नई दिल्ली। भारत में स्थित Embassy of the Islamic Republic of Iran in the Republic of India ने ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Seyyed Ali Khamenei की कथित ‘शहादत’ पर गहरा शोक और दुख व्यक्त किया है। दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर जारी अपने आधिकारिक बयान में इस घटना को अमेरिका और इज़राइल द्वारा किया गया “क्रूर और आपराधिक हमला” बताया है। दूतावास के बयान के अनुसार, आयतुल्ला खामेनेई की मृत्यु अमेरिका और इज़राइल के हमलों के परिणामस्वरूप हुई। बयान में अमेरिका को “अपराधी शासन” और इज़राइल को “ज़ायोनी कब्ज़ाधारी शासन” करार देते हुए कहा गया कि इस “अक्षम्य अपराध” के गंभीर परिणाम सीधे तौर पर इन दोनों देशों पर ही आएंगे और वे इसके लिए पूर्ण रूप से जिम्मेदार होंगे। शोक संवेदनाएं और धार्मिक संदर्भ दूतावास ने अपने संदेश में हज़रत Imam Mahdi (अल्लाह उनकी पुनः उपस्थिति शीघ्र करे), समूचे मुस्लिम उम्मा, ईरान की महान जनता और विश्व के स्वतंत्रता-प्रेमी देशों के प्रति हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त कीं। बयान में कहा गया कि यह क्षति न केवल ईरान बल्कि पूरी इस्लामी दुनिया और स्वतंत्र राष्ट्रों के लिए गहरा आघात है। ‘ईरान का संकल्प अडिग रहेगा’ दूतावास ने अपने वक्तव्य में स्पष्ट किया कि ईरान की जनता पहले की तरह मजबूती, धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ अपने “महान मार्ग” पर आगे बढ़ती रहेगी। बयान में कहा गया कि देश के कार्यों में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आने दिया जाएगा और शहीदों का “पवित्र रक्त” ईरानी जनता के स्वतंत्रता, गरिमा और उच्च आदर्शों की रक्षा के संकल्प को और अधिक मजबूत करेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील भारत स्थित ईरानी दूतावास ने विश्व के स्वतंत्र और न्यायप्रिय देशों से इस घटना की कड़ी निंदा करने और “अवैधता एवं आक्रामकता” के खिलाफ चुप्पी न साधने की अपील की है। बयान में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस “स्पष्ट अपराध” के खिलाफ एकजुट होकर आवाज़ उठानी चाहिए। इस घटनाक्रम के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और कूटनीतिक प्रतिक्रियाओं पर भी अब सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की इजरायली-अमेरिकी हमलों में मौत
मार्च 1, 2026। ईरान के 86-साल के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई अब इस दुनिया में नहीं रहे। ईरानी सरकारी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के मुताबिक, संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई और मिसाइल हमलों के दौरान उन्होंने तेहरान में अपने कार्यालय/कमान केंद्र पर हुए हमले में मौत पाई। इस हमले को संयुक्त रूप से यूएस-इजरायल अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है जिसमें वरिष्ठ राजनैतिक और सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाया गया था। ईरानी राज्य टेलीविजन और सरकारी एजेंसियों ने खामेनेई की मौत की पुष्टि करते हुए 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टियाँ भी घोषित की हैं। बताया गया है कि उनके साथ परिवार के कुछ सदस्य भी हमले में मारे गए। हमले का परिदृश्य और प्रतिक्रिया संयुक्त अमेरिकी-इजरायली मिसाइल और हवाई हमलों को सबसे बड़े अभियान के रूप में पेश किया गया, जिसका उद्देश्य ईरान के सैन्य और नेतृत्व ढांचे को कमजोर करना था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई की मौत की घोषणा करते हुए इसे “इतिहास के सबसे खतरनाक नेताओं में से एक” के अंत के रूप में वर्णित किया और ईरानियों से मौजूदा शासन को बदलने का आह्वान किया। इजरायली प्रधानमंत्री ने भी इस अभियान की पुष्टि की और कहा कि खामेनेई के ठिकानों पर भारी नुकसान हुआ है। खामेनेई का जीवन और सत्ता में सफर अयातुल्ला अली खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल, 1939 को ईरान के मशहद शहर में एक साधारण मौलवी परिवार में हुआ था। उन्होंने बेहद कम उम्र से धार्मिक शिक्षा शुरू की और कुम में अध्ययन के दौरान ही मौलवी बन गए। यहां उनकी मुलाकात इस्लामी क्रांति के मुख्य नेताओं में से एक अयातुल्ला रुहुल्लाह खुमैनी से हुई, जिन्होंने उनके विचारों और राजनीतिक उभरने को गहरा प्रभाव दिया। धीरे-धीरे वे खुमैनी के सबसे भरोसेमंद शागिर्दों में शामिल हुए। खामेनेई ने ईरान-इराक युद्ध, सरकार के निर्देशन और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति जैसे महत्वपूर्ण चरणों को संभाला। 