वॉशिंगटन, 27 जनवरी: अमेरिका में अवैध अप्रवासियों के खिलाफ लगातार कड़ी कार्रवाई जारी है। इसी के तहत अब अमेरिका की होमलैंड सिक्योरिटी के अधिकारी अब गुरुद्वारों में भी अवैध अप्रवासियों की तलाश कर रहे हैं। होमलैंड सिक्योरिटी के अधिकारियों ने न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी के गुरुद्वारों में जाकर अवैध अप्रवासियों की तलाश की। हालांकि जांच अधिकारियों की इस कार्रवाई ने सिख संगठनों को नाराज कर दिया है और उन्होंने इसे आस्था से खिलवाड़ बताया है। ट्रंप ने बदले नियम न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी के कुछ गुरुद्वारों को लेकर माना जाता है कि वहां सिख अलगाववादी और अवैध अप्रवासी रहते हैं। पूर्व की बाइडन सरकार में ऐसे नियम थे कि पूजास्थलों, स्कूल आदि में आव्रजन और सीमा सुरक्षा जांच एजेंसियां कार्रवाई नहीं कर पाती थीं। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकारी आदेश से उस पाबंदी को खत्म कर दिया है। होमलैंड सिक्योरिटी के अधिकारियों का कहना है कि अब अपराधी और अवैध अप्रवासी स्कूलों, चर्च या अन्य पूजा स्थलों में छिप नहीं सकेंगे। वहीं होमलैंड सिक्योरिटी द्वारा गुरुद्वारों में छापेमार कार्रवाई का सिख संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। एक बयान में सिख अमेरिकन लीगल डिफेंस एंड एजुकेशन फंड ने संवेदनशील जगहों जैसे पूजास्थलों, स्कूल आदि में तलाशी की आलोचना की। संगठन ने कहा कि गुरुद्वारे सिर्फ पूजा की जगह ही नहीं हैं बल्कि ये सामुदायिक भवन है, जो सिखों और अन्य समुदायों की मदद करते हैं। इस तरह गुरुद्वारों को निशाना बनाने से पूरे सिख समुदाय में नाराजगी पैदा होगी। एक अन्य संगठन ने कहा कि बिना वारंट या वारंट के साथ भी गुरुद्वारों की निगरानी करना अस्वीकार्य है। ये हमारी आस्था पर हमला है और इससे धार्मिक क्रियाकलाप प्रभावित होंगे। सहयोग न करने वाले देशों पर लगाएंगे प्रतिबंध अमेरिकी संसद के निचले सदन के स्पीकर माइक जॉनसन ने चेतावनी दी है कि जो भी देश अमेरिका से निर्वासित हुए अपने नागरिकों को वापस लेने में सहयोग नहीं करेगा, उस पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे। गौरतलब है कि ट्रंप सरकार ने अमेरिका से अवैध अप्रवासियों को निर्वासित करना शुरू कर दिया है। कोलंबिया ने पूर्व में अपने निर्वासित नागरिकों को वापस भेजने के अमेरिका के तरीके से नाराजगी जाहिर करते हुए अपने नागरिकों को वापस लेने से मना कर दिया था। जिसके बाद ट्रंप सरकार ने कोलंबिया पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का निर्देश दिया तो कोलंबिया की सरकार ने यू-टर्न लेते हुए अपने निर्वासित नागरिकों को वापस लेने का फैसला किया।
पीएम मोदी को मिला कुवैत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान; ‘द ऑर्डर ऑफ मुबारक अल कबीर’ से हुए सम्मानित
कुवैत सिटी/नई दिल्ली, 22 दिसंबर: कुवैत में प्रधानमंत्री मोदी को वहां के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया है। कुवैत के अमीर अमीर शेख मेशाल अल-अहमद अल-जबर अल सबा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘द ऑर्डर ऑफ मुबारक अल कबीर’ से सम्मानित किया। पीएम मोदी कुवैत के दो दिवसीय दौरे पर हैं। इससे पहले 19 देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित कर चुके हैं। इस लिस्ट में शुमार होने वाला यह 20वां देश है। पीएम मोदी को यह सम्मान भारत और कुवैत के बीच अच्छे संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को यह पुरस्कार दिया गया है। ‘द ऑर्डर ऑफ मुबारक अल कबीर’ मित्रता के संकेत के रूप में राष्ट्राध्यक्षों और विदेशी संप्रभुओं और विदेशी शाही परिवारों के सदस्यों को प्रदान किया जाता है। पीएम मोदी से पहले बिल क्लिंटन, प्रिंस चार्ल्स और जॉर्ज बुश जैसे विदेशी नेताओं को भी ‘द ऑर्डर ऑफ मुबारक अल कबीर’ प्रदान किया जा चुका है। बीते माह इन देशों ने किया था पीएम मोदी को सम्मानित इससे पहले पिछले महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुयाना और बारबाडोस ने पीएम मोदीको अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया था। गुयाना ने