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ब्राउन यूनिवर्सिटी में फाइनल एग्जाम के दौरान फायरिंग, दो की मौत, आठ घायल

प्रोविडेंस (रोड आइलैंड): अमेरिका की प्रतिष्ठित ब्राउन यूनिवर्सिटी में फाइनल एग्जाम के दौरान उस वक्त अफरातफरी मच गई, जब इंजीनियरिंग बिल्डिंग में एक शख्स ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी। इस हमले में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत कैंपस को लॉकडाउन कर दिया। पुलिस और आपातकालीन सेवाएं मौके पर पहुंचीं और इमारत को खाली कराकर तलाशी अभियान शुरू किया गया। पुलिस के अनुसार, हमलावर वारदात को अंजाम देने के बाद फरार हो गया, जिसकी तलाश के लिए व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन ने छात्रों और कर्मचारियों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बयान जारी कर घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है और कहा है कि पीड़ितों और उनके परिवारों को हर संभव सहायता दी जाएगी। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है और हमले के कारणों का पता लगाने में जुटी है। कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, जबकि अगली सूचना तक सभी परीक्षाएं और शैक्षणिक गतिविधियां स्थगित कर दी गई हैं।

अमेरिका में ट्रंप के टैरिफ फैसले पर उठे सवाल, तीन सांसदों ने भारत से 50% टैक्स हटाने की मांग की

वॉशिंगटन, 13 दिसंबर: भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के बाद अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति को लेकर विरोध तेज हो गया है। अमेरिकी संसद में तीन सांसदों ने एक प्रस्ताव पेश कर भारत पर लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ को हटाने की मांग की है। सांसदों का कहना है कि यह फैसला न केवल भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं और उद्योगों पर भी अतिरिक्त बोझ डाल रहा है। प्रस्ताव पेश करने वाले सांसदों ने तर्क दिया कि भारत अमेरिका का एक प्रमुख रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है। ऐसे में उस पर अत्यधिक टैरिफ लगाना दीर्घकालिक हितों के खिलाफ है। उनका कहना है कि इस कदम से दोनों देशों के बीच आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है और कई अमेरिकी कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। सांसदों ने यह भी आरोप लगाया कि टैरिफ नीति का सीधा असर आम अमेरिकी नागरिकों पर पड़ रहा है, क्योंकि आयातित वस्तुएं महंगी हो रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो इसका असर रोजगार और बाजार की स्थिरता पर भी पड़ सकता है। उधर, राजनीतिक गलियारों में इस प्रस्ताव को ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीति के खिलाफ बढ़ती असहमति के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ को लेकर अमेरिका के भीतर यह विरोध आने वाले समय में और तेज हो सकता है।

पुतिन से मुलाकात के लिए 40 मिनट इंतजार, गुस्से में बंद कमरे की मीटिंग में घुस गए शहबाज

तुर्कमेनिस्तान में अंतरराष्ट्रीय फोरम के दौरान कूटनीतिक माहौल में हंगामा तुर्कमेनिस्तान में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय फोरम के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक असहज स्थिति पैदा हो गई। रिपोर्टों के अनुसार, शहबाज शरीफ पुतिन से मुलाकात के लिए करीब 40 मिनट तक इंतजार करते रहे। जब मुलाकात तय समय पर नहीं हुई, तो बताया जाता है कि शहबाज झुंझलाहट में पुतिन की बंद कमरे में चल रही मीटिंग में पहुंच गए। सूत्रों के मुताबिक, कमरे में पहले से ही एक हाई-लेवल मीटिंग चल रही थी, जिसमें बिना अनुमति प्रवेश करने से माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया। सुरक्षा अधिकारियों ने स्थिति को संभाला, जिसके बाद दोनों नेताओं के बीच संक्षिप्त बातचीत हुई। हालांकि आधिकारिक बयान में इस घटना का ज़िक्र नहीं किया गया है, लेकिन डिप्लोमैटिक गलियारों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान की ओर से रूस के साथ संवाद बढ़ाने की कोशिश की जा रही थी, जबकि रूसी पक्ष अपने तय शेड्यूल में व्यस्त था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना दोनों देशों के संबंधों में मौजूद असंतुलन और पाकिस्तान की बढ़ती कूटनीतिक चुनौतियों को उजागर करती है।