1989 में, अयातुल्ला रुहुल्लाह खुमैनी के μετά उनके निधन के बाद वह ईरान के सुप्रीम लीडर बने, और करीब 36 साल तक इस पद पर रहे — अपनी मृत्यु तक ईरान की राजनीतिक, सैन्य और धार्मिक शक्ति के शीर्ष पर। प्रभाव और आगे क्या? उनकी मौत के साथ ही ईरान में अगले नेतृत्व को लेकर राजनीतिक अस्थिरता और शक्ति संघर्ष की संभावना बढ़ गई है, क्योंकि सुप्रीम लीडर का पद ‘विलायत-ए-फकीह’ — मुख्य धार्मिक विद्वान की भूमिका — पर आधारित है। किसी एक स्पष्ट उत्तराधिकारी की घोषणा अभी तक नहीं हुई है, जिससे रूस, चीन और क्षेत्र के अन्य देशों के साथ संबंधों और मध्य-पूर्व की राजनीतिक स्थिति पर अनिश्चितता बनी हुई है। यह घटना मध्य-पूर्व में तनाव को और बढ़ा सकती है, जिसके व्यापक प्रभाव वैश्विक तेल बाजार, कूटनीति, सुरक्षा तथा अंतरराष्ट्रीय मामलों में अभी उभर रहे हैं।
ईरान में इजराइली–अमेरिकी एयरस्ट्राइक से बढ़ा तनाव: गर्ल्स स्कूल पर हमले में 51 छात्राओं की मौत
तेहरान/मिनाब/वॉशिंगटन/यरुशलम, 28 फरवरी। मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इजराइल और अमेरिका की संयुक्त एयरस्ट्राइक में ईरान के दक्षिणी शहर मिनाब में स्थित एक गर्ल्स स्कूल पर हमला हुआ, जिसमें 51 छात्राओं की मौत की पुष्टि हुई है। यह घटना ईरान में इस सैन्य ऑपरेशन के दौरान हुई पहली आधिकारिक तौर पर पुष्टि की गई मौतें बताई जा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, हमलों की खबर सबसे पहले राजधानी तेहरान से आई और फिर देश के अन्य हिस्सों में भी विस्फोटों की सूचना मिली। मिनाब, जहां यह त्रासदी हुई, वहां ईरान की पैरामिलिट्री फोर्स Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) का एक प्रमुख बेस स्थित है। माना जा रहा है कि हमले का निशाना सैन्य प्रतिष्ठान थे, लेकिन स्कूल के प्रभावित होने से स्थिति और गंभीर हो गई है। तेहरान खाली करने की सलाह बढ़ते खतरे को देखते हुए ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने राजधानी तेहरान के नागरिकों को एहतियातन शहर छोड़ने की सलाह दी है। आधिकारिक बयान में कहा गया, “हालात की वजह से, जहां तक संभव हो शांति बनाए रखते हुए, यदि आप सक्षम हैं तो अन्य शहरों की ओर प्रस्थान करें।” राजधानी के कई इलाकों में धुएं के गुबार देखे गए। शुरुआती हमलों में से कुछ सुप्रीम लीडर Ali Khamenei के दफ्तर के आसपास के क्षेत्रों में हुए। ईरानी मीडिया ने देशभर में धमाकों की पुष्टि की है। ट्रंप और नेतन्याहू के बयान अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरानी जनता से “अपनी किस्मत पर नियंत्रण लेने” और 1979 से सत्ता में मौजूद इस्लामिक नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया। वहीं इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि यह कार्रवाई ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से की गई है। हाल के हफ्तों में क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती और परमाणु समझौते को लेकर बढ़ती बयानबाजी के बीच यह हमला हुआ है। जवाबी हमले और क्षेत्रीय असर हमलों के बाद मिडिल ईस्ट के कई देशों में जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं। बहरीन, कुवैत और कतर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की सूचना है। United Arab Emirates और Iraq ने एहतियातन अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है। समाचार एजेंसी Agence France-Presse (AFP) के अनुसार, रियाद, दोहा और अबू धाबी में भी विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। बहरीन के गृह मंत्रालय ने जुफेयर इलाके से लोगों को निकालना शुरू कर दिया है, जहां अमेरिकी नौसैनिक अड्डा स्थित है। मंत्रालय ने नागरिकों से संबंधित अधिकारियों के साथ सहयोग करने की अपील की है। ईरान का सख्त रुख ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर जारी बयान में कहा कि देश अपने जवाब में “हिचकेगा नहीं”। बयान में कहा गया,“अब समय आ गया है कि हम अपने देश की रक्षा करें और दुश्मन के सैन्य हमले का सामना करें।” विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात काबू में नहीं आए तो यह टकराव व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है। फिलहाल, मिडिल ईस्ट में हालात अत्यंत संवेदनशील बने हुए हैं और दुनिया की निगाहें तेहरान, वॉशिंगटन और यरुशलम पर टिकी हैं।
