ढाका, 22 दिसंबर: बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा एक बार फिर भड़क उठी है। विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के एक नेता को अज्ञात हमलावरों ने सिर में गोली मार दी। यह घटना हाल ही में हुई हादी की मौत के बाद सामने आई है, जिससे पूरे इलाके में तनाव और दहशत का माहौल बन गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, घायल BNP नेता को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है। घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, जबकि हमलावरों की तलाश जारी है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले हादी की संदिग्ध हालात में हुई मौत ने पहले ही राजनीतिक हलकों में उबाल ला दिया था। अब BNP नेता पर हुए इस जानलेवा हमले ने हालात को और बिगाड़ दिया है। विपक्ष ने इस घटना के लिए सत्ताधारी दल पर निशाना साधते हुए कानून-व्यवस्था की विफलता का आरोप लगाया है। वहीं, स्थानीय प्रशासन का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। राजनीतिक अस्थिरता के इस दौर में लगातार हो रही हिंसक घटनाओं ने बांग्लादेश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बांग्लादेश में हिंसा पर शेख हसीना की चेतावनी — ‘जिस अराजकता ने मेरी सरकार गिराई, वही हालात फिर लौट रहे हैं’
22 दिसंबर : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश में लगातार बढ़ रही हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने मौजूदा प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस को सीधे शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जिस तरह की अराजकता आज बांग्लादेश में दिखाई दे रही है, वही हालात कभी उनकी सरकार के पतन का कारण बने थे। शेख हसीना ने कहा कि देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। राजनीतिक विरोध, हिंसक झड़पें, अल्पसंख्यकों पर हमले और सरकारी संस्थानों पर जनता का घटता भरोसा बांग्लादेश के भविष्य के लिए खतरनाक संकेत हैं। उन्होंने कहा, “मैंने यह सब पहले भी देखा है। जब अराजकता बढ़ती है और सरकार हालात संभालने में नाकाम रहती है, तो सत्ता टिक नहीं पाती।” पूर्व प्रधानमंत्री ने मौजूदा सरकार पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ सत्ता में बने रहना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि जनता की सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। उनके अनुसार, अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। शेख हसीना ने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें हिंसा में बदलने देना देश को कमजोर करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री यूनुस से अपील की कि वे सख्त निर्णय लें, कानून-व्यवस्था बहाल करें और सभी वर्गों को विश्वास में लेकर आगे बढ़ें। गौरतलब है कि हाल के हफ्तों में बांग्लादेश के कई हिस्सों से हिंसा, आगजनी और विरोध-प्रदर्शन की खबरें सामने आई हैं। ऐसे में शेख हसीना का यह बयान न केवल राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है, बल्कि आने वाले दिनों में देश की राजनीति की दिशा को भी प्रभावित कर सकता है।
एपस्टीन फाइल्स विवाद: क्यों हटाई गई थीं ट्रंप की तस्वीरें? विरोध के बाद अमेरिकी न्याय विभाग ने दी सफाई
22 दिसंबर, अंतरराष्ट्रीय डेस्क: अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) एक बार फिर जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइलों को लेकर विवादों में घिर गया है। एपस्टीन केस से जुड़े सार्वजनिक दस्तावेजों से पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरें अचानक गायब होने के बाद अमेरिका की राजनीति और सोशल मीडिया में हलचल मच गई थी। भारी आलोचना और विरोध के बाद अब न्याय विभाग ने न केवल ये तस्वीरें दोबारा डेटाबेस में अपलोड कर दी हैं, बल्कि इन्हें हटाने की वजह भी स्पष्ट की है। क्या है पूरा मामला? दरअसल, ‘एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट’ के तहत अमेरिकी न्याय विभाग ने हाल ही में जेफरी एपस्टीन से जुड़े कई दस्तावेज सार्वजनिक किए थे। इनमें कुछ तस्वीरें और रिकॉर्ड ऐसे भी थे, जिनमें डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी दिखाई दे रही थी। लेकिन कुछ ही समय बाद ट्रंप से जुड़ी तस्वीरें वेबसाइट से हटा दी गईं, जबकि अन्य सार्वजनिक हस्तियों से संबंधित सामग्री यथावत बनी रही। इस कदम को लेकर विपक्षी नेताओं, मानवाधिकार संगठनों और सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाए। आरोप