रूस-यूक्रेन युद्ध से भड़केगी तीसरी विश्व युद्ध की आग? ट्रंप की कड़ी चेतावनी

वॉशिंगटन, 12 दिसंबर: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर गंभीर आशंका जताते हुए कहा है कि यह संघर्ष दुनिया को थर्ड वर्ल्ड वॉर की ओर धकेल सकता है। ट्रंप ने दावा किया कि पिछले एक महीने में इस युद्ध में 25 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जिनमें अधिकांश सैनिक थे। ट्रंप ने कहा कि हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और अगर वैश्विक स्तर पर इसे रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह संघर्ष अपने सबसे भयावह रूप में सामने आ सकता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि जल्दी से जल्दी कूटनीतिक समाधान तलाशा जाए। राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी चेतावनी मौजूदा तनाव की गंभीरता को रेखांकित करती है और दुनिया भर के देशों के लिए यह समय सजग होने का है।

शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर फिर ‘बेतुकी नौटकी’ की आतंकवाद का महिमा मंडन किया: भारत

संयुक्त राष्ट्र/नई दिल्ली, 27 सितंबर : संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 80वें सत्र में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण पर भारत ने जोरदार जवाब दिया है। भारत ने पाकिस्तान को “आतंकवाद का निर्यातक” बताते हुए उनके “जीत” के दावों पर व्यंग्य कसा। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने कहा, “अगर बर्बाद रनवे और जले हुए हैंगर जीत जैसे लगते हैं, जैसा कि उनके प्रधानमंत्री ने दावा किया, तो पाकिस्तान इसका आनंद ले सकता है।” भारत ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की सेना ने ही संघर्ष रोकने की ‘‘अपील की’’ थी और दिल्ली तथा इस्लामाबाद के बीच किसी भी मसले में किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। इससे पहले शरीफ ने अपने भाषण में भारत के खिलाफ जीत का दावा किया था। इस पर भारत ने करारा जवाब देते हुए पाकिस्तान के खूब मजे लिए। शहबाज शरीफ का झूठ से भरा भाषण शुक्रवार को यूएनजीए के सामान्य बहस सत्र में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत पर “अकारण आक्रमण” का आरोप लगाया। उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” का जिक्र करते हुए दावा किया कि पाकिस्तानी वायुसेना ने “उड़ान भरी और सात भारतीय जेट विमानों को मलबे में बदल दिया।” शरीफ ने कश्मीर मुद्दे को उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान कश्मीरियों के साथ खड़ा है। इस दौरान शरीफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी जिक्र किया और कहा कि ट्रंप ने मई के संघर्ष के बाद युद्धविराम में “सक्रिय भूमिका” निभाई। भारत का कड़ा जवाब: “नाटकीयता और झूठ से तथ्य छिप नहीं सकते” भारत ने शनिवार को “जवाब देने के अधिकार” (राइट टू रिप्लाई) का प्रयोग करते हुए पाकिस्तान के दावों को खारिज कर दिया। भारत के स्थायी मिशन में प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने शरीफ के भाषण को “बेतुकी ड्रामेबाजी” करार दिया। उन्होंने कहा, “यह सभा सुबह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की बेतुकी नाटकीयता का साक्षी बनी, जिन्होंने एक बार फिर आतंकवाद की महिमा गाई, जो उनकी विदेश नीति का केंद्र बिंदु है। लेकिन कोई भी ड्रामा या झूठ तथ्यों को छिपा नहीं सकता।” गहलोत ने मई में हुए संघर्ष के बारे में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के दावों का खंडन करते हुए कहा कि पाकिस्तान की भारत के खिलाफ धमकियां केवल भारतीय सेना द्वारा 10 मई को कई पाकिस्तानी वायुसेना अड्डों को तबाह करने के बाद ही बंद हुईं। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने हाल के संघर्ष का एक अजीबो-गरीब विवरण प्रस्तुत किया। इस मामले का रिकॉर्ड स्पष्ट है। 9 मई तक, पाकिस्तान भारत पर और हमलों की धमकी दे रहा था। लेकिन 10 मई को, उसकी सेना ने हमसे सीधे युद्धविराम की गुहार लगाई। बीच में जो भी घटना हुई वह केवल ये थी कि भारतीय सेना ने कई पाकिस्तानी वायुसेना अड्डों को नष्ट किया। उन नुकसानों की तस्वीरें निश्चित रूप से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं। यदि नष्ट हुए रनवे और जले हुए हैंगर जीत की तरह दिखते हैं, जैसा कि प्रधानमंत्री ने दावा किया, तो पाकिस्तान इसे अपनी जीत मानने के लिए स्वतंत्र है।” भारत ने ब्रह्मोस मिसाइल से उड़ाए पाक के एयरबेस भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का उपयोग कर पाकिस्तान के कई प्रमुख एयरबेसों पर सटीक हमले किए। इन हमलों में बहावलपुर, मुरिदके और अन्य रणनीतिक स्थानों पर स्थित पाकिस्तानी वायुसेना के रनवे, हैंगर और आतंकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा। ब्रह्मोस मिसाइलों की गति और सटीकता ने पाकिस्तानी रक्षा तंत्र को चकमा दे दिया, जिसके परिणामस्वरूप कई लड़ाकू विमान और सैन्य सुविधाएं नष्ट हो गईं। भारतीय राजदूत ने पाकिस्तान को वैश्विक आतंकवाद का केंद्र बताते हुए कई उदाहरण दिए। उन्होंने उल्लेख किया कि पाकिस्तान ने दशक भर तक ओसामा बिन लादेन को शरण दी, जबकि आतंकवाद के खिलाफ “सहयोगी” होने का ढोंग रचता रहा। गहलोत ने कहा कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 पर्यटकों की हत्या के लिए जिम्मेदार “द रेसिस्टेंस फ्रंट” (TRF) को पाकिस्तान संरक्षण देता है। उन्होंने कहा, “25 अप्रैल 2025 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान ने इस पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकी संगठन को पहलगाम नरसंहार की जिम्मेदारी से बचाया।” उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” का जिक्र करते हुए बताया कि भारत ने बहावलपुर और मुरिदके में आतंकी ठिकानों पर हमला कर कई आतंकियों को मार गिराया। गहलोत ने पाकिस्तानी मंत्रियों के हालिया बयानों का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान दशकों से आतंकी शिविर चला रहा है। उन्होंने मांग की, “पाकिस्तान को तत्काल सभी आतंकी शिविर बंद करने चाहिए, वांछित आतंकवादियों को सौंपना चाहिए। भारत आतंकवादियों और उनके संरक्षकों को ‘परमाणु ब्लैकमेल’ से डरे बिना जवाबदेह ठहराएगा।” द्विपक्षीय मुद्दों पर भारत की स्थिति गहलोत ने कश्मीर और सिंधु जल संधि जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान के तीसरे पक्ष को शामिल करने के प्रयासों को खारिज करते हुए कहा, “भारत और पाकिस्तान लंबे समय से सहमत हैं कि उनके बीच कोई भी लंबित मुद्दा द्विपक्षीय रूप से हल किया जाएगा। इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई गुंजाइश नहीं है।” उन्होंने शरीफ के “शांति” के आह्वान पर सवाल उठाते हुए कहा, “अगर वह वास्तव में ईमानदार हैं, तो पाकिस्तान को नफरत, कट्टरता और असहिष्णुता पर आत्मचिंतन करना चाहिए।”

