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अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री स्मृति ईरानी दो दिवसीय यात्रा पर जेद्दा पहुंचीं

जेद्दा (सऊदी अरब), 07 जनवरी (वेब वार्ता): अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री स्मृति ईरानी हज सम्मेलन में भाग लेने और भारत तथा सऊदी अरब के बीच हज समझौते 2024 पर हस्ताक्षर करने के लिए दो दिवसीय यात्रा पर रविवार को यहां पहुंचीं। राजदूत डॉ. सुहेल खान, महावाणिज्य दूत मोहम्मद शाहिद और सऊदी अरब के हज तथा उमरा मंत्रालय के अधिकारियों ने जेद्दा हवाई अड्डे पर ईरानी की अगवानी की। जेद्दा में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने ‘एक्स’ पर कहा, ”अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी हज सम्मेलन में भाग लेने और द्विपक्षीय हज समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए जेद्दा पहुंच गयी हैं।” इसने एक बयान में कहा कि ईरानी सऊदी अरब के हज और उमरा मामलों के मंत्री तौफीक बिन फौजान अल राबिया के साथ एक द्विपक्षीय बैठक भी करेंगी और आगामी हज यात्रा से जुड़े परस्पर हित के मुद्दों पर चर्चा करेंगी। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री ईरानी द्विपक्षीय हज समझौते 2024 पर हस्ताक्षर करने के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगी। वह सोमवार को जेद्दा में ‘हज और उमरा सम्मेलन’ के तीसरे संस्करण के उद्घाटन समारोह में भी भाग लेंगी जिसका आयोजन सऊदी अरब का हज और उमरा मामलों का मंत्रालय कर रहा है। बयान में कहा गया कि भारत-सऊदी अरब साझेदारी हाल के वर्षों में मजबूत हुई है तथा यह यात्रा इस रिश्ते में हज को एक महत्वपूर्ण आयाम बनाते हुए रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी।

राष्ट्रपति पद के चुनाव में बाइडेन को वोट नहीं दूंगा: मस्क

वाशिंगटन, 30 नवंबर: प्रसिद्ध उद्योगपति एलन मस्क ने कहा है कि वह चुनाव में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को वोट नहीं देंगे। श्री मस्क ने बुधवार को द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए साक्षात्कार में कहा, “मुझे लगता है कि मैं श्री बाइडेन को वोट नहीं दूंगा।” उन्होंने कहा कि श्री बाइडेन द्वारा टेस्ला को व्हाइट हाउस में एक इलेक्ट्रिक वाहन शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित नहीं करने से उनका अपमान हुआ, जबकि कंपनी अन्य उपस्थित लोगों की तुलना में अधिक इलेक्ट्रिक वाहन बनाती है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अभी तक 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए किसी का समर्थन देने का फैसला नहीं लिया है।