पीएम मोदी को सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान- द ऑर्डर ऑफ एक्सीलेंस से सम्मानित किया था, वहीं बारबाडोस में पीएम मोदी को प्रतिष्ठित ऑनररी ऑर्डर ऑफ फ्रीडम ऑफ बारबाडोस सम्मान दिया गया था। डोमिनिका ने भी उन्हें हाल ही में सर्वोच्च सम्मान दिया था। किन-किन देशों से मिल चुका है पीएम मोदी को सम्मान वैश्विक स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता सर्वाधिक है। एक सर्वे में उन्हें सबसे लोकप्रिय नेता करार दिया गया था। इतना ही नहीं कई देश भी उन्हें अपने सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित कर चुके हैं। क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर उनके नेतृत्व के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2014 से अब तक 20 देशों के सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कारों समेत संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च पर्यावरण पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। अफगानिस्तान और फिलिस्तीन से भी पीएम मोदी हो चुके हैं सम्मानित बता दें कि पीएम मोदी को साल 2016 में अफगानिस्तान द्वारा स्टेट ऑर्डर ऑफ गाजी अमीर अमानुल्लाह खान, फरवरी 2018 में फिलिस्तीन द्वारा ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन, अक्तूबर 2018 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा यूएन चैंपियन ऑफ द अर्थ अवार्ड दिया गया था। वहीं, अप्रैल 2019 में यूएई द्वारा ऑर्डर ऑफ जायद और अप्रैल 2019 में ही रूस द्वारा ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू अवार्ड से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा, पीएम मोदी को जून 2019 में मालदीव से ऑर्डर ऑफ द डिस्टिंग्विश्ड रूल ऑफ इज़ुद्दीन, अगस्त 2019 में बहरीन द्वारा किंग हमाद ऑर्डर ऑफ द रेनेसां, दिसंबर 2020 में अमेरिका द्वारा लीजन ऑफ मेरिट, दिसंबर 2021 में भूटान द्वारा ऑर्डर ऑफ द ड्रैगन किंग और इस साल मई में फिजी द्वारा ऑर्डर ऑफ फिजी और पापुआ न्यू गिनी द्वारा ऑर्डर ऑफ लोगोहू से सम्मानित किया गया था। मिस्र ने भी पीएम को दिया है सर्वोच्च राजकीय सम्मान वहीं, पिछले साल जून में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने प्रधानमंत्री मोदी को ‘ऑर्डर ऑफ द नाइल’ पुरस्कार से सम्मानित किया। यह मिस्र का सर्वोच्च राजकीय सम्मान है। मई 2023 में पापुआ न्यू गिनी द्वारा कंपेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ लोगोहू, मई 2023 में कंपेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी, मई 2023 में पलाऊ गणराज्य द्वारा एबाकल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। पुरस्कार देने में फ्रांस और रूस ने भी नहीं छोड़ी है कोई कसर जुलाई 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फ्रांस ने लीजन ऑफ ऑनर से सम्मानित किया। यह फ्रांस का सर्वोच्च सम्मान है। पीएम मोदी यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। लीजन ऑफ ऑनर दुनिया भर के चुनिंदा प्रमुख नेताओं और प्रतिष्ठित हस्तियों को दिया गया है। इनमें दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला, वेल्स के तत्कालीन राजकुमार किंग चार्ल्स, जर्मनी की पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव बुट्रोस बुट्रोस-घाली समेत अन्य शामिल हैं। बीते जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रूस के सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्र्यू एपोस्टल’ से सम्मानित किया गया।
भारत में दुनिया की स्किल कैपिटल बनने और स्किल डिमांड पूरा करने का सामर्थ्य: प्रधानमंत्री
कुवैत सिटी/नई दिल्ली, 21 दिसंबर: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत आज दुनिया की स्किल कैपिटल बनने और स्किल डिमांड को पूरा करने का सामर्थ्य रखता है। भारत के स्टार्टअप और फिनटेक हेल्थ केयर से लेकर स्मार्ट सिटीज और ग्रीन टेक्नोलॉजी तक कुवैत की हर जरूरत के लिए कटिंग एज सॉल्यूशन बना सकते हैं। भारत का स्लिड यूथ कुवैत की फ्यूचर जर्नी को भी नए स्ट्रेंथ दे सकता है। प्रधानमंत्री आज दो दिवसीय यात्रा पर कुवैत पहुंचे जहां उनका गर्म जोशी से स्वागत किया गया। इस दौरान भारतीय समुदाय से जुड़े लोगों ने उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री ने यहां भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए बताया कि भारत सरकार विदेश में काम करने वाले भारतीयों के कल्याण के लिए विभिन्न देशों के साथ समझौते कर रही है। ई-माइग्रेट मंच के माध्यम से विदेशी कंपनियों और पंजीकृत एजेंट को एक साथ लाकर प्रभावी जनशक्ति समाधान दिया जा रहा है। पिछले 5 वर्षों में इस पोर्टल के माध्यम से हजारों लोगों को खाड़ी देशों में रोजगार मिला है। प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत-कुवैत के बीच संस्कृति और वाणिज्य के माध्यम से बने संबंध आज नई ऊंचाइयां छू रहे हैं। कुवैत भारत का एक महत्वपूर्ण ऊर्जा और व्यापार भागीदार है। कुवैती कंपनियां भारत में बड़ा निवेश कर रही हैं। कुवैत और भारत के नागरिकों ने संकट के समय में हमेशा एक दूसरे की मदद की है। प्रधानमंत्री ने इस बात का विशेष उल्लेख किया कि 43 साल बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री कुवैत की यात्रा कर रहा है उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान से यहां आने में 4 घंटे लगते हैं लेकिन प्रधानमंत्री को आने में चार दशक लग गए। प्रधानमंत्री ने स्थानीय भारतीय समुदाय की सराहना की और कहा कि वह उनकी उपलब्धियां को सेलिब्रेट करने आए हैं। कुवैती नेतृत्व भी भारतीयों के योगदान को की प्रशंसा करता है। उन्होंने कहा कि भारत उन चुनिंदा देशों में है जिन्होंने कुवैत को स्वतंत्रता मिलने के बाद मान्यता दी थी। कोविड के दौरान कुवैत ने भारत को लिक्विड ऑक्सीजन सप्लाई किया और उस दौरान कुवैत को वैक्सीन और मेडिकल टीम भेजकर भारत ने भी लड़ने का साहस दिया। अपनी कुवैत यात्रा के पहले कार्यक्रम के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगभग 1500 भारतीय नागरिकों के कार्यबल के साथ कुवैत के मीना अब्दुल्ला क्षेत्र में एक श्रमिक शिविर का दौरा किया। प्रधानमंत्री ने भारत के विभिन्न राज्यों के विभिन्न वर्गों के भारतीय श्रमिकों के साथ बातचीत की और उनकी कुशलक्षेम पूछी। विदेश मंत्रालय के अनुसार श्रमिक शिविर का दौरा प्रधानमंत्री द्वारा विदेशों में भारतीय श्रमिकों के कल्याण को दिए गए महत्व का प्रतीक है। पिछले कुछ वर्षों में, सरकार ने विदेशों में भारतीय श्रमिकों के कल्याण के लिए ई-माइग्रेट पोर्टल, मदद पोर्टल और उन्नत प्रवासी भारतीय बीमा योजना जैसी कई प्रौद्योगिकी-आधारित पहल की हैं।
असद की सरकार गिरी, सीरिया का काला युग बीता: बहरा
दमिश्क, 08 दिसंबर: सीरिया में विपक्षी गठबंधन के नेता हादी अल-बहरा ने कहा है कि राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार गिर गयी है और इसके साथ ही सीरिया के इतिहास का एक काला युग बीत चुका है। श्री बहरा ने अरबी समाचार संगठन अल-अरबिया से बातचीत में यह जानकारी दी। बीबीसी ने बताया कि नेशनल कोलिशन फॉर सीरियन रिवोल्यूशन एंड अपोजिशन फोर्सेज के नेता बहरा ने जनता को आश्वासन दिया है कि दमिश्क सुरक्षित है। श्री बहरा ने ‘एक्स’ पर लिखा, “सभी संप्रदायों और धर्मों के हमारे लोगों के लिए संदेश है कि जब तक आप किसी अन्य नागरिक के खिलाफ हथियार नहीं उठाते हैं और जब तक आप अपने घरों में रहते हैं, तब तक आप सुरक्षित हैं। बदला या प्रतिशोध के कोई मामले नहीं होंगे और मानवाधिकारों का कोई उल्लंघन नहीं होगा। लोगों की गरिमा का सम्मान किया जाएगा और उनकी गरिमा को बनाये रखा जाएगा।” रिपोर्ट के अनुसार, सीरिया के प्रधानमंत्री मोहम्मद गाजी अल-जलाली ने कहा कि वह लोगों द्वारा चुने गए नेतृत्व के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं। मोहम्मद गाजी अल-जलाली ने सोशल मीडिया पर प्रसारित एक भाषण में यह भी कहा कि सीरिया एक सामान्य देश हो सकता है जो अपने पड़ोसियों और दुनिया के साथ अच्छे संबंध बनाता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले डेढ़ सप्ताह में विद्रोही बलों की ओर से प्रमुख शहरों में सफल आक्रमण शुरू करने पर सीरियाई लोग खुशी से झूम रहे हैं। रविवार को, दमिश्क में भी जश्न के ऐसे ही दृश्य देखे गए, जब विद्रोही अंदर घुसे और राष्ट्रपति बशर अल-असद के भाग जाने की सूचना मिली। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विपक्षी लड़ाकों द्वारा हवाई अड्डे पर कब्जा करने से कुछ ही क्षण पहले ओपन-सोर्स फ्लाइट ट्रैकर्स ने सीरिया के हवाई क्षेत्र में एक विमान की गतिविधि रिकॉर्ड की। रिपोर्ट में कहा गया है कि उड़ान संख्या सीरियन एयर 9218 वाला इल्युशिन 76 विमान दमिश्क से उड़ान भरने वाला अंतिम विमान था। पहले यह पूर्व की ओर उड़ा, फिर उत्तर की ओर मुड़ गया। कुछ मिनट बाद, होम्स के ऊपर चक्कर लगाते ही इसका सिग्नल गायब हो गया। दावे किये जा रहे हैं कि श्री असद विमान में सवार होकर दमिश्क से किसी अज्ञात स्थान के लिए रवाना हो गये हैं।
मोदी ने गुयाना को दिया, लोकतंत्र प्रथम-मानवता प्रथम” का मंत्र
जॉर्जटाउन/नई दिल्ली, 22 नवंबर : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुयाना को मौजूदा विश्व में आगे बढ़ने के लिये “लोकतंत्र प्रथम-मानवता प्रथम” का मंत्र देते हुए कहा कि इससे सबको साथ लेकर सबका विकास करते हुए मानवता का हित करना संभव होता है। श्री मोदी गुयाना की संसद के एक विशेष अधिवेशन को संबोधित करते हुए यह मंत्र दिया। इस मौके पर संसद के अध्यक्ष मंजूर नादिर, उप राष्ट्रपति भरत जगदेव, प्रधानमंत्री मार्क एंथनी फिलिप्स, नेता प्रतिपक्ष, चांसलर ऑफ द ज्यूडिशियरी भी उपस्थित थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के प्रयासों के बीच, हमें आज वैश्विक परिस्थितियों पर भी लगातार नजर ऱखनी है। जब भारत और गयाना आजाद हुए थे, तो दुनिया के सामने अलग तरह की चुनौतियां थीं। आज 21वीं सदी की दुनिया के सामने, अलग तरह की चुनौतियां हैं। दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनी व्यवस्थाएं और संस्थाएं,ध्वस्त हो रही हैं, कोरोना के बाद जहां एक नई वैश्विक व्यवस्था की तरफ बढ़ना था, दुनिया दूसरी ही चीजों में उलझ गई, इन परिस्थितियों में,आज विश्व के सामने, आगे बढ़ने का सबसे मजबूत मंत्र है-“लोकतंत्र प्रथम—मानवता प्रथम”। “लोकतंत्र प्रथम” की भावना हमें सिखाती है कि सबको साथ लेकर चलो,सबको साथ लेकर सबके विकास में सहभागी बनो। “मानवता प्रथम” की भावना हमारे निर्णयों की दिशा तय करती है, जब हम मानवता प्रथम को अपने निर्णयों का आधार बनाते हैं, तो नतीजे भी मानवता का हित करने वाले होते हैं। श्री मोदी ने कहा कि हमारी लोकतांत्रिक मूल्य इतने मजबूत हैं कि विकास के रास्ते पर चलते हुए हर उतार-चढ़ाव में हमारा संबल बनती हैं। एक समावेशी समाज के निर्माण में लोकतंत्र से बड़ा कोई माध्यम नहीं। नागरिकों का कोई भी मत-पंथ हो, उसका कोई भी बैकग्राउंड हो, लोकतंत्र हर नागरिक को उसके अधिकारों की रक्षा की,उसके उज्जवल भविष्य की गारंटी देती है। और हम दोनों देशों ने मिलकर दिखाया है कि लोकतंत्र सिर्फ एक कानून नहीं है,सिर्फ एक व्यवस्था नहीं है, हमने दिखाया है कि लोकतंत्र हमारे डीएनए में है, हमारे विजन में है, हमारे आचार-व्यवहार में है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी मानव केन्द्रित कार्यशैली,हमें सिखाती है कि हर देश के नागरिक उतने ही अहम हैं, इसलिए, जब विश्व को एकजुट करने की बात आई, तब भारत ने अपनी जी-20 अध्यक्षता के दौरान ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ का मंत्र दिया। जब कोरोना का संकट आया, पूरी मानवता के सामने चुनौती आई, तब भारत ने ‘एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य’ का संदेश दिया। जब जलवायु से जुड़ी चुनौतियों में हर देश के प्रयासों को जोड़ना था, तब भारत ने वन वर्ल्ड, वन सन, वन ग्रिड का विजन रखा, जब दुनिया को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हुए, तब भारत ने सीडीआरआई यानि कोएलिशन फॉर डिज़ास्टर रेज़ीलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर की पहल शुरू की। जब दुनिया में पृथ्वी प्रेमी लोगों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार करना था, तब भारत ने मिशन लाइफ जैसा एक वैश्विक आंदोलन शुरु किया। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र प्रथम—मानवता प्रथम” की इसी भावना पर चलते हुए, आज भारत विश्वबंधु के रूप में विश्व के प्रति अपना कर्तव्य निभा रहा है। दुनिया के किसी भी देश में कोई भी संकट हो, हमारा ईमानदार प्रयास होता है कि हम फर्स्ट रिस्पॉन्डर बनकर वहां पहुंचे। आपने कोरोना का वो दौर देखा है, जब हर देश अपने-अपने बचाव में ही जुटा था। तब भारत ने दुनिया के डेढ़ सौ से अधिक देशों के साथ दवाएं और वैक्सीन्स शेयर कीं। मुझे संतोष है कि भारत, उस मुश्किल दौर में गयाना की जनता को भी मदद पहुंचा सका।” श्री मोदी ने कहा कि दुनिया में जहां-जहां युद्ध की स्थिति आई,भारत राहत और बचाव के लिए आगे आया। श्रीलंका हो, मालदीव हो, जिन भी देशों में संकट आया, भारत ने आगे बढ़कर बिना स्वार्थ के मदद की, नेपाल से लेकर तुर्की और सीरिया तक, जहां-जहां भूकंप आए, भारत सबसे पहले पहुंचा है। यही तो हमारे संस्कार हैं, हम कभी भी स्वार्थ के साथ आगे नहीं बढ़े, हम कभी भी विस्तारवाद की भावना से आगे नहीं बढ़े। हम संसाधनों पर कब्जे की, संसाधनों को हड़पने की भावना से हमेशा दूर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं मानता हूं, अंतरिक्ष हो, समुद्र हो, ये सार्वभौमिक टकराव के नहीं बल्कि सार्वभौमिक सहयोग के विषय होने चाहिए। दुनिया के लिए भी ये समय, टकराव का नहीं है, ये समय, टकराव पैदा करने वाले कारणों को पहचानने और उनको दूर करने का है। आज आतंकवाद, ड्रग्स, साइबर अपराध, ऐसी कितनी ही चुनौतियां हैं, जिनसे मुकाबला करके ही हम अपनी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संवार पाएंगे। और ये तभी संभव है, जब हम लोकतंत्र प्रथम मानवता प्रथम को केन्द्रीय स्थान देंगे।” प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने हमेशा सिद्धांतों के आधार पर, भरोसे और पारदर्शिता के आधार पर ही अपनी बात की है। एक भी देश, एक भी क्षेत्र पीछे रह गया, तो हमारे वैश्विक लक्ष्य कभी हासिल नहीं हो पाएंगे। तभी भारत कहता है – हर देश महत्वपूर्ण है! इसलिए भारत, द्वीपीय देशों को छोटे द्वीपीय देश नहीं बल्कि बड़े महासागरीय देश मानता है। इसी भाव के तहत हमने हिन्द महासागर से जुड़े द्वीपीय देशों के लिए सागर प्लेटफॉर्म बनाया। हमने प्रशांत महासागर के देशों को जोड़ने के लिए भी विशेष फोरम बनाया है। इसी नेक नीयत से भारत ने जी-20 की अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को जी-20 में शामिल कराकर अपना कर्तव्य निभाया। उन्होंने कहा कि आज भारत, हर तरह से वैश्विक विकास और शांति के पक्ष में खड़ा है, इसी भावना के साथ आज भारत, ग्लोबल साउथ की भी आवाज बना है। भारत का मत है कि ग्लोबल साउथ ने अतीत में बहुत कुछ भुगता है। हमने अतीत में अपने स्वभाव औऱ संस्कारों के मुताबिक प्रकृति को सुरक्षित रखते हुए प्रगति की। लेकिन कई देशों ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हुए अपना विकास किया। आज जलवायु परिवर्तन की सबसे बड़ी कीमत, ग्लोबल साउथ के देशों को चुकानी पड़ रही है। इस असंतुलन से दुनिया को निकालना बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा, “भारत हो, गयाना हो, हमारी भी विकास की आकांक्षाएं हैं, हमारे सामने अपने लोगों के लिए बेहतर जीवन देने के सपने हैं। इसके लिए ग्लोबल साउथ की एकजुट आवाज़ बहुत ज़रूरी है। ये समय ग्लोबल साउथ के देशों के नवजागरण का
स्पेसएक्स ने स्टारशिप की छठी परीक्षण उड़ान लॉंच की
लॉस एंजिल्स, 20 नवंबर: स्पेसएक्स ने अपने विशाल स्टारशिप रॉकेट की छठी परीक्षण उड़ान लाँच की है। स्टारशिप ने अमेरिका के राज्य टेक्सास में ब्राउन्सविले के पास कंपनी की स्टारबेस सुविधा से मंगलवार को 04:01 बजे केंद्रीय समय पर उड़ान भरी। स्टारशिप के रैप्टर इंजन हॉट-स्टेजिंग सेपरेशन के दौरान प्रज्वलित हुए। लिफ्टऑफ के कई मिनट बाद सुपर हैवी बूस्टर ने अपनी लैंडिंग बर्न शुरू की और मैक्सिको की खाड़ी में धीरे-धीरे नीचे गिरा। स्टारशिप रॉकेट ने पहली बार अंतरिक्ष में रहते हुए अपने रैप्टर इंजनों में से एक को सफलतापूर्वक प्रज्वलित किया। लॉन्च के लगभग एक घंटे और पांच मिनट बाद रॉकेट हिंद महासागर में उतरा। स्पेसएक्स के अनुसार नए परीक्षण के उद्देश्यों में सुपर हैवी बूस्टर को एक बार फिर से पकड़ने के लिए लॉन्च स्थल पर वापस