नई दिल्ली, 25 नवंबर: संस्कार भारती के केंद्रीय कार्यालय ‘कला संकुल’ में हर महीने आयोजित होने वाली मासिक गोष्ठी में इस बार सुप्रसिद्ध रंगकर्मी और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित लोकेन्द्र त्रिवेदी ने “लोकनाट्यों में गुथी हमारी समृद्ध रंग-संगीत परंपरा एवं वर्तमान समय में इसका प्रयोग” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। गोष्ठी की शुरुआत दीप प्रज्वलन और संस्कार भारती के परिचयात्मक गीत से हुई। इसमें संस्कार भारती के वरिष्ठ पदाधिकारियों और शहर के जाने-माने कलाकारों ने भाग लिया।

लोकेन्द्र त्रिवेदी ने अपने व्याख्यान में भारतीय लोकनाट्य परंपरा की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि लोकनाट्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक और नैतिक जड़ों को सुदृढ़ करने का एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने नौटंकी, यक्षगान, भवाई, और तमाशा जैसे लोकनाट्यों के उदाहरण देते हुए इनके संगीत, संवाद और अभिनय शैली की विशिष्टताओं पर चर्चा की।

उन्होंने यह भी बताया कि आधुनिक समय में इन पारंपरिक विधाओं का उपयोग कैसे किया जा सकता है। श्री त्रिवेदी ने इस बात पर बल दिया कि तकनीकी युग में इन प्राचीन विधाओं को संरक्षित और प्रचारित करने के लिए नई पीढ़ी को इनके महत्व से परिचित कराना आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने एक बड़े विषय पर भी सभी का ध्यान आकर्षित किया, जहां उन्होंने बताया कि सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं में आरकाईव के तौर पर अभी भी लोकनाटयों का विशाल संग्रह आम जनता नहीं देख पाई है। उसे देखने की व्यवस्था हमारी समृद्ध विरासत को और धनी बना सकती है। गोष्ठी के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें उपस्थित दर्शकों ने अपनी जिज्ञासाओं को व्यक्त किया और श्री त्रिवेदी ने उनकी शंकाओं का समाधान किया।

Rajnish Pandey
A media professional with experience in print and digital journalism, handling news editing and content management with a focus on accuracy and responsible reporting.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *