ज्यादातर पर्यटक अब इको टूरिज्म को महत्ता देते नजर आ रहे हैं। इको टूरिज्म प्रकृति से जुड़ने का अच्छा विकल्प है। ऐसा ही इको टूरिज्म का एक हिस्सा है राजगढ़ का बोधिसत्व कैम्प। यह जगह आर्किड के फूलों की तरह खूबसूरत है। यहां आने के बाद आपको एडवेंचर के साथ प्रकृति से घुलने मिलने का भी भरपूर समय मिलता है। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के छोटे और अनोखे पहाड़ों के शहर राजगढ़ का यह कैम्प अपने आप में बेहद अनोखा है। राजगढ़ आज भी प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों में शामिल नहीं हो पाया है जबकि यहां प्राकृतिक दृश्यों का भरपूर खजाना भरा पड़ा है। हरी-भरी घाटियां, घने जंगल और पहाड़ों से आती ताजी हवाओं का आनंद लेने यहां दूर-दूर से पर्यटक आते हैं।

गांव की खूबसूरत जीवनशैली को दर्शाती यह जगह हर सुविधा से परिपूर्ण है। बिजली और ट्रांसपोर्ट की बेहतरीन सुविधा राजगढ़ में देखने को मिलती है। यहां के शांत वातावरण में आप अपने आप को रिलैक्स कर सकते हैं। चुड़धर चोटी पर चढ़ना चुनौतीपूर्ण होता है। 12 हजार फीट की ऊंचाई पर इस चोटी पर जाने के लिए लोग हाइकिंग जैसे साहसिक खेल का सहारा लेते हैं। कैम्प के पास कल-कल बहती नदी मन को शीतल कर देती है। कैम्प के पास प्राकृतिक वरदान के रूप में दो धाराएं साल भर बहती रहती हैं जिससे इस जगह की खूबसूरती और बढ़ जाती है। कैंप के पास ही घाटी इस जगह को हमेशा ठंडा रखती है। दूर तक फैले देवदार के वृक्ष यहां का तापमान सामान्य रखने में मदद करते हैं।

कैम्प बोधिसत्व में तरह-तरह की एक्टीविटी आपको हफ्तों तक व्यस्त रख सकती है जैसे हाइकिंग, रॉक क्लाइबिंग, रैंपलिंग वगैरह। आप यहां के प्राकृतिक दृश्यों के बीच बर्ड देखने का मजा ले सकते हैं। यहां की हरियाली में इधर-उधर फुदकती चिड़ियों की कई प्रजातियां हमें लुभाती हैं। कैम्प के पास बहती धारा में पर्यटक स्वीमिंग का मजा लेते हैं। इसे स्प्लैश स्वीमिंग कहते हैं।

यहां की घाटियों में छुपे खूबसूरत वाटरफॉल आपको अपने पास से हटने नहीं देंगे। इनकी खूबसूरती देखते बनती है। यहां एक बेहतरीन पिकनिक स्पॉट भी है। इसके अलावा और भी कई चीजें हैं जिसका मजा यहां ले सकते हैं जैसे बैडमिंटन, शतरंज, रोप स्वींग, सांस्कृतिक नृत्य आयोजन वगैरह आपको हर पल व्यस्त रखेंगे।

राजगढ़ के पास ऐसी और भी जगहें हैं जिसे आप देख सकते हैं। जैसे ओछघाट की खूबसूरत मोनेस्ट्री, 40 साल पुराने बॉन-पा मोनेस्ट्री जहां महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था है। 40 किलोमीटर दूर बारू-साहब गुरुद्वारा भी दर्शनीय है। यह सिखों का सबसे पुराना पवित्र स्थान है।

यहां जाने के लिए सड़क व रेल यातायात का इस्तेमाल कर सकते हैं। नजदीकी रेलवे स्टेशन कालका-चंडीगढ़ है। यहां से राजगढ़ के लिए टैक्सी आसानी से मिल जाती है।

Rajnish Pandey
A media professional with experience in print and digital journalism, handling news editing and content management with a focus on accuracy and responsible reporting.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *