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रुपया ‘कमज़ोर’, महंगाई ‘मजबूत’: डॉलर के मुकाबले पहली बार 93 के पार पहुंची भारतीय करेंसी

नई दिल्ली। भारतीय मुद्रा बाजार में शुक्रवार को बड़ा झटका देखने को मिला, जब रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पहली बार 93 के स्तर को पार कर गया। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज में रुपया 92.92 पर खुला और जल्द ही गिरकर 93.08 के स्तर तक पहुंच गया। यह अब तक का ऐतिहासिक निचला स्तर है और इससे पहले बुधवार को रुपया 92.89 पर बंद हुआ था।

हालांकि शेयर बाजार में तेजी का माहौल बना रहा, लेकिन करेंसी मार्केट में रुपये की कमजोरी ने आम आदमी की जेब पर असर डालने के संकेत दे दिए हैं।

रुपये में गिरावट के पीछे क्या हैं कारण?

विशेषज्ञों के अनुसार रुपये की इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं:

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी से भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर दबाव बढ़ा है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली (FPI Outflow)

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाला, जिससे रुपये पर दबाव बना।

डॉलर की मजबूती

डॉलर इंडेक्स 100.25 के स्तर पर पहुंच गया, जो वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती को दर्शाता है।

तेल और डॉलर का ‘डबल अटैक’

ब्रेंट क्रूड की कीमतें हाल ही में 119 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थीं, हालांकि अब इसमें थोड़ी गिरावट आई है और यह करीब 106.9 डॉलर पर कारोबार कर रहा है। फिर भी ऊंची कीमतों का असर भारतीय मुद्रा पर साफ दिख रहा है।

फॉरेक्स ट्रेडर्स का कहना है कि:“तेल की बढ़ती कीमतें और डॉलर की मजबूती रुपये को लगातार कमजोर कर रही हैं, जबकि RBI ही एकमात्र संस्था है जो डॉलर बेचकर गिरावट को सीमित कर रही है।”

शेयर बाजार में राहत, लेकिन करेंसी में संकट

  • सेंसेक्स: 960.67 अंक चढ़कर 75,167.91
  • निफ्टी: 311.50 अंक बढ़कर 23,313.65

शेयर बाजार में रिकवरी देखने को मिली, लेकिन करेंसी मार्केट की गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर?

रुपये की कमजोरी का सीधा असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा:

  • इंपोर्टेड सामान महंगे होंगे
  • पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी संभव
  • विदेश में पढ़ाई और यात्रा महंगी
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और लग्जरी सामान पर असर

ग्लोबल फैक्टर्स भी बढ़ा रहे दबाव

होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने बाजार को और अस्थिर कर दिया है। अमेरिका और यूरोप तेल आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।

क्या आगे और गिरेगा रुपया?

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि फिलहाल रुपये में राहत के संकेत नहीं दिख रहे हैं। मार्च महीने में अब तक विदेशी निवेशकों ने 8 अरब डॉलर से ज्यादा की निकासी की है, जो हाल के समय की सबसे बड़ी बिकवाली में से एक है।

यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और डॉलर मजबूत रहता है, तो आने वाले समय में रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है।

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