लौटना, अंतरिक्ष में रहते हुए जहाज के रैप्टर इंजन को फिर से चालू करना और हीट शील्ड प्रयोगों के एक सेट का परीक्षण करना और जहाज के पुनः प्रवेश और हिंद महासागर के ऊपर उतरने के लिए पैंतरेबाज़ी में बदलाव करना शामिल है। स्पेसएक्स ने हालांकि योजना के अनुसार बूस्टर को लॉन्च साइट पर वापस नहीं लाया। इसके बजाय स्पेसएक्स ने जहाज के सुपर हैवी बूस्टर को मैक्सिको की खाड़ी में उतारने का विकल्प चुना। इसका कारण अभी भी स्पष्ट नहीं है। स्पेसएक्स का स्टारशिप रॉकेट एक पूरी तरह से पुन: प्रयोज्य परिवहन प्रणाली का प्रतिनिधित्व करता है जिसे चालक दल और कार्गो दोनों को पृथ्वी की कक्षा, चंद्रमा, मंगल और उससे आगे ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। स्पेसएक्स ने 13 अक्टूबर को अपने विशाल स्टारशिप रॉकेट की पांचवीं परीक्षण उड़ान पूरी की जिससे पहली बार लॉन्च पैड पर अपने बूस्टर को वापस लाया जा सका। विशाल धातु के पिंसर्स की एक जोड़ी जिसे स्पेसएक्स ‘चॉपस्टिक्स’ कहता है ने सुपर हैवी बूस्टर को हवा में सफलतापूर्वक पकड़ लिया। स्पेसएक्स का लक्ष्य विभिन्न परीक्षण उड़ानों के माध्यम से भविष्य के मिशनों के लिए सुपर हैवी बूस्टर और स्टारशिप अंतरिक्ष यान को पुनः प्राप्त करना और तेजी से पुनः उड़ाना है। कार्गो या मानवयुक्त जहाजों को अंतरिक्ष में ले जाने के समय और लागत को काफी कम करने के लिए रॉकेट के पुर्जों का शीघ्रता से पुनः उपयोग करना आवश्यक माना जाता है।
गुयाना में भारतीय समुदाय ने प्रधानामंत्री का किया शानदार स्वागत, पीएम मोदी बोले- ‘शुक्रिया’
जॉर्जटाउन, 20 नवंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन देशों की अपनी यात्रा के अंतिम चरण में जॉर्जटाउन पहुंचने पर गुयाना में भारतीय समुदाय के उत्साहपूर्ण स्वागत के लिए उनके प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “गुयाना में भारतीय समुदाय के लोगों का उनके गर्मजोशी भरे और जोशीले स्वागत के लिए हार्दिक धन्यवाद। उन्होंने दिखा दिया कि अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए दूरी कभी बाधा नहीं बनती। यहां समुदाय के लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाते देखकर खुशी हुई।” इसके साथ ही, कई देशों के नेताओं ने भी होटल में पहुंचने पर प्रधानमंत्री का स्वागत किया। उन्हें गहरे द्विपक्षीय रिश्तों के प्रतीक के रूप में ‘की टू द सिटी ऑफ जॉर्जटाउन (जॉर्जटाउन शहर की चाबी)’ सौंपी गई। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा, “होटल पहुंचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गुयाना के राष्ट्रपति मोहम्मद इरफान, ग्रेनेडा के प्रधानमंत्री डिकॉन मिशेल, बारबाडोस की प्रधानमंत्री मिया अमोर मोटले और गुयाना के कई कैबिनेट मंत्रियों ने विशेष स्वागत किया। प्रधानमंत्री को जॉर्जटाउन के मेयर ने ‘जॉर्जटाउन शहर की चाबी’ सौंपी, जो भारत-गुयाना के घनिष्ठ संबंधों का प्रमाण है।” इससे पहले, देश में पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का गुयाना के राष्ट्रपति मोहम्मद इरफान अली, प्रधानमंत्री मार्क एंथनी फिलिप्स और वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों ने उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति अली ने गर्मजोशी से गले मिलकर व्यक्तिगत तौर से पीएम मोदी का स्वागत किया, जो दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स लिखा, “कुछ समय पहले गुयाना पहुंचा हूं। राष्ट्रपति डॉ. इरफान अली, प्रधानमंत्री मार्क एंथनी फिलिप्स, वरिष्ठ मंत्रियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों का आभार, जो मुझे एयरपोर्ट पर लेने आए। मुझे विश्वास है कि यह यात्रा हमारे देशों के बीच मित्रता को और गहरा करेगी।” यह ऐतिहासिक यात्रा 56 वर्षों में दक्षिण अमेरिकी राष्ट्र में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा है, इससे पहले 1968 में इंदिरा गांधी ने भी दक्षिण अमेरिकी राष्ट्र की यात्रा की थी। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुयाना और बारबाडोस ने अपने सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित करने की घोषणा की है। इसके साथ ही उन्हें प्राप्त हुए अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों की कुल संख्या 19 हो जाएगी। गुयाना प्रधानमंत्री को ‘द ऑर्डर ऑफ एक्सीलेंस’ प्रदान करेगा, जबकि बारबाडोस उन्हें ‘ऑनरेरी ऑर्डर ऑफ फ्रीडम ऑफ बारबाडोस’ से सम्मानित करेगा।
