम ग्लोबल साउथ के भी अहम सदस्य हैं। हम दोनों अपने लोगों की भलाई के लिए जरूरी सुधार लाने और मानव समाज की प्रगति को बढ़ावा देने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी निभाते हैं। इससे पहले पीएम मोदी ने गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार जताते हुए कहा, “मैं आपका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। पिछले वर्ष कजान में हमारी बहुत ही सार्थक चर्चा हुई थी। हमारे संबंधों को एक सकारात्मक दिशा मिली। सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद, शांति और स्थिरता का माहौल बना हुआ है। सीमा मुद्दे पर हमारे विशेष प्रतिनिधियों ने समझौता किया है। कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हुई है। दोनों देशों के बीच डायरेक्ट फ्लाइट भी फिर से शुरू की जा रही है।” वहीं, पीएम मोदी ने ये भी कहा कि हमारे सहयोग से दोनों देशों के 2.8 बिलियन लोगों के हित जुड़े हुए हैं। इससे पूरी मानवता के कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त होगा। परस्पर विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर हम अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

भारत और जापान के क्षेत्रीय स्तर पर सहयोग की आवश्यकता: प्रधानमंत्री मोदी

टोक्यो/नई दिल्ली, 30 अगस्त : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जापान के विभिन्न प्रांतों के गवर्नरों से मुलाकात की और इस बात पर बल दिया कि भारत और जापान के बीच संबंधों को अब राज्यों और प्रांतों के स्तर पर भी विस्तार देना आवश्यक है, ताकि दोनों देश विकास के पथ पर एक-दूसरे के साझीदार बन सकें। अपनी जापान यात्रा के दूसरे दिन, श्री मोदी ने टोक्यो में 16 प्रांतों के गवर्नरों के साथ गहन चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत के राज्यों और जापान के प्रांतों के बीच सहयोग भारत-जापान संबंधों का एक महत्वपूर्ण आधार है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “आज सुबह टोक्यो में जापान के 16 प्रांतों के गवर्नरों के साथ उपयोगी बातचीत हुई। क्षेत्रीय स्तर पर सहयोग भारत और जापान की दोस्ती का एक मजबूत स्तंभ है। इसीलिए, कल 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में इस दिशा में एक विशेष पहल शुरू की गई। व्यापार, नवाचार, उद्यमिता, स्टार्टअप, प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में असीमित संभावनाएँ मौजूद हैं।” गवर्नरों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जापान के बीच आधुनिक संबंध दोनों देशों की प्राचीन सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत से प्रेरणा लेते हुए निरंतर प्रगति कर रहे हैं। उन्होंने भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी की गति पर प्रकाश डालते हुए इस बात पर जोर दिया कि अब समय है कि दोनों देशों के बीच संबंधों को दिल्ली और टोक्यो तक सीमित न रखकर राज्यों और प्रांतों के बीच नए सिरे से मजबूत किया जाए। इस संदर्भ में उन्होंने 15वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में शुरू की गई क्षेत्रीय साझेदारी पहल का उल्लेख किया, जो व्यापार, प्रौद्योगिकी, पर्यटन, कौशल विकास, सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देगी। उन्होंने जापान के गवर्नरों और भारत के राज्य सरकारों से इस पहल का अधिकतम लाभ उठाने और विनिर्माण, तकनीक, नवाचार, गतिशीलता, अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे, स्टार्टअप और लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) जैसे क्षेत्रों में साझेदारी स्थापित करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि जापान के प्रत्येक प्रांत की अपनी अनूठी आर्थिक और तकनीकी विशेषताएँ हैं, और उसी तरह भारत के राज्यों की भी विविधतापूर्ण क्षमताएँ हैं। उन्होंने गवर्नरों को भारत की विकास यात्रा में भागीदार बनने के लिए आमंत्रित किया और दोनों देशों द्वारा किए गए युवा व कौशल आदान-प्रदान के वादों में योगदान देने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने जापानी तकनीक को भारतीय प्रतिभा के साथ जोड़कर सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त करने की बात कही। गवर्नरों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत-जापान के बीच व्यापार, शिक्षा, संस्कृति और जन-जन के बीच संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए क्षेत्रीय सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। गवर्नरों के साथ इस मुलाकात के बाद, प्रधानमंत्री मोदी जापान के प्रधानमंत्री के साथ सेमीकंडक्टर हब के रूप में प्रसिद्ध शहर सेन्डाई के लिए रवाना हुए।