लगाए गए कि न्याय विभाग राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है और तथ्यों को छिपाने की कोशिश की जा रही है। न्याय विभाग की सफाई विवाद बढ़ने के बाद अमेरिकी न्याय विभाग ने बयान जारी कर कहा कि ट्रंप की तस्वीरों को जानबूझकर नहीं हटाया गया था। विभाग के मुताबिक, “डेटाबेस अपडेट और तकनीकी समीक्षा के दौरान कुछ फाइलें अस्थायी रूप से ऑफलाइन हो गई थीं। इसका किसी व्यक्ति विशेष को बचाने या जानकारी छिपाने से कोई संबंध नहीं है।” न्याय विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी प्रासंगिक दस्तावेजों को दोबारा जांच के बाद सार्वजनिक कर दिया गया है और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आगे भी नियमित अपडेट किए जाएंगे। राजनीतिक असर और प्रतिक्रियाएं हालांकि सफाई के बावजूद यह मामला राजनीतिक रंग ले चुका है। ट्रंप समर्थकों का कहना है कि पूर्व राष्ट्रपति को बदनाम करने के लिए उनका नाम बार-बार उछाला जा रहा है, जबकि विरोधियों का आरोप है कि शक्तिशाली लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि एपस्टीन केस से जुड़े दस्तावेज आने वाले समय में अमेरिकी राजनीति में और उथल-पुथल मचा सकते हैं, खासकर ऐसे दौर में जब राष्ट्रपति चुनाव नजदीक हैं। ट्रंप की तस्वीरों का हटना और फिर दोबारा सामने आना यह दिखाता है कि एपस्टीन फाइल्स सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक और नैतिक बहस का भी बड़ा मुद्दा बन चुकी हैं। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में और कौन-कौन से नाम और तथ्य सामने आते हैं।
अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट की वेबसाइट से एपस्टीन से जुड़ी 16 फाइलें गायब, ट्रंप और उनकी पत्नी की तस्वीरें भी थीं शामिल
वॉशिंगटन, 21 दिसंबर :अमेरिकी न्याय विभाग (US Justice Department) की आधिकारिक वेबसाइट से जेफरी एपस्टीन से जुड़े 16 अहम दस्तावेज अचानक गायब हो गए हैं। इन फाइलों के हटने से अमेरिका में सियासी और कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है। गायब दस्तावेजों में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी की कुछ तस्वीरें भी शामिल बताई जा रही हैं। जानकारी के अनुसार, ये दस्तावेज ‘एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट’ के तहत सार्वजनिक किए गए थे। इनमें जेफरी एपस्टीन से संबंधित जांच रिपोर्ट, निजी जेट के फ्लाइट लॉग्स, संपर्कों की जानकारी और कई प्रभावशाली लोगों की तस्वीरें मौजूद थीं। वेबसाइट से इन फाइलों के अचानक हटाए जाने के बाद पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इन दस्तावेजों में एपस्टीन के नेटवर्क और उसके संबंधों से जुड़े कई संवेदनशील तथ्य दर्ज थे, जिन पर पहले भी विवाद हो चुका है। खासतौर पर ट्रंप और उनकी पत्नी की तस्वीरों के सामने आने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया था। हालांकि, अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है कि ये फाइलें तकनीकी कारणों से हटाई गई हैं या जानबूझकर वेबसाइट से गायब की गई हैं। विपक्षी नेताओं और मानवाधिकार संगठनों ने मांग की है कि इन दस्तावेजों को फिर से सार्वजनिक किया जाए, ताकि सच सामने आ सके। गौरतलब है कि जेफरी एपस्टीन का नाम पहले भी कई हाई-प्रोफाइल हस्तियों से जुड़ चुका है और उसकी मौत के बाद से जुड़े दस्तावेजों को लेकर लगातार विवाद बना हुआ है। ऐसे में फाइलों का इस तरह गायब होना एक बार फिर अमेरिकी सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है।
एपस्टीन फाइल्स में नया विवाद: कथित तस्वीरों ने बढ़ाई हलचल, क्लिंटन समेत कई हस्तियों के नाम चर्चा में
20 दिसंबर: एपस्टीन फाइल्स को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। ताज़ा दावों के अनुसार सामने आई कथित तस्वीरों में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को हॉट टब में देखा गया बताया जा रहा है। इन दावों के सार्वजनिक होते ही सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों और फाइल्स में कुछ ऐसी तस्वीरें और जानकारियां शामिल होने का दावा किया जा रहा है, जिनमें कई जानी-मानी हस्तियों की मौजूदगी बताई गई है। हालांकि, इन तस्वीरों की प्रामाणिकता को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की ओर से भी कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है। जानकारों का कहना है कि एपस्टीन मामला पहले से ही बेहद संवेदनशील और जटिल रहा है। ऐसे में किसी भी नए दावे या तस्वीर को अंतिम सत्य मानने से पहले जांच और सत्यापन जरूरी है। दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के खुलासे अमेरिकी राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकते हैं। फिलहाल, एजेंसियां और मीडिया संस्थान उपलब्ध दस्तावेजों की पड़ताल में जुटे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले पर और जानकारी सामने आ सकती है, जिससे तस्वीर और साफ होगी।