‘नस्लवाद को ना, ट्रंप को ना’, अमेरिकी राष्ट्रपति की दूसरी राजकीय यात्रा के दौरान ब्रिटेन में विरोध प्रदर्शन

लंदन, 18 सितंबर : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बुधवार को विंडसर कैसल में शाही स्वागत किया गया, लेकिन साथ ही कैसल के बाहर कई प्रदर्शनकारियों ने उनकी अभूतपूर्व दूसरी राजकीय यात्रा के खिलाफ प्रदर्शन किया। कई हजार लोगों ने ट्रंप की यात्रा का विरोध करने के लिए मध्य लंदन में मार्च किया। ट्रंप का अपनी इस यात्रा के दौरान ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय द्वारा उनके सम्मान में आयोजित एक भव्य भोज में शामिल होने के साथ ही प्रधानमंत्री कीअर स्टॉर्मर के साथ एक बैठक करने का भी कार्यक्रम है। ‘नस्लवाद को ना, ट्रंप को ना’ लिखे बैनर से विरोध ‘स्टॉप ट्रंप यूके कोएलिशन’ द्वारा आयोजित प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारियों ने “नस्लवाद को ना, ट्रंप को ना” लिखे बैनर लिया हुआ था। प्रदर्शनकारी संसद की ओर जाने वाली रीजेंट स्ट्रीट की ओर बढ़े। लंदन के पुलिस बल ने 1,600 कर्मियों को तैनात किया था क्योंकि उन्हें लगभग 50 विभिन्न समूहों के सदस्यों के आने की आशंका थी, जिनमें जलवायु, नस्लवाद विरोधी और फलिस्तीन समर्थक कार्यकर्ता शामिल थे। चार्ल्स तृतीय ने ट्रंप-मेलानिया का सवागत किया ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया हेलीकॉप्टर से विंडसर कैसल पहुंचे, जहां चार्ल्स तृतीय ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और इस दौरान सैन्य बैंड ने अमेरिका और ब्रिटेन के राष्ट्रगान बजाये। कैसल के बाहर, कई लोगों ने पूरे दिन विरोध प्रदर्शन किया। हालांकि बड़ी संख्या में पुलिस बल की उपस्थिति और घटना को कवर करने वाले अंतरराष्ट्रीय समाचार दल की तुलना में उनकी संख्या कम थी। विंडसर में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया जिसमें से एक को आपातकालीन कर्मचारी पर हमला करने और धमकी देने के आरोप में तथा दूसरे को सार्वजनिक व्यवस्था के उल्लंघन और हमले के संदेह में गिरफ्तार किया गया।

ब्रिटिश किंग चार्ल्‍स ने ट्रंप कपल के लिए रखी शाही दावत, मेलानिया अपनी ड्रेस को लेकर हुईं ट्रोल