मोदी ने जापान के प्रधानमंत्री के साथ बुलेट ट्रेन में की यात्रा

टोक्यो/नई दिल्ली, 30 अगस्त : जापान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम शिगेरु इशिबा के साथ बुलेट ट्रेन का भी लुत्फ उठाया। साथ ही उन्होंने बुलेट ट्रेन ड्राइविंग की ट्रेनिंग लेने वाले भारतीयों से भी मुलाकात की। जापानी प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर तस्वीर शेयर करते हुए कहा, प्रधानमंत्री मोदी के साथ सेंदाई की यात्रा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अल्फा-एक्स ट्रेन को भी देखा और जानकारी ली। बता दें कि भारतीय ड्राइवर जेआर ईस्ट के साथ इस समय ट्रेनिंग कर रहे हैं। जेआर ईस्ट जापान की एक रेलवे कंपनी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्लैटफॉर्म पर ही उनसे मुलाकात की और फोटो भी खिंचवाईं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को जापान के मियागी प्रांत के सेंडाई में स्थित एक सेमीकंडक्टर संयंत्र गए। इससे पहले प्रधानमंत्री ने जापान के 16 प्रांतों के गवर्नर से मुलाकात की और भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी के तहत ‘राज्य-प्रांत सहयोग’ को मजबूत किए जाने का आह्वान किया। जापान के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने एक बयान में यह जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘तोक्यो में आज सुबह जापान के 16 प्रांतों के गवर्नर के साथ बातचीत की। राज्य-प्रांत सहयोग भारत-जापान मैत्री का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यही कारण है कि कल 15वें वार्षिक भारत-जापान शिखर सम्मेलन के दौरान इस पर अलग से एक पहल की गई।’ उन्होंने कहा, ‘व्यापार, नवोन्मेष, उद्यमिता आदि क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। ‘स्टार्टअप’, प्रौद्योगिकी और एआई जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्र भी लाभकारी हो सकते हैं।’ विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, मोदी ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों पर आधारित भारत-जापान संबंध निरंतर मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि तोक्यो और नयी दिल्ली पर परंपरागत रूप से ध्यान केंद्रित करने से आगे बढ़कर राज्य-प्रांत संबंधों को नए सिरे से बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य-प्रांत साझेदारी पहल व्यापार, प्रौद्योगिकी, पर्यटन, कौशल, सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में सहयोग को बढ़ावा देगी। प्रधानमंत्री ने जापान के विभिन्न प्रांतों के गवर्नर और भारतीय राज्य सरकारों से विनिर्माण, गतिशीलता, अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे, नवोन्मेष, ‘स्टार्ट-अप’ और लघु व्यवसायों में सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया।