कौन था उस्मान हादी, जिसकी मौत के बाद सुलगा बांग्लादेश? कई शहरों में हिंसा, हालात तनावपूर्ण
बांग्लादेश, 19 दिसंबर: बांग्लादेश के चर्चित छात्र नेता और 2024 के छात्र आंदोलन की प्रमुख आवाज़ शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद देशभर में हालात बेकाबू हो गए हैं। उनकी मौत की खबर सामने आते ही ढाका समेत कई बड़े शहरों में प्रदर्शन, आगजनी और झड़पें शुरू हो गईं। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगहों पर तनाव बना हुआ है। सिंगापुर में हुई मौत, ढाका में मारी गई थी गोली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शरीफ उस्मान हादी की मौत सिंगापुर में इलाज के दौरान हुई। इससे पहले ढाका में अज्ञात हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी थी, जिसके बाद उन्हें गंभीर हालत में सिंगापुर ले जाया गया था। इलाज के दौरान उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका और बुधवार देर रात उनकी मौत हो गई। कौन था शरीफ उस्मान हादी? शरीफ उस्मान हादी बांग्लादेश के 2024 छात्र आंदोलन के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक थे। वह ‘इंकलाब मंच’ (Inqilab Platform) के प्रवक्ता थे, जिसने छात्र राजनीति के जरिए सरकार के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया। इस आंदोलन को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सत्ता से विदाई की एक बड़ी वजह माना जाता है। हादी की पहचान एक तेज़तर्रार, बेबाक और ज़मीनी नेता के रूप में थी। वे छात्र अधिकारों, लोकतांत्रिक सुधारों और भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर बोलते थे। सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर उनकी अपील का युवाओं पर गहरा असर था। मौत के बाद भड़का जनआक्रोश उस्मान हादी की मौत की खबर फैलते ही ढाका, चटगांव, सिलहट और राजशाही जैसे शहरों में भारी प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों ने इसे “राजनीतिक हत्या” करार देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। कई जगहों पर वाहनों में आगजनी, सड़कों पर बैरिकेडिंग और पुलिस के साथ झड़पों की खबरें हैं। सरकार पर उठे सवाल विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने हादी की हत्या के लिए सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि यह छात्र आंदोलन की आवाज़ को दबाने की कोशिश है। वहीं सरकार ने मामले की जांच का भरोसा दिलाया है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। आगे क्या? शरीफ उस्मान हादी की मौत ने बांग्लादेश की राजनीति और छात्र आंदोलन को एक बार फिर उबाल पर ला दिया है। आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है, जबकि देश की निगाहें अब सरकार की अगली कार्रवाई और जांच के नतीजों पर टिकी हैं।
एक तरफ कुआं, दूसरी तरफ खाई: गाजा को लेकर अमेरिकी दबाव में फंसे पाक सेना प्रमुख आसिम मुनीर
इस्लामाबाद/वॉशिंगटन, 18 दिसंबर: पाकिस्तान के फील्ड मार्शल और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर इस समय गंभीर रणनीतिक और राजनीतिक दबाव में नजर आ रहे हैं। एक ओर देश के भीतर इस्लामाबाद पर अपनी पकड़ बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी ओर अमेरिका की ओर से गाजा में सेना भेजने को लेकर बढ़ता दबाव उनके लिए नई मुश्किलें खड़ी कर रहा है। सूत्रों और रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पाकिस्तान पर गाजा संकट में सैन्य भूमिका निभाने का दबाव बनाया जा रहा है। इसी कड़ी में आने वाले दिनों में जनरल मुनीर और ट्रंप के बीच संभावित मुलाकात हो सकती है, जिसमें गाजा में एक अंतरराष्ट्रीय या सहयोगी सैन्य फोर्स की तैनाती पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, पाकिस्तान के लिए यह फैसला आसान नहीं है। गाजा में सेना भेजने से जहां एक ओर अमेरिका के साथ रिश्तों में मजबूती आ सकती है, वहीं दूसरी ओर देश के भीतर राजनीतिक विरोध, आर्थिक दबाव और सुरक्षा चुनौतियां और गहरा सकती हैं। पाकिस्तान पहले ही आर्थिक संकट, आंतरिक अस्थिरता और सीमाई तनावों से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आसिम मुनीर इस समय ‘एक तरफ कुआं, दूसरी तरफ खाई’ जैसी स्थिति में हैं। अगर वे अमेरिकी दबाव को स्वीकार करते हैं, तो घरेलू मोर्चे पर विरोध झेलना पड़ सकता है। वहीं, इनकार करने की स्थिति में वॉशिंगटन के साथ रिश्तों में तल्खी आने का खतरा है। अब सभी की नजरें इस संभावित मुलाकात पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि पाकिस्तान गाजा संकट में क्या भूमिका निभाता है और जनरल मुनीर इस दोहरे दबाव से निकलने का कौन-सा रास्ता चुनते हैं।