हमास ने गाजा में बंधक बनाए गए 11 और लोगों को रिहा किया : इजरायली सेना

यरूशलेम, 28 नवंबर: इजरायली सेना ने सोमवार को कहा कि हमास के 7 अक्टूबर के हमलों के बाद गाजा में बंधक बनाए गए 11 बंधक को रिहा कर दिया है. सेना ने एक बयान में कहा, “रेड क्रॉस से मिली जानकारी के आधार पर, 11 बंधक वर्तमान में इजरायली क्षेत्र में जा रहे हैं.” कतरी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने एक्स पर कहा,” 33 फिलिस्तीनियों को इजरायली जेलों से मुक्त किया जाएगा”. इज़रायल और हमास शुक्रवार से गाजा में लड़ाई को चार दिनों के लिए रोकने पर सहमत हुए, इस अवधि के दौरान इज़रायल द्वारा रखे गए 150 फ़िलिस्तीनी कैदियों के बदले में कुल 50 बंधकों को रिहा किया जाएगा. गाजा से कुछ विदेशी बंदियों को अलग से मुक्त कराया गया है. इससे पहले सोमवार को संघर्ष विराम में दो दिन के विस्तार पर सहमति बनी थी, जिसके तहत इजरायली कैदियों की तीन गुना संख्या के बदले गाजा पट्टी से हर दिन कम से कम 10 बंधकों को रिहा करने की आवश्यकता होगी. एक बयान में, निर ओज़ किबुत्ज़ के निवासियों ने कहा कि रिहा किए गए सभी 11 लोग समुदाय से थे. इसमें कहा गया, “शेष बंधकों में से 49 निर ओज़ से हैं.” “इस सूची में महिलाएं, पुरुष, बच्चे, माता, पिता, दादा और दादी शामिल हैं.” किबुत्ज़ के अधिकारी ओस्नाट पेरी ने कहा कि सोमवार की रिहाई ने “हमारे समुदाय के लिए राहत की सांस ली है, हालांकि हम अपने प्रियजनों के बारे में चिंतित हैं जो अभी भी बंधक बने हुए हैं.”

इमरान के खिलाफ अदियाला जेल में खुली अदालत में जारी रहेगा मुकदमा

इस्लामाबाद, 28 नवंबर: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री एवं पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ (पीटीआई) के अध्यक्ष इमरान खान के सिफर मामले की सुनवाई कर रहे विशेष अदालत के न्यायाधीश अबुल हसनत ज़ुल्करनैन ने मंगलवार को फैसला सुनाया कि मुकदमे की कार्यवाही अदियाला जेल में जारी रहेगी लेकिन खुली अदालत में। ‘गंभीर सुरक्षा जोखिमों’ का हवाला देते हुए अदियाला जेल अधिकारी उसी अदालत के न्यायाधीश के आदेश के अनुसार इस्लामाबाद के संघीय न्यायिक परिसर (एफजेसी) में विशेष अदालत के समक्ष आज पूर्व प्रधान मंत्री को पेश करने में विफल रहे। पिछले हफ्ते न्यायाधीश जुल्करनैन ने निर्देश जारी किया था कि पीटीआई प्रमुख इमरान और पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को एफजेसी में पेश किया जाए। गौरतलब है कि सिफर मामला एक राजनयिक दस्तावेज से संबंधित है जिसे संघीय जांच एजेंसी के आरोप पत्र के मुताबिक श्री इमरान ने कभी वापस नहीं किया। पीटीआई लंबे समय से मानती रही है कि दस्तावेज में श्री इमरान को प्रधानमंत्री पद से हटाने के लिए अमेरिका की ओर से धमकी दी गई थी। श्री इमरान और उनके सहयोगी कुरैशी, जो सलाखों के पीछे हैं, को 23 अक्टूबर को मामले में दोषी ठहराया गया था। दोनों ने दोषी नहीं होने का दावा किया है। मुकदमा अदियाला जेल में चल रहा था और चार गवाहों ने पहले ही अपने बयान दर्ज कर लिए थे, पांचवें से जिरह तब की गई जब इस्लामाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने जेल मुकदमे के लिए सरकार की अधिसूचना को ‘गलत’ करार दिया और पूरी कार्यवाही को रद्द कर दिया। फैसले के परिणामस्वरूप, विशेष अदालत अब नए सिरे से मुकदमा शुरू करेगी जबकि अभियोजन पक्ष को जेल में मुकदमा चलाने के लिए एक नया आवेदन दायर करना होगा। श्री इमरान की उपस्थिति के लिए सुरक्षा योजना को अंतिम रूप देने के लिए पुलिस, प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों की सोमवार को बैठक होनी थी। न्यायाधीश जुल्करनैन ने आज एफजेसी में सुनवाई की अध्यक्षता की, जहां बैरिस्टर सलमान सफदर श्री इमरान के वकील के रूप में पेश हुए जबकि वकील अली बुखारी श्री कुरैशी के वकील के रूप में मौजूद थे। एफआईए के अभियोजक शाह खावर और जुल्फिकार अब्बास नकवी भी अदालत में पेश हुए। सुनवाई के दौरान जेल अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपी, जिसकी न्यायाधीश जुल्करनैन ने समीक्षा की। रिपोर्ट में कहा गया है कि खुफिया एजेंसियों और पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक पीटीआई अध्यक्ष को जान का खतरा है। इसमें आगे कहा गया,“यह सूचित किया गया है कि पीटीआई अध्यक्ष को गंभीर पैमाने के सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।” श्री सफदर ने अदालत से सुनवाई अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने और अपने मुवक्किल को जमानत देने का आग्रह किया जबकि श्री कुरैशी के वकील बुखारी ने अदालत से अनुरोध किया कि उनके मुवक्किल को अदालत के सामने पेश करने के लिए निर्देश जारी किए जाएं। थोड़ी देर बाद, विशेष अदालत ने जेल अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर अपने आदेश की घोषणा की, जिसमें जेल मुकदमे को मंजूरी दे दी गई, लेकिन कहा गया कि यह एक खुली अदालत में आयोजित किया जाएगा। अदालत ने कहा कि जेल अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों ने एफजेसी में मुकदमा चलाने के बारे में अपनी आपत्ति व्यक्त की है। आदेश में कहा गया,“इसलिए अगली सुनवाई अदियाला जेल में होगी और एक खुली अदालत होगी।” विशेष अदालत ने कहा कि जो लोग कार्यवाही में शामिल होना चाहते हैं उन्हें ऐसा करने से नहीं रोका जाएगा और पत्रकारों को भी मुकदमे का गवाह बनने की अनुमति दी जाएगी। इसमें आगे कहा गया कि प्रत्येक संदिग्ध के परिवार के पांच सदस्यों को भी अदालत कक्ष के अंदर जाने की अनुमति दी जाएगी। अगली सुनवाई एक दिसंबर (शुक्रवार) निर्धारित है। सुनवाई की शुरुआत में श्री सफदर ने अदालत को सूचित किया कि आज अदालत के समक्ष दो अलग-अलग मामले लंबित हैं। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा,“हमें उम्मीद थी कि पीटीआई अध्यक्ष को आज अदालत के सामने पेश किया जाएगा लेकिन उन्हें अभी तक अदालत में पेश नहीं किया गया है।” वकील ने जोर देकर कहा कि इस्लामाबाद हाईकोर्ट (आईएचसी) और विशेष अदालत के आदेशों का उल्लंघन किया जा रहा है।

हमास द्वारा बंधक बनाए गए लोगों में आधे से अधिक के पास विदेशी नागरिकता

यरूशलम, 26 अक्टूबर: गाजा में हमास द्वारा बंधक बनाए गए लोगों में कम से कम 138 के पास विदेशी नागरिकता हैं। इजरायली मीडिया ने बुधवार को यह जानकारी दी। इजरायल डिफेंस फोर्स के प्रवक्ता डेनियल हगारी ने सोमवार को कहा कि हमास द्वारा बंधक बनाए गए लोगों की संख्या बढ़कर 222 हो गई है। येनेट ने इजरायल सरकार का हवाला देते हुए रिपोर्ट दी है कि 138 बंधकों में से 54 थाई, 15 अर्जेंटीना, 12 अमेरिकी, 12 जर्मन, छह फ्रांसीसी और छह रूस के नागरिक हैं। उल्लेखनीय है कि गत 07 अक्टूबर को, फिलिस्तीनी आंदोलन हमास ने गाजा पट्टी से इज़रायल के खिलाफ अचानक बड़े पैमाने पर रॉकेट हमला किया। इज़रायल ने जवाबी हमले शुरू किए और 20 लाख से अधिक लोगों के घर गाजा पट्टी की पूर्ण नाकाबंदी का आदेश दिया और पानी, भोजन और ईंधन की आपूर्ति काट दी। संघर्ष के बढ़ने से दोनों पक्षों के हजारों लोग मारे गए और घायल हुए।