मिनियापोलिस, 28 अगस्त : अमेरिका के मिनियापोलिस में बुधवार को एक कैथोलिक चर्च मेंy हुई गोलीबारी की घटना ने लोगों में दहशत फैला दी है। यह घटना उस समय हुई जब बच्चे स्कूल की प्रार्थना सभा में शामिल थे। हमलावर ने चर्च की खिड़कियों से राइफल से गोलियां चलाईं। इस घटना में 8 और 10 साल के दो बच्चों की मौत हो गई और 17 लोग घायल हो गए। पुलिस के मुताबिक, हमलावर ने बाद में खुद को गोली मार ली। इस घटना के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आदेश दिया कि मिनियापोलिस के कैथोलिक स्कूल में हुई सामूहिक गोलीबारी के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए 31 अगस्त 2025 को सूर्यास्त तक वाइट हाउस और देश भर की सभी सार्वजनिक इमारतों पर अमेरिकी झंडे आधे झुके रहेंगे। वाइट हाउस की घोषणा में कहा गया है कि मैं आदेश देता हूं कि संयुक्त राज्य अमेरिका का ध्वज वाइट हाउस, सभी सार्वजनिक भवनों, सैन्य चौकियों, नौसैनिक स्टेशनों, कोलंबिया जिले में संघीय सरकार के नौसैनिक जहाजों और संयुक्त राज्य अमेरिका व उसके क्षेत्रों पर 31 अगस्त 2025 को सूर्यास्त तक आधा झुका रहेगा। ट्रंप ने दुनिया भर के सभी अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में भी ध्वज को आधा झुकाने का निर्देश दिया। घोषणा में आगे कहा गया कि सभी अमेरिकी दूतावासों, वाणिज्य दूतावासों और विदेशों में स्थित अन्य सुविधाओं, जिनमें सैन्य सुविधाएं, नौसैनिक जहाज और स्टेशन शामिल हैं, पर ध्वज को समान अवधि के लिए आधा झुकाया जाएगा। ट्रंप ने व्यक्त की संवेदना वहीं, इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने पहले कहा था कि उन्हें इस दुखद गोलीबारी के बारे में पूरी जानकारी दे दी गई है और एफबीआई ने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि मिनियापोलिस, मिनेसोटा में हुई इस दुखद गोलीबारी के बारे में मुझे पूरी जानकारी दे दी गई है। एफबीआई तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गई है। वाइट हाउस इस घटना पर नजर बनाए हुए है। साथ ही ट्रंप ने कहा कि मेरे साथ मिलकर इसमें शामिल सभी लोगों के लिए प्रार्थना करें। मिनियापोलिस स्कूल गोलीबारी दरअसल, मिनियापोलिस के एक कैथोलिक स्कूल में बुधवार सुबह एक हमलावर ने प्रार्थना सभा में शामिल बच्चों पर गोलीबारी की, जिसमें 8 और 10 साल के दो बच्चों की मौत हो गई और 17 अन्य घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, हमलावर ने बाद में खुद को गोली मार ली, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। मिनियापोलिस पुलिस प्रमुख ब्रायन ओ’हारा ने बताया कि हमलावर की उम्र लगभग 20 साल थी और उसके पास राइफल, शॉटगन और पिस्तौल थी। गोलीबारी के समय बच्चे स्कूल में अपने पहले हफ्ते के उत्सव के लिए एकत्रित थे। ओ’हारा ने बताया कि बेंच पर बैठे दो छोटे बच्चे मारे गए। 24 घंटे में चौथी गोलीबारी पुलिस प्रमुख ब्रायन ओ’हारा के अनुसार, हमलावर का नाम रॉबिन वेस्टमैन था, जिसकी उम्र 20 साल थी और उसका कोई बड़ा आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। हमलावर ने चर्च के कुछ दरवाजों को लकड़ी से बंद किया था और वहां एक धुआं बम मिला, लेकिन कोई विस्फोटक नहीं। मिनियापोलिस के मेयर जैकब फ्रे ने कहा कि यह घटना बच्चों के परिवारों और पूरे शहर के लिए अत्यंत दुखद है। वहीं, पास में रहने वाले बिल बिएनमैन ने बताया कि उन्होंने लगभग चार मिनट तक 50 गोलियों की आवाज सुनी। मिनियापोलिस में 24 घंटे से कम समय में यह चौथी गोलीबारी की घटना है। मंगलवार दोपहर से तीन अन्य गोलीबारी की घटनाएं हो चुकी हैं। मंगलवार दोपहर 1:30 बजे फिलिप्स इलाके में हुई गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और छह लोग घायल हुए थे। पुलिस प्रमुख ब्रायन ओ’हारा ने क्या कहा? ब्रायन ओ’हारा ने स्थानीय मीडिया को बताया कि यह घटना अत्यंत परेशान करने वाली थी। मंगलवार दोपहर तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी। मंगलवार रात 8 बजे दूसरी गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक अन्य घायल हुआ। बुधवार सुबह 2 बजे तीसरी गोलीबारी में एक और व्यक्ति की मौत हो गई। अभी तक इन गोलीबारी की घटनाओं के आपस में संबंधित होने का कोई सबूत नहीं मिला है। मामले की जांच जारी है।

जयशंकर ने द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा के लिए रूसी विदेश मंत्री लावरोव से मुलाकात की

मॉस्को/नई दिल्ली, 21 अगस्त : विदेश मंत्री एस जयशंकर ने द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा करने और वर्ष के अंत में होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन की तैयारी के लिए बृहस्पतिवार को अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा, ”आज की बैठक ने हमें न केवल अपने राजनीतिक संबंधों पर चर्चा करने का, बल्कि हमारे द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करने का भी मौका दिया है। इसलिए, मैं राजनीति, व्यापार, आर्थिक निवेश, रक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर विचारों का आदान-प्रदान तथा बेशक लोगों के बीच संपर्क की आशा करता हूं।” उन्होंने कहा, ”हमारे नेता पिछले साल जुलाई में 22वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए मिले थे, और उसके बाद कजान में मिले थे। अब हम साल के अंत में होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने हमेशा हमें हमारी विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन किया है” रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्ष बैठक के दौरान द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के वर्तमान और भविष्य के अवसरों पर विशेष ध्यान देंगे। मंत्रालय ने कहा, ”बैठक का एजेंडा परिवहन, साजोसामान, बैंकिंग और वित्तीय संपर्कों और श्रृंखलाओं को सुगम बनाने पर केंद्रित होगा जो बैरी देशों के किसी भी प्रतिकूल दबाव से मुक्त होंगे, साथ ही परस्पर समझौतों में राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग को भी बढ़ाएंगे।” इसने कहा कि परिवहन, ऊर्जा, कृषि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना भी एजेंडे में होगा। जयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ (शुल्क) दोगुना कर कुल 50 प्रतिशत कर दिए जाने के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव पैदा हो गया है। इस टैरिफ में रूसी कच्चा तेल खरीदने पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है। नयी दिल्ली में, विदेश मंत्रालय ने जयशंकर की मॉस्को यात्रा पर कहा, ”इस यात्रा का उद्देश्य दीर्घकालिक और वक्त की कसौटी पर कसी गई भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है।” जयशंकर और लावरोव के यूक्रेन में शांति स्थापित करने के लिए ट्रंप प्रशासन की नवीनतम पहल पर भी चर्चा करने की उम्मीद है।

जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय नेताओं का जताया आभार

वाशिंगटन/कीव, 19 अगस्त : यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उन सभी यूरोपीय नेताओं को धन्यवाद दिया है, जो सोमवार को रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध का समाधान निकालने के लिए वाशिंगटन पहुंचे थे। जेलेंस्की ने मंगलवार को सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “आज वाशिंगटन में महत्वपूर्ण वार्ता हुई। हमने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ कई मुद्दों पर चर्चा की। यह एक लंबी और विस्तृत बातचीत थी, जिसमें युद्ध की स्थिति और शांति स्थापित करने के हमारे कदमों पर चर्चा शामिल थी। यूरोपीय नेताओं और संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के साथ भी कई बैठकें हुईं।” उन्होंने लिखा, “हमने सुरक्षा गारंटी पर चर्चा की। यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, युद्ध समाप्त करने की दिशा में एक प्रारंभिक बिंदु। हम इन गारंटियों का समर्थन करने और उनका हिस्सा बनने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका की सराहना करते हैं। आज हमारे बच्चों की वापसी और रूस द्वारा बंदी बनाए गए युद्धबंदियों और नागरिकों की रिहाई पर बहुत ध्यान दिया गया। हम इस पर काम करने के लिए सहमत हुए। अमेरिकी राष्ट्रपति ने नेताओं के स्तर पर एक बैठक का भी समर्थन किया। संवेदनशील मुद्दों को सुलझाने के लिए ऐसी बैठक आवश्यक है।” यूक्रेनी राष्ट्रपति ने लिखा, “मैं राष्ट्रपति ट्रंप को निमंत्रण के लिए और आज की हमारी बैठक के लिए धन्यवाद देता हूं। मैं उन सभी नेताओं का भी धन्यवाद करता हूं, जो आज हमारे साथ थे- इमैनुएल मैक्रों, कीर स्टारमर, फ्रेडरिक मर्ज, जियोर्जिया मेलोनी, अलेक्जेंडर स्टब, उर्सुला वॉन डेर लेयेन, मार्क रूटे। आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया, जो यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच सच्ची एकता का प्रदर्शन था। नेता व्यक्तिगत रूप से यूक्रेन का समर्थन करने और उन सभी बातों पर चर्चा करने आए, जो हमें वास्तविक शांति, एक विश्वसनीय सुरक्षा ढांचे के करीब लाएंगी, जो यूक्रेन और पूरे यूरोप की रक्षा करेगी। हम अपना काम जारी रखते हैं, उन सभी सहयोगियों के साथ समन्वय करते हैं, जो इस युद्ध को गरिमा के साथ समाप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। मैं उन सभी का धन्यवाद करता हू, जो मदद कर रहे हैं।” यूक्रेन-रूस युद्ध की समाप्ति पर समझौता करने के लिए 15 अगस्त को अलास्का में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बैठक हुई थी। इस बैठक के बाद वाशिंगटन में अमेरिका-यूक्रेन के राष्ट्रपतियों और यूरोपीय नेताओं के बीच सोमवार को हुई बैठक अहम है। बैठक के बाद युद्ध के समाधान का रास्ता निकल सकता है। ट्रंप ने जेलेंस्की और पुतिन के बीच अगली बैठक कराने की तैयारियों की बात की है, जिसके बाद अमेरिका-रूस-यूक्रेन में त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की जाएगी।

नेपाल के राष्ट्रपति से भारतीय विदेश सचिव ने की मुलाकात, द्विपक्षीय मुद्दों पर हुई चर्चा

काठमांडू, 17 अगस्त: नेपाल के राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल से भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने रविवार को शिष्टाचार मुलाकात की है। राष्ट्रपति भवन शीतल निवास में हुई इस मुलाकात के दौरान द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा होने की जानकारी दी गई है। राष्ट्रपति पौडेल ने विश्वास व्यक्त किया कि नेपाल और भारत के बीच संबंध और भी प्रगाढ़ होंगे। उन्होंने कहा कि नेपाल-भारत संबंध अनादि काल से चले आ रहे हैं और यह अनंत काल तक चलता रहेगा। उन्होंने भारत की ओर से नेपाल के चौतरफा विकास के लिए किए जा रहे सतत सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रपति पौडेल ने कहा कि पारस्परिक लाभ और समृद्धि के लिए दोनों देशों के बीच मैत्री और सहयोग को और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि का आधुनिकीकरण, बुनियादी ढांचे का विकास, जल विद्युत, व्यापार, निवेश, पर्यटन और मानव संसाधन विकास नेपाल की प्राथमिकताएं हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल सरकार की कई योजनाओं के अलावा ऊर्जा, कृषि और पर्यटन जैसी प्राथमिकताओं पर भी भारत काम करने को तैयार है। इन परियोजनाओं को जल्द पूरा करने पर आपसी सहमति बनी है।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में बाढ़ का कहर, मृतकों का आंकड़ा 300 के पार

