नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव अब खुले संघर्ष में बदलता दिख रहा है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी टकराव ने खाड़ी क्षेत्र को युद्ध के केंद्र में ला दिया है। ताजा घटनाक्रम में ऊर्जा ठिकानों पर हमले ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल-गैस सप्लाई पर गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है।
कैसे शुरू हुआ ताजा संकट
तनाव तब और बढ़ गया जब इजरायल ने ईरान के सबसे बड़े गैस प्रोजेक्ट साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया। यह दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडारों में से एक है।
इस हमले के बाद ईरान ने कड़ा जवाब देते हुए खाड़ी क्षेत्र के कई देशों के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।
कतर में बड़ा हमला
ईरान ने कतर के रास लाफान LNG टर्मिनल पर मिसाइल हमला किया, जो दुनिया के सबसे बड़े LNG (Liquefied Natural Gas) हब में गिना जाता है।
- हमले के बाद वहां आग लग गई और सप्लाई बाधित हुई
- कई अंतरराष्ट्रीय शिपमेंट प्रभावित हुए
- वैश्विक गैस बाजार में तुरंत उथल-पुथल देखने को मिली
खाड़ी देशों में बढ़ा खतरा
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके ऊर्जा ढांचे पर हमले जारी रहे, तो वह सऊदी अरब, यूएई और अन्य खाड़ी देशों के तेल-गैस ठिकानों को भी निशाना बनाएगा। इससे पूरा गल्फ क्षेत्र युद्ध की चपेट में आता दिख रहा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर संकट
सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है।
- दुनिया का लगभग 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है
- ईरान ने यहां सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी हैं
- अगर यह मार्ग बंद होता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हो सकती है
तेल और गैस बाजार में उथल-पुथल
इस संघर्ष का असर तुरंत बाजार पर पड़ा है:
- कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 100–110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं
- यूरोप और एशिया में गैस की कीमतों में उछाल
- शेयर बाजारों में गिरावट और निवेशकों में डर
अमेरिका की भूमिका
अमेरिका ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखी हुई है और इजरायल का समर्थन किया है।
- अमेरिकी नौसेना को खाड़ी क्षेत्र में तैनात किया गया है
- ईरान को चेतावनी दी गई है कि वह अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को बाधित न करे।
क्यों खतरनाक है यह युद्ध
यह संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि:
- इसमें कई देश शामिल हो सकते हैं
- ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है
- वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर हालात नहीं संभले, तो यह संकट “ऊर्जा युद्ध” (Energy War) में बदल सकता है।
ईरान-इजरायल टकराव अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां हर नया हमला दुनिया भर के लिए खतरा बन सकता है। खाड़ी क्षेत्र में जारी यह संघर्ष न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सप्लाई और महंगाई पर भी गहरा असर डाल सकता है।