लंदन, 18 सितंबर: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी पत्नी मेलानिया ट्रंप के साथ ब्रिटेन दौरे पर हैं. किंग चार्ल्स और क्विन कमिला उनकी मेजबानी कर रहे हैं. इस मौके दौरे के दूसरे दिन बुधवार को शाही विंडसर कैसल में शाही दावत का आयोजन भी किया गया. यहां मेलानिया ब्राइट येलो ड्रेस पर पिंक बेल्ट लगाए पहुंची जिनके बाद उन्हें सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल किया जा रहा है. हालांकि मेलानिया अपने फैशन सेंस के लिए जानी जाती हैं. यह ड्रेस डिजाइनर कैरोलिना हेरेरा ने बनाई थी. इस ड्रेस का चमकीला पीला रंग सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग के रूप में लोगों की आंखों में चुभता नजर आया. एक तरफ जहां कुछ लोगों ने इसे ‘भयानक’ बताया, तो कुछ ने कहा कि मेलानिया ने ‘रंगों का तालमेल’ सही नहीं किया. वहीं, एक्सपर्ट्स ने बताया कि मेलानिया की ड्रेस के कलर के पीछे कुछ सीक्रेट मैसेज हो सकते हैं. सोशल मीडिया ट्रोलिंग जहां एक तरफ कई लोगों ने मेलानिया की इस ड्रेस की खुलकर आलोचना की, वहीं कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्हें यह ड्रेस काफी पसंद आई. एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा कि माफ कीजिए, लेकिन मुझे मेलानिया का यह पीला गाउन बिल्कुल पसंद नहीं आया. एक और व्यक्ति ने टिप्पणी की, “यह बहुत अजीब है, बस इतना ही कह सकता हूं.” कुछ अन्य लोगों ने लिखा कि हरी ड्रेस इस मौके के लिए बेहतर होती. तारीफ भी हो रही कुछ लोगों ने मेलानिया के इस बोल्ड फैशन चॉइस की तारीफ भी की. एक प्रशंसक ने लिखा कि शुरुआत में मैं भी श्योर नहीं थी, लेकिन जब मैंने इसे पूरा देखा, तो मुझे यह बहुत पसंद आया. यह लुक मॉर्डन और फ्रेश है. कानों में झुमके भी बहुत शानदार लग रहे हैं. मैं कभी चमकीले पीले रंग की बहुत बड़ी प्रशंसक नहीं रही, लेकिन मेलानिया कुछ भी पहन सकती हैं. क्या ड्रेस में छिपा था कोई ‘सीक्रेट मैसेज’? एक मशहूर फैशन स्टाइलिस्ट मारियन क्वेई ने बीबीसी को बताया कि मेलानिया की इस ड्रेस में एक छिपा हुआ संदेश हो सकता है. क्वेई के अनुसार, दो बिल्कुल अपोजिट कलर का कॉम्बिनेशन पहनना साफ-साफ बताता है कि ट्रंप अपने तरीके से ही काम करते रहेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि यह ड्रेस ‘ट्रंप के नजरिए को दर्शाती है.’ क्वेई ने मेलानिया की एक और ड्रेस के बारे में बात की थी, जो उन्होंने यूके पहुंचने पर पहनी थी. उस समय उन्होंने एक बहुत बड़ी बैंगनी टोपी पहनी थी, जिससे उनका चेहरा लगभग छिपा हुआ था. क्वेई ने कहा कि यह टोपी “यह दर्शाती है कि वह चाहती हैं कि सभी की निगाहें उनके पति और उनके एजेंडे पर रहें.” उन्होंने यह भी बताया कि टोपी का बैंगनी रंग, जो राष्ट्रपति की टाई से मेल खा रहा था, उनके पति के एजेंडे के प्रति उनके सपोर्ट का प्रतीक था.

नेपाल में पदभार संभालते ही प्रधानमंत्री सुशीला कार्की का ऐलान, प्रदर्शन में जान गंवाने वालों को ‘शहीद’ का दिया दर्जा