इस्लामाबाद, 16 अगस्त : पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में हुई बारिश ने तबाही मचा दी है। कई दिनों से हो रही मूसलधार बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने अब तक 300 से अधिक लोगों की जान ले ली है। प्रांतीय अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (पीडीएमए) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अचानक आई बाढ़ में 307 लोग मारे गए, जिनमें से बुनेर में कम से कम 184 लोगों की मौत हुई। शांगला में 36 लोगों की मौत हुई, जबकि मनसेहरा में 23, स्वात में 22, बाजौर में 21, बट्टाग्राम में 15, लोअर दीर में पांच, जबकि एबटाबाद में एक बच्चा डूब गया। शुक्रवार को आई विनाशकारी बाढ़ ने सड़कों, पुलों, इमारतों और बिजली प्रतिष्ठानों सहित बुनियादी ढांचे को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने कहा कि बाढ़ के दौरान लापता हुए लोगों की संख्या का पता पानी कम होने के बाद ही चल पाएगा। 21 अगस्त तर भारी बारिश की संभावना पीडीएमए ने नुकसान का आकलन जारी रखते हुए बताया कि सात घर नष्ट हो गए और 38 क्षतिग्रस्त हो गए, जिनमें से ज्यादातर स्वात जिले में हैं। पीडीएमए ने आगे बताया कि तीन स्कूल नष्ट हो गए और तीन अन्य क्षतिग्रस्त हो गए। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि प्रांत के विभिन्न हिस्सों में 21 अगस्त तक बारिश जारी रहेगी। एक दिन के शोक की घोषणा खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने शनिवार को एक दिन के शोक की घोषणा की है। इसमें बचाव अभियान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हुए एमआई-17 हेलीकॉप्टर के चालक दल के पांच सदस्यों को श्रद्धांजलि दी गई, जो शहीद हो गए। बुनेर जिले में आपातकाल घोषित अचानक आई बाढ़ के बाद बुनेर जिले में बचाव दल की 1122 टीमों ने 300 स्कूली बच्चों समेत 2,071 फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। उपायुक्त काशिफ कय्यूम ने बताया कि आपदा प्रभावित इलाकों में राहत कार्य जारी रहने के कारण पूरे जिले में आपातकाल घोषित कर दिया गया है। पर्यटकों के आने पर लगा प्रतिबंध मनसेहरा में, पुलिस ने कघन घाटी के ऊपरी इलाकों में फंसे सात पर्यटकों को बचाया। वे सिमिक्सर झील घूमने आए थे, लेकिन बारिश और भूस्खलन के कारण फंस गए। पूरे दिन जिले में बारिश होती रही, जिससे सिंधु, सिरेन और कुनहर नदियां और उनकी सहायक नदियां खतरनाक रूप से उफान पर आ गईं। जिला प्रशासन ने सिरेन घाटी में पर्यटकों के आने पर प्रतिबंध लगा दिया है। सिंधु नदी में जल स्तर बढ़ने के कारण स्थानीय अधिकारियों द्वारा उचार नाला क्षेत्र में काराकोरम राजमार्ग पर आवाजाही प्रतिबंधित करने के बाद खैबर पख्तूनख्वा और गिलगित-बाल्टिस्तान के बीच यात्रा करने वाले यात्री और पर्यटक ऊपरी कोहिस्तान में फंस गए। एबटाबाद शहर की सड़कें हुई जलमग्न एबटाबाद शहर बुरी तरह प्रभावित हुआ, लगभग सभी मुख्य सड़कें जलमग्न हो गईं, जिससे बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए। पीएमए काकुल रोड, मीरपुर मंडियन रोड, सप्लाई रोड, काराकोरम हाईवे, सेठी मस्जिद रोड, इकबाल रोड, बांदा दलाजक, बांदा खैर अली खान रोड, त्रकाना और सिएना लैबोरेटरी के पास लिंक रोड सहित प्रमुख सड़कें जलमग्न हो गईं। निचले दीर में बाढ़ के पानी से बिजली हुई ठप निचले दीर के कंबट और शाही इलाकों के दूसरी तरफ पानी का बहाव तेज होने के कारण शाही इलाके में 25 से ज्यादा पर्यटक और उनके वाहन फंस गए। फ्रंटियर कोर 181 विंग, रेस्क्यू 1122 और जिला प्रशासन के जवानों ने उन्हें बाहर निकाला। बाढ़ का पानी 132 किलोवाट ग्रिड स्टेशन में घुस गया, जिससे 41 फीडर ट्रिप हो गए और पूरे क्षेत्र में बिजली का प्रसारण पूरी तरह ठप हो गया। मालम जब्बा को बिजली आपूर्ति करने वाला फीडर भी जलमग्न हो गया, जिससे भारी नुकसान हुआ। अचानक आई बाढ़ में कई बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर भी बह गए। बिजली आपूर्ति बहाल करने के प्रयास जारी संघीय ऊर्जा मंत्री अवैस अहमद लघारी के निर्देश पर, पेशावर इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी ने बिजली आपूर्ति बहाल करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। कंपनी ने पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की है और क्षेत्रीय कार्यों में सहयोग के लिए ट्रांसफार्मर, खंभे, केबल और भारी मशीनें भेजी हैं।

