पटना: बिहार विधानसभा में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए सोमवार को हुए चुनाव में मतदान प्रक्रिया समाप्त होने के साथ ही राजनीतिक तस्वीर लगभग साफ हो गई। इस चुनाव में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने पांचों सीटों पर जीत दर्ज कर विपक्षी महागठबंधन को बड़ा झटका दिया है। मतदान के दौरान महागठबंधन के चार विधायकों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया, जिससे विपक्ष की एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधायक फैसल रहमान के अलावा कांग्रेस के तीन विधायक—वाल्मीकिनगर से सुरेंद्र कुशवाहा, फारबिसगंज से मनोज विश्वास और मनिहारी से मनोहर प्रसाद—ने मतदान का बहिष्कार कर दिया। इन चार विधायकों की अनुपस्थिति के कारण महागठबंधन को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका और उसके पक्ष में केवल 37 विधायकों के वोट ही पड़े। इसके विपरीत, एनडीए के सभी 202 विधायकों ने पूरी तत्परता के साथ मतदान में हिस्सा लिया।
मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही परिणामों की तस्वीर लगभग स्पष्ट हो गई थी। मतगणना शाम को शुरू हुई और कुछ ही समय बाद औपचारिक रूप से नतीजों की घोषणा कर दी गई। परिणामों के अनुसार, एनडीए के सभी उम्मीदवारों ने जीत हासिल की।
चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, भाजपा के शिवेश कुमार सिंह, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के उपेंद्र कुशवाहा को विधायकों का भरपूर समर्थन मिला। चुनाव परिणामों के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नितिन नबीन को 44-44 वोट प्राप्त हुए। वहीं केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और उपेंद्र कुशवाहा को 42-42 वोट मिले। भाजपा के शिवेश राम को 30 वोट हासिल हुए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महागठबंधन के विधायकों की अनुपस्थिति के पीछे राजनीतिक सौदेबाजी या आंतरिक मतभेद हो सकते हैं। खास तौर पर कांग्रेस के तीन विधायकों द्वारा मतदान में हिस्सा नहीं लेना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इससे विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं।
वहीं राजद विधायक फैसल रहमान की अनुपस्थिति ने भी महागठबंधन के नेतृत्व को असहज स्थिति में डाल दिया है। दूसरी ओर, एनडीए ने अपने सभी विधायकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित कर मजबूत संगठनात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया है।
गौरतलब है कि बिहार विधानसभा में कुल 243 सदस्य हैं, जिनमें से वर्तमान समय में एनडीए के पास 202 विधायकों का मजबूत समर्थन है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव में एनडीए की जीत पहले से ही लगभग तय मानी जा रही थी, लेकिन विपक्षी विधायकों की अनुपस्थिति ने परिणाम को और भी एकतरफा बना दिया।