सिडनी आतंकी हमला: बोंडी बीच पर गोलीबारी में 15 की मौत, आतंकी की मां बोली—‘हर कोई मेरे जैसा बेटा चाहेगा’
सिडनी, 15 दिसंबर: ऑस्ट्रेलिया के मशहूर बोंडी बीच पर रविवार को हुए भीषण आतंकी हमले ने देश को झकझोर कर रख दिया। बीच पर मौजूद लोगों पर दो आतंकियों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाईं, जिसमें कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हमले को अंजाम देने वाले आतंकी पाकिस्तानी पिता-पुत्र बताए जा रहे हैं। हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को घेर लिया और सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया। घटना के चलते सिडनी सहित आसपास के इलाकों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। इस बीच, हमलावर की मां का एक बयान सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है। आतंकी की मां ने कहा, “हर कोई मेरे जैसा बेटा चाहेगा—इस बयान ने न केवल पीड़ित परिवारों को आहत किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे मानवता पर हमला बताया है। प्रधानमंत्री ने पीड़ितों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति दोहराई। वहीं, सुरक्षा एजेंसियां हमले के पीछे के नेटवर्क और संभावित सहयोगियों की गहन जांच में जुटी हैं। घटना के बाद बोंडी बीच और आसपास के पर्यटन स्थलों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
H-1B वीजा पर ट्रंप प्रशासन की सख्ती, आज से सोशल मीडिया स्क्रीनिंग शुरू; भारतीय आवेदकों की बढ़ी चिंता
वॉशिंगटन, 15 दिसंबर: अमेरिका में काम करने का सपना देख रहे विदेशी पेशेवरों, खासकर भारतीयों के लिए मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा आवेदकों के लिए नियमों को और कड़ा करते हुए एक नया आदेश जारी किया है। इसके तहत आज से वीजा एप्लीकेंट्स की सोशल मीडिया स्क्रीनिंग की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है। नए आदेश के अनुसार, H-1B वीजा के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की सोशल मीडिया गतिविधियों की गहन जांच की जाएगी। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना और आव्रजन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वीजा अप्रूवल की प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ने की आशंका है, क्योंकि H-1B वीजा धारकों में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। आईटी, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और हेल्थ सेक्टर में काम करने वाले हजारों भारतीय इस वीजा पर अमेरिका में कार्यरत हैं या आवेदन की तैयारी में हैं। वहीं, अमेरिकी कंपनियों की चिंता भी बढ़ गई है। कई बड़ी टेक कंपनियां विदेशी टैलेंट पर निर्भर हैं और नियमों में सख्ती से उनकी भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। आव्रजन समर्थक संगठनों ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे निजता से जुड़ा मामला बताया है। कुल मिलाकर, ट्रंप प्रशासन का यह फैसला H-1B वीजा नीति को और सख्त बनाता दिख रहा है, जिससे भारतीय आवेदकों और अमेरिकी कंपनियों—दोनों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
सिडनी हमला: PM मोदी का कड़ा संदेश—‘आतंकवाद बर्दाश्त नहीं’, भारत ऑस्ट्रेलिया के साथ खड़ा
नई दिल्ली/सिडनी, 14 दिसंबर: ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में हनुक्का उत्सव के दौरान हुए आतंकी हमले ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक घटना में 12 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। हमले के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख दोहराते हुए स्पष्ट कहा कि “आतंकवाद किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” प्रधानमंत्री मोदी ने शोक संदेश जारी कर कहा कि दुख की इस घड़ी में भारत, ऑस्ट्रेलिया के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। साथ ही, पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस’ नीति को एक बार फिर दोहराया।