पुतिन के साथ बैठक में बहुत कुछ हुआ, पर कोई समझौता नहीं किया : ट्रंप

एंकोरेज, 16 अगस्त: अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अलास्का के एंकोरेज में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी बहुत ही उपयोगी बैठक हुई, लेकिन शिखर सम्मेलन यूक्रेन संकट पर किसी समझौते के बिना समाप्त हो गया। दोनों राष्ट्रपतियों ने अमरीकी राज्य अलास्का के सबसे अधिक आबादी वाले शहर एंकोरेज में संयुक्त बेस एल्मेंडोर्फ-रिचर्डसन में अपनी वार्ता समाप्त करने के बाद एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन किया। श्री ट्रंप ने कहा कि वे कई बिंदुओं पर सहमत हुए हैं तथा उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने कुछ प्रगति की है, हालांकि कोई समझौता नहीं हो पाया है। श्री पुतिन ने कहा कि वह इस बात से सहमत हैं कि यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए तथा श्री ट्रंप के साथ उनका समझौता यूक्रेन में शांति का मार्ग प्रशस्त करेगा। मंच पर लगभग 10 मिनट तक एक-दूसरे के साथ खड़े होकर दोनों नेताओं ने संकेत दिया कि आमने-सामने की बातचीत में प्रगति हुई है, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हुआ है। श्री पुतिन ने कहा कि वार्ता आपसी सम्मान के रचनात्मक माहौल में हुई और राष्ट्राध्यक्षों के बीच व्यक्तिगत बैठक लंबे समय से अपेक्षित थी। श्री पुतिन ने कहा कि जो कुछ भी हो रहा है वह हमारे लिए एक त्रासदी और एक भयानक घाव है और रूस इसे समाप्त करने में ईमानदारी से दिलचस्पी रखता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संघर्ष के प्राथमिक कारणों को को समाप्त करने की कोशिश की जानी चाहिए तथा यूक्रेन एवं यूरोपीय देशों को चेतावनी दी कि वे कार्यों में बाधा न डालें। श्री पुतिन ने आशा व्यक्त किया कि यह बैठक न केवल यूक्रेनी मुद्दे के समाधान के लिए एक शुरुआत होगी बल्कि रूस और अमेरिका के बीच व्यावसायिक और व्यावहारिक संबंधों की पुन: प्राप्ति में भी सहायक होगी। उन्होंने कहा कि निवेश और व्यापार में रूस-अमेरिका सहयोग की अपार संभावनाएं हैं, क्योंकि दोनों देश व्यापार, डिजिटल, उच्च तकनीक और अंतरिक्ष अन्वेषण में एक-दूसरे को बहुत कुछ दे सकते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने वार्ता को अत्यंत उत्पादक बताया और कहा कि बड़ी प्रगति हुई है। श्री ट्रंप ने कहा कि कई बिंदुओं पर सहमति बनी है और वहां पहुंचने की बहुत अच्छी संभावना है। श्री ट्रंप ने कहा कि वह जल्द ही यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं से बात करेंगे। इससे पहले यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि ट्रंप-पुतिन की मुलाकात त्रिपक्षीय वार्ता का मार्ग प्रशस्त करेगी। यह बैठक लगभग तीन घंटे तक चली और 2021 के बाद से दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के बीच पहली आमने-सामने की मुलाकात थी। दोनों नेताओं ने संवाददाता सम्मेलन किया लेकिन पत्रकारों के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। दोनों नेता अपने-अपने गंतव्यों के लिए रवाना हो गए और यह तुरंत पता नहीं चल पाया है कि बैठक में किसी अन्य मुद्दे पर चर्चा हुई या नहीं। इससे पहले दोनों नेता उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के साथ अपनी महत्वपूर्ण बैठक के लिए अलास्का पहुंचे। राष्ट्रपति पुतिन के साथ उनके विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव, रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव, वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव और विदेशी निवेश एवं आर्थिक सहयोग पर विशेष दूत किरिल दिमित्रिएव शामिल थे। अमरीकी प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री मार्को रुबियो, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट, वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक, सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और शांति मिशन के लिए विशेष दूत स्टीव विटकॉफ शामिल थे। युद्ध खत्म करने के लिए तैयार यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने वार्ता से पहले कहा कि यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए यथासंभव सकारात्मक रूप से काम करने के लिए तैयार है। श्री ज़ेलेंस्की ने कहा कि हमें अमरीका से एक मज़बूत रुख़ की उम्मीद है। सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि रूस अमेरिकी ताकत को कितना महत्व देता है। रूस को युद्ध समाप्त करना होगा। हत्याएं बंद होनी चाहिए। नेताओं की एक बैठक ज़रूरी है कम से कम यूक्रेन, अमरीका और रूसी पक्ष की और इसी तरह के प्रारूप में प्रभावी निर्णय संभव हैं। सुरक्षा की गारंटी ज़रूरी है। स्थायी शांति बहुत आवश्यक है।