भारत-कनाडा संबंधों को नई रफ्तार देने पहुंचे पीएम मार्क कार्नी, चार दिवसीय दौरे में रणनीतिक साझेदारी पर होगा फोकस
नई दिल्ली/मुंबई। प्रधानमंत्री Narendra Modi के निमंत्रण पर कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney 2 मार्च तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। प्रधानमंत्री कार्नी शुक्रवार को अपनी पत्नी के साथ विशेष विमान से मुंबई पहुंचे। यह उनकी भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है, जिसे दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने उनके चार दिवसीय दौरे का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया है। कार्यक्रम के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्नी नई दिल्ली और मुंबई में विभिन्न उच्चस्तरीय बैठकों और कार्यक्रमों में भाग लेंगे। उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी प्रस्तावित है, जिसमें व्यापार, निवेश, शिक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने पर जोर यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब भारत और कनाडा दोनों देश अपने द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच हाल के समय में उत्पन्न मतभेदों को पीछे छोड़ते हुए आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में यह दौरा अहम कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री कार्नी की यह यात्रा आपसी विश्वास बहाली और दीर्घकालिक सहयोग की रूपरेखा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उद्योग जगत से संवाद पर विशेष ध्यान अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री कार्नी भारतीय और कनाडाई सीईओ, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, वित्तीय विशेषज्ञों, स्टार्टअप इनोवेटर्स, शिक्षाविदों तथा भारत में सक्रिय कनाडाई पेंशन फंड्स के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य व्यापारिक अवसरों का विस्तार, निवेश को बढ़ावा देना और प्रौद्योगिकी व नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करना है। कनाडा के पेंशन फंड्स पहले से ही भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान निवेश को और प्रोत्साहन देने तथा नई परियोजनाओं पर चर्चा होने की संभावना है। शिक्षा, ऊर्जा और तकनीक पर सहयोग सूत्रों के अनुसार, शिक्षा के क्षेत्र में छात्र आदान-प्रदान, अनुसंधान सहयोग और स्किल डेवलपमेंट को लेकर भी चर्चा होगी। स्वच्छ ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी और जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक मुद्दों पर साझा पहल को आगे बढ़ाने पर भी दोनों देशों के बीच सहमति बन सकती है।
Narendra Modi ने Yad Vashem में अर्पित की श्रद्धांजलि, कहा— “होलोकॉस्ट मानवता के इतिहास का सबसे अंधकारमय अध्याय”
यरूशलम। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने इज़रायल दौरे के दौरान विश्व होलोकॉस्ट स्मृति केंद्र Yad Vashem में पुष्पांजलि अर्पित कर होलोकॉस्ट के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर इज़रायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu भी उनके साथ मौजूद रहे। प्रधानमंत्री ने स्मारक परिसर में स्थित ‘हॉल ऑफ नेम्स’ का भी दौरा किया, जहां होलोकॉस्ट के दौरान पीड़ितों और मृतकों की स्मृतियों को सहेज कर रखा गया है। यह स्थान उन लाखों निर्दोष लोगों की याद को जीवित रखने का प्रतीक है, जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमानवीय अत्याचार झेले और अपने प्राण गंवाए। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि होलोकॉस्ट मानव इतिहास के सबसे भयावह और अंधकारमय अध्यायों में से एक है। यह त्रासदी पूरी मानवता के लिए एक स्थायी चेतावनी है कि घृणा, हिंसा और असहिष्णुता किस प्रकार विनाश का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं हमें मानवता, गरिमा और शांति के मूल्यों को सदा सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देती हैं। प्रधानमंत्री ने इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का इस यात्रा के दौरान साथ देने के लिए आभार व्यक्त किया। दोनों नेताओं ने स्मारक स्थल पर मौन रखकर पीड़ितों के प्रति सम्मान प्रकट किया। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत और इज़रायल के बीच गहरे होते रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है। होलोकॉस्ट स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करना न केवल ऐतिहासिक संवेदनशीलता का प्रदर्शन है, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति और सह-अस्तित्व के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। प्रधानमंत्री की इस यात्रा को भारत-इज़रायल संबंधों में नई ऊर्जा और ऐतिहासिक स्मृतियों के प्रति सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।
जापान के यामानाशी हाइड्रोजन फैसिलिटी पहुंचे सीएम योगी, ग्रीन एनर्जी मॉडल से लिया सतत विकास का मंत्र
लखनऊ/यामानाशी (जापान)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने अपने जापान दौरे के दौरान Yamanashi Hydrogen Facility का दौरा किया और वहां संचालित अत्याधुनिक पावर-टू-गैस (Power-to-Gas) प्रणाली को करीब से देखा। इस अवसर पर उन्होंने ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के क्षेत्र में किए जा रहे अभिनव कार्यों की सराहना की। यामानाशी प्रांत में स्थापित यह हाइड्रोजन सुविधा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से उत्पादित बिजली को हाइड्रोजन गैस में परिवर्तित करने की उन्नत तकनीक पर आधारित है। यह मॉडल न केवल ऊर्जा भंडारण की समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यामानाशी का यह नवाचार सतत ऊर्जा परिवर्तन (Sustainable Energy Transition) की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि भारत जैसे तेजी से विकास कर रहे देश के लिए ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। उत्तर प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन पर विशेष फोकस सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और हरित औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन, ई-मोबिलिटी और स्वच्छ ऊर्जा अवसंरचना को बढ़ावा देने के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आत्मनिर्भरता, तकनीकी नवाचार और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को केंद्र में रखकर प्रदेश में नई ऊर्जा परियोजनाओं को गति दी जा रही है। जापान की उन्नत तकनीकों और अनुभव से सीख लेकर उत्तर प्रदेश में भी हरित ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जाएगा। भारत-जापान सहयोग को नई दिशा मुख्यमंत्री का यह दौरा भारत और जापान के बीच प्रौद्योगिकी एवं ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, ऊर्जा भंडारण और स्वच्छ परिवहन के क्षेत्र में साझेदारी भविष्य में औद्योगिक विकास और जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यामानाशी का मॉडल यह दर्शाता है कि किस प्रकार नवीकरणीय ऊर्जा को प्रभावी ढंग से संग्रहित कर उसे स्वच्छ ईंधन के रूप में उपयोग किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार अब इसी दिशा में ठोस रणनीति बनाकर राज्य को हरित ऊर्जा क्रांति का अग्रदूत बनाने की ओर अग्रसर है। साफ है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि भविष्य की ऊर्जा नीति के लिए एक ठोस विजन का संकेत है—जहां विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ें।
Narendra Modi ने Knesset को किया संबोधित
“7 अक्टूबर की त्रासदी पर भारत इज़राइल के साथ मजबूती से खड़ा है” यरूशलम। भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इज़राइल की संसद Knesset को संबोधित करते हुए भारत-इज़राइल संबंधों को ऐतिहासिक और भावनात्मक बताया। अपने भाषण में उन्होंने 7 अक्टूबर को हुए हमले में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और आतंकवाद के खिलाफ इज़राइल के साथ भारत की एकजुटता दोहराई। प्रधानमंत्री ने कहा, “मेरा जन्म उसी दिन हुआ था जिस दिन भारत ने इज़राइल को आधिकारिक मान्यता दी थी—17 सितंबर 1950। यह संयोग दोनों देशों के रिश्तों की गहराई को दर्शाता है।” उन्होंने कहा कि भारत और इज़राइल के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि साझा मूल्यों, लोकतांत्रिक परंपराओं और पारस्परिक विश्वास पर आधारित हैं। प्रधानमंत्री ने 7 अक्टूबर को हुए हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दिन की त्रासदी ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया। उन्होंने कहा, “मैं भारत के लोगों की ओर से हर उस जान और हर उस परिवार के लिए गहरी संवेदनाएं प्रकट करता हूं जिनकी दुनिया उस बेरहम आतंकवादी हमले में तबाह हो गई। हम आपका दर्द समझते हैं, हम आपके दुख में शामिल हैं।” उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत आतंकवाद के हर रूप और अभिव्यक्ति की कड़ी निंदा करता है और इस कठिन समय में इज़राइल के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, नवाचार और स्टार्ट-अप जैसे क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत-इज़राइल रणनीतिक साझेदारी और सुदृढ़ हुई है तथा दोनों देश मिलकर तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोज रहे हैं। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत और इज़राइल को प्राचीन सभ्यताओं और मजबूत लोकतांत्रिक परंपराओं वाला देश बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने अनेक चुनौतियों के बावजूद लोकतंत्र और मानवाधिकारों की रक्षा की है। अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत-इज़राइल संबंध आने वाले वर्षों में और अधिक ऊंचाइयों को छुएंगे तथा दोनों देश शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए मिलकर कार्य करते रहेंगे।
सिंगापुर में योगी आदित्यनाथ का कूटनीतिक मिशन: निवेश, डिजिटल इकॉनमी और स्किल डेवलपमेंट पर नई साझेदारी
लखनऊ/सिंगापुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने आधिकारिक सिंगापुर दौरे पर हैं, जहां पहले ही दिन उन्होंने सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग से महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस बैठक को भारत-सिंगापुर संबंधों के व्यापक परिप्रेक्ष्य में एक अहम कदम माना जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच “कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप” के तहत उत्तर प्रदेश और सिंगापुर के बीच सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर विस्तृत चर्चा हुई। निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष फोकस बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश में विदेशी निवेश बढ़ाने, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और औद्योगिक परियोजनाओं को गति देने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिंगापुर के निवेशकों को राज्य में उपलब्ध बेहतर कनेक्टिविटी, एक्सप्रेस-वे नेटवर्क, डिफेंस कॉरिडोर और उभरते औद्योगिक क्लस्टर्स की जानकारी दी। सिंगापुर, जो शहरी नियोजन, लॉजिस्टिक्स और स्मार्ट सिटी मॉडल के लिए वैश्विक स्तर पर जाना जाता है, उसके अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता को उत्तर प्रदेश के विकास मॉडल से जोड़ने पर भी चर्चा हुई। उम्मीद जताई जा रही है कि इस साझेदारी से राज्य में नई परियोजनाओं और रोजगार के अवसरों का मार्ग प्रशस्त होगा। स्किल डेवलपमेंट और डिजिटल इकॉनमी में सहयोग वार्ता में युवाओं के कौशल विकास को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी। सिंगापुर के तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण मॉडल को उत्तर प्रदेश में लागू करने की संभावनाओं पर विचार किया गया, ताकि स्थानीय युवाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण मिल सके। डिजिटल इकॉनमी के क्षेत्र में भी सहयोग को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक, स्टार्टअप इकोसिस्टम और ई-गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में संयुक्त पहल की संभावनाओं पर चर्चा हुई। यह पहल उत्तर प्रदेश को डिजिटल नवाचार के केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक हो सकती है। भारत-सिंगापुर संबंधों को नई गति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत-सिंगापुर संबंध लगातार मजबूत हुए हैं और उत्तर प्रदेश इस रणनीतिक साझेदारी का सक्रिय भागीदार बनने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह दौरा राज्य और सिंगापुर के बीच आर्थिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को और सुदृढ़ करेगा।
मोदी का कूटनीतिक दांव: बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान को भारत आने का न्योता