काठमांडू, 14 अगस्त: नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने रविवार को औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया। पदभार संभालते ही उन्होंने जेन-जी आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों को ‘शहीद’ का दर्जा और उनके आश्रितों को 10-10 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की। भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर बैन के फैसले के विरोध में हुए आंदोलन के बाद राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शुक्रवार को पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को देश की अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई थी। सुशीला कार्की ने शपथ ग्रहण के दो दिन बाद कार्यभार संभाला। उन्होंने रविवार सुबह लैंचौर स्थित शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित कर अपने कार्यकाल की शुरुआत की, जिसके बाद वे सिंह दरबार गईं। उन्होंने गृह मंत्रालय के भवन से अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन शुरू किया, क्योंकि पिछले मंगलवार को हिंसक प्रदर्शनों और आगजनी से मुख्य परिसर क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय को स्थानांतरित कर दिया गया था। कार्यभार संभालते ही प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने नेपाल में हुए हिंसक प्रदर्शनों के पीड़ितों को तत्काल राहत प्रदान की। मुख्य सचिव एकनारायण आर्यल ने कहा है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान मारे गए लोगों को ‘शहीद’ माना जाएगा और उनके परिवारों को 10-10 लाख रुपए की वित्तीय सहायता दी जाएगी। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने 134 घायल प्रदर्शनकारियों और 57 घायल पुलिसकर्मियों के चिकित्सा उपचार की घोषणा की है। द हिमालयन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालयों को विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए नुकसान का विस्तृत विवरण देने वाली रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल में हुए विरोध प्रदर्शनों में 72 लोगों ने जान गंवाई है, जिनमें 59 प्रदर्शनकारी, 10 कैदी और तीन पुलिस अधिकारी शामिल हैं। राष्ट्रपति पौडेल ने शनिवार को राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने सभी पक्षों से अगले साल 5 मार्च को होने वाले प्रतिनिधि सभा के चुनावों को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में सहयोग करने का आग्रह किया। उनकी यह टिप्पणी शुक्रवार आधी रात को निचले सदन के भंग होने के बाद प्रमुख राजनीतिक दलों की बढ़ती आलोचना के बीच आई। इस कदम को व्यापक रूप से जेन-जी आंदोलन की प्रमुख मांगों में से एक के रूप में देखा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मौजूदा संसद भ्रष्टाचार में डूबी हुई है और वास्तविक सुधार करने में असमर्थ है। कार्की की सिफारिश पर अमल करते हुए निचले सदन को भंग कर दिया गया था। राष्ट्रपति पौडेल ने इसे संविधान, संसदीय प्रणाली और नेपाल के संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य की रक्षा के लिए जरूरी कदम बताया था।

किम जोंग-उन सैन्य परेड में पुतिन और शी के साथ शामिल हुए, 66 वर्षों में पहली बार तीनों देश के नेता साथ

बीजिंग, 03 सितंबर : उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन, रूस के व्लादिमीर पुतिन और चीन के शी जिनपिंग बुधवार को बीजिंग में एक सैन्य परेड के दौरान एक साथ खड़े हुए। 66 साल में यह पहली बार था जब इन तीनों देशों के नेता मिले। किम का तियानमेन स्क्वायर की दर्शक दीर्घा में पुतिन और शी के साथ खड़ा होना पश्चिमी देशों के विरोध में उनकी त्रिपक्षीय एकजुटता का एक बड़ा प्रदर्शन है। एक काले सूट और सुनहरे रंग की टाई पहने, किम समारोह से पहले धीरे-धीरे तियानमेन स्क्वायर के मुख्य द्वार में चले, जहां लाल कालीन पर शी ने अन्य राष्ट्राध्यक्षों के साथ उनका स्वागत किया, जिसमें पुतिन भी शामिल थे। शी ने किम और पुतिन का अभिवादन किया। इस दौरान तीनों नेताओं के बीच अच्छा तालमेल और वार्तालाप देखा गया। चीन, रूस और उत्तर कोरिया के बीच एकजुटता प्रदर्शित करते हुए तीनों नेता मंच पर एक साथ पहुंचे और आपस में दोस्ताना बातचीत की। तीनों नेता तियानमेन चौक पर भव्य समारोह के साथ परेड शुरू होने तक बातचीत करते रहे। इस परेड के जरिए चीन ने जापान पर अपनी जीत और द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ मनाई। इस दौरान वे तीनों नेता एक दूसरे के बगल में खड़े थे। यह 66 साल में पहली बार है जब इन तीन देशों के नेता एक साथ आए हैं। इससे पहले 1959 में उत्तर कोरिया के संस्थापक किम इल-सुंग, चीन के संस्थापक माओत्से तुंग और सोवियत संघ के पूर्व प्रधानमंत्री निकिता ख्रुश्चेव ने इसी चौक पर एक समान सैन्य परेड में भाग लिया था। यह किम, शी और पुतिन की भी पहली मुलाकात है। इन तीनों नेताओं को संयुक्त राज्य अमेरिका के विरोधी के तौर पर जाना जाता रहा है। ऐसे में उनका एक साथ आना, अमेरिका के नेतृत्व वाली विश्व व्यवस्था के सामने उनकी आपसी एकजुटता का एक मजबूत संकेत होगा। परेड में दिए गए एक भाषण में, शी जिनपिंग ने कहा कि चीनी जनता के ‘पुनरुद्धार’ की सराहना की और कहा कि मानवता एक बार फिर युद्ध या शांति के बीच एक विकल्प के दौर से गुजर रही है। यह किम जोंग उन के लिए भी एक ऐतिहासिक क्षण है। चीनी सैन्य परेड में उनका भाग लेना चीन के साथ पारंपरिक रूप से घनिष्ठ संबंधों को बहाल करने और अपनी लंबे समय से चली आ रही अलग-थलग वाली छवि को खत्म करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। कुछ लोगों का यह भी अनुमान है कि किम अमेरिका के साथ संभावित वार्ता बहाली से पहले अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए चीन के साथ संबंधों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय खुफिया सेवा (एनआईएस) का आकलन है कि किम शी और पुतिन के साथ अलग-अलग शिखर सम्मेलन कर सकते हैं, हालांकि त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन की संभावना कम है।