जी-20: चीन के विदेश मंत्री से मिले एस जयशंकर, सीमा समझौते के बाद पहली मुलाकात
रियो डी जेनेरियो/नई दिल्ली, 19 नवंबर: विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी ने सोमवार रात रियो डी जेनेरियो में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की। दोनों नेताओं ने सीमा पर तनाव कम करने के बाद द्विपक्षीय संबंधों में अगले कदमों पर चर्चा की। अक्टूबर में भारत और चीन के बीच सीमा पर सैनिकों की वापसी के समझौता होने के बाद यह उनकी पहली मुलाकात थी। जयशंकर ने एक्स पर लिखा कि सोमवार को जी-20 के दौरान हुई बैठक में, ‘भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में हाल ही में हुई सैन्य वापसी पर चर्चा हुई। हमारे द्विपक्षीय संबंधों में अगले कदमों को लेकर विचार किया गया।’ चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने सोमवार को बीजिंग में एक ब्रीफिंग में कहा कि उनका देश ‘रणनीतिक आपसी विश्वास को बढ़ाने’ के लिए तैयार है। दोनों शीर्ष राजनयिकों की यह बातचीत पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कजान में हुई बैठक के बाद हुई है। कजान मीटिंग के बाद दोनों देशों ने सीमा तनाव को कम करने में सफलता हासिल की थी। कजान में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी बैठक के बाद इस बात पर जोर दिया था कि विदेश मंत्री स्तर की बैठक जल्द से जल्द होगी। जयशंकर ने वांग के साथ बैठक से पहले कहा, “कजान में, हमारे नेताओं ने 21 अक्टूबर की समझ को ध्यान में रखते हुए आपसी रिश्तों में अगले कदम उठाने पर आम सहमति बनाई।” उन्होंने कहा, “मुझे यह जानकर खुशी हुई कि जमीनी स्तर पर उस समझ का कार्यान्वयन योजना के अनुसार आगे बढ़ा है।” लिन ने कहा, “चीन दोनों देशों के नेताओं के बीच महत्वपूर्ण आम समझ को आगे बढ़ाने, संचार और सहयोग को बढ़ाने और रणनीतिक आपसी विश्वास को बढ़ाने के लिए भारत के साथ काम करने के लिए तैयार है।” 21 अक्टूबर को भारत ने चीन के साथ सीमा समझौते पर पहुंचने की घोषणा की थी, जिससे लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध समाप्त होने की शुरुआत हुई। अगले दिन समझौते की पुष्टि करते हुए बीजिंग ने कहा कि ‘प्रासंगिक मामलों’ पर समाधान हो गया है और वह समझौते की शर्तों को लागू करने के लिए नई दिल्ली के साथ मिलकर काम करेगा।
जी-20: प्रधानमंत्री मोदी और पीएम मेलोनी की मुलाकात, भारत-इटली ने रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई
रियो डी जेनेरियो/नई दिल्ली, 19 नवंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी इतालवी समकक्ष जॉर्जिया मेलोनी ने ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी महत्व को स्वीकार किया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि सोमवार को द्विपक्षीय बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने अपने सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई। बयान के मुताबिक दोनों नेताओं ने रोम-नई दिल्ली साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए एक ज्वाइंट स्ट्रेटेजिक एक्शन प्लान के साथ-साथ टाइम सेंसिटिव इनिशिएटिव की सीरीज की रूपरेखा तैयार की। प्रधानमंत्री मोदी की इतालवी समकक्ष जियोर्जिया मेलोनी के साथ बातचीत में कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच साझेदारी बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रधानमंत्री ने विस्तार से बताया, “रियो डी जेनेरियो जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मिलकर मुझे खुशी हुई। हमारी बातचीत रक्षा, सुरक्षा, व्यापार और टेक्नोलॉजी में संबंधों को मजबूत बनाने पर केंद्रित रही। हमने संस्कृति, शिक्षा और ऐसे अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के बारे में भी बात की। भारत-इटली की दोस्ती एक बेहतर दुनिया के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।” इतालवी