नई दिल्ली/ढाका। दक्षिण एशिया की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम के तहत प्रधानमंत्री Narendra Modi ने बांग्लादेश के नवनियुक्त प्रधानमंत्री Tarique Rahman और उनके परिवार को भारत की आधिकारिक यात्रा के लिए आमंत्रित किया है। यह निमंत्रण दोनों देशों के बीच पारंपरिक मित्रता और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि भारत और बांग्लादेश के संबंध साझा इतिहास, सांस्कृतिक जुड़ाव और जन-से-जन संपर्क पर आधारित हैं। उन्होंने आपसी सहमति से तय समय पर भारत आने का न्योता देते हुए द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। मंगलवार को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। वे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता हैं और उनके नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ है। शपथ ग्रहण समारोह में भारत की ओर से लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने प्रतिनिधित्व किया। उनकी उपस्थिति को दोनों देशों के मजबूत राजनयिक संबंधों का संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निमंत्रण भारत-बांग्लादेश संबंधों में निरंतरता और स्थिरता का संदेश देता है। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। नई सरकार के गठन के बाद यह पहला बड़ा राजनयिक संकेत है, जिससे संकेत मिलता है कि दोनों देश क्षेत्रीय शांति और विकास के लिए मिलकर काम करना चाहते हैं।
इमरान खान की सेहत पर वैश्विक चिंता: 14 पूर्व कप्तानों ने पीएम शहबाज शरीफ को लिखा पत्र, पाक सरकार पर लीपापोती के आरोप
इस्लामाबाद/लंदन। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और विश्व कप विजेता कप्तान Imran Khan की सेहत को लेकर उठ रही चिंताओं ने अब अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले लिया है। भारत के दिग्गज क्रिकेटरों Kapil Dev और Sunil Gavaskar द्वारा इमरान खान की आंखों और स्वास्थ्य को लेकर दिए गए बयानों के बाद पाकिस्तान सरकार की ओर से फिर सफाई सामने आई है। पाकिस्तान के गृह मंत्री ने हालिया बयान में कहा कि इमरान खान की सेहत को लेकर “चिंता की कोई गंभीर बात नहीं है।” हालांकि विपक्ष और क्रिकेट जगत इसे सरकार की “लीपापोती” करार दे रहा है। इससे पहले भी जब पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज Wasim Akram और Waqar Younis ने इमरान खान की तबीयत पर चिंता जताई थी, तब पाकिस्तान के कानून मंत्री ने भी इसी तरह का बयान दिया था। बेटों ने जताई नाराजगी इमरान खान के बेटे कासिम और सुलेमान ने लंदन में अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी से बातचीत में खुलासा किया कि वे पिछले एक वर्ष से पाकिस्तान जाने के लिए वीजा मांग रहे हैं, लेकिन अब तक अनुमति नहीं मिली। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुई बातचीत में इमरान खान अपनी सेहत को लेकर चिंतित नजर आए, जबकि वे आमतौर पर अपने स्वास्थ्य की परवाह नहीं करते थे। यह बयान ऐसे समय आया है जब इमरान खान की सेहत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं और पाकिस्तान सरकार की किरकिरी हो रही है। क्रिकेट जगत का बड़ा हस्तक्षेप इमरान खान के समर्थन में क्रिकेट जगत के 14 पूर्व कप्तानों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif को पत्र लिखकर उनकी सेहत और सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। पत्र लिखने वालों में इंग्लैंड के Michael Atherton, ऑस्ट्रेलिया के Allan Border, Michael Brearley, Greg Chappell, Ian Chappell, Belinda Clark, David Gower, Kim Hughes, Nasser Hussain, वेस्टइंडीज के Clive Lloyd, भारत के Kapil Dev और Sunil Gavaskar, ऑस्ट्रेलिया के Steve Waugh तथा न्यूजीलैंड के John Wright शामिल हैं। इन दिग्गजों ने अपने पत्र में इमरान खान को क्रिकेट जगत की अमूल्य विरासत बताते हुए उनकी सेहत और मानवाधिकारों की रक्षा की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इमरान खान की सेहत का मुद्दा अब केवल पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय छवि से भी जुड़ गया है। क्रिकेट जगत की एकजुटता ने पाकिस्तान सरकार पर नैतिक दबाव बढ़ा दिया है। जहां एक ओर सरकार बार-बार स्थिति सामान्य बताने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्ष और समर्थक इसे “सच्चाई छिपाने का प्रयास” बता रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा पाकिस्तान की राजनीति और कूटनीति दोनों पर असर डाल सकता है।