पुतिन ने मोदी को अपनी ‘लिमोजीन’ कार में दी लिफ्ट, चीन में द्विपक्षीय वार्ता स्थल तक साथ पहुंचे

तियानजिन, 01 सितंबर: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपनी ‘ऑरस लिमोजीन’ कार में लिफ्ट दी और दोनों नेता शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय वार्ता स्थल तक साथ पहुंचे। रूस के राष्ट्रीय रेडियो स्टेशन ‘वेस्तीएफएम’ की खबर के अनुसार, ‘‘पुतिन की ‘लिमोजीन’ से होटल पहुंचने के दौरान रास्ते में दोनों नेताओं के बीच बातचीत जारी रही। होटल में दोनों नेता अपनी अपनी टीम के सदस्यों के साथ एक दूसरे से मिलने वाले थे। हालांकि, होटल पहुंचने पर वे रूसी राष्ट्रपति की लिमोजीन से नहीं उतरे और 50 मिनट तक बातचीत करते रहे।’’ बाद में, ‘क्रेमलिन’ (रूस के राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि दोनों नेताओं ने कार में लगभग एक घंटे तक आमने-सामने की बातचीत की। मोदी ने सोशल मीडिया पर लिमोजीन के अंदर अपनी और रूस के राष्ट्रपति की एक तस्वीर भी साझा की। मोदी ने कहा, ‘‘एससीओ शिखर सम्मेलन स्थल पर कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद राष्ट्रपति पुतिन और मैं द्विपक्षीय बैठक स्थल पर साथ-साथ पहुंचे। उनके साथ बातचीत हमेशा सार्थक होती है।’’ मॉस्को में जानकारों का कहना है कि मोदी और पुतिन के बीच शायद यह सबसे महत्वपूर्ण विशेष बातचीत थी, जिसमें उन्होंने संभवतः ऐसे मुद्दों पर चर्चा की जिसकी ‘‘जानकारी किसी और को नहीं हुई’’। अपनी द्विपक्षीय वार्ता के दौरान, मोदी ने पुतिन को बताया कि यूक्रेन संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त करना मानवता का आह्वान है। उन्होंने कहा कि मानवता का आह्वान है कि संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त किया जाए और क्षेत्र में स्थायी शांति लाने के तरीके खोजे जाएं। मोदी ने यह भी कहा कि भारत रूसी नेता के स्वागत का इंतजार कर रहा है। पुतिन दिसंबर में मोदी के साथ शिखर वार्ता के लिए भारत आने वाले हैं।