प्रधानमंत्री मेलोनी ने भी एक्स पर पोस्ट किया, “भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर हमेशा बहुत खुशी होती है। रियो डी जेनेरियो में जी-20 शिखर सम्मेलन के अवसर पर भी हमारी मुलाकात हुई।” पीएम मेलोनी ने आगे कहा, “यह बातचीत एक अनमोल अवसर थी, जिसने हमें व्यापार और निवेश, साइंस-टेक्नोलॉजी, स्वच्छ ऊर्जा, अंतरिक्ष, रक्षा, कनेक्टिविटी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में 2025-29 के लिए एक ज्वाइंट स्ट्रेटेजिक एक्शन प्लान की घोषणा के साथ भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करने की अनुमति दी।” इतालवी प्रधानमंत्री ने कहा, “हमने दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं, नागरिकों के लाभ के लिए और लोकतंत्र, कानून के शासन, विकास के साझा मूल्यों के समर्थन में अपनी द्विपक्षीय साझेदारी को और गहरा करने के लिए मिलकर काम करना जारी रखने पर सहमति जताई।”
मोदी को मिला नाइजीरिया का सर्वोच्च सम्मान
आबुजा/नई दिल्ली, 18 नवंबर : नाइजीरिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार को यहां राष्ट्रीय पुरस्कार “ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ नाइजर” से सम्मानित किया, जिससे 55 साल पहले ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ को सम्मानित किया गया था। नाइजीरिया संघीय गणराज्य के राष्ट्रपति बोला अहमद टीनुबू ने स्टेट हाउस में एक समारोह में, भारत-नाइजीरिया संबंधों को बढ़ावा देने में शानदार योगदान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रीय पुरस्कार “ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ नाइजर” से सम्मानित किया। सम्मान पत्र के उद्धरण में कहा गया कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व के तहत, भारत एक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया गया है और उनके परिवर्तनकारी शासन से सभी के लिए एकता, शांति और साझा समृद्धि को बढ़ावा मिला है। पुरस्कार स्वीकार करते समय, प्रधानमंत्री ने इस सम्मान को भारत के लोगों और भारत तथा नाइजीरिया के बीच दीर्घकालिक, ऐतिहासिक मित्रता को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यह मान्यता दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझीदारी और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। श्री मोदी ने आभार प्रकट करते हुए कहा, “नाइजीरिया के राष्ट्रीय पुरस्कार, “ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ नाइजर” से सम्मानित किए जाने पर मैं आपका, नाइजीरिया की सरकार और लोगों का, हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। मैं इस सम्मान को विनम्रता और आदरभाव से स्वीकार करता हूँ। इस सम्मान को 140 करोड़ भारतवासियों और भारत-नाइजीरिया की गहरी मित्रता को समर्पित करता हूँ। ये सम्मान हमें भारत और नाइजीरिया के बीच रणनीतिक साझीदार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रेरित करता रहेगा।” प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और नाइजीरिया के संबंध आपसी सहयोग, सद्भाव और परस्पर सम्मान पर आधारित हैं। दो जीवंत लोकतंत्र और प्रगतिशील अर्थव्यवस्थाओं के रूप में हम मिलकर दोनों देशों के लोगों की भलाई के लिए काम करते रहे हैं। दोनों देशों में सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता हमारी पहचान है, हमारी ताकत है। अफ्रीका में नाइजीरिया की बहुत बड़ी और सकारात्मक भूमिका रही है। अफ्रीका के साथ करीबी सहयोग भारत की उच्च प्राथमिकता रहा है। हमारे सभी प्रयासों में हम नाइजीरिया जैसे मित्र देश के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि भारत और नाइजीरिया भी मिलकर दोनों देशों के लोगों और पूरे अफ्रीका महाद्वीप की समृद्धि के लिए मिलकर आगे बढ़ेंगे। हम करीबी समन्वय के साथ काम करते हुए, ग्लोबल साउथ के हितों और प्राथमिकताओं को महत्व देंगे। प्रधानमंत्री श्री मोदी 1969 के बाद इस पुरस्कार से सम्मानित होने वाले पहले विदेशी नेता हैं। इससे पहले 1969 में ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ को यह पुरस्कार दिया गया था।