नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कतर, जॉर्डन, फ्रांस और ओमान सहित कई देशों के नेताओं से बातचीत कर क्षेत्र में शांति बहाल करने और तनाव कम करने की अपील की है। भारत ने साफ कहा है कि मौजूदा संकट का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है।
बढ़ता तनाव और वैश्विक चिंता
ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। हाल के दिनों में ऊर्जा ठिकानों पर हमलों और जवाबी कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। इस संघर्ष का असर अब वैश्विक स्तर पर दिखाई देने लगा है, जहां तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता का माहौल है।
कई देशों के नेताओं से पीएम की बातचीत
प्रधानमंत्री मोदी ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए कई देशों के शीर्ष नेताओं से फोन पर बातचीत की। इन देशों में Qatar, Jordan, France और Oman प्रमुख हैं।
इन वार्ताओं के दौरान मुख्य रूप से निम्न मुद्दों पर चर्चा हुई:
- क्षेत्र में बढ़ते तनाव को तुरंत कम करने की जरूरत
- किसी भी तरह के सैन्य टकराव से बचने की अपील
- बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देने पर सहमति
भारत का स्पष्ट रुख
भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर संतुलित और स्पष्ट रुख अपनाया है। सरकार ने ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को “अस्वीकार्य” बताया और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की।
प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि:
- शांति और स्थिरता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है
- किसी भी संघर्ष का हल युद्ध नहीं, बल्कि संवाद है
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही स्थायी समाधान संभव है
होर्मुज जलडमरूमध्य पर खास चिंता
इस पूरे संकट के बीच Strait of Hormuz की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है।
- यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है
- यहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है
- किसी भी व्यवधान से पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट गहरा सकता है
भारत ने इस क्षेत्र में “सुरक्षित और निर्बाध नौवहन” की आवश्यकता पर जोर दिया है।
भारत की रणनीति और प्राथमिकताएं
भारत इस संकट में बेहद सावधानी से कदम उठा रहा है।
- किसी भी सैन्य गठबंधन से दूरी बनाए रखी जा रही है
- कूटनीति के जरिए समाधान निकालने पर जोर
- भारतीय नागरिकों और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को प्राथमिकता
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह रुख उसे एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करता है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने शांति और स्थिरता के पक्ष में मजबूत आवाज उठाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक पहल न केवल क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में अहम है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाती है।