इजरायल का हमास, इस्लामिक जिहाद के सैन्य ठिकानों पर हमला, एक सैन्यकर्मी की मौत

यरूशलेम, 17 अक्टूबर: इजरायल की सेना ने हमास और इस्लामिक जिहाद से संबंधित सैन्य ठिकानों पर हमले किए जिसमें हमास का एक सैन्यकर्मी मारा गया। इजरायली रक्षा बलों (आईडीएफ) ने मंगलवार को यह जानकारी दी। आईडीएफ ने टेलीग्राम पर कहा, “आईडीएफ ने हमास और जिहाद आतंकवादी संगठनों से संबंधित सैन्य ठिकानों के साथ ही गाजा पट्टी में आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए हमास आतंकवादी संगठन द्वारा इस्तेमाल किए गए एक बैंक पर हमला किया। इजरायली लड़ाकू विमानों ने हमास मुख्यालय पर भी हमला किया, जिसमें हमास का एक सैन्यकर्मी मारा गया।”

मजबूत भारत-वियतनाम साझेदारी बनाएगी स्थिर, सुरक्षित और समृद्ध हिन्द-प्रशांत: विदेश मंत्री

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर: विदेश मंत्री वर्तमान में वियतनाम यात्रा पर हैं। आज उन्होंने वहां के प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन्ह से मुलाकात की और उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अभिनंदन दिया। विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में आगे विकास के लिए उनका मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा। एक मजबूत भारत-वियतनाम साझेदारी स्थिर, सुरक्षित और समृद्ध हिन्द-प्रशांत में योगदान देगी। इससे पहले विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर और उनके समकक्ष बुई थान सोन ने आज हनोई में 18वें भारत-वियतनाम संयुक्त आयोग की बैठक की सह-अध्यक्षता की। विदेश मंत्री ने बैठक को सार्थक बताया और कहा कि विश्वास है कि आने वाले वर्षों में हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच हुई चर्चाओं में राजनीतिक, रक्षा और समुद्री सुरक्षा, न्यायिक, व्यापार और निवेश, ऊर्जा, विकास, शिक्षा और प्रशिक्षण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग शामिल था। साथ ही भारत-प्रशांत क्षेत्र, वैश्विक मुद्दों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता और विभिन्न बहुपक्षीय समूहों में हमारे सहयोग पर दृष्टिकोण भी साझा किया गया। विदेश मंत्री ने ‘हिन्द-प्रशांत में भारत’ विषय पर वियतनाम की डिप्लोमैटिक अकादमी को संबोधित भी किया। उन्होंने हिन्द-प्रशांत निर्माण में सहयोग करने में समाये साझा हितों पर चर्चा की। आसियान की केंद्रीयता के महत्व को रेखांकित किया और क्वाड के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे भारत और वियतनाम अपनी स्वतंत्र सोच के साथ बहुध्रुवीय और नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था को बढ़ावा दे सकते हैं। जयशंकर ने वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी के बाहरी संबंध आयोग के अध्यक्ष ले होई ट्रुंग के साथ भी विचारों का उपयोगी आदान-प्रदान किया। विदेश मंत्री ने कहा कि इस दौरान प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भारत और वियतनाम का एक सा दृष्टिकोण स्पष्ट उभरकर आया है। विदेश मंत्री ने अपने समकक्ष बुई थान सोन के साथ संयुक्त रूप से भारत और वियतनाम के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाने वाले स्मारक टिकटों का अनावरण किया। कलारीपयट्टु और वोविनम को दर्शाने वाले टिकट खेल के प्रति दोनों देशों की साझा आत्मीयता को दर्शाते हैं और मजबूत सांस्कृतिक, सामाजिक और लोगों से लोगों के संबंधों का जश्न मनाते हैं। उल्लेखनीय है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर रविवार को वियतनाम और सिंगापुर की छह दिवसीय यात्रा पर हनोई पहुंचे थे। वियतनाम से जयशंकर 19 से 20 अक्टूबर तक सिंगापुर की यात्रा पर रहेंगे।

गाजा में मृतकों की संख्या बढ़कर 2670 हुई : मंत्रालय

गाजा, 16 अक्टूबर: गाजा में मृतकों की संख्या बढ़कर 2670 हो गई है जबकि 9600 से अधिक लोग घायल हुए है। गाजा स्थित स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी है। मंत्रालय के प्रवक्ता अशरफ अल-कुद्रा ने कहा कि इजरायली हमले पूरी क्रूरता के साथ जारी हैं। हमलों ने आवासीय पड़ोस को निशाना बनाया है और लोगों के घरों को नष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि आवासीय इलाकों और अस्पतालों की ओर जाने वाली सड़कों पर बड़े पैमाने पर विनाश के कारण बचाव कार्यों को बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि गाजा पर शासन करने वाले फिलिस्तीनी इस्लामिक प्रतिरोध आंदोलन (हमास) ने एक सप्ताह पहले गाजा पट्टी से सटे इजरायली शहरों पर अचानक हमले किये, जिसमें इजरायल में 1,300 से अधिक लोग मारे गए। इजरायल ने इसके जवाब में गाजा पर हमले शुरू कर दिए।

इजरायल-हमास युद्ध : अब तक 3500 से अधिक लोग मारे गये, 12000 से अधिक घायल

यरुशलेम/रामल्ला/गाजा, 14 अक्टूबर: फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि गाजा पट्टी में इजरायली हमलों में मरने वालों की संख्या 2,200 से अधिक हो गई है, जबकि 8,700 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हमास के हमलों से इजरायल में 1300 लोगों की मौत हो गयी तथा करीब 3400 अन्य घायल हो गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर कहा, “इजरायल के आक्रमण से मरने वालों की संख्या 2,215 तक पहुंच गई है और 8,714 लोग घायल हुए हैं।” गत सात अक्टूबर को, फिलिस्तीनी आंदोलन हमास ने गाजा पट्टी से इजरायल के खिलाफ एक आश्चर्यजनक बड़े पैमाने पर रॉकेट हमला किया, जिससे इजरायल को अगले दिन युद्ध की स्थिति घोषित करने और जवाबी हमले शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ा। नौ अक्टूबर को, इज़राइल ने 20 लाख से अधिक लोगों के घर गाजा पट्टी की पूर्ण नाकाबंदी का आदेश दिया तथा साथ ही पानी, भोजन और ईंधन की आपूर्ति में कटौती की। इजरायल ने तनाव बढ़ने के परिणामस्वरूप 1,000 से अधिक लोगों की मौत की सूचना दी है। हमास आंदोलन की सैन्य शाखा ने शनिवार को कहा कि उसने तेल अवीव की ओर रॉकेट दागे। सैन्य विंग ने एक बयान में कहा, “अल-कसम ब्रिगेड नागरिकों के निष्कासन और गोलाबारी के जवाब में तेल अवीव पर रॉकेट दाग रहे हैं।” इजरायल रक्षा बल (आईडीएफ) ने आज कहा कि उसने लेबनान से देश की सीमा के भीतर घुसपैठ की कोशिश कर रहे एक आतंकवादी समूह को मार गिराया है। आईडीएफ ने कहा, “थोड़ी देर पहले सैनिकों ने एक आतंकवादी सेल की पहचान की जिसने लेबनान से इजरायली क्षेत्र में घुसपैठ करने का प्रयास किया था।आईडीएफ यूएवी ने आतंकवादी सेल को निशाना बनाया और कई आतंकवादियों को ढेर कर दिया।” इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि उनका देश हमास को नष्ट कर देगा, चाहे इसमें कितना भी समय लगे और युद्ध को अंजाम तक पहुंचाकर रहेगा। श्री नेतन्याहू ने शुक्रवार की रात अपने संबोधन में कहा, “यह तो बस शुरुआत है। हमारे दुश्मनों को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी और इसकी शुरुआत हो गयी है। मैं इससे अधिक कुछ नहीं कहूंगा। यह तो बस शुरुआत है।” इजरायल संसद में विपक्ष के प्रमुख नेता येयर लैपिड ने शबात के दौरान अपने संबोधन में इजरायलियों पर चिंता जातते हुए कोई नई जानकारी नहीं देने के लिए श्री नेतन्याहू पर हमला किया। श्री लैपिड ने आरोप लगाया, “इजरायल के प्रधानमंत्री शुक्रवार रात को एक असामान्य बयान देकर पूरे देश को कैसे उन्माद में डाल सकते हैं। जिसमें बंधकों, उत्तर की ओर से निकासी पर कुछ नहीं बोला जाएगा ।” उन्होंने कहा कि एक प्रधानमंत्री को तब तक ऐसे बयान नहीं देने चाहिए जब तक कि उनके पास नई पुष्ट जानकारी न हो। श्री नेतन्याहू ने अपने संबोधन पर इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के साथ बातचीत के माध्यम से इजरायल में अमेरिकी आपूर्ति के साथ ‘लड़ाई जारी रखना सुनिश्चित कर रहा है।’ इसबीच इजरायली सेना और हमास की झड़प में शुक्रवार को वेस्ट बैंक में कम से कम 14 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई। रामल्लाह स्थित फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने आज यह जानकारी दी। फिलिस्तीनी सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि फ़िलिस्तीनी इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन (हमास) और इज़राइल के बीच हिंसा के नए दौर के सातवें दिन नब्लस, तुल्कर्म, हेब्रोन और अन्य वेस्ट बैंक शहरों में झड़पें हुईं। मंत्रालय ने कहा कि तुल्कर्म शहर में कम से कम पांच फिलिस्तीनियों की मौत हो गयी है। इज़रायली मीडिया ने कहा कि पुलिस अधिकारियों ने कम से कम चार फिलिस्तीनियों की गोली मारकर हत्या कर दी, जिन्होंने तुल्कर्म के पास वेस्ट बैंक सुरक्षा अवरोध को तोड़ने के लिए विस्फोटक उपकरण लगाए हुए थे। इस बीच, गाजा पट्टी में फिलिस्तीनियों के साथ एकजुटता दिखाने और गाजा में चल रहे इजरायली सैन्य अभियान की निंदा करने के लिए वेस्ट बैंक के शहरों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। अमेरिका के वाशिंगटन में फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष के बीच दोनों पक्षों के समर्थकों ने उनके समर्थन में रैलियां आयोजित की गईं। दोनों पक्षाें के विरोध प्रदर्शनों में करीब कई सौ लोग शामिल थे। इजरायल समर्थकों ने व्हाइट हाउस (फ्रीडम प्लाजा) के पास विरोध प्रदर्शन किया। जबकि फिलीस्तीन समर्थकों ने वाशिंगटन पोस्ट बिल्डिंग के पास विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया। फिलिस्तीन समर्थक रैलियां न केवल अमेरिकी राजधानी में हुईं बल्कि इसी तरह की रैलियां शिकागो, न्यूयॉर्क और पोर्टलैंड में भी निकाली गयी हैं। लेबनान के प्रधानमंत्री नजीब मिकाती ने फ़िलिस्तीनी इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन (हमास) और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष और इजरायल के साथ बढ़ते सीमा तनाव के मध्य लेबनान को युद्ध में उतरने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास करने का आश्वासन दिया है। श्री मिकाती ने एक साक्षात्कार में यह संकेत देते हुए कि हिजबुल्लाह अपना निर्णय ले सकता है। उन्होंने कहा कि किसी ने उनसे वादा नहीं किया था कि युद्ध नहीं होगा क्योंकि हालात लगातार बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध में जाने या शांति बनाए रखने का निर्णय सरकार द्वारा नहीं किया जाता है। उन्होंने यह इशारा किया कि हिजबुल्लाह एक सशस्त्र लेबनानी सैन्य समूह है जिसने पिछले सप्ताह इज़राइल के ऊपर गोलीबारी की थी। वह अपना निर्णय ले सकता है। उन्होंने कहा कि लेबनान में स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखना उनकी प्राथमिकता और चिंता है। श्री मिकाती ने जोर देकर कहा कि इजरायल को हिजबुल्लाह को भड़काना बंद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लेबनानी सेना क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के प्रयास में दक्षिणी लेबनान में अग्रिम पंक्ति में खड़ी है। गौरतलब है कि सात अक्टूबर की सुबह हमास द्वारा इजरायली शहरों पर किए गए हमले के समर्थन में हिजबुल्लाह द्वारा उसके अगले दिन यानी आठ अक्टूबर को शेबा फार्म्स में सैन्य स्थलों की ओर कई मिसाइलें दागी थी। जिस के बाद लेबनानी-इजरायल सीमा पर तनाव बढ़ गया है। इजरायल ने शुक्रवार को दक्षिणी लेबनान के अल-धाहिरा, अल्मा अल-शाब और यारिन शहरों के आसपास के क्षेत्र पर बमबारी करके अपना हमला तेज कर दिया। इसमें रॉयटर्स के लिए काम करने वाले एक लेबनानी फोटोग्राफर की मौत हो गई और छह अन्य पत्रकार घायल हो गए थे। इसबीच युद्धग्रस्त इलाकों में फंसे हुए विभिन्न देशों के लोगों का

इजराइल में 27 अमेरिकियों की मौत, नागरिकों को लाने के लिए चार्टर विमान भेजेगा अमेरिका : व्हाइट हाउस

वाशिंगटन, 13 अक्टूबर: इजराइल में जारी हिंसा के परिणामस्वरुप कम से कम 27 अमेरिकियों की मौत हो गई और 14 लोग अभी भी लापता हैं। व्हाइट हाउस ने यह जानकारी दी। व्हाइट हाउस ने घोषणा की है कि अमेरिका हिंसा ग्रस्त यहूदी राष्ट्र से अपने नागरिकों को निकालने के लिए चार्टर विमान भेजेगा। फलस्तीनी आतंकवादी समूह हमास ने शनिवार को दक्षिणी इजराइल पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए थे, जिसके जवाब में इजराइली रक्षा बलों (आईडीएफ) ने हमास के मुख्य ठिकानों को निशाना बनाकर कार्रवाई की। अभी तक इजराइल और गाजा पट्टी में दो हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और दोनों पक्षों के बीच इस संघर्ष को सबसे विनाशकारी संघर्ष बताया जा रहा है। भारत इजराइल से अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने वाला पहला देश है। व्हाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के रणनीतिक संचार के समन्वयक जॉन किर्बी ने कहा, ”हम मौजूदा वक्त में इजराइल के लिए व्यावसायिक उड़ानों की सीमित उपलब्धता और वहां मौजूद अमेरिकियों द्वारा बाहर निकाले जाने की मांग को लेकर भलीभांति वाकिफ हैं। राष्ट्रपति ने अपनी टीम से उन अमेरिकी नागरिकों की सहायता सुनिश्चित करने को कहा है, जो इजराइल छोड़ना चाहते हैं और उन्हें सुरक्षित वापस लाने का निर्देश दिया है।” उन्होंने बृहस्पतिवार को कहा, ”इजराइल से यूरोप के लिए परिवहन मुहैया कराने के लिए कल (शुक्रवार) से अमेरिकी सरकार चार्टर विमानों की व्यवस्था करना शुरू करेगी।”